________________ CAR श्री जयन्ती प्रकरणकृतिः / // 14 // निरीहो वयभरधुरन्धराणं अणुदिणपि // 53 // दलयइ सुमुणी वीरियविग्धं कम्मं गिरिन्दवजेण / वेयावच्चेणऽञ्जइ, भुयबल- वज्रनामेन फलयं तहा सुकयं // 54 // सज्झायनिज्झरेणं झरन्ति संवरभरेण पडिपुना / पीढमहापीढमुणिणो गिरीसरा गहिरनिग्घोसा वैयावृत्त्य॥ 55 // अह उज्जुयसीलाणं तेसिं गुरुकुलसमुद्दवासीणं / नाणसिरिपरिरंभण सुहाई वटुंति साहूर्ण // 56 / / सो एस वयरनाहो विषया गणहारी देसमंडलविहारी / भवियकमलोवयारी दिप्पइ सुर व तमहारी // 57 // वेयावच्चं निचं बाहुसुवाहूण बन्धुसाहूण / | बाहुसुबाहुदगुण उववूहइ सगणसमक्खं सयं हिट्ठो // 58 // धना एए मुणिणो बाहुसुबाहू महासया जेण / मुणिजणवेयावच्चे सच्चे मुनिवराणां निचोजमो ताण / / 59 // देवसुइलम्पडाणं जडाण जीवाण होइ आलस्सं / मुणिजणवेयावच्चे सिवसुहपडिहूवमे सम्म कृता // 60 // वेयावच्चसमजियपुग्नं पुनाणुबंधि अइगरूयं / अप्पडिवायं समए जं भणियं जिणवरिन्देहिं / / 61 // तथाहि- प्रशंसा। ओहावियस्स चरणं, मयस्स नासइ सुयं असज्झाए / अप्पडिवायं वेयावच्चेण पुणज्जियं पुन्नं // 62 // तो एए मुणिवसहा गुणिणो वेरग्गमग्गमोइना / धन्ना संचियपुन्ना धम्मधुराधरणअविसन्ना // 63 // बाहुसुबाहुपसंसं सुच्चा ईसानलेण संतत्ता / पीढमहापीढमुणिणो मणकालुस्सं धरन्तेवं / / 64 // कजकराण पसंसं कुणंति नो अम्हाण ज्झाणनिरयाण / एए अजवि गुरूणो असिरिं चेव पालन्ति // 65 // इय चिन्ताभमरीए लीलाए ताण हिययकमलंमि / तं किंपि कयं कम्मं, संपज्जा जेण अवलत्तं // 66 // अह अरिहाइयवच्छल्लयाइहाणेसु वीसमाणेसु / सल्लईवणेसु विहरइ गयराओ सो वइरनाहो // 67 // अह आसाइय तिथ्थयरनामकम्मपरिपुनपुन्नदलो / अप्पवसाहि संजमसमदमलच्छीहिं परियरिओ // 68 // पुहवीतले जलपूरियंमि अवि तस्स पायचारेण / अवसरइ कलुसमावो सच्छत्तं होइ अच्छरियं // 69 // अवरावराण मयकुंजराण // 14 //