Book Title: Jayanti Charitram
Author(s): Malayprabhsuri, Vijayakumudsuri
Publisher: Manivijay Ganivar Granthmala
Catalog link: https://jainqq.org/explore/600402/1

JAIN EDUCATION INTERNATIONAL FOR PRIVATE AND PERSONAL USE ONLY
Page #1 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पं. मणिविजयजी ग्रन्थमाला नं. 12 जयन्तीचरित्रम् प्रकाशिका पं. मणिविजयजी ग्रन्थमाला-लींच RRIA MAASIKASIRAMAIEO ORG YOSAPNAMAS 62522030352 30Sasuyasat 303 2032325555 Page #2 -------------------------------------------------------------------------- ________________ प-पू. पंन्यासश्रीमणिविजयजी गणिवर ग्रन्थमाला नं० 12 श्रीपूर्णिमागच्छीयमानतुंगसूरिशिष्यश्रीमलयप्रभसूरिविरचिता // जयन्तीप्रकरणवृत्तिः जयन्तीचरित्रगर्भिता // संशोधकः-आचार्यमहाराजश्रीविजयकुमुदसूरिः प्रकाशिका:-श्रीगुप्तदानदातृमहाशयवितीर्णद्रव्यसाहाय्येन तथा श्रीथराजैनज्ञानद्रव्यसाहाय्येन च पंन्यासश्रीमणिविजयजीगणिवरग्रन्थमाला / श्रीभावनगरे महोदयमुद्रणालये श्रेष्ठि गुलाबचन्द्रेण लल्लुचन्द्रात्मजेन मुद्रिता प्राप्तिस्थानम्-लींच. (वाया महेसाणा) वीर संवत् 2476 ___ मास्तर म्हालचंद ठाकरसी विक्रम संवत् 2006 Page #3 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्रीदा प्रस्तावना. जयन्ती श्रीजयन्तिप्रकरणवृत्ति नामनो या प्रन्थ जे जयन्तिचरित्र तरीके ओलखाय छे, खंभातताडपत्रीयभंडारमा ताडपत्र उपर प्रकरण लखायेल छे, ते प्राचीन अने रसमय प्राकृतभाषाथी अलंकृत ग्रन्थ मुद्रित करावी विद्वद्जनोना करकमलमा मूकता अमो आनन्द वृतिः / अनुभवीए छीए. आ पन्थना सम्पादक प. पू. आचार्य महाराजश्री विजयकुमुदसूरीश्वरजी छे. परमकपाल तेओश्रीए सं. 1997 // 1 // नुं चतुर्मास खंभात कयु, त्यारे ताडपत्रीय भंडारनुं सूचिपत्र बनावतां एक मनोरथ को हतो के-आ भण्डारना पांच अमूल्य प्रन्थो शोधी मुद्रित कराववा. तेथी प्रथम ताडपत्रीय प्रन्थ उपमितिसारसमुच्चय जीर्णप्रत उपरथी प्रगट कराव्यो, अने बीजो ताडपत्रीय श्री रयणचूडराय परिय प्राकृत ग्रन्थ सतारी शोधी प्रगट कराव्यो, अने बीजो ताडपत्रीय अममचरित्र महाकाव्य दश हजार श्लोकप्रमाण जेमां कृष्णवासुदेवना छ भवोर्नु वर्णन रसमय शैलीथी करवामां आवेल छे ते फक्त एकज ताडपत्रीय प्रत उपरथी उतारी शोधी प्रगट कराव्यो, अने चोथो पासनाहचरिय दश हजार श्लोकप्रमाण अपूर्व प्रन्थ ताडपत्र उपरथी तैयार करी करावी मुद्रित करावी बहार पाडयो, अने पांचमो ग्रन्थ aa जयन्तिचरित्र -जयन्ति प्रकरण विवरण ग्रंथ प्राकृतभाषामय अपूर्व रसवालो ताडपत्र उपरथी उतारी शोधीने मुद्रित कराव्यो छे. आ प्रमाणे श्री आचार्य भगवन्ते पोतानो मनोरथ पूरो कर्योतेथी अमो वधारे हर्षने अनुभविए छीए. महासती जयन्ति कोण हता ? एवो प्रश्न स्वाभाविक रीते वांचकना हृदयमा उत्पन्न थाय ? तो उत्तरमा जणाववान के-. जयन्ती महासती बच्छदेश कौशाम्बीनगरीना राजा सहस्रानीकनी पुत्री अने शतानीक राजना भगिनी अने सेना पुत्र उदयन राजानी // 1 // Page #4 -------------------------------------------------------------------------- ________________ उ LOCIAAAAAAAC5% फोइ हता. जीवाजीवादिकतत्वना अभ्यासी महानद्धालु हता. प्रभुश्रीवीरना शासनमा साधुओने उतरवा वस्ति आपनार होबाथी प्रथमशय्यातरी तरीके प्रसिद्धिने पाम्या हता, भगवान् महावीरदेव ज्यारे कौशाम्बीनगरी पधार्या त्यारे श्री उदयराजे महाविभूलिए भगवान सामैयु कयु ते वखते उदयनराजानी साथे पोतानी माता मृगावती तथा फुई श्रीजयन्ती महासती समवसरणमा जई भगवानने वांद्या अने भगवन्तनी पावनकारी धर्मदेशना श्रवण करीने हृदयमां जीवविषयक जे संशयो उत्पन्न थया ते भगवन्तने पूछया. भगवन्ते ते प्रश्नोनो उत्तर आप्यो तेथी पंचमांग श्रीभगवतीसूत्रमा गणधरदेवे बारमा शतकनो बीजो उद्देशो जयन्ति प्रश्नोत्तर तरीके रचेल छे, तेना उपरथी पुनमियागच्छीय श्रीमानतुंगसूरिए जयन्तीप्रकरण उद्धर्यु छे एम प्रकरणकार पोते मूल 28 मी गाथामा जणावे छे. " भगवइबारसमसया वियउद्देसाउ पगरणं एयं / सपरोभयसरणत्थं उद्धरियं माणसूरिहिं // " आ प्रकरणमां नीचे मुजब प्रश्नोत्तरो छे:प्रश्न -जीवो भारेकर्मिपणुं शा कारणथी करे? उत्तर-अढार पापस्थानको सेववाथी करे. प्रश्च २-भव्यपणुं अने अभव्यपणुं स्वाभाविक छ ? के परिणामयी छे ? उत्तर-स्वाभाविक छे. प्रश्न३-जागृतदशा सारी ? के सुप्तदशा के सारी 1 उच्चर-धर्मी जागता सारा, अधर्मी जीवो सुता सारा. प्रश्न-दुर्बलपणु सारं के बलिष्ठपणु सारूं? उत्तर-पापीजीवो दुर्बल सारा धम्मिजीवो बलवान् सारा. प्रश्न ५-दक्षपणुं सारं के बासुपणुं सारं, उचर-पापी दुष्टचित्तजीवो आलम सारा; धर्मश्रद्धालु जागता सारा. RSHASKARISHASTRA Page #5 -------------------------------------------------------------------------- ________________ प्रस्तावना ल जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 2 // SARAWAAAAA प्रश्न-इंद्रिय वश थयेला जीवोने शुं नुकशान ? उत्तर-इन्द्रियलुब्ध जीवो चिकणा कर्मोने बान्धे. आ छट्ठा प्रश्नोत्तरमा पांचे इन्द्रियोना पांच प्रश्नोत्तरो छे तेथी प्रश्नोत्तरनी संख्या 10 थाय छे. जयन्तीप्रकरण उपर श्रीमानतुंगसूरिना शिष्य श्रीमलयप्रभसूरिए अनेकरसमय मधुर विवरण रच्यु, तेमां मुख्य जयन्तिनी कथा अने बीजी अनेक बोधककथाओ रसमय रची छे, तेथी जयन्ति चरित्र तरीके या प्रन्थ प्रसिद्ध छे. मलयप्रभसूरिनो सत्ताकाळ पोते प्रान्ते पुष्पिकामां नीचे मुजब पृ. 321 मां बतावेल छे.. " प्रश्नोत्तरप्रकरणे परिवाराऽभ्यर्थने स्वगुरुभक्त्या। अविभक्तधर्मचन्द्राभिधगणिना भागिनेयेन // 15 // भणितेः श्रीमलयप्रभसूरिभिरेषा विचित्रदृष्टान्तैः / सम्वेगाय यथामति जगति जयन्तीकथा प्रथिता // 16 // द्वादशवर्षशतेषु श्रीविक्रमतो गतेषु षष्टितमे / वर्षे ज्येष्ठे मासे श्रवणगे कृष्णपञ्चम्याम् // 18 // " आ त्रण श्लोकोथी विक्रम सं. 1260 ज्येष्ठवदी 5 श्रवणनक्षत्र श्रीमलयप्रभसूरिनो सत्ताकाल चोकस छे. एटले क्यारे ? अने कोणे रच्यु ते बाबत स्पष्ट थई. आ ग्रन्थनो विषय विभाग हेडींगथी जोई लेवो अने कथा अनुक्रमणिका जुदी तारवी छे ते जोई लेवी. आ प्रन्थमां पृष्ठ 203 मां कपिलकथाना केटलाक श्लोको टक छे तेमज कलहपापस्थाननी कथामां पृ. 222 अने 223 मां पण श्लोको त्रुटक छे तेनुं कारण ते विभागनुं ताडपत्रीय पुस्तक तहन घसाइ गयेल छे तेथी जेटला अक्षरो वंचाणा वेटला दाखल कर्या छे बाकी श्लोको पादो तथा वाक्योने निरुपाये त्रूटता राखवा पच्या छे केमके कोई भंडारमाथी तेनी प्रत मली शकी नहि. आ ग्रन्थ पहेलवहेलो मुद्रित करायो छे माटे वांचको कोई जगोथी जयन्ति कथानी प्रत मेळचे तो ते त्रुटतो विभाग पूरो Page #6 -------------------------------------------------------------------------- ________________ SECRECOROSAROCHORSRACT करी ले एवी विद्वानो प्रत्ये अमारी अभ्यर्थना छे. आ ग्रन्थ मुद्रित कराववा पुण्यवंत उदारदील गुप्तदानेश्वरी महाशये बे हजार रुपीयानी मदद करी छतां असह्य मोघवारी होवाथी केटलाक काल सुधी सोंघवारीनी आशाए काम बन्ध राख्यु, पण सोंघवारी थई नहि पण उलटी मोघवारी खुबज वधी, एटले तैयार करेल ग्रन्थ पड़ी रहेल, ते अमोने असह्य थई पडयु. तेथी अमोए निर्णय कर्यो के.-मोघवारीमा पण ग्रन्थप्रकाशननु कार्य शरु राखवू, एटलामां प. पू. आचार्यभगवन्तनुं चौमासु थरा गाममा नक्की थयु. अमोए जणाव्यु के--जयन्तीचरित्रनुं प्रकाशनकार्य करवानो अमे निश्चय कर्यो छे काम शरु थर्बु जोईए. परमोपकारी श्रीआचार्यभगवन्ते अमारी विनंती स्वीकारी उत्तर आप्यो के--जयन्तीना प्रकाशनकार्यमां धर्मरागी श्री थर जैनसंघज्ञानखातामाथी आठसो रुपीयानी मदद करे छे, तेथी अमो खुश थया. प्रन्थ प्रकाशननुं कार्य शरु कयु, अनुक्रमे ते कार्य पूर्ण करी शक्या, तेथी आ ग्रंथना प्रकाशनकार्यमां मदद करनार पुण्यवंत गुप्तदानेश्वरी महाशयनो तथा श्री थरा जैन संघनो आभार मानीये छीए. अने पू. आचार्यदेवनो उपकार जेटलो मानीए तेटलो ओछो ज छे. केमके आ प्रन्थनुं तमाम काम ते पूज्यश्रीए पूरुं पाडयुं छे. छवटे विद्वान महाशयो प्रते जणावीए | छीए के-आ प्राचीन साहित्यने पठन-पाठनमा लई अमारो अभिलाष पूर्ण करशो. लि. पं. मणिविजयजी गणिवर ग्रन्थमालाकार्यवाहक मास्तर न्हालचंद ठाकरशी मु. लींच (वाया महेसाणा) ता. 25-8-50 Page #7 -------------------------------------------------------------------------- ________________ + जयन्ती प्रकरण // 3 // विपय. 1 चित्रकरकथा .... .... .... २.मृगावतीका 3 अगंगसेनकथा .... 4 शिवजमकथा ५मानाबरणी बन्ध उपर सुस्थिताचार्य 6 अभयदाने मेघकुमारकथा 7 सुपात्रदानोपरि वीरभद्रकथा 8 प्रियदर्शना वृत्तान्तः ... 9 अनंगसुन्दरी स्वरूप .... 10 उचितदानोपरि सोमदेव द्विजकथा.... 11 करुणादामोपरि सम्प्रतिनृपकथा .... 12 सुदर्शनशेठकथा कथानी अनुक्रमाणका. विषय. 7 13 मनोरमा सती ... .... ... 16 | 14 शीलकथापूर्णा .... 23 | 15 तपधर्म उपर अभ्यन्तरतपे निःशल्यताविषयक 39 | अट्टणमल्ल कथा ... 16 विनय उपर कुलपुत्रकथा ... | 17 वैयाषच्च-स्वाध्याय--उपर बाहु सुबाहुसूचन | 18 काउसम्गे चन्द्रावतंसक कथा .... | 19 भावना उपर भरतचक्री कथा .... पापस्थानको उपर कथाओ प्राणिवध विरति उपर बन्धुमतिकथा 97 20 असत्ये वसुराज कथा .... .... .... 103 | 21 अदत्तादाने दुर्ललितगोठीयानी कथा SAMACHAROCCACANCE Page #8 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 4%95445Cॐॐॐ 22 परदारगमने वणिक्खीपुत्र कथा 23 परिग्रहे लोभनन्दी कथा.... 24 क्रोधे प्रसन्नचन्द्रऋषी कथा 25 माने बाहुबलि मुनिवर कथा 26 माया उपर पंडुरा आर्या कथा 27 माया उपर धमश्री कथा बीजी 28 अनंगसुन्दरी वृत्तान्त .... 29 लोभे 'कपिल कथा ... 30 रागे श्रीकान्ता कथा ... 31 द्वेष सपर नन्दनाविककथा 32 धर्मरुचि मुनिवर वृत्तान्तः 33 कलहमा सोमपुरोहितकथा 34 अभ्याख्यान तजवा उपर अंगर्षिकथा 35 अरति उपर खुलककुमार कथा ... 159 | 36 रति उपर ब्रह्मदत्तचक्री कथा 162 | 37 पैशुन्य उपर सुबन्धु मंत्री कथा ... 165 | 38 चाणक्य मंत्री स्वरूप .... 172 | 39 परपरिवादे सुभद्रानी सासु कथा 40 सुभद्रासती वृत्तान्त ... 41 मायामृषावादे कुटक्षपक कथा 42 मिथ्यात्वशल्ये कंडरिक कथा ... 43 भव्यत्वाभव्यस्व प्रभोत्तर .... 44 अभव्य रुद्रदेवनी कथा ... 213 | 45 भव्यजीवरहित लोक थाय के महि ? तेनो युक्तिपूर्वक उत्तर ... 46 वाक्पतिराजनो उत्तर सांभलवाथी बप्प२२७ | भट्टसूपिनो हर्ष .... 23047 सेणे जैनदीक्षा स्वीकारी Page #9 -------------------------------------------------------------------------- ________________ है कथा-अनु क्रमणिका श्री जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 4 // 48 जागतासुता प्रश्नोत्तरमा कालसोकरिक तथा सेडकद्विज कथा .... ... दर्दुर देवे करायेली श्रेणिकराज परीक्षा 49 आर्यरक्षित कथा 50 द्रमक कथा... 51 द्रढप्रहारी कथा 52 नन्दिसेन कथा 53 भद्रासार्थवाही कथा ... 54 बणिपुत्रनी कथा ... 55 हारप्रभा प्राप्तिमां जिनदत्त कथा mmmmmmmmmm Oor or a ora V0 mur 9 0 0 0 C4%ARASACCASNA 56 गंधप्रिय कुमार कथा.... 274 | 57 सोदासनृप कथा ... | 58 अवन्तिनाथनृप कथा... 59 नरमुन्दरनृप दीक्षा .... 60 महासती जयन्तिनी दीक्षा 288 61 देवानन्दा कथा ... 292 62 प्रन्थकारनी परम्परा... 297 ___मलयप्रभसूरिनुं वर्णन... 300 | 63 आ पुस्तक लिखावनार नाउ भाविकानी ओलखाण 322 303 | 64 पर्यन्त आशीर्वाद 14 पचत जाशावाद ... .... ... 323 15ASARAISA Page #10 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ली० अशुद्ध ___ ली० सुखद सुखद भरियाए अशुद्ध सव्वं अद दिसी निवन्ना चारित शुद्धात्मा सरियाए सिच्य सरिच्छय शुद्ध सम्वे अह दिसि निविना चारित्त शुद्धात्म पचू। सिच सरिच्छ #HASHARORATION किन्तु किन्नु चिन्ति लिहि जोतारो राय म उल्लासा चिन्ति लहि जो तारो रायम उल्लापा महेसो समुप्पन्न रमणी हि दाणदच्छं सिद्धि समुप्पन्न रमणीहि दाणदिक्खं सिद्धी Page #11 -------------------------------------------------------------------------- ________________ शुद्धिपत्र श्री जयन्तीप्रकरण हेडींग सूक्ताणवि बामणा बल्थम्मि यडक द्वीग वच्छम्मि यक द्वीपग करण सूचाणवि ब्राह्मणौ करण 716 वोहद 'दोहद इतिः / 717 दोहल दोहल // 5 // इह झिय धीरया * ... * ~ घणु RASHISARKARKARI (संभ सबंभ SAESONSISESEACOCIALA देहा बाभ्या बाझा उज्जिय वीरवा सक्वंभ बुद्धो देव उचित हारं च सुन्दरि परिणी किं होही हेडींग युद्धदेव सुचितादि हारं व संसि पसंसि अइध कलालावो हिणी सुन्दर धरणी 11 कलावो हिंणि होही // 5 // Page #12 -------------------------------------------------------------------------- ________________ * - M 180 191 महुक्खरं यअिरो सत्थो जह नाया मच्चो अचंति ए देशानां 52- महुरक्खरं यरिओ सच्छो अइ नाणा मच्चू अचंतिए वेशनां मण्डल! जन्ताणवि पइन्नाजि य तत्थ पात्यारे पइसारे षयणेवि हेडींग 198 मण्डला ज्जन्तावि पइन्ना जि व तत्थ पाण्यारो पइचारो वयणवि परमलु अट्ठ सासायं अन्न महिन्द्रेण तेणेहिते विसयइ परिमलु नयर मरय AC%A5 . सासयं अन्नं महिन्देण तेणेहितो वियसइ 202 205 जेणेया स्थाणि जणेया स्थलंमि , कर Page #13 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पूर्णाशा शुद्धिपत्र 241 242 जयन्तीप्रकरणपृत्तिः / प्रवां चंदवदास्य, तन्वयणेहि CA%ESAROKARA 243 249 252 णार्थ 260 पूर्णा शा प्रय चंद्रदास्य खव्वयणाहिं णाथ मह मित्रेण पुणरतं उरि दुट्ठ मच्चु कम्भो भोगे तवो वणं महन्मित्रेण पुणरुतं उर 292 आंक- 224 13 . वच्चन्ति मन्तज्ज्ञ 13 सच्छाउ हेडींग चट्ठाण दीक्षा चक्षुझेको लयम्मि 7 मारभे पुच्च सुद्ध 243 बच्चन्ती मन्तज्झासच्छाओ दक्ष चट्टाण दीक्षा चक्षुलोलो -लम्मि मारेभे . 302 14 हेडींग 308 मन्नु : m coc6 कम्मो 312 भोगेड C तवोवणं ~ - ~ % Page #14 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पृ० पंन्यासमणिविजयगणिवरग्रन्थमाला नं. 12 श्रीपूर्णिमागच्छीयश्रीमानतुंगसूरिशिष्यश्रीमलयप्रभसूरिविरचिता HAHAHAHAHAHAHRAM // जयन्तीप्रकरणवृत्तिः॥ जयन्तीचरित्रगर्भिता // - 06ॐ नमो वीरजिनाय // सर्वाशापरिपूर्णतां वसुचयैः सम्प्रापयन्नन्वहं, जीवाजीवविचारकैरववनप्रोद्बोधचन्द्रोदयः। धर्माधर्मविवेकदुग्धजलधेवृद्धिं दधानोऽधिकं, स श्रीनाभिनृपाङ्गजो जिनपतिः स्तादिष्टसंसिद्धये // 1 // यः कल्याणगिरीन्द्रसुन्दरवपुर्गोत्राधिकामुन्नति, विभ्राणः शुशुभे ससम्मदसुरैः संसेव्यपादोऽन्वहम् / धर्माख्यानविधाननन्दनवने प्रोत्फुल्लपुष्पश्रियो, रेजुर्यद्दशनांशवः स भगवान् वीरो जिनः पातु वः // 2 // रागद्वेषविषौषधी कलिमलप्रक्षालनस्वर्द्धनी, मोक्षाध्वप्रतिपन्नभव्यभविनां हस्तस्फुरदीपिका / ज्ञानादित्रयरत्नभूमिरखिलव्यामोहनिर्माशिनी, यद्वाणी विभवो भवन्तु शिवदास्तेऽन्येऽपि तीर्थेश्वराः // 3 // यत्प्रज्ञाप्रसरेऽतिशायिनि तथा प्रालेयशैलोज्वले, जैनी गौरचरत् त्रिपद्यपि यथा सद्य पदैः Page #15 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणकृतिः / मङ्गलाभिधेय प्रयोजन सम्बन्धादि प्रकाशनम् / 4 // 2 // %A कोटिशः / अङ्गोपाङ्गमहोदया समभवत् त्रैलोक्यसंचारिणी, वन्द्योऽसौ गणभृजगत्त्रयगुरुर्नाम्नेन्द्रभूतिः सताम् // 4 // हस्ताक्षमालामणिसाम्यभाजः, सूत्रानुगानुज्वलपूर्णवृत्तान् / साधूनिमान्प्रापयतु क्षणेन, गीर्देवताऽसौ श्रुतसिन्धुपारम् // 5 // प्रत्याशं प्रसरत्प्रभापरिगतो यत्पग्रहस्तोऽरुणो, यद्दोषापगमं करोति परितस्तत्सत्यमाभासते / आश्चर्य तु मुनीन्दुतारककविज्योतिःप्रकाशोदयं, धत्ते यत्कुमुदं प्रकाश्य सहसा सौरम्यलक्ष्म्यास्पदम् // 6 // श्रीमानतुङ्गमरींस्तान् जाडथे सूर्यानुकारिणः / गुरुन्निजान्नुमो नित्यं, श्रीमतो गणधारिणः // 7 // श्रीगच्छाधिपमानतुङ्गगुरुभिश्चक्रे परार्थोद्यतैर्यत्कादिपदार्थसंशयतमःपूर्यप्रभाभासुरम् / तत्वज्ञानसुधानिधिप्रकरणं यस्मिन् जयन्तीकृत-प्रश्नेघूत्तरदानवाक्यरचना श्रीवर्द्धमानप्रभोः // 8 // स्वगुरुबहुमानजलनिधिवेलां दानादिरत्नरमणीयाम् / विवृति तस्य विधास्ये सिद्धजयन्तीकथां प्रथयन् // 9 // तत्राधिकृताऽभीष्टदेवतानमस्कारेण समुन्नतशिरसा मन्दरमन्थानुकारेण निर्मथिते-ऽन्तरायनिरधौ समुल्लसिताभीष्टसिद्धिसुधास्वादतः सुमनसां स्यादऽजरामरपदोपलम्भ इति / सम्बद्धार्थभणितिभङ्गी गंगातरंगिणिपरिष्वङ्गपवित्राङ्गतयाऽभिगमनीयता कमनीयता स्यादिति / अभिधेयवत्ताव्यक्तिः मुक्तावलीव श्रोहपरिषदो हृदयहारितामात्मन्यादधीतेति / फलवत्तया च पक्षपातच्छेकतयाऽऽशुकवीनां सहकारवनमिव सानन्दप्रवृत्त्यविकलकारणतां प्रपद्येतेति यशःसौरभोद्गारसारसौजन्यादिगुणगणांभोजवनप्ररोहरमणीयशिष्टसमयसरःप्रतिपालनप्रवणपालिप्रबन्धशालिनी चेयं नमस्काराद्यर्थाभिधायिका प्रथमगाथा यथा-- नमिय नमिरामरेसरसिरसेहरमणिमऊहविच्छारियं / वीरचरणारविन्दं जयन्तियापगरणं वोच्छं // 1 // वक्ष्ये-अभिधास्ये, जयन्त्याः प्रश्नोत्तरव्याकरणं संशयापहरणरभसरसपल्लवितसंवेगदुममञ्जरीकल्पप्रव्रज्याग्रहण-निरमि 5 % // 2 // %A5) Page #16 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीपरिचयः। %%9545555 ध्वङ्गतपश्चरणनिर्मलितान्तःकरणप्रवृत्तापूर्वकरणक्रमारूढक्षपकश्रेणिक्षपितघातिकर्मचतुष्टयोल्लसितकेवलज्ञानसम्पदुपलम्भपर्यायपर्याप्तशैलेशीकरणनिरव शेषशेषकर्मनिर्भरणसिद्धिसौख्यस्वीकरणप्रतिपादनरूपं, किं कृत्वा ? नत्वा, किं तत् ?, कर्मदारुदारणतपोविराजितस्य, यद्वा सर्वातिशायितपोवीर्याचारसारस्य वीरस्य चरणारविन्दं-नम्रामरेश्वरशिरःशेखरमणिमयुखविच्छुरितम् / का पुनरसौ जयन्ती ? इत्याहकोसंबीनयरीए सहसाणियसुयसयाणियस्स सिसू। चेडकसुयामिगावईजाओ उदयणनिवो अत्थि॥१॥ तस्स पीउसी जयन्ती पुवं सेजायरी मुणियजीवा / वेसालिसावयाणं अरहंताणं सुसाहणं // 2 // व्याख्या-कोशाम्ब्यां नगर्यां सहसानीको यो राजा, तस्य सुतः शतानीको यो राजा, तस्य शिशुः-पुत्रो, वैशाल्यधिपतेश्चेटकमहाराजस्य सुतायाः मृगावत्याः जात उदयननामा नृपोऽस्ति / तस्योदयननृपस्य पितृष्वसा जयन्ती, पूर्वशय्यातरीत्याह-वेसालिसावयाणं-'विशाला जननी यस्य, विशालकुलमेव वा, विशालं प्रवचनं वा यस्य तेन 'वैशालिको जिन' इतिवचनाद् वैशालिर्भगवान्महावीरस्तस्यान्तिके ये धर्म शृण्वन्ति, ते वैशालिश्रावकास्तेषां अरिहंतृणां, यद्वा अर्हतां भुवि प्रतीक्ष्याणां ( पूज्यानां ) सुसाधूनां-सुविहितयतीनां इति गाथाक्षरार्थयोजनामात्रम् / भावार्थः कथानकादवसेयं तच्चेदम् / अत्थि इह जंबुद्दीवे, भारहवासंमि मज्झिमे खंडे / सिद्धो वच्छो देसो समिद्धगामागरनिवेसो // 1 // उन्नयपओहरेसु पुट्ठो गोमंडलेसु सम्बेसु / जो निद्धघोसदसदिसिअइगुरुपसरन्तपडिसहो // 2 // जो दुद्धरचायकरो सुहडो इव कलिनरिन्दविद्दवणो / HOSAROSAGARCA494 // 3 // Page #17 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणवृतिः / // 4 // ॐARESHESAGAR ठाणट्ठाणपरूढप्पसत्थवणराइसोहिल्लो // 3 // जत्थ कलिकालदंसा कत्थवि नगराइएसु नवि हुंति / निच्चं तिकालदेवयपूयाषण जयन्तीधृवधूमेहिं // 4 // जत्थ य सरोवरेसु सरोरुहाणं विसप्पिरपराया / अवरोप्परखेलणखित्तगंधमुट्टि व रेहति // 5 // जो सइ धन- चरित्रे महासईसीयारामाभिरामगुणगरुओ। रामायण व किं पुण ? न बिभीसणुसत्तुसम्माणो // 6 // खीरोयसरिसगोउलसएसु दिसि- 18वच्छदेशदिसिसरंतपहियाणं / पंथजरा अवणिजइ जत्थ य पीयूसपाणेण // 7 // घणकुसुमगुच्छकोमललयाण अवलोयणेण उम्माहो। कोशाम्बीपहियाण पिययमासु वम्महसरसल्लियंगाणं // 8 // अलिकुलकोमलकुंतलकलावअइललियवलितरंगाओ। वियसियमुहारविंदा नगरीसरसीओ तरुणीसरसीओ॥९॥ दुभिक्खडमरचोरारिमारिदुदृवणाण सव्वाण / अविणिज्जियमाहप्पो पभंजणो कोइ जो दिव्वो वर्णनम् / // 10 // कोसंबी तत्थ पुरी सुविमत्तचउक्कचच्चराइमा / अवरावरदेसंतरनेगमववहारसंकिन्ना // 11 / / फुल्लंघयाण जीए वणेसु भमिराण महुरझंकारो / पइदिसमुक्तिलच्छीमणिनूउररणझणारावो // 12 // सविमाणसूरससिणो वीरं तिपयाहिणीं करेमाणा। जीइ वणलच्छिमणिमयकुंडललील विडंबिंसु // 13 // जीए य नीलमणिमयपासायपरम्पराहिं रम्माए / सियपायारो रेहइ सेसो | इव कण्हसुत्तीए // 14 // जीए सियपायारो परिहाजलपूरजायपडिबिंबो। साहइ सिरिदसणूसुयआगयपायालगंग व // 15 // तरुणतरुणीण नानामणिभृसणकिरणमंजरिगणेहिं / तं पंचवनकुसुमोवहाररुइरो य रायपहो // 16 // जीए जिणमंदिरेसुं सहति सियचलिरवेजयंतीओ।नंकारावइ पुनोदयखीरनिहिबहललहरीओ॥१७॥ कल्लागमयमहसवमंदरमंथेण सबविबुहेर्हि / मस्थिजंते दुरियऽनवम्मि जत्थुच्छलइ लच्छी // 18 // सुमणसजणाण पीयसपाणललियाई जत्थ अच्छेरं / सारंगजुयलसंगयसहरिसगोविंदलक्खाई // 19 / / भोगीहिं विबुहेहिं, अइसयपुत्रेण मणुयलोएण / जीए नयरीए सच्चं, तिहुयणलच्छीण सहवासो // 20 // Page #18 -------------------------------------------------------------------------- ________________ PRAKASHANKE शतानीकनृपवर्णनम्। आसातीए पुरीए रजं निकटयं अणुहवन्तो / सहसाणीयमहानिवपुत्तो राया सयाणीओ // 21 // जस्सासिलया दीहीभूया जलपूरपुक्खराइना / जत्थ जयलच्छिकीलापयावमुल्लासए चोजं // 22 // जस्स य रणभूमीए, जलहरतलवारिधारसंपाए। सुहडाणं खेचेसुं, बहुसालिसिराई निवडंति // 23 // नयविक्कमखीरोयहिनिग्गयजसरायमंडलं जस्स / उल्लासं कमलाणं भुवणे उवणेइ चोअमिणं // 24 // उइंडपुंडरीयं दद्वं जस्स य चयन्ति दूरेण | अहियं अहियकुरंगा न विम्हउ एत्थ विबुहाण // 25 // जो दण्डमंडलजुओ पयावविद्दवियपरमहिमभावो। सूरोवि कोमलकरो रेहइ राया कलाकलिओ॥ 26 // भिन्नारिकुंभिकुंभयर्डगलियमुत्तालिविरइयचउक्का / जस्स गुरुसमरधरणी जयसिरिवीवाहवेहव / / 27 / पडिनिवइनिवहभयचवलचित्तदोलाए खेलइ सहेलं / पल्हत्थियथम्भाए आणा जस्सेह अच्छरियं // 28 // जस्स पयाणे गयणे अइसयघणरेणुपडलस्थलसंका / मिति सारहिं रहतुरया वेल्लणमणा रविणो / / 29 / / जस्स कढिणत्तरहिओ चोजं गुणकोडिसरलयासहिओ / अक्खित्तमग्गणगणो परलोयजयं कुणइ चाओ // 30 // ईसरजडाहिरामा, कित्ती जस्सेह सुरैसरिसरिच्छा / तिहुयणअलंघणिज्जा, सलाहणिजा सुराणंपि // 31 // तस्स य देवी इट्ठा, मियावई सीलपावियपइट्ठा / चेडयनरिंदधृया सोहग्गमहग्धवियरूवा // 32 // जमुणापवाहललिओ कण्होच्चिय जीए कुंतलकलावो / कस्स न हरेइ हिययं ? कुडिलोवि य जेण अइगरुओ // 33 // किं तीए वनिजइ ? जीए आएजवग्गुवयणाए / अलियंपि सच्चविजइ अणुरायपरायणजणेण // 34 // विन्भमरससरियासु, जीए दिट्ठीसु सरलतरलासुं। सोहंति भूलयाओ घणसेवलवल्लरीओ व // 35 // मयणस्स व धणुलट्ठीलट्ठाओ भूलया विरायति / जीए मोहणवाणो नासा. 1 शार्दूल / 2 तटगलित / 3 स्वर्गङ्गासदृशी 4 बाणः 3ROGRAAAAAAAAAEX R // 5 // Page #19 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती -1 प्रकरण मृगावती महारानी|स्वरूपम्। पृतिः / वसोवि सोहेइ / / 36 // लम्बसवणा व लम्बिरमणिकुंडलमंडियकवोला / जा दिणलच्छी पुवावरदिसि रविचन्दबिंब व // 37 // कोमलमुणालसुहओ जीए रसपूरपूरिओ अहरो / रेहइ सच्चं सोणो जो सो पुन्नागकयकेली // 38 // मुहचंदचंदिमाए निहोसतेण सऊणचक्काणं / दिनो हरिसो जीए पइदिवस दिप्पमाणीए // 39 // सिद्धाऽहं पत्तिजसु रेहा पुवं तिहा भणेऊण / कंठे जीए निवसह सरस्सई बंभलोगाओ // 40 // सुकुमालसरलमंसलबाहुलया पाणिपल्लवोल्लासा / कामधणुलविलट्ठा गरिद्वगुणकोडिरमणीया // 41 // जीए विहिणा विहियं अहियं लावनमंगुवंगेसु / तमऽमायन्तं पिंडीभूयं सिहिणच्छला नूणं // 42 // लावन्नामयभरिए नाभीहरयंमि जोवणसिरीए / कीलंतीए पसरिया तरंगमाल व तिवलीओ // 43 / / जीए नियंवो अप्पडिबिंचो मणिमेहलाए साहितो। सिंगारखीरजलनिहिरयणद्दीवो व रमणीओ / / 44 / / जीए सिरीससोमालमसले ऊरुजुयलमहरुहरं / सुहयसुवहाणजमलं रेहइ रईबल्लहस्सेव // 45 // गूढसिरजाणुहिट्ठा मसिणा सोहिंति जंघिया जीए / रइरमणभवणतोरणकणयमयत्थंभियाउ // 46 / / अन्नह नियंबभूभीभारो धारिजए कहं ? जीए / इय चिंतिऊण विहिणा विहिया कुमुन्नया चलणा // 47 // पयकमलुजोयकरो अरुणो नहरयणपसरियकरोहो / चोजं तु इमं जं मोहइ लोयदिडिओ // 48 // अह तीए समं भोए तस्स नरिंदस्स मुंजमाणस्स / गुणवं पुत्तो जाओ उदयनामेण विक्खाओ // 19 // अह तत्थ तया एगो चिंतइ चित्तगरदारगो दक्खो। दट्ठवाणं सणफलाई नयणाई तो नूणं // 50 // गंतवं चिय देसन्तरेस धीरेण सत्तजुत्तण / गबगहनिग्गहत्थं विनाणविसेसलाहत्थं // 51 // इय चिंतिऊण एसो नाणादेसन्तरेसु हिंडन्तो / पत्तो 1 स्तनच्छलात् / 2 सुखदसूपधानयमलम् / Page #20 -------------------------------------------------------------------------- ________________ +A चित्रकर पुत्रवृत्तान्तकथनम्। SAROICE साकेयपुरं कमेण अलयाउरीरम्मं // 52 // तत्थथि एगपुत्ता थेरी तीए घरम्मि चिट्ठेइ / पेक्खंतो सिक्खंतो कोउयविनाणलक्खाई / / 53 / / पुत्वोत्तरदिसिभाए तत्थ य एगो सुरप्पिओ जक्खो / संनिहियपाडिहेरोत्ति निग्गहाणुग्गहक्खणिओ // 54 // पइवरिसं चित्तेउं कीरइ गरुओ महूसवो तस्स / सो चित्तयरं मारेइ, अचित्तिओ देसमवि रुहो // 55 // रना पुण चित्तयरा पंचत्तवाहिएण नस्संता। अवरुद्धा पडिबद्धामिहाणया गोलजुत्तिए // 56 / / जस्स य नामं दीसइ, गोलंमि | विहाडियम्मि वरिसन्ते / सो चित्तयरो चित्तेइ, एवं कालम्मि वच्चन्ते // 57 // तम्मि य वरिसे थेरी, सुयवारयआगमेण दुक्खत्ता। अनलेण व दझंती अइकरुणं रुयइ विलवन्ती // 57 (अ) // जह गिम्हेण तत्ते, जए जवासाण अंकुरुल्लासो / तत्ते दुहेहिं लोए, तह पुलओ दिव! तुह अंगे / / 58 // चिन्तानलेण तत्तं, हद्धी पीडेइ लोहमिव लोयं / छट्ठारो इव दइयो, आवइ. घणघायघडणेहिं / / 59 // आसातरुस्स मह, पुत्तयस्स जत्तेण पालियस्सेह / तं सहसा निकरुणो, पमंजणो दिव! उच्छलिओ॥ 60 // अबलाए थेरीए, दीणाए दुक्खलक्खसरियाए / हा हा कयन्त ! निग्घिण !, न लजसे कीस ? पहरंतो // 61 // निकारणकोवानलतचे हिययस्थलम्मि तुह दिन्छ !| अहवा कह संपजउ, सच्चं करुणुग्गमो निचं // 62 / / सोवि तुह हुञ्ज तंमिवि, सिञ्चन्ते कहवि बाहसलिलेहिं / इय आसाए नडिया, रुयामि कीणास ! दीणाऽहं // 63 / / इय विलवन्तीं थेरिं, पुच्छइ चित्तयरदारगो एवं / अम्मो ! कीस सकरुणं, रोइसि ? सोयानलालिद्धा // 64 // सिट्ठम्मि कारणम्मी, करुणादक्खिन्नपरवसमणेण / तोऽणेणं सा भणिया, जक्खं अहमेव चित्तिस्सं // 65 // तीए पुणोवि वुत्तं, किंतु तुम वच्छ ! मह न पुत्तोसि 1 / साहसरसिएणेवं, तयहुत्तं तेण तो वुत्तं // 66 // जइ भंगुरकाएणं, जणणीमित्ताण पाणर % // 7 // % Page #21 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती साकेतपुरे स्थितास्थविरायाः पुत्ररक्षणा प्रकरणवृतिः / थे विल पनम् / RRC-%%*RRC खाए / अम्मो हविज धम्मो, रम्मो ता किं न पञ्जत् // 67 // अह चिंतइ सा थेरी, सिरिअयले साहसंमि एयस्स / जस्वस्स वसीकरणी ववसायमहोसही अस्थि // 68 // सत्ताहियमि पुरिसे, खीरोयसरिच्छयम्मि गंभीरे / महियमिवि अमियरसो, संपञ्जइ ? किन्तु चुञ्जमिणं / / 69 // परउवयारसरोरुह !, अणम्भत्थियसूरनिम्मलपयाव!। तं पुत्ताओवि सुहओ, बच्चन्तो देसि संतावं // 70 // इय तीए एस भणिओ, जंपइ संपइ तहा जइस्समहं / जह तुम्हं अम्हाण य कयरक्खो होइ जक्खोवि // 71 // ता सो दिवमुहुत्ते, कयच्छडो न्हाय अहयसियवत्थो। अद्वगुणपोत्तियाए सम्म ठइऊण मुहकमलं // 72 // न्हविउं पउमपिहाणयगंधोदयभरियकणयकलसेहिं / नवभायणअसिलेसयनववनयकुच्चियाहत्थो / 73 // चित्तउं जत्तेण महारिहं कारवेइ अह पूयं / विनवइ जक्खरायं सुरप्पियं परमभनीए // 74 // स्वमियत्वं अवरद्धं जमिह मए नाह ! मूढहियएण / पणयजणवच्छलाउ, हुंति जओ देवया देव! / / 75 // एसो हि पुरिसरयणं, गारवगारेण वजिओ सच्छो / तेयस्सी महमाणसमोहणकरणेक्कमाहप्पो // 76 // विणयंगएणं एएण, मज्झ दढपक्खमुबहतेण / बहुवनसंथवेणं कोवो सप्पो व विद्दविओ // 77 // एयस्स विवेएणं ससिमंडलनिम्मलेण मह सहसा / सह सायरेण मणसा उल्लसियं कुवलयं सत्वं // 78 // इय चिन्तिऊण जक्खो, पञ्चक्खो चलिरकुंडलाहरणो / सहरिसमुहारविंदो, साणंदो, भणिउमाढत्तो // 79 // चित्तगरो चित्तगरो, चित्तहरोतं सि महासत्तो / तं मग्गसु वरमिन्दि, सहलो ज होइ महतोसो // 8 // तो सो चित्तयरवरो, भणइ अलोहो अक्खोहपरिणामो। किं ? तुम्ह दसणाओ, अवरोवि वरो मज्झ / / 81 / / जक्खेण पसनेणं, सो वोत्तो तहवि दसणं अम्ह / होइ अमोहं किंचिवि, 1 आश्चर्यकरः। // 8 // Page #22 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 9 // अनं पत्थेसु ता बच्छ // 82 // वच्छो चेव सकरुणो सच्छाओ मज्झ ताव संतत्तं / जह निववेमि लोयं सरसं दिढि तहाचित्रकरखिवसु / / 83 / / चित्तगरदारगेणं, इइ वुत्ते भणइ जक्खराओवि / निबविओच्चिय लोओ तुह रक्खादक्ख पाणेण // 84 // अनं पुत्रचित्रिवरेसु पुत्तय ! इय वुत्तो भणई जस्स वत्थुस्स / अवि पिच्छिस्सं असं तं चित्तिसं तहा सत्वं // 85 // एवंति भणेऊणं खणेण तयक्षः जक्खो अदसणीभूओ। तुट्ठा सपुत्तथैरी अमियरसासारसित व // 86 // आणंदिओ नरिंदो सह नायरदेससेसविसएहिं / प्रसन्नो वरअहवा परकजरया लहंति एवं जसं सोक्खं // 87 // लहिऊणं उक्करिसं हरिसं दाऊण निवइलोयाणं / अइउम्माहेणेसो दापनं च। कोसंविं नयरीमह पत्तो // 88 // आणदियबंधुजणो बद्धावणयंमि अत्थि दिन्नधणो। तत्थेसो चित्तयरो सुहेण कालं गमइ पवरो // 89 // अह अन्नया कथाइ सयाणिओ विहियगोसकरणिजो / कयमंगलोवयारो राया अत्थाणमल्लीणो // 10 // कप्पूरागरुघणधूवधूमलहरीओ जत्थ नअंति / दसदिसि उक्तिसहरिससिरीण चलअलयपंतीओ // 91 // चीणंसुयपढेंसुयवियाणलम्बतमोत्तियसरिओ। जम्मन्तरसमुवज्जियसुकयखीरोयवीईओ व // 92 // मणिकट्टिमंमि जमि य, पडिबिंबमिसेण परिकरसणाहं / धरणी धरेइ हियए नयवंत नरवरं मन्ने // 93 // तत्थ ससिकंतनिम्मियरम्मयसिंहासणमि आरूढो। सियवत्थकुसुमचंदणविलेवहारावलीकलिओ // 94 // सुरसरिपवाहनिग्गमसोहिअहिमवंतसेलसोहग्गो / धरियधवलायवतो राया चलचमरचिंचइयो // 95 // अमयं व पज्झरन्तो राया पगरेइ रजकजाई / उक्कोसियाइं सुपइट्ठियाइं कुमुयाण व वणाई // 16 // उवचियदलंमि एसो सत्तङ्गापयद्वियंमि रजंमि / गयकलहे मयरहिए दाणं पयडेइ चुजमिणं // 97 // मंतीणं मंतेसुवि मंडलमा१ केश / 2 शोभितः / 3 पक्षे चन्द्रमाः। // 9 // Page #23 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CO बयन्ती वृतिः / लोइऊण आणाए / दुट्ठाणं सिट्ठाणं च, निग्गहाणुग्गहासत्तो // 98 // सद्दावसहवागरणछंददिबावहाणमणपसरो / सवत्थ सबकुसलो समरसहाबोवि सोममुहो // 99 // अवरावरदेसंतरसमागयाणं महत्थपुरिसाणं / दितो मणचमक्कारं साहंकारं इमं वयइ // 100 // किं ? नत्थि अम्ह रज्जे जमत्थि देसंतरे रायाणं / इय कहह मज्झं संपइ कारिजइ जेण तंपि इह // 101 // अह ते भणंति नरवर ! चित्तसहावजियं तुह समिद्धं / सवं एयं मणिमो चित्तसहावजियं रजं // 102 // आयसइ तओ सेणि चित्तगराणं सयाणिओ राया / चित्तसहं तह चित्तह चित्तयरी सावि जह होई // 103 // तत्तो विभागपुवं चित्तसहं चित्तयति चित्तयरा / साहियणं नरवइणो सञ्चाविजंतवावारं // 104 // चिट्ठइ जत्थ नरिंदो लद्धवरो तत्थ चित्तइ स चित्तों / जालंतरेण दिट्ठो मियावईचरणअंगुठो // 105 / / लिहिअं तीए रूवं देवीए तेण तो तहारूवं / मसिबिंद ऊरुम्मि य नयणुम्मीलणखणे जाओ // 106 // तो सो अवणिजइंतो तहडिओ चेव होइ पुणरुत्तं / तिलएणं होयवं उविक्खिओ तेण सो जेण // 107 // निवत्तियमि चित्ते पिच्छन्तो कोउगेण तत्थ निवो। देवीरूवं दहें हरिसवसोल्लसियरोमंचो // 108 // पिक्खिय पुण मसिबिंदु कोवानलजलणखेरुयायारं / चित्तगरस्स व सक्ख उदयगयं पावलेसं च // 109 // कालस्सऽहवा लोयणतारयमिव विप्फुरन्ततेइल्लं / ईसाविसवल्लीए कंदकुरविन्भमं सहसा // 110 // भणइ निवो चित्तयरो हतबो जेण इत्थ रूवम्मि / विहियमकजवंजणमंजणगुरुम्मि देवीए // 11 // तो चित्तयरस्सेणी उवट्ठिया सुट्ट कट्ठभरसल्ला / निस्सेणीआरोहे रायपासयंमि पासाए // 112 // कह सहसा अपसाओ! सामिय ! एयमि तुम्ह चित्तयरे / विणएणं पच्चक्खो जेण को सुरप्पिओ जक्खो // 113 // दोसोदयंमि सययं 1 शब्दापशब्द / 2 चित्रस्वभावार्जितं / 3 चित्रसभावर्जितं / 4 चित्रकरः / चित्रसभा| चित्रणे चित्रकर| पुत्रेण चित्रिते मृगावतीचित्रे नृपस्य जातोरोषः। *U // 10 // Page #24 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 11 // अमयको चेव होइ इह राया। तो कि ? दोसाभावे विगत्तणो तं सि सोमोवि // 114 // सवेहिं तो अहियं विहियं जं देव! शतानीकन चित्तमेएणं / तं अहियं चिय जायं रोहइ जं वावियं चेव // 115|| वसुपूरणमासाणं दुद्दतमाणं विणासमविदिन्तो। चित्तागओ सण्डासे पयच्छइ सच्चं चिय गोवई तावं // 116 // तुज्झपसायसमीहाए निम्मियं चित्तकाममेएण / विहिओ पुण अपसाओ विसमगई छिन्ने रुष्टचित्तकम्माण // 117 / / ता नाह! पणयवच्छल! वच्छाहिव सच्छ मच्छरविप्लुक्क / अभयमिमस्स पयच्छसु अच्छसु समाणणा चित्रकरदूरे // 118 // रनो भणइ एसो निद्दोसो कह हविज ? देवीए / संचरइ अन्नहा कह मुणइ ? मसं तीए ऊरुम्मि // 119 // जपंति | पुत्रेण चय चित्तयरा लद्धवरो एस सव्ववत्थुस्स / अंसंपि पिच्छिऊणं तंहि तहा सव्वहा लिहइ // 120 // ता खुजाए वयणे जालन्तरियाए ण्डप्रद्योतदंसिए लिहियं / तीए रूवं तहविहु विणासिओ तस्स संदसो // 121 // रोसपओसोल्लासे अत्थमिए नाणदिणयरे जीवा / पुरओ स्यालेख्य समविसमं वा जं भवं तं न पेच्छन्ति // 122 // ईसा सिजाए च्चिय उप्पलदलकोमला सुहं देइ / पुरिसंमि पुणो ईसा तामृगावती वयरी अग्गिजाल व // 123 / / संडासयंमि छिन्ने पुणरवि साकेयपुरवरं गंतुं / सो चित्तयरो जक्खं आराहइ परमभत्तीए // 124 // मत्तीए गहिएणं दिनो जक्खेण तस्स आएसो / वामकरणवि चित्तसु तहाविहं मज्झ माहप्पा // 125 // पत्ते ज- | क्खाएसे अइकुद्धो सो सयाणियस्सुवरि / धूमद्धओ वियंभइ अहवा लिढिन्धणो धणियं // 126 // रनाऽहं निग्गहिओ किच्चाकिचं न चिंतियं जमिह / किच्चुट्ठावणमेयं अप्पवहत्थं कयं तेण // 127 / / इय चिंतिऊण एसो फलए निहियं मिगावईरूवं, उज्जेणीए दरिसइ चंडप्पजोयरायस्स // 128 // तो विम्हिएण रना भन्नड किं सक्कविरहिया रंभा ? / चित्तयरेणं भणियं हरिमेसा संपयं लहिही // 129 // कोसंबीनयरीए एसा देवी सयाणियनिवस्स / रुवाइरयणखाणी मिगावई देव ! नामेण // 130 // चित्रं चितिऊण एस। रमाऽहं निग्ग पत्ते ज- Page #25 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरण- वृतिः / S**** // 12 // * तो रूवाइगुणेहिं बद्धाई तस्स नयणकमलाई / ताणमणुकंपासत्तो जोतारो कन्हसारोवि? // 13 // तीए करचरणेसु असोय- दृष्ट्वा तां || कुसुमारणेसु नरवइणो / रत्तोप्पले व अहरे दिट्ठी भमरि व संलीणा // 132 // तीए कजलकुरुलीकुडिलालयलोहसंकलाबद्धो / चण्डप्रद्यो राय मणोवि न धणियं कविचावललीलमावहइ // 133 // लावनामयकुंभीए तीए अइलुद्धनागललियंमि / दिढे वेणिदंडे तस्य मृगारनो मुच्छंगओ अप्पा // 134 // सुरसरिपुलिणमहत्थललीलनियंबंमि मंदगइगमणो / सिग्धं राया कहमवि न पेच्छए वतीभोगतीए परमागं // 135 // मीणोवमोयरीए तीए रूवम्मि अणिमिसच्छम्मि / उवचंते हुति य उक्कलिया माणसे वाञ्छा। तस्स // 136 // उसीजुत्वणमोहणवल्लीघणकंदसिहिणदेहीए / मृढो अमग्गगामी एवं चिंतेइ सो राया // 137 // कह पढमदंसणे मह मियहासवियासिदसणकिरणेहिं / सा वियरिस्सइ चंदणमिस्सियकुसुमंजलीअग्धं // 138 // मुहइंदुचंदिमाए तीए मह कुवलयाभनयणाण | संभाविजइ कइया वियासणामोयसंभारो // 139 // सुपसायखीरसायरलहरिसरिच्छेहि दिद्विच्छोहेहिं / न्हविऊण कया सा में करिस्सए समियसंता ? // 140 // संगमरसेण सिचे पमयारामम्मि पल्लविजंते / मह तंसि कया होही ? सिरीससुकुमारफंससुहं // 141 // किं बहुणा ? / चित्तयरचित्तदसणगुरुवन्नणकन्ह- 11 कालकूडेण / कजाकजविवेयणचेयणरहिओ निवो जाओ / / 142 / / अहवा दुल्लहइच्छा अणग्गिचुडुली अबंधणा गुत्ती / जीवाणं जंबालं अजलं मरणं सउस्सासं // 143 // एत्थंतरम्मि अवराभिमुहो सूरोवि तेयपरिहीणो / नीयं नीयं ठाणं जन्तोऽदट्टव्वयं पत्तो // 144 // रयणीए सयलोवि हु मियावइउम्माहराहुगसियंगो। दोसाकरोत्ति राया सुहासियं धरइ न हु| 1 तस्यां / 2 उल्मुक। 12 // ***** * * Page #26 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 13 // चण्डप्रद्योतप्रेषित रूवं // 145 // अदसणेवि रत्तो मिगावईए निवोत्ति संझावि / दूरे विगए सरे रत्ता किल पाडिसिद्धिए // 146 // खणदिनहरूवो राओ जह मज्झ सबरामाणं / रायाण पडिबोहइ संझा किर सउणसद्देहि // 147 // सपरघरदारमग्गामग्गविवेओ जहा न राएंण / कीरइ मएवि एवं इय पुरियं अंधयारेण // 148 // विहडंति चक्कवाया जह तह रायस्स सुहअभिपाया। मउलंति तहा कमला बुद्धिओ जह निवे अमला // 149 // जह मह तह न कलंको विसुज्झए जलहिमजणेणावि / कहिलं व इमं रनो अह सहसा उग्गओ चंदो // 150 // सद्धिं कुमुयवणेहिं वियंभए नरवइस्स रणरणओ। तेसिं तस्स य बहुलो | उच्छलिओ नहपरागोवि / 151 // सह रायनिव्वुईए खीणा रयणी कमेण अह चंदो। निवतावदायिकरभरहित्थो इव अस्थमणुपत्तो / / 152 / / नक्खत्तेसु चरंतो पुणो पुणो वित्तखंडणुज्जुत्तो। दोसायरोवि संतो कहमेसो चंडपजोओ ? // 153 // अवणिंतो नीलपडं तमपडलं करसहस्सपसरेण / इय चिन्तिऊण रोसारुणोब उइओ जयचक्खू // 154 // कोसंबीनयरीए पजोओ पट्ठवेइ तो यं / दुवयणं कलुसं तं तमं व रायं सयाणीयं // 155 // चंडस्स तओ दूओ सद्धिं अजसेण तत्थ संपत्तो / पिच्छइ य सयाणीयं पडिहारपवेसिओ रायं // 156 / / तेणवि भणियं सुमरइ मज्झ पहू तुज्झ सकलत्तण / तो नियमहिलं पेससु सिवदेवीदंसणनिमित्तं // 157 // रत्ना भणियं मज्झवि तुह सामी वसइ माणसे किं न ? / जइ इच्छइ नियमगिर्णि दहूँ ता एउ सिवदेवी / / 158 // दूओ जंपइ इति भयणि दटुं न लञ्जए देवी / कप्पलया इव लजह तुमए पुण कडुयरुखेण // 159 // दूओत्ति तुममवज्झो वज्झो पुण सामिओवि सिहाणं / अहवा खारसमुद्दे खारोच्चिय होउ उग्गारो // 160 // 1 स्पर्द्धया / शर्वरामानम् 3 चंद्रेण / 4 निःश्वासो / 5 लज्जितः / 6 राहुवत् शतानिकेन तिरस्कृत्य निष्काशनं कृतम् / / // 13 // Page #27 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणवृतिः / I // 14 // इय नरवरेण भणिओ ओ चंडस्स कोवचंडालं / छिविऊणं स सबंग सिग्धं दूरं अवतो // 161 // द्यवयणेण तत्तो यह अपशकुनेकसिणदिविहिं धूमकरलीहिं / लद्धिन्धणसरिसो पजलिओ चंडपजोओ // 162 // दुबयणवारिधारानिवायविद्दवियधवलगुणप- Psपि चतुर्दक्खो। सजलजलओ व स निवो संजाओ कलुसपरिणामो // 163 // चउरो कसायतरुणो हिययस्थलयंमि तस्स तो रूढा / ईसाका- शराजसहिरेल्लीए वल्लीए वलइया तेवि // 164 // वगृह अट्टज्झाणं रोद्दज्झाणं च ताण फलसरिसं। नरयदुहदाणदच्छं अहदारुणकडुयपरिणाम है। तिचण्ड॥१६५॥ किंबहुणा?। मित्तबुहेहिवि विहियं उजोय जो न पेच्छइ सयं च / रागंधो दोसंधो स निवो नामेण पजोओ // 166 // प्रद्योतस्य पलयंमि मुक्कमेरो सलिलोप्पीलेहिं पूरए भुवणं / जलही जह तह तत्तो चउरंगदलेहिं चंडनिवो // 167 // हक्कारई य चउदस || युद्धमहाबला मउडबद्धरायाणो / जेणऽजवि भमियच्वं चउदसरजमि लोयंमि // 168 // तो पत्थाणे आसामुहाई अंधारियाई प्रस्थानम् / दट्टण / देव ! न सहला दीसइ आसा मंतीहिं सो भणिओ // 169 // अन्नं च देव ! अम्हं सुन्ने तत्तमि वट्टए अहुणा / सुरोदउत्ति कजं सुन्न चिय हंसचारेण / / 170 / / संमुहपवणपणोल्लियरयपडलेहिपि पिसुणियं देव / / न हु एत्थ कजसिद्धी कलुसीकयवयणनयणेहिं // 171 / / सउणावि देव ! दिवा( चा) सरेण चिट्ठागईहिं ठाणेण / साहति साहसेणवि न कजसिद्धिं मणागपि // 172 // एसावि सिवा सामिय जेट्ठा सउणाण दाहिणा तुम्ह / वाम चिय परिजंपइ महल्लमाहप्पहाणिकरी // 173 // इय जुत्तिउत्तिमंडलसंगयगुरुमंतिमंतवयणेहिं / न पउत्तेहिं नियत्तइ निवस्स कामगहो कहवि // 174 // तो चलिओ चंडनिवो पयंडभुयदंडदंडसयसोहो। उप्पन्नमहामोहो उत्तमपियनीइविच्छोहो // 175 // तत्तो कोसंबीए उक्का निवडंति तडयडरवेण / जा नजति बुहेहिं कयंतकोवानलजाला // 176 // गयणमि अनन्माओ विज्जुलया चंचलाओ दीसति / // 14 // RAGARH Page #28 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 15 // 34-ACANCE%ACAN कालभुयंगमजीहासिरीसमीहा फुरन्तीओ // 177|| पइदिवसं पसरतीओ उदति अणग्गिधूमकुरुलीओ। किल कुवियकालरयणी कौशाम्बी. कडक्खविक्खेवलच्छीओ // 178 // सुवति य निग्घाया संभावियतिक्खदुक्खसंघाया / संनिहियमच्चुमयगलगलगजियसब्ज- IP|नगर्यामपि उल्लासा // 179 // इय उप्पायालोयणतरलियनयणो सयाणिओ राया / निसुणेइ देससीमासमागमं चंडरायस्स // 180 ॥|8|जातेऽनिष्टतो खुद्धमणो राया अणप्पउप्पायदंसुणुप्पिच्छो / अइसारेणं सजो एसो जाओ कहासेसो // 181 // विरहभरनिब्भरंगी सूचकोत्पामियावई सारणीहिं दिटिहिं / वाहजलेणऽणुसमयं उरत्थलं सिंचए तत्तो // 182 // सोएण असोएण व साहपसाहाहि पसरि- तादिके एणं व / मूलाओ उठ्ठिएणं पल्लविएणं परदलेहिं // 183 // चिरकम्मपरिणईए वामाए दिन्नकमपहारेणं / दुहपसवसंभवेणं भयभ्रान्तरुक्खत्तं पाविअं गुरुयं // 184 // विरहगयाण अहवा लोए पसरंतपक्खवायाणं / कन्हकमलासणाणवि सुन्नासाभमणय | शतानिकजायं // 185 // विरहावत्थो रविसारहीवि सक्कइ पयंपि नो गंतुं / विरहदसं संपत्तो कनो पंचत्तमावनो // 186 // जिण राजमरणम् वयणसुहासायणदूज्झियविसमविसयविसवेगा। सविवेगाय मिगावई देवी चिन्तइ पुणो एवं // 187 // दुक्खमउ च्चिय एसो संसारो सायरो दुरुत्तरो। जम्मजरामरणजलो आवइउम्मीहि दुप्पिच्छो / / 188 / / वसणावत्तरउद्दो जोगवियोगाइजलयरायनो। ईसाविसायवडवानलजालसहस्ससंपुन्नो // 189 // कुग्गाहदुग्गमग्गो काममहामयरखोहियजलोहो। मिच्छत्तकालकूडो कसायपायालकलसो य // 190 // ते धन्ना कयउन्ना जे उत्तिन्ना परमपयत्तेण। चारित्तजाणवत्तं गहिय गुणरयणसंजुत्तं // 191 // नारीओ धनाओ जाओ वयं लिंति इह कुमारीओ / विसयामिसलुद्धाओ मुद्धा अम्हारिसीओ य // 192 // रमणप्पिया पुण बद्धा घरए सारीव वारंवारमहं / निवकुंजरस्स बंधणहेऊ वारीव संजाया // 193 // मम अहियरूवलच्छी | // 15 // CCCCTOk Page #29 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / शीलसत्त्व| रक्षार्थ मृगावत्या: सद्भावविचारणा, दूतप्रेषण // 16 // ESSASARNAGAR एसा लोउत्तरा उ कउओच्छी। जीइ सवणेवि राया जाओ अइकामकच्छुल्लो // 194 / / अन्नं च दिवचरिए वामेवि हु निम्मरेण वित्थरिए / हिययंमि दुक्खभरिए सत्तं सीलं न मोचवं // 195 // अक्खोहो अत्थाओ जलही रयणायरोवि सिरिवासो / अचलियमेरो गरुओ असंखसत्तालयो जेण // 196 / / अइउक्कडम्मि सत्ते बुद्धी पुरिसस्स जायए जीए / अत्थं पेच्छइ एवं कविलस्सवि सासणे मणियं // 197 // सत्तो सो सप्पुरिसो उदयगओ दिणयरो व अनसिं / अवहरइ तमं तेयं करइ पयावं जगुजोयं // 198 // सीलं भन्नइ वित्तं सम्मं तमखंडियं वहइ जो उ / सो पउमं व सुराणं लहइ सिरग्गे पइट्ठाणं // 199 // पुरिसो अखंडवित्तो वंसग्गपइडिओ गुणाहारो। कल्लाणकलसरम्मो सियावत्तं व तावहरो // 20 // मुत्ताहलं व वित्तं विणा सिणिद्धोवि कंतिरिद्धोवि / गरुओवि सत्थसुद्धो नायमहग्यो हवइ पुरिसो // 201 // लोए सिरेण बुज्झइ मंगलहेउत्ति वित्तसंजुत्तो / सिद्धत्थउ व लहुओ कडुओवि हु तिबनेहिल्लो // 202 // सबासापरिपूरणदुल्ललियं सफलमेव मह सीलं / कल्लाणगोत्तरूढ़ नंदणवणराईसोहिल्लं // 203 // सीलंगाण सहस्सा अट्ठारस जीए मह मणे इट्ठा / तीए इन्हि किं पुण देसे सीलेवि संदेहो ? // 204 // ता बुद्धिओसहीए सीले सिरिपवयंमि लद्धाए। हणिऊण चंडतेयं जं गजन्तं गहिस्सामि // 205 // एसो न जुज्झसज्झो पजोओ किंतु बुद्धीए जेयहो / इय चिन्तिऊण सुइरं मियावई पेसए दूयं // 206 // तेण य दिट्ठो रायाऽणायासगओवि जो रविपयासो / सप्पणयं विनतो सा मियदेवी इमं भणइ // 207 / / कहमागच्छामि अहं ? बालो मे उदयणो सुओ जेण / वइरीहिं परिहविजइ लद्धावसरेहिं उग्गेहिं // 208 // उग्गतमाणवि कहमिव वइरीणं अवसरो इहं अस्थि / उइयंमि मए सूरे इय मणिए नरवरिंदेणं // 209 / / दुएण पुणो भन्नइ सच्चमिणं किंतु सुबइ इमंपि / जोयणसयंमि // 16 // Page #30 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 17 // ACARRC-SCRECORE%ACCES विजो सामिय ! ऊसीसए सप्पो ॥२१०॥ता उजेणी दिढइट्टयाहिं पायारमाइकरणेण / सुत्थं करेह सम्म जेणऽम्हं निव्वुई होइ मोहिचण्ड॥ 211 // ता चउदस रायाणो सबला सेणीए ठाविया तेण / अगई गंतुमणो रहभोगमणोरहसयाई व // 212 // हत्थाहत्थ- | प्रद्योतेन परंपरपओगओ आणियाहिं इट्टाहिं / कारवियो पायारो उज्जुपजोयराएण // 213 // निप्पन्ने पायारे सरणागयवञ्जपंज- सजीकृतारायारे / परपुरिसाए अलंघे महासईणं व हिययंमि // 214 // इन्धणधणकणचोप्पडकप्पडमाईहिं पूरिए अंतो। तत्तो मिगा- |यां कौशावईए मणोहरे व अइगुरुए // 215 // सह इंदियपसरेण रोहं पोलीण तो दिदं काउं। चिट्टा एसा देवी चारित्तग्गहणस- म्यां द्वाद्धाए / 216 // निजिणियमोहजोहा मुक्कविरोहा विसप्पिगुणसोहा / ओहामियनरनाहा देवी चिंतइ इइ सलाहा // 217 // // राणि पिधन्नो सो चिय देसो विहरइ सिरिवीरजिणवरो जत्थ / अवहरियदुरियतिमिरो मिहिरो इव सुहकरोल्लासो // 218 / / कोसंबीए Iधाय मृगाकयाई बोहितो भवियकमलसंडाई / आसुल्लाससमुजयपाएहिं पवित्तयं काही / / 219 // दोसाविसारणेणं जस्सागमणेण होइ |वत्या दीअच्छरियं / सवाण कोसियाणं सम्मदिट्ठीण आणंदो // 220 / / अरुणकरपल्लवम्मि य समोसढे जम्मि तावपडिवक्खे / दार्थ भगवसुमणोवियासरम्मो सच्चमसोउ वहइ लोए // 221 // जयचक्खुम्मि जिणिन्दे समागए दलियमोहनिइंमि / गम्मागम्म- दागमनसविवेगो कामंमि निसायरे नढे // 222 // दूरीहवन्ति सहसा कामग्गहविसमविसहरप्पसरा / भुवणपहायर-| | रणे कृते जिणवरफुरियमहामंडले दिवे // 223 // किं बहुणा? जिणनाहे समागमे मज्झ पूरिउम्माहे / पडिवजिस्सं दिक्खं प्रमोरागसिक्खमवस्सं गहिस्सामि // 224 / / चिन्तन्तीए तीए मिगावईए वियंभिओ पवणो। सुरही सीयलमउओ दिवो निव्वुइकरों मनम् / झत्ति // 225 / / तेण य नच्चिरविहसिरमणमुहनयणुप्पलाए देवीए / पुलओ अंगे पउमिणिनालयकंटयसिरि पत्तो // 226 // // 17 // gosto Page #31 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी जयन्तीप्रकरणपृतिः / देवरचितसमोसरणस्वरूपम् / // 18 // तो उज्जोओ दिणयरकरनियरखरत्तवारणुज्जुत्तो / पज्जोयस्सवि तिक्खत्तणं हरंतो परिप्फुरिओ // 227 // अद गिरिकंदरअंतरअवगाहगहीरदुंदुहिनिनाओ। रोहनिवारणपडहप्पयाणघोसो व उच्छलिओ ॥२२८॥रयणमएहिं तत्तो दसद्धवन्नहिं सुरविमाणेहिं / नंदणमिव कुसुमेहिं समंतओ उच्छयं गयणं / / 229|| पवणदोलिरधयवडकिंकिणिरवमुहलदसदिसामोओ। बहिरंतरंगरिउजयपि. सुणो धम्मज्झओ पत्तो // 230 // तित्थयरत्तसिरिए रयणमयं दप्पणं व तिलयं व / पिच्छइ य धम्मचकं लोओ मुत्तं पयावं व // 231 / / बहिरंतोच्चिय समियं स्यपडलं कलुसभावसंजणयं / गंधोदगवुट्ठीए तुट्ठीए सबलोयस्स // 232 // गयणट्ठियपसरियकरसिंहासणसणेणं समकालं / सवं चिय दूरगया जमिह गया सबलोयाणं // 233 // अइअच्छरियं एयं जमिह जए वीरनाहनिस्साए। चमरोप्पायनिवाए सुरासुराणपि आणंदो // 234 // संसारजलहिमहणुप्पन्नसुहापुन्नकुंडतयधवलं / अह पेक्खिय छत्ततयमिव लोए जायमारोग्गं // 235 / / धवलगुणपक्खधाओ हंसगई कणयकमलट्ठियपाओ / निद्दलियजणविसाओ मियावईविहियसुपसाओ // 236 // आगच्छइ जिणराओ वीरो पणमंततियससंघाओ। अइसयसयसंपाओ इय लोएण परिमाओ॥ 237 // चंदावयरणउजाणयमि अह तत्थ सो समोसरिओ / चउदसहिं गुणनिहीहि समणसहस्सेहिं परियरिओ // 238 // तो वाउकुमारेहिं पमजिए सुरहिसलिलसित्तंमि / मेहकुमारेहिं पुणो जोयणमित्तंमि खित्तमि // 239 / मुणिमणमिव समममलं तत्थ सुरावि स्ययंति मणिपीढं / जं जिणवदारुजणं हियएण धरइ पडिविया // 240 // वेमाणियसुरकप्पियमगिमयकविसीसरयणपायारो। इट्ठफलो नंदणमिव नाणारुइमंजरीजालो // 241 // जोइसियनिक्कनिम्मिवियरयणकविसीससालकिरणेहिं / हीरइ लच्छीलीला चंपयवण्णकुसुमसुंदेरो॥२४२॥ मवणवईहिं रइओ य कणयकविसीसरययपायारो / कुणइ जणाण विलेवणमिव LOCABCCCCC%ACCOCA-C4-5 // 18 // Page #32 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 19 // वन्दनार्थ प्रद्योतमृगावत्युदयनादय आगताः। CHOCOCCASIOGRECRUIC कुंकुमचंदणकरेहिं // 243 // चउदिसीडझंतागुरुधूवघडीउच्छलन्तधूमेहि / सवं अवलेवंजणमिव हरियं निवइनयणाणं // 244 // चंदणपल्लववंदणमाला सोहिंति पोलिदारेसुं। इंतसिरिकंठसंठियमरगयमणिकंठियाउ व // 245 // जिणनाहोवरि रत्तसोयं ददृण घणमहाभोगं / धरइ असोओ लोओ अइअणुरागं जिणस्सुवरिं // 246 // रइयम्मि समोसरणे भवभीयजणाण अभयसरणमि / तित्थयरचसिरीए विलासभवणमि रमणीए / / 247 // पुबद्दारेण जिणो सिरिवीरो देवकोडीपरियरिओ। पविसेऊण सिंहासणे निसीयइ तओ तिदिसं // 248 // जिणवरपडिविम्बाई देवा श्ययंति सरिसरूबाई / तित्थयरनामपुन्नप्पभावओ हुंति ताईपि // 249 // तत्तो पज्जोयनिवो मियावई उदयणो सपरिवारो। जिणपायवंदणत्थं उपसंता इंति भत्तीए / / 250 // तिपयाहिणीकरेउं वंदित्ता जिणवरं महावीरं / सुस्साए जहारिहट्ठाणाऽऽसीणेसु भवसु / / 251 // तो तावहरणीए पुलयंकरकारिणीए सरसाए / अमियरससारणीए निद्धीकयखित्तधरणीए // 252 / / घणगजियगहिराए विदरमहिचारिणीए वाणीए / सच्चं चिय धम्मकहा रयणसलाय व विच्छुरिया // 253 // संसारम्मि अपारे पारावारे दुहोहजलभारे / दुल्लहं खलु मणुयत्तं बताणं दुरुत्तारे // 254 // पत्ते विय मणुयत्ते आरियखित्तंपि दुल्लहं जत्थ / धम्माधम्माईणं विवेयरयणस्स उप्पत्ति // 255 // तम्मि य उवलद्धे पुण सुकुलं न लहंति कम्मपरितंता। उक्खित्तं च किल भरं वहति धवल व सुकुलीणा // 256 // बहुपुनपावणिजा सुवनजाईवि तम्मिवि जियाण / भुवणब्भहियं जीए सौरभ बिति मइमंता // 257 // अवि तीए लद्धाए अरूवया अणरिहा गुणोहाणं / सिद्धच्चिय जं लोए अरूवयत्तेण नमणिजा // 258 // अवि रूवंमि अरोगो जीवो सुहभावकारणं होइ / बाहिजए सरोगो उक्कलियाहिं जहा पउमो // 259 / / अरोगे च्चिय पुनं आउं कल्लाणकारणं E5% CRECR5 // 19 // % Page #33 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / | संसाराs. सारतावि|पया वीरप्रभोःशना। // 20 // SCRIHARCOSRECASISEX दुल्लहं। दिढदीहरजीवत्ता साहइ घणुइंपि परलोयं // 260 // अवगयरयपडलाए सत्तुल्लासाए जीए बुद्धीए / पडिविति वियारा सुहावया सावि अइदुल्लहा // 261 // आलस्सयाइपडिहाररूद्धमुणिरायपायदिट्ठीणं / धम्मसवर्णपि न हवइ जियाण अवि बुद्धिमंताणं // 262 // धम्मसवणेवि दुलहो अवग्गहो नाणावरणउदयम्मि / विम्हरणसंभवाओ य धारणासत्तिविरहाओ / / 263 // अवगहियम्मि व धम्मे सद्धा जीवाण दुल्लहा चेव / सा प्रण सिद्धिवहूए संगमकरणेकतल्लिच्छा // 26 // करिणो इव भवरले सद्धावतावि संजमं कहवि। पाविति गुरुपओगा सच्छंदविहारसहरसिया // 265 // एसा दुवालसगी अंगीकाऊण सव्वचारित्तं / सहलच्चिय कायबा दसविहमुणिधम्मसेवाए // 266 // तहाहि-कोवदवसलिलधारा इंसाए बंदिणीए दिढकारा / उग्घाडियसिवदारा खमा इमा सत्वगुणसारा // 267 // विमलगुणरयणगभं जेण खमं धारयति कुलगिरिणों / तेण चिय अईगरुया समुन्नया सासया जाया / / 268 // सेसोवि खमाहारो ईसरहिययंमि पत्तसिरिहारो। निच अमियाहारो जाओ पुरिसोचमाहारो // 269 // माणगिरिदलणवजं साहणं दिनसिवपरीरजं। विणयगुणकरणसञ्ज मद्दवमिह सिद्धनियकों // 27 // नवणीयमिव सिणेहं महग्घयं कुणइ महवगुणेण / ताविजंतोवि दिदं पुरिसत्थपसाहयं जीवो // 271 // चंदस्स व अवि पुग्नं वित्तं पत्तस्स निम्मलकलस्स / जीवस्सेह कलंको हवह मओ जस्स हिययंमि // 272 // लीलाए मुनिवरिन्दो अजावजेण दलियमाहप्पं / काउण कवेडसेलं सिवपुरमग्गे सुहं जन्ति // 273 // मणवयणकायजोगा अजुणवाण छ अजवुजुत्ता। धम्मगुणसंपउत्ता परलोयपसाहया हुंति // 274 / लोउत्तरियं चरियं परलोओ जमिह सिज्झइ जियाण / 1 तस्परा / 2 शेषनागोवि / 3 मदः / 4 आर्जववत्रेण / 5 कपटशैलं / -OCALCCIRCREASO 495 // 20 // Page #34 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 44 // 21 // क्षमादि दशप्रकारमुनिधर्मवर्णनम् / कुडिलतविरहिएणं विणएण साहुधम्मेण // 275 // जलरुवा अवि जीवा भवण्णवे मुत्तिसुत्तिसंलीणा। अंतोबहिं व विमलीहवंति मुत्ता महप्पाणो // 276 // संसारम्मि मसाणे सा गिद्धी फुरइ मुत्तिरहियाण / सम्मदिट्ठी जीए गसिज्जए दिजाए दुक्खं // 277 // अच्छरियमिणं लोए साहूणं धम्मकम्मनिरयाणं / जं मुत्तिउवायाणा होइ असुत्ताणउप्पत्ती // 278 // घणसंचियपावोदयसोसयपसरंतबहुपयावस्स / सचं मुणिहिं भणियं तवस्स जं जेसुइमावो // 279 // परमहिमभाववसओ तवसा डझंति कसिणकमलाई / जं तेण जडिमभावो नस्सह तं पुण महच्छरियं // 280 // गुरुपायसंपओगे तवंमि सिरिपवयम्मि जायति / लद्धीओ ओसहीओ जराइसमणीउ साहूणं // 281 // सीलंगसहस्साणं समग्गसचीण फुरियतेयाणं / संनिहिए नहु दोसो मणमक्कडसंजमे विहिए // 282 // आसवदाराणं संजमम्मि संवरसहावकलियम्मि / नहु होइ पावपंको मुणीण अच्छेरियं एवं // 283 // आसबनिसेधरूवे मुणीण जं संजमे कए होइ / अपमत्तया सयावि हु किमत्थ विबुहाणमच्छरियं // 284 // सच्चे चिय सलहिजइ लोए लोउत्तरेवि गुणगुरुयं / धम्मस्स कप्पतरुणो मूलं सच्चं चिय वयंति // 285|| सच्चं सुरतरुमंजरिकरणिं धारेइ दसदिसामोयं / दिवा माहप्पसिरी जं तत्थ समाइ ममरि // 286 // सत्ताण हियं सच्चं तं चिय अमयं वयन्ति मुणिवसहा / इह तं आसायन्तो अमियप्पा होइन हु चोजं // 287 // अपिच-अलियं न भासियवं अस्थि हु सञ्चंपि जं न वत्तवं / सच्चंपि होइ अलियं जं परपीडाकरं वयणं // 288 // जलसोयं चिय अंगीकाउणं जे नरा पयम॒ति / ते संसारमहोयहिमवगादा ठंति चिरकालं // 289 // पढमं च दयासोयं सच्चमतेन्नं च बंभचेरं च / निस्संगया य सोय 1 मुक्तिशुक्ति / 2 निर्लोभतोपादानात् / 135SUS4% // Page #35 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरण धृतिः / // 22 // नम्। SOCCASNACOCOG परमत्थवियारणेणेवं / / 290 // एएणं सोएणं अइनिम्मलसंवरेण भावमलं / पक्खालिऊण सुद्धा लहंति सिद्धिं लहुं जीवा सम्यक्तादि // 291 // दुहभयजणणी निव्वुइहणणी जीवाण इह सकिंचणया / इय साहूहिं पवना उत्तमवनाऽसकिंचणया // 292 // 1 देशविरतितीए अभयपुरीए नाऽयाणभयं हवेज कइयाबि / तत्तो धम्मज्झाणं पवत्तए मुणिवरिंदाणं // 293 // अविय-तीए निवसंताणं धर्मवर्णदिढसत्ताणं जियाण तुट्ठाणं / निजियसयल वणो न मोहरायावि पभवेइ // 294 / / भच्चेरं च थेरं सपाडिहरं सुरावि पूयंति | संपत्त अत्तलाहो जओ तओ होइ जियलोओ // 295 // अपि बंभवुड्डभावे महग्घसोहग्गजणियरंगाओ / अइसयसयलच्छीओ सयंवरा इंति साहूणं // 296 // इय दसविहधम्मकहासुहाए चारित्तमोहणीयविसं / अवसरइ तओ भवा दिक्खं गिन्हंति संविग्गा // 297 // एसो जईणधम्मो लहुकम्माणं जियाण अइसुहओ। उइए चरित्तमोहे गिहिधम्मो पुण कारेयवो / / 298 // सम्मतमूलमणुवयगुणवयसिक्खावएहिं परियरिओ। वारसमेओ सिवसुहपरंपराकारणं एसो // 299 // धम्मस्स कप्पतरुणो सम्मत्तं मूलबंधुरं धणियं / संकाइमलविमुकं सरसखमाए गुणारूढं // 300 // इय धम्मदेसणेण तिमिरमिव दिणयरेण अवणीए। मिच्छत्ते भवजणा सिवपुरमग्गं पवजंति // 301 // एत्थंतरम्मि एगो, धणुवाणसणाहपाणिपउमजुओ। मिल्लो मणसा पुच्छइ पणओ उद्धावबद्धजडो // 302 // तत्तो जिणेण भणिओ वायाए भद्द पुच्छसु तुमति / तो तेण पुणो वृत्तं जासासासत्ति किं नाह! // 303 // सासत्ति जिणेणुत्ते गोयमसामीवि पुच्छए पणओ / भय किमेस जंपइ ? पन किंब तुम्हेहिं // 304 // भयपि तो पसाहइ, गोयम ! चंपाए धाउवायविऊ / आसी सुवनगारो, अणंगसेनुत्ति नामेण // 305 // रूवेण कामदेवो चाई भोगी पियंवओ सुहओ। इच्छियदाणपयाणा, INJ // 22 // ANKARACKASARAS Page #36 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 23 // RECOGRA | परिणेइ तरुणीण पंचसए // 306 // रूबोवहसियदेवंगणाहिं कीलइ य ताहिं सच्छंदं / दोगुंदगो व देवो गयपि कालं न | तदवसरे याणेइ // 307 // जद्दियहं जीए समं निवसइ तद्दियहमेव सो देइ / वत्थाभरणविलेवणगंधाइयं न सेसाण || 308 // IR भील्लप्रश्नोईसासल्लियहियओ रक्खइ सयमेव सो तहा ताओ। करपसरदिन्नतावं जहा न पेच्छन्ति सूरंपि // 309 // अह तस्स बाल त्तरे भगमित्ते समागए अन्नया विगयदोसे / सो जंपइ पेमपरो वियसियमणनयणमुहकमलो // 310 // सवासाण पयासं मित्तो वता कथिच्चिय इह करेइ जियलोए / सयलसुहाण निवासो समयाणं तह सरहस्साणं / / 311 // तो कहसु मित्त वच्छल सुरूवविहवेहिं तोऽनङ्गकिमिह पुरिसाणं ? / सेसाणमहं ऊणो न बल्लहो जेण रमणीणं // 312 // तेणुत्तं गुणरहियं रूवं किं ? आउलीए कुसुमं व / सेनस्य वसुपूरिओवि न रवी सुहओ जे एस करचंडो // 313 // जो किन्तु महुरभासी सिणिद्धदिट्ठीए पेच्छइ सहावं / नीयं चिय वृत्तान्तः। परिसकइ सययं अणुवत्तए छंदं // 314 // दुब्बयणेवि न रूसइ तूसइ अब्भत्थियं च वियरेइ / कित्तइ गुणे परोक्खे कलासु पयडेइ नेउन // 315 // पढइ य थक्के थक्के सुहासियं जं सुहाइसंसित्तं / नीयगमित्तच्चाई उत्तमसंसग्गदुल्ललिओ // 316 // इच्चाइविमलगुणरयणरोहणो मोहणो जयस्सावि / सुहओ पुरिसो किं पुण वियरमणीण तरुणीण 1 // 317 // इय सिक्खविउं नीओ निययघरं तेणऽणंगसेणोवि / पेमेण न्हाणभोयणविलेवणाईण कजेण // 318 // ता अवसरोत्ति काउं तम्महिला मजणाइ काऊण | कथसिंगारा दप्पणहत्था सच्छाउ चिट्ठति // 319 // पत्तो अणंगसेणो हट्ठो तुट्ठो विसजिओ सुहिणा। आगच्छइ नियगेहे पेच्छइ मजा सनेवत्था // 320 // अह सिंगारो तासिं तं तावेइ जह जलंतअंगारो। संगारो इव ईसा१ अवसरे। 2 संकेतः। // 23 // Page #37 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 24 // NAGARAAR CARDC मच्छरकोवाण संमिलणे // 321 // दुभिउडिभासुरनिलाडवट्टेण तेण तो गहिउं / एका घार्यपयाणा तहा हया जह गया | भार्याघातिपाणा // 322 // प्फुरियकरसूरमंडलसरिच्छदप्पणसएहिं पडिहणिओ / मरणभयकंताहि कंताहिं गंगसणोवि / / 323 // तो तानसेनो अणुतावो दावो दहइ इमाणं मणं वणंतं व / पसरंति धृमसरिसा दीहा उन्हुन्हनीसासा // 324 // कज्जलरुइघणनयणाण | मृत्वा भवं ताण पवहंति वाहजलधारा / सुकंति कंतिजुवणजवासया तोहं सवेवि // 325 // का अम्हाणमियाणि गइत्ति ? पइमारियाण | भ्रान्त्वा लोमि / इय चिन्तिऊण ताओ अग्गि साहिन्ति गिहमज्जे // 326 // मणुयाउयमावल्जिय पच्छायावेण साणुकोसेण / कुशस्थले विजयस्स पल्लिवइणो चोरा जाया तओ ताओ // 327 // पढमा पत्ती गामे कुसत्थले सोमिलस्स विप्पस्स / साहसियनाम- सोमिलविअइकूरपुत्तभावेण संजाया // 328 // सो उण अणंगसेनो दुकम्मपरिणामपरिणओ भमिउं / कइवयभवंतरेसु उप्पनो तस्स प्रस्य लघुलहुभगिणी // 329 // सो तीए बालहारो तं पुण निद्दहइ मयणअंगारो / पुत्वभवकामगिद्धीचुल्लीए जलणसंभूओ / / 330 // पुत्रीत्वेन सो तीए रुईतीए निरंतरं वाहसलिलबिंदुहिं / नहु विज्झाइ जहा घणधाराहिं इरमैओ अग्गी // 331 // साहसियबंधुणा जातः। पुण निवारयंतेण अन्नया कहवि / रमणपएसे छिक्का तुन्हिक्का सा ठिया झत्ति // 332 // लद्धोवाओ एसो निचं तह चेव काउमाढत्तो। जणयजणणीहिं दिट्ठो निवारिओ ठाइ न कहवि // 333 // चिन्तियमेएहिं तओ न सीलमुई वहेइ सुविसुद्धं / पुत्तो दुट्ठो धिट्ठो विणएणं वजिओ एसो // 334 // ता अम्हाणं एसो सद्धिं वासोदएण वदंतो / आसामुहाई काही तामसमावेण कलुसाई // 335 // अनं च-तिक्खग्गकढिणफलया अइधणजलभाववुद्दिमावना। पुट्ठावि 1 घातप्रदानात् / 2 तासां / 3 मेघवन्हिः / 4 अशीलता पक्षे-असिलता / / // 24 // Page #38 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 25 // 34 | पल्लिपति| साहसिक स्वसुः तीव 4-SCIEO50 य छेजकरी असीलया दूकरणीया // 336 // अविणीओ अवणीओ को गुणगामपउरमज्झाओ। अन्नह जह जह वियरइ दहेइ अग्गि व अविणीओ // 337 // इह चित्तकम्मपरिणइवसेण पियरेहिं निप्पिवासेहिं / नियगेहा निच्छुढो साहसिओ भमइ सच्छन्दं // 338 // परिसंवतो देसेन्तरेसु भवियत्वयानिओगेण / साहसिओ पल्लिवई दुविओ विजएण तत्थ गओ / / 339 // सा तस्स पुणो भगिणी, पालिजंती कमेण संपत्ता / उवणजुव्वणलच्छी विणट्ठसीला य चिन्तेइ // 340 // खंडियसीला इहि रमामि सेच्छं किमित्थ संकाए ? / मुंडाविज्जइ सीसं कए न एकाए घडियाए // 341 // जुब्बणमणमि | वेओदयेण कयउब्भरा न संगेण / गामंतरेसु हिण्डइ सा अट्टा कामकण्डूए // 342 / / अन्नन्नपुरिससंगमकिलिञ्चसंघट्टओ हसहसेइ। तो तीए इस्थिवेओ कुकूलअग्गि व पइसमयं // 343 // अह अन्नया गया सा गामे एगंमि तत्थ ते चोरा। संपन्ना तो वुत्तं तयहुत्तं तीए रत्ताए // 344 // अम्हारिसीहिं तुम्हं तरुणीहि किं ? न कज्जमत्थित्ति / तो नाउं तब्भावं सा नीया तेहिं नियपल्लिं // 345 // एसा अम्हुवभोगा एगा मा होउ कहमवि विसन्ना / इय चिन्तिऊण तेहिं आणीया अन्नया अन्ना // 346 // तो सा साहसियससा कसाइया दंसणमि महिलाए / तं खीवइ कुवमज्झे गएसु अन्नत्थचोरेसु // 347 // पञ्चागयतेणेहिं सा पुट्ठा कत्थ तुज्झ भगिणित्ति / आरुट्ठा तो जपइ किमहं जाणामि तुम्हं पियं? // 348 // किं न सयं चिय रक्खह ? भज्जं सोहग्गरयणमंजुसं / मं आयरेण पुच्छह अणुरत्ता तीए बुत्वंतं // 349 // इह तीए वयणेहिं नयणेहि तहय अंगचेट्ठाहिं / अणुमाणेण नायं एयाए चेव सा निहया // 350 // तो साहसिओ चिन्तेइ एसा अइविसयपरवसा कावि / किं होजा ? दिवजोगा मह भयणी मयणनिवनयरी // 352 // जइ सच्चं मह एसा, ससा असेसाण पावकम्माण / कामोदयस्वरूपकथनम् / 4 %% // 25 // Page #39 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती प्रकरणपतिः / वर्जक // 26 // श्रुत्वा केचित् तो पावं अइगरुयं जायमगम्ममि गमणेण // 352 // ता सुबइ सबन्नू कोसंबीए समासढो तत्थ / गंतूणं परमत्थे पुच्छामि प्रमुकथितः अहं लहुं चेव // 353 // इय चिंतिऊण गोयम ! साहसिओ एस आगओ मणसा / लजाए पुच्छंतो वुत्तो वयणेण पुच्छ परदारातुमं / / 354 // तोऽणेण पुणो भणियं जा सा सा सत्ति किं ? भवे भयवं ! अम्हेहिंवि तो कहियं सा सत्ति असंसयं चेव // 355 // गोयम ! कामपिसायग्वत्थाणं ता न होइ इह सोयं / सोयंति पुणो नाए अगम्मगमणाइए पावे // 356 // स्वरूपं विसयविसधारियाणं अणारियाणं जियाण जियलोए / वियरइ पच्छायावं गोयम एवंविहं पावं // 357 / / विसयामिसगिद्धीए जेसि न दिट्ठी जियाण विद्धत्था / संसारंमि मसाणे पडियाणं ते चिय कयत्था // 358 // वडवानलो जलंतो सागरलहरीहिं जह न विज्झाइ / न समइ कामोवि तहा उवमोगपरंपराहिपि // 359 // जेसिं अप्पा सवसो न रसो भोगेसु लहुयकम्माणं / सर्वदेशउवसमसुहाभिसित्ता सत्ता सुत्ता व ते धन्ना // 360 // जे देसबंभचेरं चरंति परदारवज्जिणो गिहिणो। देवकयपाडिहेरा नमणि-10 विरतिज्जा हुंति तेवि जए / / 361 // तदुक्तं-कह ते न वंदणिज्जा ! रूवं दळूण परकलत्ताणं / वाराहय व वसहा गच्छंति महिं पलो सम्यक्त्वयन्ता // 362 // जाण परजुवइमणहरभमुहाधणुमुक्कलोयणसरेहिं / सीलकवयं न भिन्न नमो नमो ताण पुरिसाण // 363 // है इत्थीवि पसंसणिजा तित्थं व पावित्तधारिणी लोए। परपुरिसपरीहारं हारं व धरेइ जा हियए / / 364 // लोउत्तरेवि लोए सीयाइ धारिणो महासईण सुच्चंति / सत्तावीसजोयणकिरणावलिविमलचरियाई // 365 // इयऽणंगसेणचरियं वित्थरिय भयवया मुणेऊण / जाताः। सत्ता भवनिवना परमं संवेगमावना // 366 // परिचत्तगिहावासा एगे चारित्तसिरिपियविलासा / लिंति जिणेसरदिक्खं सिक्खं सिवसंगमोल्लासा // 367 // अन्ने विरयाविरई विसुद्धसंमचदित्तमणिदीवा / मिच्छत्ततिमिरहरणा सिवपुरपहपत्थिया लिंति // 26 // गुण RECACARRCH 464ORANX Page #40 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 27 // ततो // 368 // अवरे भद्दगमावा भवंति परभज्जवजणुज्जुत्ता / उवलद्धबोहिबीया उवरोवरि भाविकल्लाणा // 369 // एत्थंतरम्मि देवी मिगाबई पणमिऊण भत्तिए / संसारभउविग्गा संविग्गा विनवइ वीरं / / 370 // भयवं ! भवजलहिगया जीवा लण तम्ह पयपोयं / निच्चं चारितधरा पारं पाविति सिद्धिपुरं / / 371 // तो हं तुम्ह समीवे पडिवजिस्सामि सामि ! पलं जा पच्छामि जिणेसर ! चंडपजोयनरनाहं // 372 // ता भयवयावि भणियं अहासुह किंतु मा तुमं काही / पडिबंध सामग्गी जमेरिसी दाल्लहा भद्दे ! // 373 // तत्तो गच्छइ एसा चंडपञ्जोयरायपासंमि / तस्सुच्छंगे अप्पइ उदयणकुमरं नियं पुत्वं // 374 // सीलं रक्खंतीए पडिवन्नवयणओसरन्तीए / तो विनविओ तीए पओओ विणयवित्तीए // 375 // पडिबजे पत्वजं तम्टेहिं विसजिया अहं अज / विमुहा भवसोक्खाणं दुहावहाणं अणिचाणं / / 376 // किं वारेउं सको ? सकाइसमक्खमेस लजाए। तमकामोवि विसजइ तओ निवो चंडपजोओ॥ 377 // अंगारवईपमुहा तन्मजाओवि तीए सह अद्व / गिण्हंति तओ दिक्ख संवेगरसेण संभिन्ना // 378 / / अजा मिगावई सा चंदणबालाए सीसिणी तत्तो / विनयगुणरयणरोहणधरणिकरणिं समबहा // 379 // विसयग्गामपरंमुहमईवि विहरेइ विसयीमेसु / सज्झायसुहानिब्भरपसमियनिस्सेससंतावा // 380 // निप्पडिकम्मावि दिदं पडिक्कम्मुवओगकरणतल्लिच्छा। अंगोवंगवियारं पइक्खणं कुणइ अवियारं / / 381 // अट्ठमयट्ठाणपत्वयचरणवजासणीखमाधरणी। कोहदवानलसमिणीजलधाराधोरणी समणी // 382 // सिवपासायारोहणनिस्सेणी जीए विमलगुणसेणी / सा दमवणेम्मि एणी समुद्दगासुरनईवेणी // 383 // उत्तमकुलप्पसुया वरगुरुपायारविंदसलीणा / चारित्तधम्म 1 प्रतिपन्नवचनापसरन्त्या / 2 देशमामेषु / 3 विचारं / 4 अविकारं / 5 दम एवं वनं तस्मिन् / मृगावत्या दीक्षाभिलाषः पूर्णीकृतस्तस्याः स्वरूपं च / COPENSION // 27 // Page #41 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणवृतिः / ShakGA4% रायप्पहाणगुणरायहाणि व // 384 // अह अनया कयाई मिगावई विहियउज्जयविहारा / विमलीकर्यवयभारा वियत्रगुरुगच्छसिंगारा // 385 // सा अहिगयसुत्तत्था गीयत्था नायसवपरमत्था / चंदणबालाणुगया समागया नयरिकोसंविं / / 386 / / तो देवनमियचलणो मोहमहारायमाणनिद्दलणो / दुरियदवदावजलणो पावतरुम्मृलणो वीरो / / 387 // विहरतो नगराईसु गहीरसुरदुंदुहीनिनाएण / सिवपुरकवाडसंपुडविहडणनिग्योससरिसेण // 388 // कोसंबीनयरीए जंगमकप्पडुम व्व फलदाई / भयवपि तम्मि समये समोसढो बाहिरूजाणे // 389 / / कालेऽणते तीए जायं अच्छेरयं इमं तत्थ / सविमाणा रविचंदा समागया वंदिउं वीरं // 390 // सोहिंसु सूरससिणो पयाहिणतो तओ जिणिन्दस्स / तिजयपसरंतमुत्तप्पयावजसरासिसारिच्छा // 391 // वियसंति य मउलंति य कइरवकमलाई तम्मि समयम्मि / रटन्तअलिकुलाई अच्छरियमिणं वयंति व // 392 // अच्छरियपिच्छिरीणं नचिरलच्छीण नेउरारावो / विहसिरमउलिरकुमुयंबुएसु भमराण झंकारो // 393 // विहडंति संघडंति य हरिसविसाएहिं चक्कवायाई / जिणवयणाई वऽणेगंतवायसंवायरसिआई // 394 // सूरससीणं जोगो समसमयं कोसियाण आणंदं / वियरंतो खेयपि यऽणेगतपसिद्धिदिदुतो // 395 // दिवसपओसविसेसे अमुणिजंतम्मि अवसरे तम्मि / उवउत्तमणा सिग्धं समागया चंदणा वसहि // 396 // ससिसूरइंदविरइयमहसवाणंदगुंदलखित्ता / समणी मियाबई पुण चिट्ठइ तत्थेव खणमेकं // 397 // तत्तो रविचंदेखें दिवगईए गएसु सट्ठाणं / अवसंज्झाए एसा संपत्ता चंदणोवंते // 398 // अमियरससारणीए पमायविसवारिणीए वाणीए। तो अञ्जचंदणाए मियावई एवमालत्ता // 399 // उत्तमगुरुसंभ्या उत्तम 1 वृतभारा। // 28 // कौशाम्ब्यां सूर्यचन्द्रावतरणाश्चर्य मृगावती| साच्या अनुपयोगेन रात्रावुपाश्रयगमनम्। CARICS AE%EOCOCCA // 28 // Page #42 -------------------------------------------------------------------------- ________________ HARSAA TRE गुरुदिक्खिया तुमे वच्छे ! / उत्तमधम्मपवत्ता कह सहसा ववसिया एवं ? // 40 // सीलाइगुणसरोरुहदिणयरसुत्ति व तं विक्खाया। कहमुग्गतमेणेवं अंतरिया अणुवओगेण ? // 401 // तुह बुद्धी सलहिज्जइ जीए पायारसारघडणाए / तुमए कयमप्पपुर अमुसियवरसीलगुणस्यणं / / 402 // गुरुमोहचंडराओ तुमए बुद्धीए निजिओ वच्छे ! / कहमिन्हि पञ्जोए संमोहो तुज्झ संजाओ // 403 // सरइंदुकिरणसीयलसिक्खावयणेहिं होइ लजाए / सा कमलिणि व सहसा मउलियमणनयणमुहकमला // 404 // संतावहरणदक्खा तीए सिक्खा जहेव वरदैक्खा / निव्वुइमणा पयंपद मियावई तयणु पणयंगी // 405 // गुणकोडिसमारोहणकारणभूयाए धम्मसिक्खाए / दिनाए तए भगवइ ! परलोओ निजिओ चेव // 406 / / इच्छामो अणुसद्धि तावहरिं सरसमिच्छुलढि व / धन्नाणं चिय एसा संपन्जइ पुनवंताणं // 407 // एयाए सिक्खाए सरिसाए सारणीए अणवरयं / मूलगुणाण वुढ्ढी आरामाणं व रामाणं // 408 // अमियरसोवचियाए सेससिहाए व तुम्ह सिक्खाए / किं चुजं ? विबुहाणं धारिजइ जं खमाधारो // 409 // तो काऊण पसायं भगवइ ! तं खमसु एगमवराह / सयेराहं जेणाहं लहेमि सुक्खं अणाबाहं // 410 / / एवं पवित्तिणि सा खमावए पायनिहियसिरकमला / पक्खालियपावमला उवसंपजंतमोक्खफला // 411 // पडिवयणं अलहंती संचिट्ठइ सुट्ट सुद्धमगपसरा : निदापमायवसओ पवित्तिणीए खणं जाव // 412 // ताव मियावइसमणी परिसप्पिरदप्पसप्पफणिन्दमणी / तिणसलइय व नमणी उवसमगुणरायपियरमणी / / 413 / / भावणमेवं भावइ ते धना जे गुरुण मणखेयं / नहु जणयंति कयावि हुअवहाणपहाणपसरा // 414 // महऽणुवओगो 1 शरीरं एक्षे नगरं / 2 प्रद्योते-सूर्ये / 3 वरद्राक्षा / 5 शीघ्रं / चन्दनबालया शिक्षावचनकथने मृगावृत्या: शुद्धात्माविचारसरणिः। // 29 // Page #43 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CCC जयन्तीप्रकरणवृतिः / जाओ छउमत्थत्तेण तेण ते धन्ना / जे केवलनाणसिरीसहरिसपरिरंभसुहियंगा // 415 // ता कइया महज्झाणं उल्लसिही केवलज्ञाने पइक्खणं च वियसिहि ही / छउमत्थत्तनिबंधणकम्मिघणधूमधयसरिसं // 416 // इह सुद्धभावणाए य रायहंसीए तीए मण- प्राप्ते सति कमले / पसरंतीए असेसो रएण दुरं रओ क्खित्तो / / 417 / / निल्लेवियदोसुदया पइक्खणं लेसाविसुद्धहंसपहा / कमलवणं व 18| सन्मुखावियासइ अउर्वकरणं तओ एसा // 418 // तो कलियखवगसेणी अइदिदइंदोसणी पत्रेइ / उल्लसियवीरियत्ता मोहमहापवयं | गच्छत्सर्प सहसा // 419 // अह अहक्खायचरितं कल्लाणमहागिरिन्दमारूढा / वीसमिय पढमसमए निदं पयलं च नामस्स // 420 // ज्ञाते चन्दपयडीओ खवेइ कइवय चरिमे सेसाई घाइकम्माई / सा सुक्कज्झाणआइमदुमेयसिहरग्गमल्लीणा // 421 // एयाए सुक्कज्झाण- |नवालाहतरियाए केवलं वरं नाणं / विहुणियपावा पावइ मिगावई लद्धमाहप्पा // 422 // पेच्छइ लोयालोयं मुत्तामुत्तं च धूलसुहम स्तापसरणे च / निच्चानिचं सक्खं भावमणंतस्सहावं च // 423 // जस्सट्टाए कीरइ कट्ठाणुट्ठाणसंजमोजोगो / तम्मि य सा लट्ठा तस्या गतो कयकिच्चा निव्वुया जाया // 424 // दिट्ठो अणाए सप्पो सेजालंबंतपाणिकमलंते / न चंदणाए सहसा संगयनिदासही- निद्रावेणी // 425 / / गुणमणिरोहणविणयं पुवपउत्तं न खंडइ अनाओ। किर केवलीवि पाणी तीए तीएं तदुक्खित्तो // 426 // प्रमादः। केवलनाणदिवायरउज्जोइयफारकरसमुल्लासे / मुंचंति चंदणाए तो निदं नथणकमलाई // 427 / / जंपइ पवित्तिणी तो भमरी. झंकारमहुरवाणीए / अजे ! अञ्जवि चिट्ठसि ? म खामंती तुमं भद्दे ! // 428 // हद्धी मज्झ पमाओ जाओ सुपसायकयविसंवाओ। खामंतीवि तुमं विसज्जिया नो मए अजे! // 429 // पुच्छिजसि किन्तु तुम महबाहू चालिओ तए कीस। 6 घूमध्वज / 7 वेगेन / 8 अपूर्वकरणं / 9 इन्द्रवजा / 1 अशातः / 2 तस्याः / 3 तया। ' // 30 // रणवणयं पुखपउत्तं न खंडह मालवंतपाणिकमलंते / नागो। तम्मि य सालमुहा RECASHASHOES Page #44 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 31 // C प्रश्नं कृत्वा ज्ञाता तुम्हारिसीण चेट्ठा न विणा हेउं हवइ कहवि // 430 // जंपइ मियावई तो भगवइ किन्हो मए अही दिहो। कोणासजीहदीहो तो सवर्डमुहो तुरियं / / 431 // तो विम्हिएण वियसियमुहनयणा चन्दणा कयणुभावा / नजइ सुमणोणुगया गिम्हेण व पाडला फुल्ला / / 432 // पुच्छइ य सूइमेजे अन्जे ! एयंमि अंधयारम्मि / किं अपडिवाइअइसयनाणेण तए अही दिवो // 433 / / आमंति तीए मणिए सज्झसपुलएण कमलिणीलीला / वहइ भमराणुकारं मणकमले सा चमुकारं // 434 // मिच्छामि दुकडंति य भणइ मए केवली अउनाए / आसाइउत्ति अइबहुपच्छायावं वहइ हियए // 435 // आणंदनिम्भरमणा थुणइ य सा चंदणा तयं पणया / भगवह मिगावइ तं सिंहकिसोरी तुम जाया // 436 // जं कम्मकरिघडाणं दलणसप्नुच्छलियकित्तिमुत्ताहिं / सिवपहसत्थियमंगलमालमियाणिं तुमं कुणसु // 437 / / एत्थंतरम्मि देवा केवल. महिमत्थमज्जया इंति / चिंतिअमहो दंती ते खंती ते अहहमुहसंती / / 438 // तह धम्मकप्पतरुणो मूलं विणओ खमाइ तुह लीणो / विबुहनमणिजपाया जह सेससिरोमणी जाया // 439 // चउदिसिपसरियगुणगणखीरोयसमग्गएण जसससिणा। तुझ मिगावह ! भगवइ ! जगत्तई धवलिया कसिणा // 440 // ससिसूरविमाणागमपार्डिसिद्धिएऽणंतकालाओ। अजे ! केवलदंसणनाणाणं तुज्झ नं लाहो // 441 / / वासंति परिवहंत मिगावईउवसमस्स समसीसिं / विणिवारियरयपडलं विमलं गंधोदयं देवा / / 442 // एवं परिगलिआई झार्णपावणेण कम्मदलियाई। पुप्फाई अलिरुएहिं मुंचंति य इय वयंति व // 443 / / घणकम्मवंसजालीझाणानलदहणसद्दगंभीरो / विम्हयमुपायंतो पयट्टिओ दुंदुहिनाओ // 444 // इय काउणं 4 सम्मुखः / 5 मनोगतभावसूचकचेष्ठा। 6 अपुण्यया / 7 समुद्गतेन / 8 स्पर्धया। 9 स्पर्धा / 10 ध्यानजलसमूहेन / प्राप्तिः, ततश्च चन्द| नबालया कृता क्षमापना प्रशंसा च केवलिमृगावत्या // 31 // Page #45 -------------------------------------------------------------------------- ________________ S जयन्ती प्रकरणवृतिः / कृतो देवैः | केवलिमहिमा / तसुतनृपोदयनस्वरूपप्रदर्शनम् / // 32 // हिट्ठा केवलमहिमं महारिहं तत्थ / पयडगुणपक्खवाया जहागयं पडिगया देवा // 445 // केवलनाणदिवायरपडिबोहियभवियलोयकमलवणा / सा साहुणीहि विहरइ सद्धि देसेसु सुरमहिया / / 446 // परमहिमसीलपवयनिग्गयजसरासिसुरसरिपवित्तं / इय नियगुरुप्पसाया मिगावईचरियमक्खायं / / 447 // तीए य सुओ राया कोसंबीए महिड्डिओ रजं / पालइ उदयणनामा कुवलयदलसायरोल्लासो // 448 / / जस्स भुयदंडमंडवनिवासिलोयाण चंडकरतावो / न हवइ अवि रविणो इव पयडफुरंतप्पयावस्स // 449 // जस्संजणगिरिसोयरगइन्दगंडत्थलेसु मयलेहा / सोहिंति किन्हचित्तयअक्खयनिहिहेउमूलं व // 450 // जस्स तुरयाण लक्खा मणवेगा निद्धरोममुहसिद्धा / रेवंत विजयघंटा फुरंतटंकारसमहेसा // 451 // सत्तुबलजलहिनिमहणमंदरा रहवरा य अत्थेहिं / संपुन्ना सुकईणं कव्वपबंध व सुसिलिट्ठा // 452 // पयडियचित्तकलावा दुजीहसयखंडखंडणा सुहडा / सिहिणो व +सामिसवंगभारनिवहणदुल्ललिया / / 453 // बसुपूरेणं कोसो पूरिजइ जस्स कुवलए निच्चं / जं मित्तमंडलोदयपभावओ विम्हओ तेण // 454 // रद्रुमि जस्स विउले ईसरदुग्गाणुभावसुहवासे / सामिपसाइयलोए सग्गहिलासो कहं ? होइ // 455 // मेत्तीहिं सुमणेहिं मंतविहाणेण मंडले रत्ते / सवसीकया य पणया सवेवि हु जस्स दिसिपाला // 456 // जस्सासिलयावासा चंडी सत्तूण करसहस्सेहिं / नयणाई झपिऊणं पराहवं आहवे देइ // 457 // जस्स पयाणे रिउणो ढक्कागुरुसवणमित्तेण / गिहवासदुहेप्पिच्छा वणवासवयं पवजंति // 458 // रजमि जस्स विग्गहसंधिट्ठाणमि सम्ममुवयोगो / 11 हृष्टाः। 12 सूर्यपुत्र / 13 अश्व शब्दाः। 1 मयूरा इव / +कार्तिकेय 2 समर्थदुर्गानुभाव / 3 स्वर्गामिलाषः / 4 आछाद्य / 5 दुःखत्रस्ताः / CASCARRIECESS TRA // 32 // Page #46 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 33 // OCOMORRORSCOM पगईविहत्तिपओगो तो सिद्धी साहुसद्दाणं // 459 // जो जं सयं पयावो तओ पयावो फुरेइ भुवर्णमि / सच्चमिणं जं कारण- जयन्ति रुवाई हुंति कजाई / / 460 // एवं उदयणराया रजं पालेइ विक्कमनएहि / आसि जयंती सच्छा महासई तस्स य पिउच्छा तत्पितुः // 461 // सम्पत्तरयणिजाणिप्पहापहावुल्लसंतगुणनिवहा / नियवंसोवरि सुद्धावि जयंती वेजयंति व // 462 / / धवलगुणप खसा क्खवाया महुरसरा विरइकमलिणीलीला / गुरुवयणचरणराया सुगइरई रायहंसि व // 463 // दोसावहारउज्जुयरुईवि है| जिवादितगुरुजोइतेयसंभारं / पक्खदिणमुजोयंती अपुवदिणनाहमुत्ति व // 464 // सीलगुणखीरसायरसुत्तिसमुपनकित्तिमुत्ताहि / त्वज्ञात्रीप्रजीए कया हारलया दसदिसिरमणी हियएसु // 465 // जीवाइवियारेण वयणवियासेण सिंहसरिसेण / मिच्छत्त थमशय्यामोहमयगलदलणं जीए कयं लोए // 466 // साहम्मियाण सावयजणाण वच्छल्लसल्लइवणमि / दाणरसिया विअमया तरी धर्मजा विरह भद्दकरिणि व // 467 // आरूढगुणे धम्मे निचलदिट्ठीए जीए ठाणेण / संनिहियसरलयाए सिज्झइ मोक्खोवि मयलीलाए // 468 // उस्सग्गं अक्वायं सम्मं पयडेइ तत्थ तत्थ पए / सिझंतसाहुसद्दा सक्खं वागरणविज व // 469 // मानसा। गीयत्थेसु वियड्डा जाणियनिस्सेसभरहमज्झावि / वीरवइच्चिय रसिया पराजयंती भवसतुं // 470 // अत्थीणं कप्पलया जसससिसोहंतसयलमहिवलया। पयडीकयजीवदया सुहासया सुब्बया हियया // 471 // सिरिखद्धमाणजिणवरसाहूण समागयाण नमिऊण / सघरे सिज्जार्दोणा पढमा सिजायरी सिद्धा // 472 // अन्नं च-सिञ्जादाणपभावेणं तरेइ 6 प्रकृति विभक्तिप्रयोगः / 7 प्रजारक्षकः। 8 पितृष्वसा। 9 सम्यक्त्वचंद्रप्रभाप्रभावोल्लसद्गुणनिवहा / 10 विचारेण / | 11 वीतमदा / 12 विचरति / 13 अर्थिणां / 14 वस्तिदानात् / // 33 // Page #47 -------------------------------------------------------------------------- ________________ AR जयन्ती प्रकरणपृतिः / जयन्त्या आत्मभावनास्वरूपम् / // 34 // SAHAR भवसायरं / सिजायरो अओ वुत्तो सिद्धो सब सासणे // 473 / / सिजाट्ठियाण सुट्ठियगुणाणं साहूण साहूणीणं च / जे होइ समाहाणं झाणं नाणं सुगुणठाणं // 474 // नंदणमिव सुकयदलं सुजसप्पसवं च सिवफलं तम्हा / सिञ्जादाणं दिती जयइ जयं तेण जयंती // 475 // उवसमसुहामहोयहिसाहुसमीवम्मि संडिया एसा। संवेगैरसालिद्धा उक्कलियाहिं अपुट्ठावि // 476 // परियचिोंइ निचं सुतेयवंतेण जोइचक्केणं / मुणिसंनिहिषुवट्ठाणं सिद्धिं कुणमाणाण मासाणं // 477 // जियकोहमाणलोहा जियमाया बंभचारिणो मुणिणो / गुरुरयणदाणदच्छं ससंनिहिं दिति धन्नाणं // 478 // पगईए विरुद्धाण गइंदसिंहाइयाण जीवाण / उवसमइ कोवजलणो जिणवरमुणिसंनिहाणमि // 479 // मुणिवयणाओ जीवो अहियं माणं चएइ विज्झो छ / सुसइ य लोहो सबो मुणिमाहप्पेण जलहि // 480 // रिसिसंगमसंपावियपरमत्थेणेव परसुरामेण / मायावि दुबसीला निहणिजइ गुरुपयत्तेण / / 481 // इय साहुमावणाए सुहाइसिचंतसहगत्ताए / अजरामरत्तसिद्धि कमेण होही जयंतीए // 482 // अह चिंतेइ जयन्ती कया अहं सबसंगविरईए / नंदणवणराईए विहरिस्सं सुमणसानंदा // 483 // सिवनयरवत्तणीए पवतिणीए विइनसिक्खाए / दक्खाए उवसमिस्सइ कसायपित्तजरो कइया? // 484 // रमणीयगिरिवरेण कलिमलसंतावहरणदच्छेण / सज्झायनिजरेणं कया अहं निवुया होहं // 485 / / परमहिमेणं तवसा जोइसमल्लासहेउणा अहियं / डज्झिस्संति कया मह, सयलाई कम्मकमलाई / / 486 // मुत्तिपओगेवि दिदं सत्थपउत्तंमि समिइ. करणंमि / कइया दयारहस्सं पाविस्सं? एकचित्ताऽहं // 487 // चवलाण इंदियाणं हयाण दुइंतयाण दमणमि / उज्जयमई 15 संवेगरसाश्लिष्टा / 16 परावर्त्यते / 1 उत्कृष्टमहिम्ना / // 34 // Page #48 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 35 // 4 तस्या %%%%a5:0ROcts कयाहं सुगइपवित्तिं करिस्सामि 1 // 488 // एसो सच्चाहिट्ठियजिणधम्मोऽणंतगुणगणग्यविओ। काही कयाऽवसाणं ? कम्माणं दाणवाणं व // 489 // मोहिंधणम्मि अहवा झाणग्गिपलीवयंमि अहक्खायं / चारित्तं सुपवित्तं कया लहिस्सं अपडिवायं // 490 // मयलंछणअस्थमणे दोसावगमो य मह कया? जत्थ / निद्दाइतमविणासे झाणतरियापहल्लासे // 491 // जम्मि य निम्मलतेए अहं हि विहडंतकम्मघणपडले / केवलनाणदिवायरउदयाचलचूलिया होहं // 492 / / उदयंमि नाणसूरे पयडीहूयंमि मोक्खमग्गंमि / पडिबोहिऊण भवे अहं कया? ठावइस्सामि // 493 // इच्चाईसु दियसेसु दिढसुत्तियसंवेगनिबद्धगुणपवाहेहिं / पइदिणमणोरहेहिं सिवपुरपहपत्थिया संती // 494 // अहिलसह अह जयंती तिलोयचिंतामणिं जिणं वीरं / भवरन्नसत्थवाहं इन्तं दुहदावजलवाहं / / 495 // भयवयऽमूढलक्खो विग्धगइंदाण दलणहरिय॑क्खो / संकप्पकप्परुक्खो सुहसयरासि व पच्चक्खो // 496 // विहरतो नगराईसु परियरिओ देवदाणवगणेहिं / कोसंबीनयरीए समोसढो वीरजिणचंदो // 497 // चंदावयरणउजाणयंमि रइयं सुरेहिं ओसरणं / दुंदुहिनिनायकिंकि ल्लिदेवकोडीहिं रमणीयं // 498 // उजाणपालएण तुरियं गंतूण उदयणनरिंदो / वद्धाविओ जिणिंदागमणेणं पायपणएणं // 499 // अमिएण व सित्तेणं पुलइयगत्तेणं तुद्दचित्तेणं / दाऊण तस्स दाणं चिंतियमेवं नरिन्देणं // 500 // इह अञ्ज सुपभायं तिहुअणमित्ते जिणंमि अवइने / कोसियपरमाणदो चित्तं जमरिहनिट्ठवणं // 501 // निम्मलकलाकलावे जिणराए आगए कुवलयस्स / उल्लासेवि वियारो इह नहु चुजं भमरयाणं // 502 // वीरजिणिंदे कप्पहुमंमि उज्जायणम्मि अवइन्ने / मूलगुणाणवि उदये चित्तं न जडाण 2 सस्कृतः / 3 विनाशं / 4 सिंहः / 5 अशोकवृक्ष / 6 इन्द्राणां पझे घूकाणां / 7 चित्रं / दीक्षाभिलाषे भगवदागमनं पुनर्जातं वर्धापितो. दयननृपो हृष्टश्च / // 35 // Page #49 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती- प्रकरणवृतिः / उदयननृपाज्ञाकृतनगरीशोभावर्णनम् / वित्थारो // 503 // महरजं कयकजं लट्ठ रटुं च मंडलगरिदुं / वीरजिणो जत्थ सयं विहरइ कल्लाणमुत्तिधरो // 504 // | इइ चिंतिऊण उदयणराया सिंहासणाओ उद्वित्ता / सक्कत्थयं भणित्ता कारइ नयरीए उच्छाहं // 505 // सिचंति रायमग्गा चितिरण या चंदणमिस्सेण कुंकुमरसेण / पूइजति भरेणं कुसुमे हिं दसद्धवन्नेहिं / / 506 // सहयारसरसपल्लवपरंपरादिवभंगरयणाउ / बझंति मंदिरेसु वंदणमालाओ दारेसुं // 507 // पूरिजंति चउक्का मोतियघणसाररइयरेहाहि / तत्थ य चंदणचच्चियमंगलकलसा ठविजंति // 508 // चित्तमणिकिरणमिस्सियखीरनिहिलहरीसमूहतरलाओ। उभिजंति पडाया नच्चिरसिरिबाहुसुहयाओ // 509 // कीरति हट्टसोहा चीणंसुयछन्नदिनमणिमऊहा। लंबंतरयणमालासमूहपसरंतकिरणोहा // 510 // घोसिजइ अमारी दिजंति जहिच्छियाई दाणाई / सोहिजंति य कारा मुञ्चति य बद्धरुद्धाई / / 511 / नयरीए पणवघोसो वीरजिणंद वंदिउं जणो एउ / उम्माहियाए मोरुल्लवियसैणाहो निवाइट्ठो // 512 // सिन्दूरपूरपूरियविसालकुंभत्थलं सहह जस्स / रायपयावदिणेसरअरुणोदयगिरिसिहाभोगो / / 513 / / चलकन्नतालपेरंतकतरुलकंततारियापडलं / रेहइ पवणपणुन्नं जस्स य उडु| चकवालं व // 514 // जस्स य पयंडसुंडाभोगे अइलोलयावि गरुयत्तं / न हरइ सद्दत्थविऊ मुणंति विबुहावि एमेव / / 515 // | ससिधवलदंतमुसला अरिकरिकण्णरासिखंडणे कुसला / जस्स जसकित्तिवल्लीवियाणकंदकुराकारा / / 516 / / जम्मि य कवोलमित्तिसु मयस्सरेहा सहति सिरिघरए / चक्खुदोसावहरणकजलपंचंगुलिसगुत्ता॥