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________________ श्री जयन्तीप्रकरणवृतिः / // 194 // धाराहिं / सिंचन्तो परिवड्डइ बन्धू किल अग्गी तेलस्स // 23 // जह तीए पुत्वभवे भाउजायाए दुक्खरिच्छोली। दिना Ini तन्मात्रासयलं स्यणि तह पावइ सावि चिरकालं // 24 // एवं दुक्खतत्ताए तीए अरूणोदयम्मि सो भत्ता / गच्छद नियए नयरे |ऽऽश्वासिता दुवारवालस्स कहिऊण // 25 // सावि य पभायसमए सहीहिं उस्पूणलोयणा दिट्ठा / भणिया कीस ? किसोयरि! जाया सती स्वएवंविहावत्था // 26 // तीए भणिय पुच्छह मम कम्माइं अहं न याणामि / नियमसुणो अवना कावि कया सो गओ मुत्तुं व्रतेच्छा // 27 // जणणीए ताहिं सिहं पत्ता मायावि दुम्मणा तत्थ / संबोहइ नियदुहियं मा सोयसु किंपि वच्छि! तुमं // 28 // प्रदर्शितअवराहराहुगहणे अविजमाणेवि तुज्झ मुहचंदं / गच्छइ अपिच्छिऊणं नयणसुहासायणाजोग्गा // 29 // ता मुश्च पुत्ति ! वती। खेयं चिन्तेह नियअन्तराइयं चेव / गिहधम्मपरा चिट्ठसु जा झिज्झइ तुज्झतं कम्मं // 130 // तीए भणियं अम्मे ! न य कजं किंपि गेहवासेण / गिन्हामि वयं अहयं अदिद्वदोसा सपरितोसा // 131 // एसो च्चिय मज्झ गुणो ज भत्तारेण विप्पियं विहियं / विसयामिसम्मि गिद्धा भमन्ति संसारकन्तारे // 132 // सबन्नूवयणदीवयसुदिट्ठपरमत्थसत्थसाराए / न य बाहह मह मोहो लोहो वा विसयसुखाणं / / 133 // मायाए संल जावेसो वच्छि ! परिणेइ न अन्न / ताव तुमं मा मुश्चसु तस्सासं अच्छ नियगेहे // 134 // एवं जणणीभणिया एसा सवंगसुन्दरी हिट्ठा / जिणधम्मपरा चिह कावयवरिसाणि पिउगेहे // 135 // पत्तो ससुरो तीए अह वाणिजेणं कोसलपुरंमि / तत्थ य गच्छह नन्दणसिद्विधरे मोयणत्थेण // 136 // पिच्छइ दो कनाओ सिरिमइकन्तिमइत्ति नामाओ / सवंगसुन्दरीए पुत्वभवे भाउजायाओ // 137 // सोहग्गरूवजोवणलवणिमलच्छीहि मयणघरिणीओ / मुत्चारइपीइओ मणहरणीओ मुणीणंपि // 138 / W194 // AMAA
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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