________________ श्री जयन्ती प्रकरणइतिः / // 182 // सुइरं निरक्खिऊणं दहणं मुणिवरं वणनिउंजे / जम्पन्ति साहुणीओ बंधव ! ताओ भणइ एवं // 43 // झाणंपि कुणन्ताणं तद्वचनदुक्करतवचरणकरणवन्ताणं / न हबइ केवलनाणं हथिगयाणं तवस्तीणं // 44 // वोत्तूण वयणमिमं वईणीओ झत्ति तप्प- श्रवणएसाओ / दूरं ओसरियाओ वरसंवरपूरसरियाओ // 45 // चिन्तह बाहूवि इमं अहमिह कयसबपरियरचाओ। ताओवि जन्यविचावीयराओ होउ तओ को अभिप्पाओ? // 46 // हुं नायमहं केवललच्छि लहिऊण बंधवे लहुए / सवोत्तमनाणधरे रणया केवपेच्छिस्सं न उण छउमत्थो // 47 // एवं माणगयन्दो विणयहुमभञ्जणेकसाणन्दो / आरूढो मूढेणं आयासकिलेसफलहेऊ लज्ञानप्राप्ती // 48 // संजमसुरगिरिसिहरारूढा कल्लाणमायणा गरूया / ते तिजयवन्दणिजा अट्ठाणुइ बन्धवा मज्झ // 49 // तेहिं | समवसपुरिसुत्तमेहि महिओ सियज्झाणमन्दरेणेऽसो / चउपाइकम्मजलही केवलसिरिसंगया तत्तो // 150 // धिद्धी मह अन्नाणं रणे गमनं माणं धरिऊण विणयपरिहाणं / जाओ दुक्खनिहाणं निरत्थयं वच्छरं जाव // 151 // दीसइ गरूओवि लहू माणगिरिन्दंमि जो समारूढो / तह सो न सम्मदिट्ठी गुरूंपि मन्नइ लहुं जेण // 152 // माणेण विवज्जासो वणियाणं निग्गहं जहा देइ / 18| प्राप्तिश्च / धम्मपराणपि तहा नासइ समत्तरयणं सो // 153 / / कल्लाण पत्ती कुलपबओवि जो सबगोचाहियमाणधारी / मेरुब होजा गयदन्तसोहो महावयासन्निहिओ स जीवो // 154 // तोऽहं जडमप्पाणं मयस्यपडलेण कलुसियं झत्ति / मद्दवकयगफलेणं करेमि अह निम्मलसहावं // 155 // तो ताण बन्धवाणं मुणीणं गुणसायराणं पयपउमे / इन्दिन्दिरसुंदेरं लहेमि अहुणा लहुं चेव // 156 / / इय चिन्तिऊण सहसा चलणे उप्पाडियंमि बाहुबली / लहइ मुणिन्दो केवलनाणं सम्पुनसियज्झाणं // 157 // एवं मयलेसोवि हु अणत्थपत्थारकारणं होइ / मुणिकुंजरेहिं कर्ज माणतरूम्मुलणं तम्हा // 158 // निवूढगुरू | मोक्ष CACCOLOCACCIECCAE%