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________________ 3287 // AE% दुर्बलिकत्वबलित्वविषयकप्रश्नोत्तरे द्रमकदृष्टान्तः। // 106 // तम्हा संविग्गपरा सज्झाय जे कुणति मुणिसुहडा / ते जागरमाण चिय जयन्ति ! निहणन्ति मोहबलं // 107 // // दुर्वलिकापुष्यमित्राख्यानकं समाप्तम् // तथा भगवतः वीरजिनस्य प्रभाकरस्य प्रश्नोत्तरदानप्रभापटलेन प्रहतसंदेहनिद्राभरतया विकसनेत्रारविन्दा प्रमोदमकरन्दास्वादोल्लसद्भमरझंकारतारस्वरेण जयंती पुनरपाक्षीतदुबलियतं? साहु बलियत्तं? जिण जयंति ! पावाणं / दुबलियत्तं सेओ सद्धम्माणं तु बलियत्तं // 22 // व्याख्या-दुर्बलिकत्वं साधु प्राणीनां ? बलिकत्वं वा ? जिनति प्रश्नः, भगवान् पुनः प्राह-जयंति ! पापानां दुर्वलिकत्वं अयो, दुर्बला हि क्लिष्टचेतसोपि न प्राणीनामुपतापं कर्तुमलं भविष्णवः, प्रत्युतात्मनमेव दुर्गतौ पातयति / राजगृहनगरद्रमकवत् / तथाहि-आसि पुरा रायगिहं नयरं सुररइयकणयपायारं / गयणंगणं व गरूयं गुरुबुहुकविसूरपरियरियं // 1 // विन्हु व सिरिनिवासो जत्थ जणो नन्दणं व देहरूई / धम्ममासे रसिओ जह जोहो कयगुणारोहो // 2 // एगो दमगो तम्मिवि पुबज्जियपाबपरिणइवसेण / पइदिण भिक्खावित्ती अपचतित्ती गयसत्ती / / 3 // अह आगए वसन्ते नवपल्लवराइ. राइयवणन्ते / आन्दोलियचन्दणदुमलयानिलसुरहियदियन्ते // 4 // उजाणे गुणसिलए गयम्मि उजाणियाए रिद्धीए / लीलाविलासललिए परियणकलिए नयरलोए // 5 // एसो भिक्खावेलाए दमगो पइमन्दिरंपि हिण्डन्तो / सन्तो दुबलदेहो अलहन्तो कवलमित्तपि // 6 // पइगिहपिहियदुवारो एस उयारोवि अन्ज पुरलोओ। संभासगासवियरणपरम्मुहो कहह कह जाओ? // 7 // इय पुच्छन्तो जाणियवुत्तन्तो जाइ तम्मि उजाणे / सो पेच्छह पुरलोयं कीलन्तं विविहकीलाहिं // 8 // ACALCA%AA % %
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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