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________________ // 59 // होज संवन्धो 1 // 849 // परिचियसुहोवयारो सिरीसपुष्पं व तं सि सुकुमारो / करवत्तसगोत्तं पुण चारित्तं दुबह पुत्त ! // 850 // विसएसु व्बूढमणो वसहगई जइवि तंसि दिढसत्तो। पंचमहत्वयभारं सुरगिरिसारं कहं वहसि ? // 851 // उत्तमखमाणुगाणं मूलगुणाणं पवनुमाणाणं / उत्तरगुणपरिवाडी रक्खइ संजमतलं वच्छ ? / / 852 / / धम्मज्झाणकलाए बद्धं चिय संकलाए धरियवं / कविचवलं नियचित्तं पुत्तय ? सासयसुहनिमित्तं / / 853 // वसियत्वं विणएणं गुरुकुलवासंमि गुणनिवासंमिासहियत्वा बावीसं परीसहा दुस्सहाऽवस्सं // 854 // संसारम्मि समुद्दे पुत्तय जलजंतुघट्टणारुद्दे / उच्छलिउक्कलिया हिं बुहह नाव व पवजा // 855 // इय जणणीए वुत्तो मेहकुमारो विवेयसिरिहारो / महुधारामहराए गिराए भणिउं समाढत्तो / / 856 / / लहुकम्माण जीयाणं जिणिंदवयणामएण सित्ताणं / सत्ताणं माय इमं चरणं सिवलच्छिवरणं व // 857 // अन्नं च-“तिणसंथारमुवन्नोवि मुणिवरो भट्टरायमयमोहो / जं पावइ मुतिसुहं कत्तो तं चक्कवट्टीवि" | // 858 / / वीरजिणेणं जेणं वामपयग्गेण चालिओ मेरू / मह तस्स पसाएणं चरणभरो सुबहो होही / / 859 // तं नस्थि जंन सिज्झइ साहसवंताण धीरपुरिसाण | ववसाएक्करसाणं वसिंदियाणं थिरमणाणं // 860 // भणियं च-थरहरह धरा खुम्भंति सायरा होइ भिंभलो(व्याकुलो)दियो / असमववसायसाहससंलद्धजसाण धीराणं // 861 // तहा-ता तुंगो मेरुगिरी मयरहरो ताव होइ दुत्तारो / ता विसमा कजगई जाव न धीरा पवजंति // 862 // वीरजिणिंदे निजामयंमि सुहभावगजगपवाए / चारित्तजाणवत्तं भवनवं तारइ अविग्धं // 863 / / मेहकुमारो पसरं करेइ परमोइयं तह दिसासु / तायंबकर्यवाणं जह सोरभो वियंमेह // 864 // ता ताय भावजणओ माय तुमं होसु भावजणणित्ति / भावो भन्नइ हेऊ सुसाहुसद्दप्पवित्ती) SACROC4%AAAACARAK दीक्षाकष्टप्रदर्शने मेषकुमारप्रत्युत्तरं श्रुत्वा प्रदत्ताऽनुमतिः। VI // 59 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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