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________________ बयन्तीप्रकरण तेन भ्रातचित्तरागो निश्चितः। इतिः / // 19 // घणसिरीए तओ भणिया // 58 // भद्दे ! अइदुहभरिया लक्खिजसि केण कारणेण तुमं / सा भणइ तुज्झ माया जाणइ अवमाणिया जेण // 59 / / साणन्दा य नणन्दा भणइ जहा कुणसु गेइकिच्चाइ / बन्धबहुतं सम्मं सोवालम्भं भणिस्सामि // 60 // ततो धणसिरीए भणिओ माया कहं ! तए एसा / रूसविया मह भाउजाया दोसेण रहियावि // 61 // तो धणबईवि जम्पइ असइपोसो गुरूहि पडिसिद्धो / असई बंधव ! एसा ? तुह कहिया केण सुयणेणं ? // 62|| तुमइ च्चिय संज्झाए रक्खसु नियसाडियंति मणिरीए / अइपंडिओऽसि बन्धव ! सिक्खावयणेवि जं एवं / / 63 // तुमए असई नाया भाउजाया विसुद्धसीलावि / ता बंधव ! गंतूणं खामसु मुत्तण संदेहं // 64 // अइजत्तरखणिजं सीलं गुणरयणरोहणगिरिन्दं / जाणावेउं वुत्तं साडियरक्खावयणमणहं / / 65 // तो धणवइणा एसा पउमसिरी नेहनिब्भरमणेण / दूरीकयसन्तावा खमा. विया महुरवयणेहिं // 66 // कमलसिरी वि एवं सिक्खाविया धणसिरीए रयणीए / मायं कोई माणं लोहं च विसेसओ चयसु // 67 // कोहो पीइं माणो विणयं मायावि हणइ विसासं / लोहो वियम्भमाणो सयलाण गुणाण पडिकूलो // 68 // लोहग्गलावरूद्धो जीवाण पुरंमि कह हु होइ / अंगीकय मेराणं गुणाण पउराण पइसारो // 69 // तो भद्दे लोहन्धा परधणहरणिकमाणसा जीवा / कीवा लहन्ति बहुहा वहबन्धणमारणाइणि // 70 // ता सबहावि रक्खसु हत्थं परदवगहणघणमलिणं / ज तंमि तेयहाणी लोओविन पिच्छए जेण // 71 // इयसिक्खावयणमिणं वासहरहिएण भत्तुणा निसुयं / चिन्तियमणेण तत्तो कमलसिरी चोरियं कुणइ // 72 // रूठेग तओ तेणंवि पडिसिद्धा पायसोयसन्निहिया / तत्थेव गमइ रयणी रूयमाणी कुट्टिमनिविट्ठा // 73 // विसमत्तणेण क्खलिए भूमिए चेव होइ ठायत्वं / जह तह अम्हाण गई ठिई मई परिणई मचा // 19 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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