५१७॥ गेरुयभूइविमत्तियकुलपवयउन्नयग्गकाएण / नक्खत्तमालममलं वहइ य जो दित्तमणिजालं / / 518 // जो सत्तंगपइट्ठियमुत्तिरजं व जंगम दुग्गं / निद्धनहो 1 मयूरवचनसदृशः / 2 टिकीशोभापटलं। 3 मदरसरेखाः। 4 समानाः / AC%ACROCKSG / / 36 // Page #50 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 37 // श्रीवीरवन्दनार्थमुदाय ननृपस्य समवसरणे गमनम् / 4%CEOCG15- 1 घणगजियसज्जियसिहितंडवाडोवो // 519 // कयमज्जणसिंगारो उदयणरायावि तं गुणग्घवियं / जयकुंजरमारुहिउं वीरजिणं वंदिउं चलिओ // 520 // जिणरायपायबहुमाणखीरजलरासिफेणमित्तेण / तावपडिकूलमुत्ताऽवचलसिरधरियछत्तेण // 521 // जस्स विरायइ हारो तारो विप्फुरियकतिवित्थारो। हिययत्थलंमि वावियसुकयंकुरबीयरासि व // 522 // सिवपहतरुकुसुमाणं गुच्छसरिच्छेहिं धवलचमरेहिं / वीइज्जतो राया रेहद इंदो व गच्छंतो // 523 // हेसंतहयं गजंतमेगलं घणघणंतरहलक्खं / दच्छभडाकोडिवियर्ड चउरंगदलं तओ चलियं // 524 // कयमंगलोवयारो विरइयसिंगारदिवलंकारो / अहमहमियाइ नयरीजणो जिणं वंदिउं चलिओ // 525 // संपट्ठियम्मि गए सोहह उच्छलियरेणुरिंछोली। जिणभत्तिकेयईपुडवियासपसमिरपरागो व // 526 // माऊरछत्तसियआयवत्तलक्खाई हुंति दक्खाई। गर्यणसरे नीलोप्पलकुमुयाण सिरीसमुबहणे // 527 // गयगजिय-हयहेसिय-रहंगरव-सुहडसिंहनाएण | भवजलहिमहणनिग्घोस एस किल नजइ बुहेहिं // 528 // जिणभत्तिकरणदच्छा विवेयससिकिरणहरिणनेवत्था / माणसजलं व सच्छा वच्छाहिवनरवइपिउच्छा // 529 // गच्छइ सावि जयंती सद्धासंवेगसारपरिणामा / बहुरिद्धिवित्थरेणं महिड्डियनरनाइपणयपया // 530 // पंचविहाभिगमेणं ओसरणे पविसिऊण जिणरायं / तिपयाहिणीकरिता बीरं वंदेह भत्तीए // 531 // अह बारसपरिसासु जहट्ठाणट्ठियासु सावहाणासु / भयवं वीरजिणिंदो धम्मकहं कहिउमाढत्तो // 532 // भवमरुमंडलमज्झे तन्हासंतावतावियजणाण / संकप्पियफलदाई कप्पहुमविन्भमो धम्मो॥५३३॥ दसदिढुंतदुर्लभं ल« मणुयत्तणाइसामग्गि। उज्जमह मा विसीयह सिवपहरम्मम्मि धम्मम्मि // 534 // 5 तापप्रतिकूलमुक्तावचूलशिरोधृतछत्रेण / 6 राज्ञि / 7 पंक्तिः / 8 दक्षाणि / 9 गगनसरसि / 10 चलन् / 11 धृति / // 7 // ace Page #51 -------------------------------------------------------------------------- ________________ SAGAR जयन्ती दानादिविषया भगवद्देशना। कृतिः / उग्गसमीरंदोलिरकुसग्गजलबिंदुचंचलं जीयं / एए य कामभोगा रोदा जह फणिफणाभोगा / / 535 / / उद्दामकामकामिणिकडक्खलोला इमाउ रिद्धीओ। गयथेमं पुण पेमं संजोगा तह य सवियोगा // 536 // अकयतवचरणाणं जीवाणं तिरियनारयगईसु / कम्मेहि दुचिन्नेहि होइ चिरं दारुणविवागो।। 537 // अविय-संजोगविओयानलविसायजालावलीहिं पजलिए। विच्छिन्ने भवरने को उसकन्नो "धेई कुणइ / / 538 // सइ सिवपुरम्मि द्वाणे अवियलहेउम्मि तस्स जिणधम्मे / अत्तहिएसीण अओ जुत्तो जत्तो तहिं काउं // 539 // सो दाणसीलतवभावणाहिं सुद्धाहिं इह भवे धम्मो / सिवपासायारोहणसोवाणचउक्करम्माहिं // 540 // दाणं पुण तिविहाणं नाणं जीवाण देयममयं च / अन्नाइ य जमुवग्गहकर विवेगेण दायत्वं / / 541 // विनायबंधमोक्खो प्रोक्खो वि य मोक्खकंखिरो होइ / तो इत्थ नाणदाणं निवाणं कुणइ जीवाणं / / 542 / / नाणेण विइन्ने] जीवो जाणित्तु पुन्नपावाई। तकारणेसु सम्म कुणइ पवित्तिं निवित्तिं वा / / 543 // पुन्नोवजणसजो जीवो | पावेइ नरसुरसुहाई। पावनियत्तो मुच्चइ नारयतिरियत्तदुक्खेहिं // 544 // लहइ य जिणधम्मरओ विरओ पावाओ सुक्कझाणेणं / सासयसोक्खं मोक्खं सत्तो नाणप्पभावेणं // 545 // परलोए इहलोए जीवो सोक्खाई जेण नाणेणं / पावेइ तेण पढमं वनिज्जइ नाणदाणमिमं // 546 // नाणं जेण विइन दिणयरकरनियरसमसमुजोयं / तेण विहन्न सिरिहरवियसियसमैत्तसयवत्तं // 547 / / भणियं च-सोगइमग्गपईवं नाणं दितस्स होज किमदेयं / जहतं पुलिन्दएणं दिनं सिवगस्स नियंगच्छि // 548 // गयणग्गलग्गसिहरो घणकाणणच्छन्नमेहलाबंधो / सिरिचरणनेउरारवसोयरनिज्झरणझंकारो // 549 / / वणराइकुसुमपरि१ त्रिविधानं / 2 मूोऽपि / 3 सम्यक्त्व / 4 निजनेत्रं / CROSAROSANSAANES Page #52 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 39 / / 4145433 मलसुरहीकीरंतदसदिसाभोओ। अणवरयसिद्धकिन्नरगीयज्झुणिसग्गरमणीयो // 550 // अत्थि इह भरहमज्झे झरंतसरि-8| तत्र सीयसीयरो सारो / गोरगिरी नामेणं सेलो हिमवंतवित्थारो / / 551 / / निज्झरणसंनिहाणे आसि तहिं गिरिवरम्मि उजाणे / ज्ञानदानोसंनिहियपाडिहेरो सिवामिहाणो सुरो एगो // 552 // वक्कलचीरावरणा गुंजाहलमोरपिच्छिआभरणा / पारद्धिगिद्धिवसणा परि शिवपिसियासणऽरन्नघरवसणा // 553 // धम्माहम्मवियारणदरट्ठिया रायनीइरहिया य / पव्वयवरे पुलिंदा सच्छंदा तत्थ निव जक्षस्योसन्ति // 554 // केणावि पच्चएणं निच्चलमत्ती सिवंमि देवम्मि / एगो ताण पुलिंदो निच्चं आराहणासत्तो // 555 // दाहरणम्। आगच्छइ पइदिवसं एसो तं पूइउं सिवं देवं / बाणसरासणहत्थो दक्खिणकरकुसुमपन्तीओ // 556 // मुहकमलाणीएण पाणिएणं पडिच्छए न्हवणं / सिरसा सो संतुट्ठो सिवो सुरो तस्स भावेणं / / 557 // तो पूइऊण पणओ पुलिंदओ तेण सिवसुरेणेसो / पुच्छिाइ कुसलाइयमुदंतमाणदियमुहेणं // 558 // सन्निहियसन्निवेसो तह आगंतूण माहणो एगो। तं देवं आराहइ निच्चं सविवेयविणएणं // 559 / / ओसारइ निम्मल्लं निज्झरसलिलेण न्हावए निच्चं / चंदणविलितगत्तं सुयंधकुसुमेहिं पूएइ // 560 // उक्खित्तधूवधूमुच्छलंतलहरीउ सुरहिगंधेण / सिरिकंपचलिरअलयेस्सिरिं वहति व आसाणं // 561 // गोमयरसच्छडाहिं रेहइ देवंगणं च बहलाहिं / घणपुप्फपयरसोहं कुसुमियनंदणवणसिरीयं // 562 // अह अन्नदिणे बडुओ आगच्छंतो सुणइ संलावं / केण समं को जंपइ इय अवहियमाणसो जाओ // 563 // तो तेण माहणेणं अवहिअचित्तेण पडिसुणतेण / नायं सयं पुलिंदं संभासइ एस सिवदेवो // 564 // तो चिंतेइ स बडुओ एस विवेओ सिवस्स अइकडुओ। 5 केशशोभां। // 39 // Page #53 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पूजको जयन्तीप्रकरणइतिः / सरोवि अहवा अइसुरहि कला जह तह सुयणा न चैव अपात / तं चित्तं देवाणवि गुणाणुराया 81 गप्पणा होइ / देवाण चरिचाङ्ग ! वायपुफाई इच्छा कि तत्थे विकार सुरा घरापारि गोरस / / // 40 // HAMARCH जं पाववल्लिकंदे एस पसन्नो इह पुलिंदे / / 565 // असुई अदंतपवणो विणयविवेएहिं वजिओ निच्चं / एसो मेच्छो तुच्छो अगोयरो सुरपसायस्स // 566 / / किं चुजं ? गुणवंता कलिकाले जमिह दुल्लहा होति / तं चित्रं देवाणवि गुणाणुराओवि जं दुलहो / / 567 / / अन्नं च -अग्धंति कलीए खला जह तह सुयणा न चेव अग्धंति / ठाणे विक्काइ सुरा घराघरि गोरसं ममइ // 568 // ज ईसरोवि अहवा अइसुरहिं केयई परिचज / धत्तुरयपुष्फाई इच्छइ किं तत्थ वत्तई ? // 569 // आराहिजा जो वा न तत्थ एवं वियप्पणा होई / देवाणं चरियाई गंभीराई अहव हंति // 570 / / इच्चाइ चिंतिऊणं तम्मि पुलिदम्मि आइगए संते / गंतूण माहणो सो सोवालंमं सिवं भणइ // 571 // किं देव ! एस नाओ ? जमिह पुलिंदम्मि तंसि सुपसाओ / महमतिविसेसाओ कि अहिया तस्स पूयाओ? // 572 / / किं गंदसजलेण अहिसेए तेण तुह कए देव / डोहलए परिपुबे नेहतरू वियसिओ सामि // 573 // हुँ रत्ने सहवासो पुलिंदपेमं जणेह तुह देव / सामि पमयालयाणं पासद्वियसंगयं जेण // 574 // अम्हाणं भत्ताणं सूताणवि देसि देव नालावं / मेच्छं च पुणो पुच्छसि सक्खं कुसलाइयं सर्व // 575 / एएण विसेसेणं विसलेसेणेव फुट्टए हिययं / विरहो दुहाकरो च्चिय दारूणवि दारूणो अहवा // 576 // पूएमि अहं तं चिय जइवि पुलिंदम्मि तंसि साणंदो / जलपंकवियसियाणि वि अलिणो लीयंति कमलाई // 577 / / सो एवमुवालंभ दाउं मब्रुवस्सउग्गारं / उवसंतो जं कहिए दुक्खे जीवो सुही होइ // 578 / / देवो सिवोवि चिंतइ असत्थोऽयं अनायपरमत्थो / सगसगइ जंव तं वा जडाणुबंधाणुभावेण // 579 / / किंतु करइ महपूयं पुजो लोएवि माइणो जेण / ता 1 आन्तरं / 2 अशानः। मिल्लब्राह्मणो, तत्र भिल्लोपरि शिवस्य प्रसन्नता दृष्ट्वा ब्राह्मणस्य खेदः। P // 40 // Page #54 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 41 // शिवेन भिल्लस्थ सत्त्वगुण एस बोहियो दिट्ठीदिद्रुतदिट्ठीए / / 580 // काऊण काणमच्छि द्विओ पभाए सिवो ससत्तीए / दट्टण माहणेणं तओ परुन्नं घणमणेण // 581 // कुलफंसुणेण केणवि असिट्टचेद्वेण पावपुढेण / पकओ अच्छिविणासो हाहा कह मज्झ देवस्स ! // 582 // हत्था इंतु विहत्था रोगायंकेहि तस्स अपसत्था / हवउ य दुत्थावत्था देवच्छि नासयंतस्स // 583 // इच्चाइ ज्जरिऊणं विसरिऊणं बहुं बहुं बडुओ / तत्थ भुवणेक्कदेसे तुन्हिको अच्छइ निलुको // 584 // इत्थंतरे पुलिंदो सरवणुप- तीहिं वावडकरग्गो / जलपुन्नवयणकलसो पत्तो देवच्चणं काउं // 585 // अवि एस मिच्छजाई काणच्छि पेच्छिऊण देवतणुं | चिंतह हाहा कट्ठ नटुं देवस्स नयणमिणं // 586 / / का देवे मह भत्ती ? का अणुरत्ती ? य को व बहुमाणो ? / देवो जमेगनयणो हहा महं दोण्णि नयणाई // 587 // बहुमाणसाणकोणुत्तेई यमल्लीए उक्खणेऊण / तो उवइ देववयणे नियनयणं साहसुल्लसिओ / / 588 / / अह तस्स पुलिंदस्सवि पल्लविए साहसम्मि साहारे.! कलयंठगिरा जंपइ तं बडुयं सो सिवो देवो // 589 // माहणवर ! तं पेच्छसु इमस्स बहुमागभत्तिमणुरायं / नयणप्पयाणपयडीकरतं अंतरंगपि / / 590 // | बहुमाणकणयकसवट्टयंमि नियनयणअप्पणेऽणेण | दिन चिय सुपरिक्खिय कल्लाणपरंपरा होइ // 591 // मणिमयकुंडलजुयलो हारविरायंतवच्छत्थलो / विरइयवरनेवत्थो अच्छिविहीणो न सोहेइ // 592 // जेण विइन्ना दिट्ठी मग्गामग्गाइ | दीसइ जीए / तेण विइन्नं सवं सोहग्गमहग्घयं जीयं // 593 / / तो एस पुलिंदोवि हु विसेसविनाणवियलचिचोवि / जं दिढसत्तो रत्तो पसायजुग्गो सुराणंपि / / 594 // निवडियकजसारं सम्भावं जाणिऊण मणुयाण / सहायरेण देवा संभासं 3 दृष्टिदृष्टान्तदर्शनात् / 4 प्ररुदितं / 5 बहुमानशाणकोणोत्तेजितभल्ल्या। ***936- 13 ASOCIAGAR दर्शनाय स्वैकाक्षिज्ञातेन बटुकः प्रत्यायित // 41 // Page #55 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणइतिः / CASSAGAR ज्ञानदान| खिन्नतोपरि शक टापित // 42 // दृष्टान्तम् / दिति सुपसना // 595 // भणियंच-वाया सहस्समइया सिणेहनिज्झाइयं सयसहस्सं / सम्भावो सञ्जणमाणुसस्स कोडिं विसेसेइ / / 596 / / तो तं माहण मा भण एस अजुग्गो सुरप्पसायस्स / तुमएवि दिट्ठीदाणा जं नाओ अयलसम्भाषो // 597 // धनाणं भावोच्चिय महग्घयं देह जमिह बढ़ेतो / इइ लोए ववहारो तुमए कि बटुय! न सुओवि ? // 598 // इय सिववयणसुहाए सित्तो सो माहणो असहणोवि / जाओ पसनचित्तो ईसाविसवेगपरिचत्तो // 599 // विन्नबइ सिवं देवं देव ! मए जं तुम समुद्दिसिउं / अविइयपरमत्थेणं जंपियमन्त्राणदोसेण // 600 // तं स्खमियत्वं इण्हि अनाणंधाण तुच्छहिययाण / अम्हारिसाण करुणाजोग्गाणं देवपणयाण // 601 // तो देवेण सिवेणं तस्स पुलिंदस्स अप्पणो य पुणो / दिवाए सत्तीए नयणं विहियं जहावत्थं // 602 // एवं चिय सुयनाणं सुगइपहे नयणसुंदरं पत्तं / विहिणा वियरंताणं किमदेयं ? होइ धीराणं // 603 // ते धन्ना कयपुत्रा सुकयत्था जे हरंति जीवाणं / सुयनाणरयणवियरणवसेण अन्नाणदोगच्चं // 604 // ॥सिव एव जक्ख अक्खिदाणकहाणयं सम्मत्तं // दिन्तो पुण सुयनाणं दंतो संतोऽवि जो परिस्संतो। चिंतइ किं पढिएणं ? एएणं अहव दिनेणं // 605 // नाणावरणं कम्मं दुप्परिणाम स बंधो कीवो। जीवो जं तवविणयज्झाणाईहिं दुनिअरणं // 606 // आगमसिद्धा सगडापिया जहा पुत्वकम्मकयकम्मं / बारसवरिसतवेणं नाणावरणं खवइ जम्हा // 607 / / तथाहि-गंगातरंगिणीए तीरे देसेसु संनिवेसेसु / सुट्टियनामा सूरी विहरतो आसि गुणभूरी // 608 // अवरावरगच्छागयपाडिच्छयछप्पएहिं पयकमलं / सेविजइ जस्सागम 1 भ्रमरैः। // 42 // Page #56 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 43 // 4%A61364 मयरंदस्संदलद्धेहिं // 609 // जो धम्मदेसणाए भवियाण कुमुयाण चंदजुन्हाए / अवहरह मोहनिदं जलासयाणपि लीलाए। // 610 // जीवाइपयत्थाणं पयासणे दिणमणि व दिप्पंतो। भवमणेसुं फलिहुजलेसु जोई जणइ जो य // 611 // जिणसासणंमि गयणंगणंमि तारयगणाण मज्झमि / सोमो पहाकरोवि य कलिओ कइयावि न तमेण // 612 // वियसंतकासकुसुमुअलाए जस्मल्लसंतकिचीए / सरए व बहुसुययाए लोया वटुंति मग्गेसु // 613 // पन्हुत्तरवयणेहिं जस्स य गोखीरपूरसरिसेहिं / परिचयअंगा सिस्सा वच्छ व हवंति बहुवसहा // 614 // विज्जुजोयपयासियखमाविसेसो असेसधन्नाणं / उल्लासकारणं जो घणौगमो जीवलोगम्मि // 615 / / एस अखंडियसीलो बहुस्सुओ एस एस सुपसनो / एसो य गुणनिहाणं जस्सेसा घोसणा ममइ // 616 // एगो य तस्स भाया लहुओ साहू सहोयरो अस्थि / सज्झायज्झाणवरमो दुहावि अप्पस्सुओ संतो // 617 // चउहाधम्मकहाए निच्चं सुत्तस्थपोरिसिविहाणे / अह सो खिन्नसरीरो धीरोवि हु चिंतए सूरी // 618 / / सुहहेउ सुयमहीयं मए पुरा तं दुहावयं जायं / न लहेमि जमिह निच्चं अणुओगाईहिं विस्सामं // 619 // पढियसुयाण अहवा लोएवि हु कट्ठपंजरगयाणं / निचं वच्चइ कालो परतंताणं दियाणपि / / 620 // एसो खु मज्झ माया जमप्पसुत्तो पडोब गुरुभावं | अवतो लहु सुज्झइ संवरमित्तेण जयणाए / / 621 // एवं सो निच्चयं काउं सुयदाणजणियखेएणं / बधंइ नाणावरणं दुनिजरं चिकणं कम्मं // 622 // खणमित्ताओ उवरिं सूरी परिणामनिम्मलं भावं / काऊणं सुयदाणं जहाविहाणं पुणो | देह // 623 // पवयणगणदिणिदो भवियणकमलाण बोहणाणंदो। सो सूरी सूरसमो सोमो सुयसायरुल्लासो // 624 // 2 ज्ञातागमाः पक्षे पुष्टशरीराः। 3 बहुश्रुतः पक्षे वर्षागमः। 4 द्रव्यभावाभ्यामल्पश्रुतः। 5 पक्षिणां / सुस्थिताचार्येण श्रुतदानजनितखेदेन ज्ञानावरणीयकर्म बद्धमाभीरकुले जन्म 4 4 X // 43 // % Page #57 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी तत्पुत्री रूपवतीं दृष्ट्वाऽ जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 44 // अप्पडिबद्धविहारो पयासियासेसतित्थवित्थारो / गणहरसिरिउरहारो सुइरं विहरइ सपरिवारो // 625 // अह संलिहियसरीरो धीरो मेरु व जलहिंगमीरो / एसो सुट्ठियसूरी सग्गं पत्तो समाहीए // 626 // तो दिव्वं देवढेि चिराय भुत्तूण देवलोगाओ। चविऊण उप्पलो घोसे आहीरकुलपुत्तो // 627 // देहकलोवचएणं पडिवयचंदो व बड्डए एसो। सोहग्गनिही विहिणा रिद्धिस्थिमिए कुले तम्मि // 628 // वियसंतरायचंपयकंतिकलावंमि जुवणारंमे। रंभाभिरामरमणीपाणिं गिण्हइ | स रिद्धीए // 629 // पंचप्पयारविसओवयारसहयारकाणणारामे। रायसुओ इव पुनप्फलाई भुंजइ स लीलाए / / 630 / / अह तस्स सुया जाया विहिणा सबप्पयत्तनिम्माया / रूवाइगुणमणीण रोहणगिरिरायधरणी व / / 631 // जुवणवणमि तीए पुनंकुरकिरणमंजरिसणाहे / सच्छंद तरुणाणं चरंति हरिणाई नयणाई // 632 // अह घयविक्कयकले नयरे एगमि सगडसत्थेणं / सो अन्नया य गन्छ। तं पुत्तिं सारहिं काउं // 633 // तो तीए रूवेणं असरिसरूवेण दंसणे लुद्धा / अपहेणऽने नियडे नियनियसयडाई भजति // 634 // भग्गाई ताई तेसिं न इत्थ अच्छेरयं वयंति विऊ / सयमणोरहभंगो होइ जमुम्मग्गगामीणं // 635 // तो तेण वइयरेणं पुत्ती सा असगडत्ति विक्खाया। तीए जणओ एसो सिद्धो सगडापिया तत्तो // 636 // लहुकम्मयाए चिंतइ रागंधाण जियाण सुकडाणं / सगडाणं च परिहाणी अमग्गगामित्तओ होइ // 637 // महपुत्तीए रूवे दीवे इव दिपमाणमुत्तीए / अवियाणियपरिणामा गोवपयंगा इमे पडिया // 638 // विसया विस व विसमा विसमगई विसहर व पयति / किंवागफलसगोता किंवागा जेण जीवाणं // 639 // HOROSAGARLICATCHES न्याभीरपुत्रैरुन्मार्गे . शकटा: खेटिता भग्नाश्च। १निकटे / 2 रसाः / // 44 // Page #58 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 45 // SASSI SHARADARASAKS विसएसु पयट्टाणं अमग्गगामीण सालिखेत्तेसु / लुद्धाण परकेसु होइ विवाओ सिरनिवाओ // 640 // एवं विसयविरत्तो अवगयतत्तो पसंतदिढचित्तो। पुर्ति परिणावेउं वियरियावितो महासत्तो // 641 // गिन्हह पंचमहत्वयमारं सुगरुण पायमलंमि / विहंपि दिजमाणं सिक्खं सिक्खेइ संविग्गो।। 642 // थेरपयसंथवेणं सजायपरेण तेण विणएण / अह उत्तरज्झयणाणं सुयक्खंधो पढिउमाढतो // 643 / / जावज्झयणमसंखं उद्दिटुं ताव पुत्वभवबद्धं / कम्म नाणावरणं तस्सुदयं गच्छह सहसा // 644 // उवउत्तेवि पढ़ते तंमि तओ ठाइ नऽक्खरं हियए / सलिलं व चालणीए चिक्कणकम्माणुभावेण // 645 // दुद्धं च कजिएण तरर्लिंजइ अक्खरं पदंतस्स / वाएण वऽभपडलं विहडइ कम्मेण तस्स सुयं // 646 // दिणमणिमंडलनिम्मलपयाससरिसोवि बुद्धिपसरो से / सहस च्चिय छाइजइ गहकल्लोलेण कम्मेण // 647 / / कम्मेण कामणेण व दुद्वेणुवओगजोगकरणेवि / सुयगहणधारणासु सत्तिविवत्ती परं जाया // 648 // हद्धी कह मह बुद्धी मणिदप्पणस. च्छनिम्मला संती / विम्हरणकअलेणं सज्जो कलुसीकया ? अज // 649 // सुयनाणनयणअवलोइयाई जीवाइतत्तरयणाई। झाइजंताई फुडं केवललच्छि पयच्छंति // 650 // मह पुण सुयनाणनयणमिणं छाइजइ दुडकम्मपडलेण / तो कह भवदोगचं सचं दूरीकरिस्सामि 1 // 651 // अप्पपरोजोयकरं सुयनाणं दीवउ व दिप्पंतं / सग्गुणदसापवत्तं कहिपि पत्ते हवइ पत्ते // 652 // तो तेण विणा संपइ मग्गामग्गावलोयरहियस्स / दुग्गइगत्तावाओ हाहा होही मह अवाओ / / 653 // अव| गेच्छइ मणमोहो दिट्ठी अत्थेसु पसरह सम्मं / अप्पपरचेयणावि य सुत्तविबुद्धाण जीवाणं // 654 // मह सवणगोयरगयं 3 विपाकः / 4 चलितंभवति / 5 अपगच्छति / तद्दवा जातवैराग्येन गृही|ता दीक्षा, उत्तराध्ययनयोगेन चटति ज्ञानावरणोदयेनाक्षरमेकमपि / SGAROACHED // 45 // Page #59 -------------------------------------------------------------------------- ________________ G RC जयन्ती प्रकरणवृतिः / गुरुप्रदर्शिताचामाम्लकल्पेन नष्टं ज्ञानावरणीयम् / // 46 // न अक्खरं ठाइ किंपि हिययंमि / सम्मइंसणहेऊ सुत्तविबोहो कहं होही ? // 655 // एवं विसन्नचित्तो अन्नाणपरिसहेण संतत्तो / गुरुपयकमलासेवणनिव्वुइकरणज्जुओ तत्तो // 656 // मन्नुभरहइनिस्संदविंदुबाहुल्लनयणअरविंदो। असगडाए जणओ अणगारो एह गुरुअंते / / 657 // विनवइ वहइ भयवं! केणवि कम्मेण अज्ज मह मेहा / एवारुगंधविहडियवक्ककणिकाए समसीसि // 658 // उवउत्तघोसणे रविकिरणकलावेवि कोसियस्सेव / महजेवं अंधयारं वियंभए चरणपरिहारं // 659 // तत्तो गुरुणा वुत्तो नाणावरणीयकम्मउदएण / सहियवो धीरेणं अन्नाणपरिसहो एसो॥६६० // जम्हा पुबकडाणं कम्माणं वेयणेण निजरणं / अहवा उग्गतवेणं बझेण अन्तरेण च // 661 // तो जइ देवाणुप्पिय ! तुम्ह न उद्वेइ एवमज्झयण। किजउ तस्साणुना अणुग्गहोऽणुट्ठियस्सावि // 662 // इय गुरुवयणरसायणवसेण वियसंतवीरियायारो / सो अणगारो जंपइ भय को इत्थ कप्पोत्ति ? / / 663 // गुरुणा भणियं मुणिवर ! जाव न उठेइ एवमझयणं / / ताबिलतवचरणेणाराहिजइ पसंतेहिं // 664 // गुरुवयणनायकप्पो विगयविगप्पो विसुद्धसंकप्पो / फलदाणकप्परुक्खं कप्पं पडिवञ्जए हिट्ठो // 665|| सरयससिकिरणनिम्मलसुयमत्ती तयणु तस्स पसरंती / उवसमियकलुसमा जडासयं सच्छयं नेइ // 666 // थेराण सुयधराणं पाए पणमामि गरिमधारीणं / जत्तो पसरइ सरसा सरस्सई गहिरनिग्घोसा // 667 // जे सुत्तेणाणुगया कहमवि सुइ छ घणरयच्छन्ना / ते पडियावि खमाए लीलाए उद्धरिजंति // 668 // धनाणं सुयलामो सिरिसासणपालणेण सुकयत्थो / बहुसुयभावेण विणा न कुलुद्धारो मुणीणपि // 669 // उत्तमसुयलामेणं पवयणरंगो हवेइ 6 कर्कटीगंधविघटितवल्ककर्णिकायाः / 7 एव / * // 46 // Page #60 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 47 // अभयदाने मेघकुमारकथानकम् / 4% लोयाणं / अवि सुयभासियसवणे उक्करिसो होइ हिययम्मि // 670 // इय तस्स भावणाए दिणयरकरनियरतिवभावाए / निद्वरतरंपि कम्मं तुहिणं व विलिजए निविडं // 671 // तत्तो दुवालसंगं गंगं अवगाहिऊण बहुभंगं / चउरंगेण बलेणं सुबुद्धिनावं समारूढो // 672 // निजिणिउं परलोयं मुणिराओ पालए खमाभारं / सुयदाणेणं एसो पसिद्धिपयविं परं पत्तो // 673 // तो देयं सुयदाणं नाउं कप्पदुमं व बहुफलयं / संसारजलहितरणे सत्तं जं जाणवत्तं व / / 674 / / // ज्ञानदाने असगडपियाकहाणयं // छज्जीवनिकायाणं तिविहं तिविहेण रक्खणं विहिणा। जमिह कुणंति मुणिंदा तमभयदाणं भणन्ति विऊ // 675 / / दुहभरभरियावि जीया जम्हा ईहंति जीवियं सत्वे / तं जाणामो तेसिं न वल्लहं जीविया अन्नं / / 676 // मरणभयकंतमणो महानरिंदोवि जेण रजंपि / जीवियहेउं जच्छइ इट्ठयरं तेण तं चेव // 677 // ज चेव गाहगाणं इ8 तं चेव होइ दायत्वं / बुद्धिमया परा लोए सुहमक्खयमीहमाणाणं / / 678 // किं च-दीहाउओ सुरुवी निरोगी होइ अभयदाणेण / जम्मन्तरेवि जीवो सयलजणसलाहणिजो य // 679 // दाणाणमभयदाणं निम्मलचूडामणि व सवेसि / जं तेण विणा ऊसरबीयाणि व ताणि अहलाणि / / 680 // तिरियावि दिति गुरुयत्तणेण करुणाए जे अभयदाणं / ते मेहकुमारो इव लहंति कल्लाणरिंछोलिं // 681 // वेयड्वगिरिसमीवे पुत्वभवे आसि सो किर गइंदो। विहरंतो सच्छंदो वर्णमि करिणीसयाणंदो // 682 // अह गिम्हदावपरितावभीयचित्तो जवेण धावतो। सो अन्नया कयाई कदमिलं सरवरं पत्तो // 683 // तम्मि जलपाणन्हाणावगाहतन्हालुओ समाइनो। अवरेण तरुणकरिणा अरिणा चिक्कणकले निहओ // 684 // विंझगिरिपायमूले गंगाकूले AE %A मच्छंदो वर्णमि का६८३ // तम्मि जल गंगाकूले R // 47 // // 4 Page #61 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृतिः / ROCESSOCISCC हस्तिमवे शशकस्य रक्षा कृता। n48 // | करीण अणुकूले / उप्पनो गयराओ करिणीजुहंमि गयराओ // 685 // अह अन्नया कयाई गिम्हे अवलोइऊण दवमुग्गं / संजायजाइसरणो सरणागयवच्छलो मइमं // 686 // चिंतइ अणागयं चिय अवचिय तिणवल्लिरुक्खसंभारं। सुहसरितीरे | काहं थंडिल्लाणं तयं गरुयं // 687 // तत्तो वासारत्ते सह जूहेणं तणाइयं सहसा / उम्मूलिऊण सम्मं कुणइ महल्लं तयं तत्थ // 688 // तो खरपवणपणुल्लियवंसकुडंगीसमुट्ठियदवेणं / भयभरियमणो धावइ जुहजुओ थंडिलाभिमुहं // 689 // आरनियजीवाणं वणदवजालावलीहि भीयाणं / कोडीउ पिंडियाण तो पेच्छई थंडिले पढमे // 690 // करुणारसभरनिज्झरगिरिंदसुंदेरमुबहतेणं / तेण करिंदेण तओ गएण बीएवि थंडिल्ले // 691 // तरलतरलोयणाणं वेविरगत्ताणं वित्तसंत्ताणं / वुनवयणाण हरिणाइयाण लक्खाई दिवाइं // 692 / / कारुनपुन्नहियओ तंपि य चइऊण थंडिल्ले तइए / सो पत्तो करिनाहो चिट्ठइ जुहेण सह सुहओ // 693 / / अह कंडुविणोअत्थं जावेसो पायमुक्खिवइ हत्थी / तावऽन्नसत्ततासियससओ हेट्ठा समल्लीणो // 694 // उक्खित्तचरणमारो दयावरो मुणिवरु व तं ससयं / सरणागयं व रक्खइ दृढसत्तो एस करिराओ / / 695 / / तम्मि सुमणोभिरामे करुणारामंमि हत्थिरायम्मि / सिवसोक्खफला रोहइ घणपुनपरंपरावल्ली // 696 // कइवयदिणाण अंते तमि दुरंते दवंमि उवसंते / अट्ठवियचलणो चलिओ स गओ धरणीगओ तत्तो / / 697 // तन्हाछुहापरद्धो अकामनिजरणकम्मलहुभावो / आवन्जिय मणुआऊ कमेण पंचत्तमणुपत्तो / / 698 / / अह अस्थि जंबुद्दीवे भारहवासंमि मज्झिमे खंडे / मगहाभिहाणदेसो गामागरमंडिउद्देसो // 699 / / अगओ असंखसद्दो सुदंसणुच्छिम 1 उद्विग्न / 2 वैद्यः। 5555ASSS सुमणोभिरामक्खित्तचरणमार" अह कंडारण कारुनपुनार USIC Page #62 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 49 // राजगृहनगरीवर्णनम् / %A1ERRORIAGE विसमतमपसरो / वीरो जिणो अउबो विहरिओ पुणो पुणो जत्थ / / 700 // जत्थुन्नयगोत्तभवा रसपुआओ गहीरहिययाओ। अणुकूलगामिणीओ सरियाओ कामिणीओ व // 701 // मूलटिइमचयंता समुन्नया तावहारिणो फलया / गामनगराइएसुं जम्मि य तरुणो य सुयणा य / / 702 / / आबालवुड्डललिया कलिया सउणेहिं पत्तफलया य / सुमणोभिरामकरुणा आरामा सजणा जत्थ / / 703 // जत्थ य सरोवरेसुं सायरसरिसेसु सच्छभावेसु / अच्छरियं सहवासो कमलाणं पुंडरीयाणं // 704 // गामनगराइएसु खित्तेसुं जत्थ हुंति लोयाणं / अइसयरूवसिरीओ धनाणं सुप्पइनाणं // 705 / / रायगिहं नाम पुरं इंदपुरीसुंदरं तहिं आसि / सुरनिम्मियकञ्चणमय उन्नयपायारलंकारं / / 706 // गोउरमणिमयतोरणपसिमिरकिरणावलीहिं वियरंतं / इंतसिरीण व अग्धं दसद्धवन्नेहिं कुसुमेहिं / / 707 // मोत्तियपवालमणिचक्कवालसंखाइएहिं संवलिया। सायरवेल व जहिं विउलाओ विवणिवीहीओ // 708 // अवरावरदेसंतरनेगमववहारलद्धरयणेहिं / जलसेसो च्चिय जलही मन्निजइ जत्थ विबुहेहिं / / 709 // तरुणतरुणीण भूसणमणिगणघणकंतिकवलियतमंमि / जंमि अभिसारियाओ दुहियाओ जइ परं हुंति // 710 // जिणमंदिरसिहरट्ठियकंचणकलसुच्छलंतकिरणेहिं / सिवग्गदिनकुंकुमघणच्छडाविन्भमो जत्थ // 711 // जंमि जिणमंदिरेसुं कालागुरुधूवधूमकुरुलीओ / कविरमणीचवलाणं कमलाणं संकलाउ व // 712 // नयविक्कमेक्कमंडलपयावरओ तिमिरखण्डणे दक्खो। भुयदंडमण्डवणं पयाण परितावपडिवक्खो // 713 // तत्थासि नमिरनरवरसिरमणिदिप्पंतचरणअरविंदो / सिरिसेणिओ नरिन्दो अणुवमसोहग्गगोविन्दो // 714 // दक्खिन्नेणं मलओ निलओ गुणचंदणाण सव्वाण / जो रम्मरामचरिओ पुरिमुत्तमलक्खणाबरिओ / / 715 // कल्लाणमुत्तिधारी समुन्नओ मंदरुह मज्झत्थो / जो धरणीधरराओ नवरं कुडप्पसंगाओ।। 717 // सम्म 1%AA%AA%ENSA-%A4%9 Page #63 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी बयन्तीप्रकरणइतिः / श्रेणिकनृपधारिणीराज्ञीस्वरूपं स्वने हस्तिस्वरूपकथनं च। // 50 // तरयणदीवो जस्स मणे मंदिरंमि अवणितो। मिच्छत्तमंधयारं करइ सुराणं चमुक्कारं // 717 // देवगुरुभत्तिमुत्तियहारो हिययंमि जस्स गुणसारो / वरपउमरागमणिणो दिप्पद धम्माणुराएण // 718 // जिणसासणप्पभावणनंदणवणकुसुमविन्भमजसेहि / मेरुगिरिण व जेणं कयसोरभो दिसाभोओ / / 719 // बुद्धीण कमलिणीणं बोहणदिणनाहविपडिबिंबो / अभयकुमारामच्चो सिरोमणी जस्स मंतीणं / / 720 // मयणनिवरायहाणी पत्ती सिरिसेणियस्स मियवाणी / तस्स गुणरयणखाणी धम्मरुई धारिणी देवी // 721 / / आसि अवरोहसारा जंगममणिसालभंजियागारा। सुललियपयप्पयारा निम्मलजसकित्तिवित्थारा // 722 // गुरुजणकयसकारा गंगाजलधवलसीललंकारा / जा उज्झियहंकारा उत्तमकुललद्धअवयारा // 723 // जा दिद्विअमियधारा असईजणविहियदूरपरिहारा। कुलसमुचियसिंगारा कंचणलायनसंभारा / / 724 // रूवजियकामदारा सिरीसनवसरसकुसुमसुकुमारा / परिचत्तमणवियारा जा वंछिपसिद्धपरिवारा / / 725 / / मलयावणिसंकासा विणयप्पणयाण चंदणवणाण / कावेरी. तीररसा करुणाकप्पूरपारीणं / / 726 // पणयजणकप्पवल्ली हासलवुल्लसियकोमुइपयासा। उचियत्तरूवमंजरी भमरीविन्भमरसोल्लासा // 727 // जिणवयणकमलहंसी पसत्थपासस्थपंडियवयंसी। जा सुंदेरगुणिन्दाणी समग्गसोहग्गसवाणी // 728 // अह सो गइंदजीवो तीए धारिणीए कुञ्छिमि / रयणंकुर इव रोहणगिरिधरणीए सुओ जाओ // 729 // पासइ सा वासहरे सुत्ता रयणीए दिवसयणीए / एरावणं व हत्थि सुविणे अवइन्नमुयरंमि // 730 // अणिमिसनयणुल्लासा रहंगसम सिहिणकुम्मचलणा य / तिवलितरंगासंगा आवत्तगहीरनाहीया / / 731 // घणपुलिणसमनियंचा लावन्नतरंगपुनसबंगा। गंग Pाव थिरा बुद्धा सुमिणं अवधारए देवी // 732 // तो विरइयनेवत्था अउच्छ उच्छाहहरिसपडिहत्था / रयणमयपाउयाहिं ॐॐRATE का॥५०॥ Page #64 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 51 // रा॥ 736 // तो निव आणमिसदिट्ठी समुल्लसियामकारराओ / / 737 हिय पामाईयकिवा गच्छइ सेणियनिवऽन्भासे / / 733 / / हरइ य निहामुच्छं संपइ निवसींह उट्ठसु तुमंति / ता अमियसारिणीए सुमहुरमहुराए धारिणीदेवाणीए // 734 // तो संभन्तो राया कीस ? तुमं देवि इह समायया। भद्दासणमणुजाणिय पुच्छइ हरिसुल्लसियवयणो व्या मेघ॥ 735 // सावणसुहए सुमिणे कहिए देवीए नरवरिंदस्स / परमोययंमि खित्तो जाओ पुलयंकुरप्पसरो // 736 // तो निव- |दोहलस्वचंदो जपइ देवीहुतं भविस्सई वस्सं / तुह पुत्तो दिवगई अरितरुयरभंगकरिराओ // 737 // तत्तो सुहासिएणं वयणेणं तेण रूपम् / धारिणी देवी / सउणगढि बंधइ अणिमिसदिट्ठी समुल्लसिया // 738 // तो रयणीए सेसं देवगुरुणं कहासुहारसिया। अइ-13 बाहिय पामाईयकिच्चाई कुणइ सबाई // 739 // जीवदयाकप्पलयापुत्रंकुरविन्भमेण गम्भेण | कमहुंतघणदलेणं सच्छाया धारिणी जाया / / 740 // मासि तइयंमि तीए गंभीरे माणसंमि हंसो छ / घणरससपक्खवाओ चुजमिणं डोहलो जाओ // 741 // इच्छइ पाउसलच्छि अकालमेहेहिं पंचवन्नेहिं / गंभीरधीरगजियनच्चाविजंतमोरेहिं // 742 // दीसंति इंदगोवा इओ तओ बुद्धिउडिया जत्थ / पाउससिरीए चरणालत्तयपडिबिंबसारिच्छा / / 743 // विहडंतकेअईपुडपरिमललुद्धालिमालिया जत्थ / अवलोइजइ एसा वेणी किर काणणसिरीए // 744 // निज्झाइजइ जूहीजालयकुडयाण कुसुमसंभारो। नं पाउसलच्छीए आगमणलाजंजली जत्थ / / 745 // बप्पीहमोरपडिरवमिसेण घोसंति जत्थ जलयाण | जलसेयविगयतावा पवयकडयाऽऽसु आगमणं / / 746 // सोहइ पुहवी जत्थ य सुयपेच्छच्छायबहलहरिएहि / पाउससिरीए खेल्लणमरगयमयपेढिया रम्मा // 747 // खीरोयधवलपल्ललतरंगसंसग्गसीयलो जत्थ / धाराकयंवपरिमलबहलो पवणो मिऊ सुहओ // 748 // मेहे अमोहधारे जत्थ य पसरंततडिचमकारे / कस्स न हरेइ हिययं तारो निज्झरणझंकारो // 749 // रसपूरपूरियाओ % A4CAK Page #65 -------------------------------------------------------------------------- ________________ दादोहसपूरVणार्थमभय कुमारस्यासाष्टमतपस्या | तत्पूर्णी करणं च। श्री 16 सरियाओ जत्थ कलुसचरियाओ। उम्मग्गपसरियाओ अहिसारियदोसभरियाओ // 750 // एवंविहंमि पाउसकाले जयन्ती धनाओ ताओ रमणीओ। जाओ कीलंति चिरं दहनिज्झरसरवणगिरीसु // 751 // जयकुंजरमारूढा अहंपि जइ नरवरेण प्रकरण सकरेण / धरियधवलायवत्ता वियरंती दाणमइरित्तं // 752 // विहरामि काणणाईसु फलाई पुष्फाई मंजरिदलाई / लिंती वृतिः / अग्घायंती देन्ती न्हंती य खायंती // 753 / / एसो मे डोहलओ सहलो होहित्ति ? कहमघडमाणो / चिंतापिसाइयाए तो देवी दुब्बला जाया / / 754 // तो संभमेण राया पुच्छइ तं अमियमहुरवाणीए / ससिकंतमणिदेसासु....................अणवश्यं // 52 // // 755 // निबंधेण कहिए डोहलए नरवरेण संठविया। तह देवि ! जइस्सामो जह पुन्नमणोरहा होसि // 756 // रना अभयकुमारो आइट्ठो बुद्धिसागरी तत्तो / नियचुल्लमाउयाए पूरेसु मेहाण डोहलयं // 757 / / पोसहसालं गंतुं पोसहजुत्तेण अट्ठमतवेण / भूसेजाए सुमरइ सो य पुरा संगयं देवं // 758 // तवपजंते तत्तो घणु व मणिभूसणाण किरणेहिं / विरइयसुरिन्दचावो देवो अमयंतियं पत्तो // 759 // जपइ अभयकुमारं केण निमित्तेण एगचित्तेण / सोम! सरिओऽम्हि तुमए ? कहेह साहेमि तं कजं // 760 // अभओ पभणइ सुरवर ! जणणीए में समुद्दमइरित्तं / मेहमणोरहपूरणकए समुल्लासए राया // 761 // अभयेणेवं वुत्तो देवो मित्तो पयावसंजुत्तो। सिग्वं वासारतं घणाघणेहिं घणं कुणइ // 762 // निवडतवारिधाराणुगारिहारावलीहिं रुइरंगी। नानाविहमणिभृसणकिरणगणुल्लसियसूरचावा // 763 // उन्नयगयगयणगया &aa तडितरलफुरंतसुहडकरवाला | इंतबलाहयउज्जलढलंतसियचामरुप्पीला // 764 // उज्जियगजियगंभीरतूरनिग्धोसपूरियदियंता / लोलब्भपडलविन्भमपवणढ्यधयवडाडोवा // 765 // चउरंगदलसमेया धारिणी देवी इओ तओ तत्तो। जंगमपाउ CORDPROSAROORKS Vin52 / / . Page #66 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मेषकुमारजन्म तद्बाभ्यादि स्वरूपं च। NASASHA%A55 सलच्छी विहरह धरणीए सच्छंदं / / 766 // इय पुनडोहला सा हट्ठा तुट्ठा वहेइ ता गम्भं / वेजोवइट्ठहियमियआहारेहि कयणुकंपा // 767 // अट्ठदिवससाहियनवमासेसु पसत्थलग्गमि / उच्चट्ठाणट्टिएसु सुहकरणतिहिजोगे / / 768 // जो गयणढवियपाओ डिओ ससंको दयाए गयराओ / पुत्व व दिसा सोमं तं देवी पसवए पुत्तं // 769 // तं दहूं देवीए सुवन्नलावनसलिलसरसीए / जाओ सहसोरम्भो पमोयचंदुज्जुयवियासो // 770 // देवीसहीजणाणं चउरचउरीगणाण दिट्ठीओ / अमिएण व भरियाओ इमस्स पसरतकंतीए॥७७१॥अंगपरिचारियाओ तुरियं गंतूण सेणियं रायं / बद्धाति जएणं | देवीए पुत्तजम्मेण / / 772 / / सम्माणिऊण वत्थाइएहि पुत्ताणुपुत्तियं वित्तिं / तो धोयमत्थयाणं ताणं कप्पेइ निवचंदो // 773 // कारागारविसोहणमारिनिवारणजहिच्छदाणेहि / बद्धावणयं कारइ उद्धपडायमि नयरंमि // 774 / / बारसदिणावसाणे कयमि सयणायाण सम्माणे। मेहकुमारुत्ति इमं नामं पियराई कुव्वंति // 775 // देहावचएणेसो पडिवयचदा व दिव्वकंतीए / बट्टा नयणाणंदो पंचहिं धाईहिं परियरिओ // 776 // अइपुनपगरिसएण अहमवरिसेण तेण कुमारेण / दाणविणयायरेणं सयलकलामंडलं गहियं // 777 // अह फुल्लरायचंपयपयासपसंस्ततणुरुइकलावे / अंतोनिलीणमहुयरकेयईदलदिविललियंमि // 778 / / अधरेण सोणरुइणा अहरीकयबंधुजीवकुसुमंमि / ककिल्लिपल्लवारुणकोमलकरचरणकलियंमि // 779 / / अइसरससरलकोमलबहलदलुल्लसिरवाहलइयम्मि / ईसीसिहासदंसियमालहकसमावबोहंमि / / 780 / / तरुणतरुणीण रम्म एसो जुबणवर्णमि सच्छाए। मित्तपरितावहरो मेहकुमारो समोइनो / / 781 // सिंगारखीरसायरवेलाणं तारमुत्तियफलाण / माणादराण तिवलीरंगतरंगभंगाणं // 782 // मुहचंदचंदिमाए सुहासहीए खणेण मणयाणं / नयणंजलिपीयाए जणयंताणं अणिमिसत्त ANSACARAULOCALK // 53 // Page #67 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बपन्ती प्रकरण पतिः / // 54 // // 783 / / तयणु पियराई लग्गे सुहमि समसीलरूववंतीणं / कारिति पाणिगहणं अट्ठन्हं रायकनाणं // 784 // मणिकुडिम-16 यौवनेऽष्टतलकंते भित्तिट्ठियरयणकणयरुलकंते / सबरिऊणऽणुकूले मुत्ताहलदामअवचूले // 785 // पट्टदुकुलुल्लोए सोहासंभारविजिय- कन्यापासुरलोए / मेरु व समुत्तुंगे चित्तसहाविहियमणरंगे // 786 // दज्झतागरुपूरे पुरलच्छीललियसवणमणिपूरे / कारेंति पुप्फसुरहिय- ४णिग्रहणं तआसाए अट्ठपासाए // 787 // मछमि ताण भवणं मणिकंचणरयणरासिचिंचइयं / ठाविति सिरिनिवासं वासवआवाससंकासं प्रदचसा॥७८८॥ पत्तेयं वियरंति य सुवन्नहिरमाण अट्ठ कोडीओ / नंदाइयाई अट्ठ य दाएणं दिति कुमारस्स // 789 / / भणियं च- मग्रीवर्णनं अडहिरनसुवनयकोडिओ मउडकुंडला हारा / अदुद्धहारएकावली य मुत्तावली अट्ठ / / 790 // कणगावलिरयणावलिकडगजुगा तुडियजोयखोमजुगा / वडजुगपट्टजुगाई दुकुलजुयला य अट्ठट्ठ // 791 // सिरिहिरिधिईकित्तिओ बुद्धी लच्छी य होति अट्ठट्ठ / नंदा भद्दा य तला झयवयनाडाई अस्से य // 792 // हत्थी जाणा जुग्गा जंपा सीआ तह संदमाणगिल्लीओ। थिल्ली य वियडजाणा रहगामा दासदासीओ // 793 / / किंकरकंचुइमहयरवरिसधरे तिविहदीवथाले य / पाईथासगपल्लगकयवियअवएडयअवक्का / / 794 // पावीढाभिसीयकरोडियाउ पल्लंकए य पडिसेन्जा / हंसाईहिंवि सेट्ठा आसणभेयाउ अट्ठ // 795 / / हंसे कुंचे गरुडे उणय पणए य दीहभद्दे य / पक्खे मयरे पउमे होइ दिसासोत्थिएकारे / / 796 // तल्ले कोट्ठसमुग्गा पत्ते चोए य तगरएला य / हरियाले हिंगुलए मणोसिला सासवसमुग्गे // 797 / / खुजा चिलाइवामणिबडभीओवचरीवउसियाओ। जोणियपल्हवियओ ईसीणीया थारुइणिया य // 798 // सासियलउसियदमिणी सिंहली तह आरवी | पुलिंदी य / पक्कणिवहलिमरुंडी सबरीओ पारसीओ य / / 799 // छत्तधरीचेडीओ चामरघरतालयंटयधरीओ। सकरोडिया Page #68 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CASAKALUKREAK धरीओ खीराइ पंचधाईओ // 800 // अटुंगमदियाओ उम्मट्ठिगन्हविगमंडियाओ य / वनयचुन्नयपीसियकीलाकारी यतै हारार्द्धहादवकारी // 801 // उत्थावियाओ तह ताडइल्लकोडुबिणी महाणसिणी / भंडारिणब्भवारिणी पुप्फधरी पाणियधरी य // 802 // रादिखरूपबलिकारियसेजाकारियाओ अभंतरीओ बाहिरिया / पडिहारिमालहारी पेसणकारिउ अद्वति / / 803 // कुमरोवि पिययमाणं xव्याख्या। कोडिं सुवन्नाइयाण एगेगं / वियरइ तह नंदाइयमन्नपि य देइ अइबहुअं / / 804 // पंचप्पयारभोगोवयारसहयारमाहवसिरीहिं। अट्ठहि रामाहिं समं विलसइ सग्गे सुरिंदु छ / 805 / / गयराएणं तेणं निचलचरणेण जीवकरुणाए। भोगफलं जे पुग्नं समज्जियं तं महच्छरियं // 806 // हारार्द्धहारौ-अष्टादशनवसरिको, एकावली-विचित्रमणिका, मुक्तावली-मुक्ताफलमयी, कनकावली-कनकमणिमयी, कटकानि-कलाचिकाभरणानि, योगो-युगलं, तुटिका-बाहुरक्षिका, क्षौमं काासिकं, पटक-त्रसरीमयं, पढें-पट्टसूत्रमयं, दुकूलं-दुकूलाभिधानवृक्षवल्कनिष्पन्नं / श्रीप्रभृतयः-पड् देवताप्रतिमाः संभाव्यते / नंदादीनां लोकतोऽर्थोऽवसे यः। अन्येप्याहु:-नंदनं वृत्तं लोहासनं, भद्रं-शरासनं चूटक इति यत्प्रसिद्धं / तल्लत्ति अस्यैव पाठः-अदुतले तलप्पवरे सबरयणमए तियगवरमरणकेऊ, ते च तालवृक्षाः संभाव्यते, ध्वजाः-केतवः, वयत्ति-गोकुलानि दशसाहसिकेण गोव्रजेनेत्यादि दृश्यं / नाडयति-बत्तीसबद्धेण नाडगेणमिति दृश्यं, द्वात्रिशं बद्धं द्वात्रिंशताबद्धमिति व्याख्यातारः / अस्सत्ति-आसवरे सवरयणमये सिरिघरपडिरूवे, श्रीगृहं-भाण्डागारं / एवं हस्तिनोऽपि / यानानिशकटादीनि, युग्यानि गोल्लविषये प्रसिद्धानि, जपानानि-द्विहस्तप्रमाणानि-चतुरस्राणि वेदिकोपशोभितानि, शिविकाकुटाकारेणाच्छादिता, स्यंदमानिका-पुरुषप्रमाणायामा / जंपानविशेषाः गिल्लयः, हस्तिन उपरि कोल्लररूपा मानुषं Page #69 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 188 भी जयन्ती प्रकरणवृतिः / मेघकुमारसुखवर्णन भगवदागमने समव सरणे तद्गमनं च। A%EOSASSA - लागिलंतीति, लाटानां यानि अनुपल्यानानि तान्यन्यविषयेषु थिल्लीओ अभिधीयते / रहंति-सांग्रामिकाः पारियामिकाश्चाष्टाष्टी, तत्र संग्रामस्थानां कटीप्रमाणा फलकवेदिका भवति, / वाचनांतरे रथांतरमश्वा हस्तिनश्चाभिधीयते, तत्र ते वाहनभूता ज्ञेयाः। द्विशतकुलसाहसिको ग्रामः। तिविहदीवत्ति-त्रिविधा दीपाः, अवलंबनदीपा:-शृंखलाबद्धाः, उत्कंचनदीपा-उर्द्धदण्डवन्तः, पंजरदीपा:-अभ्रपटलादिपंजरयुक्ताः, त्रयोप्येते त्रिविधाः, स्वर्णरूप्यतदुभयत्वादिति / एवं स्थालादीनि सौवर्णा- दिमेदादिति त्रिधा वाच्यानि / कइविका-कलाचिका, भिसिया-आसनविशेषाः, करोटिका-कामरिका, स्थगिका धारिका द्रविका परिहासकारिका / शेष रूढितो ज्ञेयं / अइनिच्चलपाएणं चित्तं अजलासएण ठाणेण / अभयप्पयाणकप्पियखमारुहो महरिहो एसो // 807 / / किं बहुणा मेहकुमारो अभयप्पयाणपुग्नेहिं हुंतकल्लाणो / दोगुंदु व देवो गयं पि कालं न याणेइ / / 808 // इत्थंतरंमि भयवं वीरजिणिदो नमंत. सुरविंदो / रायगिहे गुणसिलए बहिरुजाणे समोसरिओ // 809 // उजाणपालएण विणयप्पणएण सेणीओ राया / वद्धाविओ सहरिसं वीरजिणागमणकहणेणं // 810 ॥रायावि तस्स वियरह सभूसणं पारिओसियं दाणं / कारिय पुरवरसोहं वीरजिणं वंदिउ चलिओ // 811 // ओलोयणट्ठिएणं मेहकुमारेण नयरलोओवि / एगदिसाए जंतो हिट्ठो तुट्ठो समिड्डिए // 812 / / तो परियणपुच्छाए भत्तिविन्नायजिणागमो इमो। भत्तिम्भरनिम्भरंगो गच्छइ जिणरायनमणत्थं / / 813 / / अह, विहिवंदियवीरो सदेवमणुयासुराए परिसाए / मेहकुमारो हिट्ठो उवविट्ठो उचियट्ठाणमि / / 814 // तो धम्मदेसणाए दिणमणिकिरणावलीपियसहीए। अवसरइ मोहतमभरपसरो जीवाण मवाण // 815|| धम्मकहाए दिवोसहीए मिश्रमि मोहगंठिम्मि / -- C ROSS 56 Page #70 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 49 // 57 // द्देशनां जीवाण नाणलच्छी करेइ हियएण परिरंभ // 816 // जिणचंदाओ धम्मोवएसखीरत्रवो समुल्लसिओ। संवेगरसुल्लासं मोति- भगवयफलय करइ चेव // 817 // परलोयसाहणुञ्जयवीरजिणिंदेण धम्मगुणकहणे / मोहमहामहिवइणो दलंमि पवियभिओ खोहो / / 818 // वीरजिणधम्मकहणे गजियगंमीरधीरवाणीए / सच्चं मेहकुमारो पमोयवाहबुधाराहिं // 819 // सिंचंतो खेत श्रुत्वा तलं पुलयकयंबाण जणियउल्लासो / वीरजिणपायपायवसंथवमेवं करइ नमिरो // 820 // तुह पयजुयले लद्धे कप्पडुमविन्ममे प्रव्रज्यामए देव ! / भवदारिदं दरे वोलीणं दिनदुहलक्खं // 821 // तुह तइलुकदिवायर दोसोदयदलणपायसंसग्गे / किं चुजं ? ग्रहणेच्छा। जं बोहो राजीवाणं व जीवाणं // 822 // मुणिमंडलगुरुतारयपयासकरतावहरणललियंगो / लोगुत्तरस्सरूवो तुमं सि जिणनाह जयचक्खू / / 823 // विसयामिसगिद्धीए विवेयदिद्विविणासबुद्धीए / संसारंमि सुसाणे तुह वयणा दूरमवकंतं / / 824 // छिदित्तु मोहपासं चइत्तु दुक्खोहखाणिगिहवासं / काहं तुह पयपउमे छप्पयसबम्भचारित्तं // 825 // सामि ! सवणामएणं तुह वयणेणं जिणिंद ? घरमुच्छा / उत्तिन्ना सिवमग्गे चरणमहं संपविजिसं // 826 // विणयपणओ जिणेसर ! सम्मं संबोहिऊण पियराइं। तुह पयपोयारूढो लहुं तरिस्सामि भवसिंधु // 827 // हं भो देवाणुप्पिय ! मा पडिबंधं करिजसु तुमं ति / इय | जिणमणिए एसो रायगिहे गेहमणुपत्तो // 828 // पियराइं पणमिऊण मेहकुमारो पमोयसंभारो / विनवइ मउलिमंडलमउलियकरकमलजुयलग्गो।। 829 // तायव ? मए दिट्ठो तिहुअणतरणी जिणो महावीरो। तब्बयणकिरणनिहओ हिमं व मोहो मह विलीणो // 830 // हरिसभरनिम्मरंगी उववृहद धारिणी तओ मेहं / धन्नोसि तुमं पुत्तय सलक्खणोतं कयत्थोऽसि // 831 // मेहो पुणोवि जंपइ तुम्हाणुनाए ताय माय अहं / जिणरायपायमूले पडिवजिस्सामि पवजं // 832 // इय DI57 // SAHASRECASS Page #71 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणपतिः / दीक्षाग्रहणार्थ जनकजननीविज्ञापना। // 58 // 4 EX E44E4+4+4+4+4+4+4+4 - माविविरहदुस्सहवयणं सोऊण धारिणी देवी। चम्पयलय व निट्टरनिसायखरपरसुणा छिन्ना // 833 // गुरुदुक्खभरकंता मुच्छाविच्छिन्नसबचेयना / संमीलियनयणपुडा धसत्ति धरणीयले पडिया // 834 // तो सीयसलिलधाराहारावलिकमलचंदणरसेण / सिसिरोवयारवसओ पच्चांगयचेयणा देवी / / 835 / / दुहसंदोहमहंबुहिलहरीनिवहुच्छलंतबिंदु छ / जंपइ मुहु मुंचती थूलथूलाणि अंमणि / / 836 // एगोच्चिय तं पुत्तो उंबरपुप्फ व दुल्लहो अम्ह / तुज्झवियोग खणमवि कहं खमामो ? वयं वच्छ ! // 837 / / अम्हाणं परलोए गयाण गयरायपायमूलम्मि / गहियत्वा पवजा तुमए अणुहुयभोएण / / 838 // मेहो मिउमहुराए विवेयसाराए अमियधाराए / अवणितो सो तावं वाणीए भणइ विणएणं / / 839 // अंब! विलंबो कीरई जइ नाइ आउयं गुरुलहू णं / कमसो परिपूजंतं इहग्गओ मग्गओ वावि // 840 // दसदिटुंतदुलंमे अम्मो मणुयत्तणाइउवलंमे / सारं एत्तियमेत्तं सुद्धं जे गिजइ चरित्तं // 841 // भोगा भुयंगभीमा विसवल्लीविन्भमा महामोहा / अबुहाण सेवणिज्जा | विवञ्जणिज्जा य बुहाणं // 842 / / वंतासवाण पित्तासवाण मणुयत्तणमि असुईण / भोगाणं जा गेही ही जीवाणं महामोहो // 843 // मेहं पुणोवि जगणी भणइ इमा पुत्त ! रायपुत्तीओ / तुह पत्तीओ भत्ता रत्ता सका कहं 1 चइउं / / 844 // मेहो पडिभणइ इमं माइ इमा मज्म बंधणतुलाओ। भवचारयमि मीमे लोहमया संकलाउ व // 845 // एयासि पडिबंध सक्खं पयडीए अट्ठकम्माणं / जिणरायपसाएणं लीलाए हं चहस्सामि // 846 // तुह पुत्त पुनअन्नवसमुद्वियं रायलच्छिमुवमुंज / पुरिसुत्तम ! इय जंपइ ससिणेहं धारिणी देवी / / 847 // मेहेणुत्तं अम्मो लच्छीए वारुणीए सह जम्मो / उम्मायकारिणीए किं रागो होइ ? विबुहाणं / / 848 // अन्न च-लच्छी चवलसहावा रोगजराभंगुरं इह सरीरं / दुन्हंपि गमणसीलाण किच्चिरं // 58 Page #72 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 59 // होज संवन्धो 1 // 849 // परिचियसुहोवयारो सिरीसपुष्पं व तं सि सुकुमारो / करवत्तसगोत्तं पुण चारित्तं दुबह पुत्त ! // 850 // विसएसु व्बूढमणो वसहगई जइवि तंसि दिढसत्तो। पंचमहत्वयभारं सुरगिरिसारं कहं वहसि ? // 851 // उत्तमखमाणुगाणं मूलगुणाणं पवनुमाणाणं / उत्तरगुणपरिवाडी रक्खइ संजमतलं वच्छ ? / / 852 / / धम्मज्झाणकलाए बद्धं चिय संकलाए धरियवं / कविचवलं नियचित्तं पुत्तय ? सासयसुहनिमित्तं / / 853 // वसियत्वं विणएणं गुरुकुलवासंमि गुणनिवासंमिासहियत्वा बावीसं परीसहा दुस्सहाऽवस्सं // 854 // संसारम्मि समुद्दे पुत्तय जलजंतुघट्टणारुद्दे / उच्छलिउक्कलिया हिं बुहह नाव व पवजा // 855 // इय जणणीए वुत्तो मेहकुमारो विवेयसिरिहारो / महुधारामहराए गिराए भणिउं समाढत्तो / / 856 / / लहुकम्माण जीयाणं जिणिंदवयणामएण सित्ताणं / सत्ताणं माय इमं चरणं सिवलच्छिवरणं व // 857 // अन्नं च-“तिणसंथारमुवन्नोवि मुणिवरो भट्टरायमयमोहो / जं पावइ मुतिसुहं कत्तो तं चक्कवट्टीवि" | // 858 / / वीरजिणेणं जेणं वामपयग्गेण चालिओ मेरू / मह तस्स पसाएणं चरणभरो सुबहो होही / / 859 // तं नस्थि जंन सिज्झइ साहसवंताण धीरपुरिसाण | ववसाएक्करसाणं वसिंदियाणं थिरमणाणं // 860 // भणियं च-थरहरह धरा खुम्भंति सायरा होइ भिंभलो(व्याकुलो)दियो / असमववसायसाहससंलद्धजसाण धीराणं // 861 // तहा-ता तुंगो मेरुगिरी मयरहरो ताव होइ दुत्तारो / ता विसमा कजगई जाव न धीरा पवजंति // 862 // वीरजिणिंदे निजामयंमि सुहभावगजगपवाए / चारित्तजाणवत्तं भवनवं तारइ अविग्धं // 863 / / मेहकुमारो पसरं करेइ परमोइयं तह दिसासु / तायंबकर्यवाणं जह सोरभो वियंमेह // 864 // ता ताय भावजणओ माय तुमं होसु भावजणणित्ति / भावो भन्नइ हेऊ सुसाहुसद्दप्पवित्ती) SACROC4%AAAACARAK दीक्षाकष्टप्रदर्शने मेषकुमारप्रत्युत्तरं श्रुत्वा प्रदत्ताऽनुमतिः। VI // 59 // Page #73 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री प्रवज्यो त्सव. जयन्ती प्रकरणवृतिः / वर्णनम् / // 6 // // 865 // इय मेहविवेएणं दिणयरकरपसरसरिसमावेणं / पियराण मोहतिमिरं सहसच्चिय दूरमवहरियं // 866 / / अणुकूलपडिकूलवयणेहि जा न कंपए मेहो / पवणेहि जहा मेरू तो पियराइं पयपंति // 867 / / एगदिवसंपि पुत्तय ! इच्छामो वच्छलाई तुह अम्हे / रजाभिसेयलच्छीविच्छई पिच्छिउं वच्छ // 868 // मोणेण ठिए कुमरंमि रयणकणयाइकलसपन्तीहि / रायाभिसेयमहिमं कुणंति महया पबंधेण // 869 // सिंगारियमि लंकारियंमि सिंहासणे निसन्नमि / सह परियणेण सेणियनिवेण जोकारिए कुमरे / / 870 // उम्मुक्ककरपसरो पयडपयावोवि सोममुत्तिधरो / अह तत्थ पुरे जाओ मेहकुमारो | महाराओ // 871 // कारागारविसोहणअमारिघोसणपुरस्सरं तत्तो। निक्खमणत्थं विहिणा अभिसेयमहूसवे विहिए // 872 // निजियअंतरकरणो फुरतमणिमउडकुंडलाहरणो। लेसाहि विसुझंतो भवस्स मज्झं च बुझंतो // 873 // सियकुसुमदामधारो कुंदुज्जलदेवदूससिंगारो / विलुलियमुत्ताहारो मेहकुमारो गुणाहारो / / 874 // जणणिजणएहि भन्नइ अहुणा तुह पुत्त किं ? पयच्छामो। मेहेणुत्वं कुत्तियआवणओ पत्तस्यहरणे // 875 // सिग्धं आणावेउं पत्तेयं ताणि लक्खमूल्लाणि / वियरंति केसकप्पणनहकम्मकरस्स पुण लक्खं // 876 // मंगलतूररवेणं तत्तो गयणग्गलग्गसिहराए / मणिखंडमंडिआए कंचणकलसोवसोहाए // 877 // सिवियाए रयणमए विउले सिंहासणे निसनस्स / मेहस्स हुंति पुरओ परमा अढ मंगलया // 878 // पत्ताइपडलगकरा दक्षिणबाहुंमि धारिणी देवी / मंगलमुहला वामे अनाओ ठंति देवीओ // 879 // एगा य पिडओ पुण रूवबई छत्तधारिणी तरुणी। उत्तरओ दक्खिणओ सियचामरपाणिकमलाओ / / 880 // उक्खित्ता तो सिबिया मणहरनेवत्थरूवरम्मेहिं / उक्टिकलयलेणं सहस्ससंखेहिं पुरिसेहिं / / 881 / / // 6 // Page #74 -------------------------------------------------------------------------- ________________ I 61 // CA%E0 RECAUCAE% A मेघकुमारस्य वृद्धमहिलाप्रदत्ताआशिर्वादाः। चउरंगदलसमेओ अमेयरिद्धीए सेणिओ राया / अणुगच्छइ तो मंगलगहीरबजंततूरेण // 882 / / संवरपरिणामेणं मेहकुमारेण बहुरए हरिए / मुहचंदचंदिमाए विप्फुरियं तो किमच्छरियं ? // 883 // संजमगिरिसिहरट्ठियसमयं दट्टण सवभावेसु / गयराओ इव दाणं दितो तं होसि गयराओ॥ 884 // तवतिवखग्गहत्थो अविहत्थो नायसवपरमत्थो / जिणिऊण मोहरायं जगपडायं तुम हरसु // 885 // सयलकिरियापएसुं काउं पट्ठीए सबमुवसगं। वक्कविसुद्धिं नाउं सुसाहुसदं पयासेसु // 886 // परिचत्तलोहबंधं विसिद्धकट्ठोवओगसंजुत्तं / चारित्तजाणवतं आरूढो तरसु भवजलहिं // 887 // अयले तुमंमि इंदियदंती विसयाण विसहराणं व / संभवउ दप्पसमणी निद्धसही नागदमणीए // 888 // संसारे कंतारे उवसमरसपूरपूरिए &aa झत्ति / मेहे तुमंमि गुणवणदावो कोवो सया समउ / / 889 // मद्दवमयंददलिए माणगइंदंमि दुद्दमे तुज्झ / होउ सुहाणं लाहो निविग्धं मुत्तियफलाणं // 890 // आमूलाओ दज्झउ अजवबजासणीनिवाएण / मायावंसकुडंगी सिवपहरोहंमि गुविलंगी // 891 // भवचारयंमि तुट्टउ झडत्ति तुह लोहसंकलाबंधो / संतुट्ठिवजलढिप्पहारसयखंडजजरिओ // 892 // एवं आसीसाओ विम्हयकंपंतसेयसीसाओ। महिला मालारूढा वुड्डा वियरंति कुमरस्स // 893 // उदयगिरिसिहरसरीसं विवेयरविणो रुईहि रमणीयं / पियसहि ! पिच्छसु निउणं मेहकुमारस्स मणिमउडं // 894 // रयणमयकुंडलाई इमस्स सम्म निरिक्खह सहीओ। तिमिरहराणि व कन्नावलग्गसिरिवीरवयणाई // 895 // सक्खं जिणिंदसिक्खा दक्खा संसारतावहरणंमि / वसई हिययंमि मोत्तियहारमिसेणं पियसहीओ! // 896 / / संवेगमंदरेणं निम्महिए एस भवसमुइंमि / उवसमसुहाए सित्तो नजइ चंदणरसालिद्धो // 897 // कुंदकलिउजलाई इमस्स अंगमि देवदसाइं / गिहमोहजलहितरणे विलग्गडिंडीर C %A5- 1400 %E0A5 // 61 // Page #75 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृतिः / श्रेणिकधारिणीविज्ञप्त्या जिनेन दीक्षितो मेषकुमार // 62 // ARRERAKAR सरिसाइं // 898 // उइंडपुंडरीयं पिच्छह एयस्स मो वयंसीओ / कम्मपरिणामरायं गिजिमयं जमिह पिसुणेइ // 899 // सरइंदुकुंदसुंदरचामरजुयलच्छलेण पयडाइं / पुरओ कयाई इमिणा बाणाई धम्मसुकाई // 900 // सिवियाए चलिआए तारो किंकिणिगणाण झंकारो / नेहनिगडाण भंजणरवो व उवमिजद सहीओ! // 901 // जो पुण तूरनिनाओ सो नाओ होउ पियवयंसीओ / भवसिंधुमहणपसरियगहीरघोसु व अम्हेहिं // 902 // इय निक्खमिउं मेहे रायगिहे रायमग्गमोइन्ने / पासायसिहरसंहियवियतरुणीण संलावो // 9.3 // एवं संसिजंतो संतो दंतोवि दाणपसरेण | गयराओ इव कुमरो पत्तो जिणरायओसरणे // 904 // सिबियाओ ओरुहिउं पंचविहाभिगमप्रवयं अंतो / परिसित्तु जिणं वीरं वंदइ तिपयाहिणीकाउं // 905 // सह सेमिएण तत्तो वीरं विन्नबइ धारिणी देवी। अम्हाण एस तणओ मेहो निहिकसबस्सं // 906 // तुम्हत्रयणामएणं अवगयरूवाइविसयविसमुच्छो / पायपएसे तुम्हं संजमरजं अहिलसेइ // 907 // संसारजलहितरणे अम्हंपि य जेण जाणवत्तं व / सीसत्ताए तुम्हं वियरामो तेण नियपुत्तं // 908 // अह मेहकुमारोवि य सम्मं वेरग्गमग्गमवइन्नो / विणयपणयंगलट्ठी कयंजली विन्नवह वीरं // 909 / / गुणमणिरोहणगिरिवर मह तह पायप्पसंगरंगस्स / दिजउ संजमरयणं भवदोगच्च हरइ जमिह // 910 // मन्नइ जिणेण तत्तो सत्ताहिय सबसत्तहियहेउं। गिन्हसु एयं विहिणा देवाणवि दुल्लहं रयणं // 911 // एवं जिणेण वुत्तो मेहो पुवोत्तरंमि दिसिमाए / गंतूण पंचमुट्ठि कुणइ महप्पा सिरोलोयं / / 912 // हंसपडएण केसे नजइ | मुत्ताहलेहिं पूयंती / अंसूणि मुंचमाणी पडियच्छइ धारिणी देवी // 913 // गुणसायरजिणवीरस्संते गंतूण मेहकुमरोवि / जीवाण जीवणीयं गिन्हा संजमभरं तत्तो // 914 // तो भयवयावि मणिओ मेहो लोयाण निव्वुई दितो / अहुणा तं पण SAHASSACREKHE // 62 // Page #76 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 63 // ॐGALACHAL | मिअसि संजमसिरिपबयारूढो / / 915 // वीरजिणो पुणरुत्तं मेहकुमारं पवनययभारं / उक्वूहह वियरंतो सिक्खं गंभीरवयणेहिं मेघाने // 916 / / मइधन्नाणं मत्थयचूडामणिविन्भमो सितं मेह / जेण पइन्नासारो सहलीकयसयलसंसारो // 917 // छजीव- भगवत्प्रदनिकायाणं जइवि तुम मेह होसि अविरोही / तहवि हु संवेगरसा रक्खिजसु कंदलुल्लासं // 918 // कोवदवपसमणेणं | तः शिक्षोअञ्जवविज्जुप्पइन्नमयगिरिणा / सञ्चं किजउ तुमए नियनामं मेह! जिअलोए // 919 // मेह तए कायव्वो तह पयपसरो पदेशः। दिसासु जह किती। केयईवणं व विहसइ दुरुजियपरिमलुग्गारो // 920 // पइविसयं सोयाणं सरसपवित्ताण तह तए मेह ! / किजउ पुट्ठी जह स्यकलुसाण न होइ उम्मग्गो // 921 // तं संवरं करिजसु अजवबीएण जेण जाएण / मायावंसकुडंगी मूलाओ खिजए मेह // 922 // पइवरिसं जइयव्वं तुमए तह मेह पैसस्यिदएण / पुनंकुरोदएणं न लोहजाईवि जहा होजा // 923 // सुयसत्थसलिलपुन मेह तुमं माणसं तहा कुणसु / गुरुसेवालसकलुसं हविज न जहावि गंभीरं // // 924 // सबसमिईसु धीरो रायरिसी तं सि नायपरमत्थो / जीवाण रक्खणेणं परलोयमसंसयं जयसि // 925 // कलहो | जत्थ न हवउ न य पुरगामागरेसु ममकारो / जत्थ न दुग्गाभिगमो न य भंडारो न कुठारो // 926 // जत्थ न विग्गहपोसो गुत्तीसु न जत्थ जीववहबंधो / न करग्गहो न विसयउवयारलेसोवि जत्थरिथ // 927 // निजिणिय मोहरायं चितं चउरंगदलसमिद्धीए / खत्तियवर ! लोगुत्तरसंजमरज तुमं पत्तो / / 928 // तं पुण दुप्परियल्लं पमत्तचित्ताण कीवजीवाण / जेणंतरंगरिऊणो छलेसि णो उज्जया निच्चं // 929 / / एयंमि पमत्ताणं रायसिरी सा पयट्टए अन्ना। जीए अणुरत्ताणं 1 श्रुतानां पक्षे प्रवाहानां / 2 प्रसृतदयेन पक्षे प्रसृतोदकेन / 3 गुरुसेवायामाळसकलुषं / 4 दुराकर्ष / // 63 // Page #77 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 64 // व विविभागअभिमासे थे Re-CREASOKES जीवाणं दुक्खददोली // 930 // गयराओवि पमत्तो जीवो सत्थाभिधायदुक्खाणि / लहइ गुरुओवि किं पुण भन्नइ ? अन्ना- द्वारपार्थाणसत्ताण / / 931 // तेलुकमाणणिजा सासयसुहहेउकम्मभूमिवरा / कल्लाणअत्थजणणी खमा सया वच्छ धरियव्वा / / 932 / / गतसंस्तासेसो अमियाहारो होह दुजीहोवि जं खमाधारो। ईसरहिययाहारो बहुगुणगुरुसीसवित्थारो // 933 // अहिलसियमणो रककष्टरहपरंपराए सुनिच्चलक्खाए / वोढवो य महत्बयभारो मुणिवसह लीलाए / 934 // गुरुकुलवासे गिरिकंदरंमि मुणिसीह पई. मनुभूष वसंतेण / जेयत्वा लीलाए उवसग्गपरीसहा कलहा // 935 // इय विविहभंगपयभरवेला सुपसायसायरुल्लसिया / गुणरयणाई मेघमुनेः 4| वियरइ मेहमुर्णिदस्स जिणसिक्खा // 936 // एयाए सिक्खाए पमायविसवेगअमियधाराए / कन्नंजलिपीयाएवि अण-|| परिणाम मिसनयणा खणं मणुया // 937 // मेहकुमारमुर्णिदो साणंदो जिणविइनसिक्खाए / अब्भासे थेराणं अह गच्छइ जिण- परिवर्तनमा वराणाए // 938 // दट्टणं चरियाई मेहकुमारस्स साहसवराई / सेणियधारिणिपमुहो जहागयं पडिगओ लोगो / / 939 // अह जहजेहूं द्वाणग्गहणे संथारस्स रयणीए / सेहस्सवि तो द्वाणं वसहिदुवारंमि मेहस्स // 940 // साहूण पविसं ताणं निताणं पायघडणदुहेण / निद्दासुहं न लद्धं मेहकुमारेण रयणीए // 941 / / गीयाणवि थविराणवि कह मोहो? मेहसेहवच्छल्ले। सुझंतु च्चिय थेरा करेऽक्खमालं धरइ अहवा / / 942 / / अब्भाहओ दुहेणं पच्छिमरयणीए चिंतए मेहो / मह गेहे चिय गमणं जुत्तं अचिरुग्गए सूरे // 943 // जं एए मुणिवसहा गउरवमकरिसु मह गिहावासे / वयभारे अइगुरुए चोजं लहुयत्तणं जायं / / 944 // इय मेहे कसिणमुहे कलुसीकयसंवरेण पसरती / उक्कलियाओ वियरइ अणवरयं नित्रया चिंता PJ // 945 // कह उग्गयंमि सूरे मेहे काउं व सुपरिवेससिरिं / सो पत्तो उजाणे जयगुरुजिणवीरओसरणे // 946 // Vi||64 // SCANCIENCATE) Page #78 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 15 I है भत्तीए बंदित्ता मेहकुमारो मुणी समासीणो / आलविओ य जिणेणं सुहाभिसित्ताए वाणीए // 947 // सोम ! तुम रयणीए वसहिदुवारंमि भूमिसयणीए / अइसकडंमि वुच्छो मुणीण पयघट्टणादुत्थो // 948 // मेहमुर्णिद तुहंगे साहुपएहिं न एस पडिघाओ / अंतरमलहरणेहिं पएहिं (जलैः) तं किंतु सुण्हाओ // 949 // किंच-इमं सरीरं अन्नो जीवुत्ति एव कयबुद्धी। दुक्खपरिक्कसकरं छिंद ममत्तं सरीराओ // 950 // पुत्वभवे करुणाए सरणागयवच्छल्लेण धीरत्तं / मेह तए जं धरियं तमिह कहं सोम ! परिहरियं ? // 951 // जिणवयणामयसित्तो पञ्चागयचेयणुल्लसियचित्तो / रोमंचंचिय- | गत्तो मेहमुणी पुच्छए तत्तो // 952 // केवलनाणदिवायर उज्जोइयसयलतिहुयणाभोय / पुवभवे मह जाओ कहमिव धीरत्तणाभोओ // 953 // अह भणइ जिणवरिंदो चंदो इव सयलजणमणाणंदो / मेहमुणि! पुत्वजम्मवइयरमेयं सुणसु सम्म // 954 // तहाहि विंझगिरिसंनिहाणे करिणीजहंमि पंचसयमाणे / मेरुप्पहामिहाणो जूहबई आसि तं गरुओ // 955 // अह एगयाए / हा गिम्हे वणदवमवलोइऊण अइरुदं / पुवभवं निझायसि जाइसरणेण तं मेह! / / 956 / / जह वेयड्डसमीवे अहं सुमेरुप्पहो पुरा आसं। सत्तसयजूहनाहो गयराओ अरुणवनोवि // 957 // वुत्ते गिम्हदवे पसरते दवदवस्स पवणेण / तन्हाछुहाकिलंतो तुच्छसरे हंकले (चिक्खले) खुत्तो // 958 // तत्तोऽवरेण करिणा तरुणेणं पुबवेरिणा निहओ। अदृदुहट्टो मरिउं | उप्पन्नो तत्थ जूहबई / / 959 // तो सुमरिय पुत्वभवो दावोवद्दवनिवारणकएण / तं अतिणवल्लिरुक्खं थंडिल्लाणं तयं कुणसि // 960 // गिम्हमि तओ काले पसरते दारुणमि दामि / जीवाणं करुणाए पढम बीअं च चइऊण // 961 // चिट्ठसि सह | पूर्वजन्मकथितहस्तिवृत्तान्तेन भगवता स्थिरीकृतो मुनिः / %%A4% Page #79 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणवृतिः / पूर्वभवे स्वाचरितशशकदयां ने करुणाए पनि ज्ञात्वा गे पयासिहाए सुहाए जूहेणं तइए थंडिल्लए तुमं मेह / अह उक्खित्ते चरणे तुमए कंडूविणोयत्थं // 962 / / आरनियअहिं बलिट्ठसत्तेहिं तासिओ ससओ / सरणागओ व सहसा चरणट्ठाणे अह पइट्ठो // 963 // तो करुणारससायर तिपायट्ठाणेण गरुयगत्तेण / दिढसत्तेणं तुमए अभयं दितेण ससयस्स / / 964 // मणुयाउयं निबद्धं पुनं पुनाणुबंधि भोगफलं / तस्साणुभावओ च्चिय सेणियधारिणिसुओ तंसि / / 965 // तीए च्चिय करुणाए परित्तओ तुज्झ एस संसारो / एगावयारदेवो होहिसि तं जेण मुणिसीह ! // 966 // पुवभवसंकहाए सुहाए से तस्स मेहसाहुस्स | मुणितिवपायघट्टणपरितावो दूरमवसरिओ // 967 // पुत्वभवे कुमुयवणे पयासिए जिणवरिंदचंदेण / मेहजलासयदरे अह पसरइ परिमलुग्गारो // 968 // पुत्वभवाण कहाए मिहिरस्स व मेहसाहुमणकमले। चारित्तमोहणीयं कम्मं तुहिणं व परिगलियं // 969 // अणुहूयं नियचरियं सुमरइ जं भगवया पवित्थरियं / तो ईहापोएहिं जाईसरणेण मेहमुणी // 970 // आणंदवाहसलिलप्पवाहनिम्मिन्जमाणमुहकमलो / बंदित्ता वीरजिणं कयंजली विन्नवह मेहो॥९७१।। तिहुअणदिणमणिमंडल कारुनमहन्नवेण जं तुमए / वागरियं मह चरियं सत्वं तं नाह! संभरियं // 972 // पुणरवि वीरजिणिदो सोवालंभं भणेइ मेहमुणिं / संवेयच्यमंजरिवियासमहुमाससारिच्छं // 973 // तिरियतणेवि जइ गुरुसिक्खाविरहेवि ताण जीवाण / दाणाणं चूडामणिमाणं दिन्नं अभयदाणं // 974 // तो धीर ! तुम अहुणा बहुमनसि मेह किमिह गिहवासं 1 / लद्धेवि हु चउरंगे चिंतारयणं व दुल्लंभे // 975 // छज्जीवनिकायाणं आरंभो निच्चमेव गिहवासे / आरंमे जीवदया न होइ सुद्धा जओ भणियं // 976 // "आरंमे नत्थि दया महिलासंगेण नासए बभं / संकाए संमत्तं पडजा गठिगहणेणं" // 977 // जीवदयाविरहे पुण धम्मरहस्सं न होइ सुविसुद्धं / दाणेणुग्गतवेणवि कायकिलिसेण जं मणियं // 978 // "नाणं दाणं झाणं जातो मेघमुनेरपूर्व वीर्योल्लासः। SAXCE% 64645 // 66 // Page #80 -------------------------------------------------------------------------- ________________ E // 67 // +4 | गुरुकुलवासे वसतां मुनीनां महालाभाः। + + + तवोविहाणं गुरुण संमाणं / जं जीवदयावियलं अहलं तं कासकुसुमं व" // 979 // आरंभनियत्ताणं उवउत्ताणं मुणीण गुत्ताणं / संपुनमभयदाण होइ पुणो भवविरत्ताणं // 980 // एयस्स चेव वित्थररुवाइं महब्बयाई मूलगुणा / उत्तरगुणपरिवाडी वुत्ता तस्सेव रक्खदा / / 981 / / उक्तं च-"एक चिय इत्थ वयं निद्दिटुं जिणवरेहिं सबहिं / पाणाहवायविरमणमवसेसा तस्स रक्खवा" // 982 / / मेहकुमार मुणीसर कयवइजीवाण दिनभयदाणा / जइ एरिसी समिद्धी सिद्धीवि हु तुज्झ संनिहिया / / 983 // तो दिट्ठपच्चएणं तुमए सुहुमाइसवजीवाणं / संपुन्नमभयदाणं दायत्वं सबहा होइ / / 984 // तं पुण गुरुकुलवासे नाणाइयरयणरोहणगिरिन्दे / निवसंताण थिराणं खमाधराणं सया होइ // 985 / / अन्नं च-" नाणस्स होइ भागी थिरयरओ देसणे चरित्ते य / धन्ना आवकहाए गुरुकुलवासं न मुंचति // 986 // तथा-जह सायरंमि मीणा संघातं सायरस्स असहंता / निति तओ सुहकामा निग्गयमित्ता विणस्संति / / 987 // एवं गच्छसमुद्दे सारणमाईहिं चोइया सन्ता। निति तओ सुहकामा निग्गयमित्ता बिणस्संति // 988 // करुणारामे गुरुकुलवासे लब्भंति सुमणसफलाई / दीसंति य तावहरा बहुपत्तपरिग्गहा गच्छा // 989 / / मूलगुणाण पसरो सुगुणट्ठाणोवलंभसुलहओ य / तुम्हारिसवच्छाणं साहासु य खंधवित्थारो // 990 // जोइजति य इह वालयावि अइसुरहिवुड्डमूलगुणा / सुहबीयपूरया इंदियाण विविहाई चरियाई // 991 // कल्लाणगिरिनिविद्वे गुरुकुलवासंमि नंदणवणंमि / मेह! तए वसियत्वं तत्तो विबुहप्पहाणेण // 992 / / एवं महुरगिराए मेहमुर्णिदो जिणेण पनविओ / संजाओ साणंदो अमियरसेणं जहा न्हविओ // 993 // उल्लसियवयणकमलो अकलुससच्छासओ सरयसरिसो / अणुसद्विमिच्छुलट्ठि मेहमुणी धारए महुरां // 994 // हरिसंसुसलिलसेओल्लसंतवियसंतबहलपुलयंगो। मेहमुणिंदो वीरं ++ 96RECACARLOCACHAND +5+4+ // 67 // Page #81 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / मेघ HitSociॐ // 68 // जिणेसरं विनवइ नमिउं // 995 // संजमगिरिसिहरारोहणमि खलियस्स मज्झ करुणाए / तुमए हत्थावलंबो दिनो * मन:स्खलदुल्लहो अपुग्नाणं // 996 // गुणरयणायर ! सामिय ! तुह पयजुयले पहासमाणमि / मणखलणपावसुद्धिं करेमि गुरु- नपापविशुभत्तिलहरीहिं // 997 // मह मेहस्स सुहोदयभावाहियचरणघायरयपसरे / निम्मलदयपि जिणवर कलुसं चिय माणुस्स द्विः कुता जायं // 998 // तुह अकयगवयणेणं कयगफलेणं व संपयं तपि / जायं तह प्पसनं जह ललियं साहुहंसाणं / / 999 // इच्छामि सामि ! संपइ अच्छिजुयं उज्झिऊण अंगमि / मुणिरायपायघट्टणपसायसोहग्गमइदुलहं // 1000 // तो वीरजिणा- मुनिना। इट्ठो मेहमुणी थेरपायपउमंमि / दिढपक्खवायविहणियरओ जहा छप्पओ निहुओ // 1001 // अंगोवंगोवगयं सुहयं परितावभावपरिहरणं / अणवस्यं आसायइ सुयमयरंदं अमियमहरं // 1002 // पंचमहत्वयसुरतरुनंदणरमणीयसबपरभागो। मज्झत्थो जह मेरू थिरपरिणामो खमाहारो॥१००३ / / चंदो व सोमलेसो केवलकलंकपुनवित्तधरो। पउमं व निरुवलेवो | किंतु न इच्छइ जलावासं // 1004 // गयण व निरालम्बो तारयमुणिरायगुरुकुलावासो। अपडिबद्धविहारो पवणो इव न उण चलभावो // 1005 / / मयवारणो अकलहो सुपन्नाबोहीवि नउण अस्सत्थो / संखो व निरंजणओ हियए कुडिलो नउण किंपि // 1006 / / हिययट्ठिअपरमपओ अक्खोहो सागरो व गंभीरो। किंतु नं रुदावत्तो उक्कलियाहिं नउण पत्तो // 1007 // विणयोवयारनिरओ विरओ सबाण पावट्ठाणाण / गिन्हइ दुविहं सिक्खं सक्खं दक्खं व मन्नतो॥१००८॥ आयासे अठविओवि हु अपक्खवाईवि विहरइ दिसासु / विणयंगओ विराओ अक्खलियचरणो विविहवनो / / 1009 / / भणियं च-एस अखंडियसीलो बहुस्सुओ एस एस सुपसनो / एसो उ गुणनिहाणं धन्नस्साघोसणा भमइ // 1010 // मेहकुमारमुणिंदो सज्झाय // 68 // BRICAUSTROCRACHACKS Page #82 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 69 // अनशनं कृत्वा मेघमुने देवलोकगमनम् / 4%ACAASARALS ज्झाणनिज्झरगिरिंदो। सावयसेवियपाओ जइवि मएहिं कयच्चाओ // 1.11 // समिईसु कयकरणो गुत्तीसु य लद्धलक्खकोडीवि / रायरिसी सो पालइ संजमरजं अकिंचणओ // 1012 / / उग्गतवेणं तविए मेहकुमारंमि मलविमुक्कमि / विप्फुरद तेयरासी विसुद्धतवणिजपुंजि व // 1.13 // तवचरणसोसियंगो मेहमुणिंदो कमेण तणुगत्तो / आसइ भासइ गच्छइ आगच्छद जीवजीवेण // 1014 // अह वंदिऊण विहिणा रायरिसी विनवह जिणं वीरं / अहमुत्तमट्ठकप्पं काहं तुम्भेहिं अणुनाओ। // 1015 // मेहमुणिंद महायस सेणियगुत्तमि तंसि अवयंसो। निहणियमोहगईदो निक्खंतो सीहवित्तीए // 1016 // गुरुगच्छगहणवासे पडिपयमेणाण दलणलीलाए / संवेगट्ठवियचरणो सीहुच्चिय विहरिओ धीर! // 1.17 // भूयपिसायगहेहि उवसग्गपरीसहेहिं अक्खलिओ। आसन्नसिद्धिलाहो तं संसारे मसाणंमि // 1018 // हुन्ज मणोरहो तुह अक्खलिय. गुणरासि ! अक्खयसंवेगो। मइसुयसत्तिनिउत्तो रहुब आराहणामग्गे // 1019 // एवं वीरजिणेणं वुत्तो मेहो महामुणी तत्तो / गीयत्थसाहुजुत्तो वच्चइ वेभारगिरिसिहरं // 1020 // पडिलेहियथंडिल्लं पुढविसिलावट्टए तओ मेहो / संथारयमल्लीणो लीणो पउमासणासीणो // 1021 // उच्चारियपंचवओ हरिसवसुल्लासविहियसकत्थओ / अनियाणो निसल्लो मोहमहामल्ल. पडिमल्लो // 1022 // अंगीकयचउसरणो अट्ठारसपावट्ठाणपरिहरणो। मेहमुणी तत्थ ट्ठिओ अणसणपाओवगमणेण // 1023 // तो सद्विभत्तच्छेयं मासियसंलेहणं करेऊण / धम्मज्झाणविमाणारूढो परमिट्ठिसंभरणो // 1024 // तित्तीससागराऊ विजयविमाणमि मेहमुणिनाहो। एगावयारदेवो उप्पन्नो पुनसंपुनो // 1025 // तत्तो चुओ समाणो माणुसखित्ताइसव्वसामग्गि / लभ्रूण खवियकम्मो पाविस्सइ सासयं सिद्धिं // 1026 // इइ अभयदाणविहिणा निहिणा पुनाणुबंध-18 CAKACACHERECOOCAX // 69 // Page #83 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरण 4+4+4+ पुषाण / जीवो कल्लापाई मेहकमारो व पावेइ // 1027 // सुपात्रदा॥अभयदाणे मेहकुमारकहाणयं सम्मत्तं॥ | नोपरि |श्रेष्ठिवीर. नाणाईणमुवग्गहकरणं जं तं सुपचदाणं तु / सम्वोवाहिविसुद्धं दायचं सिवसुहत्थीहिं // 1 // रूपगुणेण मयणो सोह- मद्रकथानग्गेण च होइ जलसयणो / बुद्धीए देवगुरू वंछियदाणेण कप्पतरू // 2 // स्यणायरंमि पचहणमंगे फलउपलंममुहलंमो। के पधिनी खेडनगरहोइ अकम्हा विम्हयकारी विजाहराणंदो // 3 // अवि गामदेसनयरंतरेसु दीवंतरेसु एमागी। कलाणं चिय पावह सुपसदाणाणुभावेणं // 4 // जह वीरभद्दनामा सिद्विसुओ सोममुत्तिकंतिल्लो / उजोइयभुवणयलो ईसरसिरिसेहरो जाओ // 5 // 4 वर्णनम् / + // 70 // तहाहि + होइ सुमणोऽभिरामो तामामासवजयंमिविया लोया। अजडाद + अस्थि इह भरहवासे नयरं नामेण पउमिणीखेडं / निश्चं ममरीओ इव लच्छीओ मत्थ खेलति // 6 // अरुणकरपल्लविल्लो जम्मि असोओ जणो महामोगो / होइ सुमणोऽभिरामो तरुणीचरणप्पहारेण // 7 // कलकंठकलावो नाणारामाण सरसपमाण / दक्खिणसयागइरई जत्थ वसंतंमि लोयंमि // 8 // महुमासवजयंमिवि गुरूवएसेण जत्थ लोमि / चित्तंमि पवटुंता हवंति वञ्छासुया सहला // 9 // जत्थ दुहा सुहसीलाऽभिहा सुपन्भेण भूसिया लोया। अजडादयावि | सदया अगयावि सयावि सिरिबईणो // 10 // भुवणेऽन्महियनिहीण रक्खत्थं पुन्नरासिसंकासो। सेसस्स व आयारो सुहासिओ जत्थ पायारो // 11 // अरिकरिकुंमवियारणसवज्जियकिसिमुत्तियफलोहा / पइदिसमुक्तिलच्छी मंगलसत्थियसिरी | P // 7 // +++ Page #84 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 71 // *% A जस्स // 12 // नयनंदणवणकंचणगिरिंदविच्छिन्नमेहलाबंधो / बन्धवकुमुयाणन्दो नरचंदो जत्थ नरनाहो // 13 // अहत श्रीधरनामअनया कयाई सुरदुंदुहिनायपूरियदियंतो / तम्मि पुरे उजाणे चउबिहदेवेहिं थुवंतो // 14 // भवियणकमलदिणिन्दो पणय- जिनेश्वरे सुरिन्दो फुरन्तगुणविन्दो। अरनामा जिणचंदो समोसढो तिहुयणाणन्दो // 15 // ततो सबड्डीए भत्तिमरुम्मिन्नबहलरोमञ्चो। समवसृते तित्थयरवंदणत्थं वच्चइ राया सपुरलोओ // 16 // पंचविहाभिगमेणं विहिणा तिपयाहिणी करेऊणं / जिणनाहं वंदित्ता श्रेष्ठिसागरनिवो निसीयइ जहट्ठाणे // 17 // धम्म कहइ जिणिदो सदेवमणुयासुराइपरिसाए / तो अमियसारणीए सुमहुरंगंभीर- दत्तस्य वाणीए // 18 // अक्गच्छइ मणमोहो भवाण सम्मदंसणं होइ / अगोवंगुच्छाहो तो जायइ चरणपरिणामो // 19 // पृच्छा / इदुफलसिद्धिसूयगपुलयंकुरपडलबहलियसरीरो / सिट्ठी सागरदत्तो कयंजली विनवइ तत्तो // 20 // केवलनाणदिवायर उज्जोइयसयलतिहुयणाभोय! / आसावरोहपसरं मह तिमिरसंसय हरसु / / 21 / / सत्तण्डं पुत्ताणं उवरिं अम्हाण अइसइन्हाण ( अतिसतृष्णानां ) / एगा पहु संभूया पुत्ती पियदंसणा नाम // 22 // पालिजंती कमसो बवंती सोमकंतिमुत्तीए / गिण्डई कलाकलावं सियपक्खे चंदलेह व // 23 // जीए लावनामयमरेण नयणंजलीहिं पीएण / मणुयाणं तक्खणं चिय अणिमिसनयणतणं होई // 24 // तारुणं घणरुवं सच्चं चिय जीए जेण पडिहणिओ। रुवमरट्ट. घरट्टो जं कामपरिणीए // 25 // तिणिसलया विणएणं अमियमया महुरसच्चवाणीए / सीलगुणसल्लईवणकरिणीकरणिं समुबह // 26 // सिक्खंती कम्मकलं सेवंती वीयरायपयकमलं / घरदेवय / सुहया सा अच्छइ गउरवग्धविया // 27 // एममि दिणे सदि चेडीचशेण वेईयहराओ / घरमिन्ती वणिएण दिट्ठा सा वीरबहेण / / 28 // परि- Vi72 // सॐॐCO 4 %A5-5 Page #85 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / ASHALA | स्वपुत्रीप्रियदर्शनोपरि वीरभद्रस्य ममत्वकथनम् / // 72 // 4%AC% पुच्छिएण परियरजणेण परिकहियमित्थ नयरम्मि / एसा कन्ना तणया सागरदत्तस्स सिद्विस्स // 29 // रुवविणिज्जियरंभा PI अइसयरमणीयजोवणारंमा / लक्खणपुन्ना कन्ना एसा तवणिज्जलावन्ना // 30 // लोयणजुयजियहरिणी रइरससल्लइवणम्मि वरकरिणी / सीलगुणरयणधरिणी एसा कह हुन्ज मह घरिणी ? // 31 // इय चिंतापरमंदरमहिए हिययंमि सायरे तस्स / पियदसणासिरी बहु वियंभए वीरभद्दस्स // 32 // नीलुप्पलनयणाए वियसियसयवत्तसुरहिवयणाए / अहरारुणकिरणोग्गमअहरीकयबंधुजीवाए // 33 // उल्लसियपक्खवाओ चपयकंतीए तीए अणुरत्तो / भमरो व वीरभद्दो अम्हघरं तो सयं एइ // 34 // कमलदलदीहनयणो सक्खं चिय रुवसंपयामयणो / प्रन्निमससहरवयणो आगच्छइ एस को सयणो ? // 35 // | इय अम्हाण विम्हियरसेण वत्थम्मि पल्लविजंते / एसोवि वीरभद्दो सच्छायघरंगणं पत्तो / / 36 / / सागयवयणसुहाए सेएण इमस्स अह सहइ पुलओ / भाविविवाहे मंगलजवंकुरुल्लाससोहग्गो // 37 // तत्तो विणीयविणओ पणओ अम्हाण चरण ववाह मगलजवकुरुल्लाससाहाया // 2 कमलेसु / अलितरुणो व रएणं सत्तगुणाहिडिओ वेसो // 38 // गुणरयणरोहणगिरी विणओ जस्सेह होइ साहीणो / सबाण मा वाण संपयाणं स भायणं तत्थ किं ? चुजं // 39 // विणयंगओ न चुजं पुरिसोचमसंगमेण दिढपक्खो / सयसन्निहियसिरीओ दुजीहदरीकरणदक्खो // 40 // इय चिंतागंगोजलदिछोए दवियम्मि जत्तेण / महासणे निसनो तत्तो अम्हेहिं णुनाओ // 41 // पुट्ठो तओ उ पुत्तय कचो इत्थागया कया तुम्मे / केण निमित्तेण पुणो संपत्ता अम्ह पासंमि // 42 // ता भणइ वीरभद्दो तायसमाणाण तुम्ह पायाण / नियचरियं वित्थरियं सयंपि लज्जावई नेव // 43 // अस्थि इह बंगदेसे धरणीरमणीविसेसयाकारा / नामेण तामलित्ती नयरी रयणायरन्मासे // 44 // तत्थऽत्थि उसमसेट्टी लच्छीकुलमंदिरं समुद्दो छ / जिणमयसम्मदिट्टी *4%A EMORIES R आ॥७२॥ Page #86 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 73 // वीरभद्रोक्तः स्वत्तान्तः प्रियदशनोपरि स्वरागप्रकटनं दएकट्ठाणं समजाओ // 45 // जिणरायपायभत्ता अकंपसीलतमेरुगिरिचूला / तस्स य जंगमलच्छी घरिणी नामेण सिरिकता // 46 // ताण सुओऽहं जिणपयपउमे फुल्लंधुओवि महुचाई / करुणारामोवि सया निच्चफलबोहिलाभरओ // 47 // ववसायवज्जियाणं पुरिसाणं होइ दूरगा लच्छी। तत्तो वाणिजेणं समागओ संपयं इत्थ // 48 // जेण पुण कारणेणं संपत्तो तुम्ह पायमूलंमि / तं पुण सोवालंभ भणेमि सम्म निसामेह // 49 / / पियदंसणाए तुम्हं तणयाए अञ्ज चेइयहराओ। इंतीए सट्ठाणं अम्हाण निरिक्खमाणाणं // 50 // तह कहवि मणो बद्धं दिगुणवि कुडिलकेसपासेण / जह निप्पंदं जायं अहो कला कावि दुल्लक्खा ? // 51 / / भालतिलओ तीए केणवि दिवेण निम्मिओ ताय! / मह हिययं जेण इमं दिद्रेण विमोहियं सहसा / / 52 // नीलमणिनिम्मलाए दिट्ठीए तेयमुग्गिरंतीए / मज्झ मणो लीलाए तिणं व लहुयं समुक्खित्तं / / 53 // जो पुण सिहिणसिहोवरि तारो हारो लुलंतज्झलकंतो / सो तीए मह गुणवं सच्चं चिय मणहरो जाओ // 54 // रुवाइयगुणाण मह मणरयणस्स हरणवावारे / जो तीए सिंगारो सो संगारो मयणसारो // 55|| मह मणहरणे तीए इण्हि तह ताय! होसु सुपसाओ / जह चिट्ठामि अहंपि य सुहेण पासम्मि संलीणो // 56 // ता चिंतिय मए पहु एसो उत्तमकुलम्मि संभृओ। जिणवयणभावियमई अहो सुवनं च सुरहिं च / / 57 // एसो सम्मइंसणदिट्ठी पियदंसणा य मह पुत्ती। एसो पुण अणुरत्तो संजोगो तो इमो तत्तो // 58 // कप्पदुमे कप्पलया चंदे जुण्हा रविम्मि उग्गपहा। एयम्मि मज्झ पुत्ती अणुरूवो एस संजोगो // 59 / / अन्नं च-जइवि गुणरयणखाणी तह. विहु परभवणमंडणी तणया। पियराण माणमाहप्पखंडणी हवइ हु अवस्सं // 60 // भणियं च-महिहरतणया रयणायर 445CSAMACAE% // 73 // Page #87 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी जयन्ती प्रकरणपतिः / // 74 // प्पिया वहइ नम्मका सलिलं / सच्चं नीससइ जयो को धूयाए जापाए // 61 // दुहियाई इंति तीए अम्मे पियराई तेण * लग्ने कृते दुहियत्ति / भण्णा परतंताए जम्मो जं सीए नेयहो // 12 // किंतु इमाए एसो अणुरतो जेष सभ्यासहिओ / मह स्वपुरीसायरस्स तणया ता लच्छी चेव नायवा // 63 // ता दायबाध्वस्सं एसा एयस्स वीरभद्दस्स / अणुरूवगुणाणं चिय 18 गमनं, तद्जोगो कल्लापमाषहद // 64 // ता सयणसउणसम्मथसुलग्गतिहिकपरिक्वगहजोगे। भुवणच्छेरयभूयं पाणिग्गवणं हवइ | गुप्तपरताणं // 65 // कावयदिणाण अंते पेमाबंधे सयम्मि संकंते / पियदसणाए सद्धिं गच्छइ सो तामलित्तीए / / 66 // तो अम्हे देशगमने चिट्ठामो हिट्ठा तुट्ठा सपरियणा सामि ! / लीलाए कजसिद्धी जेण महस्थावि संजाया // 67 / / एसो पुण दुल्ललिओ दइवो च श्रुते दंती कहपि न क्खलिओ। सोस्थियजणसोक्खाणं रुक्खाणं भंजणुज्जुत्तो॥ 68 // जस्स पयावो अहिओ सहिओ तेएण सागरविप्फुरतेण / तस्सवि रविणो अहवा उदयस्थमणाई जायंति // 69 // पुरिसेण आगएणं अहऽनया ताव तामलित्तीए / श्रेष्ठिना पच्चइयेणं कहियं अम्हाणं तुद्वचित्ताणं // 70 // केणावि निमित्तेणं कत्थवि पत्तो न नजए सम्मं / पियदंसणं सुत्तं सो मोतूण पृष्टो भगवीरभदोसि // 71 // पिपदंसणाए पकओ दिट्ठो कि ? देव ! अविणओ तेण / अविणीयमग्गलग्गा विरुयच्चिय साधया हुति वान् / // 72 // स्यणायरोवि जलही सरस्सईसु खियेइ जह खारं / वारंवारं तह पहु ! किं एसो वीरभद्दोवि ? // 73 // अन्नं च गओ कन्नं रवि व परिहीणतेयमाहप्पो ! उत्सरपयवीदरीभूओ अहवावि किं देव ? // 74 / दोसाणं लहुयत्त दिन्तो दिवसप्पयावतेयाणं / गरुयत्तं सूरो इव पच्छाहुत्तं कया एहि ? // 75 // इच्चाइयं उयंत कहेह मह सामि ! वीरभदस्स / संसयसायरतरणे तुहवाणी चेव दिवतरी // 76 / / CCCCCES Page #88 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 75 // त अह भणइ जिणवरिंदो तिहुयणसाहारणेण सद्देण / एसो हु वीरभद्दो गुणरयणमहोयही ताव // 77 / / किंतु इसो पत्रेणं [& | तद्गुणविचिंतियं तेण तामलित्तीए / पुरिसो अदिट्ठदेसो कुवनिलुक्को व मंडूको // 78 // अन्नन्नदेसनिम्मलकलोवलंमेण सोम- प्रदर्शनपूमत्तिधरो। रिसो सुवित्तपुचो न मयकलंक वहद हियए // 79 // देसंतरावलोयणकोऊहलतरलमाणसो एसो / पियरपियदं- |र्वकं भगसणाणं अणिवेइयऽकअपरमत्थो // 80 // वेसविवज्जासेणं ओसहिगुलियापयोगमाहप्पो / निवसिय अंधारपडो सणियंवतोक्तं सिंरयणीए नीहरिओ // 81 // चउसुवि दिसासु देसंतरेसु ठाणतरेसु गच्छंतो। सम्माणिजइ एसो सुय व बंधु व निद्ध व // 8 // | हलद्वीगमसहावसहसंसयतिमिरहरो मिहिरमंडलसरिच्छो / वसुपूरपूरियासो लहइ य अग्धंजली एसो // 83 // देवगुरूण संथवविहीए नं तस्य / कवं पसनमइसुदिढं / पकुणतेणं दिजइ विबुहाण अच्छरियं // 84 / / समिहियसरलएणं कोडिगुणारोहबंधुरतरेण / चाएण तेण जिप्पइ महत्थलोओ वि लीलाए / 85 // अइलडहरुवलक्षणमुत्तीए दिट्ठीगोयरगयाए / सो नजइ विबुहेहि गुणस्यणमहोयही एस // 86 // सिढि ! न तस्स विएसो विजाण विलासमंदिरं जं सो / तह न परो लोओवि हु वियड्डपियवाइणो तस्स // 87 || जम्मंतरसमुवज्जियउजियसुकयाणुभावओ तस्स / संपन्जमाणभोगोवभोगसोक्खाई सम्वत्थ / / 88 / / सच्चं सुहासियाई वयणाई तस्स जे जणे दिति / सवणंजलिपीयाई अणिमिसनयणतणं सहसा / / 89 // अह एस वीरभद्दो विउले वेलाउलम्मि संपत्तो / पिच्छइ य जाणवत्तं पगुणीजंतं पयत्तेण // 90 // पुच्छह य कत्थ दीवे बोहित्थो एस बच्चही अहुणा ? / अपाहियं नरेहिं दीववरे सिंहले सोम ! // 91 // तो एसो परिचितइ सिंहलदिवम्मि दिश्वरयणाई। | हंतित्ति जलहितरणे अहमवि तो साहसं काहं // 92 / / पुनाणुबंधिपुनोदएण जो होइ साहसावासो। तस्साणदियहियया 13 C Page #89 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती प्रकरणपतिः / साण निवासो सच // 76 // |99 // गंभीरपालसियपायपसरेण / सयंवरा इंति लच्छीओ / / 93 / / उक्तं च-साहस्सं अवलंबतो पावइ हिययत्थियं न संदेहो। जेणुत्तमंगमित्तेण राहुणा 6] रत्नपुरे कवलिओ सूरो // 94 // अहवा रयणायरस्स महारंभेणायासिऊण अप्पाणं / उवलद्धा हरिणच्छी लच्छी हरिणावि हरिसेण * शंखश्रेष्ठिना. // 95 // तो जाणवत्तपहुणा विहिणा आपुच्छिएण ऽणुनाओ। सो तम्मि गओ दीवे सिग्धं निविग्धपोएण / / 96 // रयणउरं वीरभद्रस्य नामेणं नयरं तत्थथि सुरपुराओवि / अहियं चिय जं दिवाईसयवरा नरवरा बहुया // 97 / / लच्छीए कुलगेहं जो || प्रदत्तोमालंघह कहवि नेय मायं / तत्थ रसाण निवासो सच्च रयणायरो राया // 98 // पाणपियावि महासई उत्तमकुलरूवतिहु. तृपितृसेवायणम्भहिया / तस्सस्थि अग्गमहिसी देवी तेलोकदेवि त्ति // 99 // गंभीरधीरसदो धवलगुणो सइपवित्तयासहिओ। किंतु विषयोकुडिलत्तरहिओ सिट्ठी नामेण संखोत्ति // 10 // तस्सावणधरणीए हरिसरसोल्लसियपायपसरेण / कप्पहुमेण व सहसा पदेशः। अवइ वीरमद्देणं // 1.1 // दट्ठण तयं तुट्ठो सिद्धी संखो विचिंतए एवं / को एस दिवरूवो ? सक्खं गुणरयणरासि व // 102 // पढमाभासणरसिओ आभासइ पत्तदसणुल्लसिओ। आगच्छ वच्छ ! उवविस कओ तुम आगओ एत्थ // 103 // तत्तो अवणयगत्तो आलत्तो तेण अमियरससित्तो। आसीणो महुरगिरा कयंजली विनवइ वीरो // 104 // अहमुसभदत्तपुत्तो दक्खिणभरहद्धतामलित्तीए। देसंतराण दंसणकोऊहलमित्तकजेण // 105 // एगागी वियरंतो अजं चिय ताव पवहणुत्तिन्नो। इन्दिदिरसुंदेरं तुह पयपउमे इहं पत्तो // 106 / / तो भणइ संखसिही लच्छीकुलमंदिरं तुम पुत्त / सवंद गलक्खणेहिं वियक्खणेहिं जओ नाओ // 107 // जोवणभरंमि विणओवयाररसिएहिं जत्थ पियराण / होयत्वं तत्थ | कहं गुरूण रेण गंतवं // 108 // अगुरुण पासगओ पावयसंगेण कह समुजोयं / पाविज धूमकुरुलीमोहतमेणं सुपुरि HO // 76 // तुम आगओ एत्य मरासिन / देसंतराण देसको महुरगिरा कयंजली wi9647 Page #90 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 77 // CA3%E0 ते / हियजणयपआमरण / जे वामइ गंधेणवि सहसाह पंचबाणो शबरजुषाणो जहि / सोवि // 109 // तारुनेऽरने कह कुसलं ? सह करणतेणसेणाए / परिवसह पंचबाणो शबरजुवाणो जहिं वच्छ ! // 11 // वृद्धशंखजुवणवणंमि ! पुत्तय मयणहलं होइ निच्छयमएण / जं वामइ गंधेणवि सहसा गुरुवयणपीयूसं // 111 // सो होइ वियारो ताय श्रेष्ठिना जुल्वाणजोवणे विसर्दृते / हियजणयपओगेणं रक्खेयवो पयत्तेण // 112 / / पियराण परिहारं काऊणं बच्छ देसयालीए / पुत्रत्वेन एगागी गच्छंतो पाविजइ दोसआलीए // 113 // नियजणयट्ठाणरसिया मूलाउ चिय खमाइसंलीणा। तुम्हारिसा सुपत्ता रक्षितः सुसाहिणो हुति फलवंता // 114 // सोमोवि कलामंडलरमणीओ पावतावपडिवक्खो। वियरन्तो देसेसु दीसइ चंदो कलं- स्वगृहे किल्लो / / 115 / / सूरोऽवि दक्षिणोत्तरायणाई वच्छ ! पिच्छसु कुणंतो। सिसिरे पहीणतेओ गिम्हे संतावओ लोए // 116 // || वीरभद्रः। ते सुयणा विरल च्चिय अज्जवपरिणामललियमज्झत्था / जेसु गुणाण कणाण व कुणंति अग्धं महग्घविया // 117 // पइगाम चिय धणियं खलसंगो होइ सबदेसेसु / पयमलणं उप्पिणणं अवियप्पं होइ धन्नाणं / / 118 // अहवा // जं पुत्त ! नीइनिस्सेससस्थवित्थारनायपरमत्थो / एगागीवि पउत्थो तं मन्ने कारणं अन्नं // 119 // अट्टाणं अम्हाणं वुड्डाणं पुत्तलाहसड्डाणं / कुलदेवयाविइन्नो तुमंसि कुलभूसणो पुत्तो // 120 / / अजं तुह आगमणे इहावणे वच्छ ! कयचमकारो / सो जाओ ववहारो जो सनखं लच्छीपइसारो // 121 // तो वीरभद्दपुत्तय ! भदं तुह होउ मह गिहागमणे / कमलुल्लासेणिमिणा सहसा नं सूरउग्गमणो // 122 // इय संखसिडिसुवयणपीयूसरसेण पल्लविजंतो। नेहमे सच्छाओ सो वीरो निव्वुयसरीरो // 123 / / एत्थंतरंमि केणवि अवसरपाढेण मंगलमुहेण / दुविहं संखनिनायं सोचा पढियं सुगंभीरं // 124 // वसुपूरपूरियासो सूरो देसंतरेसु वियरंतो / उच्चपयं सुपयावं मज्झत्थो संपयं पत्तो // 125 // तो सेठी पुण जंपइ पुत्तय ! नियमंदिरम्मि आगच्छ / / // 77 // % AA% Page #91 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री द जयन्ती-1 प्रकरणवृतिः / तया // 78 // MARAC% नियजणणिभयणिसयणाइगाई पेच्छसु जहिच्छाए // 126 // आएसोत्ति भणेउं सद्धिं सो सिटिणा गओ गेहं / हाणाइ-3 मिलिता गउरवेण तो भुत्तो दिवमाहारं // 127 // भुत्तुत्तरं इमस्स उ सुयंधतंबोलरंजियमुहस्स / भंडारं कोहारं सिही दंसह सुविस्थाएं * स्वभगिनी ॥