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________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / | संसाराs. सारतावि|पया वीरप्रभोःशना। // 20 // SCRIHARCOSRECASISEX दुल्लहं। दिढदीहरजीवत्ता साहइ घणुइंपि परलोयं // 260 // अवगयरयपडलाए सत्तुल्लासाए जीए बुद्धीए / पडिविति वियारा सुहावया सावि अइदुल्लहा // 261 // आलस्सयाइपडिहाररूद्धमुणिरायपायदिट्ठीणं / धम्मसवर्णपि न हवइ जियाण अवि बुद्धिमंताणं // 262 // धम्मसवणेवि दुलहो अवग्गहो नाणावरणउदयम्मि / विम्हरणसंभवाओ य धारणासत्तिविरहाओ / / 263 // अवगहियम्मि व धम्मे सद्धा जीवाण दुल्लहा चेव / सा प्रण सिद्धिवहूए संगमकरणेकतल्लिच्छा // 26 // करिणो इव भवरले सद्धावतावि संजमं कहवि। पाविति गुरुपओगा सच्छंदविहारसहरसिया // 265 // एसा दुवालसगी अंगीकाऊण सव्वचारित्तं / सहलच्चिय कायबा दसविहमुणिधम्मसेवाए // 266 // तहाहि-कोवदवसलिलधारा इंसाए बंदिणीए दिढकारा / उग्घाडियसिवदारा खमा इमा सत्वगुणसारा // 267 // विमलगुणरयणगभं जेण खमं धारयति कुलगिरिणों / तेण चिय अईगरुया समुन्नया सासया जाया / / 268 // सेसोवि खमाहारो ईसरहिययंमि पत्तसिरिहारो। निच अमियाहारो जाओ पुरिसोचमाहारो // 269 // माणगिरिदलणवजं साहणं दिनसिवपरीरजं। विणयगुणकरणसञ्ज मद्दवमिह सिद्धनियकों // 27 // नवणीयमिव सिणेहं महग्घयं कुणइ महवगुणेण / ताविजंतोवि दिदं पुरिसत्थपसाहयं जीवो // 271 // चंदस्स व अवि पुग्नं वित्तं पत्तस्स निम्मलकलस्स / जीवस्सेह कलंको हवह मओ जस्स हिययंमि // 272 // लीलाए मुनिवरिन्दो अजावजेण दलियमाहप्पं / काउण कवेडसेलं सिवपुरमग्गे सुहं जन्ति // 273 // मणवयणकायजोगा अजुणवाण छ अजवुजुत्ता। धम्मगुणसंपउत्ता परलोयपसाहया हुंति // 274 / लोउत्तरियं चरियं परलोओ जमिह सिज्झइ जियाण / 1 तस्परा / 2 शेषनागोवि / 3 मदः / 4 आर्जववत्रेण / 5 कपटशैलं / -OCALCCIRCREASO 495 // 20 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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