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________________ // 139 4 है वजनाम वाहुसुबाहु पीठ ला महापीठदीक्षा। म्माहो। चिन्तह इह गिहवासे न तत्तउ कोवि मह लाहो // 37 // सो विनवइ जिणिन्दं साणन्द नाथ ! तुम्ह पयकमले। होमि महन्वयधारी अलि वलीणो रयं धणियं // 38 // भयवंवि भणइ नरवर ! अहासुहं मा करेसु पडिबन्धं / जं उत्तमाण उत्तमकजे निच्चोजम्मो होइ // 39 // तो राया नमिऊण संविग्गो जिणवरस्स पयकमलं / आगच्छइ नयरीए रजं सोत्थं करेह सिग्धं // 40 // चईऊणं रजसिरिं पडग्गलग्गं तिणं व निस्संगो / सबड्डीए बन्धवसहिओ संजमसिरिं पत्तो // 41 // जस्स खमा सा जीए विणयारामंमि सउणललियंमि / सुयक्खंधकप्पतरूणो अचिरेण सप्फला हुंति / / 42 // जम्हा अञ्जवजुत्तो अपमत्तो तेण संजमसिरीए / परिरंभलालसाए न खणंपि चइजए जोओ // 43 // सो बहरनाहसाहू मुणितिलओ सुगुरूमूलगुणवुड्डो / वियसिरसुमणो सुरही भमरहिओ प्फुरियघणपत्तो / / 44 // गीयत्थो सो धारइ अन्तो बाहिपि अंगुवंगाई / पुनाई पयलक्खणसरवंजणवन्नललियाई // 45 // चउदसपुची गणहरपयंमि सो ठाविओ वरनाहो / गुरूगच्छगयणदिणमणिमंडलमाहप्पदिपन्तो // 46 / / अवरावरदेसेसुं विहरइ भवाण कमलसंडाण | वियरन्तो पडिबोह, परिमलद्रावणयणेणं // 47 // चाहुसुबाहुमुणिणो सहोयरा तस्स पीढमहापीढा / एक्कारसंगसागरपारगया हुन्ति गीयत्था // 48 // सदेवि जियकसाया जहुत्तऽणुट्ठाणनिहणियपमाया / विणिहयमोहपिसाया तवचरणविसेसकिसकाया // 49 // अणिगृहियबलवीरिया सम्मं असवत्तजोगमणिकिरिया / गंगापवित्तचरिया गुणलच्छीए सयं वरिया // 50 // तत्थवि बाहुमुणिन्दो पंच सयाणं मुणीण निचंपि / भत्तं पाणं सुद्धं वियरइ सद्धासुहाजलही॥ 51 // बाहू साहू पुन अजइ बहु चक्कवट्टिभोगफलं / केवलनिजरपेही सुपत्तदाषण सुद्धेण / / 52 // पंचन्हं मुणिपुंगवसयाणं विस्सामणं सुबाहूवि / कुणइ -SCRECOR Dill139 // C
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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