१२८॥सम्माणदाणखाणासणेहिं सयणेहिं सुयणवयणेहि। सो तत्थ वीरभद्दो गयंपि कालं न याणेइ / / 129 / / पुनाणुवंधि- विनयवती. पुनोदएण भुवर्णपि तस्स नियभवणं / सबोवि जणो सयणो सुयणो सो दुञ्जणो जोवि / / 130 // कुलपच्चयाउ तत्तो कित्ती गंग व पसरइ खमाए / परमहिमगिरिवराओ अइसयगुरुपउमहरयाओ॥१३१ // अवि मित्तमंडलगओ पडिपुत्रकलाकलावपरिकलिओ। कथितं सो सोहइ कंतीए विम्हयकरसोममुत्तीए // 132 // अन्नम्मि दिणे वियसियअच्छं वरवत्थरइयनेवत्थं / विणयवई नियभयणिं | राजपुत्र्यपिच्छइ संपट्ठियं एसो // 133 // तं पुच्छइ विम्हइओ कहिं तुम बहिणि ! पट्ठिया ? इहि / वियसियमुहारविंदाणुमेयअञ्चत. नङ्गसुन्दरीहरिसेण // 134 // सा भणइ मज्झ बंधव ! रायसुयाणंगसुंदरी अत्थि / निद्धसही तो तीए दंसणसुहलालसा जामि // 135 / / स्वरूपम्। सा कि ? कन्ना उवणजोबणपसरंतरूवलावन्ना / परिचियकलाकलावा पुन्निमससिमुत्तिरमणीया // 136 / / पुच्छइ पुणो वि एवं वियगुट्ठीण उच्छुलट्ठीण / सा किंतु जम्मभृमी सरसा सुसिणिद्धसब्भावा / / 137 // तो जंपड विणयबई बंधव ! सा रूवसंपदुक्करिसा / तियसीण दप्पहरिणी सक्खं नजइ मयणघरिणी // 138 // पीऊससारिणीए करणि सा वहइ महुरवाणीए / चउरुत्तिजुत्तिमुत्तियफलाण खीरोयल ब्व // 139 // अनं च-अप्पाणुमाणवित्राणरूपगुणरयणरोहणगिरिन्दा / न हु संभवंति पुरिसा परिणयणं नेच्छइ तो सा // १४०॥जओ-'अवियड्डपई पोढंगणाण सुगुणाण निग्गुणो सामी / चाईण तुच्छविहवो तिनिवि गरुयाई दुक्खाई // 141 // एएणत्थेणं पिय पियराण सुदुस्सहं दुहं सीए / का अना कमाए गई इविअत्ति ? 12 // 78 // 44564526 Page #92 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 79 // 9% CECANCERex चिन्ताए / 142 // ददृट्वाणं अबही तुम्ह सही एमि तो अहंपि तहिं / इय उत्कंठियहियओ जंपइ सो वीरभदोवि // 143 / / तया सह विणयवईए भणियं पुरिसाणं बालवुड्ढयाणपि / अंतेउरे पवेसो बंधव ! रक्खिजए धणियं / / 144 // पायपयारं न करइ स्त्रीवेषं - | पायं सरोवि जत्थ तत्थ कहं / भाऊय ! गंतुं इच्छसि ? जयवि तुमं वीरभद्दोऽसि / / 145 // होउं तुम्हसरिच्छो तहा अहं त्वा गतेन | रहयसरिसनेवत्यो / सन्वकलासुंदच्छो कहं न गच्छामि ? अइसच्छो // 146 // इय सोउं तब्बयणं सा जंपइ भाय ! वीरभद्रेण विस्मरूवोऽसि / जह तं सत्वगओ च्चिय किमियाणि कीरइ विलंबो ? // 147 / / दिवोसहिजोगेणं विरइयरमणीयरमणिरूवेणं / कलारंजिकन्नन्तेउरमेसो गच्छइ सह निययभयणीए // 148 // पेच्छइ यऽणंगसुंदरिराय सुर्य रयणासणासीणं / वीणं परिवायंती तया राजनिय सहिया वयंसीहिं / / 149 // उचियपडिवसिकरणे दावियसाणदासणा कुमरी। विणयबई परिपुच्छइ का एसा सुह कुमार्या समागमणा?॥१५०॥ विणयवई विणएणं जंपइ तुह पायदसणुम्माहा। सेज्झी अम्हाण सही अजाऽवस्साऽऽगमुच्छाहा ॥१५शा नित्यमा पुण पुच्छइ निवधूया अचम्भुयरूवसंपर्य दई / एसा सोहग्गमहानिही सही तुम्ह किनामा ? // 152 // इय पुढावि न | गमने जंपड जायअवि किंपि सेहिणो धृया। भो अत्ति तेण भणियं सामिणि ? मह वीरमई नाम / / 153 // अन्नपि विन- | दत्तमाम विजह एसा वीणा गुणेहिं परिहीणा / केससगम्भा तंती जं दंडे कक्करकंती // 154 // अप्पियवीणाए निवधूयाए न्त्रणं तस्य। पयंसिओ तओ केसो / उच्चलिऊण तंती दंडाओ ककरो सक्खं // 155 // पुण सञ्जियवीणाए महुराए वाइयाए भंगेहिं / अविस्वत्ता रायसुया वियरइ संतोसदाणाई / / 156 // भणइ य सोवालंभं विणयबई किस इत्तियकालं / नाणगुणरयणवाणी वीरमई दसिया न तए // 157 // इय आनंदकहाए सच्छंदं अच्छिऊण कुमरीए / आइ8 निश्चं चिय कायचं इह समाममणं 11 // 79 // Page #93 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी जयन्तीप्रकरणइतिः / // 8 // AIRAGAR-557 // 158 // पडिवजिऊण एवं सगिहं पत्तेणं वीरभद्देण / विनतो नियजणओ विणएणं पंजलिउडेणं // 159 // ताय ! तए अनेकखमियवं रायसुयंऽणंगसुंदरिं दद / समवेसो भगिणीए जमहं पत्तोऽम्हि निवगेहं // 160|| निच्चं चिय गंतवं ताय तयम्भत्थ- कलारंजिणाणुरोहेण / तम्हा तुम्हाऽणुना इत्थ पयत्थे हवउ अम्ह / / 161 // तो भणइ संखसेठी सोम ! तुम सव्वयावि पुनकलो / ताऽनङ्ग तह कुणसु पायपसरं अखंडवित्तो जहा होसि // 162 // अह भणइ वीरभद्दो जणयं प्पणयप्पहाणवयणेहिं / जं आगमिस्स- सुन्दर्याः भद्दो पुत्वभवोवज्जियसुहेहिं // 163 / / ताय ! तुह संखधवले भवणे जहा होह दिवबन्नेहिं / सयलजणचित्तहरणं विचं तहऽहं | कुमारीत्वजइस्सामि // 164 // ता बीयदिणे कचंतेउरपत्तेण तेण वेसेण | अब्भसन्ती दिट्ठा चित्तकलं तेण सा हिट्ठा // 165 / / विषया सागयवयणाणंदियमणेण दिनासणोवविद्वेण / तोऽणेण वीरमरणा विस्संभेणं इमं वृत्तं // 166 // जा चित्तवट्टियाए हंसी पृच्छा कृता लिहिया तए सचित्ताए / सा नो विरहावत्थाऽहिणयं सम्मं धरइ देवि! // 167 / / अह सा कुमरी अप्पइ हत्थे तं चित्तवट्टियं वीरभद्रेण / तीए। पत्थुयवस्थाहिणयं वयंसि! हसिं पयंसेसु // 168 // बाहजललियनयणं दरनिवडिरपउमनालवयणं च / वीरमाईविय विलिहइ हंसि किसरुडिरपक्खं व // 169 // इय निच्चं अवरावरकलोवओगेण सोममुत्तिए / कुमरीनेहो सलिलनिहि व 18 बडए अहियं // 170 // वीरमई अन्नदिणे कुमरिं पुच्छइ वियड्वयणेहि / हुति गईओ दुच्चिय उत्तमजीवाण मणुयत्ते // 171 / लणं अच्चन्भूयरुवारोग्गाइयाण सामगि / तारुन्ने तवचरण करिज भोगोवभोग वा // 172 // तदुभयविरहेण पुणो दिवसा जे जंति निष्फला देवि ! / ते नानीराई इव पच्चागच्छंति न कयावि // 173 / / ता कहह किमिह ? कारणमहलाणि दिनानि जेण वच्चंति / जमिह कलाकुसलाणं अनिमित्ता होइ न पवित्ती // 174 // नेहपरवसहियया रायसुयाण- // 8 // Page #94 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 81 // 3%ACIRECORECASHASEX गसुंदरी तत्तो। भणइ अणुरूवपिययमसंजोगो दुल्लहो होइ / / 175 // वीरमई तो जंपइ रभसवसुल्लसियबहलपुलियंगी। सिद्धं चिय मह कजं मन्नन्ती पुन्नमाहप्पा // 176 // जइ होइ अम्हसरिसो पुरिसो दच्छो पहाए पडिहत्थो। को किं तुम्ह मणोरहरहं गमित्तोसहि! हविजा?॥९७७ // वाहसलिलुल्लनयणं कुमरी सोऊण वीरमइवयणं / जंपइ कत्तो अहं इत्तियमित्ताई पुन्नाई // 178 / / जइ एवं ता किजउ सुपसाओ अत्थि किंपि वत्वं / वियणमि सामिणीए पुरओ विनवइ वीरमई / / 179 // भूसन्नाए वियणे कयंमि तो तेण वीरभद्देण / मुहगुडियाए दंसणपुरस्सरं पयडिओ अप्पा // 180 // अइसाइरूवदंसणविम्हयवियसतलोयणा कुमरी / तं भणइ कामदेवो तं सि सुराईहिं कयसेवो // 181 // जो देवि ! तए निसुओ पडिवन्नो संखसिविणा पुत्तो। सोऽहं तुह गुणसवणे समागओ वीरभद्दोऽम्हि // 182 // इह तव्वयणायनणसंतोसरसेण सित्तसुहबीए / हिययस्थलम्मि तीए नेहतरू पसरिओ सहसा // 183 // मज्झ सुमणोभिरामे देहारामे फलोवभोगेण / सुहय! लहुं लहसु सुहं इय जंपई तयणु कुमरीवि // 184 // इइ वुत्ते स गिहगओ सेटिं विनवइ वीरभद्दोवि / तुह पुत्तस्स नरिंदो जइ वियरइ नियसुयं कहवि // 185 // तो ताय गउरवेणं पडिच्छियवा तए अवस्सं सा / रयणायरपुत्तीए दिजइ अग्धंजली जेण // 186 // माइ वरो मह इट्ठो सुम्मइ जो संखसिट्ठीणो पुत्तो। इयाऽणंगसुंदरीए निवेइयं निययजणणीए // 187 // तीए रनो कहिए सेट्ठी हक्कारिऊण तो पुट्ठो / सुम्मइ तुम्ह सुओ किं रुवेण कामदेवोत्ति ? // 188 // आमंति तेण वुत्तो भणइ निवोऽणंगसुंदरिं तस्स / वियरिस्सं जेणेसा जुग्गा ननस्स पुरिसस्स // 189 // तं देव ! सामिसालो अम्हे पुण पायसेवगा तुम्ह / जुत्ताजुत्तं जाणह तुभच्चिय इत्थ अत्थम्मि // 190 // इय सेटिसंखभणिए उत्तमतिहिकरणलग्गसंजोगे। रन्ना पाणिग्गहणं कारवियं अनुरूपवराभावकथने वीरभद्रेण प्रकटिते स्वस्वरूपे कुमार्याः मन:प्रसन्नता, जातं लग्न तेन सह / 118 Page #95 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बपन्तीप्रकरणकृतिः / अन्वोऽन्य गाढप्रीत्यां वीरभद्रेण दर्शितो जैनधर्मः, स्वीकृतोऽनङ्गसुन्दर्या n82 // दिबरिद्धीए // 191 // उवभुंजइ विसयसुहं सो सीए तयणु गुणपसत्ताए / इदोविन्दानीए विबुहेहिं संथुणिञ्जतो // 192 // चिंतइ य वीरभद्दो एसा गुणरागिणी सुसीलत्ति / जह जाणइ जिणधम्म अहं सहस्सं तहा सम्म / / 193 // जिणवयणभावियमई भणइ तओऽणंगसुंदरीहुत्तं / लद्भुण पिए मणुयत्तणाइसामग्गिमइदुल्लहं // 194 / / देवगुरुधम्मतत्तावबोहगंगापवाहसुपवित्तं / कायच्वं नियजम्मं सम्मं सिवसोक्खकखीहि // 195 // अट्ठविहपाडिहारो अइसयगुणरयणरोहणमिरिंदो। इंदाइबिहियसेवो देवो अरिहं इहं वुत्तो // 196 / / समसत्तुमिचभावो अवगयजीवाइवत्थुसन्मावो / अकलंकसीलमारो मुणी गुरू उज्जयविहारो // 197 // तत्तं जीवाइयं सत्तविहं नवविहं बहुविहं वा / जं वीयरायभणियं उजियपुडावरविरोह // 198 // इय तवयणायन्त्रणदिणमणिकिरणोग्गमेण तमहरणे / तीए वियसइ माणससरंमि सम्मत्तसयवत्तं // 199 // महुपाणमत्तममरी पसिमरज्झंकारतारसद्देण | सा जंपइ पिय ! मज्झवि देवो अरिहं सिवो सोमो // 200 // मुणिवसहा निस्संगा पवयणपडिवायणुज्जुत्ता / उव्बूढखमामारा गुरुणो मह अनिययविहारा // 201 // भवजलहितरणपोओ अक्खयफलओ अलोहसंजोओ / धम्मो दयाए सम्मो जिणभणिओ दिनसिवसम्मो // 202 // जीवाइयं तत्तं केवलनाणीहि जमिह पन्नत्तं / अमिरुयं चिय | पिययम ! मिच्छत्तं तह मए चत्तं / / 203 / / निम्मलगुणमणिसायरजिणधम्मविवेयलच्छीदाणेण / भवदोगचं पिययम ! तुमए मह दरमबहरियं // 204 // धनाहं कय पुन्ना जीए कप्पहुमेण मह तुमए / संजोओ सो जाओ जो दुल्लहो अकयसुकयाणं // 205 // किंतु मह दंसिजउ गुरूण गुरुणीण मुत्तिनेवत्थं / चित्तेणं चिरोणधि जमहं सक्खं व पेच्छामि / / 206 // तो चित्तपट्टियाए साहिणयं वीयरायजिणपडिमं / लिहिऊण साहुसाणिरूवाई दसए एसो / 207 // तो निच्चं जिणपूयणगुरुबंदण % A4%AA |82 // Page #96 -------------------------------------------------------------------------- ________________ SCk // 83 // 1 मासूषित* स्मरणेन | पोतेन तामलिप्ति SARANACHAR नंदणमि दुण्हंपि / कल्लाणगिरिट्ठियाणं सहलाइ दिणाई वचंति // 208 // इय दुहं अमोग्नं सधम्मचरियाण नेहभरियाण / सुकयतरुकुसुमविन्भमजिणिंदधम्मुञ्जमो जाओ // 209 // हिययंमि गहीरे सायरम्मि पसरंति तस्स उक्कलिया। अह अन्नदिणे गुरुयणसुमरणसंचलिरमीणेण // 21 // पियराण पयइवच्छलनेहलचित्ताण देवयाण व / बहुमाणो कायध्वो पच्चुवयारो न पुण सक्को / / 211 // भणियं च-दो चेव देवयाई अम्मापियरो य जीवलोगम्मि / तत्थवि पिया विसिट्ठो जस्स बसे वट्टए माया // 212 / / वच्छरमोसहसोसणमच्छउ पसर्वतिमाउए दुक्खं / गम्भिक्कदिणदुहस्सवि न निक्कयं(ऋण) देइ चक्कीवि // 213 // जुवणपवणपणुल्लियपरिसुक्कपलासलहुयरमणेण / सुन्नमि परिजंतं मह कोउयरेणुकलुसेणं // 214 // पियराणं अवरावरमणोरहुल्लाससायरगयाणं / पडिकूलगेण न मए पोएणवि होइ नित्थारो // 215 // इय चिंताभरमंदरमंथिजंतम्मि मणसमुद्दम्मि / बाहिं बाहजलं बहु पलुट्टए वीरभद्दस्स // 216 // तोऽणंगसुंदरी तं तयवत्थं पेच्छिऊण नियदइयं / पुच्छइ ससंकवयणा ससंकहियया असुहहेउं // 217 / / अह भणइ वीरभदो मद्दे ! पियराण नेहलमणाण | विरहेण महीमंडलपरिभमणपरिस्समो हेऊ // 218 // ता तीए तब्भावे कहिए जणयाण पोयसामग्गी / मंतुं शत्ति पुरीए कारपिया सामलिलीए // 219 // पवणजवेणं पोए चलिए रयणायरोवि जलरासी / उक्कलियाहिं कलिओ दीसइ पयलंतबहुसत्तो // 220 // पोउवलंभसहिओ सुहिओ को होज ? मज्झ जणओ व / दीवदियंतरगमणे संसारे सायरागारे // 221 // पोएणऽणंगसुंदरिसंजोओ अक्खएणं जइ कहवि / मज्झ जणयाण होही कुलुन्नई ता फुडं होही // 222 // किं पुण धमाण चिय निविग्धमणोरहाण संपची / सिन्नजलहीए जीए जगईए गम्मए ठाणं // 223 / / अन्नं च-अन्नह परिचिंतिजइ कजं परिणमइ वीरभद्र४ स्यानिर्विघ्न प्राप्तिमनोरथः। Page #97 -------------------------------------------------------------------------- ________________ समुद्रो श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / ROCK अनहा चेव / विहिविलसियाण जेणं विसमगई होइ दुल्लक्खा // 224 // इय वीरभद्दमणिए अवस्सभवियव्वयाणुभावेण / घणदुद्दिणदुप्पिच्छं सहसा गयणंगणं जायं // 225 // वीईणं वुड्डीए समीरलहरीण पाडिसिद्धिए / मजंति कूवखंभा विहडंति मणोरहारंभा // 226 // गअंति घणा धणियं सद्धि रयणायरेण अणवस्य / जमजीहसच्छहाओ फुरंति सोयामणिमाला / / 227 // चिंतइ य वीरभद्दो धीरमणो दूरचत्तमइमोहो / ज ठाणमावयाणं जलही सत्ताहिओ जइवि // 228 / / पंचपरमेटिनवकारमंतसज्झाणजाणमाहप्पं / लद्धण पिए संपइ जइ कहविहु जीवियं धरिमो // 229 // धीरतं कायई पिए ! समुद्दम्मि लद्धलक्खेहि / जं धीरधीवराणं अप्पवसा अणिमिसा हुंति / / 230 / इय वीरभद्दवयणं सोउं साणंगसुंदरी सहसा / नवकारसरणसरणं निययं हिययं धरइ धीरा // 231 // भणइ सा पिय ! किजउ पच्चक्खाणं इमम्मि वसणम्मि / सायारं पायारं पुरम्मि सगुणाण पउराण // 232 // एवं जपताणं ताणं हियए दि8 कुणंताणं / जिणवयण गुरुफलयं मयणरईणं व निद्धाणं // 233 / / दुईतदइवविलसियकरिसुंडादंडचंडकल्लोला / भंजंति जाणवतं सुदिदं सुकयाण ठाणपि // 234 / / निवडइ भवम्मि कुडिले विहिम्मि सचं महावया निच्चं / किंत समुद्दे ताण सहसा फलयागमा जाया // 235 // अहऽणंगसुंदरीए सुथिराए सलिलसित्तवच्छम्मि / अक्खयफलए कमसो संपत्ते तीरदेसम्मि // 236 // चंदणवणगहणंतरपरिसप्पिरपवणछिक्कदेहाए / मुच्छाविगमुम्मीलियनयणाए चिंतियं एयं // 237 // को एसो अह देसो ? का वत्था ? कत्थ वल्लहो वीरो। कह परीयणो न दीसइ ? सीसइ कस्स व दुहं एयं // 238 // धणपरियणसयणाणं न तहा विरहो महं दुहं देइ / जइ वीरमद्द. पिययमविओयदहणो दहइ देहं / / 239 / / एए य मज्झ पाणा अञ्जवि बजप्पवायदुस्सहमि / पाणपियविप्पयोगे कहं न त्पातेन भन्ने पोतेऽनङ्ग सुन्दर्याः तीरदेशप्राप्तिः। // 84 // MARKS ॐॐॐ आ॥८४॥ Page #98 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 85 // R आश्रमे तापसेन कुलपति समीपे नीताऽनङ्गसुन्दरी। AC%%%ॐAROK मंचंति अप्पाणं ? // 240 // कित्तिच्चिय सलहिज्जइ नायगविरहे दिसासु वियरंती / पाणिग्गहललियंगी गिहिणी एगागिणी न उण // 241 // इच्चाइ चिन्तिऊणं पासं रइऊण उत्तरिएणं / तरुसाहाए एसा अपाणं लंबए सहसा // 242 // कुसुमसमिहत्थमागयमज्झिमवयतावसो वणे तत्थ / मा साहसंति सदओ जंपतो शत्ति संपत्तो // 243 // ता पासं छिदित्ता सित्ता सा तेण सीयसलिलेण / वकलचेलंतेणं पवणेणासासिया सुइरं // 244 // आभासिया य बन्छे ! अतुच्छकुललक्खणावि कहमेवं! / इयरजणजोग्गसाहसमवलंबसि साहसु इमंति // 245 // उवलद्धचेयणाए वियसियसयवत्तफुल्लनयणाए / तोऽणंगसुंदरीए मियमहुरं जंपियं एयं // 246 // अवरावरदुहसायरपडियाए मुणिवर ! मह इण्डं / पासो चिय सन्निहिओ विहिओ अहिएण दइवेण // 247 // तो भणइ तावसो सो मा तं जंपसु विसायवयणाई। जं उत्तमजीवाणं वसणेवि हु वीरया होइ // 248 // जओ-गंगावि भवे पडिया पडिकूलजलावगाहगाहेहि / लोलिजन्ती निवडइ कट्ठसमुदंमि विउलम्मि // 249 // जेणं चिय संसारो अणेगदुक्खाण एस भंडारो / तेणं च्चिय सप्पुरिसा लग्गा परलोयमग्गम्मि // 250 / / लक्खणओ पुण नाइ अजवि तुह वल्लहो धरह जीयं / ता तं पुच्छसु वच्छे ! गच्छसु महकुलवई दटुं // 251 // जेणेसो नाणरवी आसाण पयासणेण लीलाए / वियरह विरहिआणं संजोयं सउणच काणं // 252 // इइ निकारणकरुणारससायरमुणिवरेण सा वुत्ता / अमियरसेणेव सित्ता सरभसचित्ता समुद्रुइ // 253 // तावसदंसियमग्गा तसो साणंगसुंदरी सिग्धं / आसमपयंमि गंतुं कुलवइणो वंदए पाए // 254 // पुत्ति तुमं अविओगिणि! पावसु हियइच्छियाई सोक्खाई / इय आसीससुहाए तेणेसा सुमणसा विहिआ // 255 // भूसन्नाणुनाया सा गुरुणा तेण सुप्पसनेण / कुसवितुरे निसन्ना तब्बयणायनणेकमणा // 256 // PI // 85 // Page #99 -------------------------------------------------------------------------- ________________ M बपन्तीप्रकरणकृतिः / SAHARASHIONARSA अणुसद्विमिक्खुलहिं मिटुं अह देइ कुलवई तीए / पियविरहदावदाहो जीए सहसा पसममेइ // 257 // रायकुलयासि वच्छे ! न तए जाणिजए कहं एयं / चंदस्स कलाहाणी जह वुड्डी होइ तहा चेव // 258 // भूरिगुणाणं तुम्हारिसीण जं एस दइवसुन्नारो। पुत्ति ! पयच्छइ तावं तं गुरुकल्लाणकञ्जण // 259 // रोद्दो च्चिय एस भवो भणिजए सबसत्थकुसलेहि / धम्मज्झाणं झायसु जेण सिवो होइ सो सोमो // 260 // परिहरसु पुत्ति ! सोयं होइ कुलीणाण जेण मज्झम्मि / अणुरत्तपत्तजोगो निच्चमसोयाण भवरन्ने // 261 // कयमुकयसयसहाओ तणुअंगोवंगलक्खणगुणेणं / तुह भत्तावि य जीवइ नजइ सविसेससिरिलाहो // 262 // जीवंतेणं चिय धम्मकोडिदिढबंधबंधुरत्तेण / इहपरलोयपसिद्धी सवं किजिस्सए तेण // 263 / / इचाइ देसणाए सम्म पडिबोहिऊण कुलवइणा / किच्छेण पाणवित्तिं फलेहिं काराविया तत्तो / / 264 // इयऽणंगसुंदरी सा भमरीण सिरीण वासभवणेसु / कुलवइपयपउमेसु लीणा सिरिभायणं होही / / 265 / / ___अह सो वि वीरभद्दो जलहिं पडिकूलयं पडिहणतं / भंगेहि अविगणंतो फलयकरो साहसुल्लसिओ / / 266 // दिढवाहुदंडपडिहयफुरंततरवारिघायसंघाओ / लीलारइनामेणं दिट्ठो विजाहरिंदेण // 267 // लावन्नपुनदेहं अक्खोहं आवयाहि उयहिं व / तं सिरिभायणमेसो तो गिण्हइ पाणिकमलेण // 268 // वेयगिरिविरिंदो नेऊण गयणवल्लहे नयरे / साणंदमणेणुत्ता नियरिणी रयणमंजूसा / / 269 / / एसो खु पिए पुत्तो पुवजिअपुन्नपगरिसवसेण / अम्हं निरवच्चाणं सच्चं कुलदेवयादिनो / / 270 // इय सोच्चा सा दटुं तं पुत्तं दिवलक्खणावरियं / रामं व वीरचरियं हवइ सतोसा सपुत्तेव // 271 // कीरंतेहिं सुमणोभिरामसम्माणदाणदामेहि / न थिरं कहमवि जायइ जह कविचवलं मणो तस्स // 272 / / तह लीलारइविजाहरेण कुलपत्युपदेशेन शान्ता प्राणवृत्ति कारिता वीरभद्रश्च विद्याधरेण गगनवल्लमे पुरे नीतः। AHARA Page #100 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 87 // पन्नत्तिदेवयाए सो / मुणिऊण वीरभद्दो भणिओ मियमहुरवयणेहि // 273 // पुत्त ! तुम मा सोयसु तुज्झ पियाणंगसुंदरी IA पत्ता / तीरम्मि फलयहत्था तावससंबोहिया संती // 274 // मरणमणं चईऊणं कुलवइपयपउमसंथववसेण / चिटुंती अक्खंडि. यसीला तुह संगमुम्माहा // 275 / / एगम्मि दिणे दिट्ठा वणफल वित्तीए दिवकन्तिल्ला / ता चिंतियं चऽणेणं एसा सक्खं मयणघरिणी // 276 // मयणस्स य गंघेण इत्थ चमिस्संति तावसकुमारा / मह गोउलम्मि पीयं मन्ने सन्माणपीयसं // 277 // तो कुलवइणा वुत्ता पुत्ति ! तुमं गच्छ पउमिणीखेडं / नवरं तत्थ भविस्सइ तुह वल्लहसंगमो नूणं // 278 / / जा किट्ठभूमिभागं तीए सह वुड्डतावसा इति / पुरपरिसरम्मि पत्ता अह सा एगागिणी वुन्ना // 279 / / जूहब्भट्ठा हरिणी विंदभट्ठव्व होइ जह करिणी / मन्नंती सुन्नदिसा जा चिट्ठइ सुगइदिष्टि व // 280 // ता पुनपगरिसेणं पेच्छइ सा तत्थ सोममुत्तीओ। बाहिं समागयाओ समणीओ तावसमणीओ // 281 // तप्पायप्पणयाए तीए पसरंति चाहसलिलाई / ससिकंतफलिहनिम्मलधवलप्पहदिहिजुयलाए // 282 // उवसंतपावतावा, आभट्ठा ताहिं समणीहि / कासि तुमं ? कीस पुणो करिसि ? असमाहिमच्चन्तं // 283 // जणणीण व ताण पुरो निवेइओ तीए निययवुत्तो। तो ताहि सा भणिया पसन्नवयणाहिं वईणीहिं // 284 // पिच्छेहऽणंगसुंदरि ! संसारो एस एरिसो चेव / हेयवो भवेहिं सुविइयतत्तेहिं सत्तेहि // 285 // अम्हारिसजीवाणं विसुद्धधम्मम्मि कोडिपत्ताणं / इहलोओ परलोको सिज्झिस्सइ किंतु निविग्धं // 286 // वसणम्मिवि च्छिद्देसुं | पूरिजंतेसु निम्मलगुणेहिं / दिढवत्थंतरसंगमसुहिया तं साविए ! होसि // 287 / / अहिउल्लसियदयाणं समणीण फुरंतभूरि-| 1 भीता। 2 वृन्दभ्रष्टा इव / 3 सुगतदृष्टिरिव / 4 तापशमन्यः / 5 प्रतिनीभिः / अस्थिरचित्तवीरभद्रस्य कथितो लीलारतिना पद्मखेटप्राप्तानङ्गसुन्दर्या वृत्तान्तः। // 87 // Page #101 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 56456 जयन्तीप्रकरणवृतिः / प्रसबो वीरभद्रो रत्नवती विद्याधरी | परिणापितः। // 88 // म्हा मुहासमे अम्ह पाहि समं वसर्हि तो जगमा राओ मित्तीपत्तेहि बल्लहं अच्छ / सत्ताणं / वेलाण व संगेण सिरिपयलाहो न ते दुल्लहो // 288 // पियदंसणा तुमंपि य जंतं पियदंसणाए तं भगिणी।। सब्बंभचारिणीए सह जोगो होइ सुहहेऊ // 289 // अनं च-जा तुमए जिणधम्मो रम्मो कप्पदुम्मो व फलदाया। लद्धो वच्छे ! ता तुह धवलाहे (पतिलाभे) को गुम्माहो // 290 // अहवा / / हिययत्थलम्मि रुढो तुह धवलाओ सयावि फलदायी / बोही जेण पियच्चिय सुयणु! तओ तयणुबंधोवि // 291 // उत्तं च-सम्मत्तदायगाणं दुप्पडियारं भवेसु बहुएसु / सबगुणमिलियाहिवि उवयारसहस्सकोडीहिं // 292 // बहुगुणसालं वच्छे ! इच्छंती सुयणु ! वल्लहं अच्छ / धम्मारामे तम्हा सुहासमे अम्ह पासम्मि // 293 // इच्चाइयवयणेहिं मन्नइ साणंगसुंदरी सत्वं / पियमेलयम्मि तित्थे पत्ताहं पुनजोगेणं // 294 // इन्ति समणीहिं समं वसहि तो गंगसुंदरि देवि / नयणुप्पलमालाहि तरुणा अचंति पञ्चंग // 295 // पियदंसणावि तीए मित्तीए रंगमुबहइ देहे / हवए चिय जं राओ मित्तीपत्तेहि पत्तेहिं // 296 // समगुणवल्लहकहणे भणियं पियदंसणाए मम पिओ। तत्ततवणिजकंती भणसि तुमं नीलमणिदित्तिं // 297 // इय संकहाण ताणं भणियं समणीहिं अम्ह वसहीए / एवं कहा न जुजइ निसीहियाए पविठ्ठाणं // 298 // उत्तं च-जो होइ निसिद्धप्पा निसीहिया तस्स भावओ होइ / अणिसिद्धस्स निसीहिया केवलमित्तं हवह सद्दो // 299 // तवतावियदेहाणं समणीणं वयणरुहविसेसेणं / गलियमयणाण ताणं दिणाणि वच्चंति निविग्धं // 300 // सोऊण वीरभद्दो पत्तीकुसलपउत्तिसंजुत्तिं / पीयसपाणतत्ति पत्तो तत्तो इमो सुमणो // 301 // रयणवई रुववई दिवं विजाहरि विवाहेउं / सविसेसभोगललिओ अच्चुयलच्छि धरइ एसो // 302 अ॥ पिच्छद य अनदियहे लोयं विजाहराण गच्छंतं / मणिभूसणरमणीयं देवंगदुकूलनेवत्थं वसहि तो गंगा मइ साणंगसुंदरी स वि तीए मित्तीय ROSORRECCACICA HARS Page #102 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 89 // ACANCIALAMAILOCA%AEX // 302 // पुच्छइ य पणयणि सरहससिंगारसारपरिवारो। जाइ कहिं ? विजाहरलोओ साणंदसंभारो // 303 // अह साहह रयणवई पिययम ! एयम्मि पवए अस्थि / नामेण सिद्धकूडं सिहरं सोहग्गसिरिवासं // 304 // तत्थ य सिद्धाययणं गयणयलुल्लिहणलालससिहग्गं / अठुत्तरसयसासयमणिमयजिणबिंचरमणीयं // 305 / / तत्थ जिणवंदणचणमहामहं काउमेस जाइ जणो / जं जिणवराण भत्ती संपत्ती सव्वसोक्खाणं // 306 / / अम्हाण जइवि बुद्धो देवो सिद्धो तहावि जिणपूयं / दट्टुं वयमवि जामो इय जंपइ वीरमद्दोवि // 307 / / अह सिद्धाययणगए तंमि थुणंतम्मि जिणवरगुणोहं / सरससरेहि विजाहरलोयणकमलाई वियसंति // 308 // सो जणओ सुहजणओ जस्सेसो होइ गुणनिही तणओ / एसो हु अमियवाणी इमस्स जणणी रयणखाणी // 309 // एवं लद्धपसंसो हंसो इव सुद्धपक्खअवयंसो। विजाहरमणकमलायरम्मि लीलाई एसो // 31 // पञ्चागओ सगेहं विजाहरलोयलद्धजसपसरो। रयणवईए सद्धिं सुहेण कालं गमइ एसो // 311 // अवलोइजइ पुहवीगामागरनगरमंडिओदेसं / आगासगामिणीए विजाए जं फलं एयं // 312 // दट्ठवाणं दंसणमेव फलं होइ नयणकमलाण / अह अवरवासरे सो इय जंपइ पणयणीहुत्तं // 313 // तो पच्छिमरयणीए रयणवईए समनिओ एस | विजासामत्थेणं समागओ पउमिणीखेडं // 314 // समणीवसहिदुवारे मुत्तुं विजाहरिं तओ एस / लहु तणुचितं काउं एगते झत्ति संपत्तो // 315 // रयणवईविय चिंतइ वीरभद्दो गओ वि ललियगई / केणावि कारणेणं मंदो पञ्चागमे जाओ // 316 // हा सोम ! पाणपिययम ! अजरामर ! विरहदाणरसिओऽसि / मह कह ? करुणसरेणं इय विलवइ सा तओ धणियं // 317 / / | तो बाहिं समणीओ पियदंसणणंगसुंदरीओ य / आगंतूणं सहसा भणंति विजाहरिं एवं // 318 // किं सोयकारणं तुह ? लोकप्रीतिः संपादिता वीरभद्रेण, आकाशगामिन्या पद्मखेड नगरं प्राप्तं च। CCCCCCCOM ||89 // Page #103 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणइतिः / // 90 // FACEB%A5% वच्छे ! अच्छरसमाणरूवाए / अच्छेरयभूयाए इहागयाए कहसु इहि / / 319 // तो कहिए वुत्तंते बुत्तं समणीहिं सुंदरि ! रत्नवती इमाहिं / भगिणीहिं समं धम्म कुणमाणी चिट्ठसु तुमंपि // 320 // तो ताण पाणवल्लहसमाणगुणकहणतुट्ठचित्ताण / श्रमण्युपाजं बुद्धो देवभवो भत्तत्ति विसंवयइ वयणं // 321 // समणीणं सिक्खाए दक्खापाणेण संततावाण | धम्मज्झाणपराण श्रयपाचे | दिणाणि वच्चंति तो ताण // 322 // सुरमणिरूवमाणं हरंति लावण्णजलहिलाओ। अइनिउणधीवरेहिं वि अलद्धगंभीर- मुक्त्वा मज्झाओ // 323 // इय अन्नदिणे नरवइअत्थाणे ताण गुणकहावसरे / एगेण वामणेणं भणियं खोहेमऽहं ताओ // 324 // गुप्ततो कोउगेण रना सहऽप्पपुरिसेहि पेसिओ एसो। वामणओ वसहीए गंतुं वंदेइ वइणीओ / / 325 // वंदित्ता वसहिओ वामनरूपो नीहरिओ लोयविंदपरियरिओ / सोहग्गसिरिनिवासो आसीणो पट्टसालाए / / 326 // ताणपि कोउगेण पेच्छंताणं भणेइ जातः। वामणओ / चरियं अइअच्छरियं कहेमहं वट्टमाणस्स // 327 // इह अस्थि जंबुद्दीवे भरहवासम्मि मज्झिमे खंडे / सिरिउसहदत्तसिट्ठी नयरीए तामलिचीए // 328 // तस्स पुण वीरभद्दो पुत्तो गुणरयणरोहणगिरिंदो / तेण सुया परिणीया सायरदत्तस्स सिद्विस्स // 329 // तं घेत्तुं लच्छीमिव इमाओ नयराओ सायराउ व / अच्चुयसोहग्गसिरीए पत्तो सो तामलित्तीए // 330 / / इइ कहिए वामणओ जा उद्वेइ रायउलम्मि गन्तुमणो। पियदसणाए मणिओ ता पुरओ तस्स का वत्ता ? // 331 / / परपुरिसालावपरा जइ कहवि हु कावि हुज हरिणच्छी / नाहं करेमि तहविह कहिंपि परमहिलसंभासं // 332 // पियदंसणा पयंपइ नजइ तुह संखमझकुडिलत्तं / ते विस्सरूववामण करेह मह निव्वुई किंतु // 333 // जइ एवं ता कल्ले सवित्थरं वीरभद्दचरियमहं / सवपि तह कहिस्सं IP90 // A5% Page #104 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 91 // It जिनेन अहुणा गच्छामि रायगिहं // 334 // बीयंमि दिणे तइएवि तेण सवं कहं कहतेण / रयणवइणंगसुंदरिहियय विम्हयवसं नीयं // 335 // जेणेह वामणेणं अच्छरियं इह जयंमि वित्थरियं / सो सिद्धि ! तुम्हतणयावरोत्ति जिणरायभणियम्मि // 336 / / कथितः विन्नाणसायरे वामणम्मि अह लोयदिविसरियाओ। विम्हयरसभरियाओ पडंति सुयवीरचरियाओ॥३३७॥ तो सो मुहारविंदा |श्रेष्ठी, स रूवपरावत्तकारणं गुलियं / अवणित्तु णंगसुंदरियणवईणं हवइ पयडो॥३३८॥ पियदसणा उ जम्पइ मज्झ पिओ जच्चकंचणसवन्नो / अह वमियावरगुलिओ कंचणकंतीपुरो जाओ // 339 // तो पुच्छइ पुण सिट्ठी सायरदत्तो जिणेसरं भयवं / केण | भद्रः, सुनिमित्तेणेवं वामणरूवं कयमिमेण // 340 // तो दिवपुन्नपगरिससंपत्तकलाकलावकोसल्लं / पयडियकयंति अन्नं न कारणं किं|४ |पात्रदान पि नायवं // 341 // एवं जिणिन्दमणिए हिट्ठो तुट्ठो य सायरो सिही। गुरुरिद्धिवित्थरेणं वहूवराई घरं नेइ // 342 // दवा प्राप्त गुणस्यणरासिकोसो सहस्सकिरणुव एस निदोसो। सोहग्गेण उविंदो कलालओ पुनिमाचंदो // 343 // इय चिंतिऊण राया नर एतादृशीं चंदो देह वीरभद्दस्स / कमलसिरिं नियतणयं संतुट्ठो परमरिद्धीए // 344 // अह अन्नया जिणिंदो पुट्ठो हिडेण तेण नरवइणा / ऋद्धिम् / कहमेवंविहपुग्नं समजियं वीरभद्देण / / 345|| ता कहइ वीयराओ सदेवमणुयासुररायपरिसाए / इमिणा सुपत्तदाणा पुत्वभवे अज्जियं पुन्नं // 346 / / सिरिनिलये पुत्वभवे नयरे एसो खु आसि वत्थवो / उत्तमदिसो गिहित्थो पडुच्च सुगुणेहिं संकिन्नो // 347 // तस्सऽन्नदिणे एगो निबद्धतित्थयरनामसुहकम्मो / रायरिसी संपत्तो घरंग मासपारणए / 348 / / तो तस्स माणसे सो सच्छसहावोदयंमि रायरिसी / पसरतपक्खवाओ करइ रइं रायसुव // 349 // एयारिसा तवेणं विसेसदिप्पंतमुत्तिणो मुणिणो / दिणमणिणो इव निच्चं कुणंति दोसाण लहुयत्तं // 350 // अजं चिय सुविहाणं जायं अम्हाण पुन्नवंताण / CCRECTROCACAD // 91 Page #105 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / उचितदानस्वरूपकथनम्। // 92 // RANAGAR जं एवं मुणिपुंगवपत्तं पत्तं घरगएण // 351 // मासतवे पडिपुन्ने हवइ सुपत्तम्मि बहुफलं दाणं / वासासु सुवीयं पिव उत्तं PI उत्तं सुखेत्तम्मि // 352 // इय मेहासारेणं कयंबकुसुमाणुगारपुलएण | एएण तस्स रिसिणो परमन्नं पारणे दिन्नं // 353 / / पुन्नोदएण इमिणा नरवर ! गुणरयणरासिणा गुरुणा / मुत्ताण ठिई निचं लहियवा वीरभद्देण // 354 // एवं सुपत्तदाणं मोक्खपासायपढमसोवाणं / कल्लाणाण निहाणं दायत्वं तो सबहुमाणं // 355 / / वीरभद्दकहाणयं सम्मत्तं // उचियत्तदाणविहिणा परपासंडीण गिहमुविन्ताणं / संजमिया दुबायावग्घी किल दाणदामेण // 1 // दळूणमुचियदाणं केइ पसंसं कुणंति जिणधम्मे / तेण गुणारोवेणं परलोयं तेऽवि साहिन्ति // 2 // उचियत्तेणं दाणं गिहिणा गीयत्थसावयवरेण / काले गिहागयाणं दवलिंगीणमवि देयं // 3 // उक्तं च-काले गिहागयाणं पडिसिद्धं भयवयावि नो दाणं / जं पुण तदत्थमसुमंतघायण तं पुण न जुत्तं // 4 // सुमणोवियासवाडी गिहीण जा उचियदाणपरिवाडी। जं तत्थ कहवि हुआ निच्चफलो बोहिलामोवि // 5 // दीणाण अणाहाणं छुहापरद्धाण रोरंकाण / अणुकंपाए दाणं दायत्वं सावयवरेण // 6 // रोराइयाण करुणा विइन्नगासेण तोसपोसेण / कुंदकलियासमुज्जलकित्ती वि हवेज जिणधम्मे // 7 // तक्कित्तिकरणओ पुण, दंसणबुद्धी तओ य चरणेण / सिद्धिपुरम्मि समागमसुहसंपत्ती चिरं होइ // 8 // चुञ्जमणुकंपमाणो जिणमयवमेण बोहिवीजम्मि / सिरिखच्छरूवलाहे न होइ अस्सत्थपरिणामो // 9 // अणुकंपाए चाओ हवइ हु जीवाण कोडिसंघडिओ। निवट्टियपुरिसयारो परलोयपसाहओ लोए // 10 // इह पढममुयारतं पन्नत्तं धम्मसिद्धिलिंगमिणं / जं पुण करुणाहारं तं सहलं होह किं चुजं // 11 // भूसियमिहवलयाणं पउरदयाणं महीर CIRCRAC%ESAKASON VI // 9 // Page #106 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 93 // * सोमदेवब्राह्मणदृष्टान्तः। हिययाणं / जलहीणवि हवइ चिय निम्मलमुत्ताण संपत्ती // 12 // करुणाए जं दाणं दिन दीणे कुलाइहीणेवि / लोएवितं भणिजइ सुगई वियरेइ पियराण // 13 // तद्यथा-रयणपुरं नाम पुरं आसि पुरा तत्थ माहणो एगो। छक्कम्मकरणरसिओ नामेणं सोमदेवोत्ति // 14 // पुरिसुत्तमो पसिद्धो असेससयणप्पिओवि अगओवि / अच्चुयसीलसहावो असंखलच्छीहरो किंतु // 15 // विणयगुणकोडिकलिया उत्तमवंसुम्भवा य तस्स पिया। परलोयसाहणुज्जयधम्मलया आसि सोमसिरी // 16 // सयणकुमुयाण चंदो गुणमणिसंपत्तिरोहणगिरिंदो / नामेण बंभचंदो ताण सुओ जणमणाणंदो // 17 // अन्नेवि ताण तणया सच्चाहिठियतणुत्तसिरिवइणो। अजणदणावि भोगोवभोगसुहिसयणसोहग्गा // 18 // अह अनया निसाए मज्झिमजामम्मि चिन्तए एसो। संपइ जरा वियंभइ गिहासमे मह वसंतस्स // 19 // तो अहुणा नियपुत्तं जेई ठावित्तु गिहिपए विहिणा / सन्नासपवित्तीए सग्गनिवासं समीहेमि // 20 // दियवरविइनदाणो जहारिहविहियसयणसम्माणो / आसातलं दियाणं अत्तपए ठावए पुत्तं // 21 // वियरह तओ य सिक्खं पुत्तय ! तं चयसु सइ कुसंसग्गं / जं तेण उजलाणवि गुणाण कलुसत्तणं होइ // 22 // पेच्छह परमत्थपर्य दोहिवि नयणेहि सो सहस्सक्खो। जो परदारपरम्मुहदिट्ठी ननो सुरिंदोवि // 23 // अन्यच्चजाण परजुवइमणहरममुहाधणुमुक्कलोयणसरेहिं / सीलकवयं न भिन्नं नमो नमो ताण पुरिसाण // 24 // सवत्थ पसंसिजइ उदारया माहणेहि सविसेसं / तो वच्छ ! वच्छलेणं हेयत्वं चेव किवणत्तं // 25 // तं वच्छलपईवो सवासाण पयासदुल्ललिओ। तं लहसु दसं पुत्तय ! गुणेसु नेहं धरसि जीए // 26 // दाऊण सिक्खमेवं ससमयमग्गेण सोमदेवदिओ। अग्घोदएण साहइ सन्नासे साहसावासं // 27 // सो तेण दियवराणं दाणेणं मासियाइपवेहि / लोयववहारेणं उअमिओ AAACCASIRSSC // 93 // Page #107 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणपतिः / GANEXANEKARR ACCOA करुणादानदातब्रह्मचन्द्रस्वरूपम् / // 94 // बंभचंदेण // 28 // सो पुण सयं सयंवरउवितअवरावराहिं लच्छीहिं / सययं संपाविञ्जइ सरहसपरिरंभसंरंभं // 29 // पुरिसत्थसाहणेणं मयवारणभूसिएण कलिरायं / निहणतो परिवालइ नियगुत्तं सामिमावेण // 30 // किं बहुणा-वंसग्गे सजणसम्माणदाणसीलेहिं / आरोविया इमेणं कित्तिपडाया गुणग्धविया // 31 / / अह अन्नया निसीहे सहसा निहाभरं विमुतूण / लहुतणुचिंताए सो समुडिओ बंभचंददिओ // 32 // जा गच्छइ घरदुवारे महंधयारे खलंतपयचारे / ता भणिओ एगेणं पुरिसेण करुणवाणीए // 33 // सामिय कुणह पसायं छुहापरद्धस्स दद्धचरियस्स मह / करुणापर नरवर ! वियरसु गासं सुहनिवासं / / 34 // देव दएकनिवासे सरणागयवच्छले छुहा इहि / तई सायरम्मि दिद्वे अमयरसो चेव मह होउ // 35 // धम्मेकधरणकुसला कुणंति जीवाण कोडिसंपत्तिं / धन्ने पुण का गणणा ? तुम्हारिसाण दाणवीराणं // 36 // उच्छलिउक्कलियाए सरस्सईए इमस्स सित्तम्मि। वच्छत्थलम्मि करुणावल्ली पल्लवसिरि पत्ता // 37 / / तो भणइ बंभचंदो कोसि तुमं ? किस भद्द इह पत्तो ? / कहमइमत्तं छुहिओ? दुहिओ जं एवमाउलओ // 38 // सो जंपइ अवरोहे रायगिहे गुत्तिबद्धरुद्धोऽहं / धरिओऽम्हि निराहारो दिणत्तयं जावऽणाहारो // 39 // अणुकूलेण कहमवि दइवेणं देव अंतरं लहिउं / निक्किठपाणजाई संपइ तुह पासमल्लीणो // 40 // ता सामि! देहि अन अन्न मुत्तूण मज्झ वावारं / जावजवि दुहगारं जमगिहदारं न पेच्छामि // 41 / / दिजस्सइ तुह भोजं चुजं संताववारणं भद्द ! / तं आसासिय एवं गिहे गच्छह दिओ सोवि // 42 // उहवइ नियभन्ज ललिउठाणेण महुरवाणीए / विणयबई सा उठइ निद्दामुदं परिचज // 43 // विनवह सामि ! संपइ आएसं देहि किं मए कजं?। निकारणमागमणं न होइ गरुयाण जं एवं // 44 // भणइ य दिओ वि AHASKAR COCCALCC // 94 // Page #108 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 95 // अपगति गतसोमचन्द्र| किल्बिष देव C%%% समागमः। CAMERA सुंदरि! तुम्ह घरे सबयावि तोसकरे / भत्तं भुत्तुद्धरियं अहुणा किं अस्थि ? पुच्छामि // 45 // घरिणीवि भणइ एवं तुमंसि अक्खयनिही जए सिद्धो / भत्तुवउत्ता य अहं ता किं भत्तेवि सन्देहो ? // 46 // तो खाई अस्थि जणो घरस्स बाहिं अच्छिप्पजाईसु / बाढं छुहापरद्धो तस्सऽन्नं देहि करुणाए // 47 // एयं तु अन्नदाणं जेण विअत्तं छुहादुहत्ताणं / तेणनदाणसिरमणिजीवियदाणं चिय विइन्नं // 48 // इइ वुत्ताए तीए कम्ही घेत्तुण भायणे अन्नं / हिट्ठाए माहणीए समहियमहियं तओ दिन्नं // 49 // सो तेण भोयणेण पञ्चागयजीविओ समासत्थो / आकप्पं कप्पडुमविभम ! तं संपयं लहसु // 50 // इइ दाउं आसीसं आपुच्छिय जाइ इच्छियं ठाणं / मन्नतो उवलद्धं मणुयत्ते पुण मए जम्मं // 51 // अह माहणो पहाए पडक्खणं कुणइ निचकिच्चाई / दीणाण दुत्थियाणं दितो करुणाए सो दाणं // 52 // वासभुवणे पसुत्तो निव्वत्तियधम्मकम्मवावारो। बीयाए रयणीए तहेव उठइ निसीहम्मि // 53 // गेहदुवारे गच्छइ लहु तणुचितं करेइ जावेसो / प्रत्तय ! पञ्चभिजाणसि न वत्ति ? केणावि ता भणियं // 54 // तेणुत्तमहं सम्म ताय !न याणामि किंतु तक्केमि / जो मे एवं जंपइ सो मे पूयारिहो कोवि / / 55 // नियपियरंपि न याणसि पुत्तय ! तं तह सिणिद्धचित्तोवि / अदंसणेण अहवा भिजइ पेम्मं जओ भणियं // 56 // अदंसणेण अइदंसणेण दि8 अणालवंतेण / माणेण पवासेण पंचविहं झिज्झए पेम्मं // 57 // सोऊण तवयणं चिंतइ हा एस मज्झ किं जणओ। अगई गउत्ति संपइ इहागओ जंपए एवं // 58 // धम्मधुराधवलस्सवि कुंदुजलनिकलंकसीलस्स / जइ मह पिउणो अगई कस्स गई होज ? अन्नस्स // 59 // इय संसयं धरंते तणए जणएण तेण पुण भणियं / अवसाणे मह जायं न समाहिपरवसं चित्तं // 60 // तेण निमित्तेण अहं जाओ ASNA // 95 // Page #109 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती. प्रकरणपतिः / तस्योपरि पुत्रस्य करुणाभावना। // 96 // 4%ECIA वंतरसुरेसु किबिसिओ / तिसिओ किसिओ छुहिओ पुत्तय ? तुह पासमल्लीणो॥१॥ सम्मं पञ्चभिजाणसु गिहदक्खिणकोणनिहि अहिराणा / हकारसु नियजणणिं बंधवपमुहं कुटुंबंपि // 62 / / आहूय आगयाणं साणं स करेइ उचियमालावं / रणस्णयपरिग्गहिओ तो पुत्तो विनवइ एवं // 63 // तं पत्तं तं तित्थं जाणावसु ताय जस्स वियरेमि / दाणं सुगइनियाणं गिहसवस्सोवउगेण // 64 // जणएण तओ वृत्तं वच्छ ! तए मासियाइपवेसु / पजंतं चिय दिन न किंपि पत्तं मए तहवि // 65 // तो लवइ बंमचंदो सुगईए तुम्ह कारणं ताय / जलणाइसाहणेणं करेमि पाणाण परिहाणि // 66 // मा अत्तय ! इइ जम्पसु जाणियनिस्सेससत्थपरमत्थ / जं अप्पघायगाणं अगइ चिय होइ जीवाणं // 67 // अन्नं च-पावविसुद्धिनिमित्तं अप्पवहं कुणइ जो महामृढो / न हु होइ तस्स सुद्धी पंकेण व मलिणवत्थस्स / / 68 // कहमनहा अहं तुह पुत्तो सुगईए कारणं होमि / दिट्ठो सुयम्मि सग्गो पियराणं इयकह सत्थं // 69 // इय सुयवयणे जंपद जणओ तं वच्छ ! मह इमं देहि / जं अईयरयणिकरुणादाणसमुवज्जियं पुनं // 7 // तित्थेसु न्हाणाई न हुंति दाणाई तवविहाणाई / सुगईए नियाणाई दयाए दाणं जहा दिनं / 71 / / एवं विचिंतिऊणं पुत्तो पिउणो पयासियप्पणओ / दुविहकुसेण पवित्तियकरकमलो देह तं सुकयं // 72 // संतोसं समुबहंतो पुत्तं संभासिऊण सकुडं। सो सोमदेवजणओ संपत्तो इच्छियं द्वाणं // 73 // करुणादाणकहाणयं सम्मत् // लोगुत्तरजिणधम्मे छजीवनिकायवच्छले देयं / दुहियाण दयादाणं धम्मदुमसरसगुणट्ठाणं // 1 // दमगस्स दयादाणं अजसुहत्थीहि दिधनाणीहिं / दिनं निस्संगेहिवि नाऊणं सासणुजोयं // 2 // तथाहि-जंबुद्दीये दक्षिणभरहद्धे मज्झम्मि RECORIE% EC % 94%AES Page #110 -------------------------------------------------------------------------- ________________ +515 // 97 // खंडंमि / आसि पुरी कोसंबी सग्गसमे वच्छदेसम्मि // 3 // अपडिबद्धविहारा तीए निरवजपरिसरुजाणे / अजसुहत्थि- मुनीन् - भिहाणा समोसढा अन्नया गुरुणो // 4 // दुभिक्खम्मि दुरंते दमगो एगो परिभमंतोऽवि / दुहिओ तत्थ न भत्तं पज टवा प्रशंपावए कहवि // 5 // अनम्मि दिणे ईसरघरम्मि साहूण जुयलयं दिदं / पविसंतं तेण तओ पेच्छइ दारम्मि चिठंतो // 6 // सापूर्वकतो खजभोजवंजणरसेहिं विविहेहिं तत्थ दहणं / साहणं पडिलाहणमचन्भुयमत्तिसंजुत्तं // 7 // धन्ना एए मुणिणो जं. मन्नयाचना भिक्खंतावि इन्भलोएण / आयरपरेण निचं पडिलाहिजंति दुभिक्खे // 8 // एएसिं चिय जम्मो सलाहणिज्जो इमेसि रोरस्य / धम्मो य / कप्पदुमो इव कप्पियफलप्पयाणेक्कदुल्ललिओ // 9 // एए चिय मुणिवसहा धम्मधुराभारधरणधोरेया / जं ईसरगुरुमाणं लहंति सुगईए गच्छंता // 10 // इइ सुहचिंतापगरिससरहसचित्तस्स तस्स ते मुणिणो / जंति गुरुणो पासे सदयं अब्भस्थिया तेण // 11 // तहाहि-संसारम्मि अरने उवसमआसमपयम्मि तह करुणं / आरोवति मुणी जह जियाण तावं हरइ निच्चं // 12 // ता देव देह दमगस्स मज्झ तुम्भे दयालुया अन्नं / पञ्जतं अन्नत्थवि लहंति तुम्हारिसा जेणं // 13 // धवलद्धपइठेहिं मुणीहि आसाण साहणं होइ / लोएवि इय पसिद्धी सा मह आसं पयासेह // 14 // अन्मथिएहिं किज्जइ रुईए परिपूरणेण आसाणं / उज्जोओ निचं चिय पयडमिणं सूरसोमेहिं // 15 // संतोसमंदिराणं मुणिंद ! पोसेइ तुम्ह दिढभावं / एसा छुहा पुणोऽम्हं दुक्खाणं देह दंदोलि // 16 // इइ जंपत रोरं पिढिविलग्गं भणति मुणिचंदा / अम्ह गुरूणं आणा आणेयवंत्ति कहं ? देमो // 17 // एवं वोत्तो दमगो गच्छइ आसापिसाइयापत्थो / जंगमकप्पतरूणं गुरूण तो पायमूलम्मि // 18 // सुहए तेसिं दंसणपहम्मि दमगस्स तस्स पत्तस्स | अन्मस्थगामणोरहरहा पयट्टंति सविसेसं // 19 // तथाहि // 9 CAREKARK Page #111 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 98 // 345445CACACASS दुभिक्खदुक्खदावप्पसमणमेहाण तुम्ह दिट्ठीए / दूरीकिजउ मज्झ संतावो अमियवुट्ठीए // 20 // अजं दालिद्दहुमो भग्गु- सूरिणा प्र. च्चिय अम्ह मन्निमो देव ! / तुम्ह सुहत्थीण घणकरदाणप्पसरलीलाए // 21 // जीवदइक्कनिवासा तुम्हे गुणसायरा घणा- दत्तदीक्षो णपि / तण्हावहाररसिया ता मज्झं देह पसिऊणं // 22 // तो देह भोयणं मह जस्सणुभावेण प्फुरियविरिओहं / लीलाए द्रमका| जेण धम्मे जीवं कोडिं चडावेमि // 23 // तो तुम्हाण समक्खं निचलट्ठाणेण सरलयं घेत्तुं / सम्ममुवलद्धलक्खो देव पसाहेमि में तसरसापरलोयं // 24 // सोउमिमस्स विलावं स उण जिणसासणस्स उज्जोयं / पेच्छंतो तयभिमुहं अजसुहत्थी गुरू भणइ // 25 // हारभोजमुणिवेसेणं लब्भइ भोयणमम्हाण एस कप्पुत्ति / गिहिस्सं मुणिवेसं तो वुत्तं तेण दमगेण // 26 / / दिनम्मि साहुवेसे भुत्तो | नोऽजीणेसरसं पगिठमाहारं / हिट्ठो तुट्ठो चिंतइ अव्वो धम्मस्स माहप्पं // 27 // ते च्चिय जयम्मि धन्ना ताण सुलद्धो य माणुस्सो न मृत्वा जम्मो / जे गिण्हन्ति मुणीणं धम्म आबालभावाओ // 28 // एए पुण गुरुणो मह जंगमकप्पडुमा महाभागा / कप्पिय कुणालपुत्रो फलदाणरया जयंतु पत्तेहिं परियरिया // 29 // इच्चाइ भावणाए विसुद्धचित्तस्स होइ दमगस्स / सामाइयमवत्तं निहणइ जं जातः। दुक्खदन्दोलिं // 30 // एवं धम्मपसंसं तस्स कुणंतस्स हिट्ठहिययस्स / रयणीचरिमे जामे अजीरमाणम्मि आहारे // 31 // मणुयाउयम्मि बढे उवलद्धे बोहिबीयपुन्नम्मि / सहसा विसूइयाए पंचत्तं झत्ति संजायं // 32 // पाडलिपुत्ते मोरियवंसे पुत्तो असोगसिरिरन्नो / अंघो कुणालनामा निवसइ देसंतकुग्गामे // 33 // तप्पुत्तो उववनो सबंगोवंगचंगिमनिहाणं / उत्तमलक्खणवंजणजणियजणाणंदसन्दोहो // 34 // तो तज्जणओ चिंतइ गामे एयम्मि एस मह पुत्तो। नाओ पियामहेणं न होइ जमहंपि पम्हुट्ठो // 35 // गंतूणं तो पाडलिपुत्ते नयरम्मि ताव अप्पाणं / पयडेमि गीयनिरुवमकलापओगेण सवत्थ // 36 // ISRAECCASNAL Page #112 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 99 // संचिन्तिऊण एवं आगंतूर्ण पुरम्मि सो कुमरो / रायपहे तो मुच्छातरंगियं गायइ विचित्तं // 37 // विविहप्पओगमंदरमहिए | पाटलीपुत्रं विनाणअन्नवे तेण / अमिएण व गीएणं अणिमिसनयणो जणो जाओ // 38 // नयरजणाओ वि सुओ रना रसिएण सो गत्वा गीतसमाहूओ / जवणिन्तरओ गायइ तहा जहा तुंबरो सग्गे // 39 // तो रंजिएण रण्णा वरं वरेसुत्ति सायरं भणिओ / पत्थइ | रंजितनृपकागिणिमित्तं तओ पुणो राइणा भणिओ॥४०॥ किं भो तुच्छं मग्गसि ? मए पसन्ने जहिच्छियं दिते / कप्पदुमम्मिवि * पार्श्वे कुणापत्ते न हवइ संकप्पियं किन्नु ? // 41 // पत्थेमि देव रजस्स कागिणिं सा न होइ तुच्छेत्ति / कोडीए किल लोए गरुय च्चिय मालेनयाचिकागिणी सिद्धा // 42 // इय वुत्ते भणइ निवो तुज्झ कहं रजकागिणी उचिया ? / उचियत्तचूयकुसुमे छइल्लफुल्लंधुया रसिया दते राज्ये // 43 // रायकलं तं जाणसि तिवपहाविरहियाण जं हाणी / होइ तओ तणुयत्ते अणुसरणं सूरपायाणं // 44 // रायत्तेवि हु नृपस्य स्वपत्ते ससंकहिययाण मंदतेयाण / नक्खत्तपरिगयाण य दोसाकरया फुडं होइ // 45 // बलिनिग्गहोवि हरिणा पुराकओ पुत्रस्मरणं कमवियारिणा जमिह / तो भमरोवि सपक्खो न लहइ रहमकमारुढो // 46 // एवं सुजुत्तिजुत्तं पन्नविओ एस रायणा जातम् / अंधो / विनवइ देव! एवं किंतु पसाएण निसुणेह / / 47 // देवकमासनो तुह रजं तेण सामि! इच्छामि / एवं जाणावेउं कुमरो इय गीयई पढइ // 48 // चंदगुत्तपपुत्तो उ बिंदुसारस्स नत्तुओ / असोगसिरिणो पुत्तो अंधो जायइ कागिणिं // 49 // सुणिऊणमिमं गीयं सुमरइ नियपुत्तपुववुत्ततं / जह एयस्स विइन्ना उजेणी कुमरभुत्तीए // 50 // तो अन्नदिणे लेहे पाइयभासाए जं मए लिहियं / एसो अहुणा सम्म झत्ति अधीयउ कुमारोत्ति // 51 // अणिकाइंमि लेहे | सवत्तिजणणीकए अणुस्सारे / अंधीयउत्ति जाए अम्हाणं अणुवउत्ताणं // 52 // उज्जेणिगए लेहे कारणपुरिसाण दुक्खसंदोहे / // 99 Page #113 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 10 // 134545456. अकहिजंते तत्ते वाययइ कुमरो सयं तत्तो // 53 // तंबसलायं तत्तं घेचूर्ण जेह दोवि नयणाई / सो एस मह कुमारो साहसिओ पुत्रजन्मविणयसारोत्ति / / 54 // इच्चाइ सुमरीऊणं पञ्चभिजाणित्तु तं नियं पुत्तं / सोऽसोगसिरिराया जवणिं अवणावए तुरियं // 55 // श्रुत्वाऽशोछम्मासियमुत्ताहलसवंभचारीहिं हरिसअंसहिं / सुयदिच्छियरजसिरीहारं व रएइ तो राया / / 56 // भणइ य पुत्तय ! तुमए कनृपेण तपवत्तिया अमियसारिणी जमिह / गीयकला तं लोए सच्चं चिय रायतणओऽसि // 57 // उचिया तुह रायसिरी चंदस- तत्पुत्रसम्प्रते गुत्तस्स मज्श पुत्तस्स / किंतु न तारामेलो तीए सह नेहहेऊ ते // 58 // ता वच्छ ! तुज्झ संपइ किमवच्चं ? किं पिएयति ? दत्ते राज्ये तेणुत्ते / संपइ कुमारो जाओ संपइ अथित्ति पडिवयणो॥ 59 // तो तुडेणं रन्ना संपइकुमरस्स रोरजीवस्स / पुवसुकयाणुभावा कृतः श्रावउज्जयणी पुरवरी दिन्ना // 60 // देहकलोवचएणं राया पडिपुन्नमंडलो सतेओ / पुत्वभवजियपुनखीरोयसमुद्दओ जाओ // 61 // गणेन र. वडूतनेहदसो पडिकूलसमीरणे अविज्झाओ / जस्स पयावपईवो अउहरूवो जलइ निचं // 62 // जस्स कमलाकरस्स व कोसो थयात्रामवसुपूरपूरिओ संतो। वियसइ पइप्पभायं दलाणि सवाणि पयडंतो॥६॥ पडिवक्खक्खोहदक्खा निच्चं बहुमाणबलिपरिग्गहिया। होत्सवः। दुग्गा ईसरवल्लहसंवासा जस्स रजंमि // 64 // रजंमि जस्स मंडलविसेसपनाइकुसलबुद्धीणं / मंतीणं ताण मंतेहिं खुद्दो. वद्दवसमो होइ / / 65 // मित्तकलापणएण संपइराया कमेण वटुंतो। संपुन्नमंडलत्ते वियरइ सो कुवलयाणदं // 66 // अह | उजेणिपुरीए सिवपुरपहगामिसावयजणेणं / पारद्धा रहजत्ता पवयणगुणचक्कसंजुत्ता // 67 // दिजंति चच्चरीओ संसारसमुद्दतारणतरीओ। धम्मदुममंजरीओ सवणिदियकमलभमरीओ // 68 // बजंति दुंदुहिओ धाराधरधीरनिस्सणसहीओ। नचंति य तरुणीओ जणाण मणनयणहरणीओ॥ 69 // कीरंति हट्टसोहा आणंदिअंति धम्मियजणोहा / पुरिजंति चउक्का // 10 // RECCALCCACAAS Page #114 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 15 // 1.1 // 5 NAGACAMASSACREC% गिजंतजिणिंदगुणचक्का // 70 // दिअंति य दाणाई सुगइनियाणाई गुणनिहाणाई / घोसिखए अमारी सुकयकयाणाण वक्खारी // 71 // बझंति तोरणाई उवसोहिजंति सवसरणाई / गिझंताभरणाई मुञ्चति य गुत्तिधरणाई / / 72 // दमंतधूवधूमधयारमेहावयारसंकाए / पयडंति जत्थ तत्थ व सिहंडिणो तंडवं हिट्ठा // 73 // तो पुष्फपयरकुंकुमच्छडाहिं रमणीयरायमग्गेसु / संचरमाणमि रहे महामहे धम्मिजणनिवहे // 74 // अणुगच्छंतचउव्विहसंघसमेया सुहत्थिणो गुरुणो। अह दिवा ओलोयणहिएण संपइनरिन्देण // 75 // मन्नेमि दिट्ठपुव्वा मए इमे सोममुत्तिणो मुणिणो / अह माणसंमि चियसइ विवेयकुमुयायरो तस्स // 76 // गुरुपक्खवायकलिया सहसा मोयंमि पसरिए तत्थ / भमरि व पुत्वजाई सम्मं सरिया नरिन्दस्स / / 77 // आणंदपरिणएणं गएणं सूरीण अंतिए तेण / पयकमलप्पणएणं अवणीओ विरहसंतावो // 78 // तो राया अणवस्यं अमंदआणंदवाहबिंदुहिं / हारं च स्ययइ पणओ गुरुण पयपउमलच्छीए / / 79 / / जंपइ य संपइनियो रहसभरुभिन्नबहलरोमंचो / भयवं ! पञ्चभिजाणह मं? तुम्हे सम्ममुवउत्ता // 80 // गोवहरुइपसरेणं वियसियमणनयणवयणकमलेहिं / तो भणियं सूरीहिं महुयररवमहुरसद्देणं / / 81 // कोसंबिपुरवरीए ओमे अम्हाण तं सि सीसोत्ति / वुत्ते गुरुहिं राया अमियरसेण व संसित्तो // 82 // मिच्छत्तविसविमोहणरहिएणिमिणा तओ नरिन्देण / सम्मइंसणमणहं पडिवनममंदहरिसेण // 83 // देवगुरुभत्तिगंगा पसरइ हिमसेलमहिमओ तत्तो / हवइ य सवत्थ तओ पयाण अणकूलमामित्तं // 84 // तस्स निवइस्स रत्ते जणमि उदयंगमि मित्तमि / संपञ्जइ पइदिवसं कमलाणं कोसवित्थारो // 85 // अणुरत्तमंडलेणं महप्पभावेण मंतजोगेण / एएण नरिंदेणं भवर्णपि वसीकयं तत्तो // 86 / / उत्तुंगत्तोरणाई कंचणकलसुच्छलंतकिरणाई। तवणिजदंडधयवड रथयात्रागतसुहस्तिगुरूं दृष्ट्वा प्राप्त जातिस्मर|णसम्प्रति नृपेण शासनप्रभावना कार्य कृतम् / 94%EC D // 101 // Page #115 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / | शीलद्वारे सुदर्शन श्रेष्ठिदृष्टान्तः। // 102 // OGRADUNGAPERCISGA किंकिणिरवहिययहरणाई // 87 // तिकालं कालागुरुधूवसमुल्लसियधूमकुरुलीहिं / आमोयमोयपरवसखेयरकिजंतसंसाई॥८॥ गामागरनगरेसु देसेसु विरुणारिएसु मत्तीए / जिणभवणाई तत्तो कारावइ संपई राया // 89 // करुणापरिणामेणं दीणाणाहाण रुणापरिणामेणं दीणाणाहाण | दावए दाणं / जिणधम्मपसंसाए जंतेसि होइ बोहिफलं // 90 // काऊण दयादाणं न दीणभावेण वड्डमाणेण / जलहीवि होइ निम्मलगुणगणरयणायरो लोए // 91 // करुणादाणुवयारी संपइराउ व कित्तिवित्थारी / इव सिवपुरपहचारी हविज सम्मत्तगुणधारी // 92 // // दानद्वारं समाप्तं / / सीलं पुण पडिपन्नं सत्तरसविहसंजमो जो वासो / होइ सया सिवनयरे भवरनगयाण जीवाण // 1 // एएणं सीलेणं | सेलेसीकरणबंधणविमुक्का / सम्बोवाहिविसुद्धा लहंति सिद्धिं लहुं जीवा // 2 // बहुजीवदएणिमिणा सीलेणं खीरसायरनिभेण। आराहिएण पुरिसुत्तमलछि सासयं लिंति // 3 // देसेणं पुण सील गिहीण सुविसुद्धसम्मदिट्ठीण / पररमणिपुरिसवजणमडमोहमाहप्पकप्पदुमं // 4 // धन्ना पालिन्ति इमं सिबसुहलच्छीकडक्खअक्खित्ता / संसारसुहविरत्तो सुदंसणो जह महासत्तो // 5 // तहाहि जंबुद्दीवे दीवे दाहिणभरहद्धमज्झिमे खंडे / देसे अंगे चंगे चंपानयरी पुरा होत्थ // 6 // कुवलयवियासदच्छो सुहावहो जस्स पसरियकरोहो / आसि तहिं दहिवाहणराया नक्खत्वसंगहरो // 7 // रूवगुणमयणपरिणी सरससमुल्लावसल्लई करिणी। सोहग्गरयणखाणी पट्टे तस्साऽभया देवी // 8 // ईसरसिरोवयंसो अससंको सयलसोममुचीवि / सिट्ठी सम्मदिवी वसइ GACASSACRECEMAG // 102 // Page #116 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CR 4 // 103 // IA %AECORRECTROSAROKAROGGC तहिं रिसहदासोत्ति // 9 // जुन्हानिम्मलसीला तस्स पिया साविया विगयहीला / जंगमसीललीलासत्तमणा अरिहदासित्ति चम्पा॥१०॥ ताण गिहे कम्मयरो सुभगो महिसीण पालणुज्जुत्तो / पाएणजवजुत्तो अज्जुणवाणुव सुहकम्मो // 11 // अह I नगाँ अन्नया य एसो महिसीजूहं वर्णमि चारित्ता / दिवसावसाणसमए माहे मासंमि विणियत्तो // 12 // काउस्सग्गेण द्वियं | ऋषभदासएग मुणिपुंगवं निरावरणं / पिच्छइ सोमसं(क)तं नयणाण महूसवं दिन्तं // 13 // तो आगओ गिहमिवि रयणीए सीय- श्रेष्ठिकर्मपीडिओ संतो / चिंतइ जहा मुणिंदो चिहिस्सइ सो कहं तत्थ ? // 14 // एयंमि सिसिरमासे जेण दरिदाण हीणवत्थाण / | करसुभगेन वट्टइ दुत्थावत्था वायंताण दसणवीणं // 15 // तह दीसंति सराई फलिहसिलीभूयबहलसलिलाई / डझंति पउमिणीओ नमस्कारवणराईओ मिलाइंति // 16 // पइगेहं जलणोवरि करकमलछत्तधारिणो लोया / हुंति जओ जड्डहरो धन्नाणं एस सिद्धिकरो मंत्रो // 17 // अवि गिहमज्झे अम्हं पावरणे परिणिजलणसविहेऽवि / तुहिणकणमिस्सवाए बाहंते अंगुवंगाइ // 18 // ता धन्नोऽहं गृहीतो जइ तं पिच्छिस्सं अक्खयं मुणिं तत्थ / इय चिंततो एसो पच्छिमरयणीए उद्वित्ता // 19 // गच्छइ महिसीचारणकए गगनमुणिंदस्स देसणट्ठाए / पत्तेण तेण दिट्ठो वर्णमि पडिमाहिओ साहू // 20 // तो हिट्ठो सो सुभगो लहुकम्मो जेण वंदए विद्येति / तयणु / अह उइओ दिणनाहो उज्जोयंतो दसदिसाओ // 21 // अरिहंतनमोकारं फुडक्खरं भणिय पारिउस्सग्गो। उप्पइओ गयणयले स मुणी सुभगस्स पच्चक्खं // 22 // अरिहंतनमोकारं एसो खलु गगणगामिणीविजा / अज्जेव मए (विनाया) मुणिंदनाहस्स दिट्ठीए / / 23 / इय चिंतिऊण सम्मं सद्धाबहुमाणभत्तिसंजुत्तो। नवकारपयं पढमं अणुसमयं पढइ सो सुभगो // 24 // भवणे वणे जणे वा मणे कुणितो पढेइ अणवरयं / सयणासणेऽसणे वा तएकताणो सबहुमाणो ARSHASHTASSACCESS 3 // Page #117 -------------------------------------------------------------------------- ________________ क श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 104 // // 25 / / दट्टण सिट्ठिणा सो भणिो कि ? हासपच्चयं पठसि / अरिहंतनमोकार वार( वारमुच्चरिय ) सुभग! // 26 // भणइ | सो बमसुभगो नाहं उवहासेणं पढामि नवकारं / आयासगमणविजाबहुमाणपरवसो किंतु // 27 // सिट्टि ! मए निविडो दिवो स्कारमंत्र. ज्झाणडिओ वणे साहू। भणियं नवकारपयं तयणुप्पइओ गयणमग्गे / / 28 // सोऊणमिमं सिट्ठी तो खाइं पढसु तं परायणो वच्छ ! / संपुन्नं नवकारं अइसयगुणरयणभंडारं // 29 // सुकम्मपरिणईए कडक्खलक्खीकओ तओ सुभगो / हरिसेण या मृत्वा पढइ पुग्नं एसो परमिद्विनवकारं // 30 // एसो पढमो मंतो परमरहस्सं परंपरातत्तं / नाणं पढम नेयं सुद्धं झाणं सिवं | श्रेष्टिपुत्रः नेयं // 31 // हिययकमलविउ चिय झायबो एस सबट्ठाणेसु / सुइभृएणं निहुय पवित्तदेसेसु भणियबो // 32 // इय सुदर्शनो सिक्खादाणेण सरसेणं सिढिकुंजरेणेसो / भमरो व कउलीणो हरिसतरुम्मिन्नरोमंचो // 33 // अह चंदुजलभत्ती नवकारे जातः। तस्स माणसे निच्चं / ( अत्तम्मि ) वियासयंती सुकयं चंदुज्जुयवणं व // 34 // पइदिवसं नवकारं झायतो जाव चिट्ठए एसो / ताव कमेणं पत्तो पाउसकालो जणाणंदो // 35 // एगंमि दिणे तो सो वणा नियत्तोऽवलोयए घोरं / | नइपूरं तो भीओ खणमेगं चिट्ठए जाव / / 36 // महिसीओ तरिऊणं पत्ताओ ताव झत्ति परतीरे / तो अवरखित्त मज्झे पविसंतीओ पलोयत्ता / / 37 // किल गयणगामिणीए विजाएऽहं नहंमि वच्चिस्सं / इय कयअज्झवसाणो उप्पइओ पडइ जवमझे // 38 // धणियं तत्थ य विद्धो सुभगो हिययंमि तिक्खकढिणेण / पुवञ्जियकम्मवसा कलनिच्चलखयरकीलेण // 39 // धारिंतो नवकारं हियए न गणेइ दुक्खसंभारं / हारं व गुणाहारं पार्वितो इव सुहागारं / / 40 // (परमिट्ठिः | मंतेण ) मंगलकलसेण सुकुलमज्झमि / अग्गेसरेण लेसाविसुद्धिकुसुमोवयारेण // 41 // परलोयं संपत्तो सो पुत्तो रिसहदास CARECEICIAL Page #118 -------------------------------------------------------------------------- ________________ C+ // 105 // सुदर्शन OGASANCHARSEX सिद्धिस्स / उववनो कुच्छीए घरिणीए अरिहदासीए // 42 // तंमि कुले गयणंगणविउले उदयंतयंमि सुभगंमि / आसापयासललिओ वसुवित्थारो समुल्लसिओ // 43 // वियसंतकमलवयणी सा, (हरिसेण वुढत ) थणजुयला / गम्भेण सिद्धिणी सा जन्ममहोजंगमदिणलच्छिसंकासा / / 44 // अह कप्पलयालील वहइ समुप्पन्नदोहला एसा / दीणाणाहाईणं वियरंती सिद्विणी दाणं ॥४५॥दा त्सवादितीए कमेण जाओ उत्तमतिहिकरणलग्गजोगेसु / अह लक्खणपरियरिओ पुत्तो (हासो)व रमणीणं / / 46 // नेहदलल्लासकरे निरूपणम् / कुलप्पईवंमि तंमि जायंमि / दीवंतरप्पहाओ तस्स मिलायंति तेएण // 47 // जाया य अरिहदासी सोमपुत्तमि तंमि उदयंते / पुन्वदिसि व समुज्जलमुहा सुहासारसित्त व // 48 // सुयजम्मेणं सेज्झी तुरियं बद्धावए पियंवइया / हरिसम्भरनिम्मरंगी अह सिद्धिं उसहदासंपि // 49 // अरुणकरे संजाए पुत्ते मणनयणवयणकमलाई / आसुल्लाससमं चिय ससयणसिद्विस्स विसप्पंति // 50 // सुयजम्मकहणतुट्ठो पज्जत्तं पारितोसियं दाणं / तत्तो वियरइ सिट्ठी चेडीए धोयमत्थाए // 51 // महरिहउवायणेणं रायं आपुच्छिऊण तो सेट्ठी / कारागारविसोहणममारिघोसं करावेह / / 52 // रायपहचच्चराईसु बाहिं अभितरंमि नयरीए / दिजंति य दाणाई दारिदगिरिन्दवजाइ // 53 // गेहंगणाई कुंकुमसुगंधिचंदणरसेण सिचंति / घणसारचुन्नसत्थियविचित्तपुष्फोक्याराई // 54 // बझंति तोरणाइं नानामणिखंडपसरियपहाई / सरस (चंदणरसलित्ताई) वंदणमालासणाहाई // 55 // सिंगारसारअविहवमंगलमुहलंगणाकरत्थाई। दहिदुद्धंकुरमुत्तियअक्खयवत्ताई पविसंति // 56 // नचंति पाउलाई दिढचरणनासतुट्टहाराई / गिअंति य गेयाई सवणसुहासारसाराई // 57 // बारसदिणाणि एवं सुयजम्ममहसवो तहा विहिओ / जह चंपानयरीए सुरलोयसिरि (व संपत्ता) // 58 // अहवा-सव्वच्चिय धनाणं होह अवस्था परोवयारा य / उदयारंभाउ चिय CACAS SAS लंगणाकरत्थाई / दहिदु बारसदिणाणि एवं सुजय / उदयारंभाउ चिय " Page #119 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती प्रकरणपृतिः / // 106 // वृद्धतरुणी रमणीनामाशिर्वादाः। ASARA चंदो चंदुजयाणंदो / / 59 // तत्तो पसत्थदिवसे सगुत्तसयणाण माणदाणेण / सिट्ठी जंपइ एवं जिण सासनमत्तिसंजुत्तो // 60 // सम्मदंसणरयणं जं सम्म एस पाविही पुत्तो। तो सुदंसणनामा (वहउ) पसिद्धिं गुणसमिद्धो / / 61 // पडिवनवच्छलाहि परि- यरिओ पंचअंबधाईहिं / पंचेदियवुड्डीहि सद्धिं परिवड्डए तो सो // 62 // सियपक्खससहरो इव देहोवचएण बहलकंतिल्लो / पइदिवसं अहियं सो उल्लासइ गोतनीरनिहिं // 63 // देवगुरूणं पायप्पसायकप्पहुमस्स छायाए / (उपसमिय) संतावा पुजंतु मणोरहा तुज्झ / / 64 // कुत्थुममणि व एसो जिणधम्मो पुनसायरसमुत्थो / पुरिसोत्तम तुह हियए कुणउ सयासासमुजोयं // 65 // वच्छ सुदंसण सम्मदंसणरयणोवलंभजोगस्स / जिणसासणदेवीओ तुह सान्निज्झ सया दिन्तु / / 66 // गयणविउलंमि सावयकुलंमि तारयगणाण मझमि / तुह पुत्त सोमकविबुहधुषप्पसिद्धी परा होउ / / 67 // सोहग्गरूवलावन्नवनसत्वं | गचंगिमगुणेहिं / तुट्ठाओ थेरीओ आसीसं तस्स इय दिति // 68 // मणहरभोगमणोरहरहाणमह सारही इमो होही / नेहवियड्डिमवसहे पेरंतो पवयणगुणेहिं // 69 // धन्नाए तरुणीए मन्ने एयस्स पाणिकमलाई / होहिंति पुनघणथणकंचणकलसप्पिहाणाइ // 70 / / जुवणवर्णमि रम्मे तरुणी एयम्मि कप्परुक्खंमि / वल्लि व आरुहिस्सइ सरसा सवंगपरिवेढा // 71 // एसो सुदंसणो सहि ! अरुणकरो दिणमणि व बालोवि / अवहरियसबदोसो भवणं सयलंपि रंजेइ // 72 // करकमलपरिग्गहियं काउं रूवाइसंपयासहियं / तं दट्ट तरुणीओ इय अन्नुनं पयति // 73 // अंगोवंगेहि समं पइदिवसं तस्स वड्डइ मईवि / सियपक्खे ससिणो इव कलाहिं सद्धिं जहा जुन्हा / / 74 // सो मोकबालभावो कमेण गुरुसत्तिजुत्तमहातेओ / होइ कुमारो सच्चं कलाविओवरि डिओ जेण // 75 // आरुग्गाइगुणेहिं पुबज्जियपुन्नपगरिसवसेण / बावरिं 3A4%ACKS Page #120 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सुदर्शने कलाओ गिन्हइ सो अप्पकालेण // 76 // नंदणवनराईए मेरुगिरिंदो व जुवणसिरीए। परिकलिओ सवंगं अह सो कल्लाण- यौवनमुत्तिधरो // 77 // किल पुनपरिणईए गुणेहिं रुवाइएहिं य ईए / सोहग्गमञ्जरीए उव्वणनवजोवणसिरीए // 78 // उत्तम- स्थितेकुलजायाए धूयाए मणोरमाभिहाणाए / सद्धि पाणिग्गहणं करिजइ तयणु पियरेहिं // 79 // निवसइ सदारतोसो अब्भूयसीलस्स तस्स हिययंमि / कुच्छुहमणि व सुगुरूवएसखीरो य उवलद्धो // 80 // आबालकालरूढो तस्स खमाए दयाणु- श्रेष्ठिपदं भावेण / सम्मत्तकप्परुक्खो सुहगुरुपायप्पसंगेण // 81 // धम्मकलं पयर्डतो निहणइ मिच्छत्तमोहमहिनाहं / अञ्चतसरल दत्त्वा ऋयाए अणुगुणसिक्खावयजुत्तो // 82 // नेगमसंगहनिरओ सद्दववहारसिद्धिरिउसुत्तो / नयमग्गसमभिरुढो एवंभृयप्प पभदासेन सिद्धप्पा / / 83 // एस सुदंसणसिट्ठी सम्मं सुगुरूवएसलद्धट्ठो। जिणसासणं व अवितहवाई लोए महग्यविओ।। 84 // | गृहीता गुरुपक्खवायनिरओ परिसप्पिरदप्पसप्पविद्दवणो / विणओवयारकुसलो वहेह दियरायसमसीसि // 85 // चिंतेइ उसहदासो दीक्षा। सुदंसणो एस गुणगणावासो / मह उब्जियगिहवासो तो उचिओ गुरुकुलब्भासो / / 86 // इय भावियपरमत्थो हिययडियसव्वसारसुक्खत्थो / निवसयणपयडसत्तं सिट्ठिपए ठावए पुत्तं / / 87 // अक्खलियललियचरणो अंगोगोवओगवित्थरणो / उन्वृढसीलभारो मुणिवसहो होइ सिट्ठीवि // 88 // एसो सुदंसणो पुण सिट्ठिपए सुट्ट संठविओ संतो। वित्थरियकमलकोसो परमिट्ठिपइट्ठलट्ठो॥ 89 // अन्नं च वसइ नरवरपरलोयहिओ पुरोहिओ तत्थ / कविलो मंतमहोसहिपच्चूहसमुहनिद्दलणो // 90 // चंदोजलदियपंती परिणयबिंबाहरा सिणिद्धच्छी / तप्पत्ती कविला पुण जोवणवणराइलच्छी व // 91 // सा अन्नदिणे जंपइ कविलं चिट्ठह कहं ? बहिं निच्चं / बहुकालं गोट्ठीए सरसाए इक्खुलट्ठीए // 92 / सो भणइ मुद्धि ! पणयिणि! IPIW107 // CHR Page #121 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 108 // र्शनम् / सम्मड्डिी सुदंसणो सिट्ठी / सयलगुणरयणरासी पढमतोसी इहं अस्थि // 93 // तस्संतिए निविट्ठो गोट्ठीए सुट्ठ अमिग-1 | तत्र पुरोवुट्ठीए / कालं अइक्कमंतो अहं न याणामि तुट्ठीए // 94 // इय तग्गुणकहणेणं परोक्खरागेण तम्मि तह रत्ता / कविलावि हितस्त्रीजहा अन्नं वन मन्त्रइ न सुमिणेवि // 94 // अइ रायाएसेणं कविलो गामन्तरम्मि संपत्तो / तत्तो वियणं नाउं रहसभरुन्मि- कपिलायाः भरोमंचा // 95 // कविवहुचवला कविला रचा उदयंतमरमुत्ति छ / एइ सुदंसणसविहे विविहे सवहे विहेऊण // 96 // कामविजंपेइ कविलो तुह मित्तो पाणवल्लहो मज्झ / चिट्ठइ हल्लोहलिओ सिरवेयणराहुणकतो // 97 // तुम्ह सुदंसण ! सणमित्ते- कार प्रद| णवि होइ तस्स अवसरणे / अक्खयसुहोवलंभो संपइ तो एहि मह गेहे // 98 // इय लडहवाणिविन्नासपासवसओ घरंमि सो तीए / गच्छइ पुच्छइ अच्छइ पियमिचो कत्थ सो कविलो ? // 99 // रमणीए सयणीए जह गिहमज्झम्मि चिट्ठइ कविलो / तह तं पिच्छसु पविससु जंपइ कविला तो एवं // 100 // अणुइंतीए तीए मज्झगओ भन्नए इमो तो सो / जोवणलच्छि सामिय ! मह सहलं कुणसु तं इण्हि // 101 // मयणसरसल्लियंगी दुहियाऽहं देवसुंदरसरीर! | सल्लुद्धरणिमहोसहिकरणिं तं वहसु मह अहुणा // 102 // तुह संगमे णो जलनिहिउक्कलियाओ वारेसु तं धीर / उवरोहरोहणहुममलयायलमेहलाबंध! // 103 // इच्चाइ चाडुवयणिधणेण मयणानलो न पजलिओ / तस्स वरसीलजलनिहिपसरियलहरीहिं विज्झविओ // 104 // कामगहगहिलहियया हियाहियं बोहिउं न सकेसा। सीलमकलंकमचलं मह पुण नवचंदगिरिस| रिसं // 105 // इय चितिऊण जंपइ सुदंसणो मुद्धि ! खिजसि किमित्थं / परमत्थं न वियाणसि अक्खमोऽहं पंडओ जेण // 106 // एवं च तस्स वयणं दिवंजणसुंदरं लहेऊण / तीए विवेयनयणं सुमग्गनयणं समुल्लसियं // 107 // तुह // 108 // Page #122 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 109 // HAKAR सुदर्शन पार्श्वे याचिता क्षमापना कपिलया। CARRORG सोहग्मनहोयहिलवणिमलहरीहिं हरियहियपाए। न मए नायं मन्झं मासइ सा तयणु तयचं // 108 // कनविसेणं पत्था अस्सत्था जे हवंति इह जीवा / ताण जडाणं पसरो रसायले निच्छियं जाइ // 109 // मुद्धाए गिद्धाए कामंधाए मए अमम्गम्मि / ज सि तुमिह आणीओ खमियत्वं तं महामाग ! // 11 // इय कविलाए वुत्तो सुदंसणो नियघरंमि संपत्तो / अमिएणवि संसित्तो पहिट्ठचित्तो महासत्तो // 111 // चिंतइ य सुकुलमाणुसजम्मो अजेव मज्झ संजाओ / जं तीए अक्खडिओ न उडिओ रक्खसो मयणो // 112 / / कल्लाणायलमंडणमवि कित्तिमपंडगत्तणं मज्झ / पंडगवणं व सहलं सम्पन्नं पुन्नभावण // 113 // इत्तोऽहं न कयाइवि एगागी परघरम्मि बच्चिस्सं / संवेगमुबहतो गिण्हइ सो अभिग्गहं एवं // 114 // वट्टन्ते इन्दमहे सुहावहे अनया य नयरीए / दहिवाहणो नरिंदो उजाणं एह रिद्धिए // 115 // रन्नो उवरोहेणं सुदंसणो सोवरोहिओ सिट्ठी / मच्छइ सुन्दरिरूओ नंदणसुंदेरउजाणे // 116 // घणपरियणपरियरिया अभयादेवीवि तत्थ गच्छन्ती / अणुगम्मए सललियं कविलाए विज्जुधवलाए // 117 // सिडिसुदंसणभजा सुयसहिया दिवजाणमारूढा / नूणं सई महासइमणोरमा एइ अह तत्थ // 118 // तं ददृण सुहयं विम्हयवियसंतनयणसरसीरुहा / पुच्छह अभयादेवी पाई का एस रम| मिति ? // 119 // वाईए संलत सेविस्स सुदंसणस्स घरिणित्ति / देवकुमारायारा सुयावि तस्सेव सोहन्ति // 120 // ईसि | इसिऊण कक्लिा भणइ इमाए अईवकोसल्लं / जं देवकुमारोवमसुयसंपयमेरिसिं पत्ता // 121 // साहीणपई जोवणसोहग्गतरुमंजरी इमा मद्दे ! / अभयावि भणइ देवी जइ सुयजणणी किमिह चोज 1 // 122 // कविलावि भणइ सामिणि ! सच्चचिय बह परं भवे मचा / पुरिसो ता किं संका ? सुदंसपो पण्डओ किन्तु // 123 / / देवीए सा वुत्ता तुमए नायं कहं ! पुमो 109 // RE Page #123 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बवन्ती कृतिः / // 11 कपिलाकथितं वृत्तान्तं श्रुत्वाऽभयया प्रतिज्ञा कृता। // CASHASAHEGAOCAL एवं / आमूलाओ सयलं तं वुत्तंतं कहइ कविला // 124 // अभया जम्पइ मुद्धे ! कहिंचि तं वचियाऽसि निम्भग्गे / पररमणीसु एसो नपुंसओ न य सघरणीए / / 125 / / कविला विलक्खवयणा चवइ ( कथयति ) तओ वश्चियम्हि मृदाऽहं / तुम्हाणवि पण्डिचं न किश्चि पेच्छामि इह कजे // 126 / / उल्लसियाहंकारा कुणइ पइन्न तओ अभयादेवी / लीलाए हं रमिउं सुदंसणं तुम्ह दंसेमि // 127 // अइकढिणमुणिमणाईवि वियड्डरमणीहिं खोब्भविञ्जन्ति / मालइमालहिययाणि गिहीण किं ? मणिमो // 128 // अह रमयामि न तं जइ कविले ! हालाहलं तओऽवस्सं / कवलिस्सं जालावलिकलियं जलणं व साहिस्सं // 129 // इच्चाइ जंपिऊणं सुइरं रमिऊण तम्मि उजाणे / अभया तग्गयहियया गिहं गया तयणु कविलावि // 130|| अभयाए देवीए पंडियनामाए निययधाईए / भणियं कहं भविस्सइ एसा सहला पन्ना मे // 131 / / तीए भणियं वच्छे ! तुमए जुत्तं न मंतियं मुद्धि !| दिढसत्ताण न याणसि जेणजवि धीरयं पुत्ति ! // 132 / / जिणवयणभावियप्पा निकंपीभृयमाणसो एस / सेट्ठी सुदंसणो तुह कह ? पइन्ना हवइ सहला / / 133 // अन्नोवि सावओ खलु परनारीसोयरत्तसत्तेण / निजिणइ जयं किं पुण गुरुसत्तसिरोमणी एस? // 134 // बंमेकधणा धणियं जस्स य गुरुणो सुसाहुणो निच्चं / सो कहमवंमसेवी ? गुरुसीलमुवासगो जेण // 135 // निचं गुरुकुलवासी झाणन्भासी दुकम्मनिन्नासी / सको कहमानेउं ? अभिसरिउं ? वा इमो वच्छि! / / 136 // हवइ पइन्ना सहला केसरिकेसरगहेवि धीराण / न ह तस्स सीलसेलप्पयंपणे कस्सवि घडिजा // 137 // इय पंडियधाईए भणिए अभया भणइ माइ ! तुमं / आणेसु एक्कवारं परं अमोहं भविस्सामि / / 138 // तो बहु विचिंतिऊणं धाईवि य पंडिया भणई एवं / तुह निच्छयम्मि वच्छे ! पेच्छामि उवायमहमेगं // 139 // पञ्चम्मि चच्चराईसु काउ NAMASSACRBHANGABHARAS Page #124 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 111 // अभयाऽऽदिष्टपण्डितया प्रपञ्चेनानीतः सुदर्शनः। DESCAESAR+5 AUSTROKA5% स्सग्गं करेइ सो धीरो। जइ परमाणेयवो तहडिओ नन्नहा पुत्ति ! // 140 // साहु उवाओ एसो जइयत्वं जणणि ! ता है तए एत्थ / इय देवीए भणिए उत्तरमोमिति सा देइ // 141 // कइवयदिणाण अन्ते ताण मणोरहसएहिं सिग्छपि / किं चुजं ? जं कोमुइमहसवो तत्थ सम्पत्तो // 142 // आरक्खियपुरिसेहिं रायाएसेण पडयोसेण / जाणावियं पुरीए उज्जाणीए जणो एउ // 143 // चउमासए पमाए सविसेसं धम्ममग्गकजाई। कायवाइं रायाएसो य अलंघणीओति // 144 // इय चिंतिऊण सुइरं महग्धकोसल्लिएण रायाणं / विनवइ विणयकुसलो सुदंसणो धम्मकम्मरुई // 145 // देव ! चउमासपव्वे कर्ज देवच्चणाइ कायवं / तुम्हाणुनाए मह तो रन्ना अणुमओ संतो॥१४६ // सेट्ठी पभायसमए जिणिदविवाण ण्हाणपूयाओ। सबडीए चेइयपरिवाडीए पयट्टेइ / / 147 // तत्तो सुदंसणो निसि एगागी गहियपोसहो सेट्ठी। काउसग्गेण हिओ चंपाए चच्चरे कम्हि // 148 // अभयं देवि ततो धाईवि य भणइ नायवुत्ता / मन्ने तुह संकप्पो कप्पदुमो फुल्लिओ फलिओ // 149 / / उजाणीए अभया तओ य वंचणपहम्मि मइकुसला / सिरकमलं मे बाहइ न गया उत्तरमिमं काउं // 150 // जाणष्ठियं लिप्पमयं मुत्ति कामस्स पढमरयणीए / अंतेउरम्मि तत्तो पंडियधाई पवेसेइ // 151 // पइसारंती क्खलिया पडिहारेहिं किमेयंति। पुच्छिजंती पंडियधाई कूडिक्कगिरिधरिणी // 152 / / अन्जुजाणं अभया न गया जं सरिरकारणं तेण / अंतेउरे करिस्सइ पूयं कामाइदेवाणं // 153 // सिरिकामदेवपडिमा पइसारिजह तओ इमा ताव / अन्नेसिपि सुराणं आणिजस्संति मुत्तिओ // 154 // उग्धाडिऊण दंसइ मुत्तिं मयरद्धयस्स सा तेसिं / निस्संकेहि तेहिं एसा जाहि त्ति या भणिया // 155 // इय उत्तरेण धाई तेसिं मोहत्थमवरसुरमुत्ती। पइसारइ सा धुत्ती निहुयं व दोतिनिवाराओ // 156 // तो उत्तरीयपिहियं SUGARCAMERASAARC5% Page #125 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अमययोपसर्गितेऽपि जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / सुदर्शने // 112 // जाणे छवियं सुदंसणसेटिं। पडिहारेहि अक्खलिया नेउं अप्पेइ अभयाए // 157 // हरिसमरनिम्मरंगी महुरं अभयावि भणइ तयहुत्तं / अविवेइमणोहरणं न मंततंताण जं सजं // 158 // तहाहि सोम तुम मह उवरि रुइपसरं कुणसु जेण मणकुमुयं / वियसइ बहुहाऽऽमोयं उज्झिय बहुदिवससंतावं // 159 // मह ट्रा सुंदरपुरंदर एरावणकुंभसोहिथणजुयलं / कुणसु नियपाणिनहरूहरूहरं सिंदूरसोहिल्लं // 160 // तं काम एव रूवो तुमंमि एसा रई सही मजा / पीईवि जहा निद्धा होइ सही तह तुमं कुणसु // 161 // तं पणयकप्परुक्खो तणुलया मज्झ कोमला सरला / लीलारोहणविहिणा लहेउ सुहपल्लवुल्लासं // 162 // जघणस्थली महेसा गंगापुलिणं / मिउं महाभोगा / ललियगईए तीए विथरसु तं रायहंस व // 163 // लावनामयकलसे तुमम्मि सुकुमालमालईमाला / बरकंठे गुणलचिंछ लहंतु मह सुहयबाहूओ // 164 // अबवरयमयणबाणप्पहारविहुरं पुणनवं होउ / सामिय सरीरमेयं मह तुह संगमसुहं लद्धं // 165 / / सामिय 1 अपुत्रं किं मह ? तुमंमि परमोयएचि पत्तम्मि / जे एस मयणजलणो पसरंतो नेव उहाइ ? // 166 // इयऽणेगहा सुहाहिं सो सिंमारायारनयणवयणेहिं / पलयपवणेहिं मेरू जह तह न हि कंपिओ तीए // 167 // काउस्सग्गेण द्विओ सुदंसणो तयणु मोणमावन्नो / धम्मज्झाणं झायई अवियारायारसम्पनो // 168 // पुणरवि अभयादेवी मासइ बहुहावभावमणहरणं / मं मृणत्यो सामिय दुहियं किमुविक्खसे ? अहियं // 169 // तेयस्सीवि न सूरो हबसि तुमं जेल पउमिणीमउयं / नयसि न हरिस में | पहु ! बहुहा अब्भत्थिओ जइवि / / 170 // कट्ठाणुहाणवयं मुश्चसु तं जेण तस्स फलमेयं / मन्नेमि जमिह मह मुहकमलम्मि PI महुबओ होसि // 171 // इच्चाइ आलवंती अभया नियपाणिमा करं तस्स / गहिऊण कुण्इ सरहसभुयाहि परिरंभसंरंभं तन्मनोरथो निष्फलो जातः। RECASHRSSC * 2 // Page #126 -------------------------------------------------------------------------- ________________ RECO में तथा कलाके दत्ते मौनिसुदर्शनस्य | राज्ञा शूल्यारोपण शिक्षा // 113 // 8 // 172 // एवमुपसम्गजलनिहिसिंगाररसुल्लसंतलहरीहिं / गुणचंदणवणमलओ एसो अइलु (अचलः) च्चिय सहाणे // 173 // चिंतह य एस धीरो जइ एयाए कहिंचि मुच्चिस्सं / पारिस्सामि तओऽहं सन्नासो अन्नहा मज्झ // 174 / / अह अक्माणमहिंधणजणियाकोवग्गिधूमकुरुलीओ। णं अभयादिट्ठीओ निवडंति सुदंसणे किन्हा // 175 // भणइ य अभया निट्ठरं ममावमाणेण नत्थि ते जीयं / जं हुंति माणणीओ निग्गहऽणुग्गहमणा मृढ ! // 176 // ता मा में अवमाणय माणेण भिंभलीभूयं / अन्नह तुमं महापहपहिओ होहिसि न संदेहो / / 177 // दुव्वयणानलता जहा जहा देइ सा महापावा। तह तह तस्स ज्झाणं कणयंपि व निम्मलं होइ / / 178 // अहवा खमागयाणं वसणे वसणे य पसरह सुझाणं / जह खीरतरुयराणं छेए छए हवइ च्छीरं // 179 / / अहिगरिणीए तीए दुवयणेहिं घणेहि अणवरयं / वयरं व ताडणाहि भिन्नं न मणो मणागंपि // 180 // अयलंमि तम्मि तीए तमस्सिणीए स्यंमि पसरन्ते / खेडंतीए विसरिसमणोरहा अहव भजंति // 181 // अह जायमि पभाए नहरेहाहिं नहं व अरुणाहं / काऊण नियसरीरं करेइ कोलाहलं अभया // 182 // वाहरिया इव तेणं पाहरिया तत्थ इन्ति संभन्ता / काउस्सग्गेण ट्ठियं सुदंसणं ताव पेच्छंति // 183 // एयंमि महासत्ते अवगयतत्ते न संभवइ एयं / एवं चिंततेहि विनत्तो नरवई तेहिं // 184 // सोवि सविम्हयहियो समागओ दट्ट सिद्धि उस्सग्गे / पुच्छइ अभयं देवि मियच्छि ! किं एयमावनं 1 // 185 / अभयावि भणइ तुम्हापसेणं सामि! जाव चिट्ठामि / ताव अकम्हाए सो दिट्ठो चिट्ठो पिसाउ व // 186 / / एसो वम्हहबिहुरो मेसो इव मत्तमाणसो सामि ! / मामन्भत्थिय बहुहा रिरंसुओ उस्सुओ संतो // 187 / / जह असईसुं गच्छसि तह तं सुईसुवि सुहाई / मुद्धचणय व निहुयं मिरियाणिवि किंतु खजंति // 188 // कृता। RRIGAROACHERECECRk' // 113 // Page #127 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी AKA बवन्तीप्रकरणवृतिः / नगरलोकस्य हाहाकार। // 114 इय पुणरुत्तं वुत्तोवि देव ! देहम्मि मह कुणइ एयं / तो पुकरियं ननं जउऽबलाणं बलं होइ // 189 / / एयंमि महापुरिसे एयं न हु हवइ किल जुयंतेवि / तो राया तं पुच्छह सणियं सणियं किमेयंति ? // 190 // अभयोवरि करुणाए पुट्ठो नवि किंपि जंपए स सेट्ठी / ॥ज परतावहरं चिय घटुंपि हु चंदणं होई // 191 चिंतइ तओ य राया पुच्छिअंतो जमेस तुसणीओ / चिट्ठइ तमहं मन्ने परदारपरंमुहो नेव // 192 // आरक्खियपुरिसाणं रना रुद्वेण तो समाइ8 / पञ्चाइऊण दोसं नयरीए एस हन्तवो // 193 // तो तेहिं चाहाहिं धरिऊणुप्पाडिओ तओ ट्ठाणे / वयणेणं सिद्धीओ मणेण देवाण व निवाणं | // 194 // मसिलितमुहो गत्ते लित्तो अइरत्तचंदणरसेण / रत्तकणवीरकोसियमालाहिं सिरगलावरणो // 195 // आरक्खियपुरिसेहिं एसो दिढबजडिंडिमरवेण / मामिजह नयरीए छित्तिरछत्तो खरारूढो // 196 / / एसो कयावराहो रनो अंतेउरंमि तेणित्थं / निग्गहणिजोऽवस्सं न दोसवं इत्थ रायावि // 197 // इय घोसणेण लोओ पहे पहे पिंडिओ निरिक्खंतो / चिन्तइ अहो किमेयं ? विहिणो अघडंतसंघडणं // 198 // अमयमओ तावहरो कलालओ सबजणमणाणंदो। विहिणा विहिओ कहमवि ही ही चंदोवि सकलंको // 199 / / अवराहमंतरेणवि ससहरसूराण राहुणा गसणं / दीसइ जह तह वसणं मन्ने एयस्स गुणनिहिणो // 20 // अहवा जह चंदणमवि लहइ दुहं विविहविहरणाइयं / घटुं पुण वंदिजइ होही तह एस नणु पुजओ // 201 // हाहा कयंत ! निग्षिण ! गुणस्यणमहोयहिस्स महणेण / ईसरो व कालकूडं अजसं चिय जइ परं लहसि / 202 // इय हाहारवबहिरियदियंतरं नयरिलोयनयणाण वाहजलं बहु पसरइ तद्दोसमलं व अवणेउं // 203 // एवं सघरदुवारे भामिजन्तो समेइ अह कमसो पेच्छइ य तं ।महासई मणोरमा तस्स वरपरिणी / / 204 // जह सूरमंडलाओ न ASHARASINGH // 114 // Page #128 -------------------------------------------------------------------------- ________________ | कायोत्सर्ग स्थिता तत्पत्नी मनोर|मासती। AAAAAAEISASSIS होइ पलएवि कहवि तमपसरो / तह मज्झ वल्लहाओ न सबहा दोसलेसोवि // 205 // रायावि एस आयारखीरनिहिणो करेह उल्लासं / तं एवं दहहेऊ मन्ने दुट्ठो विही चेव // 206 // जम्मन्तरम्मि अहवा सयमेवारीवियस्स अवियप्पं / दिढमलकम्मतरुणो फलमेयमुवट्टियं तस्स // 207 // किं तस्स पडियारो कीरइ केणावि सत्तिमंतेण / होही तहावि जाणे जिणिंदपयापभावेण // 208 // भणियं च--'भत्तीए जिणवराणं खिजंति पुत्वसंचिया कम्मा। आयरियनमोकारेण विजामंतावि सिझंति ' // 209 // एवं विचिन्तिऊणं मणोरमा निच्छि ऊण परमत्थं / न्हाया कयबलिकम्मा जिणिंदपडिमाणं करेह पूयं // 210 / / तो सासणदेवीओ सम्मदिद्विस्स जइ करिस्संति / संनिजं मह पइणो तओऽहं पारहस्सामि // 211 / / अन्नह अणसणमेवं मए पवनं न इत्थ संदेहो। धम्मपईण विणासे जं कुलरामा न जीवंति / / 212 // इय भणिऊणं एसा मणोरमा जिणवराण पयपुरओ / काउस्सग्गेण ट्ठिया सुरगिरिचूल व निकम्पा // 213 / / सिट्ठी सुदंसणोवि हु दिढसत्तो होइ हिययफलयंमि / वसणजलहिम्मि पडिओ निजन्तो चिन्तए एवं / / 214 // तहाहि-- ___मह आवयावि धना गंगासबंभचारिणी एसा। अवणेइ जेण सयलं पुजियपावमलपडलं // 215 // नामेणं चिय अभया एसा अचाहियस्स जं जणणी / सत्तभयविप्पमुक्का भावेणऽभया हवइ सिद्धी // 216 // तं अभयं जे पत्ता धन्ना ते | चेव महासत्ता / जम्हा ते जीवाणं न हेयवो कम्मबंधस्स // 217 / / एसो य गिहावासो एरिसकट्ठाण अडइसंकासो / जं | इत्थ अक्खरइया रामाओ रक्खसीओ व // 218 // आबालभावउ चिय सुहगुरुमूलप्पसंगरसियाण / सुमणोवियाससहलं नराण जम्मं तरूणं व // 219 // एसा दुत्थावत्था खस्यरसाणासहोयरी नूणं / पावदलदलणहेऊ परमत्थोजोयणे मज्झ AHMAKALAM Page #129 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ला जयन्तीप्रकरणवृतिः / GAAA निष्फले वधप्रयासे राज्ञा सत्कारपूर्वकं स्वप्रासादे नयनम् / MOCRACHAR // 220 // एकं चिय इह दुक्खं पस्लोयपसाहणमि जिणधम्मे / पयडो न गुणारोहो मए कओ सरलयासहिओ // 221 // हिययस्थलंमि रूढो सुहगुरुपाएहि पसरिओ धम्मो / कप्पडुमो मह फलओ किं होही ? किं अन्नचिन्ताए ? // 222 / / इय एस सुद्धलेसो सिट्ठी अमिलायमाणमुहकमलो / आरक्खियपुरिसेहिं नीओ जा वज्झभूमीए / / 223 / / तो तिक्खसूलियाए ते आरोविन्ति रायआणाओ। भिचाण लंधिया सा भयंकरी जायए जेण // 224 // तत्तो सासणदेवी संनिज्झेण इमस्स सिटिस्स। सुविसुद्धबंभसिरिणो सूला कमलासणी भूया // 225 // वावारिया य तेहिं कंठे एयस्स तिक्खकरवाला / जायंति कुसुममाला परिमलगुणलुद्धअलिजाला / / 226 // दट्टण पाडिहरं हरिहरहेरम्बदेवयाणं व / ते आरक्खियपुरिसा गन्तुं कहयन्ति नरवइणो | // 227 // तो राया विम्हइओ वियासिनीलोप्पलाहदिट्ठीओ। वित्थारिन्तो करिणीखंधारूढो दूयं एइ // 228 / अह तत्थ गओ तुरियं सिद्विस्स पभाकरस्स तेएण / दोसामासित्तेणं राया कन्ति परिहरेइ // 229 // अवगूहिऊण निहुयं राया महुक्खरं पयम्पेइ / सिद्विसुदंसणनिहि ! न तं मओ अप्पमाहप्पा / / 230 / / असमक्खियकारित हियए करवत्तय व दारुम्मि / मह सरइ निरन्तरयं दुहावहं किमिह जम्पेमि ? // 231 / / अहवऽन्नाणमहागहगहकल्लोलेण कवलियं मझ। पुनिमपञ्चनिसाए सबंपि विवेयविहुविवं // 232 // तो पुरिसुत्तम ! किजउ एसऽवराहो खमावहो मज्झ / जं सि सुदंसणधारी जए पसिद्धो तुमं चेव // 233 // एवं खमाविऊण करिणीखंधमि तं समारूढं / परिवारेण समेओ निययावासं निवो नेइ // 234|| न्हविऊण चंदणेण विलित्तगत्तो सुदंसणो तसो। मणिभृसणरुहरंगो देवंगदकूलनेवत्थो // 235 // साणुणयं सप्पणयं वीसत्थो पुच्छिओ नरिंदेण / सयलंपि कहइ निहुयं अणुहूयं स्यणिवुचन्तं // 236 // अभयाए देवीए कुद्धो रायावि निग्गहिउकामो / पाय AAAE RI 11 Page #130 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 117 गृहीतायां दीक्षायामुपसर्गे धीरत्वम् / CASSACRECITIES * | वडिएण सुइरं सुदंसणेण तु पडिसिद्धो / / 237 // सीलपहंमि अमुढो सिंगारियहत्थिखन्धमारूढो / लद्धनरिन्दाएसो विरइय- सुररायसमक्सो // 238 // कयमंगलोवयारो महिड्डिसामंतमंतिपरिवारो / पडिपयजणजोकारो विचित्तबाउज्जझंकारो // 239 // परिहरियाहंकारो दिसि दिसि पसरन्तकित्तिवित्थारो। सुविहियनामुच्चारो भयणीसमगणियपरदारो // 24 // एस सुदंसणसिट्ठी सइ सुमरिजन्तपञ्चपरमेट्ठी / अस्थिजणाणं आसं पुरिन्तो जाइ आवासं // 241 // अभयावि इमं सोउं उबंघेऊण हणइ अप्पाणं / परदोहकरा जीवा मरन्ति कीवा सयं चेव // 242 // धाईवि मउन्भन्ता तुरियं गन्तूण पाडली पुत्ते / नयरे निवसइ सविहे गणिआए देवदत्ताए // 243 / / तत्थवि तिस्सा पुरओ सुदंसणं धुणइ पंडियाधाई / तह जह * गणियाएवि हु तस्सुवरि होइ अणुराओ // 244 // सिट्ठी सुदंसणोवि हु संविग्गो भवनिवासउद्विग्गो / सुहगुरुचरणविलग्गो संजममारं धरह धीरो // 245 / / गुरुकुलबासे रयणायरंमि परिसुत्तमेण अह सेण / पत्तं गीयत्थत्तं कमेण कुत्युहमणिप्पडिमं // 246 // पउमं व निरुवलेचो दरं परिचत्तसवअवलेवो / तवचरणसोसियंगो विहरइ सवस्थ निस्संगो // 247 // अह एगागिषिहारे पडिमं पडिवजिऊण विहरंतो / पाडलिपुत्ते नयरे पचो उज्जयविहारेण // 248 // गोयरचरियाइगयं तस्थ य दट्टण पंडियाचाई | मिक्खट्ठा हकारइ गणियागेहमि दंमेण // 249 // अणुकूलं तो पसरह सच्छेहि पएर्हि अह अतुच्छेहि / | सा देवदत्तगणिया लावनतरंगिणी बहुहा / / 250 // किंतु मुणिंदे पक्ष्यवरंमि पविकढिणधम्महिययंमि / अवगयस्यसंभारे न हवा मेओ मणागपि // 251 // उवसग्गन्ती गणिया तेणं तिणपूलय व सा गणिया / तं चुजं जं तीए न तत्थ मयणानलो अलिओ // 252 // सायं तीए मुको उजाणं जाइ सो महासन्तो / तत्यवि अभया पिच्छइ तं वन्तरदेवया 16ACE5CARALX 117 // Page #131 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सुदर्शन श्री बचन्तीप्रकरणइतिः / // 118 // GARCANANAGAR हूया // 253 // सा तं तत्थ कयत्थइ सुमरन्ती पुत्वजम्मवुत्तन्तं / जेणाणुगामिवरं रिणं व जीवाण संसारे // 254 // उवसग्गपबन्धेहि निरंतरं तयणु कीरमाणेहिं / अभयाए देवीए कुद्धाए अइविरुद्धाए // 255 // न य तस्स मणोवित्ती | मुनिवरस्य उवसमरससारिणी पसप्पंती | धम्मज्झाणारामे थक्कइ बहु मूलगुणहेऊ // 256 // तत्तो अपुवकरणे आरूढो खवगसेदिनिस्सेणिं / प्राप्ते गिण्हइ कुसुममुज्जलमक्खयमहक्खायचारित्तं / / 257 // अह अभयाए दोसं अन्नाणमहंधयारहरणेण | अवणिन्तो निहणतो केवलनाने अन्नजोईण उज्जोयं // 258 // केवलनाणदिणिदो सुक्कझाणोदयम्मि अयलम्मि / लोयालोयउज्जोयं करेइ उइओ मुणिन्दस्स | धर्मदेशना। | // 259 // तयणु सुदंसणमुणिवरगुणेहि आयड्डिया महिड्डिया / देवा कुणंति केवलनाणमहं भत्तिसत्तीहि / / 260 // तथाहि गधोदयसित्ताए धरणीए पंचवनकुसुमाणं / वुद्धि मुयंति सरहससीहनिनाएण वयन्ति // 261 // उक्किकलयलेणं उप्पायनिवायअंगहारेहिं / पूरन्ति चउक्काई दिसासु तुट्टन्तहारेहि // 262 // नजइ ओसारिन्ति य चेलुक्खेवेण कम्मरयपडलं / बहिरिन्ति दसदिसाओ मंगलगंभीरतूरेहिं // 263 / / वायन्ति दुंदुहीओ सवणामयबुड्डिनेहलसहीओ / अइसुरहि-18 परिमलाउ ठाविन्ति य धूवघडियाओ // 264 // देवंगणाहिं सद्धिं तग्गुणबद्धाई विविहगेयाई / गायन्ति महुरमहरं वीणाज्झंकारसाराई / / 265 // तत्थवि ठवन्ति देवा कंचणकमलं फुरंतकिरणोहं / उजोइयसबदिसं केवलनाणं व मुत्तिधरं // 266 // उवविसह तस्स उवरि केवलनाणी सुदंसणमुणिन्दो | तत्तो सम्भृयगुणं थुणन्ति देवा सबहुमाणं / / 267 // जयसि तुम | मुणिपुंगव ! जयंमि एयंमि दिवमाहप्प ! / जेण तए निद्दलिओ दप्पो कन्दप्पसप्पस्स // 268 // रागाइयाण सुमणोवइरीणं PJ जं हणेइ माहप्पं / तुह दंसणं सुदंसण ! सुदंसणं चेव थुणिमो // 269 // चुजं संवरभरिए तुमंमि सच्छासयंमि न मिलाणं / // 118 // Page #132 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 119 // व्यन्तर्यभयापंडितागणिकादीनां प्रतिबोधनम् / ACASCORECALCACARALL वामाहि हिमाणीहिं सील कमलं व निल्लेवं // 270 // तुह साहससाहारो धम्मझाणेण मंजरिजन्तो। नवि किंचिवि विड- झिओ नारीहिं धूमरीहिं व // 271 // एयं मुणिन्दगुणगणरयणायरसंथवेण संतुट्ठा / तप्पुरओ उवविट्ठा उवएससुहेसिणो देवा // 272 // अन्नोवि नयरलोओ विम्हयरसपसरपल्लवियवत्थो / आगंतूण मुर्णिदं तं वंदित्ता तत्थ आसीणो॥ 