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________________ // 199 // देशनायां चतुर्गति प्रदशनम्। सुद्धसद्धाए // 4 // महुरस्सरेणं तत्तो धम्म सबंगसुन्दरी वइणी / भवजलहिजाणवत्तं कहइ जिणिन्देहिं जं वुत्तं // 5 // | देवागमेण विम्हयरसेण अन्तेउरेण सह राया / अह एइ पउरलोओ परियणरिद्धीए परियरिओ // 6 // सागरसमुद्ददत्तो एयं अच्छेरयं च मन्नन्ता / महिलाहिं संजुत्ता परमाणन्देण तह पत्ता // 7 // तह भगवईए भणियं भो भवा इत्थ भवसमुद्दम्मि / दसदिठ्ठन्तदुल्लम्भा माणुसजम्माइसामग्गी // 8 // जओ भणियं-" माणुस्सखित्तजाइकुलरूवारोग्गआउयं बुद्धी / सवन्नगहसद्धासंजमो य लोगमि दुलहाइ" // 9 // तम्हा भवा रक्खाढाणे बहुसत्तजीवणिकायस्स / जिणधम्मे रयणायरसरिसे सेवामइं कुणह // 10 // जेणेह नाणदसणचरित्तरयणाण तुम्ह उवलम्भे / सिद्धिपुरीए रजं असंसयं सासयं होइ // 11 // संसारे पुण जीवा चउरासीजीवजोणिलक्खेसु / अट्ठविहकम्मबन्धणबद्धा न लहन्ति सुहमणहं // 12 // जम्हा देवगईए इसानलकोहमाणलोहेहिं / देवा किल चवणत्ता सयावि सुहिया न हु हवन्ति // 13 // मणुयगईए जायइ गब्मे जम्मे य जमिह जीवाणं / तं दुक्खं जेणाऽऽउं खिजइ सोवक्कम सहसा // 14 // निरूवक्कमेवि तम्मि य बालत्ते जणणिथन्नच्छेएण / अचिकिच्छणिज्जरोगाइएहि पीडिज्जए जीवो // 15 // तरूणतणम्मि मणुया दुरन्तदारिद्ददुक्खिया हुन्ति / इदुविओगाणिट्ठप्पओगदावानलुत्वत्ता // 16 // अन्ने व वसणासत्ता विसयग्गामेसु हुंति खलसंगे। पसुपायघायदलिया कलिया धन्नं व दुक्खेण // 17 // थेरत्ते पश्चिन्दियबलहाणिं पप्प पत्तदोहग्गा। अट्ठदुहट्टा कालं खविन्ति पुत्ताइपरिभ्या // 18 // एगिन्दियतिरियजिया सकायपरकायसत्थमरणाई / संखेयमसंखेयं कालमणंतं च पाविन्ति // 19 // विगिलिन्दियावि जीवा जलणजलावायतण्हच्छुहसुसिया / सीयायवऽभक्खणवसओ य लहन्ति मरणाई // 20 // नरए नेरइयाणं जीववहारं GA4%ARHAALA .
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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