________________ SAROO जयन्ती. प्रकरणवृतिः / // 20 // GAAKASHARE भपमुहपावेण / तं किंपि हवह दुक्खं अणोवमं बिन्ति जं मुणिणो // 21 // जओ भणियं-अच्छिमीलणमिपि तत्थ सुखं न विजए। नारयाण वरायाणं पुवकम्माणुभावओ // 22 // परमाहम्मियखित्तस्सहावअन्नोन्नजणियतावेहिं / संतत्ता नेरइया 6 सुइरं निवसन्ति निरएसु // 23 // चउविहगइप्पयारे संसारे तत्तओ सुहं नत्थि / तम्हा सिद्धिपुरीए इच्छह वासं सुहावासं // 24 // तो सम्मनाणदंसणरहंगजुयचरणरहवरेणिस्थ / गच्छह सिद्धिपुरीए मुणिवसहाहिडिएण लहुं // 25 // जा एवं धम्मकहं कहेइ सा भगवई पबन्धेण / तावय समुद्ददत्तो भणइ निवं अम्ह अच्छरियत्ति // 26 // नियगेहे अच्छरियं जं तं पुच्छामि मे न खूणंति ? / रायावि भणइ पुच्छसु अवराहो नस्थि थोवोवि // 27 // किं चित्तगओ मोरो हारं गिलइत्ति ? भगवह ! कहेसु | कम्मवसेणं गिलइ तं कम्मं कस्स ? सा भणइ // 28 // मज्झतित्ति भणित्ता कहइ य सवंगसुन्दरी एवं / धणसिरिजम्मंमि मए भाऊणं चित्तमुणणत्थं // 29 // भाउजायाहुत्तं रक्खसु नियसाडियंति जं भणियं / बीयाए सम्मुहं पुण रक्खसु हत्थंति जं वुत्तं // 30 // ताण विवागो एसो पढमे पियसंगमेवि केलीए / वंतरसुरेण पुरिसं दंसेऊणं हया पीई // 31 // तह गेहंमि ममोवरि पीइं दहण तुज्झ घरिणीए / एसा विहडइ किंवा नवत्ति केलीए देवेण // 32 // हारो चित्तगएणं गिलिओ मोरेण दंसिओ मज्झ / असद्धेयंति इमं न मए कहियं पुणो सहियं // 33 / / संपइ खीणे कम्मे पच्छायावो सुरस्स संजाओ / तुह पिच्छन्तस्स तओ निग्गिलिओ चित्तमोरेण // 34 // सुहमऽब्मक्खाणेणवि अज्जियकम्मोदएण जो जाओ / एसो कलंकको निधोइओ संवरेणिमिणा // 35 // धम्मत्थं सुहमं पिय मायासलं अणुट्ठियं एवं / होइ दुहेकनिमित्तं तम्हा परिवजह तयंपि // 36 // एवं निसुणन्ताणं ताणं जाइसुमरणं जायं / मुच्छानिमीलियच्छिणी | समुद्रदत्तेन |चित्रमयूरगिलितहार| विषयकप्रश्नः कृतः | केवलिना सर्वपूर्व भवियत्तान्तो ज्ञापितश्च / CARRC // 20 //