273 // तो तीए परिसाए पुलयंकुरनियरपयडहरिसाए / एस सुदंसणकेवलनाणी धम्मकहं कहइ // 274 // तहाहि-मोहन्धयारपोरे कारागारे इमंमि संसारे / जीवा कम्मल हुत्तं अहापवित्रण करणेण / / 275 // लद्धण रागदोसप्पगिट्ठपरिणामगंठिमेएण / पिच्छन्ति कहवि जिणरविवयणपहामंडलं केवि // 276 // पत्ते तम्मिवि मवा संसारनिवासदुक्खदन्दोलिं / सुमरन्ता जइ इच्छह सिवपुरवरवाससुहसिद्धिं // 277 // सुविसुद्धनाणदंसणचरणसुरुवंमि सिवपुरपहंमि | तो भो पयट्टियत्वं निरंतरं अप्पमत्तेहि // 278 // पमाएण जओ सूरी संपन्नसुयकेवली। वसिजाऽणंतकाएसु गंतकालट्ठिइगओ // 279 // एस पमाओ रुद्दो जम्मि जडाणं हवेह दिढबन्धो / जम्मि य भवपञ्जाओ जायइ उग्गत्तणं पत्तो // 280 // वालुयासिन्धुनिम्मग्गवडबीयं व दुल्लहं / को? माणुसत्तं सम्पप्प पमाइजा वियक्खणो // 281 // नाणे दंसणचरणे पत्तेयं परिहरेह अइयारं। अट्ठपयारं जम्हा होह विसुद्धी परा तेसिं // 282 // तेहि विसुद्धेहि तओ असेसकम्मक्खओ हवइ तेण / केवलनाणुप्पत्ती गच्छह सिद्धिपुरि तत्तो // 283 // तत्थ असरीररूवा अणन्तवरनाणदंसणसरूवा / जीवा अणन्तकालं चिट्ठन्तऽजरामरत्तेण // 284 // अह सबविरहरूवे सिवपुरमग्गमि गन्तुमसमत्था / तो जिणवरिन्दमणियं सावयधम्मुञ्जमं कुणह // 285 // पडिवजह संमत्तं मिच्छत्तमहन्धयारदिणनाहं / सबासि आसाणं उज्जोओ जायए जेण // 286 // अरिहं देवो सुगुरू विसुद्धचारित्तलच्छिसंपन्नो / तत्तं जिणिंद Page #133 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती ॐ- मोक्ष प्रकरणवृतिः / // 120 // CRECRUAGARIE भणियं जीवाइयं न अमेति // 287 // इइ सद्धासंमत्तं संझाइकलंकपकनिमुक्का / परिपालह दिढचित्ता रसा जह सिसिरमणीए | केवलि॥ 288 // आसन्नसिद्धिया पुण जहसन्तिपवनदेसविरइवया / उक्संतमोहजोहा पालह सीलं जओ मणियं // 289 // सन्वेसि सुदर्शनस्य अइसयाणं रयणाणं आगरो इम सील / जं तेण रंजियमणा देवगणा दिति संनिझं // 290 / / सदगुणभूसणेणं सीलेणं अलंकियाण जीवाण / निरुवयसोहग्गसिरी सयंवरा एइ अणुरत्ता // 291 // सो सच्च चिय सामी बुच्चइ सो चेव इह महातेओ / जो सील गमनम् / मुबहतो अमोहसत्तिं पयासेइ / / 292 // पंचिन्दियदमणेणं तं पुण सील हवेइ इह विमलं / तो पंचिन्दियतुरया दमियत्वा सुगुरु-18 सिक्खाए // 293 / / जओ-अवरावरविसएK वियरन्ता सीमलंघणुज्जुत्ता / दुईतिन्दियतुरया भवकंतारे भमाडिन्ति // 294 // कोहाइकसायाणं दुरन्तदुक्खाणं खाणिभूयाणं / पसमाइगुणञ्जणओ निग्गहणं कुणह जं वुत्तं // 295 // गुरुवयणमन्तज्झाणं करेह तह कहवि भवसुसाणंमि / कोहाइणो कसाया जहा पिसाया न नद्दन्ति // 296 // ताणं च निग्गहेणं केवलसिरिसिद्धिभायणं जीवो / तिलोयमत्थयत्थो परमाणन्दं लहइ निच्चं // 297 // इच्छाइदेसणाए दिणयरपसरन्तरुइसणाहाए / बुज्झन्ति मोहनिद्दावगमेणं पाणिणो तत्थ // 298 // अभयादेवी पंडियधाई तह देवदत्तगणिया य / उवसन्ता पडिबुद्धा खामन्ति सुदंसणं साहुं / / 299 // सोवि सुदंसणसाहू भवियणकूमुयाण बोहणे चंदो / तारयजोईणुवरि अकलंको सिवपयं पत्तो // 30 // शीलप्रशंसायां सुदर्शनकथानकं समाप्तम् // सबत्थसिद्धिहेऊ संसारसमुद्दतारणे सेऊ / होइ तवो कायवो वज्झो अन्मिन्तरो चेव // 1 // भावेण मंगलं सो असेसमाइसल्लनिमुको / सिद्धिवहुहियपहारं विहेइ नीवं गुणाहारं // 2 // जो मणियं-हुयासणेण तत्तस्स कणगस्स जहा मलो / 120 // ASCIAGNESCENDAR OCRECAS Page #134 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 121 // A% तपोधर्म स्वरूपम् / निस्सेसकम्मनिम्महण लीया य वज्झो तवा समिणा परसुविहाण, %94%ERCALARAMA5 विद्धसए तहा पावं तवेण खलु जन्तुणो // 3 // सवेसि पयडीणं परिणामवसेण उक्कमो भणिओ / पायमनिकाइयाणं तवसाओ निकाइयाणपि // 4 // सोसंतो जहभावं पोसंतो अहियतेयसंमार / जिट्ठसुइमावललिओ तवो पयावेण परिकलिओ / / // 5 // परमहिमाणुगएणं तवसा डझंति कम्मकमलाई / सचं चिय चित्तं पुण जं दोसा जति लहुभावं // 6 // इहलोए चिय अणिमाइयाण सिद्धीण वरपुरन्धीण / होइ तवस्सऽणुभावा आयडी गुणमहडीणं // 7 // तं पुण जिणेहि भणियं धज्ज्ञ निस्सेसकम्मनिम्महणं / छबिहमऽणंतसिवसुहनिबंधणं होइ जीवाणं // 8 // मणियं च-"अणसणमूणोयरिया वित्तीसंखेवणं रसञ्चाओ। कायकिलेसो संलीणया य वज्झो तवो होइ // 9 // आहारगिद्धिगिरिवरचूला जीवाण झत्ति विहडेइ / अणसणमाइतवेणं असणिनिवारण सयखंडं // 10 // कायकिलेसेणिमिणा परसुविहाणेण जीवतणुमुच्छा / वल्ली छिज्जइ मूला सिवपहरोहिक्कदल्ललिया // 11 // मणवयणकायजोगा धम्मज्झाणम्मि जस्स संलीणा / सो झत्ति बद्धलक्खो दक्खो मुक्खं पसाहेइ // 12 // अभिंतरपि भणियं जिणेहि वरनाणदंसणधरेहि / भवाण सुद्धिहेऊ पच्छित्ताइतवच्चरणं / / 13 / / उक्तं च-"पायच्छितं विणओ वेयावचं तहेव सज्झाओ / ज्झाणं उस्सग्गोवि य अभिंतरओ तवो होइ" // 14 // पच्छित्तं सुपवित्तं आलोयणमाइदसविहं धुत्तं / पावगिरिदलणदक्खं सच्चं रंजइ सहस्सक्खं // 15 // इन्दियकसायअव्वयदुकयं सल्लइ मणम्मि जीवस्स / तं जइ सुगुरुसयासे जीवो आलोयए सम्मं // 16 // सो सल्लमुद्धरतो अजववजेण कूडसंघडियं / दलिऊण पावमयलं सिवमग्गे जाइ अक्खलिओ / / 17 // सिवनयरम्मि पविट्ठो अणन्तवरनाणदंसणगरिडो। सुहसायरमज्झत्थो अणन्तकालं रहह सच्छो // 18 // इहलोएवि य सरलो सलं तं जो कहेइ निवझाए / सो होइ कलिहमल्लो जहा तहा मोमाभागी ACCIRCRECCORE 435 Page #135 -------------------------------------------------------------------------- ________________ नयन्तीप्रकरणभूचिः / // 122 // // 19 // लावलेवलित्तो चिट्ठो पुट्ठोवि गभंगेहिं / अंगे दुई निगृहइ मच्छियमल्लो व सो मरइ // 20 // तहाहि-- है सरलतायां अस्थि इह जंबुद्दीवे दक्खिणभरहेत्थ मज्झमि खण्डे / रम्मो कुंकुणदेसो जत्थ सिरीणं सयावासो // 21 // आरा. फल्लिहमल्लमुजाणेसुं जो सइ विलसन्तनागपूगेहिं / अइसायसेससालो रेहइ पायालसग्गो व // 22 // परिमलमिलन्तअलिउलझंकारच्छ- दृष्टान्ते लेण इन्तलच्छीण / कमलागरेसु जत्थ य मणिमयनेउररवोग्गारो // 23 // जत्थ य चम्पयतरुणो परिमललुद्धालिजाल- सोपारकबुसमग्गा / परिणयफलभरजंबूकाणणलच्छि विडंबन्ति // 24 // रामा जत्थारामा रमणीया तिलयपत्तवल्लीहिं / पुप्फ- नगरेशफलभोगसुहया सजञ्जणनयणकमणीया / / 25 // तत्थत्थि वरं नयरं कुंकणसिरितारहारसोहग्गं / सोपारयं पुरंदर-18 सिंहरथपुरं व रंभाविलासिल्लं // 26 // सिरिरिसहसामिमंदिरकंचणकलसोल्लसंतकिरणेहिं / जं कल्लाणमयं चिय दुहावि विबुहा राज. पसंसन्ति / / 27 // जं अंतो बाहिपि य सालेहिं समुन्नएहिं सोहेइ / घणदलसच्छाएहिं सुयन्धकुसुमोवसोहेहि // 28 // वर्णनम् / सिरिवयरसामिपेसियवहरविणेयाओ ति दुभिक्खे / नायलचंदुद्देहियनिव्वुइगच्छा इमे जत्थ // 29 // तम्मि पुरे सीहरहो राया होत्थाऽरिकुंभिनिद्दलणो / कितीहिं जो विभूसइ आसा मुत्तावलीहिं व // 30 // सो मल्लजुद्धदंसणसुहलालसमाणसो सरयकाले / जुज्झन्ताणं ताणं जयवंताणं कुणइ दाणं // 31 // उज्जयणीनयरीए वत्थवो अट्टणो महामल्लो / सो पइवरिसं मल्लच्छणम्मि सोपारयं एइ / / 32 / / जिणिऊण अवरमल्ले रायपसायं महत्थयं पप्प / सो गंतूर्ण उज्जयणि विलसइ बहुलोयपरियरिओ // 33 // कालेण जराजन्जरमबलसरीरं तयं जणो मुत्तुं / गच्छइ इच्छियट्ठाणं तो चिंतइ अट्टणो मल्लो // 34 // सबोऽवि ताव सेवा विणएणं जाव सिज्झइ सकजं / परमत्थओ न नेहो कस्सवि कस्सोवरिं अस्थि // 35 // ता अप्पणो P // 122 // ALA Page #136 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 123 // पुनः AAAAAAAA% सरीरं सबलं सपरकम इमं जाव / ताव विढप्पइ अत्थो अत्था अस्थिजणो होइ // 36 // ता जाव अस्थि दविणं मह किंचिवि अट्टणतेण किजउ कहिपि / दिवरसायणजोगो जेण पुणो होइ तारुनं // 37 // सामच्छिऊण एवं बच्छदेसम्मि अट्टणो मल्लो / मल्लस्य वयइ कोसंबीए सम्मं च रसायणं काउं // 38 // भूमिहरए पविट्ठो चिट्ठइ सो जाव हुंति छम्मासा / आरुढो तारुनं तो तेण रसायणेणेसो // 39 // सपरक्कम सतेयं सबलं नाऊण अप्पणो कार्य / सोपारयम्मि गच्छइ स मल्लजुद्धच्छवुच्छाहो // 40 // तारुण्यतो तेण कए जुद्धे दिढखंधेण महापबंधेणं / विजिएवि हु पडिमल्ले राया वियरेइ न पसायं // 41 // सामंताईवि जणो प्राप्त्यर्थ रंजियहिययोवि देइ नहु दाणं / सीहरहम्मि नरिंदे अवि साणंदे अदिन्तम्मि / / 42 // तो अट्टणो विचिन्तइ विसट्टकन्दुट्ट- रसायणलोयणो वेस / सीहनरिंदो दाणं न देइ अबो किमयंति // 43 // हुं नायं चिय जमहं पत्तो तारुनयं सलावन्नं / तं एस प्रयोगः। महाराओ पञ्चभिजाणइ न मं सम्मं // 44 // ता जाणावेमि निवं अप्पाणं गीइयं पढेऊण / इय निच्छिऊण स पढइ महुरगहीराइ वाणीए // 45 // साहह वणसउणाणं साहह सउणावि भो इह वणाणं / विजिओ निरंगणो सो अट्टणेण निक्खित्तसत्थेण // 46 / सोऊणेवं राया विम्हयपप्फुल्लनयणनलिणजुओ / मुंचा सुवन्नवोट्टि तुहि मोति व पयडितो // 47 // अन्नेवि तओ सामंतमंतिसेणाहिवावि पुरलोया। मणिमुत्ताहलदेवगवासवरिसेण वरिसंति // 48 // उजेणीनयरीए लद्धट्ठो अदृणो तओ जाइ / चिंतइ य गए पुणरवि तारुन्ने को ? मह सहाओ // 49 // लद्भुणेमं पुरिसं तरुणं बलसालिणं कुलुप्पन्न / पुत्तताए पडिवजिऊण मल्लं करिस्सामि // 50 // सोरट्ठम्मि य देसे खेत्तणुभावा सुणिजए एवं / पुरिसा गरिद्वगत्ता हुन्ति बलिट्ठा सुदिढसत्ता // 51 // एवं सो चिंतंतो भागे एगम्मि तो सुरद्वाए / भरुयच्छसन्निहाणे अकालखेवेण संपत्तो // 52 // / D // 123 / / SASARASWARA Page #137 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती प्रकरणवृतिः / फल्लिङ्मल्लमच्छियमल्लयुद्धं सोपारके नगरे। &I // 124 // A%ASAGAR तो तेण अट्टणेणं नामेण दरिल्लवियागामो। दिट्ठो हलिओ खेत्ते वाहतो लंगलं एको // 53 // वामकरगहियपवयणहलरासी दक्खिणेण फलिहीओ। उक्खिणइ वेगमगं अकुणंतो मत्थए चित्तुं // 54 // सविहे तत्थाऽऽवासइ तरुणो हिट्ठा निरिक्खिउं तस्स / आहाराइचिट्ठ हिट्ठो तो अट्टणो मल्लो // 55 // अह तस्स एह भत्तं पत्थो कूरस्स कंजियघडो य / छच्चं च भजियाए भुत्ते पिच्छेइ नीहारं // 56 // संवट्टियं पलोइय संभासह एस करिसगं एयं / एरिसयं तुज्झ बलं तो किं वाहेसि ? पुत्त ! हलं॥ 57 // जइ होसि मज्झ पुत्तो अपडिमल्लो तुम महामल्लो / लच्छीसहिओ भोगोवभोगसुहिओ सया होसि // 58 // जं भणसि तमहं करेमि किं पुण कुडम्बयं मज्झ / कहमिह सुहियं होही ? इय जपइ करिसगो तयणु // 59 // तो अट्टणेण भणियं जणणीपमुहं कुडम्बयं तुज्झ / दाऊण बहुं कणयं अहं करिस्सं अदालिदं // 60 // पडिपन्नपुत्तभावो तो एसो अट्टणेण उज्जेणिं / निओ वमणविरेयणअभंगणमद्दणाईहिं // 61 // उवयअिसे विविहेहिं सिणिद्धआहारओसहगुणेहिं / उवचियअंगोवंगो सुसिक्खिओ मल्लजुद्धम्मि // 62 // विक्खाओ नयरीए मज्झे मल्लाण फलिहमल्लो त्ति / सीहरहेणवि रमा मच्छियमल्लो दिढो दुविओ // 63 // तचो कत्तियमासे नयरे सोपारयम्मि मल्लच्छणे / अट्टणमल्लो सद्धिं गच्छा सो फलिहमल्लेण // 64 // तयणु नरिंदे नरवाहणम्मि सिंहासणम्मि आसीणे / पविसंति रंगमज्झे मच्छियमल्लो फलिहमल्लो // 65 // तत्तो जुझंताणं नियुद्धकुसलाण ताण दुण्डं पि / वट्टइ महापबंधो पढमे दिवसम्मि चिरकालं // 66 // करताडणेण गयणं गजइ पयपायकंपिया पुहवी / धावणदेवणवग्गणकसरियाईहिं बंधेहि / / 67 // जुद्धं तं संजायं | जेण सो सयलपेच्छयो लोओ। चित्तलिहिओ व थंभियमुच्छियभूयो व संजाओ // 68 // तत्तो एको अजिओ अबरो CAREERACK M // 124 // Page #138 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 125 // %E4 -XE फलिहमलजये महार्यदानम् / %5+4+4+ अपराजिओत्ति दुण्डंपि / रायाएसेण सए सए गिहे ताण गमणम्मि // 69 // अट्टणमल्लेण तओ नियपुत्तो पुच्छिओ जहावत्थो / किं तुह देहे वाहइ ? सच्च सम्म मह कहेह / / 70 // तो रिउमइणा तेणं कहिए अंगमि सल्लयं तम्मि / अब्मं. गिऊण तत्तो सम्म संवाहिओ तेण / / 71 // तह कहवि जहा जाओ पुणन्नवो एस फलिहमल्लवरो। मच्छियमल्लोवि निवाइटेहिं अंगमद्देहि / / 72 // बहु पुच्छिओवि न कहइ सल्लं तं किंपि अंगंमि / अइगरुयगवपवयसिहरारुढो महामूढो / / 73 / / बीयम्मि दिणे तत्तो ताणं दुहं निजुद्धसंरंभो / रंगमि तहा पसरइ जह रंगमओ जणो होइ // 74 // कमलाण व करपसरो जयविजयाणं वियासणो ताणं / सूराणं तोसमयं वित्थरिओ सोरभुग्गारो // 75 // तत्तो निवेण भणिए ताण मल्लाण गडयसंवरणे / नियनियट्ठाणे गमणे दुहकहणे फलिहमल्लेण // 76 // तो अट्टणेणवि कए अभंगणमद्दणाइउवयारे / होइ पुणनवदेहो सल्लस्स निवेयगो मल्लो / / 77 / / मच्छियमल्लो न कहइ निवपेसियअंगमद्दयाण पुरो। तो अंबाडियमंगं अच्चत्थं अणुवयारेण // 78 // तइयम्मि दिणे मच्छियमल्लो रंगस्स मज्झयारम्मि / वयसाहठ्ठाणेणं निचिट्ठो चिट्ठए धणिय // 79 // पेच्छगलोओ चिंतइ चिट्ठइ किं ? एस संडिओ एवं / जो अतुलियबलकलिओ अबावारो कहं ? सो वि // 8 // नायं च अट्टणेण कार्य अंबाडियं वहइ एसो / तो नियमल्लो भणिओ वच्छ ? तुम जाण फलिहित्ति / / 81 // तस्स सुओ तो सहसा सुकढिणहत्थग्गहेण सुदिढेण / मच्छियमल्लस्स सिरं तोडइ सो सालिसीसं व / / 82 // तो जाओ जयवाओ राओ तुट्ठो य फलिहमल्लस्स / वियरइ दाणं भूसणमणिमोतियकणगमाईणं / / 83 / / अनेवि तत्थ राणयमंडलियासेसनायगजणोधा। सयसहस्सलक्खमाणं वियरंति महारिहं दाणं // 84 // धवलजसभोगभागी जाओ भुयंगिन्दसेससारिच्छो / सत्थो जो निय 66COVERESAX 3 Page #139 -------------------------------------------------------------------------- ________________ विनये . बी बपन्ती दृष्टान्तः। वृतिः / // 126 / / ॐॐॐॐ दा अंगे सल्लं तं कहइ पियपुरओ / / 85 // मिच्छावलेवलित्तो न कहइ सन्नो वि जो पुण ससल्लं / स लहइ मच्छियमल्लो इव संहारं सधिक्कारं // 86 / / नाऊणेवं सुहगुरुपुरओ सुद्धिं समीहमाणेण / दुक्कयं निवेइयव्वं लज्जामयनियडिरहिएण // 87 / / उक्तं च ।।-"जह चालो जंपंतो कजमकजं व उज्जुयं भणइ / तं तह आलोइजा मायामयविप्पमुक्को उ" // 88 // दसविह पच्छित्तेण तवतवणेणं फुरंततेएणं / अइनिविडजडिमभावोऽवि मिजए इत्थ किं ? चुजं // 89 // द्वाणमुत्तरुत्तरमेयम्मि तवम्मि लहइ किल हंसो / तं पाडल व सुमणो बियासललियो तहिं होइ // 90 // फलिहमल्लकथानकं समाप्तम् / / गुणरयणायरगुरुयणपूर्य धन्ना कुणंति भावेण / विणएण देवतरुयरदुल्लहकुसुमोवयारेण // 1 // सिवपुरपहम्मि अक्ख| लियगमणमणा चूरयंति विबुहिन्दा / विणएणं कुलिसेणं अट्ठमए पवए गरुए // 2 // विणओ ही मूलबन्धो जिणिन्दधम्मम्मि कप्परुक्खम्मि / जेणेह झत्ति पसरइ सुयक्खंधभोगसंपत्ती // 3 // भणियं च // विणयन्नुयम्मि सीसे दिति सुर्य सूरिणो किमच्छरियं ? / को वा न देइ भिक्खं ? अहवा सोवनिए थाले // 4 // विणया नाणं नाणाउ दंसणं दंसणाओ चरणं च / चरणाहिंतो मोक्खो मुक्खे सुक्खं अणाबाहं // 5 // निजंति जेण निहणं तवेण कम्माई इह विसेसेण / सो विणओ वनिजह मणवयकायेहि कायद्बो // 6 // जो होइ विणयसीलो पुरिसो इह कोहलोहनिम्मोक्को / सो लहइ उत्तरुत्तररिद्धिं संजमसिरिं सिद्धिं // 7 // विणयंगओ सुपुरिसो पुरिसोत्तमसंगमेण दियराओ। दिवगई होइ जहा विणीयकुलपुत्तओ सिद्धो // 8 // तथाहि जंबुद्दीवे दीवे भरहवासम्मि / दसदिसिपसिद्धनामो आसी हिमहालओ गामो // 9 // माइपिऊणं तत्तो एगो कुलपुत्तओ तहिं होत्था / सो सरलमणो चिन्तइ लहुकम्मो मज्झ पियराइं // 10 // एयाइ देवयाई नमसणिजाई वन्दणिज्जाइ / RESEKIS545% 16 Page #140 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 127 // 645OCCASSECCASIX मणवयणकायविणयं करेइ सो ताण पुन्नट्ठा // 11 // उक्तं चान्यत्रापि // "दो चेव देवयाई माया पियरो य जीवलोगम्मि। मातृपिततत्थवि पिया विसिट्ठो जस्स वसे वट्टए माया // 12 // " सेस व सिरठियाए निचं चिय पियरदेवआणाए। न हवइ तस्सु- | विनयादिवसग्गो सज्जइ सबो सुयणवग्गो // 13 // पियराणं विणएणं परमहिमेणं पवड्डमाणेणं / कुंदकलिय व उज्जलकित्तीओ तस्स प्रवृत्तकुलवियसन्ति // 14 // संवण्णणेणं लोए तह हवेइ सोहग्गं / नारायणि व लच्छी जह तम्मि समेइ साणन्दा // 15 // जम्मि पुत्रकस्य कुले कमले इव नालगुणेहिं पवड्डमाणेहिं / होइ अखंडं वित्तं तम्मि सिरी वसइ किं चित्तं? // 16 // उक्तं च // "गुरवो विनययत्र पूज्यंते यत्र धान्यं सुसंचितं / अदन्तकलहो यत्र तत्र राजन् वसाम्यहं // 17 // " विणयावजियहियओ लोए जो अहि- विषया यपक्खवाओ य / पुरिसोत्तमलच्छीवि हु गरुडस्सवि तस्स सविहम्मि // 18 // पियराणं जो विणओ सो विणओ फलभरेण विचारणा। कप्पतरू / जम्मन्तरसमन्जियपुन्नाणं होइ जीवाणं // 19 // तह निक्कारणवच्छलपियरजणो होइ दुप्पडीयारो / तविणओ उचिय च्चिय सम्मं विबुहेहिं कीरन्तो // 20 // भणियं च // “दुःप्रतिकारौ मातापितरौ स्वामी गुरुश्च लोकेऽस्मिन् / तत्र गुरुरिहामुत्र च स दुष्करतरप्रतीकारः / / 21 // " तं वच्छ कुलपईवो सगुणदामालोऽसि नेहभरपत्तो / अइसाइकजलग्गो धवलयसि कुलं तयं चित्तं // 22 // एवं पसंसेजंतो ससयणसुयणेहि सव्ववयणेहिं / जणयजणणीण विणयं करेइ कुलपुत्तओ धणियं / / 23 // अह ऊसवम्मि कम्मिवि निमन्तिओ गामनायगो पिउणा / एइ गिहे कुलपुत्तयजणओ विणयं कुणइ तस्स / / 24 // जणयकयं पडिवनिं ददृणं तस्स गामसामिस्स / चिन्तइ सरलसहावो विणीयकुलपुत्तओ एवं // 25 // मह पिउगोवि हु गुरुओ एसो है देवो विसेसपुजो य / तो होइ बहु पुन्नं सेविजन्तम्मि एयम्मि // 26 // तयणु विणयेण जणयं आपुच्छइ ताय ! किं इमं D127 // 4%ECHANICAL Page #141 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 128 // RSCIRECCASIC देवं / तुम्हाएसेण अहं सम्मं विणएण सेवेमि ? // 27 // पुट्ठो तणएणेवं जणओवि चिन्तह निउणं / महपुत्तो गुणवन्तो | विनयेन रायकुलावजओ होउ // 28 // उक्तं च // "दृष्टव्यं राजकुलं दृष्टव्या राजपूजिता लोकाः / यद्यपि न भवन्त्यर्था भवन्त्यनर्थ- प्रसन्नीकृता प्रतीकाराः" // 29 // एएण सुवंसेण आरुढगुणेण नमणसीलेण / साहिजइ परलोओ मह पुत्तेणं सुचाएण // 30 // एसो ग्रामपतिहु दाणवरओ सामी ओलग्गिओ सुहं देइ / इयं चिंतिऊण पिउणा भणिओ सेवसु इमं वच्छ ! // 31 // आइट्ठो जणएणं सामन्तविणीयकुलपुत्तओ तओ निच्चं / सेवंतो विणएणं पसन्नदिढि कुणइ सामि // 32 // तयणु निरंतरमहिए सामिपसायम्मि मण्डलेखीरजलहिम्मि / एइ सयंवरलच्छी कण्हस्स व तस्स गेहम्मि // 33 // अह सोवि य गामसामी य महं- श्वराः कुलतसामंतदयवयणेण / कुलपुत्तएण सद्धिं गच्छइ तुरियं पुरे तस्स // 34 // तो पुरपरिसरवरआरामुजाणकूववावीहि / दिद्वेहि लापुत्रेण / विम्हइओ चिंतइ कुलपुत्तओ एवं // 35 // जस्स किल परिसरोवि य सोहं सग्गंगणस्स लंघेह / तं पुरवरं पुरंदरपुराओ अहियं अहं मन्ने // 36 // पिच्छंतो पुरलच्छि अणमिसनयणो विणीयकुलपुत्तो / रायकुलं संपत्तो द8 सामंतमइगरुयं // 37 // चिन्तइ विम्हियचित्तो एसो देवो महडिओ जेण / सेविजंते तेणं इमम्मि पुत्रं बहुं होई // 38 // सामच्छिऊण एवं आपुच्छिय गामसामिपियराई। ओलग्गह सामंतं तहा जहा कुणइ सुपसन्नं // 39 // लच्छी सामंतेणं सम्भं आराहिएण तातस्स / दिना जीए कीरइ गरुओ सपरेसि उवयारो // 40 // यमुहेणाहूओ सामंतो अह कयावि नयरम्मि। मंडलवइणो गच्छइ तेण समं सो विणीओवि // 41 // मंडलवइस्स नयरे सामंते अह कमेण संपत्ते / पुरपरिवारसमिद्धिं द8 चिंतइ विणीओवि // 42 // मंडलवइणो आणं सीसे सेसं व धरइ सामंतो। सिद्धिस्थिमिओ P128 // Page #142 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 29 // % विराजश्रेणिकमहाराज % सेवा %* नूणं एसो अहिओ महादेवो // 43 // तो पुच्छइ सामंत किमहं सेवेमि मंडलियदेवं ? / तुम्भेहिं अणुनाओ बहपुनोवञ्जणासत्तो // 44 // ता सामंतो मन्नइ एसो खलु मंडलेसपयसेवी / निम्मलसीलो सवं साहिस्सइ अम्ह कजाई // 45 // ता इह चिढउ एसो अक्खोहो लोहवन्जियविणीओ / इय भाविऊण भणिओ सेवसु तं मंडलमहेसं // 46 // मंडलवइवि दिढि पसायधवलं खिवेइ अह तम्मि / पेमपरवसलच्छीलसंतवरमालसोहिल्लं ॥४७॥अह तम्मि मंडले जे अन्ने य मंडलियसेवगा रिद्धा / तस्स वियरंति दाणं अणुणयकुसला जओ भणियं // 48 // "सुवर्णपुष्पितां पृथ्वीं विचिन्वन्ति त्रयो जनाः / सूरश्च कृतविद्यश्च यश्च जानाति सेवितुं // 49 // " अन्यदपि उक्तं-"विनयेन भवति गुणवान् गुणवति लोकोऽनुरज्यते सकलः / अभिगम्यतेऽनुरक्तः ससहायो पूज्यते लक्ष्म्या // 50 // " तम्मि य समये राया रायगिहे सेणिओ सुरिन्दु छ / रजं पालइ पइदिणं सुपवसंदोहसोहिल्लो // 51 // तस्साएसा मंडलवईवि कुलपुत्तएण तेण समं / रायगिहे सिग्धं चिय गच्छइ परिवारपरियरिओ // 52 // रायगिहे पायारं कणयमयं फुरियकन्तिसंभारं / दणं परिभावइ विणीयकुलपुत्तओ एवं // 53 // नूणं कल्लाणमओ सेणियराया महड्डिओ देवो / जस्स पुरे विसालो सालो कणगेण निम्माओ // 54 // सोहम्मसहासोहे अत्थानविप्फुरन्तकिरणोहे / अंडलियदंडनायगमहंतसामंतसंपुग्ने // 55 // रयणमयमउडकुंडलहारावलिविष्फुरंतसिंगारं / दर्से सेणियरायं मणिमयसिंहासणासीणं // 56 // मन्नइ विणीयपुत्तो एसो सामंतमंडलीवईण / पुञ्जो थिरप्पइट्ठो महप्पभावो महादेवो // 57 // पुन्नोवजणहेउं तोऽहं वड्डन्तविणयपरिणामो। पुचिल्लाण गरुयं देवं सेवे इमं चेव / / 58 // इच्चाइ चिन्तिऊणं एसो सेवेइ सेणियं रायं / विणयपुण्णउत्तमंगो मंडलवइणा अणुभाओ // 59 // चुजं पइप्पभायं अब्भहियरायपायसेवाए। कुवलयसहोय स्वीकृता कुलपुत्रेण / * HESARKE% Page #143 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बबन्तीप्रकरणपतिः / समवसृते वीरे कुल पुत्रकस्य हैं देवाधिदेव ज्ञानस्य प्राप्तिः। // 130 // राई नयणाई तस्स वियसंति // 6 // सवाणुगए गयणि व तम्मि निदोसयम्मि आसाओ / वसुपूरेणं पूरइ जंराओ तं तु अच्छरियं / / 61 // तम्मि विणीए कमलायरम्मि पुनोदयम्मि अच्छरियं / साणंदमिलतेहि अहोनिसिं सउणचक्केहि // 62 // मयवारणो य गरुओ एसो खलु विणयपरिणओ भद्दो / दालिद्दतडं मंजइ नियगोत्ते दाणरसपसरो // 63 // उजाणपालएणं अन्नदिणे पणमिऊण विनत्तो / अत्थाणत्थो सत्थो सहस च्चिय सेणिओ राया // 64 // तुम्ह नयरम्मि सामिय ! गुणसेलए चेहयम्मि उजाणे / वेभारसन्निहाणे समागओ जिणवरो वीरो // 64 // चउविहदेवनिकाया सविमाणा विहियदुंदुहिनिनाया। स्ययंति समोसरणं अवयरणं सबलच्छीणं // 66 // ता देव जिणिंदागमकल्लाणमहूसवेण अज्ज इहं / बद्धाविजह तुम्हे मंगलमालोवलंभेण / / 67 // इय विनत्तो अन्भुडिऊण गंतूण तदिसाहुसं / उल्लसियवहलपुलओ तो राया भणइ सकत्थयं // 68 // सिंहासणे निसनो सुपसनो पारितोसियं दाणं / आरामियस्स वियरइ अमउडसवंगलंकारं // 69 // सुपभायमज्झ सुदिणं रजं जम्मं च जीवियं सहलं / अवयरिओ गुणसिलए जं जइकप्पडुमो वीरो // 70 // तं रायगिहं नयरं कुणंतु पइगेहमृसिय| पडायं / कुंकुममिस्सियचंदणच्छडाहि सिचंतरायपहं / / 71 // दिसि दिसि चउक्कचच्चरपुप्फयरेहिं बहलियामोयं / कारानिहित्तक्खियबंधणमुच्चंतजियलोयं // 72 // तह उग्धोसह नयरे वीरजिणिंदस्स बंदणनिमित्तं / आगच्छह नायरया सुरिन्दसच्छहसमिद्धीए // 73 // आयसिऊणं एवं मजणभवणम्मि वच्चइ नरिंदो / न्हाओ कयवलिकम्मो दिवालंकारसिंगारो // 74 // सेणियराया सिंगारियम्मि जयकुंजरम्मि आरुढो / जिणवंदणम्मि चलिओ अइयणचउरंगदलकलिओ // 75 // सो वि य विणीयपुत्तो विम्हियचित्तोवि चिन्तए एवं / तिहुयणकयपयसेवो वीरो देवाहिवो देवो // 76 // जे एस महाराया Page #144 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 131 // ВЕ З CROCOCCARRARIA तस्सेव वंदणत्थमुज्जुत्तो / सो वि जाणे अवयरिओ चउविहदेवेहि परियरिओ // 77 // तो धणियं धन्नोऽहं सहलं मह भगवता जीवियं च जम्मं च / जं जणियजणाणंदं वीरजिणिंदं नमंसिस्सं // 78 / / अह तस्स गयणमग्गे आइच्चाणं विमाणकोडीहिं / कृता हवइ य माणससरवरविम्हयकमलायरोल्लासो // 79 // गुणसिलए उजाणे ओसरणे जिणवरस्स दिदुम्मि / पंचविहाभिगमेणं वैराग्यपविस सेणियनरिंदोवि / / 80 // तिपयाहिणी करित्ता वीरजिणिदं विसुद्धभत्तीए / सक्कथएणं बंदइ आसीणो उचियद्राणम्मि वाहिनी // 81 // तो करुणामयसारणिदिट्ठी सिरिवद्धमाणजिणचंदो / भवियणकुमुयाणंदो धम्मकहं कहइ परिसाए // 82 // तथाहि // देशना। भो भो भवजणा दुहोहसलिलुप्पीलम्मि मोहोदया-वत्ते जम्मजरातरंगबहले नायावयासंकुले / लोहागाहतलमयायलकुले कुग्गाहचक्काकुले कोहाडंबरवाडवानलजलजालावलीदुग्गमे / / 83 // मायावित्तवियाणपुंजगुविले दुव्वासणासेवले, ईसा-18 मच्छरकालकूटकलिए कंदप्पकुंभीरए / इट्ठानिद्ववियोगरोगवसणवासंगमीणायरे, संसारम्मि महनवम्मि दुल्लहा बोही सुहाणं 15 निही // 84 / / जेणाऽणाइभवम्मि कम्मकलुसो जीवो निगोयट्ठिई, मच्चोप्पत्तिपरंपरापरिणओ कालं अणंतं दिओ। पच्छा मूलनिगोयगोवि दुहिओ तम्मत्तकालो तओ, पत्तेएसु वणाइएसुवि गओ कालं असंखं पुणो // 85 // अत्ताणो विगलिदिएसु भमिओ संखेजकालं दुहं, कम्माण लहुयत्तणेण तिरिओ सन्नी असन्नी तहा / एवं एस अकामनिजरवसा निजिन्नदुक्कमओ, नूणं कोवि कहंपि माणुसभवं पावित्तपजत्तओ // 86 // छक्कायेसु अणंतपुग्गलपरावत्तेहि माणुस्सए, पत्ते | खेत्तकुलाइएसुवि तहा कद्वेण लद्धेसुवि / बुद्धी होइ न धम्ममग्गविसया भोगेसु गिद्धी पुणो, मोहंधाण जियाण जायइ सया एजंतदुक्खावहा / / 87 // होला धम्ममई तहावि सुगुरुसंगो न संपजए, लद्धे तम्मि जिणिंदसासणरुई धन्नेहिं पाविजए / D131 // -4 4+4+4+8+4= Page #145 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री *AR | श्रुत्वा जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 132 // जीए मिच्छमहंधयारहरणे आइच्चबिंबाइयं, संसारोहवहंतजीवविडविप्पालंबलीलाइयं // 88 // सम्मत्ते उपलंभगोयरगए चारित्तलच्छि विणा, द्वाणं सबदुहाण खिजइ कहं संसारदोगच्चयं ? / चिच्चा पुत्तकलत्तमित्तविसयं मोहं महापावयं, पवजं पडिवजिऊण सुहयं साहेइ सिद्धिं तओ // 89 // जेणेसा असईकडक्खतरला लच्छी मणोमोहनबल्लीगुंफसहोयरी पणयणी मुक्खपहे रोहिणी / बंधो बंधुजणो गुणेहि बहुहा संसारकाराहरे, भोगा रोगसगोत्तया असुईणो तारुभए भंगुरे // 9 // सामाग्गि सुकुलाइयाण दुल्लहं लहिऊण नच्चा भवं, दुक्खाणं खणिमेव मोक्खयसुहं अचंति एगतियं / हेउं तस्स जिणिंदसासणमिणं सो वि य सव्वायरा, निस्संगाण मुणीण पायकमलं संपप्प पत्तोजमा // 91 // चारित्तं पडिवअिऊण विणयं कुवंति जे सबहा, ते जीवा सुगुरुप्पसायवसओ सिद्धतपारंगया। सुक्कज्झाणयासणेण सहसा निद्दडकम्भिधणा पत्ता केवलनाणदंसणधरा सिद्धिं पुरि सासंयं // 92 // इय धम्मदेसणाए भवियणकुमुयाण चंदजुण्हाए / अवहरियमोहतिमिरा सिवपुरमग्गे पवजंति // 93 // तत्तो विणीयपुत्तो चिंतइ एसो जयत्तए देवो / देवाहिवो न अन्ने मज्झं विणयारिहो एस // 94 // इय चिंतिऊण हरिसप्पसरियरोमंचकंचुइगत्तो / विनवइ जिणं वीरं विणीयकुलपुत्तओ एवं // 95 // देवाहिदेव ! तुह पायसेवरसिओ भवामि अणवस्यं / विणएणं तिविहेणं सुकयमहं अजइस्सामि // 96 // तो भयवयावि भणिओ देवाणप्पिय अहासुहं तुज्झ / न विलंबो कायवो पियराईणं सिणेहेण // 97 // तत्तो विणीयपुत्तो भद्दो सो विणीयपरिणओ झत्ति / वीरजिणदिनदिक्खो सिक्खं गिण्हइ सुगइगामी // 98 // तो सो कमेण जाओ गयराओ साहुकुंजरायरिओ / केवलबलपरिकलिओ उम्मूलइ भववर्ण सहसा / / 99 // पियराणवि विणएणं उत्तरउत्तरपयंमि सुपइट्ठो। एस पसिद्धो कमसोऽणुत्तरपयसंपयं पत्तो // 100 / / देशानां कुलपुत्रकेण गृहीता दीक्षा विनयेन मोक्षप्राप्तिश्च / / 132 // Page #146 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 133 // +4+4+4+k कायोत्सर्गतपसि चन्द्रावतं| सकनृपोदाहरणम्। CHASEC95-35-4544 विणएणं पावएणं जडत्तनिबिडोवि मयणपिंडो व / झत्ति विलिजइ माणगंट्ठीए सो तवो तेण // 1.1 // ॥कुलपुत्रिकाऽऽख्यानकं समाप्तम् / / अनियाणेणं वेयावच्चेणं चंदणंगरागेण / धन्नाण पावगंधो संबंधं चयइ दूरेण // 1 // अन्नं च // पडिभग्गस्स मयस्स व नासह चरणं सुयं अगुणणाए / नहु वेयावच्चकयं सुहोदयं नासए कम्मं // 2 // पंचसयमुर्णिदाणं सुविसुद्धाहारदाणओ जाओ। वेयावच्चसुहेणं बाहुसाहू भरहनाहो // 3 // अइविमलसंवरेण पावं तावं खविन्ति मुणिवसहा / सज्झायनिजरेणं अहोनिसं वित्थरंतेण // 4 // तमपसरो अवणिजइ साहुतवस्सीण धम्मसुक्केहिं / झाणेण अणवरयं चंदायच्चोवमाणेहिं // 5 // तवतवणेण दुवालसतणुणा तेयस्सिणा फुरंतेण / चोज (चिय) जोइल्लासो होइ न दोसाण अवयासो // 6 // वासीचंदणकप्पो काउस्सग्गेण संडिओ साहू / मेरु व निप्पकंपो छिप्पइ नरएण न हु चुजं // 7 // काउसग्गतवेणं धना गिहिणोवि निच्चलक्खेण / धम्मज्झाणरहेणं अनलेणवि जंति सुरलोयं // 8 // काउस्सग्गेण तवेणं अगणियसुकुमारदेहदुहमारो। अक्खित्तसग्गलच्छी जह चंडवडिंसओ राया // 9 // तथाहि // अस्थि इह जंबुद्दीवे साकेयनामं पुरवरं भरहे / पसरंतसुपवेहिं जं पावइ सग्गसोहग्गं // 10 // तत्थासि उग्गतेओ राया चंडवडिंसओ सच्चं / सोहग्गनिही निच्चं गोरी कित्ती पिया जस्स // 11 // जिणसासणम्मि नंदणवणम्मि सुमणोवियाससामोओ। निचवियारसारो जो सहलं कुणइ अप्पाणं // 12 // विलसइ सम्मदंसणमणिदीवप्पहयमोहतिमिरोहे / मणभवणे जस्स | सयावि वेयलच्छी जहिच्छाए // 13 // सबदिसिमंडलेसुं जस्साणादाणमित्तमाहप्पा / पहवंति कहवि लोए न रुदखुदाइणो | +++ +4+ / 133 // Page #147 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 45 बयन्तीप्रकरण प्रतिः / // 134 // दोसा // 14 // आरोवियकोडिगुणं जिणधम्मं जो उ सरलयासहियं / परिसीलइ देवगुरुप्पडिणीए हणइ सिरिनाहो // 15 // & वैराग्ययुक्त साहम्मियक्च्छल्ले महल्लसल्लईवर्णमि वियरंतो। अणवरयदाणपसरो सच्चं मयवारणो जाओ // 16 // जिणसासणचन्दुज्जुयवणाव- | भावनया Baa बोहम्मि रोहिणीरमणो / ईसरसिरोवतंसो सजणजणमाणसे हंसो // 17 // विहिणा जिणिंदपूयं तिक्कालं जो करेइ भत्तीए / सामायिक दुरियंतरायदवषणजलधाराधोरणीकरणिं // 18 // सुगुरुचरणारविंदे अमंदआणंदनिन्भरो निच्चं / इंदिदिरसुन्दिरो आसायइट स्वीकार तत्तमयरंदं // 19 // सम्मं पुरिसत्थाणं तिन्हं धम्मत्थकाममुक्खाणं | आराहणिक्करसिओ राया सविसेसमुक्खत्थी // 20 // तस्य / पालइ रजं सुइरं दिचारिकरिंदकुंभनिद्दलणो / विक्कमओ सिंहो इव नयनलिणवियासणे सूरो / / 21 // सग्गविमाणमणोहरवा-४ सहरे अन्नयाइ सो राया / काउस्सग्गं सुतवं चिंतइ साहूण रयणीए // 22 // काउस्सग्गे मुणिणो उवसग्गपरिसहेहि अक्खोहा / निजिणियमोहजोहा जयंतु कंदुजलगुणोहा // 23 // पडिमापडिवन्नाणं साहूण सुसाणकाणणाईसु / अचाहियं न | जायइ रक्खसभूएहि स्यणीए // 24 // आयावणभूमीए सीयायवमेहबुद्धिकट्ठाई / न गणिजंति तिकालं मुणीहिं वोसहकाएहिं // 25 // काउस्सग्गेणेवं आरुढा केऽवि खवगसेणीए / निस्सेणीए केवलसिरीसणाहा सिवं जंति // 26 // काउस्सग्गमभिग्गहपुवं तो म्हंपि काउमिच्छामि / समयच्छिऊण सम्मं एवं सो पडिसुणइ राया // 27 // ताव मए ठायत्वं, उद्धट्ठाणेण धम्मझाणेण / जाव एस जलइ दीवो उजोयतो दसदिसाओ // 28 // कप्पलइ व आणा करुणारामाण जिणवरिन्दाण / सेविजन्ती वियरइ सासयसुक्खं फलं मुक्खं // 29 // सच्चं तवोविहाणं अइसयरयणाण हु निहाणं / जइ जिणवराण आणं कुणंति जीवा सइ पमाणं // 30 // अवरावरहाणेसुं किज्जन्तेसु सया पयाणेसुं / सिवनयरे नहु गम्मइ जिणाण आणारहं मुत्तुं // 31 / / एवं IPaa // 134 // C++++++ +++ + + + Page #148 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 135 // 4545445 तित्थयराण जावाऽऽणं एस ज्झायइ नरिंदो / निवाउं दीवोवि हु ता इच्छइ पाडिसिद्धीए (स्पर्धया) // 32 // इत्थन्तरम्मि से दीपके सिजापाली चिंतेइ अंधयारम्मि / कह मह सामी राया चिट्ठिस्सइ ? धम्मज्झाणेण // 33 // तो सा दीक्यपत्ते तिल्लंदासीकृतनिक्खिवइ झडित्ति पञ्जत् / नियमत्तिं व दलिल्लं (विकस्वरां) करेइ निविडं दसं पयडं // 34 // राया सुहोचियंगो सिरीसकुसुमं : तैलप्रक्षेपेव जयवि सुकुमारो / उच्छलियपुरिसायारो करेइ ज्झाणं विसेसेण // 35 // तद्यथा-एसो अणोरपारो संसारो सायरु व पि नृपस्य दुत्तारो / जं तम्मि आवयाण सम्पाओ होइ किं चुजं // 36 // अहवा सिजावाली दीविय रुइदलं सिणेहेण / नूणं मह वर्द्धमानतणुमोहं तमं व हरइ निस्सेसं // 37 // गन्भाइदक्खदन्दोलिकारणं एस चेव जं काओ / तं विउसाणं जुत्तो तम्मुच्छाए | भावना। परिचाओ // 38 // काउस्सग्गाभिग्गहगहम्मि मह मणनहमि उद्यम्मि / सूरि व उग्गतेए दोसावगमो फुडं होही / / 39 // जह जह सिजावाली तम्मि नरिंदम्मि मेरुनिकंपे / तिल्लं दसं च दीवे पुणरुत्तं खिवइ तहा चेव // 40 // रायावि धम्मज्झाणं दीवं उजओयए पयत्तेण / नेहं विणावि चुजं अलोहपत्तम्मि चित्तम्मि // 41 // तथाहि-मा जीव ! होसु कीवो पावियजिणवयणखीरसरिनाहो / मुत्तीयसुहं समीहसु संवरलहरीहि उच्छलियं // 42 // लद्धेवि हु जिणधम्मे पुट्ठगुणे तम्मि अंतररिऊहिं / निहयाणं जीवाणं होइ महा दुक्खसंदोहो // 43 // पीडिजंते काए दुहिक्कट्ठाणे तुहित्थ किं दुक्खं ? / नाणाइगुणसमग्गो होसि तुम जं तओ अन्नो // 44 // उक्तं च-"अन्नं इमं सरीरं अन्नो जीवोत्ति एव कयबुद्धी। दुक्खपरिकेसकरं छिन्द ममत्तं सरीराओ" // 45 / / नेहेणिमिणा सच्चं दसाण अवरावराण संजोए / संतत्तो दुहिओ जीवो न लहइ दीवुछ निवाणं // 46 // अणुगयगणसामीणं जिणाण पणमामि पायकमलाई / रागाइबिरहियाणं विहरंताणं मणुयलोए // 47 // उद्धठियपसरियपयवियनकडि- // 135 // Page #149 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री बयन्तीप्रकरणपतिः / CHECRECRECAGADCASCIENCE | हत्थपुरिससंट्ठाणो / लोओ जिणिंदमणिओ तयग्गसिद्धाण ताण नमो ॥४८|जाण न पुग्गलभुत्ती केवलवरनाणदसणधराण। धामणापूभवजलहिपारगाणं निच्चं मुत्तालए हाणं / / 49 // धम्मरहे मुणिवसहे निजोजयंताण पवयणधराण / सूरीण सारहीणं नमोत्थु बकं प्र४. सिवमग्गकुसलाण // 50 // नमिमो उवज्झायाणं जेसिं चरणारविन्दसंलीणा / सुयमयरन्दममन्दं पियन्ति फुल्लंधया मुणिणो भाते स्व // 51 // संविग्गविहाराणं संजमलच्छीउरंमि हाराणं / साहूणमऽवियाराणं नमोत्थु तइलोकसाराणं // 52 / / नवकारंमि दिणिंदे लोकगमहियए उदयायलंमि उदयन्ते / दोसायरंमि काए झीणप्पाए महच्छरियं // 53 // जं राया उल्लसिओ सुहज्झाणमहोदहिं वियासन्तो / तारयमुणीण पाए नियरूइपसरेण पयडन्तो // 54 // आकालं भववल्ली अट्ठारसपावट्ठाणसंरूढा / तो धन्ना जेहिं इमा धम्मज्झाणाऽसिणा छिन्ना // 55 // उद्धट्ठाणेण चिरं सरीरयं मज्झ संपयं अबलं / तो जीववीरिएणं तत्तं सत्तं न मुच्चिस्सं0 // 56 // भवचारयमि घोरे, परिभमन्तेण जे मए जीवा / विद्दविया ते मज्झं, खमन्तु खामेमि ते सवे // 57 // किं बहुणा"एगो मे सासओ अप्पा नाणदंसणसंजुओ / सेसा मे बाहिरा भावा, सवे संजोगलक्खणा" / / 58 / / संजोगमूला जीवेण पत्ता दुक्खपरम्परा / तम्हा संजोगसम्बन्धं तिविहेणं वोसिरइ सवं" // 59 // आसवदारपिहाणं, काऊणं सत्वसंगनिम्मुको / साहेमि उत्तमटुं, मुत्ताहारं महग्धवियं // 60 // एवं सुहज्झाणेण रयणिविरामंमि एस निवचंदो / अत्थमिओ सुरलोए, महड्डिदेवत्तणं पत्तो / / 61 // कायोत्सर्गस्य कष्टस्य बहीरूपतपसः कथानकम् / / ___ अह दाणसीलतवविहिकप्पहुममंजरीसु संलीणा / भवा हवंति सिवसुहफलोवलंमेण सुकयत्था // 1 // आसंसं चईऊणं धम्म दाणाइयं कुणन्ताण | संवेगरंजियमणा, कुणंति देवावि पसंसं // 2 // अनियाणो जिणधम्मो अचिन्तचिन्तामणी जओ तेण / 136 // मा MOHABBASSASNEHEALSCIES Page #150 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 137 // भावनाधर्मोपरि मरतनृपो दाहरणम् / -SCAAॐ40CCUSA मोक्खपहपस्थियाणवि, सुरनरसोक्खोवलम्मोवि // 3 // जिणधम्मखीरसायरमुत्तिसु सुहमावणासु चिट्ठन्ता / जलजीवावि सुवित्ता हवन्ति मुत्ता महग्यविया // 4 // वारसहिं भावणाहिं दिणमणिमुत्तीहिं उल्लसंतीहि / विहडियमोहतमोहो पसरह खलु केवलालोओ // 5 // जं अकयतबच्चरणा, अदिन्नदाणा अदीहसीलावि / भावणभावियचित्ता, केवलपत्ता सिवं जन्ति // 6 // जह भरहमहाराया, वेरग्गकन्तभावणाकलिओ / निद्दलियकम्मदलिओ केवलनाणेण संवलिओ // 7 // जंबुद्दीवे दीवे अवरविदेहमि अन्तखेतमि / विजयंमि पुक्खलावइनामे पुंडरिगिणी नयरी / / 8 / / तत्थासि वइरसेणो, राया तिथ्थयरनामकम्मेण / उप्पन्नो तिन्नाणो सुरवरकिजन्तसम्माणो // 9 // निम्मलजसप्पवाहो तस्स सुओ गुणनिही वइरनाहो / पढमो तत्तो बाहू सुबाहू पीढो महापीढो // 10 // लोगन्तियविनविओ, बच्छरमच्छिन्नसोवनदाणेण / संतप्पिऊण लोयं राया सिरिमं वइरसेणो // 11 // अहिसिंचिऊण र पढमं नियपुत्तयं वइरनाह / निक्खंतो केवलसिरिं पत्तो तित्थं पवत्तेह // 12 // छक्खंडसाहणेणं पत्तो चकितणं वइरनाहो / निद्दलियवहरिदप्पो तिहुयणविक्खायमाहप्पो // 13 // भवियकमलायराणं पडिबोहणमिहिरमंडलसणाहो / अह एगया पुरीए समोसढो वइरसेणजिणो // 14 // सुररहयसमोसरणे रयणोचयकणयरूप्पपायारे / रमणीए किंकिल्लिप्पमुहेहिं पाडिहारेहिं // 15 // सिंहासणे निविट्ठो जोयणनीहारिणीए वाणीए / भवियाण जिणवरिन्दो धम्मकहं कहह करुणाए // 16 // चक्कीवि वइरनाहो पउत्तिकहणे निउत्तपुरिसे हिं / वद्धाविओ सहरिसं तित्थयरसमागममहेण // 17 // तेसि पसरन्तपुलओ, दाऊणं पारितोसियं दाणं / सत्तट्ठपए गन्तुं भत्तीए तद्दिसाहुत्तं // 18 // धरणियललुलियभालो कयंजली ललियमहुरवाणीए / हरिसंसुपुन्ननयणो सक्कत्थयं भणइ एकमणो // 19 // अत्थाणआस 137 // Page #151 -------------------------------------------------------------------------- ________________ -बयन्ती वजसेनतीर्थकरदेशना। प्रकरण वृतिः / ESSA // 138 // णत्यो तत्तो आइसइ पञ्चायपुरिसे / कारावह नयरीए महूसवं जिणावरागमणे // 20 // कयमजणोवयारो देवंगदुकूलरइयसिंगारो / मउडायअलंकारो गयाइचउरंगपरिवारो // 21 // जयकुंजरमारूढो ढलन्तचलधवलचामराडोवो / सिरिचक्किवडरनाहो गच्छइ जिणवन्दणुम्माहो // 22 // दट्टण समोसरणं हिट्टो जयकुंजराउ उईनो / पंचविहामिगमेणं कयञ्जली पविसइ तत्थ // 23 // तिपइक्खिणी करेऊण विहिणा सक्कस्थय भणेऊण | इसाणदिसाभाए आसीणो उचियट्ठाणंमि // 24 // भयवंवि वइरसेणो वित्थारइ धम्मदेसणं तत्तो / मोहविसपरममन्तं अन्तररिउनिग्गहे जन्तं // 25 // संसारे कंतारे परिभमन्ताण कम्मवसयाण / जीवाण मग्गलग्गो मचुकरिन्दो महारूद्दो॥ 26 // पुरओ य घोरमुत्ती एइ जरा रक्खसी तुरियं / जहा होइ दोक्खक्खाणी दुक्कमनरिन्दअत्थाणी // 27 // चउरासीइलक्खेसु जीवजोणीण वणनिकुंजेसु / भमिराणं सिवपुरवरपहो अहो होइ अइदुलहो // 28 // इटाणिढविओगप्पओगदावुच्छलन्तजालाहिं। डझन्ताणं ताणं घणोदओ होइ जिणधम्भो // 29 // नवि अस्थि भवारने जियाण पडिबन्धकारणं किंपि। जेणिन्दचावचवलं सयलं धणभवणसयणाई // 30 // उत्तुंगसिंगगिरिवरपसरियसरियातरंगतरलाई। जं जीवाण उब्बणजोवणलावन्नप्पेमाई // 31 // परिणामदारूणेसुं दुग्गइदुहकारणेसु विसएसु / सम्मदिविविणासणरसियं गिद्धिं निवारेह // 32 // संसारम्मि अरन्ने किम्पामफलोवमेसु विसएमु | सनाणजीवियत्थी को नाम करे। अहिलासं ? // 33 // रागबोसकसाया एत्थ पिसाया सयावि वियरन्ति / तेहिं गसिजन्ताणं, कहं ? सुहं होइ जीवाणं // 34 // तम्हा सम्मईसणचरिचरूवेण सुठु मग्गेण / लंघिज भवारनं खिप्पं पावेह सिद्धिपुरिं // 35 // इय जिणवरधम्मकहा पहा जहा दिणयरस्स पसरन्ती। अनाणमन्धयारं निहणइ भवाण जीवाण // 36 // चक्कीवि वइरनाहो तकालोप्पचसिवसुहु RECAUSA G E // 138 // Page #152 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 139 4 है वजनाम वाहुसुबाहु पीठ ला महापीठदीक्षा। म्माहो। चिन्तह इह गिहवासे न तत्तउ कोवि मह लाहो // 37 // सो विनवइ जिणिन्दं साणन्द नाथ ! तुम्ह पयकमले। होमि महन्वयधारी अलि वलीणो रयं धणियं // 38 // भयवंवि भणइ नरवर ! अहासुहं मा करेसु पडिबन्धं / जं उत्तमाण उत्तमकजे निच्चोजम्मो होइ // 39 // तो राया नमिऊण संविग्गो जिणवरस्स पयकमलं / आगच्छइ नयरीए रजं सोत्थं करेह सिग्धं // 40 // चईऊणं रजसिरिं पडग्गलग्गं तिणं व निस्संगो / सबड्डीए बन्धवसहिओ संजमसिरिं पत्तो // 41 // जस्स खमा सा जीए विणयारामंमि सउणललियंमि / सुयक्खंधकप्पतरूणो अचिरेण सप्फला हुंति / / 42 // जम्हा अञ्जवजुत्तो अपमत्तो तेण संजमसिरीए / परिरंभलालसाए न खणंपि चइजए जोओ // 43 // सो बहरनाहसाहू मुणितिलओ सुगुरूमूलगुणवुड्डो / वियसिरसुमणो सुरही भमरहिओ प्फुरियघणपत्तो / / 44 // गीयत्थो सो धारइ अन्तो बाहिपि अंगुवंगाई / पुनाई पयलक्खणसरवंजणवन्नललियाई // 45 // चउदसपुची गणहरपयंमि सो ठाविओ वरनाहो / गुरूगच्छगयणदिणमणिमंडलमाहप्पदिपन्तो // 46 / / अवरावरदेसेसुं विहरइ भवाण कमलसंडाण | वियरन्तो पडिबोह, परिमलद्रावणयणेणं // 47 // चाहुसुबाहुमुणिणो सहोयरा तस्स पीढमहापीढा / एक्कारसंगसागरपारगया हुन्ति गीयत्था // 48 // सदेवि जियकसाया जहुत्तऽणुट्ठाणनिहणियपमाया / विणिहयमोहपिसाया तवचरणविसेसकिसकाया // 49 // अणिगृहियबलवीरिया सम्मं असवत्तजोगमणिकिरिया / गंगापवित्तचरिया गुणलच्छीए सयं वरिया // 50 // तत्थवि बाहुमुणिन्दो पंच सयाणं मुणीण निचंपि / भत्तं पाणं सुद्धं वियरइ सद्धासुहाजलही॥ 51 // बाहू साहू पुन अजइ बहु चक्कवट्टिभोगफलं / केवलनिजरपेही सुपत्तदाषण सुद्धेण / / 52 // पंचन्हं मुणिपुंगवसयाणं विस्सामणं सुबाहूवि / कुणइ -SCRECOR Dill139 // C Page #153 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CAR श्री जयन्ती प्रकरणकृतिः / // 14 // निरीहो वयभरधुरन्धराणं अणुदिणपि // 53 // दलयइ सुमुणी वीरियविग्धं कम्मं गिरिन्दवजेण / वेयावच्चेणऽञ्जइ, भुयबल- वज्रनामेन फलयं तहा सुकयं // 54 // सज्झायनिज्झरेणं झरन्ति संवरभरेण पडिपुना / पीढमहापीढमुणिणो गिरीसरा गहिरनिग्घोसा वैयावृत्त्य॥ 55 // अह उज्जुयसीलाणं तेसिं गुरुकुलसमुद्दवासीणं / नाणसिरिपरिरंभण सुहाई वटुंति साहूर्ण // 56 / / सो एस वयरनाहो विषया गणहारी देसमंडलविहारी / भवियकमलोवयारी दिप्पइ सुर व तमहारी // 57 // वेयावच्चं निचं बाहुसुवाहूण बन्धुसाहूण / | बाहुसुबाहुदगुण उववूहइ सगणसमक्खं सयं हिट्ठो // 58 // धना एए मुणिणो बाहुसुबाहू महासया जेण / मुणिजणवेयावच्चे सच्चे मुनिवराणां निचोजमो ताण / / 59 // देवसुइलम्पडाणं जडाण जीवाण होइ आलस्सं / मुणिजणवेयावच्चे सिवसुहपडिहूवमे सम्म कृता // 60 // वेयावच्चसमजियपुग्नं पुनाणुबंधि अइगरूयं / अप्पडिवायं समए जं भणियं जिणवरिन्देहिं / / 61 // तथाहि- प्रशंसा। ओहावियस्स चरणं, मयस्स नासइ सुयं असज्झाए / अप्पडिवायं वेयावच्चेण पुणज्जियं पुन्नं // 62 // तो एए मुणिवसहा गुणिणो वेरग्गमग्गमोइना / धन्ना संचियपुन्ना धम्मधुराधरणअविसन्ना // 63 // बाहुसुबाहुपसंसं सुच्चा ईसानलेण संतत्ता / पीढमहापीढमुणिणो मणकालुस्सं धरन्तेवं / / 64 // कजकराण पसंसं कुणंति नो अम्हाण ज्झाणनिरयाण / एए अजवि गुरूणो असिरिं चेव पालन्ति // 65 // इय चिन्ताभमरीए लीलाए ताण हिययकमलंमि / तं किंपि कयं कम्मं, संपज्जा जेण अवलत्तं // 66 // अह अरिहाइयवच्छल्लयाइहाणेसु वीसमाणेसु / सल्लईवणेसु विहरइ गयराओ सो वइरनाहो // 67 // अह आसाइय तिथ्थयरनामकम्मपरिपुनपुन्नदलो / अप्पवसाहि संजमसमदमलच्छीहिं परियरिओ // 68 // पुहवीतले जलपूरियंमि अवि तस्स पायचारेण / अवसरइ कलुसमावो सच्छत्तं होइ अच्छरियं // 69 // अवरावराण मयकुंजराण // 14 // Page #154 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 141 // SARALA%ACC गुरुदप्पदलणमाहप्पो / मोहमहीरूहमूलुम्मूलणवावारललियंगो // 70 // भवाण महुयराणं दाणं निवाणकारणं दिन्तो / सुंडामिघायवारणसुहियं लोयं कुणंतो य // 71 // जिणसासणमि गुरुकाणणंमि निविग्धं चिरविहारेण / एस दुहा समयन्नू चउदसपुवी वइरनाहो // 72 // कयकिच्चो नाऊणं समयं संलेहणाविहाणेण / तेत्तीससागराओ सबढे सुरवरो जाओ // 73 // ते बाहुसाहुपमुहा चत्तारिवि तस्स बंधवा मुणिणो / गच्छगुणे मूलगुणपसरियसुयक्खन्धकप्पदुमा // 74 / सउणाण कयाणन्दा परोवयारेण लद्धमाहप्पा / अइसरससंवरेणं लहन्ति रिद्धिं सुपत्ताण / / 75 / / ततो अमूढलक्खा समयन्नू उत्तमट्ठकप्पेण / निम्मलसंकप्पेणं पत्ता सवट्ठसिद्धीए // 76 / / अह अस्थि जंबुद्दीवे, भारहवासंमि दक्खिणद्धमि। मज्झिमखंडे बहुदेसमझउज्झायभूमीए / / 77 // किल कालचक्कअवसप्पमाणभागेसु तईयअरयंमि / पलिओवमट्ठभागे सेसंमि उ कुलगरूप्पत्ती // 78 // तथाचाऽऽवश्यके-“पढमित्थ विमलवाहणचक्खुवं जसमं चउत्थमभिचंदे / तत्तो य पसेणइए मरुदेवे चेव नाभी य // 79 // नाभिस्स जुयलजाया जाया अमरिंदसंथुणियपाया। मरूदेवा सिवसुहफल-केवलपरमाणुनिम्माया // 8 // किन्हचउत्थितिहीए आसाढे वइरनाहमुणिजीवो। सबढविमाणाओ, तीए कुच्छिमि अवइन्नो / / 81 // वसहगयमाइयाई पासइ सुमिणाइ चउदस संपुन्ना। हिट्ठा तुट्ठा उट्ठइ मरूदेवा विम्ह उल्लसिया // 82 // तो सा (चउदस)साहइ सुमिणाइ नाभिनरवरिन्दस्स / अज मए दिट्ठाइ अदिवपुत्वाइ एयाई // 83 // सोवि य जम्पद हिट्ठो, देवि ! इमाई महत्थसुमिणाई / मन्ने होही पुत्तो अईगरूओ कुलगरो तुम्ह // 84 // चलियासणो सुरिन्दो विहिणा तत्थेव भणियसकत्थओ। एइ निसाए सेसे मरुदेवाए थुई कुणइ / / 85 // तुज्झ महासइ ! नमिमो जेण (तए तित्थयरजीवो)। धम्मवरचक्कवट्टी मरुदवाकथितच. | तुर्दशस्व ने नाभिकुलकरस्य फलकथनम् / // 141 // Page #155 -------------------------------------------------------------------------- ________________ G श्री बयन्ती प्रकरणइतिः / प्रथमजिनस्य जन्ममहोत्सवः। // 142 // BECACA SAXA4% कच्छीए धारिओ देवि ! // 86 // इन्चाइ निवेइऊणं, सक्को जिणजणणिसंथवं काउं / संतोसमुव्वहन्तो, जहाभयं पडिगओ झत्ति // 87 // अह बढइ सो मयवं साणन्दसुरिन्दकयसुहाहारो। तो कसिणअट्ठमीए मासे चित्तंमि सुहलग्गे // 8 // उच्चद्वाणद्विएK, गहेसु सुहेण पसवेइ। मरूदेवा तिहुअण ( जणसुहं ) पढमतित्थयरं // 89 // जाए तिहुअणनाहे पदमजिणिन्दम्मि सयलतियलोके / उज्जोओ संजाओ नेरइयाणपि सुहकारी // 90 // निवत्तियंमि सयले दिसाकुमारीहि सडकम्मम्मि / सिहासणंमि चलिए, सक्कोवि पउंजए अवहिं // 91 // पेच्छइ जम्बुद्दीवे, भरहे परमं जिणेसरं जायं / हरिसभरनिम्भरंगो भणिउं सकत्थयं विहिणा // 92 // सबड्डीए सको, पालइनामेण तो विमाणेण / मरुदेवाए अम्भासे आगकलर रिसपडिहत्थो // 93 // भणइ य देवाणुप्पिये! जिणजणणि! तए न भाइयवति / तुह सुयजिणिंदजम्मणमह. सवत्थं सुरिन्दोऽहं // 94 // इत्थागओ नमो तुह तइलोकपईवदाईए निच्चं / इचाइ तं थुणेऊणं, सको ओसोयणिं देह // 95 // जिणपडिबिम्ब दुविउं पंचवियप्पं करेवि अप्पाणं / करसम्पुडट्ठवियजिणो इन्दो पविचमरछत्तधरो // 96 // सुरकोडीपरियरिओ समेरूसिहरंमि पंडगवर्णमि / पंडुसिलासिंहासणमासीणो निच्चलो हाइ // 97 // चलियासणा सुरिन्दा चउसदी ईति सरसमिद्धीए / अच्चुयसुराहिनाहो पढम मजणमहं कुणइ // 98 // तत्तो कमेण सवे सुराहिवा जम्ममजणोच्छाहा / काऊण सपरिवारा सिग्धं सट्ठाणमल्लीणा // 99 // सक्कोवि पाणिसम्पुडगहियजिणो एइ सुरसमृहेण / मरूदेवाए सिग्धं देवीए सनिहाणमि // १०॥ठबइ जिणं सिजाए पडिरूवबिसञ्जणेण तो दिवं / खोमं कुंडलजुयलं मणिमयलम्बसगं कुणइ // 1 // नन्दिसरंमि अंजणगिरिसिद्धाययणअरिहपडिमाणं / सक्को सुरगणसहिओ कुणइ य अढाहियामहिमं // 2 // अह Page #156 -------------------------------------------------------------------------- ________________ % // 143 // %A ऋषभदेवस्य पुत्रपरिवारः। A % AE% वह सो भयवं कंतिकलावेण अंगुवंगेहिं / अंगुट्ठम्गसुराहियअमियरसाहारजोमेण // 3 // ऊरूम उसभलंकणं अहवा समिणाई उसमपढमाई / दिट्ठाई तेण जिणो उसहो मामेण संलत्तो / / 4 / / पाणिट्टियइक्खुलओ सक्को अन्नंमि वासरे एइ / नाहिनिवोच्छंगत्यो भयवपि इक पलोएइ // 5 // तो इंदो साणंदो जिणकरकमलंमि इक्खुमप्पेइ / भणइ य भयवं एसो उसहो लामोति // 6 // तालफलपायमयजुयलदारया भमइ वणनिकुंजेसु / एमागिणी सुनंदा मिहुणगनरअप्पिया संती नाडिनिवेणं गहिया होही उसहस्स जेण पत्तित्ति / तत्तो कमेण पत्ते जिणस्स नवजोवणारंभे // 8 // सको पाणि का मंगलसएहिं परियरिओ। देवेहिं देवीहिं य, सुमंगलाए य सुनंदाए // 9 // जुयलयं सुमंगलाए भरहो बंभी य मिहणयं जाय। बाहुमुणिपीढजीवा पुवञ्जियकम्मओ तयणु // 10 // अप्पप्पकम्मवसओ सुबाहुमहपीढजुयलयं हयं / देविसनंदाए पुण बाहुबली सुन्दरी चेव // 11 // अउणोपन्नजुयले पुत्ताण सुमंगला पुणो पसवे / पुत्तसयं दो दुहिया एवं रिसहस्स वच्चाणि // 12 / / उसभजिणजम्मदिवसा अइकंते पुत्वलक्खछक्कम्मि / ओसप्पिणीदोसेणं कुलगरनीईण इकमणं / / 13 // मिरणयनागरेहिं तत्तो निवेइयं कुलगरस्स नाभिस्स / तेणुत्तं कहह लहुं उसभस्स महामइस्सेवं // 14 // नाहिवयणेण कहिए वसा उसमेण मिहुणगा पुरिसा। रायं निग्गहहेउं मग्गह नाभिं कुलमरंत्ति // 15 // उसभ चिय भे राया ते भणिया नाभिणा पुणो उसमं / मिहुणनरा भणंति य अम्हं राया तुम्हं चेव // 16 / / तो जिणवरेण वुत्ता अहिसित्तो चेव होइ इह ट्र राया / तो अमिसेपनिमित्तं पउमसरं जंति ते सिग्धं // 17 // इत्यंतरंमि चलियासणो सुरिंदो समेइ उवउत्तो / काउं रञ्जमिसेयं दम्डकरो हाइ तप्पुरजो // 18 // मिसिमीपचहीयरे उदयं पित्तुं छुहन्ति पाएसु / साहुवि विणिया पुरिसा ता भणियं SARASICALCASTHAN A5 143 // % Page #157 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी जयन्तीप्रकरणपृतिः / // 144 // NAGARROCIRCLE सुरवरिन्देण // 19 // भो धणयजक्ख सिग्धं ! सम्म पुरहयपुरवरसरिच्छं / उज्झाएभूमिए विणीयनयरिं निवेसेह // 20 // नवजोयणविच्छिन्ना बारसदीहा पुरी अह निविट्ठा / कणयमयपायारा मणिमयपासायसोहिल्ला // 21 / / अह तीए परिपालइ रजं नाणत्तएण संपुनो / देवोवणियभोगो वञ्जरियासेसववहारो // 22 // दावियविजासिप्पो जंगमकप्पडुमो व लोयाणं / भयवं अमूढलक्खो जावय दिक्खं गहिउकामो / / 23 // लोगतियदेवेहिं ताव चलियासणेहिं पत्तेहिं / विनत्तो पहु ! तित्थं, जीवहियं तं पवत्तेहि // 24 // संवच्छरमच्छिन्नं दाणं दाऊण रजअभिसेयं / भरहस्स करेऊणं सेसाणं दिनपिहुरजो // 25 // चित्तबहुलट्ठमीए चउहिं सहस्सेहिं नरवरिन्दाणं / सद्धिं दिक्खं गिन्हा लहइ य मणपञ्जवं नाण // 26 // नवि ताव जणो जाणइ का भिक्खा केरिसावि भिक्खायरा। तो कच्छाइनरिन्दा वणमझे तावसा जाया|२७|| भयपि विहरमाणो वरिसन्ते गयउरंमि नयरंमि / सेयंसकुमारेणं पारणए दिनहक्खुरसो।।२८|वरिससहस्सन्ते नग्गोहतलंमि पुरिमतालंमि / फग्गुणकिन्हेक्कारसितिहिमि पुण केवलं पत्तो // 29 // तक्कालं भरहस्सवि आउहसालाए चक्कवररयणं / उप्पन्न पुवन्जियभोगफलोच्छलियपुग्नेणं // 30 // चलियासणा सुरिन्दा साणन्दा इंति पुरिमतालंमि / रयन्ति समोसरणं कुणन्ति महिमं महुच्छाहा // 31 // नाऊण भरहराया चकं इहलो. यंति काऊणं / पूएइ जिणं पढमं गन्तूणं गुरूसमिद्धीए / / 32 // तो पढमदेसणाए पढमजिणिन्दस्स पढमओसरणे / संघस्स चउविहस्सवि गणहरपमुहस्स उप्पत्ती // 33 // धम्मवरचक्कवट्टी बहिरन्तरवयरवारणसयन्हो / देसन्तरेसु भयवं विहरइ सुरकोडियपरियरिओ / / 34 // भरहोवि चक्करयणं रिद्धीए पूईऊण गयणयले / गच्छन्तं अणुगच्छइ सरंगचउरंगसेणाए // 35 // साहइ भरहं खेत्तं छक्खंडं सहिवाससहस्सेहिं / बारसवरिसाणि तओ रजभिसेओ हवइ तम्हा // 36 // तो बन्धवाण हुत्तं दूय | शिल्पादि दर्शयित्वा | भगवता गृहीता दीक्षा, प्रा. प्ते केवलज्ञाने च समवसरणम् / 6 4- SA 144 // Page #158 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 145 // ARRO र्दीक्षा। मुहेणं भणेइ रजाई / दिनाई मए मुंजह न अबहा तेवि तो बिन्ति // 37 // अम्हं तुम्हं तारण चेव दिनाई ताव रजाई / जमिह भणिस्सइ ताओ तं चिय अम्हे करिस्सामो // 38 // इय भणिऊणं अट्ठाणउई बंधवनिवा जिणस्सन्ते / गच्छन्ति य पुच्छन्ति य किच्चं अम्हाण किं ? ताय ! // 39 // तत्तो जिणेण अंगारदाहिनाएण बोहिया सत्वे / निबिनकामभोगा संविग्मा दिक्खिया झत्ति // 40 // ताणं निस्संगाणं सवेसि सुक्कज्झाणजलणेण / निदवघायकम्मिन्धणाणमुप्पजए नाणं // 41 // पुत्वभवसाहुविस्सामणेण संपुग्नदिवबाहुबलो / बाहुबली संगामे तिजयसमक्खं जिणइ भरहं // 42 // भातस्स चक्करयणं हत्थे दट्ठण कूरचित्तस्स | बाहुबली संविग्गो लोयं काउं गहियदिक्खो // 43 // काउस्सग्गेण ट्ठिओ तत्थेव य लहुयवंधवा मज्झ / केवलेनाणाइसया कह ? पिच्छिस्सं अहमनाणी // 44 // एवं चित्तेणेसो काउस्सग्गं करेइ जा वरिस / तो जिणपेसियभइणीवयणाओ वन्दिउं चलिओ // 45 // उप्पाडइ बाहुबली केवलनाणं विसुद्धलेसागो / जं दप्पविरहियाणं सुद्धी सिद्धी हवइ चेव / / 46 // पुत्वाण लक्खमेगं वरिससहस्सेण ऊणमुसभजिणो / केवलिपरियाएणं पडिबोहन्तो विहरिऊण // 47 // अट्ठावयंमि माहे मासे किन्हाए तेरसितिहीए / सम्पत्तो निवाणं सासयमेगन्तसुहट्ठाणं // 48 // तत्थ य भरहेण तओ जहुत्तवनप्पमाण-पडिमाण / उसभाईण जिणाणं कारवियं जिणहरं रम्मं // 49 // अप्पडिहयप्पयावो भरहे वासंमि एगच्छत्तेण / सिरिभरहचकवट्टी पालइ रजं सुरिंदो व // 50 // पुत्वभवे साहूणं विसेसपरिसुद्धभत्तदाणेण / तं अज्जियं सुपुन तस्स फलं चक्कवट्टित्तं // 51 // साहम्मियवच्छल्ले निस्सले सल्लइवणनिउंजे / वियरन्तो सिच्छाए गइन्दलीलावहो भरहो // 52 // जम्मि घणुनइपसरे हुन्ति हु सस्साई अइसहलाइ / सबथवि नीइपरे अनीइसंभूइओ चित्तं // 53 // जिणसासणप्पमावणनन्दणवणमेरूमेहलाबन्धो / जो आसापरिपूरण 545453 R IESGARHI Page #159 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणवृतिः / भरतचक्रिसम्पदावर्णनम् / // 146 // कल्लाणपरम्परारम्मो // 54 // सेसस्स जहा धरिणी सिरंमि सुपइट्ठनिच्चला जस्स | आणा सेसनिवाण तह सुहया अवहसेस व // 55 // मणिमउडग्गपइट्ठा जस्स चउन्हंपि लोगपालाणं / आणा सुरतरूमंजरी पसरियसोहग्गसंभारा // 56 // बत्तीसनमिरनरवइसहस्समणिमउडकिरणकुसुमेहिं / जस्स सया अच्चिाइ पयपउमनिवासिणी लच्छी / / 57 // सोलसजक्खसहस्सा आएसं जस्स अमियलेसं व / मन्नन्ति अप्पमत्ता किंकरभामि आसत्ता // 58 // सुकयसहयारमञ्जरिसरिच्छलच्छीण नवनिहाणसिरीय सिद्धभरहे वसन्ते जस्सइगंगा सुहा होइ / / 59 // सिरिचक्कवट्टीलच्छी सवंगविभूसणाइ रयणाइ / चउदस दसदिसिपसरियकित्तिलयाकन्दललियाई / 60 / / सवंगसुंदरीणं कन्दप्पनरिन्दरायहाणीणं / जस्स सुहिकखणीणं चउसट्ठी सहस्स रमणीणं // 61 // चउरासीइलक्खा हयवरगयरायरणरहवराणं / पत्तेयं छण्णउई अचुम्मडसुहडकोडीणं / / 62 / / सो एस भरहनाहो पइदिणपरिवड्डमाणउच्छाहो / चिरकालं परिपालइ ललियंगो चक्कवट्टिसिरिं // 63 / / अनमि दिणे मञ्जणदेवंगदुकूलविहियसिंगारो। सवंगभूसणधरो पविसइ दप्पणगिहं भरहो // 64 // अह तम्मि दप्पणतले पडिविम्बियमप्पयं निहालन्तो। दवण कणिट्ठमंगुलिमसोहमाणि विचिन्तेइ // 65 / / कहमेसा न रायइ ? सक्खं जा अंगुलिं पलोएइ / मुद्दारयणविहीणं ता पासइ कतिपरिक्खीणं / / 66 // तत्तो भरहनरिन्दो चिंतइ साहावियं न सोहग्गं / जह एयाए तह किं ? अंगोवंगाण सेसाण // 67 // तत्तो जचो जत्तो भूसणमवणेह एस नरनाहो / सूरि व अत्थमिन्ते जओ तओ अवेइ कन्तीवि // 68 // परिमुकसत्वभूसणमेयमसोहं सरीरयं दहूँ / उच्छियपउमं व सरं वेरग्गं जाइ नरनाहो // 69 // घिद्धी मह अन्नाणं जमिमस्स सरीरयस्स पावस्स / कओण महारंभप्पसत्तया इत्तियं कालं // 70 // निच्चपरिसीलणीय असुइत्तेण हीलणीयमइमलीणं / अवरावरावयाणं // 146 // Page #160 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 147 // च्छाभावनाभावित्वं भरतचक्रिणः। CASTORE | हाणं जलहि व देहमिणं // 71 // चम्मरसरूहिरमंसद्विसुक्कमजावसंतमेयसयं / उरालियं सरीरं मणुयाणममिज्झभंडारं // 72 // रे जीव तुमं तंपि य मजणसिंगारअंगरागेहिं / कप्पूरागरूपुप्फोवयारमणिभूसणगणेहिं // 73 // उवयरसि मूढ निचं महयारंमेण गिद्धिबुद्धिल्लो। छज्जीवघायणरओ परलोयपरम्मुहो मुद्धो // 74 // संसारंमि मसाणे एयम्मि सरीरयमि गिद्धीए / सम्मद्दिट्ठी हीरइ दिजइ दुक्खाण दन्दोली / / 75 // तह लालियंपि तह पालियंपि एयं सरीरयं जेण / परलोए अणुगमणं न करइ सहऽक्वाणमित्तो व // 76 // असुइभरियंमि कुंभे बाहिं जह पुष्फमाइउवयारो / तह देहे परिभोगे कंचणमणिभूसणाईणं // 77 // कट्ठाणमणेगाणं पावदन्वुत्थाण जत्थ उप्पत्ती / हेयं सरीरमेयं विउसाणं दगरन्नं व // 78 // हवइ य गम्मे जम्मे चालत्ते तरूणभाववुड्डत्ते / रोगविओगजराइयं दुक्खं देहग्गहे चेव // 79 // सुगहीयनामधेया ते नेया अंतरंगवहिरंगं / चइऊण सवभंग जे सिद्धा केवलप्पाणो // 8 // धन्ना अट्ठाणुइमुणिणो चरणभरधुरं धरिस्समहं / अंगीकयगुरूकटुं पुन्नं पसमाइरयणरासीहिं / / 81 // चारित्तजाणवत्तं तारइ भवसायरं सिग्धं / सच्चं ते विबुहिन्दा कम्मगिरि चूरयन्ति जे सहसा कढिणेण मोहेणं चारित्तकुलिसेण लीलाए // 82 // पंचप्पयारविसओवयारपंकमि मह निमग्गस्स / हीही सिद्धिं पुरि पइ चरणपवित्ती न संजाया // 83 // अमियारम्भपरिग्गहरूवाए चक्कवट्टीलच्छीए / मह मृढगड्डरस्स व सम्पन्ना अविरई चेव // 84 / नवकम्माणायाणं विरईए होइ भवजीवाणं / सुक्कज्झाणतवेणं पुवज्जियकम्मनिजरणं / / 85 // तत्तो केवलनाणं लहिउं निस्सेसकम्ममलमुक्का / एगसमएण जीवा वच्चंतऽयरामरं द्वाणं // 86 // पश्चिन्दियदमदन्तो कोहाइकसायपसमओ सन्तो। | तोऽहं करेमि सम्पइ तिविहंतिविहेण विरइमिमं // 87 / / इच्चाइभावणाए भरहिन्दो कढिणकुलिसधाराए / चारित्तोहणीयं म॥१४७॥ Page #161 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणपतिः / // 148 // का लक्षपूर्व SHRECCA% भिन्दइ कम्मं गिरिं सहसा // 88 // तो उग्गमन्तदिणयरपसरसहोयरेण भावेण / कमलायरो व वियसइ चारित्तग्गहण- आदर्शपरिणामो / / 89 // परिहरियसवसंगो भरहमुणी चरणगिरिवरारूढो / पिच्छइ अरचदुट्ठो समयं सयलेसु विसएसु // 90 // भवने समभावभावियप्पा पइक्खणवियसन्तवीरिउल्लासो / पविसइ अपुछकरणं आरोहेइ खवगवरसेढिं // 91 // तो सुहमसंपराओ होउ प्राप्ते अहक्खायचरणसम्पन्नो / सुकज्झाणदवेणं विदड्रघणघायकम्मवणो // 92 / / अच्चुन्भुयसोहग्गो केवलवरनाणदंसणसिरीए / केवले वेषं आलिंगिओ सहरिसं भरहमुणी वीयरागोवि / / 93 // कमलि व निरूवलेवे केवललच्छीनिवासभवणंमि / भरहमुणिन्दे सक्को गृहीत्वा अलि चलियासणो एइ / / 94 / / जम्पइ सम्पइ तुम्हं जस्सदा कीरए तवचरणं / तंपि हु केवलनाणं भावमुणिन्दस्स सम्पन्न // 95 / किन्तु न इत्थं तित्थं पवत्तए तेण गिन्ह रयहरणं / लोयाइविहाणेणं कीरइ केवलमहो जेण // 96 // इय सकेणं वुत्तो भरतभरहमुणी देवयावियन्त्रेणं / लोगुत्तरवेसेणं निग्गच्छह दप्पणगिहाओ॥ 97 // उजाणम्मि ट्ठियस्स य सको किंकिल्लिपायवत केवलिनो लंमि। केवललच्छीमहिमं करेइ सुरिन्देहिं परियरिओ // 98 // अह सह गहियवयाणं चउहि सहस्सेहिं नरवरिन्दाण / विचरणम् / सद्धिं विहरइ भरहे मरहमुणी केवलनाणी // 99 // पुवाण लक्खमेगं मरहमुणिं केवली विहरिऊण / पडिबोहियभवजणो पत्तो मुक्खं सया सुक्खं // 10 // चउबिहधम्मकहाए सुहासहीए इमाइ विबुहाण | मिच्छत्तविसवियारा दूरं दूरेण वियरन्ति | // 1.1 // गिण्हन्ति य सम्मत्तं अन्ने मणुयावि लिन्ति चारित्तं / अवरे भद्दगभावं पडिवण्णा पाणिणो तत्थ // 12 // सोऊणं धम्मकहं चउविहं सुगुणकोडिसंघडियं / विजयञ्चियमोहनिवं मन्त्रन्ती सा पुण जयन्ती // 103 // चिन्तइ वीरजिणिन्दो केवलवरनाणदंसणपइवो / सो भयवं संसयमहन्धयारं हरइ सहसा // 104 // P148 // Page #162 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 149 // BAEC% 95 भावनाख्यानकं समाप्तम् / जयन्त्या सम्मइंसणरयणं गारेणिव संसएण अणुविद्धं / परमत्थऽसाहणेण भवद्दोगच्चं हरइ नेव // 1 // तारयमज्झगोवि हु प्रश्नेऽष्टादपडिपुत्रकलोवि चित्तजुचोवि / दोसायरोत्ति भन्नइ जहा कलंकेण सोमोवि // 2 // तह संसएण जिणवरपवयणबहुमाणगुण शपापकलाबोवि / सम्मदंसणमोहं न हरइ सम्म जडभावो // 3 // इय चिन्तिउं जयन्ती रहसभरोम्मिन्नबहलपुलयंगी। जीवाइ स्थानकवत्थुविसयं पयडइ संसयमह कमेण // 4 // भयवं जहग्गिजाला धूमसिहा वा सहावओ चेव / उ8 चरन्ति सबे जीवावि हु वर्णनम् / जन्ति तह चेव // 5 // किन्तु घणकम्मचिकणलेवगुरुत्तेण जन्ति अहरगई / तुम्बीफलं व सलिले बहुमट्टियलेवजोगेण // 6 // तमिह मुरुत्तं जीवा कुणन्ति जिणराय ! हेऊणा केण ? / इय विणयपणयपणया कहन्तरे पुच्छइ जयन्ती // 7 // तथा च सूत्रं-पुच्छइ कहावसाणे गुरुयत्तं कह कुणन्ति जिण जीवा / वीरो भणइ जयन्ती अट्ठारस पावट्ठाणेहिं // 2 // तथाहि-पाणिवह 1 मुसाबाए 2 अदत्त 3 मेहुण 4-5 परिग्गहे। कोहे 6 माणे 7 माया 8 लोमे पिज्जे 10 दोसे य 11 कलहे य // 3 // अभक्खाण 13 अरह 14 पेसुन्ने 15 तह परपरिवाए 16 / मायामोसे 17 मिच्छादसणसल्ले 18 य अट्ठारे // 4 // व्याख्या-भगवान् वीरजिनेन्द्रो जयन्त्या भाविकया जीवानां कर्म-गौरवकारणं पृष्टः सन्नम्यधात् , यदुत जयन्ति ! IR // 119 // %EC Page #163 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणपतिः / प्राणिवधविरतौ बन्धुमती|दृष्टान्तः। // 15 // अष्टादशपापस्थानः जीवाः कर्मगुरुत्वं कुर्वन्ति / तत्र प्रथमं पापस्थानं प्राणिवधः / प्राणिवधस्थानके जीवा हया रोपयन्ति कमपि पापपादपं, यस्मिन्नामूलतः समुत्पद्यन्ते तीक्ष्णकठिनकंटकास्ते, यैः परितः प्रकीर्णैर्दुर्गतौ विद्यमानाः सहन्ते प्रभृतं परितापं / तथा च-प्राणिप्राणवधे जीवा, लभन्ते तद्वन्धः मुहुः। न क्वचित् कोद्रवरुप्तैः शालिबीजादयो भुवि // 11 // अन्यच्च-वहभारणअन्मक्खाणदाणपरधणविलोवणाईहिं / सवजहन्नो उदओ दसगुणिओ एकसि कयाणं // 12 // पाणिवहो नरयपहो पावट्ठाणं जिणेहिं पन्नत्तो / पढमं दुहदवहेऊ वंसकुडंगि व अहरूद्दो॥ 13 // जीवाण विणासेणं परिवडियपवगुरूपवाएसु / हत्थठिएसु न हवइ परलोयपसाहणोच्छाहो // 14 // सो चाओ सलहिज्जइ जस्सि जीवाण कोडिसंघडणे / परलोयसाहापत्थं सन्धेजइ सरलया सम्मं // 15 // सवेसि जीवाणं पाणच्चिय वल्लहा जओ सग्गे / सक्को इच्छइ जीवियममिज्झमज्झम्मि किमिओवि // 16 // वसणेवि पाणदाणं कुणइ कुविन्दो व जो कलाकुसलो। सो संचेइ गुणरासिं दयोवलंमेण सुहएण // 17 // तम्हा जीवाविराहणं नियमुच्चिय सुगइकारणं होइ / परलोए इहलोए निम्मलजसपसरहेऊवि // 18 // चलजियघायविरया विसुद्धसम्मत्तपालणे निरया / बन्धुमई सिद्विसुया पसंसणिज्जा जहा जाया // 20 // तथाहि-आसि पुरा संखउरं नयरं परहयपुरवरसमाण / रिद्धीए अहियं पुण सया सईहिं अणेगाहिं / / 21 // होत्था तत्थ नरिन्दो महावलो रिउबलस्स निद्दलणो / अत्थिजणदिन्नदाणो अवरावरहुन्तकल्लाणो // 22 // सिट्ठी सागरदत्तो आसि तर्हि सायरू व गंभीरो / लच्छि व सया सहया भञ्जा पुण सम्पया तस्स // 23 // ताण सुओ मुणिचन्दो सोमो निम्मलकलाहि परिकलिओ / मित्तोदयम्मि न पहावहारमेसो लहइ किन्तु // 24 // विणयगुणरयणसहिया सुहिया दुहियावि ताण बन्धुमई / पइदिवसं मुणिपुगवपय AKALAMAUSAMACHAR Page #164 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 151 // मदनासक्तायाः सम्पदाया: पुत्रमारणेच्छा / LOCACAAAA%C45 कमलाराहणिक्करया // 25 // तह अस्थि दासचेडो नामेणं थावरूत्ति विक्खाओ / ताण प्पिओ विस्सासवाणं जो कञ्जसिद्धिकरो // 26 // वडवद्दयाभिहाणं नयरम्भासंमि गोउलं तस्स / पीऊसदाणदच्छं खीरोयसहोयरं आसि // 27 // सिट्ठी सागरदत्तो गन्तूणं तत्थ दुद्धघयमाई / आणाविऊण दिणाणाहयाण वियरेइ बहुवारं // 28 // बन्धुमईवि य साहूणं अन्तिए सुणिय जिणमयं सम्मं / थूलजियघायविरई गिन्हइ सम्मत्तसजुत्तं // 29 // तियससरिय व निम्मलदयावहा सत्वयावि गम्भीरा // अणुकूलं वियरन्ती खमाणुया दिवमाहप्पा // 30 // कारून्नपुन्नहियया जयणाए कुणइ गेहवावारं / बन्धुमई सिद्रिसुया जिणमयसवणेण संविग्गा // 31 // मणियं च-"जयणा धम्मजणणी जयणा धम्मस्स पालणी निच्च / तव्वुद्धिकरी जयणा एगंतसुहावहा जयणा" // 32 // जयणाए जमुणाए दयावगाहेण कीरमाणेण / अवणेइ पावपंकं बन्धुमई साविया निचं // 33 // अत्थंगयंमि सायरचन्दे नायरजणेण मुणिचन्दो। सिट्ठिपए संद्वविओ ईसरसिरलद्धसुपइट्ठो // 34 // घरकजाई तस्स य चिन्तइ तह थावरो सिणेहेण / अणुकूले पवट्टन्तो पुत्वपवाहेण गंग व // 35 // मयणसरसल्लियंगी थावरचेडंमि सम्पया रत्ता / रोद्दज्झाणोवगया दिणंमि अनमि चिन्तेइ / / 36 // भुंजिस्सं भोगमहं निस्संकं थावरेण कह ? सद्धिं / वावाइयमुणिचन्दा कह ? गिहसामि इमं काहं 1 // 37 // अमुणियकजाकजा लज्जं मुत्तूण थावरस्सेसा // अप्पाणं अप्पित्ता अहऽनया संपया भणइ // 38 // भद्द ! तुमं हणसु इमं गच्छन्तं गोउलंमि अणुयन्तो / जेण तुमं सुहय ! अहं गहिसामित्तमि ठावेमि | // 39 // पडिवजइ मृढमणो वयणं सो संपयाइ पावपि / महिलामोहहिमेणं डज्झइ जं नाणकमलवणं // 40 // जाणावइ मुणिचन्दं बन्धुमई वइयरं इमं नाउं / सो पुण तुहिकच्चिय चिट्ठइ गंभीरपरिणामो // 41 // कइवणदिणपजन्ते रूयमाणिं 1 / 151 // Page #165 -------------------------------------------------------------------------- ________________ NX भी जयन्तीप्रकरण प्रतिः / // 152 // C5 RAKHAR सम्पई पलोइत्ता / पुच्छइ मुणिचन्दो विय कीस अकम्हा तुम रूयसि ? // 42 // सा जम्पइ कवडमुही पइमासं गोउलाउ मुनिचन्द्रेण तुज्झ पिया / गंतूणं आणाविय घयाइ सयणाण वियरन्तो // 43 // तं पुण अलसो पुत्तय ! गन्तूण न गोउलं निहालेमि / स्थावरो तो सच्चमिह भविस्सइ परोवि कम्माइ खाइ परो // 48 // मुणिचन्देणं भणिया जणणी अम्मो ! पभायसमयम्मि / वडवद्दे हतः। गोयलए वच्चिस्सं थावरेण समं // 49 // तो जायमि पभाए मुणिचन्दो थावरेण सह जाइ / तुरगारूढो संकियचित्तो | पुण जमलिओ चेव // 50 // अह खड्डाए तुरओ उप्फिडिउं अग्गओ हवइ जाव / तो थावरोवि खग्गं आकर मग्गओ हन्तुं // 51 // पडिच्छायादिट्ठीए खग्गस्सायड्डणं मुणइ झत्ति / मुणिचन्दो ता तुरयं वाहित्ता गोयले पत्तो // 52 // अग्गिल्लएहि अइगओरवेण सम्माणिओ तओ एसो / भुत्तो य थावरेणं सद्धिं अपयासियवियारो॥ 53 // गोवाडयंमि पयरिक्कयंमि |* सिजं ठवेह रयणीए / / पिच्छामि जेण सम्म सवं गोवसहवच्छाइ // 54 // एवं मुणिचन्देणं आइडे थावरोवि हिट्ठमणो / चिन्तइ सुहेण एवं असहायमहं हणिस्सामि // 55 // रयणीए सिजाए खोडिं वत्थाइयं करेऊण / मुणिचन्दो खग्गकरो | | एगन्ते चिट्ठए जाव // 56 // ता एस थावरो बिय खोर्डि खग्गेण हणइ रुद्दमणो। मुणिचन्देण य असिणा पंचत्तं | पाविओ झत्ति // 57 // गोवाडयाउ बाहिं निणीचा पुक्करेइ मुणिचन्दो / हीरन्ति अहो धावह धावह चोरेहि गाविओ // 58 // कुढिएसु आगएसु नट्ठा चोरा हओ य थावरओ / गाविओ आगयाओ पयासियं इइ छइल्लत्तं // 59 // मुणिचन्दं काराविय मयकिच्चं थावरस्स गेहंमि / इंतं पिच्छइ जणणी चिन्तन्ती किमिह होहित्ति ? // 60 // दट्टण तं पुच्छइ नायाओ थावरो | किमिह वच्छ ! / तेणुचं सो पच्छा आगच्छह मन्दपयचारो // 61 // कीले असिमि सोणियगंधेण पिपिलियावलोएण। 15 // 152 // %9k Page #166 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मात्रा पुत्रो मारितः | पुत्रवधूना +5% 15-153 स्वस्रा मारिता। // 153 // | कुद्धा सुयंमि जणणी सुन्हाकीरंतपयसोए // 62 // अणुमाणनायथावरमरणुप्पचेण मन्नुणाऽकन्ता / घेत्तूण असिं जणणी छिन्दइ मुणिचन्दसिरकमलं // 63 // दिढकंचिवंधणेणं तत्तो मुसलेण वजकढिएण / सुन्हाए पइमारणकुवियाए सम्पया हणिया / / 64 // पुट्ठा लोएणेसा सा गिहेगदेसंमि ट्ठिया इइ बन्धुमई / भाउज्जायं न हणसि ? कीस तुम जणणीघाएवि // 65 // भणियमणाए गुरुजणवियनपडिवन्नम्मि जाजीवं / पाणाइवायविरमणवयंमि लीणं मणो मज्झ // 66 // इइ संसियंमि नियमे बंधुमई सलहिया पुरजणेण / धन्नासि तुम मद्दे ! जीए करूणेक्कपरिणामो // 67 // गिहसबस्सं रन्ना गहियं सुन्हा य चारए खित्ता / एसो पाणाइवाओ पावट्ठाणं हवइ पढमं // 68 // तथा मृषावादपापस्थानं महाप्रमादः। मृषाभाषिणो हि प्राणिनः प्रतिकूलगामिनः सरित्प्रवाहाः इव नीच-नीचपदाअयिण एव भवन्ति, समूलमुन्मूलयन्ति विश्वासविटपिनं, न भवन्ति चाभिष्टविशिष्टफलोपभोगभाजः किश्च-मूका जडाश्च विकला वाग्धीना वागजुगुप्सिताः। पूतिगन्धमूर्खाश्चापि जायन्तेऽनृतभाषकाः॥१॥ इहलोकेऽप्यसत्यनाम फल्गुफलाज्वलम् / विलोक्यते यशोनाशो मानभ्रंशो विडम्बना // 2 // अन्यच्च-असत्याभिसंबंधे अपहस्तित्वमात्मसात्करोति सुदर्शनं, हीयते धर्मैकरता, सुदूरमुपगच्छति लक्ष्मीरिति / दूरज्झियअववायं लहंन्ति मणुया जयंमि जसवायं / सच्चेणं चिय लोए दिवे विसमेवि घडसप्पे // 1 // अञ्जवसुरतरूमंजरिहै| परिमलपसरेण सच्चवयणेण / उल्लसइ सुरहिभावो अवगच्छइ असुहगन्धोवि // 2 // दूरं अवेइ तावो जियाण कालाइतत्त किरियासु / सच्चप्पवायसुरसरिपवाहअवगाहमाहप्पा // 3 // सत्वं तं पुण भन्नइ जीवाणं जं हवेइ सुहहेउ / जन्तुवधाय 5ACEBOOK Page #167 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणपतिः / सत्यस्य : व्याख्या असत्ये वसुनृपोदाहरणम् / // 154 // निमित्तं सचंपि य तं हवइ अलियं // 4 // उक्तंच-"अलियं न भासियवं, अस्थि हु सचंपि जं न वत्तत्वं / सच्चंपि होइ अलियं जं परपीडाकर वयणं" ||5|| दक्खिन्नेणवि जीवा अलियमखित्तमित्तदोसेण / वसुराय व निवायं लहन्ति नरयम्मि उववायं // 6 // तथाहि-जम्बुद्दीवे भरहे सुत्तिमई पुरवरी पुरा आसि // सुत्तिमईसु कइकहा जहा तहा विबुहसुहहेऊ // 1 // अभिचंदो तत्थ निवो निहोसो होइ जस्स करपसरो। भुवणच्छेरयभूओ पयावमहिमं पयासन्तो // 2 // तस्स सुओ वसुनामो विहावसू वइरदरदारूनिद्दहणो। अवरावरकीलाहिं समलंकियतेयसम्भारो // 3 // खीरकयम्बोझाओ पाढइ वेए नरिन्दकयपूओ। नियसुयपव्वयनारयसहियं वसुनामनिवकुमरं // 4 // अन्नदियहम्मि तेसिं तिन्हं उज्झायपायमूलम्मि / वेयज्झयणरयाणं अन्भासेणं गयणमग्गे // 5 // वच्चन्तेहिं विजाचरणसाहूहि भणियं वयणमिणं / एगो उड्डगामी नरयगई दोन्हमेएसिं॥६॥ खीरकयम्बो सुच्चा एवं संवेगमग्गमुवइन्नो // चिन्तइ मुणिन्दवयणं न अन्नहा होइ कड्यावि / / 7 // यत उक्तम्बालया जं च जम्पन्ति, जम्पन्ति साहवो सच्चवाइणो / जाइ उप्पाइयाभासा न सा हवइ अन्नहा // 1 // तो एस उवज्झाओ खमाइगुणरयणरासिपडिपुत्रं / चारित्तजाणवत्तं आरूहिउं तरइ भवसिन्धुं // 8 // अहिचन्दनरिन्देणं नियरजे अहिसिंचिओ वसू पुत्तो / रजसिरिं उवभुंजइ विक्कमगुणनीईए अणुरतं // 9 // अह अन्नदिणेऽरने, दिह्रो पारद्धिएण हरिणजुवा / तो तम्मि झत्ति मुक्को पच्छाहुत्तं वलइ बाणो // 10 // पुणो बाणो कहमेस वलिओ जो सवयावि अक्खलिओ / इय चिन्तन्तो पिच्छइ गन्तूणाऽऽयासफलिहसिलं // 11 // तो वाहेणं रनो निवेइयं रायजोग्गमेयन्ति / तो पच्छन्नं राया आणावइ तं सिलं झत्ति // 12 // सिप्पीणं समप्पइ तेहिं वि निप्पाइयम्मि रम्मम्मि / सिंहासणे निविट्ठो नजइ राया नहासीणो // 13 // सच्चेण चिय 154 Page #168 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 155 // असत्येन वसुनृपो | गोट्ठीए चिट्ठइ सावह नरक नारण भणियं न होइ एयति जाग रूओ विसंवाओ // 24 // कारून गतः। निच्चं चिद्रह गयणमि एस निवचंदो। एवं कित्तिनिमित्तं निवाइया सिप्पिणो सब्वे // 14 // पवयगनारयावि हु विहिणाऽवेइ निएस गेहेस / पाढन्ता सिस्सगणं निन्ति अणेहं सिणेहेण // 20 // एगमि दिणे दडे पत्वयगं एइ नारओ। गेहे नेहेणं गोदीए चिह सविहे चिरं कालं // 21 // पञ्वयगेणं तत्थ य सुणमाणे नारयमि वक्खायं / सिस्साणं वेयपयं अएहिं छगलेहि जदुत्वं // 22 // तो नारएण भणियं न होइ एयंति जेण इत्थ अया / भणिया गुरुहिं पुवं तिवरिसिणो वीहिणो चेव // 23 // मणियन्वयावसेणं बद्धामरिसाण ताण संजाओ। पन्चयगनारयाणं अइवगरूओ विसंवाओ // 24 // कारूनखीरजलही जीवविधायस्स वारणे रसिओ / जीहच्छेयपइन्नं करेइ अह नारओ तत्थ // 25 // एत्थ विवाए जाए अम्हाण पमाणमेस नरनाहो / एसो हु सच्चवाई सिद्धो अम्हं सहज्झाई // 26 // सुच्चा विवायमेवं जणणी पुत्तस्स पिच्छइ अवायं / तो कम्पमाणहियया पवयग भणइ एगन्ते // 27 // वच्छ ! पइन्ना तुमए कीस कया ? नारएण सह एवं / अलियं चिय जं वयणं अएहिं छगलेहिं जन्नति // 28 // नारयवयणं सचं जाण मए णेगहावि तुज्झ पिया / वक्खाणन्तो निसुओ अएहि वीहीहि जट्ठवं // 29 // पव्वयगेणं भणियं माइ तुमं कीस खेयमुबहसि ? / कम्माणुसारिणी जं मई सई परिणइ होइ // 30 // रयणीए वसुरायं निहुयं गन्तूण भणइ तो जणणी। नारयपवयगाणं वेयपयत्थे विवायमि / / 31 // जीहच्छेयपइन्ना तुम पमाणंति इत्थ पडिवनो। जह होइ सच्चवाई महपुत्तो तह करिजासु // 32 // इय वुत्तो वसुराया महनाणगुरुस्स पणयिणी एसा / एवं दक्खिन्ने] पडिवाइ झत्ति तव्वयणं // 33 // जाए पभायसमए निवम्भि अत्याण मंडवासीणे / पवयगनयरलोए समागए नारएणेवं // 34 // भणिओ वसुनरिन्दो सच्चबयणोसि तं जए सिद्धो / वेयज्झयणे अम्हं सहअज्झाई // 155 // Page #169 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / सत्यवादि तया नारदस्य सत्कारः। // 156 // HDDABA तुमं होसि // 35 // सच्चं सिषपुरमग्गो सग्गोवि य होइ सच्वयणेण / सबसुहाण निहाणं सच्चंच्चिय जाणसि तुमंपि // 36 // सञ्चासत्तो पुरिसुत्तमोति विकखायकित्तिसम्भारो। सोहग्गनिही जीवो अचुयसीलो जए होइ // 37 // कल्लाणमुत्तिजुत्तो मेरूगिरिन्दो व लोयमज्झत्थो। धम्मतुलाचउरासमगुरूत्ति तं लद्धमाहप्पो // 38 // तो कहसु नाणगुरूणा खीरकयम्बेण किमिह वक्खायं ? / तिवरिसियवीहिहिं अएहिं किं ? अहव छागेहिं ? // 39 // मोहमहागहगहिओ वसुरायनरयनयरपहपहिओ / भणइ असच्चं वयणं अएहिं छागेहिं जट्ठवं // 40 // रूट्ठकुलदेवयाए असञ्चवयणत्ति एस वसुराया / सिंहासणाउ सिग्धं निवाडिओ धरणिवम्मि // 41 // धिक्कारिओ जणेणं महयापावेण भारिओ झत्ति / पंचत्तं सम्पचो पत्तो नयरम्मि सो पावो // 42 // सक्कारिओ य बहुहा लोएणं नारओ सुगइगामी / एसो करूणारामो सफलो चिय सच्चवाइत्ति // 43 // पवयगो पुण नयरा पहाणलोएहि मिच्छवाइत्ति / निवासिओ अरनं गच्छइ घेक्कारहयतेओ / / 44 // एवमसचं वयण पव्वयगवसूहि जंपियं जायं / कमसो अणजवेओप्पत्तीओ पावट्ठाणति // 45 // अदत्तादानं पुनः तृतीयं पापस्थानं // धनं हि प्राणिनां बाह्याः प्राणाः। तदुपबृंहिता एवांतरा अपि प्राणाः चिरकालं स्थितिभाजो भवन्ति / धनार्थितया हि जीवाः प्रतिपद्यन्ते दास्यं, लजां परित्यज्य धनिनां पुरतः कुर्वन्ति लास्यं, अवन्ति चटूनि / अग्रत्तो धावमानाः प्रवर्तयन्ति पदानि पनि, प्रविशन्ति संग्राम, परिभ्राम्यन्ति ग्रामानुग्राम, व्रजन्ति देशान्तराणि, श्रयन्ति विवराणि, आरोहन्ति गिरिशिखराणि, तरन्ति वारांनिधि, अहर्निशं प्रतिपद्यन्ते सेवया सदा संनिधि, विशन्ति स्मशाने, निश्चला भवंति अर्थप्रदायिमंत्रसाधनाय ध्याने, धमन्ति धातून , पीडयन्ति जंतून् , क्रीडन्ति द्यूतेन, खेलन्ति साधं घूभूतेन, सर्वथा अपरापरव्या SE // 156 // Page #170 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 157 // अदत्तादानोपरि दुर्ललितगोष्ठिदृष्टान्तः। GICANSAR पारपरायणाः सहन्ते शीतातपतृष्णाबुभुक्षापराभवादिक्लेशं, नानुभवन्ति सुखलेशं / धनमूर्छया हि संपादयन्ति संदेहदोलाधि- रूढानान्तरमाणानिति / परद्रव्यापहारः प्रयच्छति प्राणिनां महतीं दुःखपरम्पराम् / अतः कथमिव अदत्तादानं न भवति महापापस्थानं / अन्यच्च परद्रव्यापहरणं प्रयच्छति कारागारं, वितरति दुःखसंभारं, ददाति प्राणापहारं, झटिति उद्घाटयति दर्गतिद्वारं // किंच-सयलसुहपावयाणं ताविकनिबन्धणं मणे काउं / परदबहरणपावं मुणन्ति मुणिणो महादावं // 1 // छेयणमेयणताडणबन्धणमरणाइ दवहरणेण / पावन्ति जिया सहसा जह एसा दुल्ललियगोट्ठी // 2 // तथाहि कमलं व वसन्तपुरं लच्छीलीलागिहं पुरा आसि / रायकरप्पसरेणं अच्छरियं जमिह सवियासं // 1 // सत्तेक्षणो विकमपंकेरुहपरमंडलपयावो / अरितिमिरनियरहरणो जियसत्तू आसि तत्थ निवो // 2 // पुत्वभवजियपुन्नपभावओ पवररिद्धिसंभारा। थेरी वसन्तसेणा आसि तया तत्थ बुद्धिमई // 3 // जूयाइवसणसत्ता तरूणतरट्टाणभट्टचट्टाण / हुत्था तम्मि य समए तम्मि पुरे दुल्ललियगोडी // 4 // आबालकालमुणिपुंगवाण चरणारविन्दसेवाए / चोरिक्कयायनियमो सावयपुत्तो य तत्थासी // 5 // सन्तो दन्तो सन्तो मायापित्तेहिं मोहमूढेहिं / विसयाऽऽसतिनिमित्तं खित्तो दुल्ललियगोडीए // 6 // अह सा रिद्धिसमिद्धा थेरी एगम्मि ओसवदिणम्मि / जेमावइ नयरजणं विच्छड्डेणं सबहुमाणं // 7 // तो रयणीए तीए गेहे गन्तूण दुल्ललियगोट्ठी। मुसइ धणं पुण एसा पत्तेयं ताण पाएसु॥८॥ लंछणममुणिजन्ती करेइ सरसेण मोरपिच्छेण / पणमन्ती जम्पन्ती पुत्ता मा मुसह मज्झ घरं // 9 // सावयपुत्तो एक्को न लंछिओ जेण जावजीवपि / चत्तमदत्तादाणं सुहगुरुपयमूलवसिएण // 10 // तो जायंमि पभाए रायसहाए समेइ सा थेरी। विनवइ देव ! मुसियं मह गेहं नयरचोरेहि // 11 // इह वत्थत्वावि कहं ? नजन्ति 14 // 157 // Page #171 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बचन्तीप्रकरणइतिः / मैथुन पापस्थानके विपाकविवरणम् / // 158 // AKALORE5% A इमे अदिहचोरिका / इय जम्पन्तम्मि निवे घेरीए लंछिया कहिया // 12 // तो नीइपहाणेणं आइट्ठो दंडपासिओ रना / उवलक्खिऊण सम्मं तुरियं आणेह चोरित्ति // 13 // आरक्खिएण तत्तो पलोयमाणेण नयरमज्झम्मि / सच्छन्दं विलसन्ती सा दिट्ठा दुल्ललियगोट्ठी // 14 // तो मोरपिच्छलंछण-दिट्ठीए लक्खिया इमे चोरा। संगहिऊणं सिग्धं आणीया रायपासंमि // 15 // विलसियसेसं दवं थेरीए अप्पियं नरिन्देण / ते दुल्ललिया चोरा निग्गहिया पाणहरणेण // 16 // जो पुण सावयपुत्तो अदत्तदाणस्स पावट्ठाणस्स / आजम्मगिहियनियमो स होइ हाणं सिवसुहाणं // 17 // अदत्तादानकथानकम् / मैथुनं पुनः चतुर्थ महापापस्थानं, तद्धि संसारवल्याः कन्द इव, महामोहवीचीपरिस्पन्द इव, जडाशयसरःस्पन्द इव परमहिमनिपाताविकस्वरतया कुन्द इस वर्ण्यते लब्धवणः / इदं हि पशूनामपि साधारणं, दुरन्तव्यसनपरम्पराकारणं सुगतिमार्गप्रस्थाननिवारणं अत्यन्तमात्मनि लाघवावतारणम् / मैथुनासक्ता हि प्राणिनो अगम्येऽपि ऋच्छन्ति, अपेयमपि पातुमिच्छन्ति, कुन्दोज्वलेऽपि स्वकुले कलंकं यच्छंति, सर्वथा दुर्गतिपथेनैव गच्छन्ति / मिथुनार्थिनश्च जीवाः क्लीवा हारयन्ति दःखार्जितान्यपि धनानि, लभन्ते मुहुनिधनानि / मैथुनभोगभमीनां हि भविना रूपादिगुणसमग्रमानुषजन्मोपलम्भेऽपि न सम्पद्यते देवतत्वावगतिः। न भवति स्वगुरुपादप्रणतिः। न जायते जिनप्रणीतसिद्धान्तश्रुतिः / न स्यात् क्वचिदप्यर्थे विरतिः। सर्वथा न ते वर्जयन्ति मिथ्यादर्शनं / नावर्जयन्ति सम्यगदर्शनं / नोपार्जयन्ति पुण्यं परमपदोपलम्भोदर्के / न तर्जयन्ति पापमित्रसंपर्कम् / अन्यच्च-कामन्धाण जियाणं विसयग्गामेसु संचरन्ताणं / भवगत्तम्मि निवाओ दुहसम्पाओ हवइ SEEॐ544 A % Page #172 -------------------------------------------------------------------------- ________________ + // 159 // कामकरिराओ // 2 // मण // 3 // तदुपरि वणिकसुतोदाहरणम् / इन्ति // 4 // सञ्चं // 1 // ते हुन्ति पुरिससीहा, गुणगणवणभंजणेकदुल्ललिओ। इह जेहिं अक्खलिओ निदलिओ कामकरिराओ // 2 // | बंभवए वदृन्ता थेरा देवाण हुन्ति नमणिज्जा / वझुप्पत्ती लोए तेहिंतो होइ सच्चमिणं // 3 // जे पुण विसयासत्ता परदार- विवजणेवि असमत्था / इहलोयप्पडिबद्धा अमुणियतत्ता जए हुन्ति // 4 // तेसिं दहेइ अंग पच्छायावो दवो व दिप्पन्तो। अन्नायमाइगमणे वणियसुयाणं व गिरिनयरे // 5 // तथाहि-अत्यि सुरद्वादेसो गामायरनयरगोउलाइनो / सत्तुंजयरेवयगिरिमहल्लतित्थेहिं सम्पुनो // 1 // तत्थासि वरं नयर गिरिनयर नाम सुरपुरसमाणं / जत्थ तिवग्गावअणसज्जा सुयणा य अस्सायं // 2 // रूबाइगुणनिहीओ तिनि सहिओ धणडपुत्तीओ। तत्थ निवसिसु उब्बणनवजोव्वणसुभगमुत्तीओ // 3 // तत्थेगं बुद्धिमइं परिणाइ जिणदत्तसावओ गुणवं / 4545454A ASTRAM RCHCOOK पुचेहि सिणेहोवि // 5 // उजाणे अन्नदिणे ताओ वणदेवय व कीलन्ति // दिट्ठा कुसुमालेहिं (चौरैः ) मणहरनेवत्थरम्माओ // 6 // हरिऊणं हिडेहिं पारसकूले महल्लमोल्लेण / विक्कीया संगहिया गणियाहिं अइवियड्डाहिं // 7 // पणरमणीण कलाणं पारगया हुन्ति तयणु सिक्वविया / भोगीणं अइइट्ठा जाया पायालकन्न व // 8 // ताण सुया य गुणुत्तमदसलग्गा कमेण तारूने / दिप्पंति कुलपईवा पवट्टमाणेण नेहेणं // 9 // सुहओ न होइ सययं जलही बंधेण सेलकढिणेण / रामस्स व सीयाए भोगो जणयस्स लच्छीए // 10 // लजिजइ तणएहिं सुकुलुप्पन्नेहि सिक्खियकले हिं / जणयसिरीभोगेहि जह जणणीवपाणेण // 11 // ते धन्ना कयपुन्ना सुकुलुप्पन्ना सुया सुहाविन्ति / जे नियभुयसमुवञ्जियलच्छीसंभोग // 15 Page #173 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ललियंगा // 12 // इय संलावे एगमि वासरे ताण तिन्हतणयाण / पारसकूले गमण होइ धणोवजणाहेउ // 13 // स्वदारसजयन्ती- भवियत्वयावसेणं वेसावस्साण ताण जणणीण / वुच्छा गेहेसु मणिमयभूसणरमणीयसिंगारा // 14 // किं पुण जिण- न्तोषी जिप्रकरण दत्तसुओ परदारपरन्मुहो महासत्तो। धणीयमवियारचित्तो न होइ विसएसु आसत्तो // 15 // तो बुद्धिमई एसा वेसा नदत्तपुत्रः, प्रतिः / चिन्तेइ विम्हयवसेण / तारून्ने लावन्ने सन्तो दन्तो कहं एसो 1 // 16 / / किं ? सुगुरूणं निम्मलगुणमणिरोहणगिरीण द इतरयोर्जातं सविहंमि / लद्धं विवेयरयणं तेण हयं मोहसंतमसं // 17 // तो मियमहुरगिराए पुच्छइ इय चिन्तिऊण बुद्धिमई / तुझे मातगमन॥