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________________ जयन्ती प्रकरणपतिः / GANEXANEKARR ACCOA करुणादानदातब्रह्मचन्द्रस्वरूपम् / // 94 // बंभचंदेण // 28 // सो पुण सयं सयंवरउवितअवरावराहिं लच्छीहिं / सययं संपाविञ्जइ सरहसपरिरंभसंरंभं // 29 // पुरिसत्थसाहणेणं मयवारणभूसिएण कलिरायं / निहणतो परिवालइ नियगुत्तं सामिमावेण // 30 // किं बहुणा-वंसग्गे सजणसम्माणदाणसीलेहिं / आरोविया इमेणं कित्तिपडाया गुणग्धविया // 31 / / अह अन्नया निसीहे सहसा निहाभरं विमुतूण / लहुतणुचिंताए सो समुडिओ बंभचंददिओ // 32 // जा गच्छइ घरदुवारे महंधयारे खलंतपयचारे / ता भणिओ एगेणं पुरिसेण करुणवाणीए // 33 // सामिय कुणह पसायं छुहापरद्धस्स दद्धचरियस्स मह / करुणापर नरवर ! वियरसु गासं सुहनिवासं / / 34 // देव दएकनिवासे सरणागयवच्छले छुहा इहि / तई सायरम्मि दिद्वे अमयरसो चेव मह होउ // 35 // धम्मेकधरणकुसला कुणंति जीवाण कोडिसंपत्तिं / धन्ने पुण का गणणा ? तुम्हारिसाण दाणवीराणं // 36 // उच्छलिउक्कलियाए सरस्सईए इमस्स सित्तम्मि। वच्छत्थलम्मि करुणावल्ली पल्लवसिरि पत्ता // 37 / / तो भणइ बंभचंदो कोसि तुमं ? किस भद्द इह पत्तो ? / कहमइमत्तं छुहिओ? दुहिओ जं एवमाउलओ // 38 // सो जंपइ अवरोहे रायगिहे गुत्तिबद्धरुद्धोऽहं / धरिओऽम्हि निराहारो दिणत्तयं जावऽणाहारो // 39 // अणुकूलेण कहमवि दइवेणं देव अंतरं लहिउं / निक्किठपाणजाई संपइ तुह पासमल्लीणो // 40 // ता सामि! देहि अन अन्न मुत्तूण मज्झ वावारं / जावजवि दुहगारं जमगिहदारं न पेच्छामि // 41 / / दिजस्सइ तुह भोजं चुजं संताववारणं भद्द ! / तं आसासिय एवं गिहे गच्छह दिओ सोवि // 42 // उहवइ नियभन्ज ललिउठाणेण महुरवाणीए / विणयबई सा उठइ निद्दामुदं परिचज // 43 // विनवह सामि ! संपइ आएसं देहि किं मए कजं?। निकारणमागमणं न होइ गरुयाण जं एवं // 44 // भणइ य दिओ वि AHASKAR COCCALCC // 94 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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