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________________ भी जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 24 // NAGARAAR CARDC मच्छरकोवाण संमिलणे // 321 // दुभिउडिभासुरनिलाडवट्टेण तेण तो गहिउं / एका घार्यपयाणा तहा हया जह गया | भार्याघातिपाणा // 322 // प्फुरियकरसूरमंडलसरिच्छदप्पणसएहिं पडिहणिओ / मरणभयकंताहि कंताहिं गंगसणोवि / / 323 // तो तानसेनो अणुतावो दावो दहइ इमाणं मणं वणंतं व / पसरंति धृमसरिसा दीहा उन्हुन्हनीसासा // 324 // कज्जलरुइघणनयणाण | मृत्वा भवं ताण पवहंति वाहजलधारा / सुकंति कंतिजुवणजवासया तोहं सवेवि // 325 // का अम्हाणमियाणि गइत्ति ? पइमारियाण | भ्रान्त्वा लोमि / इय चिन्तिऊण ताओ अग्गि साहिन्ति गिहमज्जे // 326 // मणुयाउयमावल्जिय पच्छायावेण साणुकोसेण / कुशस्थले विजयस्स पल्लिवइणो चोरा जाया तओ ताओ // 327 // पढमा पत्ती गामे कुसत्थले सोमिलस्स विप्पस्स / साहसियनाम- सोमिलविअइकूरपुत्तभावेण संजाया // 328 // सो उण अणंगसेनो दुकम्मपरिणामपरिणओ भमिउं / कइवयभवंतरेसु उप्पनो तस्स प्रस्य लघुलहुभगिणी // 329 // सो तीए बालहारो तं पुण निद्दहइ मयणअंगारो / पुत्वभवकामगिद्धीचुल्लीए जलणसंभूओ / / 330 // पुत्रीत्वेन सो तीए रुईतीए निरंतरं वाहसलिलबिंदुहिं / नहु विज्झाइ जहा घणधाराहिं इरमैओ अग्गी // 331 // साहसियबंधुणा जातः। पुण निवारयंतेण अन्नया कहवि / रमणपएसे छिक्का तुन्हिक्का सा ठिया झत्ति // 332 // लद्धोवाओ एसो निचं तह चेव काउमाढत्तो। जणयजणणीहिं दिट्ठो निवारिओ ठाइ न कहवि // 333 // चिन्तियमेएहिं तओ न सीलमुई वहेइ सुविसुद्धं / पुत्तो दुट्ठो धिट्ठो विणएणं वजिओ एसो // 334 // ता अम्हाणं एसो सद्धिं वासोदएण वदंतो / आसामुहाई काही तामसमावेण कलुसाई // 335 // अनं च-तिक्खग्गकढिणफलया अइधणजलभाववुद्दिमावना। पुट्ठावि 1 घातप्रदानात् / 2 तासां / 3 मेघवन्हिः / 4 अशीलता पक्षे-असिलता / / // 24 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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