१६ // कओ पुराओ इहागया कहइ मह देव! // 18 // अम्हे तिन्नि वि मित्चा गिरिनयरनिवासिणो वणियपुत्ता। बालत्ते महत्पापम् / तेणेहिं हरियाओ अम्ह जणणीओ // 19 // इय भणिए तेण सा भणइ इमे तिन्नि किं तर्हि वणिणो / जिणदत्तो पियमित्तो धणदत्तो सोम! निवसन्ति ? // 20 // तेणोचं किं कजं? तुम्हाणं तेहिं दूरवासीहिं / तीए वुत्तं अम्हं ते पइणो हुन्ति तिन्हंपि // 21 // संभंतेणं तेणं भणियं तो खाइ मज्झ जिणदत्तो। जणओति तओ एसा रोवइ कण्ठमि घेत्तूण // 22 // हा पुत्त पुत्त वच्छल ! कह मह एसा दसा दरोत्तारा / तइलोयकुच्छणिजा जाया पावाणुभावेण // 23 / / एवंचिय सलहिजह पुत्तय ! इह मह अमग्गपडियाए / दइवेणवि नडियाए जमणायारो न संजाओ // 24 // ता सिग्धं गच्छ तुम इमं वइस्साण कहसु निम्मन्तं / जे ते दुक्कम्मवसओ वुच्छा जणणीण गेहेसु // 25 // तो माइवयणओ सो तुरियं गन्तूण ताण तं कहह / तेवि य नाऊणेवं सुइरं निन्दन्ति अप्पाण // 26 // जणणीगमणकलंकियदेहाणं अम्ह कह हविज इह सुर्छि / IJ तित्थेण व दाणेण व तवेण विणएण किं गुरूणा // 27 // धनो जिणदत्तसुओ सदारसन्तोसजाणवत्तेण / वसणसमुद्दो M // 16 // History Page #174 -------------------------------------------------------------------------- ________________ रूदो नित्थिनो जेण लीलाए // 28 // अम्हे अन्नाणन्धा जणणीगमणमि पावकम्मम्मि / खुत्ता हाहा पाणा कहं अयाणा न गच्छन्ति ? // 29 // धारिन्तोवि य वित्तं पुनं जेणेस रोहिणीरमणो। ईसरसिरोनिवासं कुरंगमलिणो लहइ नेव // 30 // तो अम्हे कह ! जामो नियए नयरंमि सयणमज्झम्मि। जाणतावि य जणणीगमणं पावं दुरप्पाणो // 31 // अंसुजलेण हिययत्थलंमि सिंचंति मन्नुतरूमूलं / दो मित्ता दट्ठणं जिणदत्तसूयं महासत्तं // 32 // जिणदत्तसुएण एवं वुत्ता मित्ता किमित्थ सोएण ? / बहुदविणेणवि संपइ मिल्हाविजन्तु जणणीओ // 33 // अम्ह रयणं सोच्चिय गुणरासी होउ सबहा गरूओ। वेसत्तणावडाओ जेणेया उद्धरिजन्ति // 34 // जत्थ तिवग्गपसिद्धी सो दिजइ जेहिं माणुसो जम्मो। इहलोयदेवयाई पियराइं ताई भन्नन्ति / / 35 // अनं च-अणुहवइ दुहं जणणी जमेगदिवसंमि गम्भवहणेण / तस्स न निक्कयदाणे सक्को पुत्तो जयवि चक्की // 36 // दुक्कम्मबन्धणेसु गणियागेहेसु गुत्तिसरिसेसु / दुक्कम्मरायखित्ता मोयाविजन्तु जणणीओ // 37 // जिणदत्तसुएणेवं वुत्ता ते हुन्ति अमियसंसित्ता / दाऊण बहुं दविणं तो मोयाविन्ति जणणीओ // 38 // अम्हाणमिमे पुत्ता पोयच्चिय जेहि एस उत्तिन्नो। अब्बावारसमुद्दो जलजन्तुभरेण संकिन्नो // 39 // इय हिट्ठाओ ताओ जणणीओ जाव जाणवत्तेसु / आरूढाओ नियघरगमणोम्माहेण गरूएण // 40 // पीइमइकंतिमई एयाओ तयणु ताव चिन्तन्ति / कह सयणाणं पुरओ दाइस्सामो नियमुहाई य // 41 // जे अणुयावो दावो अम्ह मणं काणणं दहह अहियं / तो उण्हा तेसिं निसासा धूमलयाउ व पसरन्ति // 42 / / घणकालुस्सेणऽम्हं छन्ने मुहचन्दमंडले कंती / सयणाण चउराणं लोयणसुहया कहं ? होजा // 43 // गोत्तम्मासे दुचरियसुम 354AECEC%A5% * मोचापिताः ताः पुत्रैध नदानेन है तथाऽपि दू| यो पश्चाचापेन समु| द्रे पातः। // 161 // Page #175 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणपतिः / जननीसहितोजिन दत्तपुत्रो गिरिनगरं सुखेन प्राप्तः। // 162 // 15C%ENTRA रणनिविडोपलोहपडिहाए / पसरती य खलिस्सइ सरस्सई अणुदिणं अम्ह // 44 // पुत्तावि इमे अम्हाण सुंमुहं नहि मुहं धरिस्सन्ति / अकहियं छहल्ला तो दुचरियं मुणिस्सन्ति // 45 // आगच्छह वच्छा इह आसह इच्छाइ बयणविनासं / नासिस्सइ अम्हाणं असमायारो सरिजन्तो // 46 // अणुसमयं चिय दुन्हं हवन्ति एयाण एवमुक्कलिया। अणुहूयआवयाणं किल सायरपाडिसिद्धीए // 47 / / उन्नयगोचभवाण विनीयगईणं नईण व न अम्ह / अन्नागइत्ति ताउ तओ निमञ्जन्ति जलहिंमि // 48 // अम्हाणं नहि जुत्तं नियघरगमणं ससल्लहिययाणं / इय चिन्तिऊण ताणं पुत्ता दीवन्तरं पत्ता // 49 // जो पुण जिणदत्तसुओ सुइगुणसंपत्तदिणयरपयावो / जणणीसहिओ सिग्धं निविग्धं एइ गिरिनयरे // 50 // विनाए परमत्थे जणमि गुरुओ फुरन्तघणतेओ। एसो होइ महग्यो तावोत्तिनं सुबन्नं व // 51 // सवेसि पि गुणाण मंडणमिणं दोसाण संखंडणं कल्लाणिक्कनिहाणमक्खयसुहस्सऽच्चन्तियं कारणं / देसेणावि धरन्ति सीलमणहं जे मेरूचूलाऽचलं, ते धन्नावि लहन्ति सिद्धनयरीरजसिरिं सासयं // 52 / / मैथुनाख्यानकं चतुर्थ समाप्तम् // परिग्रहोऽपि प्राणीनां महात्पापस्थानं / यतः परिग्रहो राहुग्रह इव धर्मध्यानेन्दुमंडलग्रासलालसः संपादयति महामोहान्धकारं / प्रवर्तयति अधिकलोभपिशाचसंचारं / व्यपोहति मार्गप्रचारं, करोति न क्षत्रविस्तारं / परिग्रहाग्रहव्यग्रचित्ता हि जीवाः क्लीवाः सर्वथा न कुर्वन्ति औदार्यादिगुणसंग्रहं / न पवित्रयन्ति देवगुरूचरणारविंदपर्युपासनास्वर्द्धनीप्रवाहेण विग्रहं / न प्राप्नुवन्ति सद्गुरूपदेशदानानुग्रहं / न कर्तुमीशते क्रोधादिरिपुनिग्रहं / / सावयकुलमणुयत्ते सुजाणवत्ते भवन्नवे पत्ते / निविडिजए REASONGCRICASSOCHACK // 162 / / Page #176 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 4%AC परिग्रहे लोभनन्दि दृष्टान्तः। ACTRES जलोहे अन्तो लोहे फुरन्तंमि // 1 // इच्छाए जो माणं धणमि न करेइ किंपि मुच्छाए / आरंभेणं बन्धइ नारयतिरिएसु सो आउं // 2 // लोहपिसायग्घत्था अपसत्था अत्थमेलणविहत्था / सबस्स हरणे मरणं लहन्ति इह लोहनंदि व // 3 // तथाहि-लच्छीनिवाससुभगत्तणेण अणुहरियं विन्हुवच्छयले / नयरे पाडलिपुत्ते जयसेणो आसि नरनाहो // 4 // तत्थ |8 जिणदत्तसिट्ठी सम्मदिट्ठी सुसाहुजणगोट्ठी / धणधन्नाइपरिग्गहइच्छापरिमाणसंतुट्ठी // 5 // अस्थि ववहारसुद्धी जिणधम्माराहणेकथिरबुद्धी / विसएसु चत्तगिद्धी / पइकखणं अहिलसियसिद्धी // 6 // लोहपिसायग्घत्थो अत्थसंगहविहत्थो / अन्नोवि आसि सट्टो नामेण लोहनन्दोत्ति // 7 // पुरपरिसरंमि तत्थ य समुद्ददत्तो महिड्डिओ वणिओ / लोओवयाररसिओ सरवरमेगं खणावेह // 8 // कट्ठोवलेवलित्ता पुराणपुरिसेहि नूमिया (छादिता ) तत्थ / उड्डेहिं ( खनकैः ) खणन्तेहिं कणयकुसा तयणु उवलद्धा // 9 // तविक्कयकजेणं आवणमग्गम्मि ते समाइन्ना / दो लोहमए नाउं गहिया जिणदत्तवणिएण // 10 // कणयमयत्तं नाउं परिग्गहो होह मज्झ अहिओत्ति / जिणमन्दिरंमि वियरइ सन्तोसपरायणो एसो // 11 // तो नियमभंगभीओ बीए दिणे एस गिन्हइ न एए। भूरिगुणो हु सयं चिय सुन्नसमीहो कहं होउं // 12 // तो लोहनन्दीपासे कुसहत्था बंभण व ते जन्ति / जाणन्तोवि स यच्छइ आयसमुल्लं तइच्छाए // 13 // भणइ य सो तयहुत्तं दिणेदिणे मज्झ आवणे | एए / आणिजह दाहिस्सं वेयणयं तुम्ह जं इ8 // 14 // मुलं सुयाण सल्लं हियए अहियं स देइ पइदियई / अस्थिकवल्लहो सो गिद्धो न कहेइ परमत्थं // 15 // लोहं चिय सो पयडइ वढइ लोहोवि भूरिविहवेण / संहरिसेणिव बालो सिट्ठो लोहनंदिति // 16 // अहवित्थ विहवतन्हाखाणी दुप्पूरणी चियं पसिद्धा। कुसहत्था जत्थ पुणो S %ACANCIAL -1-950 Page #177 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भण्डारी कृतो जिनदत्तो राज्ञा | विनाशितो च लोभनन्दी। खणंति उड्डा किमिह चित्तं ? // 17 // विविहप्पयाररक्खाजोगंमि धणंमि पेयवण सरिसे। गिद्धा सपखवाया अहोजयन्ती- निसि ठन्ति अच्छरियं // 18 // धणमुच्छाछुरियाए लोहमईए वयाइं छिन्दन्ति / निग्धिणकम्मा जीवा पावट्ठाणं प्रकरण- तओ एसा // 19 // अनम्मि दिणे गामंतरम्मि सयणेहि लोहनन्दीवि / पर्वमि आय रेणं भोयणकोण आहूओ पृतिः / / / 20 // गच्छन्तेणं पुत्ता वुत्ता कुसया अवस्स घेतवा / हत्थाओ उड्डाणं तदभिप्पएण मुल्लेणं // 21 // अह दिन्ताणं ताणं गहिया न सुएहि अहियमुल्लत्ति / अन्नवणियावणेसुवि तहा न अग्घन्ति ते कुसया / / 22 // अप्पत्ति हीच्छियमुल्ला // 164 // विसायमावन्नएहि उड्डेहिं / मुक्का कुसा कराओ झडित्ति धरणियले पडिया // 23 // गाढमन्नोन्नघट्टणविहडियकट्ठोवलेवयं कणयं / आरक्खियपुरिसेहिं दिलृ दिपन्तमह सहसा / / 24 // ते तेहिं रायसविहे नीया पुट्ठा य रायणा उड्डा / कणयकुसा केवइया ? कत्थ वलद्धा ? कहिं दिना ? / / 25 // सिट्ठी समुदत्तो देव ! पुरे इत्थ तस्स वयणेण / परिसरसरंमि खणिमो मुल्लेणं तत्थ एगमि // 26 // खायमि कुसा लद्धा गहिया जिणदत्तसिविणा दोन्नि / निच्चं च लोहनन्दी गिन्हन्तो ते कुसे देव ! // 27 / / अज्ज पुण तस्स पुत्ता अम्हं मोल्लं न दिन्ति इच्छाए / अन्नेवि तहा वणिणो निचिन्नेहिं तओ चत्ता // 28 // इय विनत्तो तेहिं जिणदत्तो राइणा समाहूओ / पुट्ठो दो चेत्र कुसा तुमए किणिया न सेसावि // 29 // कम्हा ? | भो! जिणदत्तो जहडियं विनवेह रायाणं / देव मए लोहमए नच्चा दो चेव संगहिया ॥३०॥पच्छा कणयमया ते नाया दिना Mय चेइयहरम्मि / इच्छापरिमाणवयं जं अहिय होइ महं तेहिं / / 31 // जाणन्तो वयभंग करेमि कह ? नाह लोहमोहन्धो। | सेसावि कुसा सामिय ! न मए गहिया अओ चेव // 32 // सुणिऊण एवं राया विम्हयरसपसरपल्लवियचित्तो / चिन्तेइ FANARAASARAM मा॥१६४॥ Page #178 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 165 क्रोधविषये प्रसनचंद्र मुनि दृष्टान्तः। अहो विवेओ सावयधम्मस्स एयस्स // 33 // जेसि पगइसरूवं रयतममुकं व होइ सत्चहियं / तेसिं गुरूवएसा कहं विवेओ हवइ दुल्लहो ? // 34 // एसो अकुच्छणिो गरूओ कल्लाणसंपयासहिओ। सामच्छिऊण एवं सिरिघरसामी कओ रना // 35 // अह लोहनन्दिसिट्ठी तुरियं गामन्तरा घरं एइ / पुच्छइ पुत्ते वच्छा गहिया तुझेहिं किं कुसया ? // 36 // पुत्तेहिं पडिवुत्तं लोहकुसा ताय ! अइसयमहग्या / किं तेहिं गहिएहिं मुलंपि न जेहि उद्वेइ // 37 // सुणिऊण वयणमिण लोहग्गहगहियमाणसो सिट्ठी / गहिऊण कुर्सि भंजइ पाप तेहि मग्गओ // 38 // इत्थन्तरम्मि रायाएसेणं दंडवासिया पत्ता / ते दिन्ति तस्स मरणं हरणं सबस्स वित्तस्स // 39 // ॥परिग्रहप्रमाणाख्यानकं पञ्चमं समाप्तम् // तथा षष्ट क्रोधपापस्थानकम् / क्रुद्धा हि प्राणिनो विरुद्धाभिसन्धयः कृष्णलेश्यानुविद्धा रौद्रध्यानमापूरयन्तः कार्याकार्यविवेकविकलाः पंचेन्द्रियजीवहत्यां विधाय अधोगतिनिबन्धनगुरुत्वनिमित्तं चिक्कणदुःकर्मलेपमुपार्जयन्ति / तथा चोक्तं-क्रोधः परितापकरः सर्वस्योद्वेगकारकः क्रोधः। वैरानुषंगजनकः क्रोधः क्रोधः सुगतिहन्ता // 1 // कोहो दव व जलिओ दहेह नन्दणवणं व गुणरासिं / जम्मि सुमणोवियासिपरिमलदरीकरणदच्छत्तं // 2 // जीवदय च्चिय मूलं कप्पियफला धम्मकप्पवरतरूणो / कोहखणित्तखयाए कहमक्खयं होइ हु खमाए // 3 // कोहकसायपिसाए वियम्भमाणम्मि भवमसाणम्मि / संतावसोयहेऊ हवइ च्चिय जीवसंहारो॥४॥ कोहंमि समुच्छलिए चलिए चित्तमि पित्तसंवलिए / सम्मदिट्ठिविणासे पडन्ति जीवा भवन्धुम्मि // 5 // दुरुझियजीवदओ जाणं देहमि कोवचंडालो। निवसह नियगेहे इव पवित्तया ताण कह होउ ? 15 1325ECARRORSCREGA 6 // 165 // Page #179 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणपतिः / A समवसृतभगवतः पार्श्वे प्रसमचन्द्र रानो दीक्षा। // 166 // // 6 // कोवलन्तो जीवो अन्तमुहुत्तेण सत्तमधराए / जोग्गं अजइ कम्म पसनचन्दो जह मुणिन्दो // 7 // तथाहि-पोयणपुरे पुरन्दरपुररिद्धिए रम्मे सुपरविन्देहिं / राया पसन्नचन्दो आसि पुरा कुवलयाणन्दो // 8 // पसरन्तआवयाण निरोहदच्छा सुहावहगहीरा / सत्ताहियपुरिसोत्तमसंगयसंपत्तसुंदेरा // 9 // सव्वासापरिपूरणसुचिन्नबहुसंखसुथिरमजाया / रजंमि तस्स सचिवा दयालया जं समुद्दा ते // 10 // चिन्तिजन्ते रजे तेहिं लच्छी हवेइ सा तस्स / ससुरासुरेवि लोए जीए जाओ चमकारो // 11 // एवमखंडियमाणो चंडपयावो दिणिन्दतेयस्सी / विन्दु व रायलच्छि माणइ सोहग्गसंभारो / / 12 / / अह तत्थ एइ मयवं तइलोकदिवायरो महावीरो। उजाणे समोसरणे पसन्नचन्दो निवो नाउं // 13 // कारावियनयरच्छणो मोयावियगुत्तिबद्धदुहियजणो / गच्छइ सबिड्डीए वन्दइ परमाए भत्तीए // 14 // आइयनइ धम्मकह मिहिरमहं मोहतिमिरसंहरणे / पडिबुद्धहिययकमलो पावइ चारित्तवरलच्छि // 15 // थेरम्भासनिवासी सज्झायज्झाणलीणमणपसरो / सच्चं पसन्नचंदो रायरिसी होइ दियराओ // 16 // सत्थत्थकलाकुसलो समिईपहे नियमोहमहिनाहो / सवसीकयखमाए मुणिराओ विहरइ पसन्नो // 17 // जस्साणा धारिजइ सिरसा विसएसु | तिहयणे सयले / रायरिसिणा अणेणं विजिओ एसो महाराओ // 18 // दोसावसारणेणं पसन्नचंदेण पुन्नवित्तेण / तबतवणेण विचित्तं किजइ कोसियमहाणन्दो // 19 // धम्मज्झाणसणाहो अंगीकयनिविडसीलसन्नाहो / निजिणियकोहजोहो मुक्कविरोहो इमो साहू // 20 // विहरइ जिणेण सद्धिं गामागरनगरमंडियं वसुहं / पत्तो कमेण तत्तो रायगिहे मगहादेसमि 2 // 21 / / भयवं वीरजिणिन्दो समोसढो देवदाणवाणन्दो / वइभारगिरूजाणे गुणसिलए नन्दणसिरीए / / 22 // सोवि य NCHAR Page #180 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 167 / / मुणी महप्पा पसन्नचन्दो पलंबभुयदंडो / रायपहसविहदेसे धम्मज्झाणे थिरो होइ / / 23 / / अह अत्थाणनिविद्रो सेणियराया सुमुखनिउत्तपुरिसेहिं / बद्धाविओ जिणागमकल्लाणेणं पहिडेहिं // 24 // तो तेसिं पारिओसियदाणं दाऊण आसणं मोत्तुं / | दूतेन तस्य सत्तदुपए चलिउं तत्थ ढिओ वन्दइ जिणिन्दं // 25 // सिंहासणे डिओ पुण महसवं कारवेइ नयरम्मि / कारागारविसुद्धिं | व्रतस्वीकाचेयपूयाइयं राया // 26 // सविड्डीए नायरलोएणं वीरवन्दणमणेण / आगन्तवं घोसणमेवं कारइ पडहपुत्वं // 27 // न्हाओ रप्रशंसाकयवलिकम्मो सिंगारियहत्थिरायसेयणगे | आरूढो सियच्छत्तो ढलन्तसियचामराडोवो // 28 // चउरंगबलसमग्गो कृता। बन्दिजणुग्घुट्ठमंगलगुणोहो। सुररायसरिससोहो जिणिन्दवंदणकउम्माहो // 29 // सेणीओ महानरिन्दो नयरा नीहरइ रायगेहाओ / सुमुहो दुमुहो य दुयं तप्पुरओ जंति दो पुरिसा // 30 / / सुमुहो पसन्नचन्दं मुणिन्दमवलोइऊण साणन्दो। वियसियकुवलयसच्छहनयणो वयणं इमं भणइ // 31 / / धन्नो एस मुणिन्दो जेण महामोहगयमयन्देण / अणुरत्ता रायसिरी पडग्गतिणं व परिचत्ता // 32 // भन्नइ लोए लच्छी एसा किल होइ वारूणीभइणी / तीए उवभुत्ताए न जस्स मुच्छा महच्छरियं // 33 // पुरिसोत्तमस्स देसणमेयस्स सुदंसणं हवइ जेण / मूलं छिज्जइ सहसा पावारीण समत्थाणं // 34 // तेच्चिय सूरा ते पयडपोरिसा ते वहन्ति वीररसं। जे अंतरंगरिउवग्गनिग्गहे विक्कमोक्करिसा // 35 // अहिमाणमत्तमवमनिऊण संसारकारणं रजं / धन्ना हु मोक्खमग्गे लग्गा कम्मट्ठनिट्ठवणे // 36 // एएण महामुणिणा हरिणा मयजूहनिग्गहपरेण / खेचमि विणयसालिणि सुकयकणाणं कया रक्खा // 37 // सुमुहो पसन्नचंदा उल्लसिओ सो समुद्दमुत्तिधरो / दुमुहो विप्पियमावो चक्को इव विरससद्दालो // 38 // तथाहि-सुमुह तए एस मुणी अमुणियतत्तेण संत्थुओ कीस / अणहुन्त Page #181 -------------------------------------------------------------------------- ________________ *64 श्री CCASI दुर्मुखेन जयन्ती प्रकरणपतिः / // 168 // A गुणुल्लवणं लवणं माहप्पसस्सस्स // 39 // एसो कन्नविसेणं ग्वत्थो सुरलोयलच्छिलोहिल्लो। रजंमि अकयकरणं पुत्तं ठविऊण पवइओ // 40 // संपइ पुत्तो पोयणपुरंमि पडिवक्खलक्खरुद्धंमि। खुद्धमि सयललोए वह पाणाण संदेहे // 41 / / तस्य निचइऊणं रजमिणं कमागयं जं वयं गहियमेयं / रायाण पयापालणधम्मो चत्तो तओ इमिणा // 42 // एयमि पुत्तवसणे न्दा कृता कसिणे पुरदाहधूमलहरीहिं / होही इमस्स बसे नूणमकित्ती पडाय व // 43 // पोयणपुरवरभंग मन्ने अचिरेण जेण दततः क्रोधरिउवग्गो / उग्गो दढं विलग्गो बग्गन्तो वग्गुदलसग्गो // 44 // रजे रडे नढे सुमरिजन्ते परिणि / अणुतावो / इमिणा प्रादुर्भावः। वयंमि कट्टे पडिवने कह न होहित्ति ? // 45 // गोसमणमाहणाइयविधायपावेण एस आलिद्धो / मुद्धो पसंसणिजो कहं हवेजा ? अणा छ // 46 / / सुमुह ! मुणिन्दो एसो पसन्नचंदोवि संपयं नूणं / एएण अत्तएणं मएण कलुसीकओ होही // 47 // सुमुह ! तइच्चिय वुच्चइ एसो साहु पसन्नचन्दोति / अम्हे पुण जंपेमो एसो दोसायरो सच्चं // 48 // पुबज्जियसुकयएणं सवसं रजं चइत्तु एस निवो / संसइयपरलोइयसुहामिलासी महामृढो // 49 // अह दुम्मुहदुवाणी वंसकुडंगी जणेइ सल्लन्ती / हिययस्थलंणि मुणिणो कोवं दावं महातावं // 50 // उच्छलइ किन्हलेसा बहला सभाणनयणपडिकूला / पसरेण खमाभोगं कलुसन्ती धूमकुरूलि व // 51 // डज्झइ करूणावल्ली मूलगुणुल्लसियपल्लवमहल्ला / तत्तो खणेण दट्ट चिररूढं संजमवणंपि // 52 // जे एस रिसी चिन्तइ पसन्नचन्दो मएवि जीवन्ते / मह पुत्तो सत्तूहि रूद्धो खुड्डोत्ति दुस्सहमिणं // 52 // तेसिं रिउवग्गाणं वग्गन्ताणंपि रणरसुच्छाहो / सन्नद्धबद्धकवओ नचाविस्सं कबन्धाई // 53 // मंडलियचावदंडो पयंडनारायघायसंघाओ / तेसिं गयन्दमत्थयमुत्तामारं गहिस्सामि // 54 // चकेहिं विमुकेहिं सवाणिएहि रणंगणसरंपि / 15 // 168 // NCARNI Page #182 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 169 // | श्रीप्रसन्न चन्द्रमुनिविषयकप्रश्नोत्तरं भगवतः। CACKASSE%ACAN सत्तूण सिरसरोरूह-मंडियमझ करिस्सामि // 55 // रूद्दज्झाणपविट्ठो चिट्ठइ जावेस अइसयकिलिट्ठो / दिट्ठो ताव समागयसेणियरमा पहि पहिवेण // 56 // आयावन्तं दई पसन्नचन्दं मुणिन्दमवईयो। गयखंधाओ राया बन्दह परमाए भत्तीए / / 57 // एसोवि रिसी मणसा सत्तुनिसुम्भणपवसरंभो। पिच्छइ नेव नरिन्दं न धम्मलाभं पयच्छेद // 58 // चिन्तइ य महाराया एस मुणिन्दो निरीहमणकमलो। धन्नो ज्झाणपवनो निचलचित्तो महासत्तो // 59 // एएणं झाणेणं पवड्डमाणेणं कहवि अवसाणे / गच्छइ कम्मि विमाणे ? इय पुच्छिस्सं जिणवीरं // 60 // सामच्छिऊण एवं राया हथिम्मि सिग्धमारूढो / गच्छइ जिणिन्दचरणारविन्दवन्दणकउम्माहो // 61 // पत्तो सेणियराया वेभारगिरिन्दसन्निहाणम्मि / तत्तो विहिणा पविसइ गुणसिलउजाणओसरणे // 62 // वन्दइ वीरजिणिन्दं हिट्ठो तिपयाहिणीकरेऊण / संत्थुयसम्भूयगुणो आसइ ईसाणदिसिभाए // 63 // झाणे पसनचन्दो जम्मि मए वन्दिओ रिसी भयवं / तेण कहि सुरलोए गम्मइ ? पुच्छइ निवो तत्तो॥ 64 // अह भणइ जिणवरिन्दो नरिन्द एएण ज्झाणबन्धेण / गम्मइ सत्तमनरए घोरदुक्खाण नियघरए // 65 // मेहगहीरसरेणं जिणभणियं सेणिओ राया / विज्जुज्जोएणिव लोयणाई मीलेइ खणमिकं // 66 // चिन्तइ य निवो मुणिपुंगवाण सज्झाणनिच्चलमणाण / निस्संगाण य दुग्गइदुहृदन्दोली कहं होइ ? // 67 // किं ? दोगच्चं चिंतामणिस्स सूरस्स हवइ संतमसं / चंदस्स व सन्तावो अमियस्स व होइ किं ? मुच्छा // 68 // तम्हा मए न सम्म सुयं जिणिन्दस्स भासियं मन्ने / अन्नपि पुच्छिऊणं करेमि सन्देहविद्दवणं / / 69 // इय चिंतिऊण राया जम्पइ संपइ जिणिंद ! उववाओ / तस्स मणिणोऽवसाणे कम्मि विमाणे हवह सामि // 7 // अह भणइ जिणो नरवर ! सम्पह जइ एस // 169 // Page #183 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मनसा युद्धं बपन्तीप्रकरणपुचिः / प्रसनचन्द्रमुनेः। // 17 // CS45% मुणिवरो कालं / कुजा तो सुद्धमणो गच्छह सबट्ठसिद्धीए // 71 // एएणं वयणेणं जिणिन्दमणिएण सेणियनरिन्दो / जलहि व समुल्लसिओ सहसा चंदोदएणेव / / 72 // खणमेकं जावऽच्छद तो पेच्छंह देवलोयउम्मीओ। सुरदुन्दुहीनिनायं मुणेइ ओसरणबाहिं सो / / 73 // विम्हयतरलमणेणं सेणियराएण तो जिणो पुट्ठो। भय किमत्थ दीसह कल्लाणमुवडियं अहुणा // 74 / बजरियं जयगुरूणा पसन्नचन्दस्स मुणिवरस्सिहि / सुक्कझाणोकरिसा उप्पन्नं केवलं नाणं // 75 / / पुणरवि पुच्छइ राया भयवं पढमंमि पसिणवागरणे / सत्तमनरए गमण मए सुयं किन्नु ? मोहेणं / / 76 // भयपि भणइ सेणिय नरिंद समयंमि तंमि सो मणसा / रोद्दज्झाणवसट्टो समरपयट्टो मुणी आसी // 77 // दुम्मुहवयणमिन्धणकोहानलजलियसमणगुणवत्थो / वहरीहिं समं समरे मणेण जीवे हणइ तइया // 78 // छिञ्जन्ति छत्तदण्डा महल्लवावल्लभल्लसिल्लेहिं / | भिजन्ति हत्थिसुण्डा निसायकुन्तग्गखग्गेहिं // 79 // वच्छाभोयं छिदह रिऊण खरधारपरसुघाएण / जजरइ देहपंजरमुदग्गमुग्गरपहारेण // 8 // लहिऊण किन्हलेसं निस्सेसं रिउबलं स चूरिन्तो / अइकोहगहग्वत्थो अपसत्थो खिवियविविहसत्थो / // 81 // मणसा चिन्तइ सोणियधुणीए बुज्झन्ति तुरयतुंडाई। नचन्ति य रूण्डाई मुडन्ति मुण्डाइं सुहडाणं // 82 // एयज्झवसाणो सो रिसी तए पणमिओ तओ राया / तेण तुह धम्मलाभो न मासिओ नासिओ धम्मो // 83 // धम्माओ पणहाणं महपइनाण दुहचिट्ठाण / अपइट्ठाणनिवासो मरणे जइ होइ किं चोजं॥ 84 // बीयपसिणखणेण पुण सेणियनरनाह धम्ममाणमि / वड्डन्तो सो आसि सिवामिलासी समसुहासी // 85 // सामि! कहं पुण चित्तं पसन्नचन्दस्स रणरसनिमित्त / धम्मज्झाणपवित्तं जेण पवित्त कयं सहसा // 86 // इय सेणिएण मणिए जम्पइ सामीवि किल रणरंगो।। RECENESS % % %A 5 // 17 // % Page #184 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 17 // प्रसनचन्द्रमुनिवरस्य केवलज्ञानप्राप्तिः। चारित TAGSAAMANAS निहियपहरणरासी चिन्तइ कवएण रिउपायं // 87 // सिरताडणग्गहलालसो करेण पुडंमि मुंडसिरकमले / मवियवयावसेणं सुमरइ सो अत्ति अप्पाणं // 88 // समणोहं किन्तु मए पारद्धं पावकम्मसम्बद्धम् / संजमसारविरुद्धं मज्झ मणो जमिह अइकुद्धं // 89 // कोहो जोहो चारित्तरायसंघायघायणरसिल्लो / रूइज्झाणनियल्लो पसमिरअइकिन्हलेसिल्लो॥९० // संसारगिम्हहारिसामनतववम्भचन्दणदलाई / हा जीव कोवधूमद्धएण तं दहसि सवाई // 91 // हिययत्थलंमि करूणावल्ली उवसमरसेण पल्लविया / ही ही पावेण मया सहसा कोवग्गिणा दड्डा // 92 // दुमुहमुहजन्तनिग्गयदुवयणबोलेहिं मह पुरे सहसा / अहह खमापायारी मग्गो चिरपरिचिओ जइंवि / / 93 // तो मोहरायादप्पिकोहलोहाइबलसमूहेण / नाणचरणाइरिद्धी धिद्धी गहिया समग्मावि // 94 // भवजलहिजाणवतं मणुयत्तं फलयसुगुणसंजुलै / जे चारित्तविउत्तं न हवइ तं पारगमसकं // 95 // मह साहुकुञ्जरस्सवि जो जाओ पुत्तबन्धपडिबन्धो / सो चारित्तवघनिबन्धू नाणाविहबन्धहेऊत्ति // 96 // एवं दुक्कडगरिहाअग्गिसिहाइ बन्धणं व दुक्म्मं / सबंपि दहइ नरवर ! अहुणोपपन्न मुणिन्दस्स // 97 // अस्ति धम्ममाणे | अवसाणे तस्स होइ उववाओ। सबट्ठम्मि विमाणे अजहन्नुकोसठिइट्ठाणे // 98 // किन्तु तया सो साहू अञ्जवि अच्छिन्नाउपरिणामो / पइक्खणपसायपसमिरदयासओ सच्छिओ दए व // 99 / / उल्लसियजीवविरिओ अप्पुवकरणेण वम्मियसरीरो। आरूढखवगसेणी मोहनिवं खवह तो सत्वं // 10 // परमत्थसुक्कज्झाणो निहणइ सो घायकम्मरिउवग्गं / सम्पइ केवललच्छिं सम्पनो सो महासत्तो // 101 // केवलनाणुजोओ लोयालोयपमासओ सम्मं / दुलहोत्ति पूयणिजो मुणिणो महिमं कुणन्ति सुरा // 102 // इय सोच्चा जिणवयणं हरिसभरूल्लसियरोमरूहरङ्गो / सेणियराया गच्छह महरिसिपयवन्दणुम्माहो // 103 // सोचारित संबंपि ACADA RASIC // 103 // // 17 // Page #185 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती- प्रकरणवृत्तिः / // 172 // ROSSAADAR धरणियललुलियभालो कयञ्जली वन्दिऊण मुणिराया। सम्भूयगुणत्थवणं भत्तीए काउमाढत्तो / / 104 // कुन्दमहिन्द मानविषये समुज्जलगुणमण्डलामोहखण्डणपयण्ड ! / जयसि तुमं मुणिपुंगव संजमभरधरणधुरधवल ! / / 105 // मोहमहातमनासो तुमं बाहुबलि सि मुणिराय ! दसदिसिपयासो / सच्चं पसन्नचन्दो केवलकुमुयाकरूल्लासो // 106 // तं जयसि पुरिससीहो कम्ममहाकुम्भि- दृष्टान्ता। &aa कुम्भनिद्दलणो / मयजूहदप्पमलणो सावयसंघायनयचलणो // 107 // उजासियमयमोहो नासियऽबोहो जयम्मि दुजोहो / को होइ तुह सरिच्छो ? कोहो जोहो जिओ जेण // 108 // तुह चित्तचन्दे कन्ते पसन्नचन्दस्स उवसमरूईए / मुणिसीह बहुविवेउदएण कोवो दवो सन्तो॥ 109 // रायरिसि ! तए संजमरजं निरवञ्जमेव अणुहूयं / समिइकरणोजमेणं जम्मन्तरंगा हया रिउणो // 110 // केवललच्छीपरिरम्भणेण सासयसुहेण मुणिराय ! / ठाहिप्ति तिजयसिरोमणिसिद्धीए रायहाणीए // 111 // थुणिऊण एवं राया पसन्नचन्दं मुणिन्दमइहिट्ठो। रायगिहम्मि पविट्ठो धणियं तग्गुणगहणनिट्ठो // 112 // नाउं पावट्ठाणं कुग्गइनियाणं गुरूवएसेण / एयं कोहकसायं हणह पिसायं लहुं भवा // 113 // क्रोधाख्यानकं षष्टं समाप्तम् / / मानोऽपि महापापस्थानम् / यथा सर्वथा लभते हानं, तथा धत्त धीराः सम्यगवधानं / मानावष्टब्धा हि प्राणिनो मुग्धाः कृष्णपक्षा इव प्रतिकलं खण्डयन्तः श्रुतविनयगुणग्रामेन्दुमण्डलं, दोषोदये पोषयन्ति तथा तमःप्रसरं, यथा न लक्ष्यते नीच्चमुच्चं वा, न दृश्यते मार्गोऽमागों वा, न बुध्यते हेयमुपादेयं वा, नावगम्यते वाच्यमवाच्यं वा, न ज्ञायते स्पृश्यमPJ स्पृश्य वा, ततश्च स्खलितसचरणाः पतन्ति भवगर्ने दुरन्ते / अपरं च चरमशरीरा अपि निष्कलंककुलनमस्तलमृगांका अपि P172 // Page #186 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 173 // 13-% भरतप्रेषितदूत कथनम् / ASSAGAR % अतुलबलपराक्रमपरपराकरणोत्पादितत्रिभुवनचमत्कारा अपि वैराग्यातिशयप्रतिपन्ननिराभिष्वंगचारित्रभारा अपि मनाक मदावष्ठम्मतो विनयमुद्रादरिद्रास्तपोनुष्ठानध्यानक्लेशमनुभवन्तोऽपि द्राक् केवलज्ञानलक्ष्मीपरिरम्भसुखभाजनं न भवन्ति बाहुबलिबत् , तथाहि तक्खसिलपुरवरीए आसी सिरिरिसहनाहअंगरूहो / बाहुबली नरनाहो लहुभाया भरहचक्किस्स // 1 // सिद्धे मरहे भरहो चक्की रजाइं निययवन्धूण / मग्गइ तेऽवि जिणन्ते संजमरजं पवजन्ति // 2 // यमुहेणं मरहो बाहुबलिं भणइ निवरं तत्तो / रजं मए वियन्नं भुञ्जसु जइवा कुणसु समरं / / 3 // बाहुबलिणोवि हिययस्थलंमि एएण द्यभणिएण / लद्धिन्धणधूमद्वयबन्धू कोहो समुजलिओ।। 4 // तत्तो अणेण वुत्तो ओ भुयग्गहेण तुम्ह पहू / गहिओ इव जं जम्पइ रहिओ सत्तेण नेहेण // 5 // भरहे पसाहिए कि ? पसाहिओ एस रायलच्छीए / तुच्छो कुच्छियचरिओ जो एवं बन्धुपरिहरिओ // 6 // लहुबन्धवा इमेणं उज्झियलजं विमुक्कमजायं / मणिऊण मेसिऊण य पवजं गाहिया झत्ति // 7 // कायसमोवि न एसो बन्धवरहिओ जमित्थ भोगत्थी / लद्धं बलिं न मुंजइ जं सो बन्धूण कयसदो // 8 // बन्धवरजग्गहणे सूरग्गहणि व तस्स तमपसरो / सो जाओ जेणेसो अप्पपरत्ताणसम्मृढो // 9 // एसो जलप्पवाहो अइसयकलुसो रयणिवÉतो / तीरद्वियवच्छाणं समूलकासंकसो सच्चं // 10 // इक्खागकुले कमलायरम्मि परमोययम्मि भरहेण / बन्धवरजवहारे अयसो भमरून संलीणो।॥ 11 // ऊणं न बंधवाणं, संजमरजं जिणेण जं दिवं। भावारिदलणवजं निरवज्जं तिजयनमणिशं // 12 ॥रे य किंतु भरहो परिसप्पिरदप्पसप्पविसमुच्छो / वियलियविवेयदिट्ठी जाणइ नऽप्पं परं वावि // 13 // C4 RI 173 // % Page #187 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पी CA8 बाहुबलेरुचरम् / बवन्तीप्रकरणवृतिः / // 174 // CARECE ला तम्हा आहवमहिमण्डलेण मन्तेण मण्डलग्गेण / देवाईण समक्खं दप्पविसं संहरिस्सामि // 14 // जं पुण भणियं रणर- ससजो वा हवसु य ! भरहेण / छुहियस्स भोयणेणं निमन्तणं तमिह पडिहाई // 15 // हिट्ठस्सं अवनाए हियस्स परितजणं व सीहस्स / अइनिट्टरवयणेणं सुत्तस्स व तस्स पडिबोहो // 16 // ता य मणसु गन्तुं आगच्छइ जेण देससीमाए / लंघियकुलाइसीमो रणकेलिमणोरहो भरहो // 17 // भरहविजएण गव्वो गजइ एयस्स ताव करिकलहो / मह एस पंचसाहो मयनाहो परास्यइ न जाव // 18 // पत्तो च्चिय तस्स पुंणो हंहो सवडम्मुहो अहं इन्हेिं / महबाहुबलं जम्हा सहलं होहित्ति उल्लसिओ // 19 // सावटम्भ वयणं दूओ सोऊण बाहुबलिभणियं / चिन्तइ भरहो चक्की एसो पुण उग्गबाहुबलो // 20 // | तो दुन्हं बंधवाणं सुराण असुराण माणवाणं च / होही अदिट्ठपुवं मन्ने समरंगणं किंपि / / 21 / / चक्कं न कमइ गोत्ते अहियं बाहुबलमह भरहपुन्नं ? / मज्झ मणो आरूढं एवं सन्देहदोलाए // 22 // इच्चाइ चिंतिऊण दूओ पञ्चागओ अउज्झाए। पणमिय भरहनरिंदं सविम्हओ विन्नवइ एवं // 23 // बाहुबली रणरसिओ सामिय तुहवयणाओ समुल्लसिओ। तस्स बलजलहिवेला वाणीवि गिरिंददुन्निवारा // 24 // कुलपवओवि एसो न कूडघडि उन्नई खमाहारो / देव भरहस्स सीमंधारिउंकामो जहा हिमवं // 25 // गोत्तपरिरक्खणुजमजुत्तो रयणाय व बाहुबली। तीरट्ठियभरहे पुण खारूग्गारं बहुं किरइ // 26 // बन्धवरजवहारं पराहवं मन्नए बहुं जेण / तेण पराहवइच्छा इमस्स तुच्छा समुच्छलिया / / 27 / / रूटोवि सामि ! मनइ जिटुं तुममेव एस बाहुबली / गोत्तपयाण दिन्तं दुसहं तावं च सोसं च // 28 // अहवा सच्चं तवणो तुमंसि भुवणम्मि देव ! उदयन्तो / अवहरसि जेण सहसा सपक्खतेयस्सितेयाणि // 29 // तह भणइ देव ! बाहू सकञ्जलग्गोऽसि तं कुलप %ACॐन P // 174 // Page #188 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 175 // युद्धप्रस्थितभरत सेना| वर्णनम् / AHARASHTRA इवी / सच्चे जं नियट्ठाणं कलुसन्तो नेहनिट्ठवणो // 30 // किं बहुणा-गसइ ससिं तारायणगयपि साहसबलेण जह राहू / / तह वाहूवि तुम बहुबलंपि जेउं समीहेइ // 31 // सोऊण बाहुबलिणो दएणणुभासियाणि वयणाई / चिंतेइ भरहराया अहो | इमो सिंहसच्चरिओ // 32 / / यत: एकोहमसहायोऽहं किशोहमपरिच्छदः / स्वप्नेऽप्येवंविधा चिन्ता मृगेन्द्रस्य न जायते // 33|| एकोवि करिघडाणं विहाडणो होइ केसरिकिसोरो / एको सहस्सकिरणो हरेइ तिमिराण रिच्छोलीं // 34 // हरिउपि न जुत्तं चिय बन्धवरजाई तायदिनाई। किन्तु मह चकवट्टित्तणेण एसो महामोहो / / 35 / / एताहे पुण आरम्भिऊण जुझं करेमि जइ नाहं / कापुरिसोत्ति महन्ती इमा महोहावणा होइ // 36 // ताऽवस्सं गन्तवं तय हुत्वं ताव आहवनिमित्तं / नाऊण पुणो चित्तं जं जुत्तं तं करिस्सामि // 37 // एवं विणिच्छिऊणं पसत्थतिहिकरणजोगनक्खत्ते / सुमुहुत्ते भरहिन्दो पत्थाणं कुणइ सम्बद्धो // 38 // पडिवक्खरुक्खभञ्जणसज्जा अंजणगिरिन्दसुन्देश / भद्दगयन्दा मयरसपवाहलुद्धालिझंकारा // 39 // वेगाइगुणगणेणं निट्ठरक्खुरखुनरेणुखिवणेण / रविवाहाण अवलं तुरया हेसाहिं व कुणंति // 40 // गोविन्दसरिससारहिअहिट्ठिया दुसहरहवरा तुंगा / परबलजलनिहिमहणे अमन्दरयमन्दरगिरिन्दा / / 41 // तयणु पयाणे चलिया घंटाटंकारवहिरियदियन्ता / चउरासीइलक्खा पत्तेयं भरहरायस्स // 42 // संगामगयणपसरियपरबलतिमिरावहारसूरकरा / छण्णवइकोडिसुहडा पसरन्ति य सिंहनाएणं // 43 // बत्तीसमउडबद्धा निवसहस्सा इंति नियबलसमिद्धा / दुद्धररणरससाहसरहसमरोभिन्नरोमचा // 44 // महया सम्मद्देणं हयगयरहसुहडगहिरसद्देणं / भरहनरिन्दो गच्छइ सयम्भुरमणो व अइमरूओ // 45 // अखण्डि // 1 75 // Page #189 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणवृत्तिः / // 176 // यप्पयाणो जोहाणं विहियबहुधणपयाणो / पत्तो य देससन्धि रणाभिसन्धि धरेमाणो // 46 / / बाहुबलीवि नरिन्दो दबाहुबले नाणाविहविहियमंगलाणन्दो। चउरंगदलसमग्गो पयपत्थाणसुहलग्गो // 47 // परबलसमुद्दवेला पडिक्खलणे मलय- सेनावर्णनं मेहलाबन्धा / तस्स पयाणे भद्दा चरन्ति करिणो घणमयन्धा // 48 // रेवन्तदेवहिडियसुपइट्ठियअंगुवंगरंगिल्ला / भयंकरयुद्धवग्गन्ति तओ तुरया मणपवणरया सुजाइल्ला // 49 // तयणु परमत्थसारा चक्करवोच्छलियजणचमक्कारा / संगामिया विचारणा सरन्ति य मणोहरा तह रहा तुरियं // 50 // पसरन्ति पञ्चसाहा मयनाहा जाण अरिकरिन्देसु / ते सुहडा कोडिगुणा गुणवन्ता पहरणसणाहा // 51 // अणवरयपयाणेहिं सउणगुणुच्छलियबिउणिउच्छाहो। बाहुबली महिनाहो पत्तो देसस्स सीमाए // 52 // हेसन्ति हया गञ्जन्ति गयवरा घणघणन्ति रहलक्खा / मुश्चन्ति सीहनायं सुहडा संगामविहिदक्खा // 53 // वियरन्ति सेन्नमज्झे अविहत्था मागहा धवलहत्था / कुलगोत्तकित्तणेणं धीराणं कयरणुच्छाहा // 54 // रणतूरसहसवणे रभसभरूल्लसियअंगुवंगेसु / गविजन्तावि बहुं नमन्ति सुहडाण सन्नाहा // 55 // निविडगुडगुडियगयनिसाइकरगहियसिंगधणुहीओ / कुवियकीणासकुडलियफरन्तभमुहापियसहिओ // 56 // पक्खरियतुस्यकवइयसायकरोल्लसियसेल्लभरभल्ला / जममुहुरकुहरविणिग्गयजीहासोया वियारन्ति // 57 // गुणवन्तफारफारकपाणिझलकन्तखग्गलट्ठीओ / अइकुद्धकालरयणीकडक्खलच्छि विडम्बन्ति // 58 // जुत्तमणवेगतुरया आरोवियचावलट्ठिधाणुक्का / सत्थभरनिन्भरा रहवरा वि गुरुचकचिक्कारा / / 59 // एवं समरोच्छाहिए सन्नद्धे कुद्धअप्पपरसिन्ने / बाहुबली परिचिन्तइ अहो महन्तो रणारम्भो / / 60 / / होहीअ हेयउच्चियहयगयपाइकचकसंहारो / अजियदुकयभारो उग्घाडियनस्यपुरदारो // 61 // // 176 // CRE%E05-3 COMCARDAMOMCN 13330 Page #190 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 177 // दृष्टियुद्धे बाहुबलेजयः। 45CECCLASSOCIAL दुन्हिन्ह बन्धवाणं मिहो विरोहे किममजीवाणं / निकारणजुज्झेणं सत्थपओगेण अहमेण ? // 62 // तन्तं तं कायचं सो मंतो होइ इत्थ ज्झायो। भरहस्स जेण दप्पो सप्पो सन्तो लहु होइ // 63 // तो भावियपरमत्थो बाहू भरहस्स पदुवइ यं / सो विय पणओ एवं जम्पइ महुराए वाणीए // 64 // बाहुबली महिनाहो जाणावइ सामि ! अप्पणो भावं / लोयाणं मरणेणं नामोक्कसियं किमम्हाणं ? // 65 // उत्तमजुज्झेणं चिय बलाबलत्तेण नायमित्तेण / देवाईण समक्खं पराजओ वा जओ होइ // 66 // रहसेणं भरहेणवि पडिवन्नमिणति दोसु कडएसु / उक्किट्ठसिंहनाओ जाओ नाओत्ति उच्छलिओ // 67 // चन्दणकयंगरागा कुन्दुजलवासरइयसिंगारा / आमुत्तथलमुत्ताहारा सियच्छत्तसंचारा // 68 // दोवि नरिन्दा जंगमहिमगिरिसबम्भचारिणो इन्ति / तयणु रणरंगभूमि तिहयणकीरन्तजोकारा // 69 / / भरहेण तओ भणियं किरह कि जुज्झमुत्तमं बाहो।। एसोवि भणइ बन्धव ! दिट्ठी किर कायरा अथिरा // 70 // सा धीरा धरियव्वा निप्फन्दा सयलतिहुयणाणन्दा। जो पढमं तं मीलइ सो हीलइ धीर! धीरेहि / / 71 // ते ठवन्ति इय पइन्ना अणिमिसनयणापरप्पराभिमुहा / मुहचन्दकन्तिमरवरविम्हयकुमुयाकरोब्बोहा / / 72 / / अह विहसियकुवलयवणसणाहिनयणेसु ताण निवडन्ति / सहसा मोयपरबसजणलोयणभमरपन्तीओ // 73 // अहहरियसहावाए दुहियाए भरहरायदिट्ठीए / सुइरं चिट्ठन्तीए पडन्ति अंसूणि अणवरयं // 74 / तो तीए मोहेणं मुत्तूणं एससंगरं ( दृष्टिसंग्रामं तत्प्रतिज्ञांच) दुविहं / अप्पइ चलं सहावं अहो दुई अंगजायाए // 75 // विजयइ बाहुनरिंदो दढप्पइन्नोत्ति देवसिद्धेहिं / उक्किट्ठकलयलेणं मुच्चइ कुसुमाण तो वोट्ठी // 76 // मन्नुन्भरकन्तमणो चक्की भरहोवि जम्पए एवं / को उक्करिसो? दिट्ठीजुद्धेणं बालललिएणं // 77 // किजउ वायाजुज्ज्ञ CACAAAAE%3A Page #191 -------------------------------------------------------------------------- ________________ वायुद्धप भरतस्य पराजयः। चिः / // 178 // परमत्थपसाहणेण जं सहलं / जं विउसाणं उचियं तमुत्तमं उत्तमा विन्ति // 78 // बाहुबलिणावि वुत्तं वायाजुद्धं जाम अविरुद्धं / अम्हंपि मयं बन्धव ! किजउ गिवाणवाणीए / / 79 / / ततश्च–जं पक्खंमि पसिद्धभावसुहगंज वा सपक्खे धुवं, जं सम्बन्धपरं निवित्तिपरं जं वा विपक्खासया। अक्खोई परहेउहेइनिवहे खित्ते विचित्तेवि ज, वायाजुद्धखणे दुवेवि सुहडा ते लिन्ति तं साहणं // 8 // जीवाणं कोडिसमारोहे धम्मो मए परिग्गहिओ / परलोयसाहणपरो जं एसो सरलयासहिओ // 81 // सकयवयणेण एवं भरहनरिन्देण पक्खगहणमि / पुच्छइ बाहुवि तहा धम्मो जइ पहरणसरूवो // 82 // जीवाण तेण पाओ कोडिसमारोहणं कहं तम्मि ? / कुगईए सो हेऊ परलोयपसाहणो कहण्णु ? // 83 // तमि य सम्म चिंतह जुजइ नय सरलयावि भावेण / तो एस धम्मपक्खो उत्तमपुरिसाण नहु जुत्तो // 84 // अह जिणधम्मो गहिओ सोवि य जइ केसवस्स सम्बन्धो / निच्चिय तत्थवि दोसा रागद्दोसा जओ हुन्ति // 85 // सुगयपणीओ अहवा जिणधम्मो तुम्ह संगओ इत्थ / मिच्छादसणसल्ले तत्थवि सुगई कहं होइ ? // 86 // अह अरिहंतजिणेहिं कहिओ धम्मो तए परिग्गहिओ / सो अम्ह सम्मउ च्चिय निरत्ययं साहणं तुम्ह // 87 // इच्चाइवयणविन्नासपाससुनिजन्तिया भरहवाणी / सउणीव जयसमक्खं नोल्लासइ पक्खमेगपि // 88 // बाहू पंडियचक्की भरहो रयणेहिं चक्कवद्विति / जाओ जए पवाओ गुणवणभञ्जणमहावाओ // 89 // परमियमहरवाणं न तकगिद्धीवि रायहंसाणं / बाहुबलं चिय बाहो! परिक्खियवं हवइ अम्ह / / 90 // एवंपि भरहमणिए बाहुबली भणइ रणरसुच्छाहो / भुयनामणमित्तेणं जमुत्तमं बाहजुद्धंपि Pu // 91 // तो मह एयं नामय वाम सरलीकयं भुयादण्डं / तुह बाहुलयं बंधव ! तयणु अई नामइस्सामि // 92 // 1 178 // Page #192 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 179 // बाहुदण्डमुष्टियुद्धेप्वपि पराजयो भरतस्य / इमस्स बच्छस्स समुन्नयस्स साह व बाहा सरलस्सहावा / इहि मए सा निवकुंजरेण करेण घेत्तुं लह मोडणीया // 93 // एवं कोवभरेण भरहो परिचिन्तिऊण जत्तेणं / गहिऊण बाहुबाहुं नामिउमिच्छइ नियकरेण // 94 // नय नमइ तस्स बाहा तिलतुसमित्तंपि वजधारेव / नवि चलइ जहा सुरगिरिचूला जलरासिमेर व // 95 // नामन्तो चालन्तो वावारियसववीरियायारो। भरहो कोवहुयासणआयंबिर( आताम्र )लोयणो जाओ // 96 // बाहुबलिस्स समप्पइ मृढप्पा अप्पणो भुयादण्डं / मिच्छाभिनिवेसेणं जीवा न मुणन्ति अप्पाणं // 97 // उप्पलनालं व तओ वामकरग्गेण तेण लीलाए / नामिजइ भुयदण्डो सद्धिं भरहस्स माणेण // 98 // गुरुमाणसाहिमोडणकडयडरवडम्बरेण तो जाओ / देवमणुएस अम्बरपसमिर| अट्टहासझूणी / / 99 // बालाण कीलणेहिं इमेहिं जुद्धेहिं किन्नु सुहडत्तं ? / दिट्ठमुट्ठिचंडदंडाइघायं धीराण तं होई // 10 // | एवं भणिरे भरहे बाहू रोमञ्चकञ्चकियसरीरो / आह मिहो जुज्झामो मुट्ठीहि बलं च बुज्झामो // 1 // जयसिरिविलासगेहे देहे बाहुस्स भरहमुट्ठिघणो / हिययम्मि वजकुट्टिमतलकढिणे पडइ तो झत्ति // 2 // तिणफंसेणवि बाहू मिजइ नेव तेण घाएण / एसोवि भरहवच्छे मुट्ठिपहारं दिदं देइ // 3 // तेण य भरहो मुच्छियचेयनो भिंभलच्छिसरसिरूहो / सिहिपिच्छगुच्छछिन्नं गयणं पिच्छइ खणमेगं // 4 // खणमित्तेण भरहो अविहत्थो सुदिढदंडधरहत्थो / बाहुबलिस्स मएणं उवडिओ दंडजुद्धेणं // 5 // सो देह दण्डघायं दिसासु उद्विन्तगहिरपडिनायं / बाह्रवि सहइ सरसीरूहनालफासलीलाए // 6 // तो मेरुगिरिसरिच्छे बाहुबलिखित्चदण्डघायपया / रेहंति भरहदेहे पाणियउत्तारमग्ग व // 7 // समरभरमन्दरेणं भरहो जलही अइवनिम्महिओ / देवसमक्खं जाओ कोहो तो कालकूड // 8 // कोक्मयकन्तमणो भरहो चिन्तइ किमेस चक्कित्ति ? / Page #193 -------------------------------------------------------------------------- ________________ चके जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / ला // 180 // GADCHOCALCCIALA तो तस्स करे अप्पइ चकं किर देवया झत्ति // 9 // उत्तमजुद्धपइन्ना जिवियरहिओ इमोत्ति बाहुबली / निन्दन्तो अवलोयइ भरतेन PI चक्ककरं तं करकं व // 10 // कुले पहबइ न चकं जालामालाहिं जइवि चक्तिकं / अइसयतपि जलं न नियदाहं करइ जेण // 11 // तो भुयबलेण इमिणा सह चक्केणं इमं नु चूरेमि ? / अहवा न जुत्तमेयं असारविसयाण कजेण // 12 // मुद्धो |8| प्रक्षिप्ते कुद्धो गिद्धो एसो विसएसु विसविसेसेसु / जम्हा मुहमहुराणं विरसो तेसिं परिणामो॥ 13 / / जस्सुल्लसियपयावो तइलोक बाहुबलेदिवायरो जिणो जणओ। भरहो सणिच्छरसमो दोसागयदंसणो ज सो॥ 14 // किं जुज्झेण ? बन्धवरजग्गहणेण पीय रात्मधर्मपाणीओ। धारइ जलहीए एसो चकं वडवानलं वेगं // 15 // सिरिउसहस्स वि पुत्तो एसो न कुडुम्बभरधुराधवलो। सयणभरं विचारणया निहणन्तो भरहो भरहोत्ति सच्चमिणं // 16 // अहवा विसयपिवासा महापिसाई वियम्भए एसा / जीए घत्था जीवा कजा दीक्षाकजं न याणन्ति // 17 // बाहुबलगवपवयसिहरारूढो अहंपि संमूढो / जं रूद्दज्झाणहेऊ भरहनरिन्दस्स संजाओ // 18 // ग्रहणम् / | ते सिद्धा सुकयत्था परमपयत्था सयासुहसमिद्धा / जे अवराण जियाणं न कारणं कम्मबन्धस्स // 19 // सुगहीयनामधेया ते मह लहुयावि बन्धवा गरूया / जे निरूवमगुरूसंगमसंजमसिरिसंगया जाया // 20 // एवंविहं परिचिन्तिऊण सम्म विवेयदिदिए / संवेगमुग्गरेण भित्तूणं मोहघणगण्ठि // 21 // काऊण पश्चमुढिलोयं गहिऊण देवयादिन्नं / रयहरणाइयलिंगो चारित्तगयन्दमारूढो // 22 // बाहुबली परिचिन्तइ तायसमीवंमि जामि कहमिन्हि ? / निरइसओ पेच्छिस्सं केवलिण बन्धवे लहुए // 23 // इह कयकाउस्सग्गो सुक्कझाणानलेण दहिऊण / कम्मवणं तो लहिउं केवलनाणं गमिस्सामि // 24 // एवं निच्छयसारो निरूद्धसावजसयलवावारो। बाहू सरलियबाहू तत्थ हिओ काउस्सग्गेण // 25 // बाहुबलिं मुणिराय SANSAR ACCORNCR Page #194 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ब्राह्मी %%%%-5345%ECIA सबकलापुनमऽमयलेसिल्लं / विहडियवल्लहचकं कियसयलसन्तावं // 26 // दट्टण भरहनिवो मउलियमणनयणवयणसय. है कायोत्सर्गवत्तो / पच्छायावपरद्धो पारद्धो खामणं काउं // 27 // खमसु तुमं मह बन्धव अखण्डियबाहुदण्ड बलबीर / भुञ्जसु तायवियन स्थितबाहु| रजं सच्छं सच्छन्दसाणन्दं // 28 // अतुलभुयदण्डविक्कम तुमए विजिओऽहमुत्तमरणेण / कजे निओइयत्वो तो अहुणा गुणगरि बलीपार्थे द्वेण // 29 // तुह विक्कमकुलिसेणं चकं चूरिजए न सन्देहो / न नरिन्द मए नायं हद्धी एयपि कुद्धेण // 30 // बाहुबलिम्मि- भगवता मुणिन्दे धम्मज्झाणम्मि पसरियाणन्दे / पुणरूत्तखामणुजयभरहनिवोऽपत्तपडिवयणो // 31 // भणिओ मन्तिजणेण सामि ! मुणी एस मुणियपरमत्थो। समसत्तुमित्तचित्तो संजमलच्छीए अणुरत्तो // 32 // नहि किंचिवि भणियबो जेयवो णेण सुन्दयौँ धम्मज्झाणेण / ठाणेण अन्तरंगो रिउवग्गो कोहलोहाइ / / 33 / / तत्तो भरहनरिन्दो सुइरं थोऊण तस्स गुणनिवहं / निन्दन्तो प्रेषिते / अप्पाणं अपरिच्छियअप्पपरिमाणं // 34 // पत्तो विणीयनयरिं मणिमयपासायकणयपायारं / उवभुञ्जह रायसिरि कीरन्तसुरिन्दअणुगारं / / 35 / / बाहुबली मुणिराओ नासावंसग्गदिट्ठीसम्पाओ / छजीवसाणुकंपो मेरुगिरिन्दो व निकम्पो // 36 / / सम्मं निरुद्धदंडो निचललम्बन्ततरलभुयदण्डो / काउस्सग्गपवनो चिट्ठइ रबंमि अविसनो // 37 // अहियासइ जा परिसं परीसहे दुस्सहेति आलीढो / अन्तो सुहलेसाहिं बाहिं पल्लवियवल्लीहिं // 38 // सउणिकयकुच्चनीडो अगणियसीउन्हवायजलपीडो / पायतलुछियदभंकरसइवेहवम्मीओ // 39 // संजमलच्छीहारो चिट्ठइ संवच्छरं निराहारो। बाहुबली अणगारो अणिगूहियवीरियायारो // 40 // पसरियधम्मज्झाणो पइक्खणमहिलसियकेवलनाणो। पम्हुट्ठविहियमाणो अणुहूयकिलेससन्ताणो // 41 // जाव अच्छद बाहुबली ताएणं ताव तस्स भईणीओ। बम्भीसुन्दरिनामयवईणीओ पेसिया तत्थ // 42 // 42 // 2 // 181 // Page #195 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्ती प्रकरणइतिः / // 182 // सुइरं निरक्खिऊणं दहणं मुणिवरं वणनिउंजे / जम्पन्ति साहुणीओ बंधव ! ताओ भणइ एवं // 43 // झाणंपि कुणन्ताणं तद्वचनदुक्करतवचरणकरणवन्ताणं / न हबइ केवलनाणं हथिगयाणं तवस्तीणं // 44 // वोत्तूण वयणमिमं वईणीओ झत्ति तप्प- श्रवणएसाओ / दूरं ओसरियाओ वरसंवरपूरसरियाओ // 45 // चिन्तह बाहूवि इमं अहमिह कयसबपरियरचाओ। ताओवि जन्यविचावीयराओ होउ तओ को अभिप्पाओ? // 46 // हुं नायमहं केवललच्छि लहिऊण बंधवे लहुए / सवोत्तमनाणधरे रणया केवपेच्छिस्सं न उण छउमत्थो // 47 // एवं माणगयन्दो विणयहुमभञ्जणेकसाणन्दो / आरूढो मूढेणं आयासकिलेसफलहेऊ लज्ञानप्राप्ती // 48 // संजमसुरगिरिसिहरारूढा कल्लाणमायणा गरूया / ते तिजयवन्दणिजा अट्ठाणुइ बन्धवा मज्झ // 49 // तेहिं | समवसपुरिसुत्तमेहि महिओ सियज्झाणमन्दरेणेऽसो / चउपाइकम्मजलही केवलसिरिसंगया तत्तो // 150 // धिद्धी मह अन्नाणं रणे गमनं माणं धरिऊण विणयपरिहाणं / जाओ दुक्खनिहाणं निरत्थयं वच्छरं जाव // 151 // दीसइ गरूओवि लहू माणगिरिन्दंमि जो समारूढो / तह सो न सम्मदिट्ठी गुरूंपि मन्नइ लहुं जेण // 152 // माणेण विवज्जासो वणियाणं निग्गहं जहा देइ / 18| प्राप्तिश्च / धम्मपराणपि तहा नासइ समत्तरयणं सो // 153 / / कल्लाण पत्ती कुलपबओवि जो सबगोचाहियमाणधारी / मेरुब होजा गयदन्तसोहो महावयासन्निहिओ स जीवो // 154 // तोऽहं जडमप्पाणं मयस्यपडलेण कलुसियं झत्ति / मद्दवकयगफलेणं करेमि अह निम्मलसहावं // 155 // तो ताण बन्धवाणं मुणीणं गुणसायराणं पयपउमे / इन्दिन्दिरसुंदेरं लहेमि अहुणा लहुं चेव // 156 / / इय चिन्तिऊण सहसा चलणे उप्पाडियंमि बाहुबली / लहइ मुणिन्दो केवलनाणं सम्पुनसियज्झाणं // 157 // एवं मयलेसोवि हु अणत्थपत्थारकारणं होइ / मुणिकुंजरेहिं कर्ज माणतरूम्मुलणं तम्हा // 158 // निवूढगुरू | मोक्ष CACCOLOCACCIECCAE% Page #196 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 183 // मायायां पण्डुरार्याया दृष्टान्तः। ANCISCLICA पइनो बाहुबली केवलेण सम्पुनो / तिपयाहिणीकरेउं रिसहं केवलिसहं पत्तो // 159 / / अट्ठावयंमि सेले निहणियनिस्सेसकम्मरिउवग्गो / सो पत्तो मुणिराओ सिवपुरवररायहाणीए // 160 // मानपापस्थाने बाहुबलिमुनिराजाख्यानकं समाप्तम् / / मायापि हि महापापस्थानं, सा हि विधत्ते विश्वासहानम् / तदुक्तम् / मायाशीलः पुरूषो यद्यपि न करोति किंचिदपराध। सर्प इव अविश्वास्यो भवति तथाहि आत्मदोषहतः // 1 // अतिगहनवल्ली वाऽवरूणद्धि सिवपुरपन्थानं // विरूणद्धि धर्मकलाकलापात्मानम् // यतः धम्मम्मि नत्थि माया, नय कवडं नाऽणुवित्तिमणियं वा / फुडपागडमकुडिल्लं धम्मवयणमुज्जयं जाण // 1 // किंचियंनिकृतिरनिष्ठितप्रपंचितरजःपटलतया धारिणी दुर्गतिपुरीप्रापणप्रवणशरणं, कृष्णपक्षप्रतिपदादितिथिसंहतिरिवाधिकाधिकोपचीयमानतमस्तोमदोषा, मीष्मग्रीष्मतरणिकिरणपरम्परेव प्रायेण जलाशयेषु प्रवर्तितसंवरोत्पीलशोपा, प्रतिपन्नशिथिलितव्रतप्राग्भारा आलोचितप्रक्रांता: प्रतिपन्नसन्यासा अपि सकृत् निगृहितमायाशल्या: पंडुरायिकेच पराभवकस्थानं कुदेवत्तमेव श्रयन्ते प्राणिनः / तथाहि-धरणीरमणीतिलए सिरीण निलए पुरा पुरे आसि / ईसरसिद्विस्स सुया विस्सुयसीलाऽतिसइलीला // 1 // सुगुरूणं धम्मकहासवणे संविग्गमाणसा एसा। पवजं पडिवाइ भवसायरजाणवत्तं व // 2 / / पडिपुनवित्तकारणसिक्खाओ तयणु पइदिणं लेइ / सा निम्मला कलाओ सियपक्खे चन्दमूत्ति व // 3 // नाणाइगुणमणीण रोहणगिरिमेहलाए निद्धसही / टंकाभिघायसहणी गुरूपायपसंगसोहिल्ला // 4 / / अह तिवगिम्हकाले पराजिया मलपरीसहेणेसा / पक्खालियतणुवसणा चिट्ठह वहणीण मज्झ गया // 5 // अनाणवि समणीणं नूणं एसा इविस्सइ पवित्ची। सुहसीला जं जीवा अबभगुत्ती तओ RCHES Page #197 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी बयन्तीप्रकरणवृतिः / 12 विमलेण यदेहे / घोविमलिणं हवइ मा निचं तर अन्ते // 184 // CRECCROCRACॐ होइ // 6 // अन्नं च-एकेण कयमकजं करेइ तप्पच्चया पुणो अन्नो। सायावहलपरम्परवुच्छेओ संजमतवाणं // 7 // एवं दीक्षाविभाविऊण वियरइ तीए पवित्तिणी सिक्खं / वच्छे जुत्तं न हवइ सरीरचीराण चुक्खत्तं // 8 // कायवं वइणीणं चारित्रं चेव स्वीकारे चुक्खयं भद्दे ! / जं जच्छइ सिवसंगमसासयसुहसम्पयमणन्तं // 9 // सूणारंभपवित्तं सरीरचीराण होइ चुक्खत्तं / अजे शिथिलता अणजचरिए पाओसियत्तं तओ होह // 10 // दुसहो विय समणीहिं सहियवो मलपरीसहो भद्दे / / भवसिन्धुजाणवत्तं जेण || आचारे, चरितं हवइ विमलं // 11 // विमलेण चरित्तेणं चंदणरससुरहिअंगरागेण / भमरिव झत्ति केवलनाणसिरी संगममुवेइ // 12 // असुइरसकरणमेहे पुरिसगेहे कहं ? मणुयदेहे / धोविजन्तेवि धुवं, हवइ नहु अज्जे पवित्तत्तं // 13 // पावमलाणं संचय- चालोच्य रित्तीकरणं तु होइ चारितं / धोविजंते देहे तं पुण मलिणं हवइ वच्छे। // 14 // एवं पनवियापि हु तणुवसणखालणमि स्वीकृतोत्तआसत्ता / पिहु वसहिटिया चिट्ठइ पंडरअञ्जत्ति विक्खाया // 15 // निच्चं तवचरणरया सज्झाणज्झाणकाउस्सग्गगया / बाउ- मार्थकल्पे सिया संवसिया सुइरं एगागिणी चेव / / 16 // अह पच्छिमंमि काले पच्छायावेण भवउविग्गा / सम्मं गुरूण अंते उव प्राप्ता ट्ठियाऽऽलोयणं दाउं // 17 // अवितहमालोयचा थूलेयरजीवखामणुज्जुत्ता / सा उत्तमट्ठकप्पं विहिणा पडिवजए तयणु प्रशंसा। // 18 / / पश्चिन्दियदमदन्ता कोहाइकसायनिग्गहपसत्ता / आलोइयपडिकन्ता धम्मज्झाणमि संकन्ता // 19 // धन्नाऽसि तुमं वच्छे सिवमग्गपसाहणमि अइदच्छे / माणससरं व सच्छे लद्धपसंसा समणगच्छे // 20 // दुपरिच्चायमाहारं दसविहपाणाण सुदिढमाहारं / जं चयसि भावसारं करेसि तं जयचमुक्कारं // 21 // एसोत्तमट्ठकप्पो पासाओ तुह चरित्तरायस्स / सन्तोससुहासुदिढो पइक्खणं होउ सुहवासो // 22 // इच्चाइ सुगुरूवाणीसारयससिबिम्बकिरणकुरूलीहिं / कुमुयाकरो व विय- W184 1964 Page #198 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 185 // अनशने खपूजा वाञ्छायां गुरुनिषि RELAAAAE सह अज्झवसाओ सुहो तीए // 23 // एगंमि दिणे मणसा सा चिन्तह जइ करेह महपूयं / सबिड्डीए लोओ तो इह अइगउरवं होइ // 24 // एह तओ पुरलोओ पूयत्थं धूवपुष्फफलहत्थो / संसुमरियविजाए आहओ पंडुरजाए // 25 // तत्तो उवउत्तेहिं गुरूहि सम्भन्तचित्तवित्तीहिं / अञ्जाविजासुमरणमाहप्पेणंति विनायं // 26 // कलुसीकरेसि वच्छे ! गंगुजलमुत्तमट्टकप्पमिमं / अजे ! पउत्तविजे ! जणपूयारम्भपंकेण // 27 // एवं हि गुरूहि भणिया संविग्गा सा पुणो पडिकन्ता / निन्दागरिहालोयणविसुद्धबुद्धीए संकन्ता // 28 // पूयाहेउं पुणरवि पउत्तविञ्जा गुरूहि सिक्खविया। विणियत्ता कइवयदिणपञ्जन्तपउत्तविजा सा // 29 // पडिचोइया नियत्ता चउत्थवेलाए तह पवित्तीए / तीए गुरुवुत्तीए पूयासचाए पडिवोत्तं // 30 // पुत्वपवाहेणेसो भयवं लोओ करेइ महपूयं / एवं मायासल्लं कयल्लयं पण्डुरजाए // 31 // तत्तो पढमे कप्पे मायासल्लेण सा समुप्पन्ना / एरावणगयरमणी ससल्लचारित्तदोसेण // 32 // एसो खु पावपगई इत्थीभावेवि हथिणीमावो / दियलोएवि पराभवहाणं एवं कुदेवत्तं // 33 // तम्हा सुदिढगुणावहपरलोयपसाहणमि धम्मंमि। परिहरियो सवं मायासल्लं पयत्तेण // 34 // AAAAAAAAA% द्वापि माया न त्यक्ता तेन कुदेवत्वं प्राप्ता। हमि दो वणिमायायां कथानक हर्गमि धम्ममि। परिहामावेधि हस्थिणीमापे मायासलेण सा // ____ संति इह जम्बुद्वीपे अवरविदेहमि दो वणियपुत्ता / मित्ता सिणिद्धचित्ता वणिजवावारआसत्ता // 1 // एगो सरलप्प. गई दाणरुई विणयपरिणई आसि / किल सच्चमणोवयणो आणन्दियसयलसुहिसुयणो // 2 // अवरो वश्चणपवरो मायावल्लीवियाणदिढकन्दो / चन्दो इव सियपक्खे कलाहिं कुडिलाहिं पडिपुत्रो // 3 // अह दाणदयाविणयावजियनिविग्धभोगफलपुनो। उप्पनो सरलमणो भरहे मिहुणगनरो सुहओ // 4 // मायल्लो पुण मित्तो वंचणचित्तोऽवसाणसम्पत्तो। जाओ उज्जलदेहो करि % Page #199 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्ती प्रकरणइतिः / | मायायां द्वितीयमपि घनश्रीउदाहरणम्। // 186 राओ नं सरयमेहो // 5 // ताणऽनदिणे दंसणे हरिसवसोल्लसियहिययकमलाण / जायं जाईसरणं पुबमवप्पीइवित्थरणं // 6 // जं पुत्वभवे करिणा अइसंधारणेण (वंचकेन) अजियं कम्मं / तं उइयं तत्थ खणे तस्स पभावेण तो तेण // 7 // तं मिहुणगं करेणं घेतुं हरिसेण खन्धदेसम्मि / आरोवियं तओ सो सरलो कुलगरपयं पत्तो // 8 // वंको जावजीवमायादोसेण वाहणो जाओ। नियडीवंसकुडंगी सिवपुरपंथे खलइ एवं // 9 // तम्हा गुरुवएसा एसा माया बुहेहिं चइयवा / पावट्ठाण सल्लं जिणधम्मे मोक्खमग्गम्मि // 10 // इदमपि मायाख्यानकम् // अन्नं च धणसिरीए मायासल्लेण धम्मकजंमि / विहिएण अणालोइय अपडिक्कन्तेण जं दुक्खं / / 1 // पत्तं अनमि भवे अभक्खाणेण दुविवागेण / इह तं पि सुणिजंतं वेरग्गं जणइ भवाणं // 2 // तहाहि-दीवे जंबुद्दोवे दक्खिणभरहद्धमज्झिमे खंडे / नामेण सुपसिद्धं आसी पुट्विं वसंतपुरं // 1 // तत्थासि पुहविनाहो जियसत्तू नीइविक्कमसणाहो / पुरपरिहसरिसबाहो अइसयपडिबन्ननिबाहो // 2 // तत्थ धणेसरसिट्ठी दाणाइगुणेहिं जणियजणवडी / आसी धणेण धणओ अणुत्तरो किन्तु लोगम्मि // 3 // तस्स य भजा लच्छी विणयबई सरसकुवलयदलच्छी / धणवइधणावहाभिहपुत्वा दो तीए उप्पन्ना // 4 // धूया य धणसिरी जा मयरद्धयरायरायहाणिसिरी / पुत्ताणं पत्तीओ पउमसिरी तहय कमलसिरी // 5 // एयाओ वियड्डाओ जुषणरूवाइगुणगणड्ढाओ / कुलसीलमहग्धाओ पहभत्तीए अविग्घाओ // 6 // अह अन्नया विइमा पिउणा पउमावइए नयरीए। इसरसिट्टीसुएणं परिणीया धणसिरी कन्ना // 7 // ससुरकुले CARRIA Page #200 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 187 // परिणयानन्तरं विधवा जाता तत्पित्रा स्वगृहे गन्तूणं पइणा सह ठाइ जाव दिणदसगं / तत्तो पिउणो गेहे जा पत्ता ताव सम्पत्ता // 8 // पइणो मयस्स वत्ता केण व रोगेण दिवजोगेण / तो रोइउं पवत्ता तह जह रोयइ कुडम्बंपि // 9 // धणसिद्धि विलवन्तं दट्टणं दुहमरेण अक्वन्तं / धरिऊण धीरिमं तो भणइ इमं धणसिरी धूया // 10 // मा माइ ताय रोयह कम्मफलं अम्ह तुम्ह को दोसो ? / ता मा मुज्झह बुज्झह उज्झह सोगं मम करणं // 11 // तो उच्छंगे चित्तुं भणइ पिया पुत्ति ! निष्फला जाया। मज्झं मणोरहा ऊसरम्मि जह वावियं बीयं // 12 // ता पुत्ति ! मज्झ गेहे कम्मं मा कुणसु किंपि ताव तुमं / कप्पडियतडियदीणाइयाण दाणं पयच्छेसु // 13 // पच्छिमभवंमि तुमए न विइन्नं तेण नेह ते भोगा / जेण जणमि पवाओ अवियन्नं लब्भए नेव // 14 // दियहाणि कइवि सोगं काउं तो नियनियेसु कजेसु / लग्गो सबोवि जणो विसुद्धसीला धणसिरीवि / / 15 / / भद्दकरिणि व वियरइ दाणं दीगाइयाण निच्चंपि / सयणाणं वच्छल्ले रइयरूई सल्लइवणंमि / / 16 / / परलोयं पत्तेसु जणणीजणएसु धणसिरी दुहिया / धणवइधणावहेहिं भणिया तो बन्धवेहिं इमं // 17-19 // बहिणि तुम मा खेयं कुणसु विसायं च अहव संतावं। जं अम्हघरलच्छी अन्भुयसुहकारिणी निच्चं // 20 // सिलहिमसेलतुल्ला तुमं सि जं बहिणि भरहवासंमि / अन्नाणं अम्हाणवि अलंघणिज्जा तओ होसि // 21 // इय बन्धवेहि एसा अमियरसासारसारवयणेहिं / पनविया पल्लविया सवंग कप्पवल्लि व // 22 // तो सविसेसं दाणं दिन्ती सुमणोवियाससोहिल्ला / जससुरहियसबासा पूरइ तक्कुयजणाणाऽऽसं / / 23 / / अह पुनपरिणईए तीए गेहम्मि इन्ति वयणीओ / भिक्खट्टा अन्नदिणे पडिलाहइ सावि सन्तुट्ठा // 24 // पुच्छइ धम्मतत्तं वइणीओ बिन्ति कप्पए नऽम्हं / कहिउँ धम्मकहंपि य भिक्खायरियापविट्ठाणं // 25 // वेसमणधणियगेहे चिट्ठइ अम्हं पवित्तिणी भद्दे ! / सा धम्मकहं तुम्हें कहिही | दानादिकधर्मे नि योजिता। का॥१८७॥ Page #201 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जय जिणिन्देहिं // 26 // भुत्तुत्तरंमि तत्त ओ जिणिन्दधम्मो दावियनिसमा विवेए ताणं कुसुमुजलं साधीसङ्गेन जयन्तीप्रकरणवृतिः। // 188 // भणियं जिणिन्देहिं // 26 // भुत्तुत्तरंमि तत्तो वहणीवयणामएण सित्तंगी। वेसमणगिहे वसहिं भाउज्जायाहिं सह एइ // 27 // ततो पवित्तिणीए सिवपुरवरवत्तिणीए सच्छाहो / कहिओ जिणिन्दधम्मो दावियनिस्सेसजियसम्मो // 28 / / जीवदयासारेणं घणगजिगहीरधम्मकहणेण / जिणवयणरूहवल्ली ताणं हिययस्थले रूढा // 29 // तो वियसिए विवेए ताणं कुसुमुज्जलंमि पइ. 11धर्म दृढता दियहं / जिणपूयाइविहाणे गच्छइ दूरं परिमलोवि // 30 // अह बन्धवावि तीए भणिया गच्छह पवित्तिणीपासे / धम्मा जाता। रामे जम्हा लब्भइ बोही सया सहला / / 31 // सुलहा सुरलोयसिरी रयणायरमेहलामही सुलहा / एकमि नवरि दुल्लहा जिणिन्दवरसासणे बोही // 32 // लज्जाए रज्जूए अम्हे संदाणिया जओ तेण / मयहरियाए समीवे कह गच्छामो ? भइणि तत्तो // 33 // जइ एइ कहवि सूरी अम्हाणं पुनपगरिसेणेह / तो तेसि पायमले गच्छामो कप्परूक्खाणं // 34 // इय तब्वयणं सुच्चा धणसिरी भणइ बन्धवाभिमुहं / सव्वं धन्नाणं चिय हवइ हु मग्गाणुसारितं // 35 // अह सुकयपगरिसेणं ताण सूरी समागओ बाहिं / उजाणे मणरमणे सेविञ्जन्तम्मि सउणेहिं // 36 // सह बन्धवेहिं गच्छह घणसिरी तहय भाउजायाहिं / गुरूपायवन्दणथं सम्पन्नमणोरहा तयणु // 37 // अह वन्दिऊण गुरुपयकमलं विनवइ धणसिरी एवं / मह बन्धवाण भयवं जिणधम्मं कहह एयाण / / 38 // ततो गुरूहि कहिओ करुणारससायरेहिं जिणधम्मो / वयणलहरी हि तेहिषि लद्धं सम्मत्तवररयणं // 39 // तेणुजोइयसिवपुरमग्गे जिणरायपूयणाईए। अक्खलियपयचारेणं निच्चं चिय ते पयन्ति // 40 // भवजलहितरणपोयं जिणभवणं धणसिरीए कारवियं / दबवएण बहुणा तत्थ पयन्ति पूयाओ // 41 // तह तीए अवरावरतवदिणपूयाविहाणदाणाई / दट्टण जणो हिट्ठो कुणइ पसंसं जहा एसा ॥४२॥धना कयकल्लाणा दिणयरमुचि Pl // 188 // CAUSESSACROSARSANSAR Page #202 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 189 // SAHARASHTRA kiव पसरियपयावा / जिणवयणं कमलवणं सवियासं कुणइ भमरहियं // 43 // सोऊण धणसिरीए जणप्पसंसं अईवईसाए। गहियाओ जणपुरओ भाउज्जायाओ जम्पन्ति // 44 // अम्ह पईणं अत्थो विच्चिजह धणसिरीए धम्ममि / तो किंथ पसंसिजह ? सुकरं चिय परधणं दाउं // 45 // भाउज्जायावयणं लोयमुहाओ सुणितु सा निउणं / चिन्तइ मणम्मि भाउजायाउ एरिसी हुन्ति // 46 / / किंतु परिक्खा किरउ बन्धवचित्तस्स जइ न पडिहाइ / ता किं दत्ववएणं ? अम्हाणं धम्मकजंमि | // 47 // तो पउमसिरीहुत्तं संज्झाए भणइ घणसिरी एवं / गंग व जिणाभिहिओ दयावहो सबहा धम्मो // 48 // &aa तो गिहवावारेवि य जयणा जमणु व जिणमया चेव / जीए अणुकूलवहं मलहरणं संवरं लहसि // 49 // भणियं च-"जयणा धम्मजणणी जयणा धम्मस्स पालणी निचं / तव्वुद्धिकरी जयणा एगंतसुहावहा जयणा" 8|| // 50 // वाणीवि य मणियबा जीए महुराए सच्चयासहिओ। कोडिगुणारोहेणं जिणधम्मो होइ सुपसिद्धो // 51 // धम्मियसिलवईणं संसग्गो सबयावि कायद्यो / होइ खमाए मेओ कुसीलयाणं जओ जोए / 52 // किंबहुणा ?-धम्माणमेस धम्मो रक्खिाइ साडिया पयत्तेणं / अह धणवइणा पइणा सविहे निसुयं इमं वयणं // 53 // तो पउमसिरीउवरिं कुविओ भत्ता न देइ पयसोयं / काउं जम्पद अवसर दिद्विपहाओ गिहाओवि // 54 // ता एसा पउमसिरी निद्वरया से वयंमि अच्छेरं / निदोसा संकुइया मउलियमणनयणवरकमला // 55 // पइसिज्जासम्म चिय रुयमाणी हाई भूमिवट्ठमि / जाव पभायं जायं निदोसाऽहंति अइदहिया / / 56 // उन्नयगुत्तप्पभवा खारूग्गारेण नम्मया कहवि / रयणायरे न मिल्हह जह तह नाहं पिययमपि // 57 / / इय चिन्तन्ती एसा सूणेहि लोयणेहिं उत्तिन्ना / वासहराओ दिट्ठा भ्रातृपत्नी कृतेर्षायां ला तया प्राचित| विलोकने मायावचन प्रयोगः कृतः। // 189 // Page #203 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरण तेन भ्रातचित्तरागो निश्चितः। इतिः / // 19 // घणसिरीए तओ भणिया // 58 // भद्दे ! अइदुहभरिया लक्खिजसि केण कारणेण तुमं / सा भणइ तुज्झ माया जाणइ अवमाणिया जेण // 59 / / साणन्दा य नणन्दा भणइ जहा कुणसु गेइकिच्चाइ / बन्धबहुतं सम्मं सोवालम्भं भणिस्सामि // 60 // ततो धणसिरीए भणिओ माया कहं ! तए एसा / रूसविया मह भाउजाया दोसेण रहियावि // 61 // तो धणबईवि जम्पइ असइपोसो गुरूहि पडिसिद्धो / असई बंधव ! एसा ? तुह कहिया केण सुयणेणं ? // 62|| तुमइ च्चिय संज्झाए रक्खसु नियसाडियंति मणिरीए / अइपंडिओऽसि बन्धव ! सिक्खावयणेवि जं एवं / / 63 // तुमए असई नाया भाउजाया विसुद्धसीलावि / ता बंधव ! गंतूणं खामसु मुत्तण संदेहं // 64 // अइजत्तरखणिजं सीलं गुणरयणरोहणगिरिन्दं / जाणावेउं वुत्तं साडियरक्खावयणमणहं / / 65 // तो धणवइणा एसा पउमसिरी नेहनिब्भरमणेण / दूरीकयसन्तावा खमा. विया महुरवयणेहिं // 66 // कमलसिरी वि एवं सिक्खाविया धणसिरीए रयणीए / मायं कोई माणं लोहं च विसेसओ चयसु // 67 // कोहो पीइं माणो विणयं मायावि हणइ विसासं / लोहो वियम्भमाणो सयलाण गुणाण पडिकूलो // 68 // लोहग्गलावरूद्धो जीवाण पुरंमि कह हु होइ / अंगीकय मेराणं गुणाण पउराण पइसारो // 69 // तो भद्दे लोहन्धा परधणहरणिकमाणसा जीवा / कीवा लहन्ति बहुहा वहबन्धणमारणाइणि // 70 // ता सबहावि रक्खसु हत्थं परदवगहणघणमलिणं / ज तंमि तेयहाणी लोओविन पिच्छए जेण // 71 // इयसिक्खावयणमिणं वासहरहिएण भत्तुणा निसुयं / चिन्तियमणेण तत्तो कमलसिरी चोरियं कुणइ // 72 // रूठेग तओ तेणंवि पडिसिद्धा पायसोयसन्निहिया / तत्थेव गमइ रयणी रूयमाणी कुट्टिमनिविट्ठा // 73 // विसमत्तणेण क्खलिए भूमिए चेव होइ ठायत्वं / जह तह अम्हाण गई ठिई मई परिणई मचा // 19 // Page #204 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 91 // CX अन्ते SACAROADS सर्वेषामपि | दीक्षाप्राप्त स्वर्लोकगमनम् / // 74 // गोसेवि य कमलसिरी मिलाणमुहनयणजुयलपंकरूहा / दिट्ठा धणसिरीए उत्तिना वासभवणाओ / / 75 // पुच्छह वो नणन्दा भद्दे ! कहमज तं निराणन्दा / जम्पइ कमलसिरीवि य जाणइ तुह बन्धवो चेव // 76 // तो तयहत्तं वुतं वीसत्था कुणसु गेहकिच्चाई / तह बन्ध भणिस्सं जह सुत्थं होइ सवपि // 77 // तत्तो धणसिरीए धणावहो बन्धवो इम भणिओ। कीस तए कमलसिरी मन्नुभरं पाविया अज? // 78 // तेणुत्तं बहिणि इमा लोहन्धा कुणइ चोरियं जेण / नायमिणं कह तुमए ? रक्खसु हत्थंति तुह वयणा // 79 // इय बंधवेण वुत्ते धगसिरी भणइ अइवियढोऽसि / जइ गुणहेउं भणियं ता किं दोसो हवइ तीए ? // 8 // ता सबहावि खामसु भयणीवयणेण महुवाणीए / तेणोवसमिया तह जह सित्ता अमियधाराए // 81 / / तो मुणियभायचिचा विसेसदाणाइधम्मकम्मरया / सा सलहणिजत्ति लोए कइवयवरिसाणि गमिऊण // 82 // अह पवजाभिमुही भणिया भाऊहि बहिणि ता चिट्ठ / सबाणवि पवजं गिहिस्सामो गुरूणन्ते // 83 / / आगमविहिणा तचो विहवं दाऊण चेइयघरंमि / पवजा निरवजा पडिवन्ना तेहि गुरूमूले // 84 // गुरूकुलवासे गिरिकन्दरम्मि पालन्ति सिंहविचीए / मोहकरिकुम्भदलणे मुत्तियसुहसम्पयं लहिउं / / 85 // भवियवयावसेणं संविग्गाएवि कहवि विम्हरियं / किंतु तं मायासल्लं धणसिरीए समुद्धरिंडे // 86 // तत्तो अणसणविहिणा समाहिपत्ताणि ताणि सवाणि / गच्छन्ति देवलोए मुंजन्ति व तत्थ सुक्खाइं // 87 / / अह इह जंबुद्दीवे भरहे साकेयपुरखरे हुत्था / विक्कमजसो नरिन्दो इन्भो सिट्ठी असोगति / / 88 // हरिणीनयणा करिणीगमणा पुण तस्स सिरिमई परिणी / धणसिरिबन्धवजीवा तप्पुत्ता सग्गओ जाया // 89 // पढमो सागरदत्तो समुहदचाभिहो य बीओत्ति / रूवेण जुवणेण य पुन्ना पुन्निमससीसोमा // 9 // धणसिरी -354ASTER // 19 // Page #205 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणपतिः / NAGAR // 192 // जीवो गयउरनयर सिरिसंखसिद्विपरिणीए / लच्छीए कुच्छीए पुत्ती सग्गा समुप्पन्ना // 91 // सवंगोवंगाणं चंगिममवलोयइ. ऊण जणएण | सवंगसुन्दरित्ति य तीए नाम कयं तयणु // 92 // आबालाओ बाला पुबन्भासेण जिणवरमयंमि / अणुरता सा भत्ता जिणाण मुणिपुंगवाणं च 93 // अह पढइ सुणइ एमा जाणइ अत्थं समत्थपत्थाण / गिहिजोग्गाणं वाला अबालचरियाए बट्टन्ती // 94 // पचा जुवणलच्छि जीए मुज्झन्ति तरूणदिट्ठीओ / सोहग्गरयणखाणी लावन्नतरंगिणी जाया // 95 // किं बहुणा ?-अंगोवंगपइडियलक्खणसुपसत्थसुन्दरसरीरा / सा दोलावह हिययं दिट्ठा नूर्ण मुणीणपि // 96 // अह साकेयपुराओ गयउरनयरे असोगसिट्ठीवि / वाणिज्जेणं सम्पत्तो सेटिसंखेण ववहरइ / / 97 // तेणऽन्नदिणे भणिओ मह गेहे ते अवस्स भुत्तवं / तेणवि दक्खिन्नेणं भणियं जं भणसि तं काई / / 98 // तो गउरवेण भोयणसामग्गीए कयाए आइओ। आगच्छइ असोगो गेहे संखस्स सेद्विस्स // 99 // तस्स य कंचणथाले अइसरसं भोयणं कुणंतस्स / सवंगसुन्दरी सा वीयणगकरा कुणइ भत्ति // 100 // तो तेण नहग्गाओ सवंगनिरक्खणेण तुद्वेण / भुत्तुंतरमि सिजागएण संखो वणी भणिओ // 101 // इह सजणेण सद्धिं पीई जइ हवइ दिवजोएण / तो जम्मेवि न विहडइ सच्चं चिय पत्थरे रेहा // 102 // आलम्बणेण रहिया तहावि सा वित्थरं न पावेह / वल्लोवि जओ तरूयरसिहरारोहेण वित्थरइ // 103 // लावनामयसरिया कन्ना सवंगसुन्दरी तम्हा। दिजउ मह ता गुणनिहिमायरदत्तस्स पुत्तस्स // 104 // संखेणवि जुत्तमिणति य चिन्तिय नेहनिम्मरमणेणं / दिन्ना कन्ना अह वित्थरेण गरूएण परिणीया // 105 // गन्तूणं ससुरकुले कयवयदियहेहिं सा पुणो पत्ता / नियजणयगिहे अच्छह सहीहिं परिवारिया सुहिया // 106 // अह अन्नया य भत्ता पत्तो धनश्री. जीवो देवलोकात् च्युत्वा गजपुर नगरे शंख श्रेष्ठिपुत्री जाता। Page #206 -------------------------------------------------------------------------- ________________ N // 193 // सर्वाङ्गसुन्दाः पूर्वकृतकर्मोदयात् पतिना त्यका। पत्तीए आणणनिमित्तं / कयमाइत्थं सवं भोयणतंबोलमाइयं // 107 // तो चित्तसालियाए रइया सिञ्जा अइवरमणीया / | विहिया तंबोलाइयअञ्चन्भुयभोगसामग्गी / / 108 // सिजागओ य चिट्ठइ देवकुमारो व दिवसिंगारो / एसो सागरदत्तो भजागमणं अहिलसन्तो॥ 109 // जावजवि न गच्छइ भजा सवंगसुंदरी ताव / तीए उइयं कम्मं अन्मक्खाणेण जं विहियं // 110 // अणुरूवपत्तसंपुन्नभोगसामग्गिसंपयं दटुं। वन्तरसुरेण कोऊहलेण तो दंसिओ पुरिसो // 111 // सागरदत्ताभिमुहं पत्ता सवंगसुंदरी नित्थ ? / भणिऊण एवं मत्वालंबाओ लहु अवकन्तो // 112 // तत्तो सागरदत्तो सोउं दद्वं च वयणमवक्कमणं / चिन्तइ एवं कृविओ दुस्सीला मे इमा भज्जा // 113 / / कयसंकेओ पुरिसो आगच्छइ निच्चमेव एयाए / पासंमि ममं द8 अन्ज सिग्धं अवतो // 114 // तो उविग्गो गन्तुं चिन्तइ ता सा सहीहि परियरिया / तस्सासन्ने पत्ता सो थको सुत्तविडेणं // 115 // तुह सहि ! भत्ता सुत्तो खिझुक्किरि केरिसं करिस्सामो / इय भणिऊण गयाओ नियनियगेहेसु सबाओ // 116 // खट्टाए उवविट्ठा सा पुण गन्तूण पइसयासंमि / तो उट्ठिऊण एसो उवविडो अन्नहाणम्मि // 117 // अह चिन्तियं च तीए कि रूट्ठो मज्झ वल्लहो ? एसो / नय किंपि कयं खूणं मायापित्तेहिं एयस्स // 118 // पणए अविणया रोसो जायइ दइयस्स सो कओ नेव / अखणिजंततलाए मगरो चिय पढमं पविट्ठो // 119 // मुश्चामो सयणीयं किं ववसइ ? ताव एस पिच्छामि / अह उद्वियाए तीए सयणीए तयणु सो सुत्तो // 20 // चिन्तइ मणेण एसा जो किर पाणाण नायगो होही / तलिसियं च एयं हाहा मे कम्मपरिणामो // 21 // अह मुश्चइ नीसासे उन्हुन्हे दइयरोसजलणस्स / कलसीकयआसामुहधूमसिहाविन्ममे एसा // 22 // रूयमाणीए तीए विरहदवो अंसुवारि AGARCASTEROICS // 193 // Page #207 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 194 // धाराहिं / सिंचन्तो परिवड्डइ बन्धू किल अग्गी तेलस्स // 23 // जह तीए पुत्वभवे भाउजायाए दुक्खरिच्छोली। दिना Ini तन्मात्रासयलं स्यणि तह पावइ सावि चिरकालं // 24 // एवं दुक्खतत्ताए तीए अरूणोदयम्मि सो भत्ता / गच्छद नियए नयरे |ऽऽश्वासिता दुवारवालस्स कहिऊण // 25 // सावि य पभायसमए सहीहिं उस्पूणलोयणा दिट्ठा / भणिया कीस ? किसोयरि! जाया सती स्वएवंविहावत्था // 26 // तीए भणिय पुच्छह मम कम्माइं अहं न याणामि / नियमसुणो अवना कावि कया सो गओ मुत्तुं व्रतेच्छा // 27 // जणणीए ताहिं सिहं पत्ता मायावि दुम्मणा तत्थ / संबोहइ नियदुहियं मा सोयसु किंपि वच्छि! तुमं // 28 // प्रदर्शितअवराहराहुगहणे अविजमाणेवि तुज्झ मुहचंदं / गच्छइ अपिच्छिऊणं नयणसुहासायणाजोग्गा // 29 // ता मुश्च पुत्ति ! वती। खेयं चिन्तेह नियअन्तराइयं चेव / गिहधम्मपरा चिट्ठसु जा झिज्झइ तुज्झतं कम्मं // 130 // तीए भणियं अम्मे ! न य कजं किंपि गेहवासेण / गिन्हामि वयं अहयं अदिद्वदोसा सपरितोसा // 131 // एसो च्चिय मज्झ गुणो ज भत्तारेण विप्पियं विहियं / विसयामिसम्मि गिद्धा भमन्ति संसारकन्तारे // 132 // सबन्नूवयणदीवयसुदिट्ठपरमत्थसत्थसाराए / न य बाहह मह मोहो लोहो वा विसयसुखाणं / / 133 // मायाए संल जावेसो वच्छि ! परिणेइ न अन्न / ताव तुमं मा मुश्चसु तस्सासं अच्छ नियगेहे // 134 // एवं जणणीभणिया एसा सवंगसुन्दरी हिट्ठा / जिणधम्मपरा चिह कावयवरिसाणि पिउगेहे // 135 // पत्तो ससुरो तीए अह वाणिजेणं कोसलपुरंमि / तत्थ य गच्छह नन्दणसिद्विधरे मोयणत्थेण // 136 // पिच्छइ दो कनाओ सिरिमइकन्तिमइत्ति नामाओ / सवंगसुन्दरीए पुत्वभवे भाउजायाओ // 137 // सोहग्गरूवजोवणलवणिमलच्छीहि मयणघरिणीओ / मुत्चारइपीइओ मणहरणीओ मुणीणंपि // 138 / W194 // AMAA Page #208 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 195 // सङ्गि 645CALSOCIAL है तो तेण मग्गियाओ पुत्तनिमित्तं दुवेवि दुहियाओ। दिनाओ नंदणेणं परिणीयाओ समिद्धीए // 139 // सवंगसुन्दरीए कियत्कालं सुयमेयं तयणु भन्नए तीए / जणणिजणयाणहुत्तं मुश्चह में पवइस्सामि // 140 // तो ताणऽणुमएणं सुबइगणिणीए पाय- व्यतिक्रम्य मूलम्मि / सिरिधम्मघोससूरी तं दिक्खइ गुरूविभूईए // 141 // गुरूकुलवासे रयणायरंमि सिक्खातरंगमालाहिं / अणवरयं दीक्षा सा पावइ गुणरयणाई महग्याई // 142 / / संजमलच्छीहारं कुणइ य एसा पमायपरिहारं / बुज्झइ आगमसारं अप्पाणं घरही गृहीता अवियारं // 143 // छज्जीवकायपुरवरदिढपायारो इमीए पइचारो / सच्चं वाणी महुणा अच्चुभुयसच्चिक्कजम्मपुरी // 144 // तत्वो गीयत्थाए कित्ती चन्दुजला प्फुरइ तीए / अइसाइखमाधरणे सहसमुहा सेसमुचि व // 145 // उवहसियरई रूवसिरि सुन्दर्या। पसंसेति वीयरागोवि / जीए उवसमलच्छी सही सया पीइपडिबद्धा // 146 // गामागरनगरायरेसु विहरन्ती सा कमेण साकेए / पत्ता पवित्तिणीए सद्धिं सद्धम्मकम्मरया // 147 // भूसणसिडिस्स गेहे वसहीए हाइ आगमविहिए / सुपसिद्धो अह तीए नयरे स्वाइगुणनिवहो // 148 // सिरिमइकन्तिमइओ आगमणं जाणिऊण तो तीए / सोचा रूवपसंसं वसहीए इन्ति रहसेणं // 149 // महयरियं वंदित्ता भणन्ति सवंगसुन्दरी कत्थ / कहिया पवित्तिणीए गयाओ तीए सयासंमि // 15 // जम्मन्तरनेहेणं जाया पीई य धम्मसद्धा य / भणियाओ कीस धम्मं न करेह ? जिणिन्दपन्नत्तं // 151 // भणियं ताहिं करेमो गयाओ तो महयरीए पासंमि / तीए धम्मो कहिओ गहिओ अह भावसारं तु // 152 // चीवन्दणाइसुत्तं पढन्ति अहियंति उभयसंझपि / नाउं पिएहि मणियं मा वच्चह तीए पासंमि // 153 // नो सुंदरित्ति अजा तेसिं अवहीरिऊण तं वयणं / / जम्मन्तरनेहेण य अणुराएणं च धम्मस्स // 154 // वच्चन्ति अणुदिणंपि य अनदिणे ताहि मयहरी भणिया / सवंगसुन्दरी ECIAAAAAAA Page #209 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्ती प्रकरणकृतिः / // 196 // CHUODIACANCIENCODA जइ एइ गिहं होइ पडिवाडी (सूत्रार्थवाचना) // 155 // तुम्हें अवरोहेणं एहि सवंगसुन्दरी गेहे / दाऊणं परिवाडि साकेतपुरे सिग्धं वसहीए आयाही // 156 // तत्तो पवित्तिणीए वयणेणं जाइ ताण गेहमि। पइदियहं परिवाडि देइ य तासि विचरणं, सिणेहेण // 157 // अह चित्तसालियाए अन्नदिणे जाव दाउं परिवाडि / सा अजा वच्चिस्सइ कन्तिमईए तओ वुत्ता तत्र // 158 // वच्चह भत्तं पित्तुं उववासेणं जओ ठिया कल्ले / तो निबन्धं नाउं अप्पबीया अजा तओ भणिया // 159 // पूर्वभवनागिण्हाहि तुमं किंचिवि ठाइस्समहं तु चित्तसालीए / सवंगसुन्दरीए इय भणिया जाइ सा अजा // 160 // जावच्छइ सा तत्थ जाययोय हत्थं रखिजसुत्ति वयणेण / पुत्वभवे जं कम्मं समज्जियं तमुइयं सहसा // 161 // तो ताण पीइविहडणकोऊहलिएण वन्तर- | धर्मप्राप्तेसुरेणं / चित्ताओ उयरन्तो तीए उवदंसिओ मोरो // 162 // तेण य ओयनेणं गिलिओ पडलीए संठिओ हारो / भित्तीए निविडा चित्तगओवि पुणोवि देवाणुभावेण // 163 // तो चिन्तइ विम्हहया वयणी सवंगसुन्दरी एवं / नय दि8 नेव प्रीतिः, पूर्वसुयं एवं अचभुयं चरियं // 64 // अहवा-पुडा पर्वपि जले तरह सिला हुयवहो जले जलइ। तं नस्थि विक संविहाणं संसारे जन्न संभवइ // 65 // किंतु इमं महकम्मं पुत्वभवे कहवि जं मए बद्धं / तमिह वियम्भइ अन्नह कहं ? मए म्मोदयादीसए वियणे // 66 // एवं सा चिन्तन्ती बीयाए साहूणीए आहुया / गन्तूणं वसहीए पवित्तिणीए कहइ सई // 67 // *दाश्चर्य दृष्टं तीए भणियं अजे जम्मन्तरकम्मविलसियं किंपि / ता सहियवं तुमए अवेइए नस्थि मुक्खुत्ति // 68 // उक्तं च-" सहो च तया / पुवकयाण कम्माणं पावए फलविवागं / अवराहेसु गुणेसु य निमित्तमित्तं परो होइ" // 69 / / लोगो खिसं काही तुमए 4 // 196 // रोसो चेव न कायद्यो / तवनियमे अ जुत्ता विसहिज परीसहं एयं // 170 // एवं पविचिणीए वयणसुहासारिणीए सा | Page #210 -------------------------------------------------------------------------- ________________ B // 197 // हैसित्ता / होइ सुमणोमिरामा नंदणराइ व पल्लविया // 71 // अह दाणं दाऊणं कंतिमई चित्तसालियं एइ / पिच्छइ तत्थ न चित्रितमयू हारं पडलीमुकं गुणाधारं // 72 // कुणइ य तयणु वियारं कम्मयरेणं हविज गहिओत्ति / पुच्छामि ताव एए पुट्ठा तो ते | रेणोत्तीर्य इमं विति // 73 // अजाओ मुत्तूणं न कोवि तह चित्तसालियं पत्तो / तो हक्कइ कम्मकरे का संका ? तुम्ह अजाणं // 74 // म्हारो गिलिभत्तंपि हु दिजंतं समग्गलं जाओ नेव गिण्हन्ति / ताओ किं हारेणं अणत्थमूलेण काहिन्ति ? // 75 // किं ? दुद्धे पुयस्या हवन्ति तस्ततश्चौअमएवि किं विसं होइ ? / गंगानईए किंवा कयावि अपवित्तया होइ 1 // 76 // एवं कन्तिमईए साहिक्खेवं सुणित्तु वयणविहिं / हार्यकलङ्कमाकम्मयरा तुसिणीए मुद्दियवयण व चिट्ठन्ति / / 77 // तो विनाओ सागरसमुद्ददत्तेहिं हारवुत्तन्तो। तो लग्गा कलहेउं जप- पतितं तया न्तऽजा अणजत्ति // 78 // ता कन्तिमई जम्पद अजाए मा करेह निन्दत्ति। पावेण चिय छिप्पह नय अन्जा एरिसं कुणइ // 79 / / &च समतया अविय-उग्गमइ रखी पच्छिमदिसाए अवि चलइ मेरूचूलावि / लंघइ मजायं सायरोवि अजा कुणइ नेवं / / 80 // तेहिवि तो सोढम् / पडिभणियं मा वच्चह साहुणीवसहीए / ता कम्मवन्धभीया ताओविन जति ताण पासंमि // 81 // सवंगसुन्दरीविय अजा सुद्धावि एइन हु गेहे / गुरुकम्मबंधमीआ समाहिणा चिट्ठए किन्तु // 8 // छट्ठट्ठमाइ उग्गं कुणइ तवं जत्थ होइ सुइभावो। वियसन्ति | भावणाओ सुद्धपसवा पाडलाउ व // 83 // निम्मलसंवरभरिए खीरसमुद्दि व माणसे तीए / जणघणदुवयणवि हु समइच्चिय देइ नहु तावं // 84 // नवचंदकलानिम्मलपवजाएवि सऊणं चक्काणं / जं परितावो तं मह बहुतमदोसाणुभावेण // 85 / / उत्तमकुलंमि जम्मे चरित्तधम्मेवि कीरमाणमि / एसो मे उवहासो अनायहेऊ हहा हो // 86 // चित्तगओ उत्तिन्नो मोरो गिलिऊण हारमविलंबं / चित्तगओ च्चिय चिट्ठइ कहमिह संपच्चओ होइ ? // 87 // कम्मवसगएण वसणं जीवाणं तंपि होइ संसारे। ASEARCHASKASARGACAS Page #211 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणपतिः / शुद्धभावनया केवलज्ञानप्राप्ती देवकृता स्तुतिधर्मदेशना च कृता। // 198 // 645464RECX जम कहिउ न सहिउँ न चेव पच्छाइयं तरह // 88 // मह सुब्वयगणिणीए कप्पलयाएपि पायच्छायाए / चिट्ठन्तीए तावो जं जाओ तमिह अच्छरियं / / 89 / / अहवा मणसुद्धीए सिद्धी जीवाण निच्छयनएण / एवं जाणन्तीए महऽदृज्माणस्स को समओ? // 9 // तो धम्मज्झाणससिमण्डलेण जुन्हाए सुकलेसाए / पसमइ तावो सहसा बढइ सुकयऽनवो तीए // 91 // इह पुण दुक्खमिणं चिय जं मह दुक्कम्मसम्पओगेण / जाया जिणिन्दधम्मे खिसा अनाणलोगम्मि // 92 // जिणसासणखिसाए भमन्ति संसारसायरे घोरे / जीवा लहन्ति न पुणो कहवि जंबोहियोहित्थं // 93 // सुगहियनामधेया ते जे कम्मक्खएण सिद्धिपुरि / पत्ता जं जीवाणं न कारणं कम्मबन्धस्स // 94 // इचाइभावणाए वणराईए अपुवकरणेणं / कुसुमुजलेण तीए दूरगओ परमलुग्गारो // 95 / / तो सा खवगस्सेणीगंगावेणीए घायकम्ममलं / पक्खालिऊण पावइ महासई केवलन्नाणं // 96 // उप्पमम्मि अणन्ते केवलनाणे समागया देवा / वायन्ति दुन्दुहीओ वासन्ति य कुसुमभरवासं // 97 / / चेलुक्खेवं गयणे करिन्ति आसीसमुहलमुहकमला / सवंगसुन्दरीए थुणन्ति रहसेण गुणनिवहं // 98 // तहाहि-भयवइ तुमए निहओ खरतरवास्सुिदिढघाएण / मोहो महानरिन्दो दुजोहो सुरवईणपि // 99 // तह पंचिंदियदंती अहो अहो सुकजाणसंकन्ती / तह भगवई गुणवन्ती मुत्ताहलमालसमकन्ती // 200 / दुञ्जणमुहधणुनिग्गयदबयणबाणेहिं दस्सहतरेहिं / वजमय वन भिन्न भगवइ ! तुज्झ खमाकवयं // 1 // सिवपुरपहमि तुह पयचारो अइकढिणचारूचरणाए / तह जाओ जह मंजिओ जणदुवयणकट्ठउक्केरो // 2 // अहुणा धम्मकहाए केवलनाणकमंडलपहाए / अम्हाणं करुणाए सिवपुरमग्गं पयासेहि // 3 // केवलमहिमं काउं भत्तीए देवदाणवमणेहिं / किच्चा गुणसंथवणं इय भणिए Page #212 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 199 // देशनायां चतुर्गति प्रदशनम्। सुद्धसद्धाए // 4 // महुरस्सरेणं तत्तो धम्म सबंगसुन्दरी वइणी / भवजलहिजाणवत्तं कहइ जिणिन्देहिं जं वुत्तं // 5 // | देवागमेण विम्हयरसेण अन्तेउरेण सह राया / अह एइ पउरलोओ परियणरिद्धीए परियरिओ // 6 // सागरसमुद्ददत्तो एयं अच्छेरयं च मन्नन्ता / महिलाहिं संजुत्ता परमाणन्देण तह पत्ता // 7 // तह भगवईए भणियं भो भवा इत्थ भवसमुद्दम्मि / दसदिठ्ठन्तदुल्लम्भा माणुसजम्माइसामग्गी // 8 // जओ भणियं-" माणुस्सखित्तजाइकुलरूवारोग्गआउयं बुद्धी / सवन्नगहसद्धासंजमो य लोगमि दुलहाइ" // 9 // तम्हा भवा रक्खाढाणे बहुसत्तजीवणिकायस्स / जिणधम्मे रयणायरसरिसे सेवामइं कुणह // 10 // जेणेह नाणदसणचरित्तरयणाण तुम्ह उवलम्भे / सिद्धिपुरीए रजं असंसयं सासयं होइ // 11 // संसारे पुण जीवा चउरासीजीवजोणिलक्खेसु / अट्ठविहकम्मबन्धणबद्धा न लहन्ति सुहमणहं // 12 // जम्हा देवगईए इसानलकोहमाणलोहेहिं / देवा किल चवणत्ता सयावि सुहिया न हु हवन्ति // 13 // मणुयगईए जायइ गब्मे जम्मे य जमिह जीवाणं / तं दुक्खं जेणाऽऽउं खिजइ सोवक्कम सहसा // 14 // निरूवक्कमेवि तम्मि य बालत्ते जणणिथन्नच्छेएण / अचिकिच्छणिज्जरोगाइएहि पीडिज्जए जीवो // 15 // तरूणतणम्मि मणुया दुरन्तदारिद्ददुक्खिया हुन्ति / इदुविओगाणिट्ठप्पओगदावानलुत्वत्ता // 16 // अन्ने व वसणासत्ता विसयग्गामेसु हुंति खलसंगे। पसुपायघायदलिया कलिया धन्नं व दुक्खेण // 17 // थेरत्ते पश्चिन्दियबलहाणिं पप्प पत्तदोहग्गा। अट्ठदुहट्टा कालं खविन्ति पुत्ताइपरिभ्या // 18 // एगिन्दियतिरियजिया सकायपरकायसत्थमरणाई / संखेयमसंखेयं कालमणंतं च पाविन्ति // 19 // विगिलिन्दियावि जीवा जलणजलावायतण्हच्छुहसुसिया / सीयायवऽभक्खणवसओ य लहन्ति मरणाई // 20 // नरए नेरइयाणं जीववहारं GA4%ARHAALA . Page #213 -------------------------------------------------------------------------- ________________ SAROO जयन्ती. प्रकरणवृतिः / // 20 // GAAKASHARE भपमुहपावेण / तं किंपि हवह दुक्खं अणोवमं बिन्ति जं मुणिणो // 21 // जओ भणियं-अच्छिमीलणमिपि तत्थ सुखं न विजए। नारयाण वरायाणं पुवकम्माणुभावओ // 22 // परमाहम्मियखित्तस्सहावअन्नोन्नजणियतावेहिं / संतत्ता नेरइया 6 सुइरं निवसन्ति निरएसु // 23 // चउविहगइप्पयारे संसारे तत्तओ सुहं नत्थि / तम्हा सिद्धिपुरीए इच्छह वासं सुहावासं // 24 // तो सम्मनाणदंसणरहंगजुयचरणरहवरेणिस्थ / गच्छह सिद्धिपुरीए मुणिवसहाहिडिएण लहुं // 25 // जा एवं धम्मकहं कहेइ सा भगवई पबन्धेण / तावय समुद्ददत्तो भणइ निवं अम्ह अच्छरियत्ति // 26 // नियगेहे अच्छरियं जं तं पुच्छामि मे न खूणंति ? / रायावि भणइ पुच्छसु अवराहो नस्थि थोवोवि // 27 // किं चित्तगओ मोरो हारं गिलइत्ति ? भगवह ! कहेसु | कम्मवसेणं गिलइ तं कम्मं कस्स ? सा भणइ // 28 // मज्झतित्ति भणित्ता कहइ य सवंगसुन्दरी एवं / धणसिरिजम्मंमि मए भाऊणं चित्तमुणणत्थं // 29 // भाउजायाहुत्तं रक्खसु नियसाडियंति जं भणियं / बीयाए सम्मुहं पुण रक्खसु हत्थंति जं वुत्तं // 30 // ताण विवागो एसो पढमे पियसंगमेवि केलीए / वंतरसुरेण पुरिसं दंसेऊणं हया पीई // 31 // तह गेहंमि ममोवरि पीइं दहण तुज्झ घरिणीए / एसा विहडइ किंवा नवत्ति केलीए देवेण // 32 // हारो चित्तगएणं गिलिओ मोरेण दंसिओ मज्झ / असद्धेयंति इमं न मए कहियं पुणो सहियं // 33 / / संपइ खीणे कम्मे पच्छायावो सुरस्स संजाओ / तुह पिच्छन्तस्स तओ निग्गिलिओ चित्तमोरेण // 34 // सुहमऽब्मक्खाणेणवि अज्जियकम्मोदएण जो जाओ / एसो कलंकको निधोइओ संवरेणिमिणा // 35 // धम्मत्थं सुहमं पिय मायासलं अणुट्ठियं एवं / होइ दुहेकनिमित्तं तम्हा परिवजह तयंपि // 36 // एवं निसुणन्ताणं ताणं जाइसुमरणं जायं / मुच्छानिमीलियच्छिणी | समुद्रदत्तेन |चित्रमयूरगिलितहार| विषयकप्रश्नः कृतः | केवलिना सर्वपूर्व भवियत्तान्तो ज्ञापितश्च / CARRC // 20 // Page #214 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 201 // लोभपापस्थानके कपिलोदाहरणम्। 