________________ // 25 // 34 | पल्लिपति| साहसिक स्वसुः तीव 4-SCIEO50 य छेजकरी असीलया दूकरणीया // 336 // अविणीओ अवणीओ को गुणगामपउरमज्झाओ। अन्नह जह जह वियरइ दहेइ अग्गि व अविणीओ // 337 // इह चित्तकम्मपरिणइवसेण पियरेहिं निप्पिवासेहिं / नियगेहा निच्छुढो साहसिओ भमइ सच्छन्दं // 338 // परिसंवतो देसेन्तरेसु भवियत्वयानिओगेण / साहसिओ पल्लिवई दुविओ विजएण तत्थ गओ / / 339 // सा तस्स पुणो भगिणी, पालिजंती कमेण संपत्ता / उवणजुव्वणलच्छी विणट्ठसीला य चिन्तेइ // 340 // खंडियसीला इहि रमामि सेच्छं किमित्थ संकाए ? / मुंडाविज्जइ सीसं कए न एकाए घडियाए // 341 // जुब्बणमणमि | वेओदयेण कयउब्भरा न संगेण / गामंतरेसु हिण्डइ सा अट्टा कामकण्डूए // 342 / / अन्नन्नपुरिससंगमकिलिञ्चसंघट्टओ हसहसेइ। तो तीए इस्थिवेओ कुकूलअग्गि व पइसमयं // 343 // अह अन्नया गया सा गामे एगंमि तत्थ ते चोरा। संपन्ना तो वुत्तं तयहुत्तं तीए रत्ताए // 344 // अम्हारिसीहिं तुम्हं तरुणीहि किं ? न कज्जमत्थित्ति / तो नाउं तब्भावं सा नीया तेहिं नियपल्लिं // 345 // एसा अम्हुवभोगा एगा मा होउ कहमवि विसन्ना / इय चिन्तिऊण तेहिं आणीया अन्नया अन्ना // 346 // तो सा साहसियससा कसाइया दंसणमि महिलाए / तं खीवइ कुवमज्झे गएसु अन्नत्थचोरेसु // 347 // पञ्चागयतेणेहिं सा पुट्ठा कत्थ तुज्झ भगिणित्ति / आरुट्ठा तो जपइ किमहं जाणामि तुम्हं पियं? // 348 // किं न सयं चिय रक्खह ? भज्जं सोहग्गरयणमंजुसं / मं आयरेण पुच्छह अणुरत्ता तीए बुत्वंतं // 349 // इह तीए वयणेहिं नयणेहि तहय अंगचेट्ठाहिं / अणुमाणेण नायं एयाए चेव सा निहया // 350 // तो साहसिओ चिन्तेइ एसा अइविसयपरवसा कावि / किं होजा ? दिवजोगा मह भयणी मयणनिवनयरी // 352 // जइ सच्चं मह एसा, ससा असेसाण पावकम्माण / कामोदयस्वरूपकथनम् / 4 %% // 25 //