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________________ // 2710 तदुपरिवाक्पतिराजदत्तप्रश्नो बप्पभट्ट सूरीणां हर्षेः। CARRC RECRUC3% सरह पवणमग्गंमि / तप्परिवारे गुरुबुहकईण कत्ती पहा होउ // 9 // तो बप्पभट्टसूरी दीकयरायबोहणोवाओ। निवपुरओ सविसायं सामिप्पायं पढइ एवं // 10 // अवलम्बिया तिणावि हु तुदृन्ति समुद्धरन्ति वा विहलं। विहलोद्धरणा नहु तिणसमावि जे ताण किं मणिमो 1 // 11 // लक्खिय तदभिप्पाओ आमनरिन्दोवि भणइ जिणधम्मं / कमलं व तं पयाससि किन्तु इमं मित्त ! सुण वयणं // 12 // ईसरसिरपणओ च्चिय राया लोयंमि न उण जिणभत्तो / सूरिवरेहिं विसाओ किं किजइ ? इत्थ वत्थुम्मि // 13 // तो सूरिणावि वुत्तं राय तुम मित्तभावपडिवन्नो / तेण तुह निडररूई न सम्मदिट्ठिपहं एह // 14 // अन्नं चपडिपुन्नकलो राया ईसरपणओ न होइ कइयावि / सहगुरूतेओ किं पुण करेइ सय वरजोयं / / 15 // कुडलिप्पकलो राया तुम व पुण होइ उग्गजडपणओ / पुनकलोवि न राया तुमए पडिबोहिओ कोवि // 16 // एवं निवेण भणिए सूरी पडिभणइ अन्नरजम्मि / अणुमनसु मं सम्पइ गच्छन्तं रायबोहत्थं // 17 // इय सूरिवरेणुत्ते राया रजन्तरंमि गच्छन्तं / अणुमन्नइ सिग्धं चिय साणन्दं बप्पहट्टिगुरूं // 18 // गोवगिरिनामदुग्गा विणिग्गओ बप्पहट्टिसूरीवि / अणुकूलसद्दमंगलसउणसउच्छाहपरिणामो // 19 // देसे सवायलक्खे सयंभरी दिव्वपुरवरी अस्थि / तीए बप्पइराओ राया भवर्णमि विक्खाओ // २०॥रायस्स जस्स गुरुबुहकविमंडलसूरपरिचियमहस्स / अच्छेरं तु सयंवरसविहवियारो न संजाओ॥ 21 // मुत्ताहलविमलाइं गुणाणुविद्धाई जस्स कबाई / कंठंमि कविन्देहिं साणन्देहि धरिजन्ति // 22 // अह तंमि पच्छिमवए लोइयधम्माणुरत्तचित्तंमि / अंगीकयसनासे देवयगुरूपूयणन्भासे // 23 // दिजन्ति य दाणाई तहा कहिन्जन्ति रिसिकहाणाई / विरइजइ कुससयणं पसरह वेयाणमज्झयणं // 24 // संतरसिनियविबुहा कुणन्ति कव्वाई भवनबाई / मोक्खम्मि चेव कंक्खा तिवग्गअग्गेसरे होइ
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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