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________________ // 237 // 535AREGREC7 हरिएसकुलम्भूया, किंवेए चित्तसंभूया ? // 66 // घिद्धी एए रनो आणं उल्लंघिऊण नयरीए / मज्झमि जं पविठ्ठा दुट्ठा धिट्ठा मुनिवर हणह तम्हा // 67 // एवं हणिजमाणा नयरीए निस्सरित्तु परिभूया। मरणमभिनंदमाणा निविना जीवियवाओ / / 68 // समागमा&ा आरोहन्ति गिरिन्दं पेच्छन्ती झाणसंठियमुणिन्दं / ते लहुयकम्मयाए भत्तीए तं नमंसन्ति // 69 // पारियकाउस्सग्गो स | मगो सता चित्रमुणिन्दो नाणदंसणसमग्गो। परलोयसाहणेणं आणन्दइ धम्मलाभेणं // 70 // महुरक्खरवाणीए तेणं मुणिन्देणं पुच्छिया * संभूतिभ्यां अम्हे / के तुम्भे ? कहमिन्हि पत्ता ? अस्सि गिरिवरंमि // 71 // अम्हेहि तप्पुरओ कहियं सवं अगोवयन्तेहिं / मूलाओ निय गृहिता चरियं मरणज्झवसायपजन्तं // 72 // तो सायरेण मुणिणा करूणारससायरेण उवइट्ठो। जिणधम्मो कप्पदुमो कप्पियफल दीक्षा। साहगो अम्ह // 73 // तयणु मुणिदेसणाए दिणमणिकिरणावलीए अवसरिए / मोहतिमिरम्मि सिवपुरमग्गो पयडीहवइ अम्ह // 74 // तो चिन्तियमम्हेहिं सिवपुरमग्गम्मि संचरन्ताणं / भवकन्तारदहाणं दूरीकरणं हवइ कमसो / / 75 // एवं संविग्गाणं सिवपुरमग्गम्मि अम्ह लग्गाणं / दिन्नं चरित्चजाणं जमिह निहाणं सिवसुहाणं // 76 // गहिया दुविहा सिक्खा जइधम्माराहणम्मि अइदक्खा / तो तेण महामुणिणा गीयत्थाणं पए ठविया // 77 // निस्संगा विहरामो गामागरनगरपट्टणाईसु / झाणट्ठिया चिट्ठामो उजाणारामभूमीसु // 78 // छट्ठहमदसमदुवालसाइपक्खाइमासतवच्चरणा / पविसामो जइ पारणदिणेसु नयराइमज्झमि // 79 // विहरन्ता य कमेणं पत्ता गयउरपुरस्स बाहिम्मि / सम्भूयमुणी मज्झे पविसइ समुयाणवित्तीए // 8 // मत्तालम्बठिएणं दिवो सो नमुइमन्तिणा तयणु / चिन्तियमणेणं जइ मं जाणाविस्सइ जणं एसो // 81 // तो होही पुरमझे महई उम्भावणा महाराओ / रोद्धा महावरोहे पाणाणं निग्गहं काही // 82 // तम्हा नियपुरिसेहि // 237 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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