________________ B // 197 // हैसित्ता / होइ सुमणोमिरामा नंदणराइ व पल्लविया // 71 // अह दाणं दाऊणं कंतिमई चित्तसालियं एइ / पिच्छइ तत्थ न चित्रितमयू हारं पडलीमुकं गुणाधारं // 72 // कुणइ य तयणु वियारं कम्मयरेणं हविज गहिओत्ति / पुच्छामि ताव एए पुट्ठा तो ते | रेणोत्तीर्य इमं विति // 73 // अजाओ मुत्तूणं न कोवि तह चित्तसालियं पत्तो / तो हक्कइ कम्मकरे का संका ? तुम्ह अजाणं // 74 // म्हारो गिलिभत्तंपि हु दिजंतं समग्गलं जाओ नेव गिण्हन्ति / ताओ किं हारेणं अणत्थमूलेण काहिन्ति ? // 75 // किं ? दुद्धे पुयस्या हवन्ति तस्ततश्चौअमएवि किं विसं होइ ? / गंगानईए किंवा कयावि अपवित्तया होइ 1 // 76 // एवं कन्तिमईए साहिक्खेवं सुणित्तु वयणविहिं / हार्यकलङ्कमाकम्मयरा तुसिणीए मुद्दियवयण व चिट्ठन्ति / / 77 // तो विनाओ सागरसमुद्ददत्तेहिं हारवुत्तन्तो। तो लग्गा कलहेउं जप- पतितं तया न्तऽजा अणजत्ति // 78 // ता कन्तिमई जम्पद अजाए मा करेह निन्दत्ति। पावेण चिय छिप्पह नय अन्जा एरिसं कुणइ // 79 / / &च समतया अविय-उग्गमइ रखी पच्छिमदिसाए अवि चलइ मेरूचूलावि / लंघइ मजायं सायरोवि अजा कुणइ नेवं / / 80 // तेहिवि तो सोढम् / पडिभणियं मा वच्चह साहुणीवसहीए / ता कम्मवन्धभीया ताओविन जति ताण पासंमि // 81 // सवंगसुन्दरीविय अजा सुद्धावि एइन हु गेहे / गुरुकम्मबंधमीआ समाहिणा चिट्ठए किन्तु // 8 // छट्ठट्ठमाइ उग्गं कुणइ तवं जत्थ होइ सुइभावो। वियसन्ति | भावणाओ सुद्धपसवा पाडलाउ व // 83 // निम्मलसंवरभरिए खीरसमुद्दि व माणसे तीए / जणघणदुवयणवि हु समइच्चिय देइ नहु तावं // 84 // नवचंदकलानिम्मलपवजाएवि सऊणं चक्काणं / जं परितावो तं मह बहुतमदोसाणुभावेण // 85 / / उत्तमकुलंमि जम्मे चरित्तधम्मेवि कीरमाणमि / एसो मे उवहासो अनायहेऊ हहा हो // 86 // चित्तगओ उत्तिन्नो मोरो गिलिऊण हारमविलंबं / चित्तगओ च्चिय चिट्ठइ कहमिह संपच्चओ होइ ? // 87 // कम्मवसगएण वसणं जीवाणं तंपि होइ संसारे। ASEARCHASKASARGACAS