5 RSHALISARAIGAROO ताणि धरणिए पडियाणि // 37 // नरवडणावि य आसासियाणि चंदणरसाइणा ताणि / अक्खन्ति य नरवइणो पुबमवं भगवहकहियं // 38 // खामित्ता य भगवई वेरग्गेणुग्गभावियमईणि / लिन्ति वयं गुरुमूले रायावि य सावगो जाओ // 39 // अन्नोवि बहुयलोओ पडिबुद्धो संविहाणयं ददु / सोऊण य जिणधम्मं दुरन्तसंसारमयभीओ॥ 40 // सवंग. सुन्दरीए सुइरं पडिवोहिऊण भवजणं / खविऊण कम्मरासिं लद्धा सिद्धी सुहसमिद्धा // 41 // इयराणिवि चरितं सुद्धि परिपालिऊण चिरकालं / उवलद्धकेवलाणि य सिद्धिं पत्ताणि सवाणि // 42 // एवं दुहपरिणामा माया थोवावि पावट्ठाणंति / तं वजह जत्तेणं जइ इच्छह सासायं सुक्खं // 243 // मायाकहाणकं सम्मत्तं // लोभोऽपि महापापस्थानमित्युपदिशन्ति सन्तः। स हि पिशाच इव प्रणयमागतः संहरति शौचं, त्याजयत्यायत्यालोचं। तथासौ समस्तार्थसर्गसंहारभर्गः (शिवः) समुत्पादितसर्वव्यसनवर्गसंसर्गः / को हि प्राणी प्रामोति तन्मुखांतर्गतः सन् दुःखान्तरं ?, को वा तदाश्रयः समाश्रयति सुखं ? निरंतरं / तदुक्तं सर्वविनाशाश्रयिणः सर्वव्यसनैकराजमार्गस्य / लोभस्य को मुखगतः क्षणमपि दुःखान्तरमुपेयात् // 1 // लोमान्धा हि प्राणिनः पश्यन्ति न सन्मार्गम् / स्खलंति सदा चरणक्रियायां पदे पदे, प्रपतन्ति उन्मार्गप्रपन्नाः प्रसृततमःप्रपंचान्धे मवान्धी, पापपंकान्तर्गताश्चात्र प्रभूतकालमनुभवन्ति निरन्तरं दुःखानि / अन्यच्चायं लोमाम्भोघेर्दुःपुरोदरतामात्मन्यादधानः प्रकटयति धारोद्गारं, दधात्यन्तः क्रोधं वडवानलानुकारं, उल्लासयति अनवरतमुत्कलिकाः, प्रवर्तयति अविरतमावर्तवलिकाः। स हि अतिशायिगुणघटोदयेन कपिलमुनीन्द्रेणेवाऽभ्यर्ण 55ACC+5 // 2 Page #215 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CARA पुरीनगाँ कपिलस्य जयन्तीप्रकरणइतिः / भ्यासः। // 202 // ANSAXSANSAR केवलज्ञानसंपदा प्राणिना सविशेषसन्तोषपोषपियूषचुलुकपानतः शोषमानीयते यदि परं / तथाहि आसि पुरा कोसम्बी नपरी सुररायपुरवरी रम्मा। तीए रायपुरोहियजसोयमजासुओ कविलो // 1 // लहुयस्सवि तस्स पिया, पत्तो पंचत्तमह नियो अन्न / संतिकिरियासु कुसलं पुरोहियं ठावए विप्पं // 2 // तं अन्नदिणे पिच्छइ रिद्धीए रायमग्गमोइन / बहुसेवगसंकिन्नं पसरियसोया जसोया सा // 3 // रोयइ करूणसरेणं मुसाहलनिम्मलाणि अमणि / मुयमाणी कविलेणं किं रोयसि ? पुच्छिया तत्तो // 4 // सा जम्पइ एत्थ पुरा पुरोहिओ आसि वच्छ ! तुह जणओ / सो एवं रिद्धीए गच्छन्तो रायमग्गेण // 5 // एएण कारणेणं पुत्ता रोएमि मन्दपुन्नाऽहं / पुच्छइ कविलो रबा जणयपयं कहं नो दिन्नं मे 1 // 6 // जणणीवि भणइ पुत्तय अपढियवेपत्तणे ण कयकरणो / तं सि किरियासु तेणं जणयपयं तुह कहं होइ ? // 7 // पिउपयपइट्ठकब्जे सजोऽहं माइ वेयअज्झयणे / इय कविलेणं भणिए जम्पइ जणणीवि अइहिट्ठा // 8 // जइ एवं तो पुत्तय तह पिउमित्तोऽस्थि इन्ददत्तोत्ति / अज्ज्ञावजो पुरीए सावत्थीए तहिं गच्छ // 9 // एवं जणणीवोत्तो कविलो सावत्थिपुरवरि पत्तो। उवज्झायपायपणओ विणएणं विनवइ तत्तो // 10 // मज्म जसोयाजणणी कोसम्बीए तओ अहं पत्तो। वेयज्मयणमणेणं कप्पतरूणं व तुम्हन्ते // 11 // विजागहणं सम्मं निच्चिन्ते भोयणम्मि पज्जत्ते / होह तओ हि सिद्धि गन्तूणऽवरोहहस्सामि // 12 // परिभाविऊण एवं उजाओ सिट्ठिगेहसंपत्तो। कविलेण समं तो सो तोसेणं भणह तय. हुत्तं / / 13 // अज्झावयमिस्साणं सागयमिह होउ अन्ज सुविहाणं / आइसह सुहनिसमा सुपसन्ना कजमम्हाणं // 14 // तो तेण सुहारूदणा सागयवयणेण सो उवज्झाओ। सवियासनयणकुवलयजुअलो आइसइ सेठिस्स // 15 // X // 202 // Page #216 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 203 // श्रेष्ठिगृहे RASHASANSAR तुम्ह भोयणेणं वेयज्झयणं कुणउ सम्मं // 16 // अज्जावयवयणामयसिवा सिद्धिस्स दाणरुइवल्ली। कविलस्स दासीहत्था भोयणदावणफला जाया // 17 // दासीवियाग्गासे सविलासमिहोपयट्टसंभासे। पइदिवसं विसंमे पसरन्तसिणेहसंरंभे // 18 // तरलियवेयभासे दासीकविला से अट्टज्झाणमि सवियासे // 19 // वदृन्तीं दट्टणं दासी सम्भन्तलोयणो कविलो / पुच्छइ पिए ! कुओ ते असमाही वट्टए हियए ? // 20 // तीए वुत्तं पिययम ! निवाइदासीण ऊसवे पत्ते / अहमेव उड्यापरिभूआ तत्थ हो रक्खामि // 21 // तं दुक्खं संकंतं सिणेहभरियमि कविलहिअयंमि / तेणुत्तं दहए ! सुवन ( तेत्रमहं) करिस्सामि // 22 // एवं मह नाणुमयं जीनियसन्देहकारणं जेण / बम्भणवित्तिए जं कल्लाणं तमिह कल्लाणं // 23 // एवं तीए भणिए बम्भणवित्तिए णाणसम्पत्ति / कुणइ पिए ! किंकणयं कत्थ य लम्बइ ? भणइ कविलो // 24 // सा जंपइ इह सिट्ठी सायरदत्तो दियस्स मासदुगं / वियरइ पभाय समये पढमं जो // 25 // सिक्त्यममंतो होइ / मृसणं मह न दूसणं तुझ इह किंपि // 26 // विस्साससरस्सईए दियस्स कक्लिस्स तोसकरणीए / अणुकुल चारिणीए सायरगमणे मणं होई // 27 // एवं विनविओ सो रयणीए // 28 // सिकाऊण // 29 // पच्चुसे पुण नीचो रायसहे डंडपासिवनरेहिं / नयरपहंमि निसीहे एसो दिवोति विनतं // 30 / / दहण कविलमुत्ति लक्खणजुर्ति निवो सह स्नेहो जातः। CINEGGICHARAKAR 203 // Page #217 -------------------------------------------------------------------------- ________________ NA // 31 // जयन्ती प्रकरणइतिः / सुवर्णविषयक विचारणा * कपिलस्य / 204 // SAMACHAR विचिंतेइ / एयाए आगिईए पुरिसो // 32 // वियास चंदोदएण। कविलेण उल्लासिओ है ससत्तो पसायजलही निरिंदस्स // 33 // वियरामि सुवनं तुह मग्गसु तत्तो विवेयमणियंमि / कविलेणुवं परिभाविऊण सम्म कहिस्सामि // 34 // रायावि भणइ // 35 // णतओ विचिंतइ कविलोवि तत्थ गंतूण | वसुपसरेण राया तूरइ किमच्छरियं ? // 36 // तो किं सुवनसए मणोरहो // 37 // एएणं सोणं मज्झवि कति होउ सहस्सं मे / अहवा वासग्गासाइ पुजए किं सहस्सेणं // 38 // मग्गामि तओ लक्खं दुरंतदारिददारुकरवचं / पुत्वाइजम्मपत्वसु सुपावलच्छीकरणसत्तं // 39 // विहलियसयणुद्धारो मग्गणगणदाणकित्तिवित्थारो / सुयणाण विहवसारो अहव न लक्खेण उवयारो // 40 // नमो अत्थोवाओ निवो य एसो अइव सुपसाओ / तो जणियहरिसकोडिं सुवन्नकोडिंपि मग्गामि // 41 // दुभिक्खरोय रायग्गहविग्गहपमुहकञ्जनिवहेसु / सावि ओवभुजमाणा अप्पपमाणा हवइ अहवा // 42 // तदुवरि मग्गिजंतं सयं सहस्सं च लक्खमवि थोवं / जइवा लाहे लोहो बड्डइ रुद्दो पिसाओ व // 43 // तदुक्तं-"जहा लाहो तहा लोहो लाहा लोहो पवढह / दोमासाकयं कम्मं कोडीएवि न निट्ठियं // 44 // संसारंमि समुद्दे सुमाणुसत्तंमि सुकयफलयंमि / लोहपबंधे हवईह सुजाणपत्तेवि य विणासो // 45 // सिवपुरवरपहरोहो लोहो अपलोवि मिजए सहसा / गुत्तेहिं मुणिंदेहिं अइगुरुसंतोसलिसेन // 46 // संतोससुहासित्ता सत्ता *%AA-%CCRA मा॥२०४॥ Page #218 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ॐ // 205 // भिरामो असोयसुमणोवियासरमणीओ। संतोसारामुच्चिय जीवो सुहवीयपूरसिरी // 47 // संतोसमावणाहिं कपिलस्स दियरायकिरणकुरुलिहिं / कइरबवणं व वियसई जाइस्सरणं तओ सहसा // 48 // पुत्वभवनाणदंसणचरित्तरयणतओवलंमेण | मोहंधयारनिरसेण सिवपुरवरमग्गमोइनो // 49 // // 50 // लोयं काऊण देवयादिनं गहिऊण समणलिंगं कविलमुणी एइ अत्थाणं // 51 // वडाहि तुमं नरवर सुधम्मलामेण तेण इय भणिए / विम्हइमणो राया पुच्छह किं चिन्तियं एयं // 52 // आमूलाओ सत्वं कहेइ कविलो विचिन्तियं सरलो। रायावि भणइ हिट्ठो कोडिं अहियपि ते देमि // 53 // कविलमुणिन्दो जम्पइ जाइस्सरणेण नायपरमत्थो। पडिवनमुक्खमग्गो भवकारागारउद्विग्गो // 54 // कोडिगुणेणऽत्थेणं दूरं निम्मुक्कसरलएण धुवं / परलोयस्सुवधाओ निवत्तिजइ महाराय ? // 55 // जीवाणं रक्खाए धम्मो परलोयसाहणं होइ / अत्थे मांगेए पुण जीवविधाओ जाण सिद्धो // 56 // अत्थगहणे अगाहे मोहावतंमि सायरे राय ! | पडिकूलचारिणीओ सबाओ आवया इन्ति // 57 // अनं च-राय भोगोवभोगगिद्धाण चेव मूढाण / लच्छीपरिग्गहिच्छा होइ अतुच्छा मणुस्साणं // 58 // जे पुण अवगयतत्ता विसयविरत्ता सिवम्मि आसत्ता / ते तवसंजमसमदमसिरिसंगमसुखदुल्ललिया // 59 // इयकविलदेसणामयरसेण सित्तेसु मवखिसेसु / पुलयच्छलेण धनाण हुंति पुत्रंकुरा सहसा // 60 // राया जंपइ दियवर मन्तो तुह एस दिवमाहप्पो / वर्खतो जेण बहुलोहपिसाओ लहूजाओ // 61 // पवजापडिवजणवञ्जपहारेण मुणिमहिन्द्रेण / तुमए | सिद्धिपुरीए दारे लोहम्गला मागा // 62 // तिहुयणबन्दियचलणो मोहमहीनाहमाणनिहलगो। तं होसि विगयराओ कपिलस्व जातिस्मरणज्ञानं | राज्ञो दुरन्तार्थविषयउपदेशश्च / SAKA 5 // Page #219 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बपन्तीप्रकरण पञ्चशतचोराणं प्रतिबोधनं ला सर्वेषां केवलज्ञानप्राप्तिः। इतिः / .206 // AAAAAHESARK वन्निजसि जेण मुणिराओ // 63 // रना पसंसिऊणं नमंसिऊणं मुणी महासत्तो / विनतो गुणसायर पसीय मुत्तोवलंमेण // 64 // कविलमुणीवि विहारं चाहिं तत्तो करेइ अपमत्तो / धम्मज्झाणकमेणं सुक्कज्झाणं समुल्लीणो // 65 // घणघायकम्ममुक्को केवलनाणेण पासइ अरन्ने / पंचसए चोराणं पुबमवऽभत्थचरणाणं / / 66 // चोहिकए करूणाए तेसिं तहिं जाइ एस मुणिसींहो / निस्संग तं दटुं चोरा एवं भणन्तेए / / 67 // तेणेहिंते निक्किचणस्स मह नत्थि किंचिवि भयंति / आगच्छइ एस मुणी तो एवं नच्चहस्सामो // 68 // एवं विणिच्छिऊण कविलमुणिन्दं भणन्ति तो तेणा / भट्टारय ! तं नच्चसु जइ जाणसि नच्चिउं सम्मं // 69 // तेणुत्तं तो वायह तालीओ तरलकरलया तुम्हे / जेणा हं नचन्तो तुम्हाण करेमि सन्तोसं // 7 // तो मंडलबन्धेणं समकालं दिन्ति ते जह ताला / तह नच्चइ गायन्तो कविलो धुवगीइयं महुरं // 71 // तद्यथा-अधुवे असासयंमि संसारंमि दुख्खपउराए। किं नाम हुज तं कम्मयं जेणाहं दुग्गई न गच्छामि / / 71 // तेसिं अक्खेवत्थं तारून तहय पुनलायनं / तरूणीणं सिंगारं कविलो वनइ अलंकारं // 72 // अखित्तसुणन्ताणं ताणं विक्खेवणथमइबहुयं / असुयंमि समुन्भए निन्दइ माणुस्सए भोए // 73 // अनाणतिमिरहरणे रविष्पहाकरणिकविलमुणिवयणे / तम्माणसंमि विसयइ विवेयकमलायरो झत्ति // 74 / सम्बुद्धाण ताणं जाइसरणेण गहियचरणाणं / कम्माण निजरणे उप्पन्नं केवलं नाणं // 75 / / मोहमहिनाहजोहं लोहं जिणिऊण कविलमुणिराओ / लंघियविसयग्गामो कमेण गच्छइ पुरि सिद्धिं // 76 // लोमे कपिलाख्यानकं समाप्तम् // रागोपि प्रेमानुबन्धः अपरपर्यायः, कारयति अनार्यचर्या प्राणिनः। तथाहि-पल्लवयति असौ विपर्यासविज्ञानं / ततो // 206 // Page #220 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 207 // राग पापस्थानस्वरूपे श्रीकान्तोदाहरणम् / AA%%A445CMS अभिमन्यन्ते तरूणमनुष्याः प्रभूताशुचिकूपिका अपि शृंगाररसापूर्णा शातकुम्भकुम्भिकाः प्रगल्भयौवनाः अंगनाः / तासां च प्रसरदृषिकाकमले दोषदुष्टे अपि प्रशंसन्ति प्रबुद्धनीलोत्पलसगोत्रे नेत्रे / विचारयन्ति चास्थिपञ्जरमानं शरीरं पूतिश्लेष्मो- द्वारपात्रमप्यसामान्यं, प्रयच्छति पार्वणचंद्रदास्यं अपवित्रास्थिभूतदन्तश्रेणिरपि कुन्दकलिकोज्वलस्निग्धद्विजावलीवोच्छलतकिरणकुरूलीभिः प्रहसतीव मुक्तावली, अशुचिमन्दिरोदरविनिःसृतरसापूर्णोऽपि प्रतिभाति श्रृंगाररससागरे प्रवालबन्धुरश्चाधरः। वर्णयन्ति च भ्रान्ताश्चान्द्रद्रवकान्तिकान्तत्वग्बन्धोद्धरौ प्रपंचितमांसमेदग्रंथी अपि स्तनावानन्दको रतिप्रीत्योः क्रीडाकन्दुको / तदनेन प्रकारेण प्रत्यवयवं स्त्रिगानेष्वंतरशुचिमयत्वेऽप्यऽपरापरप्रशस्तपदार्थोपमानव्यामोहतः प्रवर्तन्ते रागान्धाः प्रकटनरकद्वारेषु परदारेषु / लभन्ते च न्यत्कारं, प्राप्नुवन्ति सर्वखापहारं, श्रयन्ति प्राणापहारं, अनुभवन्ति च प्रायःप्रतिजन्म पण्डकत्वेन दुःखसंभारम् / किञ्च-तीव्रानुरागा पुरंध्योऽपि न्यत्कृत्य कुलक्रमं पुरस्कृत्य स्वमनोभ्रमं विस्मृत्य स्वभर्तुः प्रीतिसंक्रमं कुर्वन्ति परपुरुषसंगमम् / अन्यच्च,-रागनागदष्टतया कारुण्यतो भ्रष्टतया दुर्गतिगमनं प्रति भयस्य नष्टतया, चेतसोऽतिक्लिष्टतया, कारणं श्रृंगारस्य, पूरणमलंकारस्य, हेतुं श्लाघ्यविषयोपचारस्य, सेतुं व्यसनार्णवनिस्तारस्य, सविश्रब्धं स्वपतिमप्युपनन्ति श्रीकान्तेव // तद्यथा जंबुद्दीवे भरहे मज्झिमखण्डम्मि दाहिणे आसि / खीइपयडियनयरे राया नामेण जियसत्तू // 1 // अवगयजिणमयतत्तो गुरूपयभत्तो गुणजणासत्तो। निम्मलसम्मदिट्ठी तत्थासि धणेसरो सिट्ठी // 2 // विणयगुणरयणधरणी सीलकलासरससल्लईकरिणी। लच्छी वल्लहपत्ती सुसाविया तस्स असवत्ती॥३॥ ताण कुलगयणचन्दा सयलकलाजणियजणमणाणन्दा / अरिहन्नअरिह // 207 // Page #221 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 36 + अर्हमित्र + पाठे भी जयन्तीप्रकरणइतिः / श्री. कान्तायाः कामभोगयाचना। // 208 // मित्ता दो पुत्ता जोवणं पत्ता // 4 // सिरिकन्ता सिरिदत्ता भजाओ ताण कुलपस्याओ। विसयसुहं ताहिं समं भुञ्जन्ताणं वहइ कालो // 5 / / अनदिणे सिरिकन्ता संथवओ अरिहमित्तरूवेण / सुहमणलोयणकमलोम्मीलणमह लहइ मिसिणिश्च // 6 // रूवसिरिए मयणो एसो पडिपुग्नचन्दसमवयणो / नीलुप्पलदलनयणो अइसयसोहग्गजलसयणो // 7 // ललियसयलंगचंगिममुत्तीए जायरूवदितीए / एसो सुरंगणाओ अवि मोहइ किं पुण न अम्हे ? // 8 // किंकिल्लिपल्लवारूणकरकिरणुक्केरकुंकुमच्छडाहिं / परिरम्भसु हे रंजउ महहिययं एस तो सुहओ // 9 // कणयसिलायलवच्छो एसो निम्मलकलाहिं पडिहत्थो / परिहासकरणदच्छो माणससरसलिलभरसच्छो // 10 // तो अरिहमित्तदेहे इय गुणसंसासमुल्लसियनेहे / जलियमयणग्गितत्ता रत्ता चहऊण मजायं // 11 // ओहासइ सिरिकन्ता एगन्ते सोम ! संगमरूइए / मह निवावय गचं कामं कामग्गिसंतत्तं // 12 // ता भोगसुहं दिजउ वच्छल ! महपाणधारणं जेण / निवडन्ती धारिजइ अहिणा भोगेण धरणी वि // 13 // इय माउजायाए लज्जामजायवज्जियं वयणं / विजुव तम्मि सीलखीरसमुद्दम्मि विज्झायं // 14 // परिभावइ दिढसत्तो तत्तो सो सावओ अरिहमित्तो / मह जिट्ठमाउजाया मायातुल्लावि कह भुल्ला // 15 // पसरइ महातमो हीही मन्नेमि मिहिरमुत्तीओ। सुकुलुग्गया जमेसा जंप लजाकरं वयणं // 16 // ते धना कयपुन्ना बालत्तणम्मि गहियसामना / जे समियकामपामा गुरूपयसेवोसहिरसेण // 17 // एवं वियारसारो सिद्विसुओ अरिहमित्तनामेसो। तवयणाहिं अकम्पो गुंजापवणेहिं मेरू व // 18 // भणइ मह माउजाया माया एगन्तवच्छला चेवं / अववायघरे मग्गे कहं तुमं मं पक्त्तेसि 1 // 19 // अम्हाण कुले PJ धवले गुणलच्छीए विलासगेहंमि / मसिकुचाउच एसो अहिलासो होइ किजन्तो // 20 // आवाय चिय महुरा एए विसया * 208 // Page #222 -------------------------------------------------------------------------- ________________ * // 209 // CARS59540CCARICHROCK विसं व परिणामे / सेविजन्ता दारूणदुहदन्दोलि पयच्छन्ति // 21 // सरिसवमित्तं सुक्खं अकजकारीण होइ जीवाणं / सप्प- तिरस्कृताचइयं दुक्खं नरए मेरूवमं होइ // 22 // परमहिमगोत्तनिग्गया रयणायरगामिणी विसुयावि / गंग छ तुम मदे ! कहमपवित्तं Pईमित्रेण पयं देसि ? // 23 // सव्वगुणाण हार निल्लजे ! जयवि चयसि मत्तारं / तहवि अहं नियबन्धवपरामवं कहवि न करिस्सं पतिमारिका // 24 // एवं भणिए तेणं सा चिन्तइ बन्धवस्स लजाए / में अवमबह एसो सुहओ दक्खिबजलहीवि // 25 // रागन्धाण श्रीकान्ता। जियाणं विरहानलपजलन्तदेहाणं / हुन्ति हरिणंककिरणा फुरन्तउक्काझलक व // 26 // तो नियदइयविरत्ता दुरन्तचित्ता दयाए परिचत्ता। विसजोगा भत्तारं एसा पेसइ जमागारं // 27 // सयणाणं मझगया कवडकुडी करूणकरूणसद्देण / रोयइ विमुक्तकंठं हिययट्ठियदुट्ठचिट्ठा सा // 28 // कयवयदिणपजन्ते सिरिकता अरिहमित्तमेगन्ते / पुणरवि पुच्छइ निहुये रइथिणी कामगहदुत्था // 29 // महखित्ते नियबन्धवलज्जासंदाणदामिओ पुवं / दक्खिन्नधुराधवलो पुलयंकुरिए न चिनोऽसि // 30 // ता सच्छ सोम वच्छल सच्छन्दं चरसु तत्थ ललियंगो / वच्छे मह सच्छाए वीसमिओ जुवणुजाणे // 31 // तत्वयणस्सवणाओ परिभावइ एस अरिहमित्तोवि। महभाया एयाए पंचत्तं पाविओ नूणं // 32 // अहह कुलफंसणाए किलिट्ठपाविट्ठनिग्धिणमणाए / कहमायरियमकजं? एयाए णज्जचरियाए // 33 // मरणदुहजलहिनिवडणहेऊ गुरुबन्धवस्स संजाया। अइरूयसंपया मह सच्चश्चिय आवया हद्धी // 34 // हीही नियंविणीओ विडंविणीओ हवन्ति पुरिसाण / दुट्ठमणोरहचक्कपगिट्ठसुप्पइट्ठनाभीओ // 35 // कालरयणीसहिओ दुच्चरियदन्दोलिकन्दलमहीओ। मणमोहणोसहीओ महिला दुग्गइपहरहीओ // 36 // खणरत्तविरत्ताओ तमभरपसरेककरणसत्ताओ / दूरूझियबोहीओ पओससंझासणाहीओ // 37 // // 109 // SACCASS E% Page #223 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बपन्ती प्रकरणइतिः / स्वशीलरक्षणाथमहमित्रेण गृहीता दीक्षा। // 210 // अबला अलीयकुडीओ दुरन्तभवरंगनच्चणनडीओ। चवलत्तमकडीओ सुसाणमज्झट्ठियघडीओ // 38 // तं किंपि कामिणीओ कुणन्ति किल साहसं जओ लोए / ससुरासुरेवि गरूओ जायइ चित्ते चमुक्कारो // 39 // सवाणवि वंसाणं पमया | अविवेयसंगमरूइओ। वंसकुडिगिसहिओ गुविलादुग्गिज्झमझाओ॥४०॥ कढिणतणेण करिवरदंतसरिच्छाई जजरिजन्ति / पुरिसाण तरूणिओ ससिकरधवलकडक्खेहिं हिययाई // 41 // तम्हा तिच्चिय धन्ना रमणीरागेण लद्धपसरेण / कहमवि नहु रंजिजइ संखसमाणो मणो जाण // 42 // सुहलच्चिय जियलोए चिंतामणिकामघेणुकप्पदुम्मा। एकंचिय अइदुल्लहं सीलं ससिसंखदलधवलं // 43 / / एसावि भाउजाया पन्नवणिज्जा न होइ निलजा / जं कामग्गहो दुट्ठो दुनिग्गहो मन्ततन्ताण // // 44 // तो सीलरयणरक्खासुलद्धलक्खेण दक्खपुरिसेण / छलिऊण गहो एसो ठाणडिओ चेव धरियन्वो // 45 // इच्चाइ विवेएणं सुहाणुभावेण तस्स लीलाए / विसयविसविसममुच्छा अवगच्छइ सबहा तत्तो // 46 // अवलम्बियदिढसचो तयभिमुहं भणइ सो अरिहमित्तो। किजन्तु ताव भद्दे ? बन्धवपरलोयकिच्चाई // 47 // परिपाडीए कजं तुहिच्छियं कुच्छियति पच्छन्न / धम्मो च्चिय कीरन्तो पयडो सोहं समुबहइ // 48 // ता होसु थिरा सुन्दरि ? मन्दरचूल व लोयमज्झत्था / असरिसकल्लाणमई समुन्नई लहसि जेण तुमं // 49 // संभासिऊण एवं रयणीए सीलरक्खणुज्जुत्तो / अह तुरियमरिहभित्तो एसो देसन्तरं पत्तो // 50 // एगमि तत्थ नयरे उजाणे महुवाणिसवणेण / अक्खित्तो जा गच्छइ ता पेच्छ। पुनभावेण // 51 // सिरिधम्मघोसमरिं तेएणं दिणमणि व दिप्पन्तं / दिन्तं निहयतमोहं पडिबोहं भबियकमलाण // 52 / / निन्ततमभमरनियरूच्छलन्तझंकारमहुरसदेण / विन्नतो तेण गुरू पबुद्धमणपंकएण तओ / / 53 // सुपभायमज भयवं ! जं ओ चेव धरियो / FACRACCASE यंति पच्छन्नं / हामतो। किअन्तु ताव महसममुच्छा अवगच्छइ सबा Page #224 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 211 // आर्त ध्यानेन मृता 154CCANCEREMOA% |श्रीकान्ता कुक्करी जाती। | तुह पायाण संगमेणाऽहं / दिद्वे सिवपुरमग्गे पडिवन्नो चरणपरिणामं // 54 // हे सिद्धिपुरीपन्थे पत्थियजियसत्थवाह नाह तुमं / मह देइ सबविरई पाहेयं मणिट्ठियं सिग्धं // 55 // एवं विनविएणं करूणारससायरेण तो गुरूणा। संविग्गो अरिहमित्तो परिक्खिओ दिक्खिओ झत्ति // 56 // तवतेयअंसुमाली पसमथेजाइगुणरयणमाली / एसो गुरूकुलवासी अपुबनाणअणभासी // 57 // गीयत्थतं पत्तो अपमत्तो संजमंमि आसत्तो। देसन्तरेसु विहरइ गुरुहिं सद्धिं महासत्तो। // 58 / / चिट्ठन्तीए तस्स य आसावन्धेण भाउजायाए / सयजामा चि य रयणी संजाया तो तिजामावि // 59 // तमपिच्छन्ती गोसे रागन्धा सबओ निहालन्ती / अट्टज्झाणोवगया भाउजाया मया झत्ती / / 60 // तत्तो सा कम्मवसा गामे एगंमि कुक्कुरी जाया / छिच्छिक्कारेण हया छुहिया दुहिया परिभमेइ // 61 // कमसो य तत्थ पत्तो विहरन्तो सो मुणी अरिहमित्तो / अणुरत्ताए तीए दिट्ठो भिक्खापविट्ठो य // 62 // चाडुसयाई कुणन्ती रागन्धा पिट्ठओ विलग्गा सा। वसहीएवि निसन्ना सविहे विविहे वियारे य // 63 // दंसन्ती उपहासं अहोनिसं जणइ जेण लोयम्मि / तेणेमं रयणीए सुत्तं मुत्तं गओऽन्नत्थ // 64 // तत्तो पभायसमए तस्स विओगेण दहणदाहेण / मरिऊण गिरिनिकुंजे जाया वणमक्कडी तत्तो // 65 // कीलन्ती तत्थ वणे विचित्तकीलाहि जुहमज्झगया। तारूनासिरिं पत्ता निसग्गचवला गमइ कालं | // 66 // अह सोऽरिहमित्तमुणी सद्धिं सत्थेण तेण मग्गेण / भवियवयावसेणं जन्तो तीए पहे दिट्ठो // 67 / / पुत्वभवब्भासेणं उक्कडरागेण मक्कडी एइ / साहुसमीवे दंसइ मयणवियारे बहुपयारे // 68 // गच्छइ सत्थो सावि य मग्गनिरोह करेह साहुस्स / सुहडेहिं भेसविया वित्तत्था दूरमवकन्ता // 69 // तो तम्मि अरिहमित्ते तद्दिट्ठीए अगोयरं पत्ते / विरहरहंग RECOACCRECRACCOS A5 Page #225 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणकृतिः / व्यन्तरीमवे कृत्यो. पसर्ग गुरु| देशनया प्रतिबुद्धा। // 212 // CREATERRORSC% निवाए छिमप्पाणा मया असि // 7 // तोऽकामनिजराए तहाविहेणं विसुद्धभावेणं / मरिऊण समुप्पमा अप्पड्डी वन्तरी देवी // 71 // पुत्वभवे पिच्छन्ती विमंगनाणेण तम्मि मुणिसीहे / गच्छइ पओसमिच्छइ हन्तुं तं मुणिवरं णिचं // 72 // अह अप्प- जलप्पवहे वहपहे तस्स विहियगइमेए। तीए छिना जंघा सञ्जइ महाऽवरा देवी // 73 // गामन्तरंमि भिक्खागयस्स सा अन्नवासरे तस्स / रूवं सरम्मि दंसइ न्हायन्तं अवरसाहणं // 74 // रयणीए पडिक्कमणे गुरुर्हि वुत्तो इमो अरिहमित्तो / भद्द ! तुम आलोयसि नियदुच्चरियं न सम्मति // 75 // सुमरामि अहं क्खलियं न किंचि अलियं भणन्ति नय गुरूणो। चिन्तइ हल्लोहलिओ पावतरू एस किं फलिओ 1 // 76 // कहं होमि अहं सुद्धो ? बुद्धेहिं गुरूहि गुणसमिद्धेहिं / जो नाओ सपमाओ माई य अलियवाई य // 77 // मन्दरगिरिणा अट्टज्झाणेणं मन्थिए मणसमुद्दे / वाहसलिलप्पवाहो बाहिं बहुहा लुछइ तस्स / / 78 // पच्छावायपरद्धा दट्टणं तस्स दुक्खदन्दोलिं / सा पयडिय नियमुत्तिं साहा सर्व सदुश्चरियं | // 79 // तीए पडिबोहकए करुणारससायरेण तो गुरूणा / उल्लसियसुहालिद्धा पारद्धा देसणा तत्तो // 80 // रागो कडुयविवागो दुरन्तदुहचक्कघडणसुरूदओ / अदओ तेणकन्तो जीवाजी विणासेइ // 81 // तप्पञ्चयपावेणं ममइ कुजो. णीसु दुक्खलक्खाई। मरणसमुग्घाएणं लहइ दुरन्तेण पुणरत्तं // 82 // माणुस्सजम्मरयणं सुकुलखेत्ताइसंजुयं कहवि / लद्धं हारइ जीवो अणज्जकजेण रागेण / / 83 // तम्हा एसो रागो नागो इव जिणवरस्स वयणेण / मन्तेण निहायदप्पो कायवो अप्पमत्तेहिं / / 84 / / इच्चाइदेसणाए पडिबुद्धा वन्तरी तओ झत्ति / रागदोसविसाणं पसमणपीउसधाराए // 85 // काउं दुक्कडगरिहं सुगुरूणं पायपउममूलंमि / गिन्हइ सा संमत्तं खामह साहं अरिहमित्तं // 86 // धन्नोसि तुम मुणिवर। Page #226 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 213 645455540ACAONGS | अखंडचारित्तजाणवत्तेण / मह रायसायराओ विग्धं जं तं समुत्तिनो // 87 // एवं पसंसिऊणं दुल्लहसंमत्रयणलाहेण / सा | द्वेष नन्द वन्तरी पहिट्ठा जहागयं पडिगया शत्ति // 88 // | नाविको॥रागाख्यानकं समाप्तम् // दाहरणम्। तथा द्वेषोपि महीयः पापस्थानं / यतोऽसौ दोषाकरः शशीव प्रपंचितकलाकलापेऽप्यखंडवृत्ते तथास्मनि कुरंगकलंकमावहति / प्रभूतसत्वे समुद्रेऽपि समुच्छलितोत्कलिकाकुलाननेकप्रकारान् क्षारोमारान् समुल्लासयति प्रतिक्षणम् / ततः सर्वतः प्रसरन्ति प्रतिकूलमेव दुरवगाहाः सरस्वतीप्रवाहाः, तेच निरूध्यते मार्गे ममनप्रवृत्तिः / निरूद्धया चानया जायते कालविलम्बः / तेन च सीदन्ति कार्याणि / ततश्च लब्धेन्धनो ज्वलति क्रोधधुमध्वजः / स्फुरति च सतो धूम्यायमानो मिथ्यामिमानो / विजृम्भते च ज्वालावली कराला / धर्मरूचे नेरिवाशु दाहिकाऽकसाह तेजोलेश्या / दह्यते तथा परापरजीवाश्चासकारिणी पुण्पांकुरवती क्षमा / प्ररोहति ततो दर्मशुचिणिरिव प्रतिपदं व्यथाहेतवैरानुबंधपरंपरा नाषिकनन्दस्येव तहाहि-आसि पुरा धम्मरूई अणगारो गुणमणीण भण्डारो। अपडिपद्धविहारो तवसंजमलच्छीउरिहारो // 1 // एगागी विहरन्तो गामागरनगरमंडियं वसुहं / दिपन्तषिविहलच्छीसिद्धेकसुहमि कयगिद्धी // 2 // पत्तो गंगातीरे नन्दो नामेण नाविओ तत्थ / निवसइ तीरग्गामे मुलेणुत्तारए लोयं // 3 // अह धम्मरूई साहू सह लोएणं समारूहिय नावं / गंगनइउत्तिनो इरियावहियं पडिकमेइ // 4 // सस्थियजणो गच्छइ मुलं दाऊण तस्स नंदस्स / अत्यकए अवरूद्धो नंदेणं धम्मरूई साहू // 5 // भणइ य नंदं एसो अम्ह मुणीणं नस्थि अत्थोत्ति / नंदेणुतं मुण्डा नावं तो कि समारूढो ? // 6 // 13 // 213 // NOSIS5555 Page #227 -------------------------------------------------------------------------- ________________ | जयन्ती -| प्रकरणपतिः / तेजोलेश्य| या दग्धो नन्दजीवो | गृहकोकिलो जातः। // 214 // महरक्खरवाणीए मुणिणा सम्बोहणत्थमह वुत्तं / तुम्हं धम्मो होही अम्हं उवयारकरणेण // 7 // इहलोयपडिबद्धो गिद्धो अत्थंमि भणह तो नन्दो / अत्थेणं मह कजं अच्छउ तुम्हऽन्तिए धम्मो // 8 // दिजइ अविञ्जमाण नहु मुलं मग्गिराणवि जणाण / बालुयकणाण तिल्लं न हवा अइपीलणेणावि // 9 // इय मुणिणा संलचे छित्तो कोवानलेण सो तत्तो / मुश्चइ दुव्वयणमाला दुस्सहा जाला दहन्तीओ // 10 // रविकिरणकलावेणं तत्वे पुलिणम्मि गिम्हमज्झन्हे / तण्हाछुहाकीलन्तो अवरुद्धो सो मुणी तेण // 11 // पीउससगोत्तेहिं वयणेहिं बोहिओवि सो नन्दो / उग्गिरह विसं कडुयं उरगो जह दुट्ठपाणेण // 12 // सत्थम्मि अइक्वन्ते नावियनन्देण तेण पावेण / अइदुम्मिओ मुणिन्दो दुरूत्तपुणरूत्तवयणेहिं // 13 // सिवपुरपहपत्थाणे दुवयणकंडेहि पडिपयं विद्धो / धम्मरूई अणगारो उवसमसारोवि सो कुद्धो // 14 // चिन्तइ दुम्मइवल्लीकन्दो एसो खु नाविओ नन्दो / जो परमकिन्हलेसो धम्मुवएसो कहं तंमि // 15 // अस्सत्थोवि अबोही निकरूणो कडुयकन्दलपरोहो / एसो रूक्खारामो दुबाउल्लासिकोवदवो // 16 // छणियं घयमवि कडुयं विरसं दुद्धपि होइ अइतत्तं / उग्गिरह कालकूडं अइसयनिम्मस्थिओ जलही // 17 // जह तह एसो साहू नावियनन्देण ताविओ बहुहा / दोसुल्लासदुरंतं तेओलेसं मुयह तस्स // 18 // तीए सो डझन्तो अट्टज्झाणेण पत्तपश्चत्तो / गामे देसकुडीए जाओ घरकोइलो सन्नी // 19 // धम्मरूईवि मुणिन्दो उवसमजलएण समियकोवदवो / संवेगसमावन्नो पच्छायावेण संपन्नो // 20 // आलोइय पडिकन्तो सन्तो दन्तो जियन्दिओ धीरो। बिहिणा विहारनिरओ प्रहवीए जंगमं तित्थं // 21 // भवियवयावसेणं विहरन्ती एइ तम्मि गामम्मि / जत्थ सहाए नावियनन्दो घरकोइलो जाओ॥२२॥ भिक्खायरियं काउं देसकुडीए समागओ जाव / गमणागमणालोयणपुरस्सरं कुणइ सज्झायं // 23 // किरियाकलावपुवं 435LARIOCIROMCG * 214 // Page #228 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CONOCR // 215 // कयवरं मुयइ / / 2 द्वेषधारकगृहकोकिलो तेजोलेश्यया मृत्वा हंसो जातः। गमणेवि घरोलओ कुणइ एव डिकमइ // 30 // भरिऊण कोवि / / A जावाऽऽसइ भोयणत्थमेस गुणी / दिट्ठो गिरोलिएणं ताव तहिं नन्दजीवेणं॥२४॥ पुवभवऽन्मासेणं दोसेणं खिबइ कयवरं उवरि / तस्स मुणिन्दस्स तओ निरक्खिओ तेण सो तत्थ / / 25 // चिंतियमणेण मुणिणा एयस्स निवासठ्ठाणमेयंति / नो कप्पइ अचियत्तोग्गहंमि काउं अबढाणं // 26 // एवं पसन्नचित्तो बीए कोणम्मि जाइ सो साहू / तत्थवि दोसाविद्रो गत सो कयवरं मुयइ // 27 // गच्छइ तइए कोणे तत्थवि गन्तूण दोसदोसेण / कयवरनियरं उवरिं पुणो पुणो खिवह साहस्स // 28 // जाव चउत्थे कोणे गमणेवि घरोलओ कुणइ एवं / तो तेउलेसाए दड्डो नन्द व सो मुणिणा // 29 // मयगंगाए जाओ हंसो सो रमइ माहमासम्मि / उत्तिन्नो सोवि मुणी इरियावहियं पडिक्कमइ // 30 // भरिऊणं पिच्छाई सीयलसलिलेण सिञ्चइ मुणिन्दं / वारं वारं हंसो पुत्वभवन्मत्थखारेण // 31 // तो तेण साहूणा सो एसो विय नन्दमंगुलो कोवि / इय कलिऊणं दडो तेउलेसं मुयन्तेण // 32 // पुत्वभवज्जियवेराणुबन्धदोसेण तेउलेसाए / अंजणगिरिमि सीहो सो मरिऊण उप्पन्नो / / 33 / / धम्मरूइवि मुणी पुण घोरतवच्चरणकम्मनिजरणो। निजरवन्दियचरणो अक्खलियसिवमग्गसंचरणो // 34 // विहरन्तो सत्थेणं सद्धिं अंजणगिरिस्स सविहमि / दिट्ठो सीहेणेसो सहसा दुकम्मरुद्वेण // 35 // उद्भय केसरभरो सोवि य मुणिघायविहियपयचारो / सब्जियतलप्पहारो सीहो गुंजियरखुग्गारो // 36 // मं चेव हन्तुकामो सेसं लोयं विहाय जमसेसं / मुणिणा निरक्खिओ तो परिक्खिओ नन्दसरिसोत्ति / / 37 // सो सुमरियतदोसो मुणी महप्पावि पजलियरोसो। उल्लसियतेओलेसो सीहं सहसा दहइ एसो॥ 38 // अबरावरमरणेहिं अकामनिट्ठबियदुद्रुकम्मभरो / वाणारसिए नयरीए सीहो माहणसुओ जाओ // 39 // वडन्तो सो कीलइ समवयवालाण मज्झयारम्मि / बालतसुलहचावलधुलीकीलाहिं विविहाहि // गुणी पुण धोरतम / दिवो सीहेणेसा // 36 // मं चेव महापावि पजलिय CASSACROCES ACADARA MI // 215 // Page #229 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / द्वेषं वहन् // 216 // DOORSCOC%C4% // 40 // सोवि मुणी धम्मरुई गुरुयरवेरग्गमम्ममोइनो / आलोईय पडिकन्तो परमं संवेगमावन्नो // 41-42 // वाणा- ततश्च बटुरसिनयरीए कम्माणं चित्तपरिणइवसेण / अप्पडिबद्धविहारो आगच्छइ बाहिरुजाणे // 43 // अह नयरीए मज्झे भिक्खट्ठा 13 कभवेऽपि तेण कीलमाणेण / पविसन्तो धम्मरूई दिट्ठो बडुएण बालेण // 44 // रोसेण धमधन्तो दुवयणलिट्ठवलधूलिखिवणेण / तजइ मुणिं महप्पं वालयविन्देण परियरिओ // 45 // उवसमसुहामिसित्तो तत्वो एसो मुणी विचिन्तेइ / अझ अलं भिक्खाए दुकम्म- मृत्वा हेऊत्ति बालाण // 46 / / पच्छाहुत्तं वलियंमि तंमि वलिएण पुत्ववइरेण / सो बडुओ अइकडुओ थकेसुवि सेसबालेसु // 47 // वाणारसिअणुगच्छइ तजन्तो वारिजन्तोवि सिढलोएण / धम्मरूईवि चिन्तइ एसो किं नन्दजीवोत्ति ? // 48 // तच्चमढणं सरन्तो नृपो जातो मच्चुभरोल्लसियतेउलेसाए / सज्जो कहावसेसं बड्डयं साहू कुणइ सहसा // 49 // मुणिमुकतेउलेसादाहे दुकम्मलेसनिजरणे / मुनिवरं सुहमावपरिणईए तत्थुपनो निवो एस // 50 // ते सुकयस्था निम्मलगुणसच्छा कम्मनिहणणसमत्था / तइलोयमत्थयत्था / दृष्ट्वा सिद्धा चिट्ठन्ति ते सच्छा / / 51 / / धन्ना ते सप्पुरिसा जे नवरमणुत्तरं गया मुक्खं / जम्हा ते जीवाणं न कारणं कम्म जातिबंधस्स // 52 // इय चिन्तन्तो विहरइ मुणीवि अन्नत्थ सुद्धतवचरणो। दुक्कडगरिहानिन्दणनिक्कन्दियपावपंकभरो // 35 // स्मरणम् / रन्नावि अमदिवसे सुहासणत्थेण रायमग्गंमि / दिद्वे मुणिम्मि जाइस्सरणे नाएसु मरणेसु // 54 // मुच्छानिमिलियच्छो सहसा कुट्टिमतलम्मि ढलियंगो / सिसिरोवयारवसओ राया सत्थो भणइ लोयं // 55 // गंगाए नाविओ नन्दो सभाए घरकोइलो। हंसो मयंगतीराए सीहो अंजणपवए // 1 // बाणारसीए बडुओ राया एत्थेव आगओ / एवं सद्धसिलोयं जो पूरइ तस्स देमि रज्जद्धं / एवं वुत्ते रमा तं लोओ पढिउमारो // 56 // तियचउक्कचच्चरेसं रायपहारामवणनिउंजेसु / नय पूरिजइ केणवि एवं | 216 // SARKAHASE Page #230 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 217 // पुरीनगी भूतपूर्व 12 // कयलिदल जण // 63 // कालंमि वचन्ते // 57 // सो धम्मरूई साह कमेण देसम्तरेसु विहरन्तो / ओइ पुरीए बाहिं आरामे सो उ तरूमले // 58 // अरहट्टवाहएणं सङ्कसिलोयं सुणेइ गिजंतं / पुच्छह मुणीवि तत्तो न अग्गिमं पढसि कीस ? तुमं // 59 // तेणोत्तं मुणिपुंगव ! अहं न याणामि अग्गिमं किं तं ? / मुणिपुंगवेण भणियं सुणसु तुम भद्द! पायजुयं // 60 // 'एएसिं पायगो जाओ सो नन्दजीवएत्थेव समागओ' / गहिऊण सिलोगढ़ पूरियं मुणिणा इमो हिट्ठो / तुट्ठो तओ जाइ रायस्सऽत्थाणमण्डवे // 61 // पढिय च रायपुरओ सहसा सज्झसपरवसो राया / पुत्वभवमरणदुक्खं सरि मुच्छाए धरणिगओ // 62 // कयलिदलकमलहिमजल क्षामितो धाराहारेहिं चन्दणरसेण / वड्डन्ते उवयारे निवस्स सा हम्मइ जणेण // 63 // हा दुट्ट धिट्ठ लोलुय तुह भणियाणंतरं महा धर्मरुचिराओ। जाओ एयावत्यो इय पुणरुत्तं भणन्तेण // 64 // सो जम्पइ हम्मन्तो कवं काउंन चेव जाणामि / लोयस्स कलि मुनिवरः। करण्डो सो समणेण मे दिनो // 65 // रायानि विगयमुच्छो लोयं विणिवारिऊण निहणन्तं / पुच्छर महुरगिराए कहिं सुयं मो सिलोगढ़ / / 66 / मह आरामे मुणिणा ससिलोगंमि गीयमाणम्मि / सुणिऊण मुणिवइणा भणियं एवं सिलोयद्धं // 67 // तो निच्छियं निवेणं एसो सो मुणिवरो न सन्देहो / किन्तु मह नासि सोक्खं पुबमवेसुं समिद्धी वा // 68 // इह पुण रजसुहाई लडाई कहवि पुन्नजोएण | कुविए तम्मि मुणिन्दे मरणे दूरीमविस्सन्ति // 69 // तम्हा सयं परेहिवि खामेयवो मुणी महासचो / जे नन्दभवारद्धो बयभवं जाव अवरद्धो // 70 // जे तवसंजमनिरया सन्ता दन्ता जिइन्दिया मुणिणो / ते चन्दणं व अग्गि मुयंति बहुहा घसिज्जन्ता // 71 // अनाणघेण मए जो वन्दणपूयणाइ अरिहन्तो / सो नन्दमवे हु वरणदोसमसा तजिओ सुइरं / / 72 // तं दोसविसं सम्पद रायचे अबियरसमण / सम्म हरामि सिग्धं जेण M217 // गुणरुत्तं भणन्तेण // पानि विगयमुच्छो लोप मम्मि / मुणिऊण मुणिवा समिदी वा // 68 HASHA% AHARASHTRA Page #231 -------------------------------------------------------------------------- ________________ A जयन्तीप्रकरणवृतिः / पण पावसुद्धी होइ धुवा इensय तेसि विनति मणिपुण भत्तिपरेसं नरिन्दा // 218 // सया निव्वुई होह // 73 / / तत्तो एस नरिन्द्रो बहुहा परिचिन्तिऊण परमत्थं / पट्ठवइ खामणत्थं पहाणपुरिसे मुणिस्सन्ते है वन्दनार्थ॥ 74 // तेवि गया तत्थ मुणिं धुणंति महुराहिं वग्गुवग्गूहिं / गुणरयणाणं रोहणखमाहरो होसि तं चेव // 75 // अनेण मागतस्य किं ? सहिजइ लोहग्वत्थाण टंकपडिघाओ। लोयाणं तह दिजइ सग्गुणरयणाणि किं दाणं? // 76 // पुवभवदुक्कडाणं राज्ञस्तखमावणत्थं मुणिन्द किं राया। पणयजणवच्छलाणं तुम्हाणं अंतिए एउ? // 77 / / तुम्हारिसाण मुणिवर ! जंगमतित्थाण है दुपदेशेन संगमवसेण / लोयाण पावसुद्धी होइ धुवा इट्ठफलसिद्धी // 78 // तो दिजउ आएसो करूणारसखीरसायरमुणिन्द / / सम्यक्त्वसुपसायसुहाधवलियदिट्ठीहि इह निवागमणे // 79 // इय तेसिं विनत्तिं मुणिऊणं मुणिवरेण महुराए। वाणीए प्राप्तिः। संल अमियरसेणेव संसित्तं // 8 // तवसंजमवणदावो कोवोपायो मुणीण हेयो। किं पुण भत्तिपरेसुं नरिन्दमाइसु कायो ? // 81 // दोसोवरमे चित्तं राया अम्हारिसम्मि तवतवणे / जे रुहरमणीयत्तं धरेह तारयसिरिदिन्तो / // 82 // तवतवणतावियाण लोयाणं देइ निव्वुई राया। उदयारम्भाउ चिय दिट्ठो वियरह महाणन्दं // 83 // रायावि जइ सयं चिय जणे वियासेइ साहुकमलाई / तो हवइ महच्छरियं सवासामोयसंपत्ती / / 84 // इय नाउं सपसायं अकसायं मुणिवरं महाराओ / अन्तेउरपरियरिओ एइ महानन्दभरभरिओ // 85 // आरामे मुणिदंसणसुहाभिसेएण चहलपुलियंगो। तिपयाहिणीं करेउं वन्दइ परमाए भत्तीए // 86 // थुणइ य भयवं ! भवभयहरण तुमं जयसि सुद्धतवचरण / करणतुरंगदमणे अस्संदमसमसिरिनिवास! / / 87 // खमसु तुम मुणिपुंगव ! नन्दभवे मोहमोहियमणेण / जं ताविओ मए तं लोहपिसायछलत्तण // 88 // लोहमयस्सवि पहु तुह तेएणं कुजोणिमूसासु / तवचरणरसावेसा जाया कल्लाण- P // 218 ॐOTOS AAAA% Page #232 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 219 // मुत्तसिरी // 89 // ता मह कुणसु पसायं लोहपिसायं हणेमि जेण लहुं / जस्सवसा तुम्हाणवि मए वियत्रो महाखेओ // 90 // अन्ये ते धनच्चिय जीवा जेसिं तुम्हाण दंसणे होइ / पढम चिय पयभत्ती सारयससिकुन्दसुन्देरा // 91 // जइवाऽहं चिय धन्नो करूणारामाण तुम्ह पायाण / छायाए संलीणो भवतवसन्तावसंतत्तो // 92 // तो धम्मुवएसेणं सीयलसलिलेण सिञ्चसु 18 वरोपदेशेन इयाणि / सयलमलतावहरणे जेण लहुं निव्वुई होइ // 93 / / एवं खमाविऊण कयंजली नरवरो मुणिन्दस्स / धरणिय सर्वविरलंमि पुरओ आसीणो धम्मसवणत्थं // 94 // धम्मरूई अणगारो तत्तो गंभीरमहुरवाणीए / किल अमियसारणीए | त्यादिवित्थारइ धम्ममारामं / / 95 // भो भो भवंमि भीमे रन्ने भमिराण जोणिलक्खेसु / जीवाणं दुल्लहं चिय सुखित्तसुकुलाइ. धर्ममणुयत्तं // 96 // दसदिद्वन्तुवलद्धं जिणधम्माराहणेण तं सहलं / सुगुरूवएसवसओ कायचं होह मणुयत्तं // 97 // पडि प्राप्ताः। वजह सम्मत्तं संकाकंखाइदोसपरिचत्तं / परमत्थरयणभूयं भवदोगचं हरह जमिह // 98 // परिवजह मिच्छत्तं विसं व परिणामदारूणं भवा / तरलियचित्ता जेणं ममन्ति संसारकंतारे // 99 // सो देवो झायवो अइसयरयणरोहणगिरिन्दो / अट्ठारस दोसेहिं रहिओ सयमेव जो बुद्धो॥१०॥ वित्तसुयसिंधुपारा भवियणकमलाण दिणयरागारा। अप्पडिबद्धविहारा निरूद्धचवलिन्दियवियारा // 1.1 // पंचमहत्वयधारा अहोनिसं धम्मदाणवावारा। जिणसासणलंकारा भवाण वियन्ननित्थारा // 102 // अणवस्यमप्पमत्ता छजीवनिकायरक्खणोज्जुत्ता / पडिवजह सुहगुरूणो दुल्लहा जह कप्पवरतरूणो // 103 // सदहह जिणवरोचं तत्तं जीवाइयं अइपवितं / भवजलहिजाणवत्तं जीवाभयदाणवरसत्तं // 104 // कम्मगिरिदलणवज सई जोगं चइत्तु सावजं / गिण्हह भो पवजं लहह लहुं सिवपुरीरजं // 105 // अह परिहरिय प्पमाए पइ // 219 // 545516 Page #233 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 220 // समयं सबसंगपरिचाए। पंचमहन्वयभारो सयंभुरमणो व दुत्तारो // 106 // पडिबनियसम्मत्ता सावयधम्ममि निच्च-15 मणुरचा / मो निचं जिणवयणप्पभावणं कुणह उज्जुत्ता // 107 // ववगयचटविहमिच्छादसणनिदो विवेयदिट्ठीए / पापस्थानपेच्छन्तो परिगिण्हह राया सम्मत्तवररयणं // 108 // धम्मरमुणिवरेणं धम्मुवएसेण कुलिससरिसेण / मोहगिरिचरणे स्वरूपम्। सिवपुरमग्गे पयडिए केद / / 109 / पडिवजन्ति चरितं कम्ममसेसं करेइ जं रित्तं / वियरइ सुहमइरित सिद्धिवहूसंगमनिमित्तं // 11 // अंगीकयसम्मत्ता अबे तम्मूले देसविरहल्ला / अवरे भद्दगमावा जिणधम्मे हुन्ति भवजिया // 111 // राया सम्मदिट्ठी जिणसासणगयणमण्डलुजोयो / दिप्पा कलाहिं कलिओ सासयसिनसंगमेकमणो // 112 / / दोसो पावट्ठाणं पावतरुणं परोहहेऊत्ति / भावन्तो धम्मरूई विहरइ देसेसु मुषिवसहो // 113 // द्वेषकथानकं समाप्तम् / कलहोऽपि प्रमोदमैत्रीमाध्यस्थ्यप्रमुखगुणग्रामोल्लंटनप्रचण्डचरटचरितः पापस्थानमेव / यत:-कलहरसिकः प्राणी प्रसभमुद्वेगमंकरयति / क्लेशं किशलयति, परभवमात्मनः समुन्मीलयति, अकीर्ति मंजरयति, पितॄणामुपालंभरंभास्तंभान् / प्ररोहपति, कठोरवचनैः शिक्षितः समऽसममार्तध्यानं कुसुमयति / ततो दुष्कर्मोपार्जनया प्रेत्य दुर्गतिं कलयति / किंचकलहो परिवड्डन्तो, पथंडमायंगमत्तयं पत्तो / भंजइ सुकयारामं सुहफलयं चिरपरूढपि // 1 // ततश्च अत्रामुत्र च दुःखैकपात्रता | SI प्राप्तः प्राणी चतुरशीतिजीवयोनिलक्षगहनांभोधिमध्यमग्नः परिनाम्यन् कश्चमिवोत्तारमाप्तुमर्हति / इत्यादिदुर्विपाकतां | FI कलहस्य ज्ञास्वा यः सत्वः कर्मलाघवतः कलहपरिहाणिमाधाय मनः समाचाथ न पराम् द्वेष्टि, त्यजति क्रोध, पुश्चति IP // 220 / / Page #234 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 221 // -A-CA EGORIECCHOKARI विरोध, लमते सम्यमऽवबोध, विदधानः सर्वानवनिरोध, स हरिकेशिवलमुनीन्द्र इव देवानामपि वन्दनीयपादारविन्दो जगत्त्रयानन्दो भवति / तथाहि महुराए नयरीर संखनरिन्दो मुणिन्दधम्मकहं / सोऊणं संविग्गो पवजारजमल्लीणो // 1 // गीयत्थो संजाओ कयपरिकम्मो गुरूहि गुनाओ / एगागी विहरन्तो गयउरनयरम्मि सम्पत्तो // 2 // अह वढन्ते गिम्हे दिणयरकरनियरताविए लोए / मज्झन्हे भिक्खट्ठा पविस्सइ नयरमझमि // 3 // सत्तावलंबनिमित्तं पुरोहियं सोमदेवनामाणं / पुच्छह मग्गं सो विय चिन्तइ हासप्पओगेण // 4 // पेच्छामि ताव एवं समणं हुयवहपहेण गच्छन्तं / तावेण उप्फिडन्तं वयणं हहाहेत्ति | जम्पन्तं // 5 // तो कहइ बहलधूलीपडलं मग्गं जलन्तजलणं व / गच्छइ तेण मुणिन्दो अकुणन्तो नेव गइमेयं // 6 // पेच्छन्तो विम्हइओ पुरोहिओ सोमदेवनामा सो। चिन्तइ किमेस तावं सहइ मुणी ? नस्थि वा तावो 1 // 7 // वीमंसागय. चित्तो अणुगच्छन्तो पुरोहिओ मग्गं / मुणिरायपायसंगमपसायसीयं पलोएइ // 8 // तो अप्पाणं निन्दइ एवं गुणरयण रोहणगिरिस्स / एयस्स मए वसणं अन्नाणन्धेण अहिलसियं // 9 // एसो हु रिसी तित्थं अइसयखीरोयरोहिणीरमणो / एयमिवि कलुसं चिय मज्झ मणो राहुमुत्ति छ / / 10 / / कूरत्तेणं छित्तं लित्तं चिय पापपंकपडलेण / सुज्झिस्सइ जइ जंगमतित्थे एयंमि सुपसन्ने // 11 // अन्नाणं चिय कळं अन्तरकोहाइससुसंघाओ / जेणावरिया लोया हियमहियं वा न याणन्ति // 12 // एसो मुणी महप्पा हीही चिन्तामणी अवन्नाओ / पावमझ्णा मए जो भवदोग, हरइ सहसा // 13 // एयंमि पहे ताचो परमं जो चिन्तिओ मुणिवरस्स / सो मह पच्छायाने हीही पावस्स संजाओ॥१४॥ जा सुगइपवन हस्तिशिमुनिवरदृष्टान्ते पुरोहितसोमस्य स्वकृतदोषपश्चातापः। IS Page #235 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 56 जयन्ती प्रकरणइतिः / // 222 // ISCA स्सवि अहिलसिया दुग्गई मुणिवरस्स / सा मह होही बहुहा दुहहेऊ नत्थि सन्देहो // 15 // चिन्तिजइ दुक्खं परस्स तं अप्पणो हवइ चेव / एवं जयप्पसिद्धं सच्चं चिय एस्थ संजायं // 16 // एसो महप्पभावो तवभेएणं रवि व दिप्पन्तो। कलुसजडासयसोसे वियरिओ संवरभरमज्झं // 17 // एवं लद्धविवेओ पुरोहिओ वन्दिऊण रायरिसिं / विणयपणउत्तमंगो खामेइ तिविहेण भावेण // 18 // तो तेण मुणिन्देणं, धम्मोवएसेण कुलिसगरिमेण / मित्तूणं मोहगिरिं संठविओ सिवपहे सम्मं // 19 // पडिवनचरणकरणो पुरोहिओ मुणिवरो महासत्तो / गीयत्थो संविग्गो उविग्गो भवनिवासाओ // 20 // सुइरं काऊण तवं उग्गं जं दुद्रुकम्मनिज्जरणं / संसारजलहितरणं सिवपुरवररजवित्थरणं // 21 // बन्धित्तु नीयगुत्तं जाइमएणं निकाइयं किन्तु / अणसणविहिणा एसो पत्तो वेमाणियसुरत्तं // 22 // चविऊण तओ गंगातीरे मायंगघरणिउयरम्मि / पुत्तत्ताए जाओ दुकम्मपरिणामलेसेण // 23 // तस्सणुभावा पेच्छइ सुविणे वियसन्तमंजरिसणाहं / सहयारं रमणीयं घरंगणे तयणु मायंगी / / 24 // पडिबुद्धा परितुट्ठा साहइ दइयस्स सोवि हिट्ठमणो / भणइ पिए ! तुज्झ सुओ भावी सहयारसारिच्छो // 25 // जाओ कालकमेणं बलामिहाणो विवढमाणोऽथ / जं बालभावसुलहं तं चवलत्तं परं पत्तो // 26 // अन्नेसि डिंभाणं मज्झे कलहं दायइ अइमत्तं / निदुरपहारदुवयणदोहग्गकलंकिओ जाओ // 27 // उप्पायइ पइदिवसं दुक्खं पियराण अवरलोएहिं / विविहोपालंभेहिं दिखते // 28 // खरमहुरेहिपि सिक्खविजंतो अक्खलिओ दुल्ललिओ उव्वेयणिज्जो हवइ ऽणओ // 29 / / अह तारून्ने पत्ते वसन्तभासे विलाससुहयंमि / विविहप्पयारचच्चरिपमुहविणोए पयट्टन्ते // 30 // न लहइ एस पवेसं कथवि दुहओ विलासिजणमज्झे / | गृहीत... दीक्षः पुरोहितो जातिमदेन नीचगोत्रं |बद्भवा चा|ण्डालकुले बलो जाता क्लेशप्रियश्च / RROCED1% Page #236 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 223 // कलहप्पिओ एगागी चिट्ठइ दूरडिओ चेव // 31 // अ विलसमाणजणमझे। मारिजंत निग्घिण- सविषसर्पलोण विसनिहाणं ति // 32 // तंमि य मयंमि सप्पे सप्पसरं कीलमाणलोयस्स / आसन्नेणं इंतो हि पुलगो निविसोकदर्थना तहउ // 33 // दिवो तेण बलेण परिभवपत्तेण सयलवजेण / चिंतियमणेण तत्तो जीवो दुहिओ सकम्मेणं // 34 // तह | दृष्ट्वा बलहै। अस अही अहिओ सविसं स निहओ मह / अह दूरीकओ जणेणं अहेउकलहप्पिओ जेण // 35 // एसो पुणस्य क्लेश हिंडलगो न हओ लोहिं निविसो जेण / तो जइ अहं कलहो हणामि सुभगु च्चिय भवामि // 36 // तो लोयाण प्रियतात्यान दोसो कोवाणं उवरि कीरए रोसो। एसो अमग्गचारी अप्प च्चिय अप्पणो वहरी // 37 // हेयन्वो ता कलहो कलहो- गेसम्यग्वियसमुज्जलं मणं काउं / दुवयणविसचाएणं अमयं चिय पज्झरेयत्वं // 38 // दोसावसारणेणवि तावकरो दिणयरो न चारणा। चक्खुस्सो / दोसायरोवि चंदो तावहरो जणमणाणंदो // 39 // ता इत्तो मह कलहो कहमवि काउं न जुजइ सयावि / किंतु खमा खमियबा महुरं वयणं च वत्तवं // 40 // दुपयचउप्पयभार सहइ खमा जेण तेण सबेहिं / गोत्तेहिं // 41 // // 42 // // 43 // // 44 // जह रायरिसिवियन चिनं चारित्तमुत्तमं किंतु / जाइमएण जाओ मायंगोऽहं महादुभगो // 45 // // 46 // // 223 // x Page #237 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणप्रचिः / // 47 // // 48 // दन्तिदिओ तिगुत्ने उवस्सग्गपरिसहेहिं तवेतेयदिप्पंतो // 49 // विहरन्तो संपत्तो कमेण वाणारसीए नयरीए / // 50 // बलो मुनिनवरो जातः सातिशयगुणाद् निकंपो / चंदोद // 224 // भूतः। AAAAEXSASRAE5 // 52 // आगच्छइ पूहत्ता जक्खन्दित्ति पयक्विणं सहसा / सेवाकारी // 53 ॥जक्खोवि मुर्णि निचं आराहइ अतिहिड्डो / / 54 // रुट्ठो तीए उवरिं अवमन्नइ मुनिवरं तओ तेण / सद्धिं पाणि-ल ग्गहणं एयस्मा कारहस्सामि // 55 // एवं चिन्तिऊण जक्खेणाहिडिया विचिट्ठाजो / पकुणन्ती विलवन्ती अणप्पवसगा परं जाया // 56 // सोऊणेवं राया आदनो मन्ततन्तोवाएहिं / उवयारमपेच्छन्तो जावऽच्छइ खेयमावन्नो // 57 / / ता जक्खे मन्बइ पयडीहोऊण वत्तवयणेण / एइए मुणिराओ गविटाए अवमाओ / / 58 // ता जइ एयं परिणइ मुश्चामि न अन्नहा इमं राय / देवाणं वन्दणिजो दुगंच्छिओ जेण एस रिसी // 59 // जीवउ एसति निवो पडिवजह जक्खरायवयणपि / पेसइ य विवाहत्थं तत्थ तयं सवसामगि // 60 // तो भद्दरायसुया विवाहसामग्गिसंजुया तत्थ / पत्ता विनवड मुणी जक्खाएसेण पणयपरा // 61 / गुणमणिसायर मुणिवर मह पाणि पाणिणा इमं गिण्ह / एसा जक्खाएसा सभागया मह विवाहत्थं // 62 // विसयसुहविरचाणं न भचारीण मुणिवराणेसा / कप्पइ कहावि काउं पाणिग्गहणं कओ? भद्दे ! // 63 // 2 // 224 // Page #238 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 225 // -Е-Е परिणयनार्थमागता राजकन्या मुनिवरेण निषिद्धा। Е-4+4+4EE93 मेहुणसंसग्गीए अग्गीए सीलकाणणं भद्दे ! डझाइ सिवसुइफलयं खणेण चिरकालरूपि // 64 // मोहन्धाण जियाणं कामकहा होइ सुखहेउत्ति / जेण पुण अमूढहियया दुहहेऊ तेहि सा चत्ता // 65 // तम्हा अम्हसमीवे सिवबहूसंगमरयाण न पुणोषि / वत्तवं वयणमिणं नूणमभदंति नाऊणं // 66 // एवं निरीहवयणं सा पडिसिद्धा जणस्स पच्चक्खं / मुणिणा किं पवणेणं कणयगिरि चलइ पलएवि? // 67 // गंडीतिदुगजक्खो रिसिरूवं छाइऊण दुल्ललिओ। परिणेउ स्यणीए कीलइ विविहाहिं कीलाहिं // 68 // पच्चूसे जक्खेणं मुक्काइन्ती घरंमि नियपिऊणो / जणयह चिन्तं गरूयं कह कायवित्ति अहुणेसा // 69 // नाउं रनो चित्तं रुद्देण पुरोहिएण तो वुत्तं / रिसिपत्ती दायबा रिसिचत्ता माहणाणंति // 70 // तो झत्ति नरिन्देणं एवं कालोचियंति FI काऊण / साणन्देण वियन्ना सा रूहपुरोहियस्सेव // 71 // जक्खोवि मुणिं निम्मलगुणगणसम्पत्तिरंजिओ निचं / आराहा भत्तीए मबह सुकयत्थमप्पाणं // 72 // एवं मह वणगहणं एयस्स मुणिस्स पायचारेण / सुमणोवियासपुवं सिवसुहफलदायगं होही // 73 // अवरंमि दिणे पुट्ठो जक्खो अबरेहिं निद्धजक्खेहिं / पइदिवसं कीस तुमं न दीससे ? पेमपरओवि // 74 // तेणोतं अम्ह वणे मुणिवसहो खन्तिमारधुरधवलो / अपमत्तो ज्झाणडिओ णुत्तरगइगमणो अस्थि / / 75 // तस्साराहणनिरओ गुणमणिरोहणगिरिस्स पायाण / आसनमि निसनो निचं चिट्ठामि हिट्ठमणो // 76 // इयमणिए ते जक्खा आगन्तुणं धुणंति मुणिरायं / जंगमतित्थं दुलहं पावमलक्खालणं जम्हा // 77 // अम्हवणेवि मुणिन्दा संतित्ति सुरेहि जपिए जक्खो / सेहिं समं जा गच्छह ता पेच्छद ते विग्गहसत्ते // 78 // तो तेसिं सवेसि हरिकेसवलंमि मुणिवरे भत्ती / अयला अइसयगरूया सुरमिरिचूल व संजाया / / 79 / / अह पुत्रमासखवणो सो समणो जन्नवाडए जाइ / रूदपुरोहियसक्के HARS REKAR // 225 // Page #239 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मासखमण बपन्ती पारणे प्रकरण यझे वृत्तिः / // 226 // AKSHARASIFAGAR भिक्खडा पारणदिणंमि // 80 // बडुएहि अवनाए असमञ्जसजम्पिरेहिं अवरद्धो / जक्खेण अहिहिज्झइ तयणु विवाये जिया बड्डया // 81 // हन्तुमणा जक्खेणं निवाडिया झत्ति धरणिपेडंमि / रूहिरूग्गारमुहा ते निमीलियच्छा वि चेयना // 2 // तो कलयले पयट्टे अहो किमेयंति ? मिलियदियलोए / भद्दावि जन्नपत्ती तरलच्छी एइ जा तत्थ // 83 // दई मुणिमहप्पंजम्पइ माहणजणाण सा पुरओ / चवलेहिं बडुएहिं एसो खलियारिओ किमिह ? / / 84 // किं न मुणह ! देवेहिं वन्दिजइ वाह वान्द्अहमिक्षार्थभत्तिनिव्भरमणेहिं / एसो दुक्करतवभरसमुवञ्जियदिवमाहप्पो॥ 85 // ता जइ जीविउमिच्छह तुम्मे भो माहणा इमं साहुं / * मागते पणमह पूयह जेण जियंति चट्टा लहुं एए / / 86 / / तीए वुत्ता एवं पणमित्ता माहणा पसायन्ति / जीयन्ति तओ बडुया | Bामनिवरे उम्मीलियलोयणा सिग्धं / / 87 // फायदाणं वियरइ मुणिस्स भदावि परमभत्तीए / वायन्ति दुन्दुहिओ जक्खा गयणम्मि प्रतिलामिते तो तदा // 88 // घोसन्ति अहो दाणं पत्वं सुद्धं अहो परा भत्ती / गन्धोदयकुसुमेहिं हिरनवुढि सह मुयन्ति // 89 // जातानि दिद्वेण अइसएण जिणिन्दधम्मम्मि पाणिणो बहवे / अणुरत्ता हुन्ति तओ बिहरइ य मुणी वि अन्नत्थ // 90 // कलहे पाव दिव्यानि। ट्ठाणे वटुंतो जइवि पुनमाहप्पा / एस मुणी गुणरासी तो किं अनोवि न तह होइ ? // 91 // तम्हा वञ्जयन्बो कलहो कन्दो अणत्थवल्लीए / इहलोए दोहग्गं परलोए दुग्गई देइ // 92 // / कलहकथानकम् / तथासरलतानुसन्धानसावधाने सर्वोपाधिविशुद्धधर्मकलापरिक्षानतः समग्रधर्मज्ञच्डामणौ अर्जुन इव परस्मिन करकर्मकौरवकैरववनप्रबोधप्रतिपन्थिनि प्रभाकरे अकृतस्यापि कृतस्य यदध्यारोपणं, तदम्याख्यानमपि महापापस्थानमित्युप- IP // 226 // Page #240 -------------------------------------------------------------------------- ________________ की -% 227 % 2%%% अभ्याख्यानपाप स्थानत्यागेऽङ्गपिछात्र हिमम्लानज्ञानपयाकरतया इर्ष्या शल्यवितुद्यमानमनःप्रसरतया अतुच्छमच्छच्छिन्नसत्पक्षतया द्विजत्वेऽपि दिव्यगत्ययोग्यतया दुर्गतिगामित्वमेवात्मनः प्रकटयति / किंच-अभ्याख्यानदानतः प्रेत्यानेकशः संपनीपद्यते अकृतपापस्यापि जडाशयस्य प्राणिनः कलंककोपलेपः / यतः। "वहमारणअन्मक्खदाणपरधणविलोवणाईण / सबजहन्नो उदओ दसगुणिओ एक्कसि कयाणं" ॥१॥तिबयरे उ पओसे सयगुणिओ सयसहस्सकोडिगुणो / कोडाकोडीगुणो वा होज विवागो बहुतरो वा // 2 // यः पुनरम्याख्याने पीडथमानोऽपीक्षुदण्ड इव निसर्गसिद्धमाधुर्यों न क्षारभावमुद्वहति / ताप्यमानोपि कनकपिण्ड इव न मालिन्यमात्मसात्करोति / घृष्यमाणोपि न श्रीखण्डमिव सौरभोद्गारपरिहारमिच्छति, किन्तु वर्द्धिष्णुधर्मध्यानानुबन्धक्रमेण शुक्लध्यानमवाप्य केवलज्ञानसंपदंगनालिंगितमृतिदिविषदामपि वन्दनीयपादारविन्दो भवति, अंगर्षिछात्रवत् / तथाहि चम्पाए नयरीए सत्थत्थसरोरुहाण दिणनाहो / आसी कयसज्झाओ कोसियअजो उवज्झाओ // 1 // विविहाई सत्थाई पढन्ति तस्सन्तिए बहवे सीसा / अंगरिसी सरलमणो रुद्दो खुद्दो सहावेणं // 2 // उवज्झाएण वियत्ते आएसे ASALASARASWAS % %%%%%%% भरं पेच्छह अंगरिसिं संमुहमुविन्तं // 4 // चिन्तइ एयस्सुवरि होही अज्झावगो अइपसनो / अपसायं मज्ज पुणो पमत्तचित्तस्स काहीत्ति / / 5 // एवं अदृज्झाणो आणिन्ति कट्ठभारयं गरूयं / जोइजसं सम्पच्छइ थेरि सवडंमुहं इन्ति // 6 // रूद्दो रूद्दज्झाणो निहणइ तं खड्डुनिक्खियं काउं। गहिऊण कट्ठभारं अज्झावयं अन्तिए पत्तो // 7 // निग्षिणकम्मो // 227 // Page #241 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / गुरुतिर // 228 // SAGACASSASSIAS पावो रूदो अज्झावयं मणइ खुद्दो। तुम्ह सो अङ्गिरिसिसिस्सो हणिऊण जोइजसं // 8 // घेत्तणं कट्ठभरं एसो सिग्धं समा- रुद्रछात्रदगओ एत्थ / पिच्छह तं खड्डाए पक्खिस जइन पत्तियह // 9 // तं सोचा दट्टणं उज्झाओ भणइ अंगरिसिमेवं / हा पाव त्तकलङ्केन कहं तुमए किनमेयं कयं ? धिट्ठ ! // 10 // इहलोए परलोए इत्थीपाएण पावपकिल्लो। होइ दुहत्तो सत्तो बुच्चइ कुलफंसणो लोए // 11 // ज मा समीबंमिबि पढमाणो सत्थस्थपरमत्थं / एवं बसि पावे ? तं मन्ने तं अभवोऽसि // 12 // अव- स्कारे सति सर दिटिपहाओ पाविट्ठ गरिद्वदुट्ठ मह इन्हि / पञ्जत्तं पढिएणं तुह एवं पावचरियस्स // 13 // दुस्सहमब्मक्खाणं बज- गृहीतानिवार्य गुणगणगिरिस्स / सोऊणं अंगरिसी झत्ति विलीणो व सवंग // 14 // खणमेकं निचिट्ठो चिट्ठइ धरणिगओ स ऽङ्गार्षिणा मुच्छाए / सीपलसमीरववगयमुच्छोवि चिन्सइ एवं // 15 // हा जीव कयं तुमए पुरभवे जमिह मोहमढेणं / पापं तं च्चिय दीक्षा। उदयं पतं दोसं विणा चेवं // 16 // ही संसारसहायो जस्सि जीवावि सुद्धचरियावि / हुंति अकम्हा निहुरअब्भक्खाणेण |P सकलंका // 17 // किं मज्झ जीविएणं ? नाणगुरूणषि वजणीयस्स / एवं अवज्झपंकोवलेवलित्तस्स मलिणस्स / / 18 // अमयस्सन्दिकरोवि हु तावहरोवि हु कलाहि कलिओवि / जह चन्दो सकलंको खंडिजइ किन्हपक्खेणं // 19 // अन्मक्खाणेणं पुवजियपावकम्मजणिएणं / तह झिझिस्सामि अहं दिणे दिणे तेयपरिहीणो // 20 // सवतषणकलासाइयवित्तो | भुवणं पयासइ कलाहिं। सकलंकोत्ति भणिजइ निसायरो रयणिरमणोवि // 21 // अहवा गुरूपएसा विविहेण तवेण सयलमल| हरणे / कल्लाणं चिय कणयं अकुच्छणिजं जए होइ // 22 // तम्हा सुगुरूणन्ते पडिवजियसवसंगविरइरओ / तत्तविचित्ततवेणं अप्पाणं सोहइस्सामि // 23 // एवं विसुद्धभावो अविहियपावो गुरूण पयमुले। गिण्डइ विहिणा चरणं करेइ विहिणा // 228 // Page #242 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 229 // 0 5619 विशुद्धहृदयाऽङ्गः केवलज्ञानप्राप्तिः पायन्ति दुन्दुहिजीवाणं अकया दिनं अमक्खाओ / जान लोगुत्त तबच्चरणं // 22 // गुरुकुलबासम्मि रओ विणयोवगओ सुयं अहिज्जन्तो। जन्तूण रक्खणोजयचित्तो अपमत्तया जुत्तो // 23 // गीयत्थतं पत्तो मेरूगिरिन्दो गुरूखमाहारो / निम्मलसंजममारो संविग्गो भावणासारो // 24 // उल्लसियजीवविरिओ अनदिणे खवगसेढिमारूढो। चउघाइकम्मघाए सो पावइ केवलं नाणं // 25 // देविन्ददाणविन्दा केवलमहिम करिन्ति साणन्दा / वायन्ति दुन्दुहिओ वरिसन्ति य कुसुमगन्धजलं // 26 / / उग्धोसन्ति य गयणे एयस्स मुणिस्स उवसमो कोवि / चिन्तामणि व दुल्लहो जीवाणं अकयसुकयाणं // 27 // अप्पेणं कालेणं अहो मुणिन्देण सुक्कझाणेण / इमिणा कुलिससमेणं दुकम्मगिरिणो लहुं दलिया // 28 // दिन्नं अब्मक्खाणं रूदेणं कूडकवडवयणेणं / सोमे इममि केवलसुहाणुभावं अहो पत्तं // 29 / / एस खमाहरचूडामणी मुणिन्दो सुमेरूगिरिगरूओ। जस्सि अब्भक्खाणं तिण व कल्लाणपरिणामं // 30 // रइए कश्चणकमले अंगरिसी केवली सुहासीणो। देवेहिं थुणिजन्तो पत्तो लोगुत्तरं लच्छिं // 31 // रूद्दो पुण लोएणं निन्दिजइ अलियदोसदाइत्ति / एसो अगिज्झनामो एस अभवो अदट्ठवो // 32 // जेणेरिसंमि सोमे अखंडवित्तमि कलुसवयणेण / कन्तिनिरोहो कीरह रूदेणं राहुरूद्देणं // 33 // सन्भूयंपि न दोसं वयन्ति कहिंपि सजणा लोए / जे पुण दोसमसन्तं भणन्ति ते इह महापावा // 34 // अब्भक्खाणेणेवं धिक्कारो होइ इहभवे चेव / परलोए पुण | दुग्गइपइसारो दुक्खभारो य // 35 // जे पुण विसुद्धचरिया अम्मक्खाणेवि सुद्धपरिणामा / रागद्दोसविप्पमुक्का सुकज्माण टू समारूढा // 36 / / केवलनाणसिरीए अलंकियो देवदाणवगणेहिं / अंगरिसीछचो इव तं वन्देजंति भत्तीए // 37 / / अभ्याख्यानकथानकं समाप्तम् / 1-ASCARKARKIRECAREOGANA -SCREEN4545 229 // Page #243 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अरतिमोहनीयोदयोऽपि महापापस्थानमिति प्रतिपादयन्ति परमार्थज्ञाः। यतः-तस्मिन् सति प्राणी दिविगतिप्रवणेऽपि अरतिपापजयन्ती IPI पक्षपरिग्रहे, प्राप्तेपि द्विजत्वे क्षमानुगतदृढमूलप्रबंधे प्रपंचितश्रुतस्कंधे चतुर्दिगंतशाखानुबंधे तापापहारिछायाविस्तारिपात्रपरप्रकरण- द्र परासंबंधे सौरभोद्गारियशोराशिकुसुमसंभारस्वर्गापवर्गफलप्रदानोपकारेपि गच्छगहने न स्थेमानमात्मन्यदधानः प्रीतिमात्म- 18 कोदाहरणेप्रतिः। सात्करोति / क्षुल्लककुमारवत् तथाहि | पुण्डरिकसाकेयपुरे पवरे भूमीरमणीविसेसए पुत्विं / रायाऽसि पुण्डरिओ कण्डरिओ तस्स लहु भाया // 1 // जसभदानामेणं नृपस्य य॥ 230 // महासई तस्स पणयिणी हुत्था / रोहणधरणीकरणिं पत्ता रूवाइरयणेहिं // 2 // चंकमन्ती दिट्ठा घरंगणे ललियचरणचारेणं / 18 शोभद्रोपपुण्डरियनरिन्देणं तणुप्पहाभासियदिगन्ता // 3 // तो तस्स मयणबाणा हियए लग्गति क्खलियचित्तस्स / मुश्चइ कुलमजायं रिकामार्ता लजं मुच्छियमणो तत्तो॥४॥ ते विरल च्चिय धीरा जेसिं पररमणिरूवदिट्ठीए / हियएण समं दिट्ठी पच्छाहुत्तं वलइ झत्ति // 5 // तो एस पुण्डरिओ तीए रूबंमि मुच्छिओ सन्तो / रइमलहन्तो दुई पेसइ तीए समीवम्मि // 6 // दुईवि भणइ तिस्साहुत्तं चित्तं निवस्स अइमत्तं / अणुरत्तं पडिवजसु पसीय ता तं पई देवि ! // 7 // जसभद्दावि य चिन्तइ दिणमणिविम्बंपि फुरियकिरणोहं / उग्गिरह अंधयारं दुरूज्झियगुरूलहुवियारं // 8 // भणइ य दूइहुत्तं राया परिचत्तसकुलमजाओ। जं एवं अणुरजइ लज्जइ नियमाउणो न कह ? / / 9 / एवं तीए वयणं दुई गन्तूण साहइ निवस्त / सोविय गिद्धो लुद्धो मारावइ बंधवं लहुयं // 10 // जसभद्दावि य रन्नो निग्घिणचरियं निरिक्खि सिग्छ / गहिऊणाऽऽभरणाई नानासइ नियसीलरक्खट्ठा // 11 // सावत्थिं पुरि पत्ता चिट्ठइ पडिवनजणयभावस्स / थेरवणियस्स गेहे दुहिया विय दुहिय दृष्टिः / AAREENA %ALCCCCIRCHCAREC1-95. Page #244 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 31 // वित्तीए // 12 // जयसेणसूरिगुरूणो कित्तिमइमहयरीसमीवंमि / पयपउमवन्दणत्थं पत्ता साहइ नियं चरियं // 13 // यशोभद्रया पञ्चागयसंवेगा धम्म सोऊण सुद्धसद्धाए / पवजं पडिवजइ अकहियपच्छन्नगम्भा सा // 14 // परिवड्डन्ते गम्मे पुच्छइ | गृहीता महयरी किमयंति ? / भणइ य भया न गम्भो पुत्विं कहिओ अदिक्खाए // 15 // कालक्कमेण जाओ पुत्तो सावयघरंमि दीक्षा, तवड्डन्तो / समए पडिवन्नवओ जाओ खुड्डगकुमारोत्ति // 16 // उवोढुं सीलभरं अचयंतो तयणु मेरूगिरिगरूयं / ओहाव पुत्रक्षुल्लकणाणुपेही सो जाओ जोवणारंभे // 17 // उनिक्खमिउं पुच्छइ जणणिं सा भणइ वच्छ ! तावऽच्छ / मझवयणेण बारस गृहीतदीक्षवरिसाई जाब पुजन्ति // 18 // पुग्नेसु तेसु अरई पत्तो पुच्छइ पुणोवि सूरीणं / वयणेणं वरिसाइं तत्तियमित्ताई चिद्वेइ स्य च चा॥ 19 // तेसुवि पजचेसुं अरओ चारित्तमोहदोसेण / उज्झायवयणओवि य अच्छइ पुण तित्तियं कालं // 20 // वयगह रित्रे रतिणाओ अडयालीसवरिसेहिं संजमे न रई / संजाया तेणेमं पावट्ठाणं अरइनामं // 21 // पुच्छन्तो मायाए उवेहिओ अप्पि र्जाता। ऊण नामकं / मुद्दारयणं कंबलरयणं भणिओ य तो एसो // 22 // साकेए अत्थि निको पुण्डरिओ तुह महल्लओ जणओ। पच्चयहेउं दंससु मुद्दारयणं इमं वच्छ ! // 23 // कालक्कमेण पत्तो तम्मि य समयम्मि पेक्खणारम्भो। सो सयलंपि रय]ि पेच्छइ तं पेक्खणं रसिओ // 24 // अइरंगे वट्टन्ते पभायसमयंमि नट्टिया सन्ता। निदाघुमियनेता महयरियाए तओ वोचा // 25 // सुट्ट वाइयं सुट्ठ गाइयं सुट्ट नच्चियं सामसुन्दरि / / अणुपालिय दीहराईए मा सुमिणन्ते पमायह // 26 // महुरक्खरवाणीए जणणीए गीइयाए गीयाए / कम्बलरयणं वियरइ संविग्गो खुड्डकुमारो॥ 27 // रायसुएणं दिनं कुण्डलरयणं फुरन्तकन्तिल्लं / जच्छइ हारं तारं सिरिकन्ता सत्थवाहीवि // 28 // जयसंधिअमचेण दिन्नो मणिरयणमण्डिओ 15 // 231 // PARA*********** Page #245 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 544CKC जयन्ती- प्रकरणपतिः / / प्रेक्षणे ननकीगीतिश्रवणास्वस्थो जातः चारित्रे / 232 // ABC%ACIENCE | कडओ / मिण्टेण य रयणसिणिं सवाणि य लक्खमुल्लाणि // 29 // जाए पभायसमए पुच्छन्ते नरवरम्मि पुण्डरिए / निय- वुत्तन्तं साहइ सपच्चयं खुल्लगकुमारो // 30 // इत्थाऽहं रजत्थी समागओ तात! माइवयणेणं / सम्पयसंबुद्धोऽहं मुणिऊण | गीइयं राय ! // 31 // रायकुमारेणोत्तं रजं गिन्हामि मारिउं जणयं / एयाए गीयाए निवारिओऽहं अकजाओ॥ 32 // विनवइ सत्थवाही बारसवरिसाई सत्थवाहस्स / अत्थोवजणहेउं गयस्स देसन्तरे दूरे // 33 // तस्सागमणे संसयदोलारूढम्मि वट्टए अरई। अन्नपियम्मि मणो मे विणिवारइ गीइया एसा // 34 // जयसन्धीवि अमचो तुम्हुवघाएण अन्नराएहिं / उवयरियो विनियत्तो देव ! इमं गीइयं सोउं // 35 // मिंठेण वि विनत्तं गयरयणं सब्बलक्खणावरियं / एयाए गीयाए न सत्तुवयणा हणिस्सामि // 36 // सो वि संविग्गे पञ्चावइए स खुड्डगकुमारो / परियरिओ तेहिं सवेहिं तओ गुरूपासंमि सो जाइ // 37 // संजमसिहरारूढो जीवो परिबुडइ जेण तेणेमं / अरइचरित्तमोहं पावट्ठाणं भणन्ति विऊ // 38 // // अरतिकथानकं समाप्तम् / / रतिरप्यऽपरापरविषयग्रामानुसारिणी जलजंतूपकारिणी रजाकालुष्यधारिणी समुन्नतस्थानपरिहारिणी गिरिवराणमप्यन्तस्तत्वमेदिनी अप्याश्रितमेदिनी श्रोतस्विनीव प्रतिपदं निम्नगामिनी महत्पापस्थानमिति वर्णयन्ति लब्धवर्णाः / अन्यान्य विषयप्राप्तरता हि प्राणिनो भवन्त्यारामा इव महारंभाः सीमानमुल्लंध्य प्रवर्तितसमरसंरंभाः पखंडक्षोणीमंडलेश्वर्याः श्मशान&ा भूभागेष्विवाऽशुचिस्वभावेषु कामभोगेषु गृद्धा गिद्धा इव पक्षपातरसिकाः कर्मक्षयोपशमवैचित्र्यतः समुत्पन्नजातिस्मरणतः | परिज्ञातानुभूतदेवभावा अपि प्रतिबोध्यमाना अपि पूर्वभवबान्धवेन विविधाभिः वैराग्यकथाभिः न प्रतिबुध्यन्ते ब्रह्मदत्त P // 232 // Page #246 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 233 // " वेउबियलद्धीए विरह रतिपापस्थाने ब्रह्मदत्त चक्रिवृत्तान्तः। 4%5C3% सुहं होइ // 4 // एवं साहा // 3 // मोहणसुहापवाडे चक्रवर्तिवत् / तथाहि जंबुद्दीवे दक्षिणभरहद्धे मज्झिमंमि खण्डम्मि / कम्पिल्लपुरे लच्छीनिलए पंचालदेसम्मि // 1 // होत्था उग्गपयासो चारसमो बमदत्तचक्कहरो / अञ्चन्तभोगकामी सामी छक्खण्डमरहस्स // 2 // वेउबियलद्धीए विरइयचउसट्ठीसहसमुत्तीवि / समसमयं रमणीण भोगेणुवसन्तमयणग्गी // 3 // मोहणसुहापवाहे इत्थीरयणमि देवयसणाहे / खीरोयरंमि अगाहे अवगाहे जइ सुहं होइ // 4 // एवं साहीणभोगे रइप्पसंगमि सहसमुहपसरे / नरयान्भासेऽविरया हवन्ति जीवा किमच्छरियं? // 5 // विसयसुहजलहिमज्झे हरि व हिययत्थचक्कवट्टिसिरी। चिट्ठइ बहुयं कालं पत्थो रइमोहनिदाए // 6 // माणवगनिहिदेवो तप्पुरओ नाडयंमि अन्नदिणे / उच्छालइ बहुरूवं कुसुमाणं कन्दुयमपुवं / / 7 // अह तमि विविहरूवे सुयन्धे कुसुमाण कन्दुए दिखे / चिन्तइ चक्की एवं कहिं ? मए दिट्ठपुवंति // 8 // कम्मखओवसमवसा तओ समुप्पनजाइसरणो सो / पेच्छह पुत्वभवोहं गच्छइ धरणिं गओ मुच्छं // 9 // विविहप्पयारसिओवयारमाहप्पलचेयनो। सिंहासणे निसनो विनत्तो पवरलोएणं // 10 // किं वायपित्तसंखोहहेउओ ? अहव अन्नकारणओ? / एसो मुच्छापवेसो सामि ! अकम्हा कहं जाओ? // 11 // पुत्वभवजियकम्माणुभावओ एस कोवि परिणामो / इइ जंपिऊण राया पढइ सिलोगस्स पुबद्धं // 12 // " आस्व दासौ मृगौ हंसौ मातं. गावमरौ तथा"॥ घोसावियं च रन्ना पूरइ जो उत्तरं सिलोगळ् / दाहिस्सं ससिणेहं रजद्धमसंसयं तस्स // 13 // सोऊणेवं लोओ अहोनिसं पढइ तं सिलोगई / परमत्थमयाणतो कोऊहलमित्तगयचित्तो // 14 // अह बहुदिणपजन्ते आरामे आरहट्ठिः एणेवं / गिजन्तं पुणरूत्तं मुणिणा सुणियं सिलोगद्धं // 15 // तो ईहापोहेणं मुणीसीहो मुणइ जाइसरणेणं / पुवभवे मुच्छाए NAGACHAR BI | |233 // Page #247 -------------------------------------------------------------------------- ________________ SEC56 जयन्तीप्रकरणवृतिः / 15 // 234 // गच्छइ धरणीयले तयणु // 16 / / सीओवयारमुच्छावहारसच्छं करेइ मुणिरायं / आरामिओऽरहट्ट मुत्तूण सिग्धमागम्म // 17 // जातिपुच्छइ य कीस भयवं? एसा मुच्छा समागया तुम्ह / तयहुत्तं भणइ मुणी मणमोहावेसओ भद्द ! // 18 // तुमए संगी- स्मरणेन याओ अद्धसिलोगाओ एस मह जाओ। अह पुण पढसु महायस ! तमुत्तरद्धं सिलोगस्स // 19 // तद्यथा-एषा नौ षष्टिका चक्रिणा जातिरन्योन्याम्यां वियुक्तयोः // एयं तु उत्तरद्धं सम्म सो सिक्खिऊण तुरमाणो / गच्छइ रायस्सन्ते पडिहारपवेसिओ सन्तो, श्लोकार्द्ध // 20 // पयपणयोऽणुनाओ निवपुरओ सावहाणअत्थाणे / रजद्धकंखिरी सो पढइ सिलोगं समग्गपि / / 21 / / सम्पुनसि- रचिते लोगेणं सयलकलामण्डलो वि दिप्पन्तो। तक्खणमागसेण व राया विगलज्जुई जाओ // 22 // सिंहासणाओ धरणीयलंमि तत्पूर्तीमीलंतलोयणो सहसा / गच्छइ मुच्छावसओ हहा किमेयंति ? जणरोले // 23 // हिमजलधाराहारावलीहिं चंदणरसाभिसेएण / कृता कयलीदलाइपवणप्पओगओ होइ सच्छमणो // 24 // आरामिओ वि हम्मइ जणेण हा दुढ ? किं ? तए पढियं / जस्स मुनिवरेण / वसेणं राया मुच्छाविहलंघलो जाओ // 25 // सो भणइ हम्ममाणो एस सिलोगो मुणिन्दवयणेण / संपुनो निवपुरओ पढिओ | संतोसहेउत्ति // 26 / / अह मह दुकम्मवसओ ससओ इव लउडजट्टिमुट्ठिहिं / अस्सि जणे वणे इव निदोसोवि हणिजामि // 27 // मुणिभत्तीकप्पलया मज्झ सिलोगद्धलाहपसवेण / दुकम्मपरिणईए कडुयफला चेव संजाया ||28|| अह परियण निवारह | राया आरामियंमि पहरन्तं / एसो ममोवयारी बन्धवसंजोगकारीत्ति // 29 // हक्कारिऊण सम्माणिऊण सवारिऊण आसन्ने / उचविद्रो सो पुदो रन्ना को एस वुत्तन्तो? // 30 // आरामिओ पयासइ सारयससिसोमसाहुवुत्तन्तं / वियसन्तकुवलयच्छो राया सरयस्सिरि पत्तो // 31 // सालि व पणयसिरया सामन्तमन्तिपुरलोया / पुच्छन्ति महारायं सामिय को ? इत्थ | // 234 // RECRECACACARE Page #248 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 235 // HDCALOCALCCARANSACRECTION परमत्थो / // 32 // सिरि भदत्तचक्की चित्तचमुक्कारयं तत्तो / जम्पइ महुरगिराए बन्धवविनाणहिट्ठमणो // 33 // पुत्वभव- चक्रिणा चन्धुविरहो हुयासणो नेहविउणियपयावो / मुच्छावेसनिबन्धणमिह मह जाओ तदा तस्स // 34 // आरामट्ठियमुणिणो | स्वपूर्वभवा पूरइ सो अन्नहा कह सिलोग ? / तो अम्हं पुत्वभवे निसुणह तुम्हे कहिजन्ते // 35 // अम्हे माहणजाया नियदासीए भवंमि दर्शिताः पढममि / पुत्ता न खमा ठाउं नेहेणऽननविरहेण // 36 // जोवणपत्ता पत्ता रयणीए छित्तरक्खणनिमित्तं / एक्को डको अहिणा प्रधान बीउवि य तं गवेसन्तो॥ 37 // कालिञ्जरे गिरिन्दे हरिणीए गम्भसंभवा अम्हे / अन्नोन्नपेमपरवसहियया हरिणा भवे लोकानाम् / बीए // 38 // अइनेहपडिबद्धा तारूने जमलचारिणो दोवि / वाहेणेगसरेणं समग चिय पाविया मरणं // 39 // अट्टज्झाणपरायणहियया मरिऊण दोवि समकालं / एगाए हंसीए हंसा जाया नईकूले / / 40 // तत्थवि पेमाणुगया सुसंगया एगया दुरंतेण / पारद्धिएण पासप्पओगओ पाविया निहणं // 41 // वाणारसीनयरीए उदयं पत्तेण नीयगोत्तेण / चंडालदारगत्तं पत्ता रूवाइगुणजुत्ता // 42 // अह तत्थ नमुहमन्ती निवग्गमहिसीगमणेण सकलंको / रन्ना निग्गहहेउं समप्पिओ अम्ह जणयस्स // 43 // पिउणावि एस वुत्तो अभयं वियरेमि तुज्झ पाणाण / पच्छन्नं मह पुत्ता कलासु कुसला जइ करेसि तं // 44 // जीवन्तो चिय जीवो भद्दसयाई लहइ जियलोए। इइ चिन्तिऊण मन्ती पडिवजइ अम्ह पिउवयणं // 45 // लेहाइया कलाओ तेणऽम्हे भूमिमन्दिरहिएण / अचिरेण सिक्खविया पिउणा किजन्तसम्माणे // 46 / / किन्तु सचिवो चलिन्दियनिन्दियचरिओ बहुं पिउवयरिओ / मयरद्धयसरविद्धो मुद्धो गिद्धोऽम्ह जणणीए // 47 // अहवा-वसइ जहिं चेव खलो पोसिजन्तो वि नेहदाणेण / तं चेव आलयं दीवउ व अचिरेण मइलेइ / / 48 // बत्तन्ते वुत्तन्ते विनाए कोहपरवसो R235 // 98515AMCHORECASCANCIEOCOM Page #249 -------------------------------------------------------------------------- ________________ चित्र संभृत्योः मातङ्ग K भवे जणओ / तवावायणचित्तो सम्म उवलक्खिओ तत्तो॥४९॥ एसऽम्ह कलायरिओ कलाकलावो इओ य अवयरिओ। जयन्ती-मा अम्हारिसेसु तम्हा पच्चुवयारो हवउ अस्सि // 50 // इइ चिन्तिऊण छन्नं कहिऊणं तस्स तायमपसन्न / निस्सारिओ य एसो प्रकरण- गयउरनयरे गओ तुरियं // 51 // तत्थ य सो अल्लीणो सणंकुमारस्स चक्कवट्टिस्स / मन्तिपए संठविओ कलासु निउणेत्ति वृतिः / तेणावि // 52 // लावन्नपुनदेहा हरिकेससुयावि चित्तसंभृया। तारून संपत्ता तरुणीमणनयणरमणीयं / / 53 // अह मासंमि वसन्ते सहयारवणम्मि मंजरिजन्ते / मलयानिलंमि कुसुमियविचित्तवणरायसोहिल्ले // 54 // पसरंति चच्चरिओ विचित्त॥२३६॥ सिंगारतरूणतरूणीणं / बहुभंगरंगगेयज्झुणिवीणावेणुमहुराओ // 55 // तेवि य हाहाहूहूमहरसरा रइयदिव्वसिंगारा खेलंति / चच्चरीए नयरीए चच्चरपहेसु // 56 // ताणं गीयसरेणं महुरेणं मुच्छिओ जणो गिद्धो / सयलो तत्थागच्छइ छिप्पाछिप्पं अविगणन्तो // 57|| राया पुरोहिएणं विभत्तो देव तुम्ह नयरीए / मायंगचच्चरीए एकाकारीकओ लोओ / / 58 // तो राया पडिसेहइ मायंगेहिं न मज्झ नयरीए / मझमि पविसिऊणं कायदा चच्चरी कहवि // 59 // नयरीए बाहिं चिय गीयाइकलाहिं तयणु खेलंति / सक्वेसु ऊसवेसु परिभूया चित्तसंभूया / / 60 / / पतमि सरयमासे अमियरसुल्लासिससिकरपयासे / गीयाइ-1 कलब्भासे इन्दमहे पयडियविलासे // 61 // एयाए नयरीए एयंमि महसवंमि सग्गसिरी / होहित्ति पेच्छणत्थं ते दो पच्छन्नस्वधरा // 62 // पविसित्तु पुरीमज्झे रयणीए ठंति रंगभूमीए / पेच्छंति गीयवाइयनाडयकोउहलसयाई / / 63 // अह तेसि | रसपसरो हवेह जेणऽप्पयं अजाणता। सयणाण सुहासारंगीउग्गारं पयासंति / / 64 // तो आउट्टो लोओ सदोवि तइक्कचित्चयं पत्तो / चित्तलिहिओ चिट्ठइ चिंतह किं किन्नरा एए? // 65 // अहवा नरावि एए सिक्खविया तुंबरेण गीयकलं। नमुचिकृतोपद्रवे नगरान्निकाशनम्। CARSOCA5% CHOROSCOREOGROUS // 236 // Page #250 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 237 // 535AREGREC7 हरिएसकुलम्भूया, किंवेए चित्तसंभूया ? // 66 // घिद्धी एए रनो आणं उल्लंघिऊण नयरीए / मज्झमि जं पविठ्ठा दुट्ठा धिट्ठा मुनिवर हणह तम्हा // 67 // एवं हणिजमाणा नयरीए निस्सरित्तु परिभूया। मरणमभिनंदमाणा निविना जीवियवाओ / / 68 // समागमा&ा आरोहन्ति गिरिन्दं पेच्छन्ती झाणसंठियमुणिन्दं / ते लहुयकम्मयाए भत्तीए तं नमंसन्ति // 69 // पारियकाउस्सग्गो स | मगो सता चित्रमुणिन्दो नाणदंसणसमग्गो। परलोयसाहणेणं आणन्दइ धम्मलाभेणं // 70 // महुरक्खरवाणीए तेणं मुणिन्देणं पुच्छिया * संभूतिभ्यां अम्हे / के तुम्भे ? कहमिन्हि पत्ता ? अस्सि गिरिवरंमि // 71 // अम्हेहि तप्पुरओ कहियं सवं अगोवयन्तेहिं / मूलाओ निय गृहिता चरियं मरणज्झवसायपजन्तं // 72 // तो सायरेण मुणिणा करूणारससायरेण उवइट्ठो। जिणधम्मो कप्पदुमो कप्पियफल दीक्षा। साहगो अम्ह // 73 // तयणु मुणिदेसणाए दिणमणिकिरणावलीए अवसरिए / मोहतिमिरम्मि सिवपुरमग्गो पयडीहवइ अम्ह // 74 // तो चिन्तियमम्हेहिं सिवपुरमग्गम्मि संचरन्ताणं / भवकन्तारदहाणं दूरीकरणं हवइ कमसो / / 75 // एवं संविग्गाणं सिवपुरमग्गम्मि अम्ह लग्गाणं / दिन्नं चरित्चजाणं जमिह निहाणं सिवसुहाणं // 76 // गहिया दुविहा सिक्खा जइधम्माराहणम्मि अइदक्खा / तो तेण महामुणिणा गीयत्थाणं पए ठविया // 77 // निस्संगा विहरामो गामागरनगरपट्टणाईसु / झाणट्ठिया चिट्ठामो उजाणारामभूमीसु // 78 // छट्ठहमदसमदुवालसाइपक्खाइमासतवच्चरणा / पविसामो जइ पारणदिणेसु नयराइमज्झमि // 79 // विहरन्ता य कमेणं पत्ता गयउरपुरस्स बाहिम्मि / सम्भूयमुणी मज्झे पविसइ समुयाणवित्तीए // 8 // मत्तालम्बठिएणं दिवो सो नमुइमन्तिणा तयणु / चिन्तियमणेणं जइ मं जाणाविस्सइ जणं एसो // 81 // तो होही पुरमझे महई उम्भावणा महाराओ / रोद्धा महावरोहे पाणाणं निग्गहं काही // 82 // तम्हा नियपुरिसेहि // 237 // Page #251 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृतिः / HASHMA5 कृती // 238 // तज्जणताडणदुहेण नयरीओ। निस्सारिजउ सिग्धं तो सुहडा पेसिया झत्ति // 83 // ते जढिमुट्ठिलउडप्पहारविहुरं करिति मुणि- उपद्रवे सीहं / वारिजन्तावि दिदं जणेण करुणाए भत्तीए // 84 // अह निम्महिए जह चन्दणमि सीएवि जायए अग्गी / तह सन्ते संभूतिदन्तेवि हु तम्मि मुणिन्दे हवइ कोवो // 85 // ततो तेओलेसावसेण पसरन्ति धूमकुरुलीओ। तस्स मुहाओ कुडिला, मुनिः कसिणा कीणासदिट्ठीओ // 86 // तो आकम्पियहियओ जम्पइ लोओ मुर्णि महासत्तं / खामह अन्नहा होही नूणं |चित्रमुनिपलयानलुल्लासो // 87 // एवं लोयपवाय सुच्चा चिन्तइ य चित्तमुणिसींहो। संभूयमुर्णि मुत्तुं एसा लद्धी न अन्नस्स // 88 // तोऽहं तुरियं गंतु कोवग्गिं तस्स उवसमजलेण / सिंचामि जेण न दहइ तवो वणं मुक्खसुहफलयं // 89 // एवं वि. 18 पदेशात् चिन्तिऊणं तुरियं गन्तूण तत्थ चित्तमुणी। संभासइ संभूय पसरियधूमं हुयासं व // 90 // सुगुरूवएसजलहरजलधारा शान्तीधोरणीहि कोवग्गि। उल्हवसु सोम! सिवफलसीलवणं दज्झए तेण // 91 // जइवि तुमं परिभृओ निकारणमेव भूतः। बाललोएण / तहवि तुमं संभूओ साहू सोमो अमयभूओ // 92 // दियराओ तं सोमो खलेण लोएण राहुकलुसेण / दमिय मकोवि कहं सुहावहं वहसि नऽप्पाणं // 93 // जइ एएण जणेणं अन्नाणेणं सरीरए तुज्झ / पीडा कया मुणीसर! होड अपीडो चरित्तप्पा // 94 // तंमि अपीडे मुणिवर ! रयणापीडो जयंमि तं होसि / देवाण वन्दणिज्जो किमंग पुण सेसलोयाण 1 // 95 // अन्नं च-कल्लाणमुत्तिरूवो तुमंसि तो कीस पावयपसंगे। ताविजंतोवि दढं न हबसि ? तमदाहरूवधरो // 96 // एवं परिभाविजउ दुलहं चारित्तमित्थ संसारे / तं कोहग्गिपलित्तं खणमित्तेणं हवइ रित्तं // 97 // इय अमियPJ सारिणीए वाणीए चित्तसाहुणा सित्ते / कोवदवो हिययवणे संभूयमुणिस्स उवसन्तो / / 98 // बहिरुजाणगयस्स तस्स य MUM 238 // %SCREE N % % Page #252 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 239 // SA-ACOCOCCIEOCE% सनत्कुमार चक्रिणा नमुचिप्रधानो निष्काशितः। | साहूस्स होइ संवेगो / जेणुत्तमहकप्पं विहिणा पडिवजए झत्ति // 99 // भावइ य इमं एसो धिद्धी आहारकारणेणावि / वसिमंमि विसन्ताणं अम्हाणं दुक्खदन्दोली // 100 // धन्ना ते चिय सिद्धा जे असरीरा हवंति णाहारा / तम्हा छहाविमुक्का तिलोयचडामणीभया // 1 // इच्चाइभावणाहिं ससिकिरणालीहिं माणसे तस्स / सुहज्झाणं कुमुयवणं विहयरयं वियसइ समग्गं // 2 // चक्की सणकूमारो वइयरमेयं मुणित्तु निविसयं / कारइ नमुई सचिवं सहसा सबस्स हरणेण // 3 // अन्तेउरपरियरिओ मुणिगुणमणिरासिभत्तिभरभरिओ। ताण पयवन्दणत्थं सयं तु नयराओ नीहरिओ // 4 // पणमइ उजाणगओ ताण मुणिन्दाण पायपउमाई / चक्की सणंकुमारो चमक्किओ तवगुणगणेहिं // 5 // रोमश्चश्चियगत्तो थुणइ गुणे ताण वग्गुवग्गुहिं / तुम्ह खमासमणाणं इमा खमा जयउ चिरकालं // 6 // छज्जीववच्छलाणं तवचरणं तुम्ह दिट्ठमाहप्पं / कप्पहुमुन्न फलयं अम्हाणं होउ आकप्पं // 7 // तुम्हं मुणीसराणं पयमत्ती होइ पुन्नवन्ताण / किं चिन्तामणिलाहो सव्वाणवि होइ जीवाणं // 8 // एवं थुणिऊण सो चक्की सम्भूयगुणगणे हिट्ठो / कयमुणिपायपणामो जहागय पडिगओ झति // 9 // चक्किस्म इत्थिरयणे नमिरे पयकमलअलयफासेण / विसयामिसम्मि गिद्वी संभूयमणमि संभूया // 10 // तीएवि वेयदिट्ठी हवा नियाणं करेइ सो तयणु / इमिणा तवेण इत्थीरयणं मह होज अन्नभवे // 11 // चित्तमुणिन्देण तओ चिट्ठादिट्ठीहि तस्स विनायं / इत्थिरयणोवलंभे करइ नियाणं तवेणेसो // 12 // संविग्गमणेणेवं भणिओ मा वच्छ ! तुच्छविसयाण / लोहेण हणसु दुलहं महप्पभावं तवचरणं // 13 // भवजलहितरणजाणं चरण कल्लाणसुरगिरिसमाणं / जं पुण कुणसि नियाणं तं वाणं सव्वदुक्खाणं // 14 // अपमत्तेण चरित्तं चिरकालं पालियं तए धीर! / तमणेण नियाणेणं सल्लिजइ दुइसल्लेणं // 15 // SA-%A4%AESA A5 239 // Page #253 -------------------------------------------------------------------------- ________________ सनत्कुमा रेण जयन्ती प्रकरणवृतिः / 4 वन्दितो मुनिवरः। // 240 // 54545%CE मरणं च ससल्लाणं अणंतदुक्खाण कारणं वोत्तं / उद्धरसु धीर ! तम्हा नियाणसल्लं तवसरीरे // 16 // सुसिलिट्ठकट्ठनिम्मियअइदिढचारित्तजाणवत्तेण / भवसायरंमि तिमप्पाए तंमि किं बुड्डिसि इयाणि ? // 17 // अचंतियएगन्तियसिद्धिसुहाणं निबन्धणं चरणं / मणुयविसयाण कज्जे हारिसि किं ? वच्छ ! तुच्छाण // 18 // नन्दणवणं व एयं तवचरणं पालियं चिरं सहलं / किं दहसि ? नियाणेणं हुयासणेणेव तं सोम! // 19 // तं निक्खन्तो सीहो सीहुच्चिय विहरिउ चिरं कालं / संसारसुहनिरीहो तुज्झ भवो होउ मा दीहो // 20 // सुइरं पन्नविओवि हु विचित्तभंगेण चित्तमुणिणेवं / भविय वयावसेणं न नियत्तो सो नियाणाओ // 21 // तो अम्ह पडिवजियपरिवलियउत्तमढकप्पेण / मरिऊण देवलाए सुके देवा समुप्पन्ना // 22 // माणियदियलोयसुहो तओ चुओऽहं भवम्मि छट्टम्मि / एक्कुच्चिय सम्पत्तो बन्धवविरहेण चक्किपयं // 23 // पुत्वभवबन्धवो वि य मन्ने सो चेव आगओ साहू / जेणेस सिलोगो मे असंसयं पूरिओ झत्ति // 24 // तो वाहिं गन्तूणं जम्मन्तरबन्धवं गुरुसिणेहं / पिच्छामि समिद्धीए निबन्धेणं निमन्तेमि // 25 // सुणिऊणं रायवयणं एवं हरिसुल्लमन्तसवंगो / सहोवि जणो जाओ तुरियं मुणिदंसणुम्माहो // 26 // हरिसेण अमायन्तो चक्की अंगंमि पुलयपरियरिओ / बहिरूजाणे गच्छइ सविड्डीए तओ झत्ति // 27 // मुणिदंसणमि सिरिवंभदत्तचक्किस्स होइ सन्तुट्ठी / चिरविरहतावहरणी संजाया नं अमयबुट्ठी // 28 // नमिऊण पायकमलं मुणिस्स वियसन्तनयणमुहकमलो / उवविट्ठो चक्कहरो पुरओ सह सबलोएण // 29 // पुच्छइ य मुणिं भयवं ! दियलोयाओ चुआ कहिं तुम्मे / नयरंमि समुप्पन्ना? कम्हि कुले रिद्धिथिमियंमि // 30 // मुणिवइणा संलत्तं चविऊण सुक्कदेवलोगाओ / अहं समुप्पन्नो नयरे इन्भसुओ पुरिमतालंमि // 31 // मोहन्धयारदिण का॥२४॥ Page #254 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 241 // मोगत्यागेब्रह्मदत्त|स्य मुनि वरेणोपदेशोदत्तः। मणिगुरुसँगमबोहिलाभसरिसरूहे / पडिबुद्धे चरणसिरी पडिवमा सहरिसेणेसा // 32 // इइ मणिए मुणिवइणा चक्की पडिभणइ बन्धव ! इयाणिं / कुणसु तमं महतोसं रजसिरीसंविभागेण // 33 // सा सलहिजइ लच्छी विबुहेहिं नीइमग्गकुसलेहिं / जा सद्धं उवभुजइ सिणिबन्धूहि मित्तेहिं // 34 // सुमरियपुबमवाणं अम्हाणं तुम्ह विरहदावग्गी। उवसन्तो जम्मन्तरवन्धवसंगमघणेणऽज // 35 // पुवृभवेसुं नेहो अहोनिसिं संगयाण बुड्डिगओ। जह तह वड्डउ इहई लच्छीए संविभागेण ॥३६॥