________________ // 119 // व्यन्तर्यभयापंडितागणिकादीनां प्रतिबोधनम् / ACASCORECALCACARALL वामाहि हिमाणीहिं सील कमलं व निल्लेवं // 270 // तुह साहससाहारो धम्मझाणेण मंजरिजन्तो। नवि किंचिवि विड- झिओ नारीहिं धूमरीहिं व // 271 // एयं मुणिन्दगुणगणरयणायरसंथवेण संतुट्ठा / तप्पुरओ उवविट्ठा उवएससुहेसिणो देवा // 272 // अन्नोवि नयरलोओ विम्हयरसपसरपल्लवियवत्थो / आगंतूण मुर्णिदं तं वंदित्ता तत्थ आसीणो॥ 273 // तो तीए परिसाए पुलयंकुरनियरपयडहरिसाए / एस सुदंसणकेवलनाणी धम्मकहं कहइ // 274 // तहाहि-मोहन्धयारपोरे कारागारे इमंमि संसारे / जीवा कम्मल हुत्तं अहापवित्रण करणेण / / 275 // लद्धण रागदोसप्पगिट्ठपरिणामगंठिमेएण / पिच्छन्ति कहवि जिणरविवयणपहामंडलं केवि // 276 // पत्ते तम्मिवि मवा संसारनिवासदुक्खदन्दोलिं / सुमरन्ता जइ इच्छह सिवपुरवरवाससुहसिद्धिं // 277 // सुविसुद्धनाणदंसणचरणसुरुवंमि सिवपुरपहंमि | तो भो पयट्टियत्वं निरंतरं अप्पमत्तेहि // 278 // पमाएण जओ सूरी संपन्नसुयकेवली। वसिजाऽणंतकाएसु गंतकालट्ठिइगओ // 279 // एस पमाओ रुद्दो जम्मि जडाणं हवेह दिढबन्धो / जम्मि य भवपञ्जाओ जायइ उग्गत्तणं पत्तो // 280 // वालुयासिन्धुनिम्मग्गवडबीयं व दुल्लहं / को? माणुसत्तं सम्पप्प पमाइजा वियक्खणो // 281 // नाणे दंसणचरणे पत्तेयं परिहरेह अइयारं। अट्ठपयारं जम्हा होह विसुद्धी परा तेसिं // 282 // तेहि विसुद्धेहि तओ असेसकम्मक्खओ हवइ तेण / केवलनाणुप्पत्ती गच्छह सिद्धिपुरि तत्तो // 283 // तत्थ असरीररूवा अणन्तवरनाणदंसणसरूवा / जीवा अणन्तकालं चिट्ठन्तऽजरामरत्तेण // 284 // अह सबविरहरूवे सिवपुरमग्गमि गन्तुमसमत्था / तो जिणवरिन्दमणियं सावयधम्मुञ्जमं कुणह // 285 // पडिवजह संमत्तं मिच्छत्तमहन्धयारदिणनाहं / सबासि आसाणं उज्जोओ जायए जेण // 286 // अरिहं देवो सुगुरू विसुद्धचारित्तलच्छिसंपन्नो / तत्तं जिणिंद