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________________ 12 भी बपन्तीप्रकरणवृत्तिः / तद्विषयकविचारा न्तरं प्रकटितम् / 4 // 270 // ASHARAM अहवा पडुचकालं न सव्वभव्वाण होइ वोच्छित्ती। जंतीयणागयाओ अद्धाओदोवि तुल्लाओ॥१४॥इति सूत्रं- ____ व्याख्या-अथवा प्रतीत्य कालं न सर्वभयानां लोके भवति व्यवच्छित्तिः / यदऽतीतानागते अद्धे द्धे अपि तुल्ये // तत्रातीताद्धायां सिद्ध एको अनन्तभाग एषां, कामं सेत्स्यत्येतावानेवाऽनागताद्धायां / तौ द्वावप्यनन्तभागौ भूत्वा स / एवानन्त भाग एषां, एवमपि न सर्वभव्यानां सिद्धिगमनं विनिर्दिष्टम् / सूत्रगाथे द्वे यथातत्थाऽइइअद्धाए सिद्धो एगो अणंतभागो सिं / काम तावइउ चिय सिझिही अणागयद्धाए // 15 // ते दो अणन्तभागा होउं समुच्चियअणन्तभागोसिं / एवंपि सव्वभव्वाण सिद्धिगमणं न निदिटुं // 16 // व्याख्याते एते गाथे, अस्मिश्चार्थे आचार्यवप्पभट्टिप्रतिबोधितवाक्पतिराजेन जिनशासनानुरागपरीक्षाहेतवे कृते सति प्रश्ने प्रत्युत्तरदानमपि स्थूलव्यवहारेण अवतरति / तथाहि-अस्थि इह अम्बुद्दीवे दाहिणभरहद्धमज्झिमे खंडे / गोवगिरिनामदुग्गं समग्गसिरिसोहग्गं // 1 // तत्थासि आमराया पयण्डभुयदण्डमण्डवे जस्स / दूरीकयसन्तावो अहासुहं विसयजियलोओ // 2 // तस्स य रजे सूरी विक्खाओ बप्पहट्टिनामेण / नाणाइरयणरोहणगिरिसमसीसिवहो आसि // 3 // मित्तत्तणेण रन्ना पडिवनो बंभचेरसुपइट्ठो। जिणसासणप्पभावणनिट्ठो मुणिपुंगवगरिठ्ठो // 4 // तस्सोवएसवसओ निच्चलपडिवन्नमित्तभावेण / दुग्गम्मि तम्मि रन्ना करावियं वीरजिणभवणं // 5 // किन्जन्तम्मि महल्ले जिणिन्दभवणम्मि जंमि रमणीए / सव्वग्गेणं लग्गा दविणस्स दुद्धकोडिओ // 6 // परमत्थमित्तभावो हवइ जओ बोहिलाभदाणेण / इस बप्पहट्टिसरी पडिबोहइ आमनिवचंदं // 7 // जिणवरदेसियजीवाइतत्तवित्थारकहणकरणेहिं / सूरो इव अणुदिवसं संसयतिमिरं हरइ सव्वं // 8 // रायस्स किंतु जोइप्पसरो अब // 270 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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