________________ भी बयन्तीप्रकरणइतिः / श्रेणिकनृपधारिणीराज्ञीस्वरूपं स्वने हस्तिस्वरूपकथनं च। // 50 // तरयणदीवो जस्स मणे मंदिरंमि अवणितो। मिच्छत्तमंधयारं करइ सुराणं चमुक्कारं // 717 // देवगुरुभत्तिमुत्तियहारो हिययंमि जस्स गुणसारो / वरपउमरागमणिणो दिप्पद धम्माणुराएण // 718 // जिणसासणप्पभावणनंदणवणकुसुमविन्भमजसेहि / मेरुगिरिण व जेणं कयसोरभो दिसाभोओ / / 719 // बुद्धीण कमलिणीणं बोहणदिणनाहविपडिबिंबो / अभयकुमारामच्चो सिरोमणी जस्स मंतीणं / / 720 // मयणनिवरायहाणी पत्ती सिरिसेणियस्स मियवाणी / तस्स गुणरयणखाणी धम्मरुई धारिणी देवी // 721 / / आसि अवरोहसारा जंगममणिसालभंजियागारा। सुललियपयप्पयारा निम्मलजसकित्तिवित्थारा // 722 // गुरुजणकयसकारा गंगाजलधवलसीललंकारा / जा उज्झियहंकारा उत्तमकुललद्धअवयारा // 723 // जा दिद्विअमियधारा असईजणविहियदूरपरिहारा। कुलसमुचियसिंगारा कंचणलायनसंभारा / / 724 // रूवजियकामदारा सिरीसनवसरसकुसुमसुकुमारा / परिचत्तमणवियारा जा वंछिपसिद्धपरिवारा / / 725 / / मलयावणिसंकासा विणयप्पणयाण चंदणवणाण / कावेरी. तीररसा करुणाकप्पूरपारीणं / / 726 // पणयजणकप्पवल्ली हासलवुल्लसियकोमुइपयासा। उचियत्तरूवमंजरी भमरीविन्भमरसोल्लासा // 727 // जिणवयणकमलहंसी पसत्थपासस्थपंडियवयंसी। जा सुंदेरगुणिन्दाणी समग्गसोहग्गसवाणी // 728 // अह सो गइंदजीवो तीए धारिणीए कुञ्छिमि / रयणंकुर इव रोहणगिरिधरणीए सुओ जाओ // 729 // पासइ सा वासहरे सुत्ता रयणीए दिवसयणीए / एरावणं व हत्थि सुविणे अवइन्नमुयरंमि // 730 // अणिमिसनयणुल्लासा रहंगसम सिहिणकुम्मचलणा य / तिवलितरंगासंगा आवत्तगहीरनाहीया / / 731 // घणपुलिणसमनियंचा लावन्नतरंगपुनसबंगा। गंग Pाव थिरा बुद्धा सुमिणं अवधारए देवी // 732 // तो विरइयनेवत्था अउच्छ उच्छाहहरिसपडिहत्था / रयणमयपाउयाहिं ॐॐRATE का॥५०॥