________________ 56456 जयन्तीप्रकरणवृतिः / प्रसबो वीरभद्रो रत्नवती विद्याधरी | परिणापितः। // 88 // म्हा मुहासमे अम्ह पाहि समं वसर्हि तो जगमा राओ मित्तीपत्तेहि बल्लहं अच्छ / सत्ताणं / वेलाण व संगेण सिरिपयलाहो न ते दुल्लहो // 288 // पियदंसणा तुमंपि य जंतं पियदंसणाए तं भगिणी।। सब्बंभचारिणीए सह जोगो होइ सुहहेऊ // 289 // अनं च-जा तुमए जिणधम्मो रम्मो कप्पदुम्मो व फलदाया। लद्धो वच्छे ! ता तुह धवलाहे (पतिलाभे) को गुम्माहो // 290 // अहवा / / हिययत्थलम्मि रुढो तुह धवलाओ सयावि फलदायी / बोही जेण पियच्चिय सुयणु! तओ तयणुबंधोवि // 291 // उत्तं च-सम्मत्तदायगाणं दुप्पडियारं भवेसु बहुएसु / सबगुणमिलियाहिवि उवयारसहस्सकोडीहिं // 292 // बहुगुणसालं वच्छे ! इच्छंती सुयणु ! वल्लहं अच्छ / धम्मारामे तम्हा सुहासमे अम्ह पासम्मि // 293 // इच्चाइयवयणेहिं मन्नइ साणंगसुंदरी सत्वं / पियमेलयम्मि तित्थे पत्ताहं पुनजोगेणं // 294 // इन्ति समणीहिं समं वसहि तो गंगसुंदरि देवि / नयणुप्पलमालाहि तरुणा अचंति पञ्चंग // 295 // पियदंसणावि तीए मित्तीए रंगमुबहइ देहे / हवए चिय जं राओ मित्तीपत्तेहि पत्तेहिं // 296 // समगुणवल्लहकहणे भणियं पियदंसणाए मम पिओ। तत्ततवणिजकंती भणसि तुमं नीलमणिदित्तिं // 297 // इय संकहाण ताणं भणियं समणीहिं अम्ह वसहीए / एवं कहा न जुजइ निसीहियाए पविठ्ठाणं // 298 // उत्तं च-जो होइ निसिद्धप्पा निसीहिया तस्स भावओ होइ / अणिसिद्धस्स निसीहिया केवलमित्तं हवह सद्दो // 299 // तवतावियदेहाणं समणीणं वयणरुहविसेसेणं / गलियमयणाण ताणं दिणाणि वच्चंति निविग्धं // 300 // सोऊण वीरभद्दो पत्तीकुसलपउत्तिसंजुत्तिं / पीयसपाणतत्ति पत्तो तत्तो इमो सुमणो // 301 // रयणवई रुववई दिवं विजाहरि विवाहेउं / सविसेसभोगललिओ अच्चुयलच्छि धरइ एसो // 302 अ॥ पिच्छद य अनदियहे लोयं विजाहराण गच्छंतं / मणिभूसणरमणीयं देवंगदुकूलनेवत्थं वसहि तो गंगा मइ साणंगसुंदरी स वि तीए मित्तीय ROSORRECCACICA HARS