काओवि कुणइ सई भुजंलहिऊण सयलबंधूण | ता कह तह विरहेणं रजसिरी होउ मह भुजा ? // 37 // इइ जंपियंमि रना मुणिसीहो भणइ राय रजसिरी। भवदुहदन्दोलिसही दुग्गइपहगमणपगुणरही / / 38 // रजसिरीलुद्धाणं मोहमहानरवरिंदसिन्नमि / पडियाण नाणदसणचरित्तरयणाई नासंति // 39 // चिन्तामणिसरिसेसुं नढेसु तेसु होइ जीवाणं / भवदोगचं नरवर ! अणन्तदुहहेउयं सुइरं // 40 // एसा हु रायलच्छी कुच्छी जलहिस्स जेण दुप्पूरा / अणवरई सम्पजइ महावयासंगमो वित्थ // 41 / / आरामंमि व रजे हुन्ति महाराय जं महारम्भा / आमूलाओ तत्थ य फलोवलंभे हवइ न्छेओ // 42 // विसयाणुवभोगत्थं रजं पत्थिजए महीनाह ! / ते पुण माणुसजम्मे अमेझपरिमद्दणुप्पाया // 43 / / असुयंमि समुन्भूए मणुयसरीरम्मि असुइरसपुढे / निचं अमेज्झकुढे विसहसुहं भन्नए किन्नु ? / / 44 / / आवायमित्तमहुरा विसराऽसुहरं व विरसपरिणामा / किम्पाकफलप्पाया हुन्ति जियाणं दुहविवाहा // 45 // जइ नाम देवलोए दिवसरीरेहि अच्छरगणेहिं / सद्धिं भोगुवभोगे न हु तित्ती ता कहं एत्थ ? // 46 // तुच्छाणं विसयाणं कजेणं राय मणुयजम्मंमि / हारेजइ सुकुलाइयदुल्लहरयणाण सामग्गी // 47 // जीए जिणधम्मेणं सम्मं आराहिएण सुगुणेण / मोस्खेण सरलयाए GA%A9- A4% 241 // 11 Page #255 -------------------------------------------------------------------------- ________________ + भी + जयन्तीप्रकरण वृतिः / // 242 // CAR HUSROC परलोओ सिज्झए निचं // 48 // पंचसु भवेसु नरवर ! तुज्झवि पयडाइं ताई दुक्खाई। जिणधम्मो चिय तेसिं तएवि किजउ भोगलोलु निसेहत्थं // 49 // सुरलोएवि महायस ! बहुविहईसाविसायमाईहिं / अणुविद्धं चिय सोक्खं दुस्सहं चवणे तहा दुक्खं पतयाऽन्ते // 50 // तम्हा अणन्तमबाबाई सोक्खं सिमि जं निच्चं / तस्स पसाहणसजं संजमरज महाराय ! // 51 // जं संजमरजेणं नरकगतिइहंपि पाविन्ति मुणिवरा सोक्खं / रागद्दोसवसट्टो कत्तो ? तं चक्कवडीवि // 52 // सच्चं चिय जइ नेहो अम्हुवरि राय तुह मणे ते प्राप्तिः। अस्थि / ता गिण्ह महसमीवे संजमरज समग्गंपि // 53 // एवं खु दिजमाणं गिन्हिजन्तं समग्गमवि होइ / दुन्हंपि जेण जिप्पड रिउवग्गो अन्तरंगोवि // 54 // जिणिएण तेण केवललच्छीए संगयाण सिद्धिए / अयरामरनयरीए अणन्तकालं हवइ रजं // 55 // इइ भणिए मुणिवइणा चक्की संलवइ बंमदत्तोवि / सुकरहिं उवणीयं चएमि रजं कहं एवं? // 56 // कह होइ सो सयनो ? महल्लपुन्नोदएण संपत्तं / जो चयइ चक्की रजं संदिद्धे सिद्धिसुहलाहे // 57 // पवजावि मुणीसर सदुक्करा जेण तत्थ सवत्थ / अप्पडिबद्धविहारो कीरह उज्जुत्तचित्तेहिं // 58 // भरहखिचमि इमा खमा मए साहिया सुहेणेव / कोहाइरिउजएणं दुसाहणा सा निययखित्ते // 59 // तीए असाहियाए संजमरजंमि च द्वविजन्ते / कोहाईहिं रिऊहिं बन्धव का सुखसम्पत्ती ? // 60 // चउसडिसहसरमणीभोगसुहं नवनिहाणसंजोए / अन्भग्गमाणपसरं चएमि कह ? बन्धव इयागि ! // 61 // एवं च चकिवयणं सुच्चा मुणिपुंगवोवि चिन्तेइ / एयस्स भोगगिद्धी सपक्खवाया भवमसाणे // 62 // कह सो सिवपुरमग्गे द्वाविजइ ? पुबजम्मसन्नासे / इत्थीरयणनियाणा जो हारइ अप्पणो चरणं // 63 / / जिणवयणसिद्धमन्तप्पओगसज्झो न एस अम्हाणं / मोगरइसप्पिणीए जं नजद कालदट्ठो व // 64 // इच्चाई चिन्तिऊणं भणियं मुणिणा नरिन्द पुत्वभवे / // 242 // RSONASRAVACANC%CE% Page #256 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 243 // PROG तुमए कयं नियाणं न बुज्झसे तप्पभावेण // 65 // तो अम्हाण पयासो पडिमन्थो तुम्ह बोहणे एसो। आपुच्छिओऽसि पैशुन्ये सम्पइ विहरामो संजमोज्जुत्ता // 66 // भणिऊणेवं विहरइ मुणिसीहो अन्नअन्नदेसेसु / पत्ता कमेण केवललच्छि सिद्धो सुह-12 सुबन्धुसमिद्धो // 67 // चक्कीवि बम्भदत्तो रज्जे रटुंमि भोगरहरसिओ। गिद्धो दिद्धो चिकणअइघिणगुरूपावपंकेण // 68 // काम- मन्त्रिदृष्टान्धोवि य एसो कहापओगेण होइ अन्धो वि / आउखएण गच्छह तो कमसो सत्तमनरए // 69 // भोगेसु रई एवं पावट्ठाणति बनिया समए / सबेहि पयत्तेणं चायवा लहुयकम्मेहिं // 170 // / ब्रह्मदत्ताख्यानकं समाप्तम् / पैशुन्यमपि महदेव पापस्थानं, यत् शून्यं सदाचारेण, स्वीकृतं माहात्म्यपरिहारेण, पूर्ण पापप्राग्भारेण, संघटितं दुर्गतिद्वारेण / यतः-तत्र प्रवर्तते परद्रोहा, समुन्मीलति सन्मार्गव्यपोहः / पैशून्यं हि परिहरणीयं पृष्ठमांसपरिहारिमिः शिवपुरपथपुरिप्रचारिभिः / पृष्ठमांसभक्षिणो हि प्राणिनः पञ्जन्ते करुणारसेन सज्जन्ते रौद्रध्यानतः तामसेन / इहलोकेऽपि पैशुन्यजन्यदैन्याः प्राणिनः त्यामभोगसंभोगरहिताः पश्चाचापिनः पापिन: सुबन्धुमंत्रीव दु:खिता एव जीवितशेषमभिवाहयन्ति / तथाहि पाडलिपुत्ते मोरियवंसे सिरिचन्दनिवपुतो / रायाऽसि बिन्दुसारो निम्मलजसकित्तिवित्थारो // 1 // रजम्मि तस्स मन्ती चाणको परमसावओ विप्पो। बुद्धिविणिज्जियसुरगुरू मइमाहप्पो पसिद्धप्पा // 2 // जिणसासणप्पभावणवणराईकुसुमगुच्छसंकासो / धवलइ जस्स जसोहो सुहापवाहु व भुवणाई // 3 // अप्पडिहयपयावो तेयस्सी दिणमणीवि कालेग / लद्धोदयतिमिरेणं परिभूओ गच्छइ दिगन्तं // 4 // परिममिरकालचक्के सक्काइयाण भवनि- // 224 // IRCRACK अन्यजन्य AHAA5% परमसावओ विष्णालो / रायाऽसि बिन्दुसार कुलता एव जीवितशेषमणिवा Page #257 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरण नृपस्य // 244 // SHOCKCIECENTER वासीण / आरोह अवरोहं दसारया जन्ति जीवाणं // 5 // चाणकस्सवि लद्धे छिद्दे खुद्देण नन्दसक्केण / अह बिन्दुसारराया, बिन्दुसारसुबन्धुसचिवेणं विनत्तो // 6 // देव पसायं न कुणसि अम्हाणं जइवि तहवि हियमेव / वयमिच्छामो काउं निचं चिय सामिपायाण // 7 // विनप्पए तेणेमं तुह जणणी उयरफाडणेणं | चाणक्केणं निहणं नीया अवरं किमिह मणिमो ? // 8 // मिथ्याकोपे अस्सुयपुत्वं सोउं तबयणं पुच्छिया नरिन्देणं / परमत्थमयाणिन्ती जम्पइ धाइवि एमेव // 9 // तो कोवभरकन्तो इन्तं दट्टण | चाणक्यसचिवचाणकं / पिढेि दाऊण द्विओ राया अन्नायपरमत्थो // 10 / उवलक्खिय चित्तेणं चाणक्केणं गिहम्मि गन्तूण / जिण स्याऽनशनधम्मे संदवियं सम्म सयलं नियकुडम्बं // 11 // अत्थोवि कयत्थोच्चिय कुडम्बसयणेसु धम्मकजेसु / विणिओयऊण विहिओ स्वीकारः। समयं नाऊण बुद्धिमया // 12 // चिन्तियमणेणं निउणं इच्छाए महपयस्स एस निवो / पिसुणेण छिद्दकहणा ममोवरि कोविओ जेण // 13 // सो कायवोऽवस्सं मए तहा जीवियं जहा दुक्खं / अणुहवमाणो धारइ रहिओ भोगोवभोगेहिं // 14 // तो तेण निउणमइणा सुरहिदहिं गन्धजुत्तीए / पुडपागपओगेणं निम्मविया सुरहिणो वासा // 15 // पुडबद्धा संडविया मंजूसाए सुलट्ठकडाए। मज्झम्मि भुजपत्तं निहियं लिहियक्खरं एवं // 16 // जो जिग्घिऊण वासे से होही भोगोवभोगलम्पडओ। सो मरणं चिय लहिही सन्देहो नेह कायवो // 17 // मंजूसा ओयरए पिहियदुवारंमि जत्तओ द्वविया / संविग्गो चाणको मन्तियसयणाइयं लोयं // 18 // खामइ सम्मं जिणहरमहिमं काराविऊण सविसेसं / समसत्तुमित्तचित्तो आपुच्छिय जाइ रनमि // 19 // तसपाणवीयरहिए गोकुलगणे करीसकलुसंमि / इंगियदेसंमि द्विओ, पडिवाइ अणसणं विहिणा // 20 // विनाए वुत्तन्ते भणइ निवं बिंदुसारमह धाई / कीस तए मन्तिवरो परिमविओ एस चाणको ? // 21 // एसो हु मूलबन्धो P // 244 // AASARASOILOCA Page #258 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 245 // सत्ये ज्ञाते नृपस्य पश्चात्ताप: पुन:पुनविज्ञप्तिश्च / 393EOCESSOCIAॐॐॐ मोरियवंसस्स वित्थरन्तस्स / तुह पिउणो विय जणओ। जं जणओ सबलच्छीणं // 22 // नन्दस्स कन्दकसणो वसणनवमहणमन्दरगिरिन्दो / पुरिसोत्तमपरिगहिओ सिरीसमुल्लासहेऊ त्ति // 23 // एयंमि मन्तिमंडलचूडामणिकरणिमुबहन्तम्मि / पिसुणवयणेण केणवि परिभवकरणं न गुणहेऊ // 24 // किं पडिकुलं देवं जायं ? तुह देव ! जेण चाणके / कप्पहुमम्मिवि तुमए खिविया कोवारूणा दिट्ठी // 25 // ता वच्छ गच्छ सिग्धं खामसु चिन्तामणिं व पूएसु / चाणकं मन्तिवरं वरयं सरहन्दुजसपसरं // 26 // रायावि भणइ धाइं मह तुमए साहियं जहा माया / उयरस्स फालणेणं निहया एएण सचिवेण // 27 // धाईवि भणइ नरवर! तुह जणणी चन्दगुत्तनरनाहे / विसभोयणं करन्ते वारिजन्तीवि नेहेण // 28 // गिहिय कवलं मुंजइ तोऽणेणं मंन्तिणा लहुं चेव / एईए कुच्छीए जीवो पुत्तोति चिन्ते // 29 // उयरंमि वियारिऊणं गन्माओ नीणिओ तुम वच्छ / विसविन्दूमसिवन्नो तुहुत्तमंगे तओ जाओ // 30 // जइ न करिस्समयं तह तमजीविस्सं कहं ? महीनाह / तह राय बिन्दुसारो तुमं पसिद्धो अओ चेव // 31 // इय धाईए कहिए तूरियं गन्तूण सायरं राया / पच्छायावपरद्धो खामइ बहुविहमिमं सचिवं // 32 // भणइ महत्तम ! न मए परमत्थो कोवि जाणिओ एत्थ / तेण पियामहतुल्ले तुमम्मि कोवो कओ पुजे // 33 // कोवो मायंगो इव सवत्थवि दूरओ विहेयवो। किं पुण गोत्तगरिद्वे दिउत्तमे होइ सन्निहिओ ? // 34 // तुमए चिय रजसिरी पुरिसोत्तमचरिय सच्चयासहिय / विक्कममन्दरमहिए पयासिआ रिउसमुइंमि // 35 // ता तुम्ह विणा एसा कहणु थिरा होइ ? पयइचवलावि / ता बुद्धिसिद्धिकुलहर ! पसीय चाणक एहि पुरं // 36 // अम्हाणं बालाणं अविवेयपराणं पुनरहियाण / होसि परामुहहियओ होऊण पियामहो कहणु ? // 37 // गम्मत्थस्सवि जइ मह जीवियदाणेण अहव जण AAHASRAEGALOCAL // 245 // Page #259 -------------------------------------------------------------------------- ________________ - श्री स्थाने जयन्तीप्रकरणबृत्तिः / // 246 // ओऽसि / ता अहुणा कीस ? तुमं मुश्चसि मह एकयं वालं // 37 // जह फरह जए तिमिरं दिणमणिविरहे चउद्दिसिमिन्ति / अनशनतह तुज्झ विणा संपइ रिउसिविरं किं न पसरेइ ? // 38 // ता ताय मन्तिसत्तम खमसु तुम मज्झ एक्कमवराह / आइवराई तं चिय खमाहरं विति मन्तिवरा // 39 // ता एहि पुरं पाडलिपुत्तं चिरकालपालियं जेण / पुणरवि तिवग्गसाहणपरो जणो सुबन्धुना होइ एकमणो // 40 // चाणको समयन्नू पसन्नचित्तो भणइ निवहुत्तं / मा कुणसु तुमं खेयं सपुनसम्पन्नरजसिरी // 40 // तप्रज्वालितः पुबकयसुकयतरूवरफलाणमिह भायणं जणो होइ / परमत्थो एत्य फुडं निमित्तमत्तं परो होइ / / 41 // ता जइ सुमरसि कारिषासच्चं मज्झोक्यारं कयन्नुओ होउं / परलोयसाहणे मह हवसु सहाओ महाराय ! // 42 // खामियसबजणोहं एकमणोऽहं ऽग्निः तेन पवनसनासो / अहिलसियसग्गवासो तिविहेणं चत्तघरवासो // 43 // चाणेकेण य भणिए वयणे एवंमि बिन्दुसारनिवो / चाणक्यखामित्ता पूइत्ता पुरम्मि जा होइ गन्तुमणो // 44 // भणइ सुबन्धुमन्ती ताव इमं देव मंतिरायस्स | चाणक्कस्स करिस्सं देहे दाहः। महसवं तुम्ह आणाए / // 45 // भवियवयावसेणं रन्ना नो लक्खियं मणो तस्स / दिनाएसो तो सो करह सतोसो महापूयं // 46 // पूइत्ता पच्छन्नं धूर्व उग्गहिऊण अइबहुयं / अंगारो निक्खित्तो करीसमज्झम्मि पावेण / / 47 // कारीसग्गिपलिवियदेहो चाणक्कमन्तिवरसड्डो / भावइ भावणमेसो अइसइसंवेगरसरसिओ / / 48 // देहमि डज्झमाणे नहु दाहो होइ तुज्य इह कोवि / अन्नं इमं सरीरं जीवाओ जैन मुत्तो सो // 49 // सयमवि कयकइयाणं फलोवभोगेण होइ निजरणं / एवं जिणवरवयणं तं भावय जीव ! पुणरूत्तं // 50 // अच्छरियं पुरिए महहियए उदयायलंमि जिणधम्मे / दिणमणिबिंबसगोत्ने गिहमोहो जीव तिमिरोहो // 51 // धना तेच्चिय जीवा बालकुमारा हवन्ति अणगारा। जे सुद्धबंभचेरा दुरून्द्रियसब- Ph246 // CARRUKARNALISANECDRAS RECAUSINESS Page #260 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 247 // 15CROCCACANCE जियवेश // 52 // दोबच्चे परिणीए पियरेहि पराभवंमि अत्थत्थी / देण पराभूओ पराभवं ही अहमकासं // 53 // एसो लिचाणक्यस्य लोहप्पिसाओ भएहि कोहमाणमोहेहिं / जीवक्खयकारणेहिं सहिओ धमेहिं जेयवो // 54 // तेहिं पुणोऽहं महिओ रहिओ शुद्धलेश्या करुणारसेण जीवाणं / खयहेउं चिय घिद्धी दुबुद्धी चेव संजाओ // 55 // सावयकुलंमि जम्मे धम्मो जिणरायदेसिओ हियए / चतुःशरणहा हारिओ मए कह विविहारंभप्पबन्धेहि // 56 // जिणधम्मे कप्पडुमचिन्तामणिकामधेणुसारिच्छे / लद्धेवि मए भवदुह- करणं च। दोगच्चनिमित्तमायरियं // 57 // पंचमहत्वयमारं जे जीवा हुंति वोढुमसमत्था / सावयधम्ममि निरया अप्पारम्भा इमे धमा // 58 / / अजवि न किंपि नटुं सम्मं सम्मत्तमूलगिहिधम्मं / अंगीकरेमि वारसविहं अहं विविहमेएहिं // 59 // अरहन्ता महसरणं / अरहन्ता मज्झ देवया इण्डिं / अरिहन्तकित्तणेणं चएमहं पावगं सवं // 60 // कम्ममलविप्पमुक्काणं सिद्धाणं तहय सरणमावो / तेसिं चेव समक्ख चएमि पावसमारम्भं // 61 // आयरियाइयाणं मुणीण तवचरणकरणनिरयाणं / गच्छामि अहं सरणं काऊण पाववोसिरणं // 62 // धम्मो जिणिन्दमणिओ छजीवनिकायवच्छलो सरणं / पडिवनोऽहं सम्मं तिविहं तिविहेण | जाजीवं / / 63 // एयंमि अणाइए भवंमि विविहाइपावट्ठाणाई / मूढेहिं विहियाई सवाई ताई गरिहामि // 64 // जिणधम्ममि | प्पवन्ने कयाइ कीरन्ति जाणि सुकडाणि / ताई अणुमोएमो समयविहीए पवत्ताई // 65 // इच्चाइ भावणाए दिवोसहिपियसहीए लीलाए / उद्धरियसबसल्लो चाणक्को मोहपडिमल्लो // 66 // एवं धम्मज्झाणे सारयपसरन्तचन्दकिरणोहे / तस्स मणो पइसमयं है। सरं व परिनिम्मलं होइ // 67 // कम्मवणहववाहो पसरइ देहमि तस्स जह दाहो / तह वह सयंसाहो सिववहुसुहसंगमोम्माहो // 68 // तेलोकमत्थयत्या सिद्धा अइरामरा महासत्ता / केवलनाणमणतं पत्ता असरीरिणो धन्ना // 69 // गन्माइयं दुक्खं / 247 // SAGARCASSAUGA45 Page #261 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणवृतिः / चाणक्यस्य देवलोकप्राप्तिः पैशुन्य // 248 // %ECOCIAA%E0% ARSAX जीवाणं होइ किल समग्गंपि / कम्ममलमइलियाणं सरीरसंगेण सबंपि // 7 // ता मज्झवि कणयस्स व तवेण विविहेण कम्ममलडहणे / कल्लाणप्पा कइया अप्पा सबप्पणा भावी // 71 // एवं विसुद्धभावो चाणको मन्तिसत्तमो सड्डो / आराहिउत्तमट्ठो दियलोए सुरवरो जाओ // 72 // सोवि य सुबन्धुमन्ती पयंमि सयवत्तपत्तपरभागे / सिरिघरए उवलद्धे कमेण चाणक्कपासाए // 72 // चिन्तइ एत्थ भविस्सइ हिरनमणिरयणकणयभण्डारो / सुपयत्तपिहियदारो दीसइ जे एस उयरओ // 73 // लोहन्धो सो मज्झे पेहइ उप्पिहियदारए तम्मि / मंजूसं सविसेसं जत्तेणेगन्तसंठवियं // 74 // हरिसभरमरियहियओ ती उम्मुद्दि. याए मझमि / सुसिलिट्टकट्टकम्मं समुग्गयं पेच्छए तयणु // 75 / / उग्घाडियम्मि तम्मिवि पुडयमज्झम्मि सुरहिवासाण / घाणिन्दियसुहयाणं मुई अवणेइ गहिऊण // 76 // गिण्हन्तो तग्गन्धं साणन्दं तस्स मज्झयारम्मि / पेच्छइ सुबन्धुमन्ती पयर्ड लिहियक्खरभुजं // 77 // संभन्तो करकमले भुजं ठविऊण वाइऊणेसो। भावेइ अक्खराई इमाई जो जिंघिउं वासो | // 78 // भोगुवभोगवयारं अजियक्खो न्हाणभोयणाइयं / सेजासणविलयाहिं काही कीणासअतिही सो // 79 // एयाए गाहाए नवरि माणसंमि पुरियाए / उक्कलियाओ धणियं सुबन्धुमन्तिस्स जायन्ति / / 80 // जइ सच चिय एवं तोऽहं चाणकमन्तिणा निहओ। जीवन्त चिय दुहदवजालावलिलीढसबंगो / / 81 // तो अग्याइयवासे पुरिसे अनम्मि कम्मिवि करेमि / हिययट्ठियपरमत्थो भोगोवभोगेहिं सुपरिक्खं / / 82 // इय चिन्तिऊण अन्नं पुरिसं अग्याविऊण ते वासे / भोगेहिं मयं दहुं सो चिट्ठह दवसाहु व // 83 // अवणियकेसकलावो दुरूज्झियतरूणिसंगमालावो / सिंगारसरसभोयणदिवासणसेजपरिहीणो // 84 // दीणो मणमलीणंगो अट्टज्झाणेण पइदिणं एसो / पेसुन्नपावबीयप्परूढदुक्खंकुरूक्केरो / / 85 / / सचिवो सुब कारिसु बन्धोर्दुःखिजीवनं 2 // 248 // Page #262 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 545453 // 249 परपरिवादे सुभद्रा श्वश्रूवृत्तान्तः। न्धुनामा दवजई कम्मनिजरारहिओ / अहिओ जो चाणके दुक्खी जीवह चिरं कालं // 87 // // पैशुन्यकथानकं समाप्तम् // परपरिवादोपि महापापस्थानमिति प्रतिपादयन्ति प्राज्ञाः। यतः शरदिन्दुकुन्दसुन्दरेषु परगुणेषु द्वेषविदग्धतया, स्वस्य च दुर्विदग्धतया, मात्सर्योत्सर्पिसप्तार्चिदग्धतया, सन्मार्गसंचरणमुग्धतयाऽयं प्रवर्तमानः सरित्पूरे प्रवाह इव भिन्दानः क्षमा, | दधानो रजःपटलकलुषतां, प्रतिपदं प्रसरन्नुक्कलिकामिः समूलमुन्मूलयन् स्थर्यगांभीर्यादिगुणग्रामक्षमारूहान्, निवारयन् तीर्थावतारं, प्रकटयन द्विजानामप्यनभिगमनीयतां, नीचनीचस्थानानुसारितया पातयत्यणोरपारे संसारे पारावारे प्राणिनः। ततः ते भ्राम्यन्ते विविधावतग्रस्यन्ते कुप्राहैरितः ततः समाकृष्यन्ते जलजन्तूभिः, दह्यन्ते महोपतापवडवानलेन न लभन्ते पारं, सुचिरमनुभवन्ति दुःखसंभारं / इहापि जन्मनि परेषामसदोषवादतः वारसमुद्रोद्गारतः प्रवर्तते सरस्वतीषु वैरस्य, जायते नीचैः गोत्रानुषंगतः पापपंकपरिणतिः, सुभद्राश्वसुरश्चशूप्रमुखवर्गस्येव सम्पद्यतेऽनभिगमनीयता / तथाहि चंपानामेण पुरी आसि पुरा तत्थ सावओ हुत्था / जिणदत्तो जिणवयणेसु निच्चलो मेरुगिरिगरूओ॥१॥ तस्स सुयासि सुभद्दा पुबज्जियपुत्रपगरिसवसेण / अइरूवसम्पयाए अवि दिति मोहममराणं // 2 // नवजोवणे हि रूढा जीवाइवियारणे असंमूढा / निम्मलसम्मदंसणमणिभूसियसीललंकारा // 3 // जिणरायपायपूयापरायणा समयसारमणवरयं / आसाइय गुरुमूले कमले भमरि व मयरंदं // 4 // दिवा सहीहि सहिया बच्चन्ति जिणहरंमि अमदिणे / तच्चनियमत्तेणं वणिएणं बुद्धदासेणं // 5 // चिन्तियमणेण एसा मणहरसोहग्गरूवलावना / कना परिणिसई लहिही जस्सेह स कयत्थो // 6 // अन्भत्थिओवि SHAS // 249 // Page #263 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 6 बुद्धदासेन श्रावकी जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 25 // परिणीता सुभद्रासती। तेणं अणुरायपरब सेण जिणदत्तो। वियरइ न तस्स धूयं मिच्छदिवित्ति काऊण // 7 // तो सो साषयधम्म तीए लोहेण सुगुरुपयमूले / गिन्हइ पढमं तंमि य, सद्धा सम्मं समुल्लसिया // 8 // जिणदत्तोवि य सेट्ठी जिणधम्मे तस्स निच्चलमणस्स / सयमेव देह कत्र नाऊणं सीलसन्मावं // 9 // अणुरूवपत्तजोगे पाणिग्गहणंमि गुरुसमिद्धीए / उप्पाइ नयरीए साहुकारो चमकारो // 10 // मणिओ य बुद्धदासो वच्छ तए सह इमाए दइयाए / हायबममगेहे जिणधम्माराहणनिमित्तं // 11 // जेण तुह जणणिभइणिपमुहजणो सुगयदसणाणुगओ। पइक्खणविणासवाई असन्तकजोग्गमो निचं // 12 // ता तेसि दिद्विराए पसरन्ते सबदोससमवाए / कह वीयरायधम्मो समाहिणा किन्जए ? वच्छ ! // 13 // जिणधम्मे संपत्ते विधेयक्न्तेहिमुजमन्तेहिं न हु होइ संकिलेसो जह तह हायवमिह होइ // 14 // उक्तं चागमे-धम्मत्थमुजएणं सबस्साऽपत्तियं न कायत्वं / इअ संजमो. वि सेओ वीरजिणो एत्थ दिद्वन्तो // 15 // जिणदत्तेणं भणियं गहियं हरिसेण बुद्धदासेण / अमयं व खीरसायरसमुत्थममराण नियरेण // 16 // पुरिसोत्तमो व लच्छीसहिओ खीरनवमि पासाए / चिट्ठइ सुहासिए तो सुहिओ सद्धिं सुभदाए // 16 // सावि सुभद्दा विहिणा गिहमि जिणविषपूयणं काउं / गच्छइ जिणिन्दभवणे कयसिंगारावि अवियारा // 18 // सुगुरूण पायवन्दणपुरस्सरं समयसारमणुदियहं / निसुणंती सद्धाए गच्छइ संवेगरसपसरं // 19 // तह गेहव्वावारं करूणारसेकमाणसा निच्छ / जइणाए कुणइ सच जणणीए सुद्धधम्मस्स // 20 // अपुल्चनाणगहणे समुज्जया अजवेण संजुत्ता / मुत्ताहलं व अंतो बाहिं परिसुद्धपरिणामा // 21 // सज्झायज्माणपरा गहीरमहुमहुरउचियवाणीए। पियवयणदाणविणयाबजियसजणसयणवग्गा // 22 // इन्चाइ सुगुणसंचयसुमेरूगिरिरायचूलिया तीए / लोए पसंसणिज्जा सुनिचला सीलसंपत्ती AAAAAAA5453 Page #264 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 251 // // 23 // अह ससुरकुले सासुनणंदपमुहाई अंगुवंगाई / इज्झन्ति तीए ईसानलेण पसरन्तजालेण // 24 // ताओ संतत्ताओ लमुनिनेत्रपक्खरिअवाएक्ककरूबरसियाओ। तीए महासईए विन्ति असन्तपि तो दोसं / / 25 // भणइ य भइणीसहिया जणणी पुत्तं पतिततृणाजणमि तह मजा / बभिजए सुभद्दा नामेणं नउण कजेणं // 25 // जेणेसा जिणगेहे चिट्ठ गन्तूण साहपासंमि / चिरकालं पनयनेन निस्संका निरंकुसा कह सई होइ ? // 26 // तो भणइ बुद्धदासो कह दोसो माइ जिणहरे होइ ? / गुरूवंभयारिपासे किं दद्धे हंति पूयरया ?|27|| सोलसमकला ससिणो वहइ कलंक कयावि किं माइ!" किं माइ गुणमईए एयाए जणणि ! दोसोवि?॥२८॥ परिवारेण तो ईमीए उवरिं नो संका माइ कावि कायदा / किं अमियसारणीए विसवल्ली होइ कइयावि! // 29 // एवं च सुभदाए सुभद्रोससिप्पहाए गुणाण संसाए / विहडंति ताण सुवयणचक्काई सुदृघडियाई / / 30 // सासूपमुहा ताओ तीए छिदाणि तयणु परि दत्तः मगति / उच्छलियमच्छराओ विलक्खहिययाओ अणुदियह // 31 // एगमि दिणे साहू तीए गेहम्मि एइ एगागी / निप्प कलंकः। डिकम्मसरीरो भिक्खडा मेरूगिरिधीरो // 32 // वायघसा पडिएणं तिषण पज्झरह तस्स नयणं च / पेच्छइ सच्छा दच्छा तहाविहं तं सुमहावि // 33 // चिन्तइ गीयत्था सा छज्जीवनिकायरक्खणं चेव / साहूण संजमो जो तम्मूलं लोयणं नऽनं // 34 // न विणिस्सइ नयणमिणं अवणिजंते तिणमि साहुस्स / एसो निपडिकम्मो नेयं इच्छइ समुद्धरित्रं // 35 // परिभाविऊणं एवं दाणं दिजंतंमि दक्खाए / जीहग्गेणोद्धरिउं / मुणिनयणाओ तिणं तीए // 37 // अवणिज्जन्ते नयणा तिणमि साहुस्स भालवटुंमि / लग्गो कुंकुमतिलओ सबो सरसो सुभदाए // 38 // दिट्ठो मुणिनिग्गमणे सासूपमुहाहिं दुट्ठरमणीहिं / तो लद्धावसराहिं पयासिओ बुद्धदासस्स // 39 // पेच्छसु नियदइयाए कुंकमतिलयच्छलेण अणुरायं / परपुरिसेहि क॥२५१ / / REACTS Page #265 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / तज्ज्ञात्वा सुभद्रासत्याः सम्यग्वि. चारणा। // 252 // हियए पिंडीभूयं अमायन्तं // 40 // सोवालंभं जणणी भणइ सुयं वच्छ मज्झ वयणाई / पडिहणियाई तुमए दइयासीलपसंसाए // 41 // तं सीलं ससिधवलं कलसंचियसाहुराहुमुहपडियं / पेच्छ तुमं वच्छ इमं संपइ दोसायरं चेव // 42 // दइयाए पयचारं रागन्धो जं न पेच्छसे जुत्तं / तं चित्तं अइमचं जमनकहियं न मन्नेसि // 43 // पुत्चय चचो तुमए कमागओ सुगयसासणे धम्मो / एइए अणुरागग्गहगहिएणं किमिह भणिमो?॥४४॥ किं ? निच्छइयं तत्तं हवेञ्जऽणेगंतवायजिणधम्मे / पयडमिणं तुह दइयाविहडियसीलेण निबडियं // 45 // सुगएण पुण पमाणं नाणं पञ्चक्खमुत्तमवियप्पं / बजत्थकप्पणाए एयाए तं सि मूढप्पा // 46 // जणणीए आलावं घरिणीए पुण सीलधम्मवणदावं / संपप्प तयणुराओ मिलाइ कंकेल्लिसाय // 47 // चिन्तइ य बुद्धदासो असीलया होइ किं सुभदाए ? / जायइ किं दुग्गंधी? कयावि कप्पूरपारीचि // 48 // तीए गुणगिरिसिहरे वजनिवाउ व वइयरो एसो। तो किं अत्थ पक्खवाओ? होजा जेणेह दिवगई // 49 // ही संसारसहावो दावो सुकडाण वियडविडवीणं / ते धन्न चिय जीवा भवनवं जे समुचिना // 50 // रचपि मणो पइणो विलाइ जउगोलयं व जलणेण / इमिणा वुचन्तेणं दक्खा लक्खइ सुभद्दावि // 51 // चिन्तइ पुत्वजम्मोवज्जियकम्मेण उदयपत्तेण / पाविति कलंकाई जीव सुद्धेवि सीलंमि // 52 // किन्तु इमं मह दुक्खं जिणिंदधम्मस्स जं ममाहितो। होइ इह तेयहाणी खणी सबाण दोसाण // 53 // हत्थी जिणिन्दधम्मो महिन्दुविम्बं व इमो निम्मलकलावो। महादोसागमणेणं पयण्डकलंको इमो जाओ // 54 // जिणवयणे आरामे वियसियजसपसरकुसुमसमारो / एएणं परिज्झडिओ मज्झऽववायेण वारण // 55 // ही दुल्लहबोहित्तं वियरइ जीवाण चत्तसंमत् / अइदुस्सहदुहसेनं विहियजिणवयणमालितं // 56 // देवगुरुपूयएणं पंचपरमेद्विमन्तज्झ 15555555545. // 252 / / Page #266 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 253 // 951 द झाणेणं / सिवसुहनिहिलिच्छाए घिद्धी विग्यो इमो जाओ // 57 // एक मज्झ कलंको, अन्न जिणवयणतेयपरिहाणी। संसारसारफलए बेहू पडिया महं ही ही // 58 // किं मज्झ जीविएणं ? रूबाइगुणेहिं संपयाए वा / जिणसासणप्पहावो जाव न सुद्धो महसहावो // 59 // इय भावियपरमत्था गीयत्था साविया सुभद्दा सा / हाया कयवलिकम्मा विहिणा जिण. रायकयपूया // 60 // जइ जिणसासणदेवी जिणिन्दधम्मस्स करेइ उज्जोयं / पारियकाउस्सग्गा तोऽहं भत्तं करेस्सामि // 61 // अमह काउस्सग्गे धम्मज्झाणेण संडिया चेव / परिचत्तभत्तपाणा हाइस्सं जाव जीविस्सं / / 62 // इय काऊण पइन्नं जिणपडिमापायअग्गओ होउं / काउस्सग्गेण छिया तल्लेसा धम्मज्झाणेण // 63 // अह तीए सीलेणं, अक्खित्ता चलिरकुण्डलाभरणा / रयणीए जिणसासणदेवी सिग्धं हवइ पयडा // 64 // भणइ य कीस सुभद्दे सुसाविए एसऽभिग्गहो गहिओ। तुमए साहसरसिए साह सुभद्दे ! मह इयाणिं // 65 // पारियकाउस्सग्गा भणइ सुभद्दावि महुरवाणीए / जिणवयणपहापसरो किजउ सूरो व तिमिरहरो // 66 // सासणदेवी जम्पइ नयरीए सुयणु ! अन्ज चम्पाए / चिट्ठिस्सन्ति पहाए पिहियाई पोलिदाराई // 67 // तो आउलम्मि लोए सनिवे गयणंगणमि उग्घोसो। होही महासईए चालणिघरिएण सलिलेण // 68 // सिचाई तिन्नि वारं एयाई अति उग्धडिस्सन्ति / मुत्तुं तुमं तु नन्ना धारिस्सइ चालिणीसलिलं // 69 // परमेट्ठिनमोकारं किच्चा सित्तेसु तेण सलिलेण / उग्घाडिएसु तुमए दारेसु पभावणा होही // 70 // साहम्मियवच्छल्ले समुजया सीलरंजिया एवं / सासणदेवी भणिउं जहागयं पडिगया झत्ति // 71 // तो साविया सुभद्दा सुहारसेणेव सित्तसबंगा। सज्झायज्झाणपरा अइ. वाहइ रयणिसेसंपि // 72 // अरूणोदयस्मि लोए सुत्तविउ«म्मि पोलिदाराई। अवि उग्घाडणजत्ते पिण्डियाई चेव चिट्ठन्ति 21 कायोत्स र्गस्था सुभद्रोपरि तुष्टया शासनदेव्या शासनप्रभावनोपायः सूचितः। * * * Page #267 -------------------------------------------------------------------------- ________________ % जयन्ती प्रकरणइतिः / जलं // 254 // // 73 / / दारनिरोहे मोहे सम्बाहो होइ जीवलोगम्मि / उप्पाउत्ति नरिन्दो पहाणलोएहि परियरिओ // 74 // धूवकडुच्छुय- नगरीद्वारोहत्थो अल्लपडो गयणमण्डलाभिमुहो / कुसुमंजलिबलिक्खेवं काऊणं भणइ विणएणं // 75 / / जो इत्थ कोइ देवो कुविओ द्घाटनाय केणावि कारणेणऽम्ह / सो काऊण पसायं अम्हाणं खमउ पणयाण // 76 // एवं नरिन्दमणिए गयणे वाया समुच्छलइ इत्थ / | सुभद्राकरनरवर ! महासईए करंमि जइ चालिणी उदयं // 77 // धारइ तेणऽभिसेए सीलवईए कयंमि दाराई / चिक्कारकारयाई लीलाए स्थचालन्यां उग्घडिस्सन्ति / / 78 / / पइगेहं नयरीए सइपरिक्खं करेइ तो लोओ। नहु कावि तत्थ रमणी धरइ जलं चालणीखितं / / 79 / / हल्लोहलो पयगृह तो गहकल्लोलसायरो लोए / मुहचन्दचन्दिमाए कजलकलुसत्तमुवणिन्तो // 8 // वित्तन्तेणं तेणं सूरस्स स्थितम् / निवस्स दुद्दिणेणेव / छाइजन्ति खणेणं तेयपयावा पसरिएणं / / 81 // एत्थन्तरे सुमद्दा दिणमणिमुत्ति व कंतिरूइरंगी। वियसियमुहारविन्दा महुरझूणीममरतरूणि व // 82 // सासूहुत्तं जम्पइ सम्पइ काऊण जणणि ! सुपसायं / मंपि परिक्खसु चालणिसंडियसलिलेण करकमले // 83 // तीए झडत्ति वुत्तं मुणिमुहसंकन्तघुसिणतिलएण / सुपरिक्खयाऽसि भद्दे ! फालेण व दिनतेएण / / 84 // तो तीए मुहरायं निम्मायं ललियधीरसंलावं / सोऊण बुद्धदासो चिन्तइ सम्म सई एसा / 85 / / भणियं च जीवलोए निस्संका धीरवयणविन्नासा। सच्चरियच्चिय जीवा पावा सव्वत्थ संकिल्ला / / 86 / / एवं भाविय तत्तो नियजणणि भणइ सोऽवि निस्संक। माइ परिक्खा किजउ अत्तवहूए य किमजुत्तं ? // 87 // जइ कहवि दिवजोगा धारिस्सइ माइ! चालणीसलिलं / तेणं पक्खालिस्सइ कलंकपंक समग्गंपि // 88 // अहवा अन्नाहि समा माइ!* इमा हवउ नयरिरमणीहिं / ता सबहा परिक्खह सुपसना होउ मझुवरि // 89 // सयणजणेणवि भणिया तीए सासू सम- 6 / 254 / / Page #268 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 255 // तेन प्पए तयणु / चालणिमेसावि करे धारइ हियए य नवकारं // 90 // सासूवि खिवइ सलिलं मंगलपूओवयारसोहिल्लं / सीलं व हाइ तीए निच्छिदं चालणीएवि // 91 // गयणमि समुच्छलिओ जं इइ सुभद्दा महासई एसा / पुप्फबरिसेण सद्धिं उग्धोसो || जलेनोदुन्दुहिसणाहो // 92 // तो जणियचमुक्कारो एइ नरिन्दोवि पउरपरिवारो / अग्घजलिं पयच्छइ महासईए सुभदाए // 93 // द्घाटितानि विनवा महाराया माया तं होसु नयरिलोयस्स | दुहियस्स सुहं दिन्ती उग्घाडिन्ती दुवाराई // 94 // उप्पायनिरोहेणं द्वाराणि भावियदोसेण कलुसिया नयरी / तुह सीलेण सुभद्दे ! ससिणा धवलिकया अहुणा // 95 / / तुमए जिणिन्दधम्मो एयमि महतीच जयंमि सरवरे भद्दे ! / कमलायरो महासइ ! वियासिओ सीलदिणमणिणा // 96 // पयडियसिवपुरसरणी जयसि तुम सील शासनसल्लईकरिणी। गुणरयणरासिधरणी जिणसासणकाणणे हरिणी // 97 // एवं थुणिज्जमाणा साणन्दनरिन्दजणसहस्सेहिं / प्रभावना पुवपओलिदुवारे नन्दीनाएण सा एइ // 98 // नाणप्पमुहतिगेणिव सिवपुरदारं व तयणु विमलेण / चालणिजलचुलु जाता। एहिं तिहिं सित्तं उघडइ दारं // 99 // गयणयले देवेहिं धरणियले माणवेहिं साणन्दं / अग्धंजलीसणाहो जयजयकारो कओ तीए // 10 // सबोवतावसमणो भवियणकुमुयाण रोहिणीरमणो / तेलोक्कदिनसम्मो कप्पडुमो जयउ जिणधम्मो | // 101 // जत्थेरिसी सईओ निच्चलसम्मत्तनिम्मलमईओ / देवकयपाडिहेरा सुसाविया संति गंभीरा // 102 // अन्तो बहिपि विमला जीवा मुत्ताहलं व जे हुन्ति / छिद्देवि ताव कहमवि गुणेहि परिपूरिए लोगे // 103 // हियए करेइ धरणं अहोनिसं एत्थ जह सुभदाए / देववियनग्याए महासईए महग्याए // 104 // उक्किट्ठसिंहनाए पइक्खणपसरन्तदुन्दुहिनिनाए। 8| एवं दक्षिणपच्छिमवारुग्घडणेवि संजाए // 105 // भणइ सुभद्दा अन्ना जा कावि महासई हवइ एत्थ // सा चेवोग्या- 18 // 255 // ॐCARROTARA Page #269 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मायामृषावादपापस्थानके कटक्षपको दाहरणम्। डिस्सइ चउत्थपोलीदवारंपि // 106 // एवं परपरिवाओ जाहि कओ ताण दीवयसएहि / दोसागमकलुसाई कहमवि न जयन्तीजयन्ती-II महादीसति मुहाई दीसन्ति // 107 // एयं पावट्ठाण परपरिवायं मुणिन्तु जे जीवा / न कुणन्ति ताण भई होइ सुभद्दा व माणेण // 108 // प्रकरण ।परपरिवादकथानकम् / वृतिः / जिनप्रवचनक्षीरसागरावगाहव्यासक्तिविवेककौस्तुभगमस्तिस्तोमप्रकाश्यमानहृदयभोगैः हृषीकेशः परमर्षिभिः प्रतिपाद्यते मायामृषापि प्रकर्षप्राप्तं महापापस्थानं / अतः स मायामृषावादो समक्षभिक्षुवेषधारितया, निसर्गसिद्धशरीरकृशतया, दुष्कर्मे॥२५६॥ न्धनदहनकृशानुप्रतिमतपश्चरणकरणप्रख्यातिकारितया, विप्रलब्धभक्तिभाजनमहाजनद्रव्यापहारितया खरतरोषरक्षितिरिवाऽप्रभवः सुकृतबीजांकुराणां, पातालमिवावासस्थानं महापापासुराणां, क्षेत्रमिव क्षत्रप्रदानाद्य( ऽवम )क्षत्राणां, सृष्टिरिव प्रथमा दुरन्तदुःखदानसत्राणां, केदारभूमिरिव विषादविषमविषकंदलानां, अग्रानीकमिव महामोहमहीपतिदलाना, चाणक्यबुद्धिरिव कूटयंत्राणां, गर्दास्थानं सर्वास्तिकवादितंत्राणाम् / अनया हि विप्रलब्धा मुग्धाःप्राणिनः सत्यसंकल्पेऽपि विशुद्धब्रह्मचारिणि कलिमलक्षालनगंगावारिणि तेजस्विनि तपस्विनि न विश्वसन्ति / यतः-वियसियपउमे न विससइ तारयपडिबिम्बसंकिरो भमरो। इयरजणविप्पलंभे सुयणेवि जणो न पत्तियइ // 1 // इहलोकेऽप्यनेन त्रिग्राममध्यवासिकूटक्षपकोऽयोरशिव इब पापतः प्रकटीभूतदम्भः प्राणी प्रामोति विचित्रां विडम्बनाम् / तथाहि उज्जेणीनयरीए रिद्धीए सग्गपाडिसिद्धीए / ससिमूलसूरमंगलनिवासपुहवीपसिद्धीए // 1 // आसि य तत्थ माइणपुत्तो | PJ दोसाण मन्दिरं कुडो / नामेणाऽघोरसिवो जणोवतावी हुयासो व // 2 // माइन्दजालकूडप्पओगमोहन्धलो य दवाई / अब % A2% AKAR RJ // 256 // Page #270 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 257 // हरइ तेण नयरीजणेण विनायतत्तेण // 3 // निवासिओ दुरप्पा गच्छइ देसन्तरं मिलइ तत्थ / विविहविडाणं जम्हा सरिसा सरिसेहि रजंति // 4 // उक्तंच-मृगा मृगैः संगमनुव्रजन्ति गावश्च गोभिः तुरगास्तुरंगैः / मूर्खाश्च मूखैः सुधियः सुधीभिः तपस्विनः समानशीलव्यसनेषु सख्यम् // 1 // इहलोयपडिबद्धा गिद्धा भोएसु तेण ते भणिया / होमि अहं परिवायगमुणी तवस्सी मायामृषातओ तुम्हे // 4 // कुणह पसिद्धिं लोए एस मुणिन्दो महातवस्सी य / नाणी जाणइ सवं मासक्खमणेण पारेह // 5 // तवयणे वादे पडिबन्ने गामत्यमज्झभायमह वासी। चिट्ठइ रुक्खकिसंगो परिवायगवेसदंभेण / / 6 / / उक्तंच-निमीलयन्ति नयने शोषयन्ति | प्रकटिते तनुव्रतैः / दम्भारम्भेण वर्तन्ते लाभपूजायशोर्थिनः // 7 // लोयग्गे ते वि विडा तस्स पसंसं कुणन्ति एस मुणी / जंगम- ताडनतित्थं मासक्खवणेणं चैव पारेइ / / 8 // आउट्टो तो लोओ ठगतवस्सिस्स तस्स भत्तीए / परमायरेण पूर्व महारिहं कुणह तर्जनादि अणुदिवसं // 9 // विनवइ जणो अम्हं गिहाई तुह पायपउमपूयाई / हुन्ति मुणिराय ! किजउ तत्थागमणेण सुपसाओ // 10 // आहूओ सो तेसिं गिहागओ विहियविविहसम्माणो / धम्मत्थियलोएणं दंसियनियविविहसम्भावो // 11 // तेसि विडाण प्राप्ति पुरओ कहा जणाणं गिहेसु गिहसारं / अवदारं दारं वा भंडारं संधिकट्ठारं // 12 // रयणीए तेहिं समं खत्तपयाणेण मुसइ सबस्सं / एवं वच्चइ कालो मायामोसेण दोसेण // 13 // मायामोसे पावट्ठाणे सेसाणि पावट्ठाणाणि / जायंति जह अजिन्ने जियाण रोगा समग्गावि // 14 // एगमि दिणे खत्ते पत्ते एगमि ताण चोरंमि / तजिन्तेणं तेणं निवेइए वइयरे तम्मि // 15 // से तवस्सी निग्गहिओ सहेव सोहि तेहिं चोरेहिं / निन्दिजन्तो तजणताडणपमुहाई दुक्खाई // 16 // अणुभविऊणं सुइरं रूद्दज्झाणेण दुग्गई पत्तो / कूडतवस्सी मायामोसेणं पावट्ठाणेणं // 17 // इहलोयकडा कम्मा उग्गा D257 // Page #271 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्ती मिथ्यात्व शल्यपापस्थाने कण्डरिकोदाहरणम्। तिः। 4 // 258 // 4 इह चेव दुक्खमुवणिन्ति / जह हुन्ति केवि तरूणो फलया तबरिसिया चेव // 18 // पुनपि उक्कडेणं भावेण समजियं हवइ फलयं / रजं सुपत्तदाणा पत्तं जह मूलदेवेणं // 19 // तो सुकयदुक्कयाणं नाउं फलमुक्कडाणमिह चेव / सुकयं | चिय कायवं भव्वे माणुस्सए जम्मे // 20 // जं दुलहो सुकुलोग्गममाणुसजम्मो जयम्मि जीवाण / तम्हा पावट्ठाणं सवं हेयं पयत्तेणं // 21 // मायामृषावादपापस्थानम् / अनादिकालप्ररूढव्यूढकन्द इव संसारवल्लीवितानस्य, प्रचंडपवनप्रेर्यमाणत्वासारवारपरस्परसंघर्षसमुच्छलितदावानलज्वालाकलाप इव परिपचेलिमागण्यपुप्योपलभ्यस्वभावस्वर्गापवर्गशर्मसंपत्तिफलदायिसम्यग्दर्शनोद्यानस्य, विधन्तुद इव | यथावस्थितवस्तुतत्वबोधौषधीशमंडलस्य, क्षमाधरप्रसारितसत्पक्षछेदकतयाऽवतार इवाऽऽखंडलस्य, देवगुरूप्रतिकूलप्रतिपत्तितः शक्रबांधव इव, पुण्यपात्रदानवारित्वतः पुनर्माधव इव, केसरिकिशोर इव मार्गप्रतिघातस्य, प्रदोष इव प्रतिकलसमच्छलदवहालतमसंघातस्य, हेतुरिवाऽविकलः संसारपारावारस्य, कारणमिव प्रथमं विपर्यासस्य, मिथ्यादर्शनपरिणामोऽपि महापापस्थानमिति / सति हि तस्मिन् प्राणीनां मनसि वाससीव तीव्रतरप्रथमकषायामिषंगतः संपद्यते न सम्यगगुरूभक्तिरंग:. प्रादभवति कृष्णलेश्यानुषंगः, दूरीभवति सुगुरुसंसर्गः। तदुदये कथमपि प्राप्तायाः सर्वविरतेर्भवति भंगः, प्रवर्तते रौद्रध्यानं. कंडरीकमुनिरिव प्राप्यते नरकस्थानं / तथाहि अवरविदेहे पुंडरिगिणी पुरी तत्थ पयडियपयावो / रायासि पुण्डरिओ रिउकुलकन्तारघणदावो // 1 // कण्डरिओ %ASALA5% 258 // Page #272 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 259 // 5+++ स्थबिर ACCU गुरुणां + + लहुमाया जुवराया रूवसंपया कामो / नवजुवणामिरामो तस्साऽऽसी जणमणारामो // 2 // नाएण विक्कमेण य तिवग्गसाहणपराण दोन्हंपि / रजसिरिपालणेणं सुहेण अणेहम्मि गच्छन्ते // 3 // अप्पडिबद्धविहारा सुयसायरपारगामिणो गुरूणो / बहुगच्छपरिवारा समोसढा बहिरूजाणे // 4 // तेसिं आगमणेणं सुरूदएणेव निहयदोसेण / राया सिरिनिवासो पुंडरीओ होइ सवियासो॥५॥ जुवराएणं सद्धिं तेसिं पयकमलवन्दणाहेऊ / गच्छइ सबिड्डीए वन्दइ तिपयाहिणीकाउं॥६॥ उचियद्वाणनिसन्नो तएक्कचित्तो सुणेइ धम्मकहं / अमियरसं व पियन्तो अवगाहन्तो सुहसमुदं // 7 // सुगुरूण देसणाए दिणमणिकिरणावलिसणाहाण / अवसरइ मोहनिदा निमि सिरिपुंडरीयंमि // 8 // तो एस महाराओ महुयरझंकारमहुरवाणीए / विनति थेराणं सुगुरूणं कुणइ पडिबुद्धो॥९॥ तुम्ह वयणऽञ्जणेणं भयवं अम्हाण नाणदिट्ठीए / संसारस्स सुरूवं पयर्ड चिय सम्पयं जायं // 10 // संसारे कन्तारे भयवं अक्खेसु पत्तपसरेसु / विषयामिलासरक्खसघत्था जीवा परिभमन्ति // 11 // पाविन्ति दुहसयाई चउरासीजीवजोणिलक्खेसु / उप्पन्ना पुणरूत्तं पारं न लहन्ति संसत्ता // 12 // पहु तुम्ह वयणमन्तप्पहावसरेण दलियमाहप्पा / विसएसुं अभिलासा अवकन्ता रक्खसी दूरं // 13 // अप्पवसोऽहं अहुणा रजं चइऊण तुम्ह पयकमले / फुल्लन्धुय व लीणो आसाइस्सामि चरणमहुं // 14 // तत्तो गुरूहि भणिओ अहासुहं मा करेसु पडिबन्धं / नमिऊण तओ राया नयरिं पञ्चागओ झत्ति // 15 // जुवरायं तह भायं मणइ तओ वच्छ इच्छसु इयाणि / रजसिरिं परिपालय जेणाऽहं निक्खमिस्सामि // 16 // पडिभणइ कण्डरिओ रजसिरिं चयसि देव! कीस तुमं? | नरयदुहाणं भीओ जम्पद इय पुण्डरीओवि // 17 // तो किन वल्लहोऽहं ? तुम्हाणं देव नरयदुहहेउं / तं मह दिजइ रजं सावजारम्भसंरम्भ देशनाश्रवणे पुण्डरिकनृपस्य दीक्षाऽमिलापः। + + +++ +++ // 259 // Page #273 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणवृतिः / पुण्डरिकनृपाज्ञामस्वीकृत्य कण्डरीकेन गृहिता दीक्षा / ICICSIR GARH // 18 // ता रना पडिवुत्तं जुत्तं तुह वच्छ जुवणारम्भे / रजं चिय मज्झ पुणो पवजा परिणयवयस्स // 19 // परिपालिऊण रजं तुमंपि पच्छिमवयम्मि पञ्बजं / गिण्हन्तो समयन्नू पसंसणिज्जो जए होसु // 20 / / जुबणवयंमि गहणे होइ कहवि जइ मोहो / भवियवं संसारे तो कन्तारे दुरूत्तारे // 21 // ता वच्छ मह इयाणि उत्तिमपुरिसत्थसाहणसहाओ / पडिवजसु वयणमिणं होसु इह तं महाराओ // 22 // एवं पनविओवि हु जुवराया भणइ देव रायसिरी / परिणामदारूणेसा कह गिजउ ? जाणमाणेहिं // 23 // तारुन्नेवि अरने कह मोहो होइ ? सत्थवाहेसु / सुगुरूसुबल सुं सिवपुरपहपयडनाणेसु // 24 // संसारभओबिग्गा जे जीवा हुन्ति सुगुरूपयलग्गा / तेसिं चायपरिणामे वयपरिणामो कई नेव ? // 25 // ता ताय सबहाहं मोहमहारायमाणनिद्दलणो। चउरंगवलसहाओ सिग्घ चिय होमि मुणिराओ // 26 // रायावि पुण्डरीओ जुबरायविणिच्छयं मुणेऊण / कारावइ अइगरूयं निक्खमणमहूसवं तस्स // 27 // पडिवनचरणभारं जुवरायं कण्डरीयमुणिवसह। रोमश्चश्चियगतो भणइ निवो वग्गुबग्गूहि // 28 // सिवपुरपहम्मि पत्थिय जयसि तुमं धीर धवलगुणगाम / सुगहियनाम सुगई अक्खलियचरणेण तं लहसु // 29 / / पाएसु चिय लीणो होऊण गुरुण रोहणगिरीण | नाणाइरयणरासिं लहसु रयं दूरमवणिन्तो // 30 // जइयत्वं समिईसुं तुमए जत्तेण सुदिढसत्तेण / निजिणियमोहराओ जेण जए होइ जसवाओ // 31 // उबवूहिऊण एवं नयरं पच्चागओ ही राया / सुगुरूहि सह विहरइ रायरिसी कण्डरीओ य // 32 // मूलगुणेहिं पसरइ खमाणुबंधेण संवरेणेसो / सुयखन्धाभोगेणं उत्तरगुणसाहुसाहाहिं // 33 / / दसविहसमायारीसुपत्तपरिवारपत्तसच्छाउ / जसपसरकुसुमगुच्छो लहइ रिसी कप्पत्तरुसोहं // 34 // कालेणं गीयत्थो सुत्तत्थसमुदपारगो जाओ / सुगुरूहि समं कमसो विहरन्तो एइ नयरीए // 35 // // 260 // | // 26 // Page #274 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 261 // SAM%25 उजाणपालएणं रहसभरोभिन्नबहलपुलएणं / वद्धाविओ नरिन्दो समागओ कण्डरीओत्ति // 36 // तस्स पयच्छह राया सभृसियं पारिओसियं दाणं / कारागारविसोहणपमुहमहं कारइ पुरीए // 37 // तत्तो सबिड्डीए गच्छइ गुरूपायवंदणनिमित्तं / मणसा समुबहन्तो परमाणन्दं अणणुभूयं // 38 // पंचविहाभिगमणेणं ओयरिओ हत्थिरायखन्धाओ। आलोयकयपणामो राया बद्धंजली हिट्ठो // 39 // तिपयाहिणीकरेउं पणमइ भालयलनिलियधरणियलो। सुगुरूण पायकमलं तिगरणसुद्धण भावेण // 40 // अज्जऽम्ह तुम्ह पहुपयलग्गाणं सुगुरुदिढिदिट्ठाणं / सो वि दोसरासी दूरपवासी धूवं जाओ // 41 // तुम्हाण पायअरूणप्पहाहि दोसावहारसूराण / गुणचक्काण सहेलं जं मेलो होइ कि चुजं // 42 // सुहसायराण सुहगुरू तुम्ह समीपंमि द्वाणपत्ताण / सुमणोवियाससहला वुड्डी रूक्खाण व जियाणं // 43 // इचाई पुंडरीओ राया सुगुरूण संथवं काउं / आपुच्छिऊण वन्दइ महामुणिं कण्डरीयंपि // 44 // जिणिऊण मोहरायं धीरत्तए विक्कमेकरसिएणं / पवजारजेणं सुहसवंसं जए पचं // 45 // गुरुगिरिपायनिवासे तुमए मुणिसीह कामकरिदलणे / मुत्तासिरि व दिसिदिसि पयासिओ कित्तिवित्थारो // 46 // ता सबहा तुम चिय नियकुलगणगयणमि चन्दोऽसि / सोहसि तारयमुणिमझगओ संपुनवित्तधरो // 47 // एवं पसंसिऊणं राया सिरिकण्डरियरायरिसिं / भणइ सरीरं तुम्हं, किसं सरोगं च पेच्छामि // 48 // ता एहि मज्झ गेहे, विज्जु व इडेहिं एसणिज्जेहिं / पत्थोसएहिं किजइ, जेण चिकिच्छा लहु तुम्हं / / 49 // लुक्खो देहो तुम्हं घणरसपत्थोसहेहिं जं होही / सवंगपल्लविओ उवचियखन्धो सुहच्छाओ // 50 // आएसेण गुरुणं नयरीमज्झमि | सायरं नीओ / रना जुवरायारिसी विजाणं दंसिओ तयणु // 51 // तो नायनियाणेहिं विविहविहाणेहिं सबहुमाणेहिं / पुनरागतेगुरुणा सह | कण्डरिके नृपेण कृतो महामहोत्सवः कण्डरिकदेहचिकि त्सा च |कारिता। A5%25955 SALA // 261 // Page #275 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बपन्तीप्रकरण वृतिः / // 262 // धनंतरिसरिसेहिं सिग्छ चिय दिन्नमारोग्गं // 52 // गिद्धो सो रायरिसी महुराहारेसु दिवसेजासु / विहरन्तेसुं गुरुसु मन्द- पुण्डरीक मणो लक्खिओ रमा // 53 // मणिओ य तं महायस धन्नो सुगुरूण पायकमलंमि / फुल्लन्धय व लीणो सुयमयरन्दं सया नृपवचपियसि // 54 // अवरावरपणयमहानरिंदमणिमउडकिरणकब्बुरियं / तुह चरणजुयं संसइ जयंमि मुणिराय ! रायतं // 55 // नाद् एयंमि गच्छगहणे तुमंमि मुणिसीह संचरन्तमि / मयकलहवियारेणं भवियर होइ रेण // 56 // सच्चपइन्ना गरूया उत्तम- दिगुरुणा सह कुलसंभवा भवन्ति त्ति / एसा जए पसिद्धी तुमए सच्चीकया धीर ! // 57 // नियकुलकमलदिवायर ! विहरसि तं जत्थ कण्डरीकजत्थ सुपयावो / न हवइ तत्थ पओसो तमभरपोसो किमिह चोजं? // 58 // सुदिद्वगुरूपक्खवाओ दियराओ कहवि तं न बद्धोऽसि / हिययजिणगुरुवहणो बन्धवमोहेण पासेण // 59 // पवणो व अपडिबद्धो अवरावरविसयदगमणोवि / अम्हाण विहारः। बोहणत्थं इत्थ पुणो दंसणं देज // 60 // इच्चाइयवयणेहिं गच्छ। सो कण्डरीयमुणिवसहो / चोइजन्तो पवयणसारेहिं अन्नदेसेसु // 61 // दुक्रतवचरणेणं तिविहेणं कण्डरीयरायरिसी / निप्पडिकम्मो जाओ कमा किसीभूयसवंगो // 12 // पवञ्जागहणओ तस्स वसंतस्स गच्छगहणंमि / गुरूमूलसुयरखंधे सज्झायज्झाणपुप्फफले // 64 // वरिससहस्सन्ते सहयारवणम्मि मंजरिजन्ते / रिउरायमि वसन्ते संकन्ते सबजियकन्ते // 65 // पसरन्ति चच्चरिओ वणे सुज्झंकारमहुरभमरीओ / कोइलकलावकलकलरमणीयउजाणराईसु // 66 // उद्दामकामकामिणिचरणपहारेण डोहले पुने। किंकिल्लितरू सोहइ वियसियसुमणाणुभावेण // 67 // कुरूवयवच्छा विलयापरिरंभारंभसे यसरस व / सोहंति कुसुमनिविडिरमयरन्दामन्दसुन्देरा // 68 // उम्मत्ततरूणिमयरसा गंडूसा सायरेण कोरकिओ। जंपइ बउलो तेसिं परिमलमिलियालिझंकारो // 69 // गन्धोदएण सिचा P262 // Page #276 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 263 // चम्पयपन्तीवि फुल्लसिहरग्या / कुंकुमच्छडामिसेया पयवी व उविन्तमयणस्स // 70 // तिलयदुमावि रमणीसकामदिट्ठीहिं अमयबुद्धीहिं / सोहंति बहलपुलया उम्मीलियकुसुमपम्भारा // 71 // विरहतरूणोऽवि पंचमराए गीयंमि पुष्फसंभारा / महुयरवच्छलेणं लीणं वीणं च वायन्ति // 72 // विसयाहिलासरसिया एवं तरूणोवि हुन्ति महुमासे / विलसन्ति य नायरया सद्धिं तरूणीहिं कीलता // 73 // अम्हं चेस किलेसो संसयदोलागयंमि परलोए / साहीणा रायसिरी चत्ता ही मोहमाहप्पं // 74 // अज्जवि न किंपि नटुं रजं लहिऊण भोगललियंगो / अक्खलियपयावपसरो सुहेण चिट्ठामि अणुदियह // 75 // चारित्तमोहराओ वसन्तमासच्छलेण पसरन्तो / खोहयइ गयमाहप्पं एवं निवकण्डरीयमुणिं // 76 // मिच्छत्तनरिन्देणं अणन्तकोहाइबलसमग्गेणं / पउरगुणरयणपुग्नं भग्गं संजमपुरदुग्गं // 77 // गच्छाओ निक्खन्तो विच्छाओ तयणु तावसन्तत्तो / जुवरायकण्डरीओ मुणिवरवेसो पुरि पत्तो / / 78 // उजाणपालएणं विनतो पुण्डरीयनरनाहो / चिदुइ जुवरायरिसी एगागी देव उजाणे // 79 // सोऊणेवं राया चिन्तइ गुरुगच्छनिग्गओ एसो / ओहावणाणुप्पेही महभाया कण्डरीयमुणी // 8 // परिमियपरिवारेणं तमहं गन्तूण ताव पेच्छामि / नाउण तस्स चित्तं उचियं तं करिस्सामि / / 81 // इय चिंतिऊण गच्छइ उजाणे पुण्डरीयनरनाहो / पेच्छइ दुवासीणं तं तरूसाहोवहिं तत्थ // 82 // छज्जीवकायकरूणावल्ली विसयाहिलासजलणेण / मन्ने समूलदड्डा परिणयचारित्तफलफलिया // 82 // उवएसाणमजोग्गो एसो भोगाहिलाससप्पेण / दट्ठो संजमजीवियमुक्को चुक्को जिणाणाओ // 83 // पावपसचे चित्ते धम्मकहा सबहा न | गुणहेऊ / चेले नीलीरंगे कुंकुमराओ हवा किंवा ? // 84 // अन्यच्च-अणुवट्ठियस्स धम्म माहु कहिजाह सुट्टवि पियस्स / मनपरिणाम: कण्डरीक| उद्यान | समागतः परीक्षितः पुण्डरीकेन। // 2 Page #277 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणपृतिः / // 264 // मा ॐ विच्छायं होइ मुहं विज्झाणऽग्गिं धमन्तस्स // 85 // अहवा-जो जत्तियस्स अत्थस्स भायणं तस्स तत्तियं होइ / बुढेवि | पुण्डरीकदोणमेहे न डुंगरे पाणियं हाइ // 86 // तवतिवरसावजियवयाई कल्लाणकन्तिकलियाई / विसयाहिलासफुकामिनेणाणेण नृपेण तद्हरियाई // 87 / / अहवा सवे जीवा सकम्मफलभोइणो हुन्ति / सयमेवागयसंजमसिरिं वरिस्सामि अहमेयं // 88 // इय वेषं गृहीचिन्तऊण राया पुच्छइ तं कण्डरीयजुवरायं / किं भोगसमीहा ते ? तुसिणीए चिट्ठए सोवि // 89 // मउडाइअलंकारं स्वा स्वीसपि समप्पिऊण तस्स निवो / रयहरणाइयमुवहिं गिन्हइ सयमेव कयलोओ // 90 // गुरूकुलवासे नंदणवणम्मि सुमणो. कृता दीक्षा वियासरमणीए / होउ रूई मह निच्चं नाणाइफलोवलंभम्मि // 91 // भवगिम्हतावहरणे दक्खापाणोवमा दुविहसिक्खा / कण्डरीकश्च सुगुरूण पायमूले आसाइबा मए सवा // 92 // छजीवकायरक्खणसारे संजमभरम्मि धुरधवलो / गुणरासिसम्पउत्तो गणंमि क्रूरपरिणाहोक्खामि मुणिवसहो // 93 // संवेगभावियप्पा गुरूमूले पुंडरीयरायरिसी। अचिरेणं संपत्तो इच्चाइमणोरहारूढो // 94 // | मेन सप्तमी मउडाइअलंकरणो इयरो पुण कण्डरीयनरनाहो / अत्थाणम्मि न सोहइ नेहविहीणो जह पईवो // 95 // न नमिजइ साणंद नरकं भट्ठपइनोति रायलोएण / कोवपिसायग्घत्थो परिभावह रूदज्झाणत्थो // 96 / / एएसि निवाईण मज्झ पणामे अणुज्जमन्ताणं / गतः। संहारेण करिस्सं अन्ननरिन्दाइजणसंगं // 97 // एवं भीमो होउं एसो संकन्तकिन्हलेसोवि / विच्छाओ अरइच्छाओ मुश्चइ अस्थाणमह भुत्तुं // 99 // अइमेतं आहारं गिन्हइ अइसरसमऽप्यजस्ठग्गी / तवचरणखीणदेहो गिद्धो च्चिय भवमसाणम्मि | // 100 // पढमिल्लकसाएणं उम्मीलियमोहणिजेण / पढमगुणट्ठाणेणं परूढपावदुम्मालोओ // 101 / / अइदारूणदाहेणं | डज्झन्ते आउतरुवरे सिग्धं / अइकूरपरिणामो बन्धइ नरयाउयं दीहं // 102 // मरिऊण कण्डरिओ अपयट्ठाणम्मि नरयवा- 8 Page #278 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 265 // AA%EC अष्टादशपापस्थानकफलनिरूपणम् / सम्मि। तित्तीससागराऊ उप्पनो नारयतेण // 103 // सुगुरुसमक्खं संजमलञ्छि निवाहिऊण परितुह्यो / सुकयत्थं ममन्तो अप्पाणं पुण्डरीयरिसी // 104 / / जियकोहमाणमाओ गुरूण सिक्खागहमि अपमाओ / निज्जियलोहपिसाओ गीयत्थो सो लहुं जाओ // 105 // अह सुकुमारसुहोचियदेशे छट्ठमाइतवच्चरणो। अणुचियलुक्खाहारो समूलरोगाउरो होइ // 106 // मेरूगिरिधीरचित्तो तत्वो सो पुण्डरीयरायरिसी / अप्पेणवि कालेणं आराहियसुद्धसामन्नो // 107 // सुपसनो अविसनो धम्मज्झाणम्मि लीयमाणमणो / तित्तीससागराऊ सबढे सुरवरो जाओ // 108 // // कण्डरीककहाणकं सम्मत्तम् / / एएहिं अट्ठारसपावट्ठाणेहि कम्मपयडीओ। बन्धन्ति सिढिलबन्धा धणियं सुदिढेण बन्धेण // 1 // अप्पप्पएसा पुण बहुप्पएसनिचयाउ सञ्चन्ति / मन्दणुभावा तिवाणुभावा वन्धेण अञ्जन्ति // 2 // लहुकालठियाओ बहुकालद्विइत्तणेण ट्ठाविन्ति / जीवा जयन्ति ? ततो अहकम्मलेवो गुरू होति // 3 // पावलेवलिया दुहजलभरिया भवन्धकूवम्मि / बुडन्ति अहो उड्डगमणसहावावि तुम्ब व // 4 // एयाए पण्हुत्तरवाणीए जिणवरस्स वीरस्स / वणवल्लीव जयन्ती पल्लविया अमियबुद्धीए // 5 / / अह तिक्खदुक्खवेयणजलेण संभिन्नकम्ममललेवा / उबलद्धलहुयभावा उडे उड्डे जिया हुन्ति // 6 // जुगसमिलानाएणं सुखेत्तसुङ्कलाइसंगयं पप्प / संसारम्मि समुद्दे मणुयत्तं जाणवत्तं व // 7 // तं चारित्तवसेणं खमाइगुणरयणरासिपडिपुग्नं / संवरियासवदारं पयट्टसमग्गसञ्चारं // 8 // दूरीकवसंमोहा गुरूहि निजामएहिं संविग्गा / आरूडा सिद्धिपुरि जयन्ति ! लहु मा जन्ति भवजिया // 9 // एवं सिरिवीरजिणे तिजयदिणेसंमि भासमाणमि / वियसंती भमरझुणी नलिणीव पइम्पइ CAHARASHARॐ %95 265 // 23 Page #279 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणचिः। मव्याभवविषयजयन्ती प्रश्नोत्तरम् / // 266 // CARALASAIRMERA जयन्ती // 10 // तद्यथा सूत्रंभंते भव्वत्तं किं सभावओ? पावि होइ परिणामा 1 / साहावियं जयन्ति ! भवत्तं नेय परिणामा // 5 // व्याख्या-भदंत ! भव्यत्वं जीवानां किं स्वभावतो भवति ? परिणामतो वेति ? प्रश्नः ! भगवांश्च प्राह-जयंति स्वाभाविकं भव्यत्वं अनादिपरिणामिको भाव इत्यर्थः, न पुनः सादिपरिणामः // चेयन्नं जीवाणं अणाइपरिणामओ जहा सिद्ध / भवत्तमभवत्तं निसग्गओ चेव तहा नेयं // 1 // मणुयत्ते सम्पत्ते आयरियखेत्ताइसम्पयाजुत्ते / सुगुरूवएसलाहे अभवजीवा न बुज्झन्ति / / 2 // तित्थयरेणवि कहिए नेव अभव्वाण होइ पडिबोहो / अन्धोपलंमि परिकम्मणेवि किं होइ पडिबिम्ब ? // 3 // दहण जिणिन्दाण रिद्धिं अनेण हेऊणा कोवि / पडिवनदवलिंगो सुयधम्मधरो अभब्बोवि // 4 // एकारसंगधारी गणहारी होह उज्जुयविहारी / सम्मदंसणरहिओ आयरिओ रोद्ददेवु व्व ॥५॥तहाहि-धम्मकहानलिणीए वियासणे दिणमणिव भासन्तो / आसि पुरा आयरिओ नामेणं रूद्ददेवोत्ति // 6 // गामागरेसु उत्तरपहमि साहूण पंचसएहिं / सह विहरन्तो पत्तो कमसो सो गजणपुरंमि // 7 // तत्थ य पुत्वद्विएहिं सुठियमुरिहिं सुमिणए दिट्ठो / पविसन्तो वसहीए कोलो कलहेहिं परिकिन्नो // 8 // तस्स फलं साहणं पभायसमयम्मि तेहि निदिटुं / अज्जागामी मुणिवरसामी सूरी सयमभब्वो // 9 // सो अत्थपोरिसीए समागओ रुद्ददेवआयरिओ / ववहारनयमएणं सायरपाहुनगउरविओ // 10 // वत्थव्वयसाहहिं आएसमुणीण समुहं भणियं / सुमिणवियारेणेसो नूणमभव्यो गुरू तुम्ह // 11 // संविग्गेहि तेहिं अरत्तदुद्वेहिं भवसत्तेहिं / वो तुम्मेहिं समं रयणीए कीरउ परिक्खा // 12 // तो तेसिं रत्तीए सुत्ताणं खेरूया परिक्खित्ता / पडियारन्ति छन्नं वत्थव्वा CHAALASALA // 266 / / Page #280 -------------------------------------------------------------------------- ________________ अभव्यत्वे रुद्रदेवाचार्यदृष्टान्तकथा। // 267 ॥ढ़ा एस मुणिवसहा // 13 // ता लहु तणुचिन्ताए सूरी रयणिभरंमि थंडिल्ले / गंतुमणो संथारा बाहिं द्ववियंमि पायंमि // 14 // चंपाणेसु अंगालएसु कसरक्कएसु जाएसु / हरिसियहियओ जम्पइ अरिहन्तेहिं इमे जीवा // 15 // निदिवा वयणमिणं निक्करूणं तस्स साहूणो सवे / सोऊण मुणिन्तेवं एस अभवो असंमत्तो // 16 // अचरित्ती परिचत्तो पभायसमयंमि सबसाहहिं / अंगारमहउत्ति य सिद्धो जिणसासणे एसो // 17 // तस्स य सीसा मुणिणो सम्मं सुगुरूण सनिहाणमि / आरोहियचारित्ता उत्तमसुरसम्पयं पत्ता // 18 // भुत्तूणं दिवसुहं तओ चूया अन्नअन्नदेसेसु / रायसुया ते जाया ससिरीया सुरकुमार व // 19 // खियपयडियनयरे जियसत्तुनिवेण समाहूया। सबिड्डीए धूयाए सयंवरामण्डवे पत्ता // 20 // सोहम्मसहारम्मे तत्थ य रयणासणेसु आसीणा / चित्तलिहिय व गीय रमणीयं जाब निमुणन्ति / / 21 // तावय सो पुवभवे दिक्खागुरू रूद्ददत्तआयरिओ। संसारंमि भमन्तो करहत्तेणं समुप्पन्नो // 22 // भारकन्तो दुब्बलगत्तो सवंगपामरो दीणो / ताणतेणं गच्छइ रडमाणो कडयसद्देण // 23 // गीयज्युणिरंगभंगे तयहुत्तं तेहि दिट्ठिनिक्खेवे। पुवमवब्भासेणं जाइस्सरणेण विनायं // 24 // एसो अम्हाण गुरू भवगत्तास्परो अभवो त्ति / परिचत्तो पुत्वभवे एवं हिण्डइ कुजोणीसु // 25 // उवयारिणं एयारिसाण अम्हेहिं वच्छलेहिंपि / पच्चुवयारो किजह कयन्नएहिं पि कह ? हीही // 26 // संविग्गा विसयमुह विसं व मन्नन्ति विरसपरिणाम / ते सिद्धिपुरन्धीए संगमसुहलालसा हुंति // 27 // तं करहं बहुमारकन्तं मोयाविऊण दवेण / सच्छन्दं वियरन्तं अरनमज्झम्मि मुश्चन्ति / / 28 // सुगुरूण सनिहाणे सयं पवजन्ति सबविरइसिरिं / विणयगुणमायरन्ता थेरन्ते सुयमहिन्जन्ति // 29 // अहिगयसुत्तस्थाणं गीयत्थत्तं हवेइ अह ताणं / तत्तो धम्मज्झाणं झायन्ताणं समुल्लसियं // 30 // ACHARGEORG 267 // Page #281 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भव्यरहित लोक इति हा प्रश्ने भगवतोक्तं समाधानम्। % A 4 श्री विरियं सुहलेसाणं अबुबकरणमि तयणु पविसित्ता / पत्ता खवगस्सेणि खविंति चउपायकम्ममलं // 31 // ते सुक्कझाण- जयन्ती तइयं मेयमपत्ता लहन्ति दिढसत्ता / सासयमप्पडिवायं तयणु लहुं केवलं नाणं // 32 // चिरकालं भवियाणं कमलाण प्रकरण- 18| बोहणिकदिणमणिणो / अप्पडिहयपहावा केवलिणो ते महामुणिणो // 33 // सुहुमकिरियानियट्टि झाणं झायन्ति सुक्कमह वृत्तिः / तइयं / आरोहन्ति उत्थं सुकं तो छिन्नकिरियति // 34 // तो बन्धन्ति न कम्मं नवं पुराणं खवन्ति निस्सेस / तो कम्म- बन्धमुका सिद्धिं गच्छन्ति समएणं // 35 / / एवं जयंति ! जीवा अणाइपरिणामभवभावेणं / नाणाइरयणलाहे चयन्ति // 268 संसारदालिदं // 36 // जे पुण अभब्वभावं निसग्गसिद्ध जयंति ते जीवा / अंगारमहउ इव भवगत्तासुयरा हुन्ति // 37 / / भव्वाभध्ववियारे सम्म कहियम्मि जिणवरिन्देण / पुच्छह पुणो जयन्ती भयवं सिवमामिणो भव्वा // 38 // ततश्च सूत्रअवसिद्धिया भंते! जइसिन्झिस्संति तो भवे लोओ। भवसिद्धिएहि रहिओ, न भवइ स जयंति! नायाओ॥६॥ व्याख्या-भवसिद्धिका भगवन् यदि सेत्स्यन्ति, ततो भवसिद्धिकैः रहित एव लोकर कदाचित् भविष्यति, भगवांच ग्राह-न भवति स जयंति ? ज्ञातात् // तथाहि-सूत्र सयलागासपएसा सेढिपरमाणुमित्तखंडेहिं / समए समए हीरइ अणतउस्सप्पिणीकालं // 7 // नो चेव अवहिया जह एवं भव्वावि नेव निट्ठन्ति / नवि सिज्झिहिंति तो भण किन्नु भव्वत्तणं ? // 8 // व्याख्या-सकलाकाशप्रदेशश्रेणी परमाणुमात्रखंडैः समये समये अपहियमाणापि अनन्तोत्सर्पिणीकालं यावत AJ नैवैषा अपहता भवति / एवं भव्या अपि सिध्यन्तोऽपि नैव निष्ठां यान्ति / केचिच भव्या अपि न सेत्स्यते एव / एवमपि 151544%95 % AE // 26 // % Page #282 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 269 // भगवतोक्त सा पुनरण्यऽप्राक्षीत् / किं नु भव्यत्वं तेषां ? सूत्रं-चात्र मोक्षगमने जह होऊणं भव्वा वि केह सिद्धिं न चेव गच्छन्ति / एवं तेऽवि अभव्वा को व विसेसो भवे तेसिं॥९॥४ामव्य जीव व्याख्या यदि भूत्वा भव्या अपि केचित् सिद्धिं न चेव गच्छन्ति, एवं तेप्यभव्याः, को वा विशेषो ? भवेत्तेषां, | व्याप्तिः इतिप्रश्ने पुनर्भगवान् संशयांधकारतिरस्कारतरणिमंडलायमानं सदृष्टान्तं विचारमाह प्रदर्शिता। भन्नह भयो जोग्गोदारुदलियत्तिवावि पजाया।जोग्गोवि पुण न सिजइ कोइ रूक्खाइदिट्ठन्ता।१०।इति सूत्रं मण्यते भव्यो योग्यो, यथा दारूदलिकमिति वा पर्यायाः / योग्योऽपि पुनर्न सिध्यति कोऽपि वृक्षादिदृष्टान्तात् / पडिमाईणं जोग्गा बहवो गोसीसचन्दणदुमाई।संति अजोग्गावि इहं अन्ने एरण्डभिण्डाइ // 11 // इति सूत्रं व्याख्या-प्रतिमादीनां योग्या बहवो गोशीर्षचन्दनद्रुमादयः सन्ति / अयोग्या अपि एरण्डभिण्डयादय:नय पुण पडिमुप्पायणसंपत्ती होइ सव्वजोगाणं / तेसिपि असम्पत्ती नय तेसिमजोग्गया होइ // 12 // सूत्रं व्याख्या-नच पुनः प्रतिमोत्पादनसंप्राप्तिर्भवति सर्वयोग्यानां, येषामप्यसंपत्तिः, न च तेषामऽयोग्यता भवति // 1 // किं पुण जा संपत्ती सा नियमा होइ जोग्गरूक्खाणं / नय होइ अजोग्गाणं एमेव य भव्वसिज्झट्र णया // 13 // इति सूत्रं व्याख्या-किं पुनः या संपत्तिः सा नियमात् भवति योग्यवृक्षाणां / न भवत्ययोग्यानां, एवमेव च भव्यसिद्धिरपि / पुनरपि मनोमन्दिराभ्यन्तरप्रस्तुतसंशयान्धकारपरीहारप्रदीपकलिकायमानं विचारान्तरमाह भगवान् HRASHHHONOR Page #283 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 12 भी बपन्तीप्रकरणवृत्तिः / तद्विषयकविचारा न्तरं प्रकटितम् / 4 // 270 // ASHARAM अहवा पडुचकालं न सव्वभव्वाण होइ वोच्छित्ती। जंतीयणागयाओ अद्धाओदोवि तुल्लाओ॥१४॥इति सूत्रं- ____ व्याख्या-अथवा प्रतीत्य कालं न सर्वभयानां लोके भवति व्यवच्छित्तिः / यदऽतीतानागते अद्धे द्धे अपि तुल्ये // तत्रातीताद्धायां सिद्ध एको अनन्तभाग एषां, कामं सेत्स्यत्येतावानेवाऽनागताद्धायां / तौ द्वावप्यनन्तभागौ भूत्वा स / एवानन्त भाग एषां, एवमपि न सर्वभव्यानां सिद्धिगमनं विनिर्दिष्टम् / सूत्रगाथे द्वे यथातत्थाऽइइअद्धाए सिद्धो एगो अणंतभागो सिं / काम तावइउ चिय सिझिही अणागयद्धाए // 15 // ते दो अणन्तभागा होउं समुच्चियअणन्तभागोसिं / एवंपि सव्वभव्वाण सिद्धिगमणं न निदिटुं // 16 // व्याख्याते एते गाथे, अस्मिश्चार्थे आचार्यवप्पभट्टिप्रतिबोधितवाक्पतिराजेन जिनशासनानुरागपरीक्षाहेतवे कृते सति प्रश्ने प्रत्युत्तरदानमपि स्थूलव्यवहारेण अवतरति / तथाहि-अस्थि इह अम्बुद्दीवे दाहिणभरहद्धमज्झिमे खंडे / गोवगिरिनामदुग्गं समग्गसिरिसोहग्गं // 1 // तत्थासि आमराया पयण्डभुयदण्डमण्डवे जस्स / दूरीकयसन्तावो अहासुहं विसयजियलोओ // 2 // तस्स य रजे सूरी विक्खाओ बप्पहट्टिनामेण / नाणाइरयणरोहणगिरिसमसीसिवहो आसि // 3 // मित्तत्तणेण रन्ना पडिवनो बंभचेरसुपइट्ठो। जिणसासणप्पभावणनिट्ठो मुणिपुंगवगरिठ्ठो // 4 // तस्सोवएसवसओ निच्चलपडिवन्नमित्तभावेण / दुग्गम्मि तम्मि रन्ना करावियं वीरजिणभवणं // 5 // किन्जन्तम्मि महल्ले जिणिन्दभवणम्मि जंमि रमणीए / सव्वग्गेणं लग्गा दविणस्स दुद्धकोडिओ // 6 // परमत्थमित्तभावो हवइ जओ बोहिलाभदाणेण / इस बप्पहट्टिसरी पडिबोहइ आमनिवचंदं // 7 // जिणवरदेसियजीवाइतत्तवित्थारकहणकरणेहिं / सूरो इव अणुदिवसं संसयतिमिरं हरइ सव्वं // 8 // रायस्स किंतु जोइप्पसरो अब // 270 // Page #284 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 2710 तदुपरिवाक्पतिराजदत्तप्रश्नो बप्पभट्ट सूरीणां हर्षेः। CARRC RECRUC3% सरह पवणमग्गंमि / तप्परिवारे गुरुबुहकईण कत्ती पहा होउ // 9 // तो बप्पभट्टसूरी दीकयरायबोहणोवाओ। निवपुरओ सविसायं सामिप्पायं पढइ एवं // 10 // अवलम्बिया तिणावि हु तुदृन्ति समुद्धरन्ति वा विहलं। विहलोद्धरणा नहु तिणसमावि जे ताण किं मणिमो 1 // 11 // लक्खिय तदभिप्पाओ आमनरिन्दोवि भणइ जिणधम्मं / कमलं व तं पयाससि किन्तु इमं मित्त ! सुण वयणं // 12 // ईसरसिरपणओ च्चिय राया लोयंमि न उण जिणभत्तो / सूरिवरेहिं विसाओ किं किजइ ? इत्थ वत्थुम्मि // 13 // तो सूरिणावि वुत्तं राय तुम मित्तभावपडिवन्नो / तेण तुह निडररूई न सम्मदिट्ठिपहं एह // 14 // अन्नं चपडिपुन्नकलो राया ईसरपणओ न होइ कइयावि / सहगुरूतेओ किं पुण करेइ सय वरजोयं / / 15 // कुडलिप्पकलो राया तुम व पुण होइ उग्गजडपणओ / पुनकलोवि न राया तुमए पडिबोहिओ कोवि // 16 // एवं निवेण भणिए सूरी पडिभणइ अन्नरजम्मि / अणुमनसु मं सम्पइ गच्छन्तं रायबोहत्थं // 17 // इय सूरिवरेणुत्ते राया रजन्तरंमि गच्छन्तं / अणुमन्नइ सिग्धं चिय साणन्दं बप्पहट्टिगुरूं // 18 // गोवगिरिनामदुग्गा विणिग्गओ बप्पहट्टिसूरीवि / अणुकूलसद्दमंगलसउणसउच्छाहपरिणामो // 19 // देसे सवायलक्खे सयंभरी दिव्वपुरवरी अस्थि / तीए बप्पइराओ राया भवर्णमि विक्खाओ // २०॥रायस्स जस्स गुरुबुहकविमंडलसूरपरिचियमहस्स / अच्छेरं तु सयंवरसविहवियारो न संजाओ॥ 21 // मुत्ताहलविमलाइं गुणाणुविद्धाई जस्स कबाई / कंठंमि कविन्देहिं साणन्देहि धरिजन्ति // 22 // अह तंमि पच्छिमवए लोइयधम्माणुरत्तचित्तंमि / अंगीकयसनासे देवयगुरूपूयणन्भासे // 23 // दिजन्ति य दाणाई तहा कहिन्जन्ति रिसिकहाणाई / विरइजइ कुससयणं पसरह वेयाणमज्झयणं // 24 // संतरसिनियविबुहा कुणन्ति कव्वाई भवनबाई / मोक्खम्मि चेव कंक्खा तिवग्गअग्गेसरे होइ Page #285 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री R जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 272 // 4%A5%ESCE%A4%AR // 25 // गयणि व तंमि गरूए कविबुहदियरायगुरूपहापसरे / सिरिवप्पहद्रिसूरी तसो पत्तो दिणयरू व्य / / 26 / / तो तस्स बप्पम पायचारे तारयगुरुजोइजाइनिकारो / कमलायरंमि बप्पइराए विगलइ महामोओ / / 27 / / महुयरनुणिमहुरस्सरसागयव- सूरिणा यणेण अग्घदाणेण | आसणपयाणपणमणगउरविओ तेण राएण // 28 // सूरी धम्मकहाए चउविहाए दिणेसरपहाए / प्रतिबोधितो अवहरइ मोहतिमिरं पडिबोहइ भव्वकमलाई / / 29 // अक्खलियपयप्पवहा परमहिमगिरिन्दबप्पहट्टिस्स / पसरइ दियविन्द- तेवप्पइराजा। सुहा अह देवया सरस्सई तत्थ / / 30 // पक्खालियंमि तीए मिच्छाभिनिवेशपंकपडलम्मि / अवगयसुदेवसुहगुरुसुधम्मतत्तो भणइ तत्तो // 31 // बप्पइराओ राओ चिरकालाओ ममोरिं अहुणा / भयवं बहुकारूमो समागओ पुनजोगेण // 32 // अवियारियरमणीओ लोइयधम्मो इमो मए सामि ! / पडिवन्नो सम्पइ पुण, जिणधम्मं चेव काहामि // 33 / / दुरूज्झियसनासो जिणधम्मे होइ जह ममन्भासो / करेउ तहा पसाओ पूरय दिक्खाअभिप्पाओ // 34 // सोऊणं तब्वयणं गीयत्थो बप्पहट्टिसरिवरो / जम्पइ जिणधम्मु च्चिय कायव्यो होइ विबुहाण // 35 // किन्तु इमो सनासो लोइयमग्गेण जइवि पडिवनो। सम्मदसणलाहे तुह सहलो तहवि सो होही // 36 ॥सम्मदंसणरयणे मिच्छत्तमोहदलणदुल्लुलिए। मिच्छदिद्विसुयं पि हु सम्म चिय होइ जं भणियं // 37 // लोओ जइवि अलिओ बलिओ चिय बोहिवजियबहुओ। उवहासपरो होही अबोहिवीयजणुज्जुत्तो // 38 // तम्हा जिणुत्तसद्धा सुद्धा सद्धम्मधारिणो हुन्ति / किल उत्तमट्ठकप्पप्पसाहया निहयमोहराया // 39 // तो रायसोम ! संसयकलंकनिम्मुक्कदंसण सिवम्मि / परिमियखेत्ते जीवा अणाइसिद्धा कई मन्ति // 40 // अहवेसभवो होही कयावि किं सबभवजीवेहिं / अपुणागमसिद्धेहिं रहिओ सहिओ अमक्वेहिं // 41 // पसरमि व तो पसिणे बप्पइरायस्स निम्मला पत्ता / 13 // 22 // EC%ACCAS Page #286 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 273 // | जैनदीक्षास्वीकारेण | तस्य वैमानिकदेवत्वप्राप्तिः। पसरह पुनिमजुण्हा सहोयरा पुनवित्तस्स // 42 // तीए विहियइ कुमुयाकरो व समयाणुसारिदिद्वन्तो / पडिहयमोहवियारो दुरूसियऽपरिमलुग्गारो // 43 // तहाहि-आसंसारं सरियासहस्सहीरन्तरेणुनिवहेण / पुहवी न निट्ठिय चिय उयहीवि थलीमऽसंजाओ / / 44 // जह तह सिद्धिखित्ते अणाइसिद्धे हि णन्तजीवहिं / भरिएवि मंति णन्ता सिज्झिस्सन्तो न निट्ठति // 45 // एवं संभरिवइणा वुत्ते पडिउत्तरमि जुमि / सूरीवि बप्पहट्टी गुणणिहट्टी भणइ हिट्ठो // 46 // धनोसि तुम सुन्दर ! राओ चिय विहियसिवपइट्ठो। पडिपुत्रकलामंडलवित्तो ज तं महच्छरियं // 47 // तं होसु सुयण ! सम्पइ दियराओ तारयाण मज्झमि / गुरूसंनिहाणजिणवरदिक्खागहणे पवनमि // 48 // भणिऊणेवं वियरइ विहिणा सिरिचप्पहट्टिसरिवरो / जिणसासणंमि दिक्खं गिन्हइ सो सुद्धसद्धाए / 49 / पडिवनं पुवं चिय सन्नासं उत्तमट्ठकप्पेण / उद्धरियसवसल्लो आसहइ मोहपडिमल्लो // 50 // अह तं सग्गसिरीए कडक्खनिक्खेक्गोयरं नाउं / सद्दहणसिन्धुपूरणमेहं गाहं भणइ सूरी // 51 // तई सम्गमए सामन्नसीह अवरत्तओ न फिट्टीहिही / पढम चिय वरियपुरंदराए सग्गस्स लच्छीए // 52 // एवं सुहासिहेहि सयंभरीसो विसुद्धपरिणामो / चहऊण पूइदेहं वेमाणियसुरवरो जाओ॥ 53 // अस्मिन्नपि संशयान्धकारे त्रिभुवनभास्करेण भगवता कृतापहारे विकस्वरमुखारविन्दा जयंती सानन्दा पुनः प्रश्नयामास // तद्यथाजागरिया सुसतं किं साहु? जिण जयन्ति !जागरिया। धम्मीणमहम्मीणं सुत्तत्तं साहु निहि // 17 // पाणाणं भूयाणं सत्ताण तह जयंति ! जीवाणं / दुक्खणसोयणपरियावणाईसुं जेण वहति // 18 // निचं अहम्मकम्मा अहम्मवित्ती अहम्मआयारा। अहमम्मि रजमाणा सत्ता सुत्ता उ ते सेया // 19 // // 273 // Page #287 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 274 // A4%AAAAAA% व्याख्या-प्राणिनां जागरिका ? किंवा जिन ! सुप्तत्वं साध्विति / ततः प्रभुः प्राह-जयन्ति ! धार्मणां जागरिका जागरिकाश्रेयसी, अधर्मिणां पुनः सुप्तत्वमिति / अधमिका हि प्राणीनां द्वित्रिचतुरिन्द्रियानां, जीवानां पंचेन्द्रियाना, भूतानां-तरूणां सुप्तत्वसत्वानां-शेषप्राणीना, दुःखशोचनपरितापनादिषु येन वर्तन्ते, ते नित्यं अधर्मकर्माणः अधर्मवृत्तयः अधर्माचाराः अधर्मे विषयकरज्यमानाः सुप्ताः-सुप्ताः संतः सत्वाः श्रेयांसा, कालसौकरिकादिवत् प्रश्नोत्तरे अस्थि इह तिरियलोए असंखदीवाणमाइमो दीवो / जम्बूदीवो तंमि य दक्षिणभरहद्धमज्झम्मि // 1 // कालमगहदेसे नयरं रायगिहं सुरपुरं व रमणीयं / रमणीयणमणिकंकणकिरणभरूल्लसियसुरचावं // 2 // पडिकूलजलहिमहणे सौकरिकोमयविक्कममंदिरेण सुसिरीओ। तत्थ य सेणियराया हरिव्व विबुहाण दिनसुहो // 3 // पंचसयसेरिहाणं पइदिवसं सत्त. दाहरणम् / घायणे रसिओ / मरुमडण्ल व निद्दयभावो तह कालसोयरिओ॥४॥ निच्चमहमस्सायारो अवरावरजीवपुग्गलाहारो / उल्लसियकिन्हलेसो रूद्दज्झाणाणुगो एसो // 5 // पावट्ठाणरूवं दुहिक्कफलयं दुरन्तपरिणामं / आरम्भरसेणेसो सिञ्चइ संसारवणं गहणं / / 6 // एसो अणाइमिच्छादिट्ठी अहिलसियविसयजम्बालो / परिहरियसुइचरित्तो भवगड्डासूयरो जेण // 7 // अह | कोसंबिपुरीए तस्सन्तेउरिबलम्मि कहियमि / रंजियमणो नरिन्दो सयाणिओ सेड्यादयस्स // 8 // कन्नुस्सारं वियरइ पइदिवस भोयणमि दीणारं / तल्लाहलोहबहुविहभोयणवमणेण पुण कोढो // 9 // तस्सुप्पन्नो कन्नुस्सारो रना सुयाण तो दिन्नो / निन्दिजंतो चिट्ठइ सो घरदारे तिणकुडीरे // 10 // कुद्धो विरुद्धबुद्धी रुद्दज्झाणेण चिन्तए एवं / अविणियकुडम्ब मे धिप्पइ एएण रोगेण // 11 // मम समीवे वच्छा ! पसुमेगं आणिऊण बन्धेह / पजन्तजन्नजुग्गं मन्तपवित्तं जमिह En 274 // NAGAR Page #288 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 275 // CAE%%AACA4 काहं // 12 // एसो तस्साएसो विहिओ पुत्तेहि तो तणुमलेण | उच्छिट्ठभोयणेणं सो वाही होइ छगलस्स // 13 // जन्नमि दिसेडुकद्विजहए छगले जस्स दले भक्खिए कुडम्बेण / सो सेडुओ पणट्ठो रन्नपविट्ठो दिसामूढो // 14 // परिपक्कपडियहरड्यबहेडगाईहिं वृत्तान्तः। अइकसायल्लं / सेलमयकुण्डसलिलं रविकरतत्तं पियइ तिसिओ // 15 // होइ अणेण विरेयणमणेगहा तस्स किमिकुलाकिन्न / तेणेस पत्थभोयणकमेण उल्लाघयं पत्तो // 16 // कोसम्बिपुरिनिविट्ठो दिवो हिट्ठो जणेण नीरोगो। कुटेण किलमन्तं सो पिच्छह नियकुडम्बंपि // 17 // मज्झ अवन्नावल्लीए कडुयफलं तुम्ह तेण इय वुत्ते / धिद्धिक्कारहओ सो तओ गओ रायगेहमि // 18 // तत्थ य अत्थविहिणो दुत्थविहत्थो असंत्थुए लोए / भोयणमित्तत्थेणं ओलग्गइ पोलिपाहरियं // 19 // तमि समयंमि भयवं भत्तिब्मरदेवकोडिपरियरिओ / उजाणे गुणसिलए वीरजिणिन्दो समोसरिओ // 20 // नायरजणो नरिन्दो सविड्डीए जिणिन्दवन्दारू / नीहरिओ पोलीए ठवित्तु तं तीए पाहरिओ // 21 // भक्खियदुवारदेवयवली इमो सेडुओ दिओ तिसिओ / मरि जलचिन्ताए वावीए ददुरो जाओ / / 22 // पुण वीरजिणोसरणे महिलासंलावजाइसरणेण / संविग्गो मण्डुक्को जिणरायं वन्दिउ चलिओ // 23 // जिणवन्दणत्थपत्थियसेणियसेणातुरंगखुरप्पहओ / अचलियजिणवरभनीए दहुरो सुरवरो जाओ // 24 // ओहिनाणवियाणियपुत्वभवो एस चिन्तए एवं / एसा जिणिन्दमत्ती अपुबमाहप्पकप्पलया // 25 // वीरजिणन्दस्सुवरि सेणियरायस्स केरिसी भत्ती / एवं विणिच्छयत्थं ओसरणे एइ सो देवो // 26 // दिठो निवेण कुट्ठी पूयरसेणेव चन्दणरसेण / पुणरूत्तं पयबीढं सिञ्चन्तो देवमायाए // 27 // चिन्तइ निवोवि एसो जुगु|च्छणिज्जो जिणिन्दपयवीटे। आसायणदोसिल्लो बहिं गओ निग्गहेयवो // 28 // ता छिक्काए सवणे वीरजिणाईण संमुहं / 275 // KACASSARKARCHAS ॐ Page #289 -------------------------------------------------------------------------- ________________ दर्दुरदेवेन कृता जयन्तीप्रकरणपृत्तिः / परीक्षा श्रेणिक भूपतेः। // 276 // CASAHASRCES भणइ / सो जिणवर ! मरसु तुम जीवसु सुइरं तुमं राय ! // 29 // अभयकुमारामिमुहं मरसु तुमं मंति जीव वा बहुयं / सोयरियं कालं पइ मा जीवसु मा तुमं मरसु // 30 // एवं तन्वयणेन्धणसन्धुक्कियकोवधूमकेउस्स / सेणियस्स दिडी कसिणा पसरईमं धूमकुरुलिब // 31 // चिन्तइ निवोवि एवं कुट्टी पीढच्छलेण पावतरूं। पूहरसेणं सिञ्चइ दुरन्तदुहलक्खफलहेर्ड // 32 // अइविम्हाओ देवो ओहिमाणेण नायरायमणो / जिणपयकमले लीणं संसह फुल्लन्धयं व निवं // 33 // परिमिट्टि पायपउमे लीणो भमरो व एस नरनाहो / निव्वुयदेहो होही सिवसुहमयरन्दपाणेण // 34 // धम्मोवएसविरए जिणिन्दंमि निग्गया परिसा / कुट्ठिस्स निग्गहत्थं निवेण तो पेसिया पुरिसा // 35 // मग्गेण तस्स धावन्तयाण पेच्छन्तयाण सो कुट्ठी / नट्ठो नाओ दियो इमेहि कहिओ नरिन्दस्स // 36 // विम्हइयमणो राया पच्चामन्तूण भणइ जिणपुरओ / को एस कुट्ठरोगी? उवविट्ठो सामिपयवीढे // 37 // कहियम्मि प्रवचरिए बिम्हयभरिए मणमि नरनाहो / पुच्छइ छिक्कासवणे मराइवयणाण किं तत्तं // 38 // अह भणइ जिणो नरवर ! सिद्धि पत्ताण चेव अम्ह सुहं / एगन्तियमचन्तियमणम्तयं होइ नेह पुणो // 39 // अमओ जिणधम्मरओ चिरं जियन्तो घणं कुणइ पुन्न / परलोए सबढे एगावयारो सुरो होही // 40 // जीवन्तो पुण कालो जीवाण घायणमि अइरसिओ / पञ्चत्तगओ होही सत्तमपुढवीए नेरइओ / / 41 // तं पुण नरिन्द जीवसि जाव चिरं ताब रजसुहं / आउंमि परिसम्मत्ते आइमपुढवीए नेरहओ // 42 / / एवं वीरजिणेणं तइलोयदिवायरेण वित्थरिए। दहुरचरिए हरिए छिक्कासन्देहतिमिरम्मि // 43 // सेणियनिवो वियारइ तिहुयणहत्वावलम्बदाणपरे / महहिययष्टुिए वीरजिणंमि कह होइ नरयगई ? // 44 // अहवा सहत्थरोबियदुकम्मसाही दुहिक्कफलदाई / होइ च्चिय जीवाणं को सकद ! AAAACROSEX गओ होही सत्तमरजिणेणं तइलोयाट्रिए वीर // 276 // Page #290 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 277 // ** श्रेणिक रवरेणोक | कालो जीववधवर्जनार्थ *SHAHARAN है। अनहा काउं // 45 // किं बहुणा-सन्निहिए राहुंमि नरए घोरन्धयारपसरम्मि / सहसा कम्पियमणो राया कसिणच्छवी जाओ // 46 // पुच्छइ निको भयवं ! तुमम्मि कारूमपुत्रभत्तीए / आराहिएवि जिणवर ! नरए पडणं कहं मज्झ // 47 // देवाहिदेव तुमए तिहुयणपहुणा अणन्तवीरिएण | पयलग्गोवि पडन्तो नरए रक्खिजए न कहं ? // 48 // उवलद्धे सम्मत्ते दुइयाई तिरियनरयदाराई / एयम्मि तुम्ह वयणं न हवइ सहलं कहं ? नाह ! // 49 // भयपि भणइ नरवर ! अवस्सभवियत्वं हवा चेव / इत्थ पहुणोवि ससक्का नहु सका अन्नहा काउं // 50 // नरयाउयमि बद्धे आरंभाईहिं अइमहल्लेहिं / सम्मदंसणरयणं पच्छा तुमए पत्तं महाराय ! // 51 // कहमवि अदत्तफलयं कम्मं चारित्त-सम्पओगेवि / दुहजलहिपारगमयं न होइ निव! जाणवत्तं व // 52 // पच्छा सम्पत्तणवि पढमो उस्सिप्पिणीए तित्थयरो / तं राय ! पउमनाहो होहिसि सम्मत्तरयणेण // 53 // नरयभयमोहजोहक्कन्तमणो सिणिओ भणइ / नाह ! कहसु तुमं तमुवाय न लहेमि जओ नरयवायं // 54 // मृढहिययस्स सेणियनिवस्स संबोहणत्थमाह जिणो / महिसाणं पंचसए निहणन्तं कालसो. यरियं // 55 // एगदिवसंपि रक्खसि जह तं नरनाह दिवजोगेण / तोऽवस्सं नरयगई न होई तुह सोम! दुहहेऊ // 56 // इच्चाइ जिणवरेणं वोत्ते नमिऊण सेणियनरिन्दो | रायगिहं सम्पत्तो हक्कारइ कालसूयरियं / / 57 // भणिओ य नरिन्देणं 4 काल तुमं महिसघायणं मुयह / जं जीवदयावासा सिरीनिवासा समुह व // 58 // पइदिणं सेरिहघायणरसेण रूढाण नरय पुढवीए / पावतरूण फलाई दुहाई होहिन्ति विरसाइं // 59 / / पुवभवसंभवेणं केणवि पउरेण पावपंकेण / इहलोए तुह जायं पेच्छसु चंडालजाइत्वं // 60 // विणिवाइय जीवाणं विसिद्धवंसोन्भवाणवि जियाण / चावाणं नवि जायइ परलोयप्पसाहणे 277 Page #291 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणइतिः / // 278 // सत्ती // 61 // पयडन्ते निवचन्दे जीवदयं कोमुयं व तप्पुरओ / पंकयवणं व कालो पावइ सवंगसंकोयं / / 62 // निद्विय- श्रेणिककृते दयंमि काले कासारे पावपंकपरिणामो। धणियं सेणियरना महिसाणं मोयणे जाओ // 63 // अह पश्चभूयसंजोगमित्त-|| प्रतिबोधोगमि चेयणा हवइ / मजंगमेलए जह मयसत्ती नन्नओ एइ // 64 // देहाइरित्तजीवे अविजमाणमि नरवर ! कहऽम्ह। पर- पायेऽपि लोए नरयदुहं कहिजमाणं भयं देउ // 65 // इइ किन्हलेस हरिएस, काल तमभवं जपसि / जीयाण सयं किं न बुज्झसि ? कालोन जममुत्तो चेयणो जीवो // 66 / / मूत्तजडभूयभूयस्सहावदेहा कहं हवइ एसो ? / कारणकजववस्था सुत्था नहु अन्नहा प्रतिबुद्धः। होइ / / 67 // इच्चाइ जुत्तिसिद्धे जीवे सोयरिय? देहवइरित्ते / निस्सन्देहं सिज्झइ परलोओ कम्मफलहेऊ // 68 // तो भन्नसि परलोए जीवाणं मारणम्मि मरणाई / पाविहिसि अणन्ताइ दुरन्तअज्झप्पपओगेण // 69 / / तो एवं ववसाएं | चइत्तु पसरन्तपावकम्मायं / कुणसु तुम जीवदयं कलियमलपक्खालणगंगुदयं / / 70 / / जीवदयसारणीए वाणीए सेणिएण सिमि / कालखितम्मि करूणारामो न कहिंवि पल्लविओ // 71 // भणियं च णेण पञ्चक्खमेव माणं न इत्थ जुत्तीओ। सुचीओ इव मुत्ता जं ताओ मुत्तियमईहिं / / 72 // तो सेणिएण भणिय पच्चक्खेणं न होइ पडि सेहो। जीवाइपयत्थाणं नूणमपञ्चक्खरूवाणं // 73 // उप्पन्नपि य गुमाणं पच्चक्खा तमिह काल ! विनेयं / जे होइ पुत्वं काल ! पमाणं पच्चरखसरिसंति // 74 // ज संवाइपरोक्खं तंपि पमाणं वयन्ति तो विबुहा / जं पुण तुमं न मनसि कारणमेयं तमिह नेयं / / 75 / / पावासत्ते सत्ते उवएसो कुणइ किन्नु धम्मरूई है। नीलीरत्ते वत्थे कुंकुमराओ कहं होउ ? // 76 // एवं च सेणिएण रना | हियये विणिच्छियं सम्मं / एसो कलूसो कालो नूणमभवो भवाणन्दी // 77 // परमज दिणे सेरियाऽभक्खणयाए ताव होइ IY // 278 // % ARSA Page #292 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 279 // मृत्वा / नरकंगतो कालः। IROECRECRUCHECECAX परलोए। सब त्रयणओ मे न दुग्गइदुक्खदन्दोली / / 78 // सवन्नुवयणसवणे हिययं सुयणेहिं होइ दायई / अप्पहिए जीवदयासहिए महिए सुरेहिपि // 79 // अनं च-अप्पहियं काय जइ सक्का परहियपि कायई / अप्पहियपरहियाण अप्पहियं चेव कायवं // 80 // एवं वियारिऊणं हवेण सुहडेहिं सेणियनिवेण / सोयरियकरग्गाओ हराविया महिमपंचसया // 81 // अइगहणगिरिनिकुंजे सिग्धं नेइऊण दूरकंतारे / सच्छन्दं चरमाणा मुक्का सुहडेहिं निववयणा // 82 / / सेरिहविरहहयासणतचो तओ य कालसोयरिओ। पेच्छइ विभंगनाणी रत्तच्छे गिरिनिकुञ्जम्मि // 83 // गच्छइ तत्थ तुरियं सहत्थसत्थेण ताण घायत्थं / ते हणिऊणं सत्थो जाओ खुद्दो महारम्भो // 84 // मरणंमि दाहपसमणमिउसीयसुगन्धदिश्ववत्थूहिं / कीरन्ते उवयारे अभिभूओ तिक्खदुक्खेहि // 85 // तत्तसिलाए खित्तो चेयह वत्थो व गिम्हकालंमि / रुद्दज्झाणोवगओ विलवह अइकरूणसदेण / / 86 // सुलसो विय तप्पुत्तो तस्स सरूवं कहेइ संभन्तो। अभयकुमारस्स तओ स बुद्धिमं चिंतए एवं / / 87 / / एसो खु जीवधायणरसेण संजायपावकम्मभरो। उप्पन्न विवज्जासो सत्तमनरयोल्लसियलेसो // 88 // इइ भाविऊण अभयो भणइ इमं सुलस एस तुज पिया। एयविवरिएण उवयारेणं सुहं लहहिह // 89 // अभयकुमारेणुत्तो ततो गतूण पिउसमिबंमि / पुत्तो सुलसो विविहे कारइ विवरियउवयारे // 90 // कण्टयसेज्जासंछियतणुस्स कालस्स विरससद्देहिं / असुइविलेवाहारे सुहन्ति भन्ती हवइ तस्स // 91 / / जाओ विडम्बणाए मरिउं सो परमकिन्हलेसिल्लो। अजहन्नुक्कोसडिई अपइट्ठाणम्मि नेरइओ // 92 // एवमहम्मायारा जयंति ! जे हुंति निग्षिणा जीवा / ते सुत्त च्चिय सेया जागरमाणा पुण अणजा // 93 // VIm279 // Page #293 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणइतिः / CAR जागृता | धम्मिजना श्रेष्ठा इत्व | श्रीआर्य रधितोदाहरणम्। // 280 // // कालसौकरिकथानकं समाप्तम् // सूत्रंएयविवरीया पुण सज्झायपरा जियंदिया धीरा / धम्ममि रजमाणा ते साह जागरा पवरा // 21 // व्याख्या-एतद्विपरीताः पुनर्ये साधवः स्वाध्यायपरा जितेन्द्रिया धीरा धर्मे रजमानास्ते जागरूकाः प्रबराः / स्वाध्यायो हि साधूनां प्रशस्तं ध्यानं, अनादिभवाम्यस्तारौद्रध्यानप्रहाणप्रधान, तस्माच्च प्रवर्तते सर्वपरमार्थज्ञानम् / तत्र हि वर्तमानः प्राणी प्रतिक्षणं लभते वैराग्यं मोक्षपुरप्राप्तिप्रगुणं पंथानम् / तथा स्वाध्यायध्यानकताना हि मुनयः प्रत्यहं विकृतिग्रहणव्यग्रा अपि बाह्यमौदारिकं वपुरांतरं कार्मणं च कृशिमानमापादयन्तः स्वपरोपकाराय प्रभविष्णवो भवन्ति दुर्बलिकापुष्पमित्रवत् / तथाहि-आसी दसपुरनयरं मालवलच्छीविसेसयं तत्थ / होत्था अत्थसमिद्धो विप्पवरो सोमदेवोत्ति // 1 // तस्स य घरिणी धरिणीकरणिं परिहवा निच्चलत्तेण / जिणसासणे खमाहर-भारसहा रोदसोमति // 2 // ताण सुओ मेहावी विक्खाओ रक्खिओत्ति नामेण / सुपढियविजाहाणो पाडलिपुत्ता पुरा एइ // 3 // तस्सागमणे हूँ| राया अम्मोगइयाए (सन्मुखगमनेन) गउरवं देइ / विजागहणगुणेणं हिट्ठो सह नयरलोएण // 4 // पाहुडवा वडहत्थो बन्धवसुहिसयणसुयणजणवग्गो / आगच्छइ तस्स घरे अइसयकयदसणुम्माहो // 5 // गेहे धणेण पुढे दिवे हिट्टम्मि सयलसयणम्मि / रक्खियचित्ते चिन्ता जाया जणणी न दिदृत्ति // 6 // तो उद्विऊण तुरियं गिहमज्झे पविसिऊण / आसीणं कूणे जणणिं वन्दइ संभन्तो पुच्छए एवं // 7 // अम्मो मज्झागमणे विजागहणेण रंजिओ PJ लोओ। कीस तुम नाणन्दं वहसिन वा होसि सुपसन्ना॥८॥ महुरक्खरवाणीए जम्पइ जणणीवि ताई सत्थाई। RHOS P // 28 // Page #294 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 281 // मातृप्रसाद नाय गृहीता दी आर्य| रक्षितेन। ACO5AE%EOSECORDCHOCK पढिओसि वच्छ ! जेहिं जीववहे होइ परिणामो // 9 // विजाहाणाई जओ द्वाणाई चेव पावबल्लीणं। छागाइजागसोणियसित्ताणं नरयफलयाणं // 10 // पढिऊण दिट्ठिवायं सिवसुहलच्छीए संगमोवायं / सुगुरूणन्ते सम्म किमागओ ? जेण | तुस्सामि // 11 // विणयपुण्णउत्तमंगो सो जम्पइ माइ दिठिवायपि / अचिरेणावि पढिस्तं कत्थ पुणो तस्स उवलम्भो ? // 12 // जणणीवि भणइ रक्खिय तुहुच्छुवाडम्मि सन्ति जे गुरूणो / तोसलिपुत्तायरिया तयन्तिए लब्भए एसो॥ 13 // एवं जणणीभणिए रयणीए अजरक्खिओ उहु / चिन्तइ नामंपि अहो रमणीयं दिद्विवाओत्ति // 14 // एसो अचिरेणं चिय पढियवो उज्जमेण गुरूणा। जणणी तोसेयवा किमन्नलोएण तुद्वेण ? // 15 // इच्चाए चिन्ताए सिग्धं रयणीवि तस्स अइक्वन्ता / अरूणोदयम्मि गच्छइ गेहाओ उच्छवाडम्मि // 16 // गिहनिग्गयमित्तस्सवि समीवगामाओ दंसणनिमित्तं / मित्तो मिलिओ पुच्छह किमंगं तं रक्खिओसि ति? // 17 // आमंति तेण भणिए अप्पइ मित्तोवि उच्छुलट्ठीओ। नव सड्ढाओ तुट्ठो गहिऊणं रक्खिओ झत्ति // 18 // पडियप्पह भणइ गिहे जणणीए अप्पिऊण कहियत्वं / पढम चिय माइ मए हिद्वेणं रक्खिओ दिट्ठो // 19 // सयमवि चिन्तइ एसो नवअज्झयणाणि दिट्ठिवायस्स / दसमद्धं सिग्धं चिय निविग्धं चेव पढियवं // 20 // एवं विचिन्तयन्तो तुरियं चिय उच्छवाडयं पत्तो। परिभावह साहूणं वन्दणविहिजाणगं कमवि // 21 // एत्थन्तरमि ढढरसड्डो साहूण वन्दणविहिन्नू / पुनपरिणामपगरिसवसेण तत्थागओ झत्ति // 22 // तम्मग्गमणुसरन्तो धणओ इव विहियउत्तरासंगो। निस्सीहियाए पुवं वसहीए रक्खिओ विसइ / / 23 // तो तोसलिपुत्ताणं गुरूण दिट्ठीए अमयवोट्ठीए / सो आगमेसिभद्दो पुलयंकुरुराइरूइरंगो // 24 // ढङ्करसद्दणुसारी दक्खो विहिणा पडिक्कमइ ईरियं / वन्दियगुरुपयकमलो वन्दइ साहूण पयपउमे // 25 // // 28 // Page #295 -------------------------------------------------------------------------- ________________ ॐ पठनार्थ बयन्तीप्रकरणपतिः / 282 // द उवलक्खिओ गुरूहि ढड्डरसट्ठस्स वन्दणमहितो। एसो कोवि महप्पा अहिणवपडिवन्नधम्मो त्ति // 26 // आपुच्छिओ दृष्टिवाद गुरूहिं सोम ! कओ तुम्ह धम्मपडिबत्ती / तेण विणयेण बोतं ढड्डरसड्ढाउ एयाउ // 27 // साहहिं तओ कहियं एसो अजरक्खिओ भयवं! / जस्सागमणे राया नायरलोओवि सन्तुट्ठो // 28 // तत्तो गुरूण पणओ विन्नत्तिं कुणइ रक्खिओ गमनेसक्खं / इच्छामि दिद्विवायं पढिउमहं तुम्ह पयमूले // 29 // दिक्खापडिवत्तीए पढियवो सोम दिद्विवाउत्ति / भणिए न्तराले गुरूहिं जम्पइ दिजउ दिक्खावि मह सिग्धं // 30 // तत्तो वियन्नदिक्खो आइक्खइ रक्खिओ जहा भयवं / इह सयणजणो | निर्यापिता राया धणियं असमञ्जसं काही / / 31 / / देसन्तरम्मि गम्मउ सुत्थं सर्वपि होइ जह तत्थ। जुतंति तओ गुरूणो सिग्धं 8 भद्राचार्या देसन्तरं पत्ता / / 32 // एसा हु इत्थ तित्थे महल्लकल्लाणकारणा नचा / सिस्सस्स सुहगुरूहि पढमा निप्फेडिया विहिया गुरव आर्य॥ 