________________ // 73 // वीरभद्रोक्तः स्वत्तान्तः प्रियदशनोपरि स्वरागप्रकटनं दएकट्ठाणं समजाओ // 45 // जिणरायपायभत्ता अकंपसीलतमेरुगिरिचूला / तस्स य जंगमलच्छी घरिणी नामेण सिरिकता // 46 // ताण सुओऽहं जिणपयपउमे फुल्लंधुओवि महुचाई / करुणारामोवि सया निच्चफलबोहिलाभरओ // 47 // ववसायवज्जियाणं पुरिसाणं होइ दूरगा लच्छी। तत्तो वाणिजेणं समागओ संपयं इत्थ // 48 // जेण पुण कारणेणं संपत्तो तुम्ह पायमूलंमि / तं पुण सोवालंभ भणेमि सम्म निसामेह // 49 / / पियदंसणाए तुम्हं तणयाए अञ्ज चेइयहराओ। इंतीए सट्ठाणं अम्हाण निरिक्खमाणाणं // 50 // तह कहवि मणो बद्धं दिगुणवि कुडिलकेसपासेण / जह निप्पंदं जायं अहो कला कावि दुल्लक्खा ? // 51 / / भालतिलओ तीए केणवि दिवेण निम्मिओ ताय! / मह हिययं जेण इमं दिद्रेण विमोहियं सहसा / / 52 // नीलमणिनिम्मलाए दिट्ठीए तेयमुग्गिरंतीए / मज्झ मणो लीलाए तिणं व लहुयं समुक्खित्तं / / 53 // जो पुण सिहिणसिहोवरि तारो हारो लुलंतज्झलकंतो / सो तीए मह गुणवं सच्चं चिय मणहरो जाओ // 54 // रुवाइयगुणाण मह मणरयणस्स हरणवावारे / जो तीए सिंगारो सो संगारो मयणसारो // 55|| मह मणहरणे तीए इण्हि तह ताय! होसु सुपसाओ / जह चिट्ठामि अहंपि य सुहेण पासम्मि संलीणो // 56 // ता चिंतिय मए पहु एसो उत्तमकुलम्मि संभृओ। जिणवयणभावियमई अहो सुवनं च सुरहिं च / / 57 // एसो सम्मइंसणदिट्ठी पियदंसणा य मह पुत्ती। एसो पुण अणुरत्तो संजोगो तो इमो तत्तो // 58 // कप्पदुमे कप्पलया चंदे जुण्हा रविम्मि उग्गपहा। एयम्मि मज्झ पुत्ती अणुरूवो एस संजोगो // 59 / / अन्नं च-जइवि गुणरयणखाणी तह. विहु परभवणमंडणी तणया। पियराण माणमाहप्पखंडणी हवइ हु अवस्सं // 60 // भणियं च-महिहरतणया रयणायर 445CSAMACAE% // 73 //