32-2 // एक्कारस अंगाई कइवयपुवाई तत्थ पढिऊणं / अजवयराण मूले पढणत्थं जाइ गुरूभणिओ // 33 // एत्तो उज्जेणीए तत्थ य चिट्ठन्ति अजभद्दगुरू / आमासिओ य तेहिं वन्दन्तो रक्खिओऽसि ? ति // 34 // आमंति तेण भणिए गुरूहि उववुहिऊण अइबहुयं / केणद्वेणं ? सम्पइ पट्ठविओ कत्थ इय भणिओ // 35 // एसो विनवइ तो भयवं ! मृलम्मि अजवयराण / आइट्टम्हि गुरूहिं पढणत्थं दिट्ठिवायस्स // 36 // जुत्तमिणं किन्तु इहं, अम्हाणं उत्तमद्वकप्पमिमं / पडिवजिउकामाणं तुम्मे निजामगा होह // 37 // आएसुत्ति भणिचा विहिणा निजामिआ तओ तेहिं / भिन्नवसहीए तुमए पढियवं रक्खिओ भणिओ // 38 // गच्छइ कमेण पासे दसपुवधराण अजवयराण / रयणीए पुरवाहि वसिओ भिन्नाए वसहीए // 40 // पिच्छन्ति अजवयरा पभायसमयंमि सुमिणयमम्हं / पत्तम्मि पयं पीयं आएसेणं न SHEE Page #296 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 283 // श्रीवजखामिपाधै दृष्टिवाद पठताऽऽर्यरक्षितेन खभ्राता दीक्षितः। सवं तु // 41 // जागरिएहिं सुमिणे कहिए अन्नन्नफलवियारम्मि / साहूहि कए वयरा गुरूणो जम्पन्ति परमत्थं // 42 // पाडिच्छओ अवस्सं कोवि कुओ आगमिस्सइ पभाए / सो पढिस्सइ सुत्तं अचिरेणं नउ असेसंपि / / 43 // एवंति मुणिवरेहिं पडिस्सुयं सुत्तपोरसिसमए / निस्सीहिं कुणन्तो समागओ रक्खिओ तयणु // 44 // वन्दन्तो विहिपुवं आलविओ अजवयरसामीहिं / किं रक्खिओसि ? कत्तो केणत्थेणऽथ सम्पत्तो ? // 45 // आमंति भणेऊणं भणइ इमो दिदिवायगहणत्थं / तोसलिपुत्तगुरूहि आइट्ठो तुम्ह पासम्मि // 46 // अजवयरेहि भणिओ कहं हिओ नयरबाहिरवसहीए। इइ बोत्ते सो भणिओ पढियत्वं होइ किं एवं? // 47 // तेणुत्तं जे तुब्भे भणह तहा तंति किन्तु आइटुं / भिन्नवसहीए द्वाणं पुजेहिं भद्दगुत्तेहिं / / 48 // सुगुरूणं आएसे अवस्समिह कारणेण होयत्वं / उवउत्तेहिं तेहिं तत्तो जुत्तंति संलतं // 49 // तो आयरेण गिन्हइ विणयरओ दिडिवायसुयरयणं / पति सुप्पसन्ना तमज्झवयरावि वियरन्ति // 50 // अह पियरेहिं नायं सन्तुडेहिं तओ समाहुओ / पुरिसाइपेसणेणं आगच्छसु धम्मदाणत्थं // 51 // आगमगहणपसत्तो नावगच्छइ जाव रक्खिओ तत्तो / गन्तूण फग्गुरक्खियनामेणं बन्धुणा वुत्ते // 52 / / जइ तुम्भे आगच्छह दंसणउत्कंठियाण पियराण / पखजं पडिवाइ तो सयलो सयणवग्गोवि / / 53 // जइ एवं पडिवजसु दिक्खं तं चेव रक्खिएणुत्तो। रहसेण फग्गुरक्खियभाया गिन्हइ तओ दिक्खं // 54 // गहियाणि य पुवाइं नव, दसमद्धम्मि पढियमित्तंमि / परिकम्मगहणमग्गे खिन्नो सो जइवि मेहावी // 55 // पुच्छइ भयवं कित्तिय पढियत्वं मज्ज्ञ अजवि समत्थि / जम्पन्ति अजवयरा सरिसबमेरूवमाणेण // 56 // तो पढसु तुम अजवि चिट्ठइ सुयसायरो अपारोत्ति / मणिए गुरूहि चिन्तइ +GROCCOREOGRA% AX RECENE // 283 // Page #297 -------------------------------------------------------------------------- ________________ मी अपन्तीप्रकरणकृतिः / श्रीतोसलि| पुत्रगुरुवा खपदे एस दसपुरं पत्तो। तोसलिपुत्तगुलामविहारी // 62 // गुरूगच्छगयणमसयासे / सोच्चा निर 4 // 284 // | एयं पढिउं न सत्तोऽम्हि // 57 // विनत्तं तेण तओ भयवं ! सयणाण बोहणनिमित्तं / गच्छामि ताव पुणरवि पढिउमहं| | आगमिस्सामि // 58 // इइ विन्नत्ते तेणं उवउत्ता हुन्ति अजवयरावि / कहमेसो निविन्नो अज्झयणे बुद्धिरिद्धोवि // 59 // हुं नायं भवियत्वं दसपुवधरेण जं मए चेव / अपच्छिमेण जम्हा एयस्सवि नागमो होही // 60 // अजवयरेहिं तत्तो विसजिओ एस दसपुरं पत्तो / तोसलिपुत्तगुरूहि कमेण गणहरपए दुविओ // 61 // पडिबोहिऊण सम्म सयणजणं दिक्खिऊण सयलंपि / जाओ जुग्गप्पहाणो गणहारी उज्जयविहारी // 62 // गुरूगच्छगयणमंडलभूसणससिमंडलेण तेण इमं / जिणवयणं कुमुयवणं पयासियं पुइवीसरसीए // 63 / / अवरविदेहे सिरिसीमंधरसामिजिणवरसयासे / सोचा निगोयजीवे सक्को पुच्छेइ किं अहुणा / / 64 // भयवं भरहे चिट्ठा गणहारी कोइ कहइ कि ? सम्मं / एए निगोयजीवे केवलनाणीण विरहमि // 65 / / तो भयवया वि भणियं संति तहिं अञ्जरक्खियमुणिन्दा। जेसि निगोयकहणे सत्ती सुयनाणलद्धीए // 66 // तो कोउगेण इन्दो आगच्छइ ताण पायमूलम्मि / माहणरूवो पुच्छइ मह आउं कित्तियं अत्थि ? // 67 / / उवउत्तेहिं नाओ सुरराओ एस इसि हसिऊण | सको तुमंति भणिए हिट्ठो चलकुण्डलाहरणो // 68 // होऊणं वन्दित्ता निगोयजीवाण पसिणवागरणे / हिट्ठो कयपणामो जेसिं गुरूणं सुरिन्दोवि // 69 // अवरविदेहे सीमन्धरसामिजिणसरेण परिकहिए। तुम्हसरूवे भयवं! इहागओऽहंति कहिऊण // 70 // गन्तुमणो सुगुरूहि चिट्ठसु तं जाव साहुणो इन्ति / मं दट्टण नियाणं मुणिणो काहिन्ति तो जामि / / 71 / / जक्खगुहाए दारं अनंमुहं द्वाविऊण तो एसो। साहण पच्चयत्थं जहागयं पडिगओ सिग्ध // 72 // तेसि सिरिअञ्जरक्खियसूरीण गुणाण कन्दधवलाण / सबाण बनणे किं सत्ची छउमत्थजीवाण / / 73 / / गच्छम्मि स्थापित स्वजना दीक्षिताः निगोदकिचारः स्य कथितस्तेन / %AC % // 28 // श Page #298 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 285 दूवाल पुण्य मित्रस्त स्वजनाः प्रतिबोधिता। BRDASHAALA-443 तेसि गरूए मुणिरयणुप्पत्तिरोहणगिरिम्मि / दन्बलियपुस्समित्तो सुयमाणमहोयही जाओ // 74 // घयवस्थपुस्समित्ता अन्नेवि य दुन्नि मुणिवरा तत्थ / उवटुंभकरा जाया सबालवुड्डम्मि गच्छम्मि // 75 // गामागरनगरेसु विहरन्ता अजरक्खियमुणिन्दा / दुब्बलियपुस्समित्तस्स सयणनिवासे पुरे पत्ता // 76 // सयणावि बुद्धदसणभावियमइणो भवन्ति जिणवयणे / तणुदुम्बलत्ति हेऊ किरइ कटुं तवचरणं // 77 // जं अम्ह एस सयणो साहू अइदुब्बलो दयट्ठाणं / तो किं कट्ठतवेणं झाणं चिय मुक्खहेऊत्ति // 78 // तं पण ज्झाणं सम्मं झाइजइ बुद्धदंसणे चेव / कम्मवणदहणहयवहसहोयरं होइ जं अइरा // 79 // तो अजरक्खिएहिं गुरूहि करूणापवन्नहियएहिं / महुरक्खरवयणेहिं भणियं सम्बोहणढाए // 8 // अरिहन्तपवयणे च्चिय झाणं भवजलहिसेउसंडाणं / जेणेस दुबलतणू निच्च अइनिभोईवि // 81 // को पच्चओत्ति ? तेहिं भणिए वुत्तं गुरूहि तयहुसं / अइसरसभोयणेण उवयरिबो बहुं एस // 82 // अम्हे पुण विहरामो अवरावरदेसनयरगामेसु / उवचियदेहावयवो तुज्झेहिं एस कायवो // 83 // अन्नत्थ विहरिऊणं सुइरं पञ्चागया किसं साहुं / दुब्बलियपुस्समित्तं दद्वं जम्पन्ति ते गुरूणो // 84 // कह तुम्हाण समीवे दुविओवि अइसरसभोयणेणाबि / स विसेसकिसो जाओ ? तो बुज्झह | झाणमाहप्पं // 85 // पिच्छह संपइ झाणं मुत्तूर्ण रूक्खतुच्छभोईवि / होही उबचियदेहो तुम्हाणं पच्चओ एसो // 86 // तो सयणाण समक्खं एसो भणिओ गुरूहि पइदिवसं / गिन्दसु लुक्खाहारं कुणसु तुमं झाणपरिहारं // 87 // इच्छामित्ति भणित्ता तेण तहाणुहियम्मि गुरूवयणे / अमयरससेयसरिसे पल्लवियं तस्स अंगेहिं // 88 // तो विम्हइया सयणा झाणविमुक्खेण लुक्खअसणेण / अचिरेणं अइउवचियतणुलट्ठी एस संजाओ // 89 // तत्तो गुरूहि भणियं हियए झाणानलम्मि ISISRAECARRCIRCAROO 2856 Page #299 -------------------------------------------------------------------------- ________________ *Y बयन्तीप्रकरणपतिः / // 286 // दिप्पन्ते / अइनिभोयणेणवि जह देहो दुबलो होइ // 90 // तह दज्झइ कम्मवणं जाणह चिरकालरूढमइगहणं / सिव- उजैनध्यानपुरपहरोहकरं दुहमरफलदाणदुल्ललियं / / 91 / / एएण पच्चएणं झाणं अरिहन्तपवयणे चेव / झायन्ति मुणिवरिन्दा सुरगिरि- स्वरूपनिच्चलमणा सम्मं // 92 // जइ पढमं धम्मझाणं सम्मं सगुणसरलया सहियं / तो सिज्झइ परलोओ सलद्धलक्खाण साहूण प्रकटनम्। // 93 // धम्मज्झाणघणेणं धणियं परितज्जणाहि लोहग्गी / उवसमइ तओ अन्ते जायइ सव्वत्थसिद्धीवि // 94 // अन्नं चधम्मज्झाणे घणमि पसरन्तनिम्मलदगम्मि / मुणिगणमणगयणयले स्यपडलं दूरमोसरइ // 95 // सिवपासायारोहणनेस्सेणी होइ जइ खवगसेणी / मोहपमाए खीणे मुणीन्दमाहप्पभावेण // 96 // उच्छलइ सुक्कज्झाणं चिरसंचियघायकम्मगिरिकुलिसं / तस्सायममेयदुगे तइए भेए असंकन्ते // 97 // एयारिसम्मि अरूणोदय व झाणन्तरम्मि वट्टन्ते / केवलनाणदि-| वायरमहोदओ होह साहणं // 98 // लणं केवलं नाणं सव्वन्नू सव्वदंसिणो। भवाणं दिन्ति सम्बोहं मिच्छामोहतमोपहं // 99 // सुहमकिरियानियट्टी तइयं झाणं निज्झाणमह सुकं / निजरणकए मुणिणो चउन्ह सेसाणकम्माणं // 10 // विच्छिन्नकिरियमप्पडिवायं झाणं चउत्थयं सुकं / झाइत्तु जन्ति सिद्धिं सेलेसीकरणओ झत्ति // 101 // इच्चाइ अजरक्खियगुरूवएसेण अमयलेसेण / दुब्बलियपुस्समित्तम्स सयणाणं समयइ मोहविसं // 102 // निम्मलदयम्मि जिणवत्रयणे माणससर व ते सयणा। सुविसुद्धपक्खवाया हुन्ति सया रायहंस व // 103 // दुबलियपुस्समित्तो मित्तो च्चिय अम्ह एस संजाओ। मिच्छत्तमोहतिमिरं जस्सागमओ गयं दूरे // 104 // धन्नो एस सपुनो लद्धा जेणजरक्खिया गुरूणो / जेहि भवअन्धकूवे निवडन्ता रक्खिया अम्हे // 105 / / एवं भावियचित्ता ते जाया सम्मदिट्ठिणो हिट्ठा / दुब्बलियपुस्समित्चस्स सज्झायझाणाण नाएण 1 // 286 // Page #300 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 3287 // AE% दुर्बलिकत्वबलित्वविषयकप्रश्नोत्तरे द्रमकदृष्टान्तः। // 106 // तम्हा संविग्गपरा सज्झाय जे कुणति मुणिसुहडा / ते जागरमाण चिय जयन्ति ! निहणन्ति मोहबलं // 107 // // दुर्वलिकापुष्यमित्राख्यानकं समाप्तम् // तथा भगवतः वीरजिनस्य प्रभाकरस्य प्रश्नोत्तरदानप्रभापटलेन प्रहतसंदेहनिद्राभरतया विकसनेत्रारविन्दा प्रमोदमकरन्दास्वादोल्लसद्भमरझंकारतारस्वरेण जयंती पुनरपाक्षीतदुबलियतं? साहु बलियत्तं? जिण जयंति ! पावाणं / दुबलियत्तं सेओ सद्धम्माणं तु बलियत्तं // 22 // व्याख्या-दुर्बलिकत्वं साधु प्राणीनां ? बलिकत्वं वा ? जिनति प्रश्नः, भगवान् पुनः प्राह-जयंति ! पापानां दुर्वलिकत्वं अयो, दुर्बला हि क्लिष्टचेतसोपि न प्राणीनामुपतापं कर्तुमलं भविष्णवः, प्रत्युतात्मनमेव दुर्गतौ पातयति / राजगृहनगरद्रमकवत् / तथाहि-आसि पुरा रायगिहं नयरं सुररइयकणयपायारं / गयणंगणं व गरूयं गुरुबुहुकविसूरपरियरियं // 1 // विन्हु व सिरिनिवासो जत्थ जणो नन्दणं व देहरूई / धम्ममासे रसिओ जह जोहो कयगुणारोहो // 2 // एगो दमगो तम्मिवि पुबज्जियपाबपरिणइवसेण / पइदिण भिक्खावित्ती अपचतित्ती गयसत्ती / / 3 // अह आगए वसन्ते नवपल्लवराइ. राइयवणन्ते / आन्दोलियचन्दणदुमलयानिलसुरहियदियन्ते // 4 // उजाणे गुणसिलए गयम्मि उजाणियाए रिद्धीए / लीलाविलासललिए परियणकलिए नयरलोए // 5 // एसो भिक्खावेलाए दमगो पइमन्दिरंपि हिण्डन्तो / सन्तो दुबलदेहो अलहन्तो कवलमित्तपि // 6 // पइगिहपिहियदुवारो एस उयारोवि अन्ज पुरलोओ। संभासगासवियरणपरम्मुहो कहह कह जाओ? // 7 // इय पुच्छन्तो जाणियवुत्तन्तो जाइ तम्मि उजाणे / सो पेच्छह पुरलोयं कीलन्तं विविहकीलाहिं // 8 // ACALCA%AA % % Page #301 -------------------------------------------------------------------------- ________________ A श्री जयन्ती प्रकरणपतिः / बलिकत्वे द्रढप्रहारिदृष्टान्तः। A // 288 // AAAAAAAG अइकन्तभुत्तिवेलो अलद्धभिक्खो खुहाए अक्कन्तो। कोहानलपञ्जलिओ चलिओ वेभारगिरिहुत्तं // 9 // गिरिमेहलमारूढो सिलमुवरिं पाडिऊण चुरेमि / एवं अदिन्नदाणं सबंपि जणं विलसमाणं // 10 // इय चिन्तिऊण दमगो महासिलं चालिउं न सक्केइ / तप्पुरओ द्वाउणं दुट्ठो हिट्ठा खणइ तयणु // 11 // तो इसि सिलाचलणे सदं सोऊण सयलपुरलोओ। अवसरइ तणएसा सोऊण तीए उवद्दविओ॥१२॥ एयारिसाण पावाणुबन्धिपावाण दुट्ठजीवाण / अबलत्तं चिय अमेसि होइ कल्लाणहेउत्ति // 13 // सो पुण दमगो पश्चिन्दियाण जीवाण घायपरिणामो / नरयपुरपहे पहिओ रूद्दज्झाणो लहुं होइ // 14 // ॥दुर्बलिकत्वे द्रमकाख्यानकं समाप्तम् // __ सद्धर्मणां पुनः बलिकत्वं श्रेयो, यतः सद्धर्मणो हि बलिष्ठाः कर्मारिवर्गपराभवप्रभविष्णवो विष्णव इव क्षमामात्मसात्कुर्वाणाः परां निवृत्तिमासादयन्ति, द्रढपहारिवत् / तहाहि नयरे लच्छीनिलए सोमे निवम्मि नीइजुन्हाए। दुरुज्झियसंतावे लोए कुवलयसिरीसहिए // 1 // होत्था माहणपुत्तो एगो धूमद्धउ व तावकरो / आरक्खियपुरिसेहिं नयरा निवासिओ दूरं / / 2 // दोसाणं कुलभवणं उत्तमलोयम्मि हाणमलहन्तो / चोराणं पल्लीए अल्लीणो पल्लिनाहस्स // 3 // तो देसगाममण्डलघायणदिड्वचित्तयं तयं नाउं / पल्लीवाणा दुविओ दढपहारित्ति नामेण // 4 // सवाणवि चोराणं स सम्मओ पावकम्मरसियाणं / रंगकरि च्चिय मित्ती समाणसीलाण जं होइ // 5 // ततो दढप्पहारी कहावसेसम्मि पल्लिनाहम्मि / अइकरसूरबलियत्तणेण पल्लीवई जाओ // 6 // पावाणुबंधिपुनो सुनीयचरिओवि पावयत्तेण / जमुणा गंगासंगमजलं व लोए पसिद्धो सो // 7 // एगम्मि सन्निवेसे रिद्धिस्थिमियम्मि तेण -%%A5 // तो देसगाममण्डलमा / रंगकरि चिया // 6 // पावाणुन // 288 // Page #302 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 289 // सेणाए / सद्धिं लुद्धो निवडह अहेगया रूहपरिणामो // 8 // एगो य तत्थ निवसई विप्पो दालिद्दकन्दलीकन्दो। छहदहिय- गर्मवतीडिम्भमण्डलदुकुडम्बो भिक्खणुज्जुत्तो // 9 // अह तम्मि दिणे घयपयसक्करसालीण सम्पओगम्मि / परमन्नमवक्खडियं ब्राह्मणी गहियं चोरेहिं तग्गेहे // 10 // डिम्भाइ रडन्ताई तुरियं गन्तूण तस्स साहिन्ति / अइदारुणदारुकरो निहणइ तेण तओ हत्वा द्रढविप्पो // 11 // पिच्छइ दढप्पहारी तं विप्पं चोरघायणुज्जुत्तं / तो कुणइ विगयपाणं निसियकिवाणं करे काउं॥१२॥ पहारिणो आपाव कीस तुमए कीणासमुहम्मि माहणो खित्तो। एयस्स घायणेणं अहं च डिम्माणि य हयाई // 13 // एयाहिं जात: हच्चाहिं चिश्चइयतणुस्स तुह मयस्सावि / जलणोवि नहु जलिस्सइ सुलहो नरएवि न पवेसो॥ 14 // हा दुद धिट्ठ पाविट्ठ कापश्चात्तापः। चिट्ठ कटुं तए तमिह दिनं / दालिद्ददवो जेणं होही जालावलीकलिओ // 15 // हा कीणास विलम्बसि कीस ? तुम जेण एस जीवाणं / दुहदन्दोलिं दिन्तो जमपन्थे नेसि 1 नहु सिग्धं // 16 // तुम्हारिसाण कुधफंसणाण पावेण अइदुहमरकन्ता / जाइस्सइ पायालं मन्ने सवंसहा अहुणा // 17 // इच्चाइयवयणाई पुणरूतं माहणीवि जम्पन्ती / तेणाऽसिणा हया सा सह गम्मेण दुखण्डभूएण // 18 // पुणरूत्तफुरफुरन्तं गम्भं दहण पाडिसिद्धीए / तस्सवि हिययं कम्पह दारूणदुक्कम्मभर. भरियं // 19 // तो कम्मपरिणईए चित्ताए तस्स होइ अणुतावो। पगरिसपत्तो सोसइ जीवसरे पावजम्बालं // 20 // सो निन्दन्तो रूढं घणवाहजलेण तयणु नियक्खित्ते / दुचरियसस्सं सिञ्चइ तह जह अहलं हवइ सयलं // 21 // किंच-आजम्माओ कयाई मए दुरन्ताइ पावकम्माई / अहह अणिट्ठियदुग्गइपहेसु पाहेयभूयाई // 22 // हिंसाइएसु अट्ठारसेसु हाणेसु भवणे रूढा / पावविसपायवा मह अणन्तमरणाई दाहिन्ति // 23 // माहणकुलेवि जाओ हणामि जीवाण दसविहे पाणा / | // 289 // 25 ACA%AAAA%EOS Page #303 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री अयन्तीप्रकरणवृत्तिः / अतिशयज्ञानिमुनिवरसंयोगे धम्मों पदेशः। // 29 CHEC // कुलदूसणो किमन्नो ? ममाउ पावो हवह लोए // 24 // एयाए माहणीए उयराओ गम्मनिग्गमो एस / सूयह मह निम्मतं नरयपुरद्दारमुग्घडियं // 25 // सचं चिय जम्पन्ती महदुच्चरियं महाणुभावेसा। अनाणन्धेण मया धिद्धी कह बम्भणी निहया? // 26 // मह पसरियपायाणं दुकम्मपावाण मेरूभूयाण / उवरिं चूला वट्टइ एसा णणु भाहणीहच्चा // 27 // एवं दुकम्मनिन्दापसरेणं परसुघायविसरेणं / छिन्नप्पायं तेण मूलाओ पाववणगहणं // 28 // पुणरवि दढप्पहारी चिन्तइ किं मम जीविएण' / आबालकालउ चिय दुरन्तघणपावमलिणेण // 29 // करवत्तघायभयरवजलजलणनिवायमूलभेयाणं / तो पावसुद्धिहेउं अप्पाणं केण घाएमि? // 30 // अहवा अप्पवहेणं इच्छह जो पावसुद्धिं महमूढो / सो पंकेण विसुद्धिं इच्छइ मयलाण वत्थाणं // 31 // एवं उबिग्गमणो तेसिं चोराण मज्झमवहाय / सुहकम्मपरिणईए वसेण उजाणमणुपत्तो॥ 32 // पेच्छइ तत्थ मुणीन्दे उवसमखीरोयपुन्निमाचन्दे। सज्झायज्झाणपरे पुवजियपावकम्महरे।।३३ // तारागणाण मज्झे जह चन्दो गयणमण्डले भाइ / तह तेण गुरू दिट्ठो दिप्पन्तो साहुमज्झम्मि // 34 // गन्तूण तस्स समीवे दढप्पहारी पमोयभरभरिओ / पणमियपायारविन्दो आसीणो धरणिवम्मि // 35 // विनायतम्मणेहिं अइसइनाणीहिं तेहिं पारद्धा / संसारजलहितरणी धम्मकहा भवकन्नसुहा // 36 // संसारम्मि अपारे पारावारे ममन्तजीवाण / मोहमहानिवदलणी दुल्लहा चउरंगसामग्गी // 37 // उक्तं च-चत्तारि परमंगाणि दुल्लहाणीह जंतुणो। माणुसत्तं सुइ सद्धा संजमंमि य वीरियं // 38 // दलियबो मोहनियो जस्स पभावेण मूढमणपसरा / जीवा धम्माधम्मं गम्मागम्माइं न मुणन्ति // 39 // अमुणन्ता पश्चासवपसत्तचित्ता | भवन्धकूवम्मि / पडिया पभूयकालं लहन्ति दुक्खाई तिक्खाइं // 40 // गिरिसरिओवलघसणसरिसेण अहापवत्तकरणेण / %ARHARAS494 % P // 29 // 9 Page #304 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 291 // कम्माण लाघवेण लद्धे चउरंगए सम्मं // 41 // संजमलच्छीसंगमनिव्वुइसुहसंपयं लहेउणं / कयकिच्चेहिमणतं कालं जीवेहिं द्वायत्वं // 42 // सो धीरो सो वीरो दृढप्पहारि ? विभावउ सो उ / जो अंतरंगकम्मारिवग्गं सुग्गं दलइ सहसा // 43 // ता सोम तुमं संजमभरधारणधोरिओ हवसु जेण / उल्लंघियभवमग्गो लोयग्गपयडिओ होसि // 44 // चिरकालसश्चियाई खणेण दारूणि दहह जह अग्गी / अहवा रयणीतिमिरं हरइ जहा सूरकरपसरो // 45 // तह संजमोवि सुन्दर ! पालिजन्तो तिहा विसुद्धीए / निहणइ सवं सिग्धं अणन्तभवसञ्चियपावं // 46 // इय धम्मदेसणाए दिणमणिकिरणावलीसगोत्ताए / चारित्तमोहणीयं नवणीयं लहु विलीणं सो॥ 47 // उल्लसियरोमकूवो भवकूवा निग्गयं व अप्पाणं / मनन्तो पडिवजह चिन्तामणिचारूचारित्तं // 48 // तो गहियदुविहसिक्खो पइदिणवियसन्तसुदिढसंवेगो। एसो दढप्पहारी अभिग्गहं लेइ गुरूमूले // 49 // सुमरामि जाव भयवं पावमिमं गब्भपायपञ्जन्तं / ता चउबिहमाहारं न करिस्सं सन्तपरिणामो // 50 // उवसमलच्छि पत्तो काउस्सग्गेण संडिओ तत्तो। महुमहुणो इव बलवं निम्महणो भवसमुदस्स // 51 // लोओवि तयं दहूं दुस्सहदुबयणलोहकन्देहिं / तस्सवणजुगं विन्धइ अणवरयं हिययगामीहिं / / 52 // तह जद्विमुट्ठिलिट्टप्पहारसम्भारजजरियदेहो / सहइ उवसग्गवग्गं मेरूगिरिन्द व निकम्पो // 53 // दिढसंघयणो सहणो बावीसपरीसहाण दुस्सहाण / तण्हाछुहाइयाण सुहलेसो सोममुखी // 54 / जं तस्स नाणदंसणचारित्तरयणाणि मुटु दिप्पन्ति / दुग्गोवसग्गवग्गे तेण खमारयणगम्भत्ति // 55 // एवं निचलज्झाणो कमसो उल्लसियवीरियायारो / आरूढखवगसेढी सम्पत्तो केवलं नाणं // 56 // सच्चं दढप्पहारी मुणिसीहो जमिह कम्मसत्तूण / निम्मुलदलणदक्खो सिद्धिपुरीरजमणुपत्तो // 57 // इय बलियत्तं जेसि जीवाणं होइ कम्म चारित्रं गृहीत्वा शान्तभावेन परिषहाः सोढाः, | केवलज्ञान प्राप्य सिद्धः द्रढप्रहारी। ASSICALCREARSHA Page #305 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 292 // %AC%ACAAAAAG निम्महणं / तं सेयं सिरिसंजमलच्छीसंगिकरसियाण // 58 // द्रक्षत्वाल|| बलिकत्वे द्रढपहारीकथानकम् // सिकत्वविअविसंवादिप्रश्नोत्तरदानसुधापानप्रमोदानिमिषनेत्रारविन्दा सरस्वतीव सहस्रानीकतनया जयन्ती श्रीवीरजिनेन्द्रं पुनरमाक्षीत् षयकप्रश्नो दक्खत्तं आलसियत्तमुत्तमं जिण जयंति ! आलस्सं / पाविट्ठदुदृचिट्ठे सिटुं सड्ढे लोए दक्खत्तं // 23 // चरे नन्दि अस्या व्याख्या-जिन ! किं दक्षत्वं अकालक्षेपेण साध्यसाधकत्वमुत्तमं ? किंवा आलसिकत्वं ?, तदनु भगवान् संबोध्य षेणमुनिपाह-जयंति ! लोके पाविढे दुढचेडे श्रेष्ठमालस्यम् / श्राद्धे लोके दक्षत्वं श्रेष्ठम् / ते घालस्योपहताः प्रायेणऽल्पारंभिणः वरोदाहप्राणीनां न निरन्तरमसातमुत्पादयन्ति / ये पुनराचार्योपाध्यायस्थविरतपस्विग्लानवृषभसाधर्मिककुलगणसंघविनयवैयावृत्या रणम् / दिकरणबद्धान्तःकरणाः तेषां दक्षत्वं तारकोपकारकतया दक्षमुनेरिव भवपरामवकारि भवति / तथाभूताश्च नन्दिषेणसाधुरिव सुराधीशस्यापि श्लाघनीया भवन्ति / तथाहि दीवे जम्बुद्दीवे भरहवासम्मि दाहिणद्धम्मि / मज्झिमखण्डे आरियदेसे एगम्मि गामम्मि // 1 // बालत्तणेवि जणणीजणयविरहेण पत्तदुहसेणो / नामेण नन्दिसेणो एगो माहणसुओ आसि // 2 // माउलगेहम्मि वगृह सह दोहग्गेण पाडि५ सिद्धीए / टप्परकन्नो कजलवनो अइलम्बअहेरूटो // 3 // मरूदेसकूवनयणो वानरवयणो सुथूलदन्तिलो। चिबिडनासो पिंगलकेसो थउडियसिरनासो // 4 // कक्करकक्कसफासो निदुरमासो निसाहपायतलो / अइविसमपाणिपाओ लम्बोयर१ अधरौष्ठः। 2 स्थपुटितशिरोम्यासः उच्चनीचमस्तकरचना यस्य / ' B292 // Page #306 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 293 // 4-OCESPECI5-15 मुनिवरं प्राप्य गृलहीता दीक्षा गीतार्थीभूय वैयावृत्त्यतत्परो जातः। मडहवच्छत्थलो // 5 // पत्तो कुमारभावे भणिओ सो माउलेण महगेहे / कम्माइं कुणसु मा भव आउलहियओ तुम वच्छ ! // 6 // जेण मह सत्ततणया वड्डन्तीओ कमेण चिट्ठन्ति / इच्छिस्सइ तारूने जा सा तुह वच्छ दायवा // 7 // आसापिसाइयाए गहियो सो कुणइ तयणु कम्माई / तत्तो माउलेणं जुबणसमयम्मि जिट्ठसुया // 8 // वुत्ता इच्छसि वच्छे ! किन्तु तुम नन्दिसेणवरमेयं / सा भणइ ताय नाहं एवं सुविणेवि इच्छामि // 9 // एयस्स देसं जइ पुण ताय ! तुम कहवि में अणिच्छन्ति / उन्बन्धणेण तोऽहं वावाहस्सामि अप्पाणं // 10 // तवयणं सोऊणं उविग्गो हवइ नन्दिसेणोवि / तो माउलेणं भणियं ज्वेयं कुणसु मा वच्छ ! // 11 // अवराणं पत्तेय छन्हं मज्झाओ पत्ततारूबा / इच्छिस्सइ जा सम्मं परिणाविस्सामि तं वच्छ ! // 12 // आसत्थो आसाए माउलगेहम्मि कुणइ सो कम्मं / चत्तो कमेण पत्ते तारूने ताहिं सबाहिं // 13 // किं मज्झ जीविएणं ? दोहग्गकलंकिएण पावेण / इय मरणज्झवसाओ बहिरूजाणम्मि सो पत्तो // 14 // तत्थ य मुणीण विन्दे मज्झगयं तारयाण चन्दं व / सोमं गणहरमेगं पिच्छइ धम्मोवएसपरं // 15 // तो लहुयकम्मयाए चिन्तइ सो नन्दिसेणवरविप्पो। वन्दामि मुणिवरिन्दं एवं तित्थंति काऊण / / 16 // गन्तूणं पयमूले वन्दइ आणन्दबहलपुलयंगो। उवलद्धधम्मलामो आसीणो सुद्धधरणीए // 17 // तत्तो गुरूहिं करुणारससायरमाणसेहिं सो भणिओ। उबिग्गो चिय दीससि सोम ! तुमं केण कजेण ? // 18 // विणयपणएणं तेणं गुरूण उद्वेगकारणे कहिए। धम्मोवएसदाणे चारित्तं गिन्हए एसो // 19 / / विणएण दुविहसिक्खं गिन्हन्तो तो कमेण संविग्गो / पत्तो गीयत्थपयं वेयावच्चम्मि ओज्जुत्तो // 20 // इन्दियदमेण दन्तो कोहाइकसायचाइओ सन्तो / तवचरणकरणनिरओ आलस्सपमायओ विरओ // 21 / / सो नन्दिसेणसाहू आयरियाईण CARE Page #307 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 294 // CA5% ओसहाईहिं / काऊण समाहाणं मए हि भुत्तवमणुदियहं / / 22 / लेह अमिग्गहमेयं पालिन्तो तो गणम्मि विक्खाओ / जाओ सलहणिजो मेरूगिरिन्दो व मज्झत्थो / / 23 / / अह सो निरीहवित्ती वेयावच्चम्मि निच्चलपवित्ती / आलस्सविहिनिबित्ती जाओ ससिसंखसमकित्ती // 24 // सोहम्मसुरिन्देण ओहिनाणेण नायगुणविन्दो / साणन्देण सुराणं मज्झम्मि पसंसिओ एवं // 25 // हं भो सुणन्तु देवा वेयावच्चम्मि नन्दिसेणमुणी। निचलचित्तो कहमवि चालिजइ नेव देवेहिं // 26 // एवं सुरिन्दवयणं एगो सोऊण तियसवरनाहो। आगन्तूण विउवह मुणिरूवं रोगगणगहियं // 27|| नगरस्सन्तो पविसई रूवेण तेण साहुबसहीए / गन्तूण भणइ भो भोको तुम्हं नन्दिसेणोत्ति ? // 28 // साहहिं दंसिओ सो उवइट्ठो छदुपारणे कवलं / मणिऊण नमोकारं गिन्हन्तो पाणिकमलेणं // 29 // मुणिरूवसुरेणेसो तो वुत्तो तेण आसुरूत्तेणं / वेयावच्चकराहम ! तुमंसि अप्पम्भरी चेव ? // 30 // न कुणसि निग्घिण! जेणं गिलाणमुणिपुंगवस्स पडियरणं / इइ सोचा तत्वयणं मए न नायंति भणिऊण // 31 // मोत्तण पाणिकवलं उदुइ तो नन्दिसेणमुणिसीहो / पुच्छइ कत्थ गिलाणो चिट्ठइ रोगेण केणत्तो ? // 32 // मुणिवेसेण सुरेणं वुत्तमईसारपीडिओ बाहिं / चिट्ठह विट्ठालित्तो तण्हासुक्ककण्ठुट्ठो // 33 // तो नन्दिसेणसाहू तुरियं परिभमइ नयरमज्झम्मि / फासुयजलगहणत्थं देवो पुणऽणेसणं कुणइ // 34 // परिभ्यदिवसत्ती तवप्पभावेण गहियसुद्धजलो / सुरदंसियमग्गेणं उजाणे जाइ हिट्ठमणो // 35 // तो तेण गिलाणेणं वोत्तो पाविट्ठ निट्टरमणोसि ? / उयरमरणिक्करसिओ वसिओ न गुरूण पयरले / / 36 // नाएवि गिलाणत्ते आगाढे मज्झ कालक्खेवेण / जमिहागओसि ? निद्दय ! तमगीयत्थो असंविग्गो // 37 // एएण उजमेणं कह तुह संसिञ्जए ? जए एयं / वेयावच्चगरत्तं ? दुदइवदिन कलंक वा // 38 // इच्चाइनीरसेहिं वयणेहिं तजिओवि सुपसनो / हा वयावृत्त्य विषयां शक्रकृता प्रशंसा श्रुत्वा नन्दिषेणो देवेनैकेन परीक्षितः। CC ACAD Page #308 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 295 // CSCA-154CICIA देवेन क्षामितो | मुनिवरः, एतादृशि दक्षत्वं श्रेष्ठम् / सो नन्दिसेणसाहू मियमहुरं भणिउमाढत्तो // 39 // मुणिपुंगव धीर तुम सम्म पक्खालियम्मि अंगम्मि / पियसु जलं सीयमिण आसत्थो होसु सोम ! तुम // 40 // आगच्छसु पुरमझे तुरियं चिय मज्झखन्धमारूढो / विजोवइद्वपत्थोसहेहिं लहु लहसि आरोग्गं / / 41 // एवं महुरगिराए महुमहुराए भणिजमाणोवि / पक्खालियसवंगो जलपाणेणं विगयतण्हो // 42 // कडुयं चिय जम्पन्तो आरूढो तस्स खन्धदेसम्मि / अइसयदुस्सहगन्धं वारंवारं मुयइ असुई // 43 // कहमेस महाभागो सिग्धं आरूग्गभायणं होही। इय वच्छलपरिणामो चिन्तइ सो नन्दिसेणोवि // 44 // कहमेस मुणी लहिही ? लहुं समाहिं महोसहीजोगा। कोवो सजणचरिओ विगिच्छओ सत्थओ होही? // 45 // अच्छरियं तस्स दढं गिलाणदुबयणतवणकिरणेहिं / उवसमपीउसरसं सिन्दइ फलिहुजलं चित्तं // 46 // अह पुरवरअन्मासे ओहिनाणेण नन्दिसेणस्स / पिच्छइ सच्छं देवो माणसजलसच्छहं हिययं // 47 // तो पयडियनियरूबो देवो मणिमउडकुण्डलाहरणो। परितुट्ठमणो वन्दइ पयकमलं नन्दिसेणस्स // 48 // थुणइ य भत्तिभरेणं गुणमणिरोहणगिरिन्द ! मुणिराय / जयसि तुम जियसयलऽन्तरंगरिउवग्गमाहप्प / / 49 // अवि चलइ मेरूचूला समुद्दवेलावि चयइ मजायं / वेयावच्चपइन्ना तुह मुणिवर निचला सच्चं // 50 // साणन्देणिन्देणं तुज्झ पसंसा सुराण मज्झम्मि / जेण कया तेणाहं समागओ देवलोगाओ // 51 // अन्नाणन्धेण मए तुज्झ परिक्खानिमित्तमायरियं / जमिह तए खमियवं मुणिन्द ! महचिट्ठियं तं तु // 52 // ताविजन्तेवि बहुं कणगे अहियं हवेइ जह सुद्धी / तह तुहुवसग्गेवि हु अभिग्गहे निम्मला बुद्धी / / 53 // आयरियगिलाणाईसु वच्छल्ले सल्लइवणनिउछे / मुणिकुञ्जर तुज्झ रूई सहावओ निचला चेव / / 54 // दुग्गोवसग्गवग्गे खमावहे कायराण दुल्लंघे / उक्खित्तमार 4%A E%A5% S C4 295 // Page #309 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 296 COMCHA+PARC+% निव्वहणे सच्चं मुणिपुंगवो तंसि // 55 // दूरीकयमयपसरो गुरूमाणकरिन्दविन्दनिद्दलणो। मुणिसीह वससि जुत्तं गुरूकुलवासे * श्रोतेन्द्रियगुहावासे // 56 / वेयावच्चे नियमो मेरूगिरिन्दो व निच्चलो तुज्झ / किं चोजं विबुहाणवि जं संथवगोयरो होइ / / 57 // वशग: धन्नोसि तुमं मुणिवर तुज्झ सलद्धो य माणुसो जम्मो। तुमए तं खमियत्वं अवरद्धं जं मए तुज्झ // 58 / / इय संथवणं काउं प्राणी हिट्ठो संतुट्ठमाणसो देवो / नमिऊण नन्दिसेणं जहागयं पडिगओ झत्ति // 59 // सोवि मुणी पुरमज्झे साहहिं उवासयम्मि कीदृशः पविसन्तो / पुट्ठो कहिं गिलाणो ? कहइ इमं देवमायत्ति // 6 // एवं जयंति ! कुलगणगिलाणगुरूसेहबालवुड्डाणं / वेया- कर्मवन्धः वच्चविहाणे सेयं चिय होइ दक्खत्तं / / 61 // 4 करोतीतिः ॥दक्षत्वे नंदिषणाख्यानकं समाप्तम् / / प्रश्नोत्तरम्। एवं श्रीवर्धमानजिनचन्द्रेण दक्षत्वप्रशस्यताविषयसंशयापनोदक्षीरोदसमुल्लासे सहस्रगुणव्यक्तभक्तिमुक्तावलीशृंगारितहृदयस्थली जयन्ती श्राविका पुनः प्रश्नयामास-तथा च सूत्रंपुण पुच्छेइ जयन्ती भंते सोइन्दियस्स वसगो कि?। बंधइ चिणइ उवचिणइ जयंति! सिय सत्त सिय अट्ट॥२४ कम्मपगडीओ दढं बन्धइ पकरेइ चिणइ उवचिणइ / लोयणघोणारसणाफरिसणवसगावि एमेव // 25 // इत्यादि व्याख्या-श्रोत्रेन्द्रियवशगः प्राणी किं बध्नाति ? किं चिनोति ? किमुपचिनोति ?, भगवान् प्राह-जयंति स्यात् सप्त स्यादष्टौ वा, कर्मप्रकृतीरायुर्विहीनाः सप्त, आयुःसहिता अष्टौ / अद्रढा द्रढीकरोति, चिनोति-अल्पप्रदेशा बहु| प्रदेशीकरोति / उपचिनोति-मंदानुभावाः तीव्रानुभावा अल्पकालस्थितिका बहुकालस्थितिकाः करोति / लोचनघ्राणरसना- ID // 296 // RANKS Page #310 -------------------------------------------------------------------------- ________________ CI // 297i श्रोत्रेन्द्रिय विषयास|क्ता भद्रा सार्थवाहीदृष्टान्तः। स्पर्शनवशमा अप्येवमेव / श्रोत्रंद्रियविषयव्यासक्तो हि जीवो प्रान्तमनाः सार्थवाहपत्नीव इहलोकेऽपि प्राणव्यपरोपणमाप्नोति // तथाहि आसि इह भरहवासे नयरं नामेण पउमिणीखण्डं / तत्थ नीइपहाणो होत्था पउमप्पहो राया ॥१॥धणउ व धणी धनो रनो अइवल्लहोत्ति सुपसिद्धो। धणनामसत्थवाहो आसी पुरलोयनमणिजो // 2 // तस्स य भद्दा धरिणी करिणी घणदाणरसियकरपसरा / उत्तमकूलसम्भूया रहभ्या रुवलच्छीए // 3 // पुबभवजियपुन्नाणुमावसम्पनवन्छियत्थाण / ताणं वच्चइ कालो परूप्परं पेमवन्ताण // 4 // अह अन्नया निसन्ते जागरमाणो इमं विचिन्तेइ / एस धणसत्थवाहो सयावि पडिवननिबाहो // 5 // पुरिसस्स जाव लच्छी अणिट्ठिया सुट्ट भुजमाणावि / तावच्चिय सोहग्गं हवइ जए गउरवं ताव // 6 // दिणमणिकिरणकलावे पसरन्ते हुन्ति जह जए पयडा / अत्था तह अत्थेण गुणा वि परिवढ्डमाणेण // 7 // इच्चाइ चिन्तिऊणं भणिया भद्दा अणेण जह मद्दे ! / अत्थोवजणहेउं गच्छिस्सं अनदेसम्मि // 8 // चिरसंचियावि लच्छी छिनइ जम्हा अणायवयवसओ / निच्चं उल्लिञ्चन्तो कालेणं सुसह जलहीवि // 9 // तुमए पुण कायवो घरम्मि अप्पम्मि रक्खणापयत्तो / जावऽजिऊण अत्थं अहमागच्छामि निविग्धं // 10 // देसन्तरविणिवत्तणजोग्गाइ कयाणगाई चित्तूण / वाणिजेणं गच्छड़ एसो गरूएण सत्थेण // 11 // महावि घरे चिट्ठइ नेवत्थेणं पउत्थवइयाए / धणसत्यवाहपिययमसुमरणगुणगीयरसियंगी // 12 // अन्नम्मि दिणे तीए दासी सम्पेसिया विवणिमग्गे / किणणत्थं पणियाणं चिरेण पत्ता घरे तत्तो // 13 // भद्दाए रुवाए निट्ठरवयणेहि तजिया दासी / आ पावे कत्थ ठिया ? अवरावरकजभंगेणं // 14 // भदाहुत्तं वुत्तं तीए सामिणि ! सुणेहिं 15645453 // 297 // Page #311 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पुष्पसाल जयन्तीप्रकरणवृत्तिः / // 298 // ॐA4%ACE विनत्तिं / जह इत्थ पुष्फसालो एगो गन्धविओ अस्थि // 15 // रायपहे सो दिट्टो गायन्तो तुम्बरो व सो गीयं / तेण || दास्युक्तसवणामएणं अक्खित्तो पुरजणो सम्बो // 16 // गीएण तस्स सामिणि ! सरसेणं सवणगोयरगएणं / तहाछुहादुहाइवि पसुयाणवि दरओ जन्ति // 17 // अहलच्चिय ते कन्ना अमियरसासारसारगीएण | जेहि न पत्तं सुक्खं देवाणवि दुल्लहं | गीतश्रव. देवि ! // 18 // महुरदक्खापाणं तत्तो विय होइ सकरापाणं / तत्तो विय अमियरसो तओवि मन्नेमि तग्गीयं // 19 // ता रणाभिलाषो सामिणि ! कोवभरं ममोवरि मा करेहि जेणाहं / गन्धवियगीएणं अञ्चन्तपरवसीभूया // 20 // इयविन्नत्ते तीए भद्दा अक्खि. भद्रायाः। तमाणसा जाया। उम्माहमुवहन्ती गन्धवियगीयसवणम्मि // 21 // जम्पइ दासीहुत्तं हले कहं ? पुप्फसालगीयमहं / अविगाणेण मुणिस्सं कनाण रसायणमणनं // 22 // दासी भणेइ सामिणि! पउत्थवइयाण सीलवंताण / देवायणमि पूयामिसेण जुत्तं पहिं गमणं // 23 // ता देवि अहं कम्मिवि महूसवे देवमन्दिरे कम्मि। गीयावसरं नाउं जाणाविस्सामि सिग्धयरं // 24 // अह अन्नदिणे जत्ता जाया जक्खस्स मन्दिरवरम्मि / जाणावियाए तीए गंतुं तो उस्सुया भद्दा // 25 // न्हाया कयवलिकम्मा पुप्फसणाहपरियरसमग्गा / जा गच्छइ जक्खगिहे उवसन्तं ताव पिच्छणयं // 26 // तो मदाए भणिया दासी गन्धव्वियंपि दंसेहि / सो य पसुत्तो देउलच्छायाए दंसिओ तीए // 27 // परिगलियलालवयणतरालअइविसमलम्बदन्तुट्ठो / कन्जलसामलदेहो दिट्ठो गन्धविओ तीए // 28 // दगुण पुप्फसालं विसण्ठुलं कुच्छणिजसवंगं / उच्छलियदुगञ्छाए खित्तं धरणीए निट्ठवणं // 29 // दिलै कुसीलवेहिं तीए गेहं गयाए सो हसिओ / किं ? तुज्झ जीविएणं गीएणं वापि महुरेणं // 30 // धणसत्थवाहपत्ती सुयकित्ती तुज्झ गीयसवणत्थं / रूवेण मयणघरणी समागया आसि रहसेण // 31 / / सुत्तस्स मा 298 // X Page #312 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 4% // 299 // 4 // तुझ रूवे जुगुच्छणिजम्मि दिट्ठमित्तम्मि / निट्ठीवणेण तीए अम्ह समक्खं कयाऽवन्ना // 32 // आरुद्वेणं तेणं तीए चरियं भद्राया पउत्थवइयाए / धणसत्यवाहपेमाणुबन्धरमणीयमह रइयं // 33 / / जह एस सत्थवाहो पत्तो देसन्तरम्मि पइदियहं / धणलामेवि अकालमहन्ते सुमरइ भदं नियपरिणिं // 34 // एसा विउला लच्छी तुच्छच्चिय पणइणीए भद्दाए / विरहहयासणताये कह सन्तोस मरणे कुणउ मम // 35 // चिरविरहदुन्बलंगी मह संगमजलहरेण लइय व / पुलयंकुरेहिं कइया? सवंगसुन्दरा होही // 36 // कुगतिः पेमाणुबन्धदुद्धोदहिस्स लहरीहिं हसियकडक्खेहिं / विरहग्गीतावहरणी कइया मइ वल्लहा होही ? // 37 // एवमणेगमणो- संसाररहरहेहि निच्चप्पयाणयविहीए / एइ धणसत्यवाहो भद्दासंगमकओम्माहो // 38 // न रूई जायइ कहमवि तस्साहारेसु नन्न- का परिभ्रमणं दारेसु / पेमाणुबन्धवसओ हियए मदं वहन्तस्स // 39 // एवं उम्माहेणं इन्तो सो सम्पयं पहायम्भि / घरदारे सम्पत्तो खेमेणं सत्यवाहोति // 40 // इय चरियं गुम्फेउं पच्छिमरयणीए तीए आवासे / गंतूण पुप्फसालो गायइ किन्नरसरेणेसो // 41 // गीएण तेण महुरस्सरेण सरसेण अभियसरिसेणं / भद्दा जग्गइ चिन्ता किमेस सग्गाओ उवइनो ? // 42 / धणसत्यवाहनामे कनपविट्ठमि हिययइट्ठम्मि / मह पाणनाहचरियं गायइ एसो महच्छरियं // 43 / / एवं साणन्दाए भद्दाए पाणनाहचरियम्मि / गाइजन्ते महुरं निसुयं जह एस मज्झ पिओ / / 44 // घरदारे सम्पत्तो तत्तो उम्माहपरवमा एसा / उन्मुट्ठिऊण मुबह अप्पाणं वासमवणाओ // 45 // अइदूराओ पडिया दारूणसवंगभंगदुःखेहि / अट्टज्झाषण मया भमडइ संसारकन्तारे // 46 // सोइन्दियवसगाणं जीवाणं दुट्ठकम्मबद्धाण / भवसायरम्मि दुल्लहो धम्मो जिणरायपन्नत्तो // 47 // नाऊणेवं तम्हा अणवस्य सुगुरुपायमूलंमि / जिणवयणं सोयई जं कन्नरसायणं परमं / / 48 // जेण निसुएण जीवा IP // 299 / / %atARCHASE Page #313 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणवृत्तिः / जालोचनेन्द्रि यविषयासक्तौ वणिकपुत्रोदाहरणम् / 300 // मुणिन्दकिरियाकलावकरणेण / कम्मायकविमुक्का लहन्ति अजरामरं द्वाणं // 49 // ।इति श्रोत्रंद्रियविषये भद्राकथानकं समाप्तम् / एवं लोचनेन्द्रियस्यापि गोचरे रमणीयरमणीरूपे प्रतिक्षणं-वीक्षणलोलतायां गम्यागम्यविवेकाविवेकविहीनाः प्राणिनः पतन्ति नरकगोंदरे / तत्राऽनुभवन्ति दुरन्तदुःखानि मथुरावास्तव्यवणिकपुत्रवत् / तहाहि अस्थि इह भरतखित्ते महुरानामेण पुरवरी जीए / अञ्जवि केसवचरियं गिजइ जमुणानईतीरे // 1 // जत्थ उविन्दो जाओ कंसासुरदप्पदलणदुल्ललिओ। अमरावइसगोता धणिमुणिविबुहेहिं सा जुत्ता // 2 // तत्थासि नरवरिन्दो सुत्थीकयसयलमण्डलनिवेसो। जियसत्तुनामेणं अत्थेणवि भुवणविक्खाओ // 3 // जस्स गुणावलिवल्लीवियाणभुयदण्डमण्डवे सुहए। तेलोक्कममणसुढिया( भ्रमणश्रान्ता) सुइरं वसिया सुहं लच्छी // 4 // लायण्णामयसरसी अणुरायवर्णमि सारिणीसरिसी / रूवेण मयणघरिणी तस्सासि धारिणी देवी // 5 // उवणजुवणलच्छी ललियगई तत्थ हरिणतरलच्छी। जा मणमोहणवल्ली अणंगधाणुकवरवल्ली // 6 // अह अच्चन्ते काले निकण्टकं रजमणुहवन्ताणं / ताणं पणयपराणं महुमासमहसवो पत्तो // 7 // जम्मि मलयानिलेणं मउरिजन्तेसु अम्बयवणेसु / इन्ति सिरिनेउरावमहुरं रहन्ति भमरीओ // 8 // कोइलकलावकोमलकलयलदंभेण पंचमं रायं / गाइन्ती महुलच्छी सोहग्गं लहइ लहु निहुयं // 9 // पसरन्ति चच्चरीओ अवरावरचच्चराइट्ठाणेसु / तरूणतरूणीण जासुं नजइ सग्गो समोइनो // 10 // सिंगारसारतरूणीपायपहारेण | जत्थ पुष्फन्ति / परिपूरियदोहलया रत्ता किंकिल्लितरूनिवहा // 11 // बहलमयरन्दसन्दिरमायन्दसुयंधिमंजरीहत्थो / 4 // 30 // Page #314 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 01 // पतायां % 81%AA%ECISHA | पिच्छइ अत्थाणगयं रायं आरामिओ तत्तो // 12 // पणमित्तु पायपउमं अप्पइ सहयारमंजरि रन्नो / विनवइ देव ! पिच्छह | चिक्षुर्लोलु महंमि उजाणवरलञ्छि // 13 // जेणं नयरजणाणं रज्जे तुह देव! सुत्थियमणाणं / विलसन्ताणं लच्छि सामिसमक्खं हवइ तोसो // 14 // तत्तो जियसत्तू निवो गच्छह अन्तेउरेण परियरिओ। सामन्नमन्तिमण्डलसामग्गीए समिद्धीए // 15 // महेश्वरगच्छइ उजाणवरे देवी वि हु धारिणी सपरिवारा / आरूढनरविमाणा देवंगच्छाइयसरीरा / / 16 / / तीए गच्छन्तीए महुरा- दृष्टान्तः। वत्थक्ववणियपुत्तेण / दिट्ठो महेसरेणं पायंगुट्ठो अइविसिट्ठो // 17 // तो चक्खुलोलयाए चिन्तइ सो मयणबाणविद्धमणो / जीए अंगुट्ठोवि हु एवं लावन्नसम्पुनो // 18 // तीए तिहुयणअहिया मन्ने सवंगरूवसम्पत्ती / जइ मह इमीए लाहो न होइ ता निष्फलो जम्मो // 19 // तह कामवाणविद्धो सा तीए रूवलच्छीए। पुच्छइ कस्सइ पासे कस्सेसा कहसु वरतरूणी // 20 // तेणवि कहियं रनो अभग्गसोहग्गसम्पयासहिया। लायनपुग्नदेहा पाणप्पिया धारिणी नामा // 21 // तब्बयणस्सवणेणं घयमहुसित्तु व मयणजलणो से / दिप्पन्तो सन्तावं जणइ महन्तं तयंगम्मि // 22 // दुल्लहवत्थुम्माहो दाहो जीवाण जलणविरतेऽवि / जाओ अप्पडियारो विवेयवररयणसंहारो // 23 // तीए संगमरसिओ उवायचिन्तापिसाइयागसिओ। आवणमेसो गिन्हइ रायगिहासन्नभूमीए // 24 // अन्तेउरदासीओ आसन्ने तम्मि आवणे इन्ति / किणणात्थं पयदियहं कप्पूराईण वत्थूण // 25 // सोवि धणड्डवियड्डो बिचित्तभंगेहिं महुरवयणेहिं / आवजह दासीओ पहाणबहुगन्धदाणेण // 26 // सो पुच्छइ तुम्हाणं धारिणीदेवीयसन्तिया काओ / इय पुढे कहियाओ जाओ तासिं मुहा देइ / / 27 // तो हिट्ठा तुट्ठाओ ताओ गन्तूण धारणिं देविं / बहु विन्नवन्ति सामिणि ! एसो वणिओ * 301 // CRECRUCKINARREARRA | दासीओ कणणात्थं पयदियोमसो गिन्ह रायपाडियारो विवेयवरस्यता जणइ महन्तं पिया धारिणी तासि बहादशाहगन्धदाणेण // २वराईण वत्थूण // रासनभूमीर // २४ाने Page #315 -------------------------------------------------------------------------- ________________ / // 28 // एयाए नपरीय TI राशी पुडियाओ। एयाओ कस्स भी जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 302 // अप्पेमो // 31 // एवं जनार्दनस्य लेखाद् भग्नहृदयो भूत्वा. 4 आइउदारो // 28 // एयाए नपरीए अमो लायमपुनसम्पुयो / अइमारललियबाणी नस्थि वियत्रो घणडो य // 29 // अह अनदिणे तेणं ताओ पुट्ठाओ गन्धपुडियाओ। एयाओ कस्स करे मपप्पियाओ समप्पेह // 30 // ताहिंपि तओ कहियं एयाओ तुम्ह गन्धपुडियाओ। देवीए धारिणीए हत्थे नबस्स अप्पेमो // 31 // एवं नायसरूवो दिवसे एगम्मि गन्धपुडियाए / मज्झम्मि खिवइ लेहं नेहं जाणाविउं मुद्धो // 32 // तद्यथा-काले प्रसुप्तस्य जनार्दनस्य मेघान्धकारासु च शर्बरीषु / मिथ्या न जल्पामि विशालनेत्रे ! ते प्रत्यया ये प्रथमाक्षरेषु // 33 // तो दासीए अप्पड़ सावि य गन्तूण तयणु देवीए / देवीवि जाव जोयइ तम्मज्झे पिच्छए लेहं // 34 // एगन्ते गन्तूणं वायइ देवीवि तो विचिन्तेइ / धीधी कामन्धयाण जीवाणमगोयरे गिद्धी // 35 // पडिबोहेमि इमंपि य पडिलेहेण कडक्खरेणाऽहं / जेणेसो पडिबुद्धो नहु लिप्पइ पावपंकेण // 36 // इय चिन्तिऊण देवी अप्पर पडिलेहगम्भिणं पुडियं / दासीए इय भणिउ महुगन्धाऽसुन्दरा अज्ज // 37 / सावि य गच्छइ तुरियं तस्स समीवम्मि उस्सुयमणस्स / जम्पइ अज सुअन्धा कहं ? न गन्धा भणइ देवी / / 38 // तेणवि भणियं एवं अनगिन्हाहि गन्धपुडियंति / तं घेत्तुणं हिट्ठा एसा दासी पडिनियत्ता / / 39 // वणियो महेसरो सो पुडियामज्झम्मि धारिणीलेहं / दट्टणं परितुट्ठो वायइ उप्फुल्लमुहनयणो // 40 // तद्यथा-नेहलोके सुख किश्चित् छादितस्यांहसा भृशम् / मितं च जीवितं नृणां तेन धर्मे मतिं कुरु // 41 // तो अवगयलेहत्थो कामविहत्थो | निरत्थयारम्भो / अट्टज्माणपयट्टो हट्टवावार पमुत्तूण // 42 // देसन्तरम्मि गच्छइ कामगहगहियमाणसो कहवि / कत्थवि रई न पावइ झायन्तो धारिणि देवि // 43 // एगम्मि पुरे पिच्छइ विज्झामठसंद्वियं उवज्झायं / चट्ठाणमुवइसन्तं परमत्थं देशान्तरं गतो महेश्वरः। P // 302 // Page #316 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 303 // कथा BHARASHRECrotest रायनीईयं // 44 // तद्यथा-न शक्यं त्वरमाणेन प्राप्तुमर्थान् सुदुर्लभान् / भायां च रूपसम्पचा शत्रणां च पराजयम् हारप्रभा॥४५॥ सुगुरूपदिष्ट जिनवरवचनश्रवणेन शुद्धतरबुद्धिः। भेष्ठिसुतो जिनदत्तो दृष्टान्तः श्रावकश्चात्र // 46 // तथाहि-आसि प्राप्ति वसन्तमि पुरे सेद्विनामेण उसमदत्तो ति / तप्पुत्तो जिणदत्तो रत्तो भत्तो जिणमयंमि // 47 // वित्तॄण महग्याई कयाण विषया गाइं विचिचरूवाई। वाणिजेणं संपत्तो महल्लसत्येण चंपाए // 48 // तत्थऽथि सत्थवाहो धणोति नामेण धणसमिद्धो / जिनदत्तधणयसमाणो नायरजणम्मि कयरायसम्माणो // 49 // तेण समं सम्पन्ना मित्ती जिणदत्तसिठ्ठीपुत्तस्स / सरिसगुणाणं जम्हा पाएणं संगय होई // 50 // तस्स य धणस्स धूया सवंगोवंगसुन्दरा अस्थि / मयणनिवरायहाणी अभग्गसोहग्गसवाणी // 51 // श्रुता तेन। नामेणं हारपहा कमा तिसमुद्दसारभूया य। रयणावलीव महग्या अच्चन्भुयतेयगुणकलिया // 52 // अह अमदिने भोयणकजेण निमन्तिओ धणेणेसो / जिणदत्तो जेणेवं समावपाविद्धिमुवयाइ // 53 // तेणं उवरोहेणं पडिवने भोयणम्मि धणगेहे / भुंजन्तस्स तओ सा हारपहा तालियंटेणं // 54 // धम्मं निवारयन्ती पलोइया तेण निउणदिडीए / सवंगं ता विद्रो जिणदत्तो मयणवाणेहिं // 55 // भुत्तुंत्तरंमि कप्पुरमाइसुरहिम्मि सरसतम्बोले / दिने जिणदत्तेणं गोट्ठीए पुच्छिओ सेवी // 56 // जइ एसा तुह धूया कमा ता मम दिजउ इयाणि / तो सेट्ठीवि पइम्पइ कहसु कुलं तह य नियधम्म // 57 // सिद्धे कुलम्मि भणइ धणो तस्स देमि नियधूयं / सुगुरूणं वयणेणं जो सिवपयपउमसंलीणो // 58 // जिणदत्तगुणावजियहियएण धणेण पुच्छिया गुरूणो / तेहिवि अणणुनाए पडिसिद्धो तेण जिणदत्तो / / 59 // सविसाओ तो पत्तो निययपुरे अजिऊण बहुदवो / एइ पुणो चपाए माहणविञ्जस्थिवेसेण // 60 // उज्झायम्स समीवे गन्तुं सो भणइ विणयपणयपओ / अहमा- Ix // 303 // CAE% Page #317 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जिनदत्तेन विद्यार्थी जयन्तीप्रकरणइतिः / हारप्रभा* वाढता। // 304 // CACANCHA%CE% गओऽम्हि विजापढणत्थं तुम्ह पयमूले // 61 // जणणीजणयसमाणो विजत्थीणं तुमंति सुहकिती। देसन्तरेसु पसरइ ससिसंखसमुञ्जला जेण // 62 // इय विनत्ते तेणं उज्झाओ भणइ वच्छ ! पाढइस्सामि / भोयणसामग्गि पुण मग्गसु धणसत्यवाहंति // 63 // अनेवि धम्मचट्टा जम्हा भुञ्जन्ति तस्स गेहंमि / तेणुत्तं तुह वयणा से दाही सिट्ठीति पइदियहं // 64 // तबिणयरंजिएणं उज्झाएणं घरम्मि सिद्धिस्स / सो नीओ तो सेट्ठी बोतो अज्झावएणेवं // 65 // देसन्तराओ पत्तो विजत्थी तुम्ह भोयणेणेस / निच्चिन्तो पढइ सुहं तुम्हाणं होउ सेयंति // 66 // धणसिविणावि भणिया धूया हारप्पहा समीवत्था / निच्चं इमस्स वच्छे ! दायत्वं भोयणं तुमए // 67 // हरिसेणेसो चट्टो चिन्तइ सुवे घयं पलुटुं ति / तिकढियदुद्धे निद्धे अचिंतिओ सक्करापाओ॥ 68 // अहवा वल्लूरेणं मजारो दामिओ जहा सुहिओ। होइ तहाऽहं मन्ने होक्खामि सुद्दी लहुं चेव / / 69 // इच्चाइ चिन्तिऊणं निचं कुसुमेहि परिणयफलेहिं / हारप्पर कुमारि उवयरइ वियड्डवयणेहिं // 70 // अक्खइ अक्खाणाई मयणानलइन्धणाई विविहाई / कन्दप्पदीवणं तह कुणइ पगभं च परिहासं // 71 // तो कइवयदिवसेहिं पारिहासम्भासपासपडिबद्धा / विद्धा पञ्चसरेहिं मोहणमाईहिं बाणेहिं // 72 // अन्नं च-अणुदियकुसलं परिहासपेसलं लडहवाणिदुल्ललियं / आलवणं चिय महिलाण मोहणं किं स्थ मृलीहिं ? // 73 // अणुदियहं वहन्तं परिहासे विविहपयडियविलासे / अब्भासट्ठियं पुरिसं लय व पमया पवजंति // 74 // ता मयणपरिवसाए गाहापढमक्खरेहिं जिणदत्तो। वोत्तो कहिए सव्वे वुत्तन्ते हिट्ठचित्ताए // 75 // | तद्यथा-हसियं तुह हरइ मणं रमियंपि विसेसओ न सन्देहो। मयणग्गितावियाऽहं मं निवव संगमजलेण // 76 // Page #318 -------------------------------------------------------------------------- ________________ हारप्रभा अहिलीभूता। CRORROCURESCORK जिणदत्तो पुण जम्पइ अणुरत्ता जइवि तंसि मझुवरि / तहवि य अदिनकना परिणयणे अस्थि नियमो मे // 77 // कजं परिवाडीए कीरन्तं होइ सुहयपरिणाम / इहपरलोयविरूद्धं बुहेहिं रहसा न कायवं // 78 // ता तह करेसु सुन्दरि ! जह सिट्ठी देह मज्झ सयमेव / तीए मणियं किं पुण! करेमहं कहसु तं चेव // 79 // तो जिणदत्तो जम्पह गहगहिया होसु तं कवडसहिया। महमन्ततन्तजन्तप्पओगओ तुह गुणे जाए // 8 // सिट्ठी तुट्ठो सयमवि दाही ललियंगि! मज्झ तं मन्ने / इहपरलोयसिद्धी एवं चिय होइ मह बुद्धी // 81 // इय अन्नुन्नं मन्तिय अन्नदिणे सा गहिल्लिया होइ / असमञ्जसाइ जम्पइ दुटुं चिट्ठ कुणइ सवं / / 82 // सिट्ठीवि धणो दटुं हारप्पहं निप्पहं नियं तणयं / परमत्थमयाणन्तो अञ्चन्तं आउलीहूओ // 83 // चिन्तइ हा दइव तए कह सहसा एरिसी कयावत्था / एयाए तणयाए निम्मलगुणरयणक्खाणीए // 84 // वाहरइ तओ विजे जोइसिए मन्ततन्तकुसले य / सबोवायपओगे अविसेसे तेहि पडिसिद्धा / / 85 // सिट्ठी उबिग्गमणो जा चिट्ठह ताव तेण चट्टेण / पुट्ठो किं ? अञ्ज दिणे दीसह गुरुदुक्खभरभरिया // 86 // तो सिट्ठिणावि भणियं दुहिया मे मद्द! आवई पत्ता / उक्कलियाहि पयगृह पडिकूलं जलहिवेल व / / 87 // विजाईहिं न सक्का पउणी काउं विचित्ततन्तेहिं / लग्गो दुग्गग्गहो सो अवणिजइ जो न मन्तेहिं // 88 // गहनिग्गहे समत्थो मह. मन्तो अस्थि किन्तु सामग्गी / पडिपुना अइदुल्लहा इय भणियं तयणु चट्टेण / / 90 / / अह सिट्ठिणावि वुत्तं सवं सामग्गियं अहं काहं / ता मह उवरोहेणं कुणसु पसाएणिमं पउणं / / 91 // इसाणविदिसि चउदसितिहीए किन्हाए मंडले लिहिए / पिउवणमज्झे कजे सिज्झइ चउबंभयारीहिं // 92 / / तह चउधणुद्धरेहिं सुसद्दवेहीहिं चउदिसिडिएहिं / एवं चट्टेणुत्ते सामग्गि ECORRENSAR Page #319 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणवृतिः / // 306 // कुणइ धणसिट्टी // 93 // अह सिट्ठी ससरक्खे गहिऊण धणुद्धरे य तह कन्नं / चट्टेण समं गच्छइ बलिपुप्फसुगन्धगन्धकरो कपटो. // 94 // जिणदत्तेणवि भणिया चउरोवि य सद्दवेहिणो लहुयं / सिवसद्दे विन्धेजह तं सदं कारया जडिणो // 95 // काऊण पायेन बलिविहाणं मन्तं जा जबइ कित्तिमं चट्टो / स्वाहा अक्खरसवणे जडीहिं विहिओ सिवासदो // 96 // विद्धा जडिणो चउरो चट्टेण पलवइ कन्नावि अइबहुं ताहे / चट्टेणुत्तो सिट्ठी न इमे बंभवए सुद्धा // 97 / / तो उवसम्गो एसो जाओ कन्नावि पीडिया बहुं / स्वस्थी सिट्ठी तओ विसनो ससरक्खेहिं अहं मुट्ठो // 98 // गिहमागओ य पुच्छइ कह लब्मा ? भयारिणो सुद्धा / चट्टो जम्पइ कृता गाहं एयं जाणतया सुद्धा // 99 / / तद्यथा-वसहिकहनिमिजइंदियकुडितरपुवकीलियपणीए / अइमाहारविभूसणाइ नवबंभ. श्रेष्ठिना चेरगुत्तीओ // 1.1 // गाहमिमं गहिऊणं सिट्ठी तो धम्मचारिणो सवे / पुच्छइ न मुणइ कोवि हु तीए गाहाए परमत्थं पाच तेन | // 102 / / तो चट्टेणं नीओ साहूण विसुद्धबंभचारीणं / पासंमि तओ गाहा सम्मं वक्खाणिया तेहिं // 103 // तो काउं सह परिपणिवायं सिट्ठी विनवइ अम्ह धूयाए / फिट्ट गहो महायस! जइ पेसह मुणिवरे चउरो // 104 // सूरीहिं तओ भणड णायिता। गिहत्थचिन्ता न कप्पए अम्ह / तो चट्टोवि पइम्पइ सीलड्ढा एरिसा हुन्ति // 105 // चट्टेणुत्तो सिट्ठी इमाण नामेहिं होइ सिद्धित्ति / नामाणि तओ लिहिउं धणो गओ निययगेहमि // 106 // अह अन्न किन्हचउद्दसी इसाणमसाणमंडलविहाणे / मुणिचंभयारनामन्नासे मंतमि जवियंमि // 106 / / धूया पउणीहूया जम्पइ हा ताय! कहमिहाणीया? किंवा मंडलमेयं कयं? है। कह ? बलिविहाणंति ? // 107 / / तत्तो धणेण कहियं पुत्ति ! तुमं आसि उग्गग्गहगहिया / एएणं चट्टेणं दिनं तह जीवियं वच्छे ! // 108 // हरिसभरनिम्भरंगो सिट्ठी गेहे सपुचिपरिवारो / पत्तो चट्टेण तओ नीओ मुणिपुंगवसमीवे // 109 // सोउं D3 Page #320 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 307 // एवं मथुरावणिकेन कपटाद् | धारिणी देवी जिणिन्दधम्म सेवी सम्मत्तनिच्चलो सड्डो / जाओ मझुवआरी चट्टो एसो ति कलिऊण // 11 // हारपहं नियध्वं परिणावइ तं महत्थरिद्धीए / एवं जिणदत्तेणं पत्तं कालेणं जं इठं // 111 / / एवं महुरावणिओ मुणिऊण कहाणयं गओ महुरं / चिन्तइ विविहोवाए नियकजए साहणट्ठाए // 112 // अनोवायालाहे सो पावो चक्खुलोलुओ / मुद्धो कोडिं दीणाराणं दाऊणं सिद्धविजाणं // 113 / / पाणाणं भणइ इमं घडह मए कहवि धारणिं देविं / विजावलेणं तेहिं वि नयरीए विउविया मारी // 114 // आदनेणं रना भणिया पाणा इमं तलारत्तं / सबोवद्दवरक्खाकए बिईनं मए तुम्ह // 115 // तेहिवि भणियं सामीय ! सम्मं नाऊण विनविस्सामो / तो विजासचीए कहिया अन्तेउरे मारी / / 116 // जोयन्तेणं रन्ना अवरोहे धारिणीए सुत्ताए / पासे बालाईणं दिवाइं अंगुवंगाई // 117 // तो रुट्ठणं रन्ना केसग्गाहेण कड्डिङ ताण / पाणाण निग्गहत्थं समप्पिया सन्तिकरणत्थं // 118 // तेहिंवि भणियं सामिय ! संतिकरी होइ निग्गहिजन्ती / पच्छन्नं चिय रमा वुत्तं एवं करेहित्ति // 119 // तो रयणीए तीए कीरन्ते निग्गहे महुरवपिओ / कयसंकेओ सिग्धं समागओ तप्पएसम्मि // 120 // एयाए मुत्तीए एयं कम्मं न होइ एयाए / एवं तवयणेणं सुहारसेणेव सा सित्ता // 121 // पुणरवि वणिएणुत्तं पाणाणं सम्मुहं जहा एयं / मुञ्चह तुम्भे अहवा नो मुश्चह में विणासेह // 122 // जइवा दीणाराणं कोडिं वित्तूण एह समप्पेह / रायभएणं जम्हा दूरे देसन्तरे जामि // 123 // तो तस्स अप्पिया सा तेण समं जाइ धारिणी देवी। चिन्तइ य एस कोवि हु? | मह जीवियदायगो जाओ // 124 // तो एस पाणनाहो मह जेण धणेण जीविएणावि / तेहिं मारिजन्ती सव्वहा रक्खिया दीणा // 125 / / तेणवि महेसरेणं समयणपरिहासमहुवयणेहिं / सुवसीकया सुनिन्भरपेमरसुल्लसियसवंगा / / 126 / / पत्ताणि वसन्तपुरे प्राप्ता। | | 307 // Page #321 -------------------------------------------------------------------------- ________________ C भी कपटं जयन्ती प्रकरणइतिः / ज्ञात्वा दीक्षा लात्वा च स्वर्लोकं गता धारिणी // 308 // वाणिजेण धणोवलम्मेण / मोगुवभोगपराई चिट्ठन्ति सुहेण जा ताव // 127 // एगम्मि दिणे देउलमहत्थपिच्छणय पिच्छणनिमित्तं / जन्तंमि तंमि वणिए भणइ इमं धारिणी देवी // 128 // मा वच्चसु नाह तुम तुहविरहे जेण ठाउमसमत्था / 4. एकंपि खणं कहमवि हसियं तो तेण वणिएण // 130 // तो पुच्छह सा देवी साहसु तं सामि केण कजेण / हसियंति तेण | कहिए नियचरिए मारिपजन्ते // 131 / / तो विरत्तचित्ता देवी चिन्तेह पावकम्मेणं / एएण महापावं ममाणुरत्तेण विहियति / / 132 // नीहरिऊण घराओ वच्चइ सा साहुणीण पासंमि / सुणिऊण धम्मकहं पडिबुद्धा लेइ पवजं / / 133 // काऊण तवचरणं सम्मं परिपालिऊण सामनं / अणसणविहिणा मरिउं सम्पत्ता देवलोगम्मि // 134 / सोवि महुरावणिओ तविरहे अट्टराइज्झाणेहिं / नरए पावभरेणं चक्खुन्दियलम्पडो जाइ / / 135 / / विहडियफलए मणुयत्तणमि पत्तेवि जाणवत्तम्मि / | चक्खिब्दियलोहेणं बुडन्ति भवनवे जीवा // 136 // ।चक्षुरिन्द्रियकथा समाप्ता। ___ तथा कर्पूरादिद्रव्यसौरभाद् घाणलोलुपतया नस्तया नस्तिताः प्राणिनः पुंगवा अपि दुःखभरोद्वहनैकधुरन्धरा एव भवन्ति / फणीव ना कुलीनो यः पुष्पादिघ्राणलम्पटः। निरूद्धचरणाचारो दुःखित स्यादसो सदा // 1 // दिव्यसौगंध्यलोभान्धो मिल त्पद्मदलैः यथा / प्रदोषे बध्यते गो जीवो कर्ममलैः तथा // 2 // किंच-गन्धप्पिओ कुमारो घाणिन्दियलम्पडत्तकलिसेण / गुणमणिरोहणसरिसो भंगप्पा सबहा जाओ // तहाहि आसि पुरा रयणपुरं नयरं पुरहूयपुरवरसगोत्तं / लच्छीहरोत्ति राया तत्थ य सुररायसुन्दरो // 1 // सोहग्गरयणक्खाणी KASARSHACK चक्षुलोको IRCRECIROIDS नरकं गतश्च / // 308 // Page #322 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 309 लोलुपे HA%AECCCCCCCA5% तस्स य पउमावई महादेवी / बीया य कमलमाला साला लायअपनस्स // 2 // पढमाए सुओ पउमो तेयप्पसरेण निजिय- MIघ्राणेन्द्रियकुमारो / बीयाए पुणो पुत्तो अणंगसेणोति नामेण // 3 // पउमापुत्तो जेट्ठो इट्ठो रायस्स गुणगणगरिह्यो / अवरावरमित्तेहिं | सद्धिं विलसइ समिद्धीए // 4 // सयवत्तकुन्दमालयचम्पयमन्दारपमुहकुसुमाई / आणावइ तह गंधविविहे घणसारमाईए गन्धप्रिय। 5 / / कुंकुमचन्दणमयमयगोलासरसेहि अंगरायं च / कालोचियं कुणन्तो जिंघह पुडएकवासे य // 6 // पगईए उ ओयारो कुमारतोसो सुविसुद्धकित्तिवित्थारो / रूवेण विजियमारो नजइ एसो सुरकुमारो // 7 // तयणु सुविसुद्धचित्तो पउमो पउमं व दृष्टान्तः। लच्छिकुलभवणं / एस कुमारो गंधप्पिओ ति कित्तिजइ जयंमि // 8 // एवं विक्खायजसे तम्मि कुमारम्मि रायललियम्मि / कलियम्मि गुणगुणेहि चिन्तइ दुट्ठा कमलमाला // 9 // अस्सि पउमकुमारे जीवन्ते कह हवेज रजसिरी ? / मह IA तणयस्स भभरी कमलं मुत्तुं किं 1 विसह निम्बे // 10 // केणावि उवाएणं एवं मारेमि जेण महपुत्तो / उवभुंजइ रजसिरिं सग्गे सक्को व सच्छन्दो // 11 // तहकायबमकजं बुद्धिमया जह न होइ इहलोए। दुसहो अयसो वाओ पुजइ नियओ. ऽभिप्पाओ // 12 // इच्चाइ कमलमाला देवी चिन्तेह रूद्दझाणट्टा / अह गिम्हे वट्टन्ते पउमकुमारो य ललियंगो // 13 // विलसइ नईए मज्झे नावाकडएण तरुण-तरूणीहिं / सद्धिं कप्पुरागुरुचन्दणरसभरियसिंगीहि // 14 // कणयमयाहिं निचं नाणाविहगीयनाडयविहीहिं / सुरसरियाए पवाहे जह इन्दो देवदेवीहिं // 15 // तत्तो सवकजणणी पउमकुमारस्स मारणो| वाए / विसमिस्ससुरहिवासे कारइ गंधप्पिओ जेण // 16 // मज्झट्ठियवासपुडं मंजूसं सा खिवावइ नईए / उरि निय. | पुरिसेहिं दिट्ठा कुमारेण सा इन्ती // 17 // आगयामत्ता गहिया होही अत्थोत्ति इत्थ तुटेणं / उग्घाडियाए तीए दिट्ठो 309 // कलियाम्म सुख छमारे गंधाण विजियमारी कालोचियं कृणा CINEER % Page #323 -------------------------------------------------------------------------- ________________ श्री जयन्तीप्रकरणकृतिः / // 31 // CREA4ASA%4560 कुमरेण वामपुडो // 18 // अग्याइओ सहरिमं जिंङ्घियमितम्मि तम्मि पुडयम्मि / पंचत्तं सो पत्तो कुमरो गन्धप्पिोटरसमेन्द्रियपउमो // 19 // इहपरलोयसुहाणं न भायणं जमिह एम संजाओ / गन्धप्पिओ कुमारो तम्हा घाणिन्दियं जिणह // 20 // लोलुपे ।घाणेन्द्रियविषयकथानकं समाप्तम् / सोदासनृपतथा रसनेन्द्रियमपि बुद्धिमता जेतव्यम् / अजिते हि अस्मिन् रसगृद्धिदोषोदये विजृम्भन्ते तमांसि, नोल्लसन्ति भक्ष्या- दृष्टान्तः। भक्ष्यविवेकमहासि, पसरन्ति न क्षत्रतेजांसि, प्रचरन्ति दुरव्यवसायरक्षांसि / किं च-रसनेन्द्रियलाम्पट्ये, मत्स्यो विचरअमाधजलमध्ये / गलनिहितमांसलुब्धो, मुग्धो मृत्योर्मुखं विशति // 1 // अन्यच्च-मद्यपाने सक्तः प्राणी विमूढचेतस्कः। गम्यागम्याज्ञानाद् भ्राम्यति संसारकन्तारे / / 2 // मधुगृध्या मधुजालकचतुरिन्द्रियजीवराशिघातेन / समुपार्जितपापभरा नरकान्तर्यान्ति पापनराः // 3 // मद्यमांसे मधुनि च नवनीते संसजन्त्यऽसंख्याताः / तद्वर्णस्पर्शरसा जीवा नश्यन्ति तभोगे॥४॥ तस्मात् रसगृद्धिरसौ, जीवदयादृष्टिकृष्टिपटिमानम् / विभ्राणा गृधीय प्रयत्नतो दूरतः कार्या // 5 // किञ्चसर्वाणि अपि दानानि, अखिलानि अपि तीर्थकर्कशतपांसि, एकस्य मांसविरतिव्रतस्य नांशेन तुल्यानि / तथा मांसरसास्वादनव्यसनपरशुप्रहारछिन्नमूलप्रवन्धप्रकृष्टकरूणापरिणामद्रुमतया महामांसमप्यमानाः प्राणिनः पार्थिवादिपदप्रभ्रष्टाः राक्षसीभूताः परलोके नरकोदरप्रविष्टा दुरन्तदुःखानि अनुभवन्ति / सोदामनरेन्द्रवत् , तथाहि खिइपइडियनयरे सोदासो नाम नरवई हुत्था / इहलोएप्पडिबद्धो रसणिान्दयविसयरमगिद्धो // 1 // अह सन्ति तत्थ जिणमयपमावणाकरणमाणसा सडा / धम्माधम्मावियड्डा विसुद्धसद्धा गुणधणड्डा // 2 // अह तेहिं सावएहिं जिणिन्दभवण AC%EC%% / Page #324 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 311 // म्मि गुरुपबन्धेण / आढत्ता किल जला करूणासरणिकचित्तेहिं // 3 // कोसल्लियं महग्धं गणिऊणं तो नरिन्दपयमले / मनुष्यगच्छन्ति सावया ते कुष्णन्ति विन्नत्तियं एवं // 4 // जह देव अम्ह होही जत्ता जिण मन्दिरम्मि अट्ठदिणे / तम्हा कुणसु मांसपसायं घोसावहह अमाघायं / / 5 / / तुम्ह जणओवि सामिय ! घोसाविन्तो इमम्मि नयरम्मि / अट्टदिणाणि अमारिं तम्हा भक्षको मलद्वियं कुणम् // 6 // तरूणोवि देव ! गरूया चउद्दिसिं वित्थरन्ति साहाहिं / दलकुसुमफलोवेया धरन्ति मूलट्ठियं जम्हा जातो // 7 // इय विनत्ते रत्ना पडिवनं सावयाण वयणमिण / किन्तु संयं रसणिन्दियलोलो आइसइ सूयारं // 8 // अदिण- सोदासजोग्यमंसं संगहियवं जओ विणा तेण / नहु होइ भोयणं मह हीही रसगिद्धदुचरियं // 9 // आएसोत्ति भणित्ता सूयारेणवि नृपः। जमिह संगहियं / तं कहवि पमाएणं गहिय सवं बिरालेणं // 10 // तो चिन्तइ स्यारो न पहुप्पइ भोयणम्मि जं मंसं / तो राया परिकप्पा मारोऽवस्सं दवइ मज्झ // 11 // भवियवयावसेणं दिलृ चिन्ताउरेण डिम्भरूवं / कत्था चत्तं केणवि मयारेण तो गहियं // 12 // पच्छवं परिपकं तं मंसं सुरहिदवसम्मिस्सं / अइरसंति नरिन्दो सूयारं पुच्छए एसो | // 13 // अछलं तुह कहसु फुड कस्सेसं रत्तसायमइसरसं / तेणवि सिटुं सच्चं लुद्धो रायावि भणइ इमं // 14 // भद्द ! तुम निचं चिय रत्तसायमइनिद्धं / अवरावरदवेहिं सुसम्भियं कुणसु महजोग्गं // 15 // सूयारेणं वुत्तं सम्पजह नाह ! कहमिमं निचं ? / पञ्चहया मह पुरिसा तुज्झ सहाया हविस्सन्ति / / 16 // आणिय किंपि अणाहं माणुस्सं रत्तसायमणुदियहं / दायत्वंति निवेण भणिए तह कुणइ सूयारो // 17 // इय निच्चं किज्जन्ते अणाहलोओ विणासिओ बहुओ / नायमिमं मन्तीहिं विसरियं तेहिं दुहिएहिं // 18 // यतः-स्वेच्छया कुरुते स्वामी यत् किंचन यतः ततः। IP311 // RRC Page #325 -------------------------------------------------------------------------- ________________ जयन्ती प्रकरणइतिः / वीमज्झे / परिचया पाडवनं रायपुत्तेण ताइएहि एएण गरू // 312 // र बुद्धण तेणापासु तच्च प्रतिचिकीर्षन्तो दुःखं जीवन्ति मंत्रिणः // 19 // तो तेहिं रायपुत्तो वुत्तो किं कुमर! किजइ इयाणि ? / माणुसमंसे राज्यभ्रष्टोलुद्धो तुज्झ पिया रक्खसो जेण // 20 // मारावइ पइदियहं नयरीए माणुसाइ सो रूदो / ता अम्हाणंपि भयं संजायं दारूणं अरण्ये | इहि // 21 // तुज्झ पसाएणं चिय मोक्खो अम्हाण नन्नहा होइ / तो कुमर ! रजमेयं पडिवजसु अप्पणा चेव // 22 // वासुदेवेन देव ! तुम कम्मवसा माणुसभक्खित्ति रक्खसो जाओ / इह लिहियक्खरपत्तं वत्थऽञ्चलयम्मि बन्धेत्ता // 23 // पियरं च मारितः मजपाणपमत्तसुत्तं महाडवीमज्झे / परिचयसु नायतत्तो नागच्छह जेण नयरम्मि // 24 // एवं च कए तुह पयच्छायासु- सोदासनृपो हिणो वयं वसामो ति / मंतीहिं इमं भणियं पडिवनं रायपुत्त्रेण / / 25 // सिग्धं चिय कयमेवं रत्ने बुद्धेण तेण राएण / नरकं वत्थञ्चलंमि बद्धं दिटुं पत्वं तओ नायं // 26 // निवासिओम्मि पुत्ताइएहिं एएण गरूयदोसेण / तो इत्थेव ठिओऽहं पहिया गतः। इयं हणिस्सामि // 27 // तत्थ हियन्तं सोच्चा पञ्चासत्राणि कइवि द्वाणाणि / मरणभएणं मिलिउंठियाणि एगम्मि हाणम्मि // 28 // तम्मि समए जहित्थं हिण्डइ देसालियाए वसुदेवो / एगागी देवउले सुत्तो तत्तो य सोदासो // 29 // माणुसमंसे लुद्धो मत्तो भवियवयाए जुज्झन्तो / निहओ वसुदेवेणं छुरियागाढप्पहारेण / / 30 // तो पावभरकन्तो वच्चइ नरयंमि है एस सोदासो / एएण कारणेणं एवं जिन्भिन्दियं जिणह // 31 // जिह्वेन्द्रियविषये सोदासकथानकम् // तथा स्पर्शेन्द्रियमपि स्वविषयव्यासक्तिमादधानं धीरैर्दमनीयमेव / अदान्तं हि तदपराहादकस्पर्शश्रद्वया वात्ययेवोच्छलितरजःपटलकलुषं शुष्कपत्रमिवोद्ममयति मनः प्राणीनाम् / किञ्च-अस्मिन्नदान्ते सकामकामिनीप्रदत्तपाणिप्रहार 312 / / CCCCCCCCCI पण कवि द्वाणापण गरूयदोसेण Page #326 -------------------------------------------------------------------------- ________________ +R + // 313 // चरणारविन्दस्पर्शसुखदोहदापूर्ती सत्यामशोकोपि दूरतः प्रसृमरपरिमलात् न प्राप्नोति सुमनोविकाशसंपदं / अन्यच्च-सरस- स्पर्शेन्द्रिय नवसल्लकीवनदलकवललोलमानसो हस्ती स्वैरं विन्ध्यारण्ये विचरन् यथेन परिकरितः करिणीस्पर्शश्रद्धो निगृहीतः क्षुत्त- लोलुपताडादिदुःखातः द्रढवन्धपारवश्यांकुशघातपरंपरां लभते / परदाररतः प्राणी त्वग्भेदछेदखेदधनहानीः आसादयति / स्पष्टस्पर्श यामवन्तिव्यसनाम्बुधौ मनः स्वकलत्रेऽप्यतिमात्रं मृदुमात्रासंगरसिकतैकाग्रः राज्यभ्रंशे म्रियते अवन्तीनाथो यथा नृपतिः / तथाहि- नाथोअस्थित्थ भरहवासे मज्झिमखण्डम्मि पुरवरी पयडी। उन्जेणीनामेण या सक्कअमरावईरम्मा // 1 // तत्थासी महाराया दाहरणम्। सहस्सनयणु व पयडमाहप्पो / नामेण अवन्तीनाहो रइनाहो रूवलच्छीए // 2 // पालइ निययं रजं नीईए जणियजणमणाणन्दो / सत्तंगपि सुबद्धं सुबुद्धिपमुहेहिं मन्तीहिं // 3 // अह आसि तम्मि समए रयणायरतीरसंडिया नयरी / नामेण तामलिती नजइ अयलाउरीरिद्धी // 4 // नरसुन्दरो नरिन्दो रिद्धीए धणयजक्खराउ छ / पणयजणपूरियासो तत्थासी गुणगणावासो // 5 // होत्था तस्स य भइणी बंधुमई रूवसालिणी सिद्धा / मयणनिवरायहाणी सुहारसुल्लाससमवाणी // 6 // मगन्तेणं अच्चायरेण निचं अवन्तिनाहेण / लद्धणं परिणीया सा अच्चणुरत्तेण रिद्धीए // 7 // तो तीए फरिसणिन्दियसुहसायरमग्गमाणसो एसो। कुरूदेसपयाचिन्तं अत्थाणत्थो कुणइ नेव // 8 // सीमालनरवरेहिं देसो लूडिजए तओ | निच्चं / नयरं चोरेहिं पुणो मुसिजए लद्धपसरेहिं // 9 // असमञ्जसप्पवित्तिं दट्ठणं मन्तीणं सुमन्तीहिं / रजविणासे है| अम्हं अयसो निस्संसय होही // 10 // तम्हा नरिन्दपुत्तं रखे द्वविऊण रजनीईए। वेरीण निग्गहेणं तिवग्गसंसाहणं कुणिमो // 11 // यत उक्तं-यस्य त्रिवर्गशून्यस्य दिनान्यायान्ति यान्ति च / स लोहकारभत्रैव श्वसनपि न IM313 // NAGARLS %*646464 Page #327 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 4 6i जयन्ती प्रकरणवृतिः / स्वपुत्रादिभिररण्ये त्यतो दुःखभागी जातः। // 314 // CSCROCE% जीवति // 12 // इय चिन्तिऊण (झत्ति) मन्तीहिं रायनन्दणो भणिओ / जणयं विसयपसत्तं उझिय पडिवज नियरजं // 13 // जेण तुहपायपायवच्छायाए विलियसबसन्तावा / सहलं माणुसजम्मं तुह पसाएणिमं कुणिमो // 14 // रायसुएणवि एवं पडिव तयणु मन्तिबुद्धीए / पियरं मइरामत्तं सुत्तं जणणीए सह नाउं // 15 // चेलञ्चलम्मि लेहं बन्धेचाऽरनमज्झयारम्मि / पच्चइयमणुस्सेहिं मिल्हावइ झत्ति रयणीए // 16 // मजप्पमायनिहाविगमे भूमीगयं अरनम्मि | पिच्छन्तो अप्पाणं बहुसावयतरूवराइन्ने // 17 // चिन्तइ अवन्तिनाहो किं एवं सुविणयंति ? तरलच्छो / वत्थश्चलंमि पिच्छइ लेहं गंण्ठिद्वियं तत्तो // 18 // अवगच्छइ परमत्थं वाईय लेहं जहा अमञ्चेहिं / रज्जे सुयं दुवित्ता सकलत्तोऽहं इहं चत्तो // 19 // कुद्धो अवन्तिनाहो उवरिं मन्तीण चिन्तए एवं / सुपसायस्सवि मज्झं कह एए विहडिया पावा ? / / 20 // अविणयफलमेएसिं मन्तीणं ताणं दंसयिस्सामि / इय चिन्तिऊण दइया उढविया कहइ वुत्तन्तं // 21 // तो तीए सो भणिओ पिययम मा कुणसु सम्पयं को / विहिणो वसेण पुरिसो पावइ बसणं जइवि सुहडो // 22 // उक्तं च-समाहतं यस्य करैः विसर्पिभिः तमो दिगन्तेष्वपि नावतिष्ठते / स एव भानुः तमसा विभूयते स्पृशन्ति कं कालवशेन नापदः ? // 23 / / चईऊण तह विसायं वच्चसु मज्झ भायपासम्मि / जेण सवलं दाउं भुजावइ निययरजसिरिं // 24 // यतःअसहायाण न सिद्धी सुहवि माणुनयाण पुरिसाण / अग्गीवि तेयरासी पवणेण विणा न पजलइ // 25 // इय तीए सो वुत्तो वच्चइ नयरीए तामलित्तीए / कइवयदिणेहिं बाहिं बन्धुमई भणइ तो एवं // 25/2 // होऊण महाराओ एगागी चेव कह इह पुरीए / पविससि ? रिद्धिविहिणो दीणो खीणो परिस्संतो // 26 // ता सामिय! खमियचं इहडिओ चेव // 314 // CECT Page #328 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 315 // तं विलम्बेहिं / मम भाया बलकलिओ पच्चोलिं जाव तुह एइ // 27 // इय मणि बन्धुमई बच्चइ नरसुन्दरस्स पासंमि / | रथचक्रादेवउलमण्डवम्मि अवन्तिनाहोवि आसीणो // 28 // विहिणो वसेण चिन्तइ एही नरसुन्दरो समिद्धीए / होही महई वेला भन्मृतोऽवअहं तु धणिय छुहादुहिओ // 29 // एयमिह पत्तकालं खित्ते पविसित्तु ताव गेन्हामि / चिभिडमेगं इय चिन्तिऊण अहन्तीनाथो पहेण जा तत्थ // 30 // पविसइ तो सो दिवो रक्खगपुरिसेण कोववसगेण | पइदिवसमेस चोरेइ महकत्थे अज्ज लद्धोत्ति बन्धुमति॥ 31 // खायरलउडेण हओ तह जह पडिओ पहंमि निचिट्ठो। बन्धुमईवि य पत्ता रायउलं अचिरकालेण // 32 // रपि तेन अइसंभमेण पुट्ठा रना एगागिणी कहं पत्ता ? / कहियं सवं तीए चिट्ठइ भत्तावि देवउले // 33 // पडिहारो आणत्तो रना | जह कुणसु सवसामग्गिं / भइणीवइणो जामो पच्चोलि जेण अइतुरियं // 34 // चउरंगबलसमग्गो राया जा एइ तत्थ सती देवउले / दिट्ठो अवन्तिनाहो न तत्थ भइणीवई तेण // 35 // इय राया जाणावइ पुरिसं पट्ठविय बन्धुमइभइणिं / सा य जाता। ससोगा पत्ता पासइ दइयं रओवसमे // 36 // रहचक्कचम्पणेणं छिनियसिरकमलमह महामोहं / पत्ता विमुक्कवाहं धसत्ति धरणियले पडिया // 37 // नरसुन्दरोवि राया सम्पत्तो तत्थ सीयलजलेण / पवणेण य आसासइ बन्धुमई तयणु आसत्था // 38 // विलवह करूणसरेणं हा विहि ! कह ? देसि वसणदन्दोलिं / रजहरणेण अहं नहु तुट्ठोऽरनवासेण // 39 // हा | पाणनाह! मह नेहपासवर्ण रजलच्छीवि / हारविया संपइ मं छडिविय कत्थ पत्तोसि ? // 40 // जं इत्थ तुमं मोत्तुं | नयरीमज्झम्मि बन्धवसमीवे / एगागिणी गयाऽहं खमाहि तं देसु पडिवयणं // 41 // हा हयविहि ! तुज्झ मए अवरद्धं किमिह ? जेण अपसत्रो / विहिओ अवन्तिनाहो पडिवयणपरम्मुहीभूओ // 42 // तुह विरहदावतविया पिययम ! गच्छामि ASARKARSA Page #329 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्तीप्रकरणइतिः / // 316 // AA कत्थ के सरणं / जामि अहं सामि कह ? तए विणा निव्वुया होमि // 43 // अविय-भत्ता सुक्खाणखणी भत्ता |नरसुन्दरचिन्तामणी महिलियाणं / भत्ता जीवियनाहो तबिरहे ताण बहुदाहो // 44 // भत्तारदेवयाओ नारीओ हुन्ति जीवलोगम्मि / राज्ञा सव्वत्थ संकणिज्जा तस्विरहे हुन्ति जं ताओ // 45 // इय बुद्धीए तं आणिोऽसि, जह तह पुणोवि रजसिरिं / संपाडिस्सइ8 वैराग्येन माया जाया जा एरिसावत्था ? // 46 // इय विलवन्ती वुत्ता बन्धुमई कोमलवयणेहिं / भद्दे ! मुञ्चसु सोगं वियाणमाणा दीक्षा भवसरूवं // 47 // एयम्मि भवे चउगइरूवे जीवाण कम्मवसगाण | जम्ममरणाण दुक्खं गरूयाणवि होइ किं चोजं // 48 // गृहीता। | जेणं चिय संसारो अणेगदुक्खाण एस भण्डारी / तेणं चिय सप्पुरिसा लग्गा परलोयमग्गम्भि / / 49 // भवसायरम्मि जीवा संजोगविओगबहलकल्लोले / मोहावत्तरउद्दे लहन्ति दुक्खाण रिच्छोलिं // 50 // वाहिजराखरदाढो वसणसयावायतिक्खमहतालो / जीवमयघायणरओ मरणमइन्दो भवारने // 51 // भमइ सया सच्छन्दं देविन्दनरवरिन्ददाणविन्देहिं / सक्को न निवारेउं ता सोयं बहिणि ! तं चयसु // 52 // अन्नं च-धारिजइ इन्तो सायरोवि कल्लोलभिन्नकुलसेलो / नहु अन्नजम्मनिम्मियसुहासुहो दिवपरिणामो // 53 // सोयन्धयारससकरसगोत्तवयणेहिं एवमाईहिं / अणुसासियावि पइणो चिया पविट्ठा मया झत्ति // 54 // नरसुन्दरोवि राया तहाविहं मोहविलसियं दटुं / निन्दइ भवस्सरूवं संवेगपरवसो धणियं // 55 // खणदिट्ठनट्ठविहवे खणपरियदृन्तविविहसुहदुक्खे / खणसंजोगवियोगे संसारे कह सुहं होइ ? // 56 // धी संसारसहावो जंमि उ नेहाणुरायपडिबद्धा / जे पुबन्हे दिवा अवरन्हे ते न दीसन्ति // 57 // विसयविसमुच्छिएसुं जीवेसुं सायरि व अणवरयं / PJ पडिकूलचारिणीओ महावया हुन्ति किं चोजं? // 58 // तिच्चिय पुरिसा धना कयपुन्ना जे जिइन्दिया हुन्ति / वज्झन्ति %E3NAK Page #330 -------------------------------------------------------------------------- ________________ 15% // 317 // जयन्त्या . गृहीता दीक्षा भगवत्पार्थे / य मवफलए जे उण अक्खेहिं हीरन्ति // 59 // एएहिं सोएहिं पगईए नियविसममग्गेसु / हीरन्ता जडजीवा पडन्ति भवरूद्दजलहिम्मि // 60 // इच्चाइ चिन्तिऊण राया नरसुन्दरोवि पुत्तस्स / दाउं रजं विहिणा काउं जिणसाहुपूयाई // 11 // संवेगसमावनो अणसणपडिवत्तिसत्तिसमत्थेणं / हणिउण मोहरायं सग्गसिरिं वरइ लीलाए // 62 // इय पश्चिन्दियतुरए चवले दमिऊण सुद्धमग्गम्मि / गच्छन्ता सप्पुरिसा कमेण पाविन्ति सिद्धिपुरि // 63 // ॥इति स्पर्शनेन्द्रियविषये अवंतिनाथबंधुमत्योः कथानकं समाप्तमिति // एवमादि प्रश्नोत्तरप्रदानप्रकारेण संशयान्धकारतिरस्काररविमण्डलानुकारेण सा जयन्ती श्राविका कमलिनीव प्रमोदतः कण्टकितवपुर्नाला विकस्वरवदनेक्षणयुगलकमला श्रीमन्तं श्रीवर्धमानस्वामिनं जिनं प्रणम्य विज्ञप्तिका कर्तुमारभे तिहुयणतारणसत्तं तुमम्मि करुणायरम्मि सम्पत्ते / भवसायरम्मि अञ्जवि न तीरपत्ता कहं होमि ? // 1 // ता काऊण पसायं आरोवेऊण जाणवत्तम्मि / चारित्तम्मि महायस ! खिप्पमहं नेसु सिद्धिपुरिं // 2 // इय विनत्तो भयवं संवेगपरवसाए सयमेव / सिग्धं वियरइ दिक्खं वीरजिणिन्दो जयन्तीए // 3 // देवाणुप्पिए तुमए छन्जीवनिकायवच्छला दिक्खा / पालेयवा सम्मं निच्चं चिय अप्पमत्ताए // 4 // दमियत्वा पश्चिन्दियतुरया पगईए चञ्चलसहावा / आरूढा जेहि जिया निजन्ति भवाडविवियडं // 5 // संसारम्मि सुसाणे पञ्चनमोक्कारमन्तजावेण / तह जइयत्वं चरणे मोहविसाओ छलइ न जहा // 6 // कोहो दव्वु व जलिओ समियबो झत्ति उवसमजलेण / माणो महागिरिन्दो दलियबो विणयवजेण // 7 // मायावंसकुडंगी सिवपुरपहचरणरोहदुल्ललिया / आमूलं छित्तबा अजवपरसुप्पहारेण // 8 // लोहो जलही तुमए सोसेयवो सयावि तोसेण / गरू वियरह दिक्खं वीरजिणिन्दोजपञ्चन्दियतुरया पगईए चञ्चलमहामोहविसाओ छलइ l // 317 // Page #331 -------------------------------------------------------------------------- ________________ भी तप विषयक बयन्तीप्रकरणइतिः / देवानन्दा दृष्टान्तः। // 318 // AHARASHTRA एणं कुंभुन्भवमहरिसिसरिसेण लीलाए // 9 // इच्चाइ विविहसिक्खा सुहारसासारसित्तसवंगा / संवेगमुवहन्ती सा दिया चन्दणजाए // 10 // परिपालइ चारित्तं संसारसमुद्दतारणवहितं / धम्मज्झाणिक्करया महासई सा तह जयन्ती // 11 // निस्सेसकम्महरणं देवाणन्दा जहा तवच्चरणं / अकरिसुं तहा एसा कुणइ जयन्तीवि पइदियह // 12 // का पुण देवाणंदा ? तवम्मि जा वहइ इह उदाहरणं / भन्नइ भरहे माहणकुण्डगामपुरं आसि // 13 // तत्थासि उसभदत्तो महिडिओ पासनाहतित्थम्मि / सड्को माहणवुड्डो जिणमयसन्नाणरयणड्डो // 14 // गुणमणिरोहणधरणी देवाणन्दा य तस्स वरघरिणी / दुन्हंपि ताण जिमवरधम्मे सत्ताण सुहियाण // 15 // पडिबोहकरणेणं वीरजिणिन्दो सुरेहिं परियरिओ / अह अन्नया कयाई बहिरूजाणे समोसरिओ / / 16 / / नाऊण जिणागमणं भत्तिभरूभिन्नबहलपुलयंगो / सबिड्डीए गच्छह वन्दणहेर्ड उसमदत्तो // 17 // अहरमणियरहेणं सबालंकारभूसियसरीरा / गच्छइ परियणसहिया देवाणन्दावि साणन्दा // 18 // दट्ठणं ओसरणं ओयरियं रहवराओ तो दोचि / पंचविहाभिगमेणं पविसेउं तत्थ जिणनाहं / / 19 // वन्दित्ता जहट्ठाणं दोवि निसन्नाई अणिमिसच्छाई / वीरजिणं पिच्छन्ती देवाणन्दा अइसिणेहा // 20 // आगइपन्हा जाया सदेवमणुयासुररायपरिसाए / तत्तो गोयमसामी वीरजिणं पुच्छए नमिउं // 21 // भयवं तुम्हाणुवरि होइ सिणेहो समत्थभवाणं / देवाणन्दाए पुणो केण निमित्तेण अइनेहो ? / / 22 // तो कहा जिणो गोयम ! वसिओ पुष्फोत्तराओ ओइन्ना / बायासी दिवसाई अहं हि एयाए कुच्छीए // 23 // तेणं देवाणन्दा ममोवरिं गुरुसिणेहपडिबद्धा। आगयपन्हा जाया गोयम ! जणणित्ति जाणाहिं // 24 // सिरिवीरजिणन्देणं एवं कहियम्मि अन्तरंगम्मि / पडिबन्धकारणमिय सोचा देवाणन्दा महाणन्दा // 25 // // 318 // Page #332 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 319 // चारित्रं मुक्ति ARCHIKARANAGACA-CA संविग्गा भवभवणुविग्गा विनवइ विणयपणयंगी। देवाहिदेव ! दिजउ पवजा मज्झ सिद्धिसही // 26 // तो भयवया जयन्ती | विना तीए दिक्खा समत्थजियरक्खा / संसारतावहरणे दक्खा परिपक्करसदक्खा // 27 / / तो सिक्खं काऊणं समप्पिया! चन्दणाय अजाए। पालइ संजमभारं देवाणन्दा निरइयारा // 28 // पञ्चसमिया तिगुत्ता पश्चिदियनिग्गहम्मि आसत्ता। प्रपाल्य अइदुकरं कुणन्ती बज्झन्भिन्तरतवचरणं // 29 // देवाणवि आणन्दं दिन्ती तवचरणकरणजोगेण / पयडियजहत्थनामा देवाणन्दा हवइ समणी // 30 // परिवड्डमाणसुक्कज्झाणानलदडकम्मवणगहणा / उप्पन्नविमलकेवलनाणा सिद्धा सुहसमिद्धा गता। // 31 // एवं तवचरणरया मायामयमोहजोहनिम्महणी / नाणाइरयणखाणी महासई मियमहुरवाणी // 32 // सावि जयन्ती पालइ संजमलच्छि विसुद्धपरिणामा / पयडियजियाणुकम्पा सुरगिरिचूलब निकम्पा // 33 // सव्वत्थ खायकित्ती पयदिणपसरन्तघोरतवसत्ती। अइसयपसनमुत्ती विणयाइगुणजणासत्ती // 34 // झाणज्झयणपसत्ता अपमत्ता कोहलोहपरिचत्ता / / गीयत्था संविग्गा गुरुकुलवासेसु अणुबिगा // 35 // आरूहियखवगसेणी सिवगहपासायरोहनिस्सेणी / उप्पन्नविमलनाणा | सिद्धा बुद्धा जयन्तीवि // 36 // तथा च सूत्रं एवं विणिच्छियट्ठा पहतुहाभिवन्दिउं वीरं / सामन्नमसामन्नं देवाणन्द व्व काऊणं // 26 // निदलियघाइकम्मा केवलमुप्पाडिऊण य जयन्ती। भवघाइकम्महरणा सिवमयलमणुत्तरे पत्ता // 27 // भगवदयारसमसया बियउद्देसाउ पगरणं एयं / सपरोभयसरणत्थं उद्धरियं माणसूरिहिं // 28 // एवं पूर्वोक्तप्रश्नोत्तरप्रदानेन विनिश्चितार्था-निर्णितार्था, अत एव प्रहृष्टतुष्टाऽभिवन्ध वीरं श्रीवर्धमानखामिनं, श्रामण्यं-3॥ 319 // Page #333 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बपन्तीप्रकरणपतिः / ग्रंथकारस्य वंशपरम्परा। // 320 // c SCORNERACK श्रमणभावं, असामान्यं-अनन्यसाधारणं, देवानन्देव-भगवदाद्यजननीब्राह्मणीव, कृत्वा निर्दलितघातिकर्मा केवलमुत्पाद्य च जयन्ती भवघातिकर्महरणात् शिवमचलमनुत्तरं प्राप्ता // भगवतीद्वादशशताव द्वितीयोद्देशात् प्रकरणमेतत् खपरोभयस्मरणार्थमुद्धृतं मानसूरिभिः, अवयवे समुदायोपचारात् श्रीमानतुंगसूरिभिरित्यर्थः।। आमूलान् मधुरोध गच्छगहने तापापहारप्रभुः, नित्यानन्दसुपर्वभिः परिचितः स्वर्गश्रिया राजितः / प्राग्वाटान्वय इक्षुवाटसुभगो वृद्धिं परां प्रापितो, यः पूज्यैः संवररसधाराध्वनाऽप्युनतैः // 1 // शिष्यप्रशिष्यैः प्रभूतैः यदीयैर्गच्छो वटो वा ववृधे प्ररोहैः। तस्मिन् बृहनामनि मूलकल्पाः श्रीसर्वदेवाभिधसूरयस्ते // 2 // बभूवुरुत्सर्पिगणाधिपत्याः श्रीगौतमस्यानुकृतिं दधानाः। सत्वाहितवान्ततया प्रसिद्धसौभाग्यलक्ष्म्याऽच्युतकीर्तिभाजः॥३॥ तत्पट्टे प्रथिते सुवर्णघटिते कल्याणकुम्भोपमाः, श्रीमन्तो जयसिंहमूरिगुरवः सिद्धान्तदुग्धार्णवाः / दत्तो यैर्विधिमार्गदर्शनविधावादेशदीपांकुरः, शिष्याणां विनयकतानमनसामाचार्यलक्ष्मीभृताम् // 4 // श्रीमच्चन्द्रकुलोदयाद्रिशिखरोसाः सुधांशुश्रियः, श्रीचन्द्रप्रभसूरयो जिनवचःक्षीरार्णवोल्लासिनः। मोहध्वान्तमपास्य भव्यकुमुदोदोधास्ततस्तेऽभवन् , यत्कीर्तिवलीकरोति भुवनं ज्योत्स्नातुलां बिभ्रती // 5 // तैर्दत्तामुपलभ्य निर्मलकलां श्रीधर्मघोषप्रभुः, भास्वांस्तीव्रतपोप्रतापकलितो जज्ञे दधद्विस्मयम् / नानादृप्तकुतीथितारकरूचिव्यासप्रहाणोधतो, मायद्वादिकुशीलकौशिकमदोद्रेकापहारक्षमः॥६॥ आदिष्टा जयसिंहमूरिभिरमी चात्मीयशिष्योत्तमा, | विख्याता जगति क्षमाधरशिरोलंकारलीलास्पृशः / पूज्याः शीलगणाहया गणभृतो येऽखंडवृतोदया, निन्युश्चंद्र इव प्रकाशपदवी पूर्णामिमां पूर्णिमाम् // 7 // गच्छेऽस्मिन् प्रसुते थमानुगगुणैः शाखामिरभ्युमते, येषां कुन्दसमुज्वलेन यशसा P 320 // Page #334 -------------------------------------------------------------------------- ________________ // 321 मलयप्रम सूरिवर्णनम् / AGROGRESSAGARACT पुष्पायितं सर्वतः / तद्गन्धग्रहणाग्रहकरसिका भव्यालयोऽहनिशं, संगीतं प्रथयन्ति संमदरसस्यापानतः स्वेच्छया // 8 // चंचचंद्रकुले चरित्रनृपतेः श्रीराजधान्यामिह, प्रासादेषु महाव्रतेषु सुदुरारोहाग्रभागेष्वियं / येषां कीर्तिरमन्दमन्दरपरिभ्रांतिक्रमोल्लासितक्षीराम्भोधिविलोलवीचिरूचिरा नूनं पताकावली // 9 // यद्दीक्षा सुकृतोदयेन कृतिनां दाक्षायणी नायका, ज्योत्स्नैव प्रमदं विकाश्य कुमुदं दूरे रजांस्यऽस्यति / संतापं हरते गुणोघमनघं दुग्धोदधिं वर्धयत् , यसात्संवरवीचिसंचयवशात्मुक्तात्मलामो भवेत् // 10 // सिंहस्यापि लघोः क्रमेण भविता शौर्य करींद्रापहं, बालस्यापि रवेर्महः प्रतिदिनं दृष्टं प्रतापावहं / एवं ज्ञानदृशा विभाव्य वयसि स्वल्पेऽपि तैः श्रीमतां, येषां शीलगणाभिधैः स्वगुरूभिश्चक्रे पदस्थापना // 11 // तेषां चिरं गच्छपतित्वमाजा श्रीमानतुंगामिधमरिराजाम् / शिष्या बभूवुर्गुणदिव्यरत्नरत्नाकरा वृत्तधरा धरित्र्याम् // 12 // तेषु श्रीमलयप्रमाख्यगणभृत् शाखाधिराजोऽजनि, ज्ञानेंदयशलशृंगसुभगोऽनुलंध्यमानोअतिम् / ख्यातो यः सहशेषमूरिमिरिह स्वीयैः क्षमामंडले, सूर्यो द्वादशमूर्तितामधिगतो भव्यांबुजबोधकः // 13 / / एवं गुरूपर्वकर्मसंबंधे जयति श्रीवीरजिनतीर्थे / श्रीमानतुंगगुरुभिः कृते जयंत्या महासत्याः // 14 // प्रश्नोत्तरप्रकरणे परिवाराभ्यर्थने स्वगुरुमक्त्या। अविभक्तधर्मचंद्रा | भिधगणिना भागिनेयेन // 15 // भणितैः श्रीमलयप्रभसूरिभिरेषा विचित्रदृष्टांतैः। संवेगाय यथामति जगति जयंतीकथा प्रथिता // 16 // हंसोऽयं गगने प्रभातसुखतः क्रीडासरस्यन्वहं, यावत्साण्डतमिस्रसैवलमलं रे व्युदस्य क्षणात् / धत्ते सर्वदिशा सुखांबुजवने संचारलीलायितं, संतोष सुधियां ददात्वविकलं तावज्जयन्तीकथा // 17 // द्वादशवर्षशतेषु | श्रीविक्रमतो गतेषु षष्टितमे / वर्षे ज्येष्ठे मासे श्रवणमे कृष्णपंचम्याम् // 18 // जीवादिविषयसंशयतमोपहारेकतरणिरुचिरुचिरा / // 3 Page #335 -------------------------------------------------------------------------- ________________ बयन्ती प्रकरणइतिः / // 322 // | परम्परा। TAGS योगे चन्द्रे सिद्धावि जयंतीकथारचिता // 19 // मोहमहिपतिविजये चतुरंगबलेन शुचिगुणस्मृता। इह जगति वैजयंती एतत्पुस्तकजयतु जयंतीकथा सुचिरम् // 20 // मंगलमस्तु // | लिखादिव्यश्रीसदनं सदा क्षितिधराधारः सुपात्रास्पदं, क्षोणीमंडलमंडनं सुविदितः प्राग्वाटवंशोऽस्ति सः। यत्र छत्रपरंपरा- पयित्रीनाऊ वति तते संप्राप्य पर्वस्थिति, जायंतेऽद्भुतमत्र वांछितफलैः सौहित्यभाजो जनाः॥१॥ मुक्तावत्तत्र वंशे समजनि विदितो श्राविकाघाहडश्रेष्टिवर्यः, सद्वतः कान्तकान्तिः प्रवरगुणगणः प्रास्तनिःशेषदोषः / आनंदाधायिमृतिः त्रिभुवनभवनोत्संगरंगत्सुकीर्तिः, वंशस्फुर्जत्पुण्यप्रबंधोद्भववशविलसत्प्राभवस्फूर्तिपूर्तिः॥२॥ नयविनयविततिविटपितसितांशुसितकीर्तिधवलितदशाशः / पुण्याचार. पवित्रः तत्पुत्रो धवलनामासीत् / / 3 // अजनीह मरूसंज्ञा मरूस्थलीपायपंकजवनस्य / तस्य प्रवरा जाया विशुद्धशीला विग-4 तमाया // 4 // तत्पुत्री ठक्कुराणी समभवदऽसमक्षांतिविस्तीर्णशाला / नाऊनामा शशांकद्युतिधवलगुणैः साधुशस्यैर्विशाला // 5 // धर्मानुष्ठाननिष्ठा विधिवशविकसत्कीर्तिसंभारसारा / प्राय॑स्फूजद्विवेकप्रतिहतविततोद्दामदुर्वारमारा // 6 // इतश्च-संजातोऽत्रैव वंशे निरूपममहिमा भाग्यसौभाग्यभूमिः श्रीपालष्ठुकुराग्यः प्रथितशुचियशाः पालितप्राज्यनीतिः / दिव्यश्रीकेलिगेहं समजनि परमं मंडनं धामलक्ष्म्याः , श्रीदेवी तस्य पत्नी विकृतिकलुषतालोलतानां सपत्नी // 7 // तयोः सुतः शोभनदेवनामा मुख्यो यशोदेव इति द्वितीयः / जातोऽभिजातो नृपमान्यतादिगुणैरशेष(वि सुप्रसिद्धः // 8 // तत्र शोभनदेवस्य ठकुरस्य गृहीणिद्वयं / मृहवमहणूसंज्ञ सोढ़नामा सुता पुनः // 9 // नाऊकाया पाणिग्रहणं कृतवानऽसौ यशोदेवः / तत्रातिरत्नभृतेति रत्नदेवीति विदितेयम् // 10 // या शीतेव कलौ कलंकविकलप्रोल्लासिशीलोवला, धर्मानुष्ठितिनिष्ठया त्रिभुवने प्राप्तप्रतिष्ठा हि या / P // 322 // HABAR Page #336 -------------------------------------------------------------------------- ________________ पर्यन्ता CASTARA लम्याऽगण्यवरेण्यपुण्यनिवहा या चैत्यकृत्यादिमि नास्थानपुरादिधार्मिकसमाप्रख्यातनामा च या // 11 // ज्ञानं मोहमहांधकारदलने रत्नप्रदीपायते, ज्ञानं दुर्गतिदुर्गकूपपतने हस्तावलंबायते / गंभीरे भववारिधौ भवभृतां ज्ञानं सुपोतायते, ज्ञानं शिर्वादकामितवस्तुलामविषये सत्कामधेनूयते // 12 // इत्येवं शुभदेशनां बहुविधां श्रुत्वा गुरूणां मुखादेषा दोषपरांग्मुखी 15 प्रकटनम् / जिनमते रक्ता विरक्ता भवे / सप्तक्षेत्रनिजार्थबीजवपनासक्ता विशेषात्पुनर्नानापुस्तकलेखने कृतमति उरिह श्राविका // 13 // इतः चतभिस्संबंधः / श्रीशीलगणपूरीशपूज्यपट्टप्रतिष्ठितः / बाल्यादपि महापुण्यश्रेण्या नित्यमधिष्ठितैः // 14 // श्रीमानतुंगमरिभिराराध्यैः सूत्रयत्जयंताख्यम् / प्रकरणमकारि शुभदं भगवत्यंगान्मनोहारि // 15 // तस्योपरि गुरूभक्त्या विदधे सधियां मनोरमा वृत्तिः। श्रीमलयप्रभसूरिभिरिह या पूज्यैः प्रसन्नतमैः // 16 // तामिह सा नाऊका ज्ञानाराधनधिया मगुरुमक्या / लेखितवती गुणवती महासती शुद्धशुभभावा // 17 // यावत्चारुमरीचिसंचयचिते चंद्रार्कयोमण्डले, राजेते गगनश्रिये मणिमये दिव्ये चलकुंडले / ताराश्रेणिरियं पुनः सुकुसुमालंकारशोभावहा, तावत्पुस्तकमेतद् अद्भुततम व्याख्यायतां मरिमिः॥१८॥ स्वस्तिश्रीविक्रमनरेंद्रतः संवत् 1261 वर्षे आश्विन वदि 7 रखौ पुष्य नक्षत्रे शुभयोगे श्रीमदणहिलपाटके महाराजाधिराजश्रीमीमदेवकल्याणविजयिराज्ये प्रवर्तमाने श्रीप्राग्वाटनातीयश्रेष्ठिधवलमरूपुच्या ठ० नाउश्राविकया आत्मश्रेयोथै पंडितमुंजालहस्तेन मंकृशिकाखाने जयंतीवत्तिपुस्तकं लेखयित्वा श्रीअजितदेवसूरीणां निजभक्या समर्पितमिति // शुभं भवतु // P // 323 // खरीणां निजमच्या साविकया आत्मश्रेयो) Page #337 -------------------------------------------------------------------------- ________________ EA बचन्ती पर्यन्त शिर्वादप्रकटनम् / इतिः / // 324 // SearanleoalsoralIMRECTRONGEMIRECTRIRAORDERS OPAN // इतिश्री जयन्ती प्रकरणवृतिः // F O REIGNOREIGNEDJMEROVIDIEOHDICINEMIEROINDEX IPI 314 // Page #338 -------------------------------------------------------------------------- _