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________________ पूजको जयन्तीप्रकरणइतिः / सरोवि अहवा अइसुरहि कला जह तह सुयणा न चैव अपात / तं चित्तं देवाणवि गुणाणुराया 81 गप्पणा होइ / देवाण चरिचाङ्ग ! वायपुफाई इच्छा कि तत्थे विकार सुरा घरापारि गोरस / / // 40 // HAMARCH जं पाववल्लिकंदे एस पसन्नो इह पुलिंदे / / 565 // असुई अदंतपवणो विणयविवेएहिं वजिओ निच्चं / एसो मेच्छो तुच्छो अगोयरो सुरपसायस्स // 566 / / किं चुजं ? गुणवंता कलिकाले जमिह दुल्लहा होति / तं चित्रं देवाणवि गुणाणुराओवि जं दुलहो / / 567 / / अन्नं च -अग्धंति कलीए खला जह तह सुयणा न चेव अग्धंति / ठाणे विक्काइ सुरा घराघरि गोरसं ममइ // 568 // ज ईसरोवि अहवा अइसुरहिं केयई परिचज / धत्तुरयपुष्फाई इच्छइ किं तत्थ वत्तई ? // 569 // आराहिजा जो वा न तत्थ एवं वियप्पणा होई / देवाणं चरियाई गंभीराई अहव हंति // 570 / / इच्चाइ चिंतिऊणं तम्मि पुलिदम्मि आइगए संते / गंतूण माहणो सो सोवालंमं सिवं भणइ // 571 // किं देव ! एस नाओ ? जमिह पुलिंदम्मि तंसि सुपसाओ / महमतिविसेसाओ कि अहिया तस्स पूयाओ? // 572 / / किं गंदसजलेण अहिसेए तेण तुह कए देव / डोहलए परिपुबे नेहतरू वियसिओ सामि // 573 // हुँ रत्ने सहवासो पुलिंदपेमं जणेह तुह देव / सामि पमयालयाणं पासद्वियसंगयं जेण // 574 // अम्हाणं भत्ताणं सूताणवि देसि देव नालावं / मेच्छं च पुणो पुच्छसि सक्खं कुसलाइयं सर्व // 575 / एएण विसेसेणं विसलेसेणेव फुट्टए हिययं / विरहो दुहाकरो च्चिय दारूणवि दारूणो अहवा // 576 // पूएमि अहं तं चिय जइवि पुलिंदम्मि तंसि साणंदो / जलपंकवियसियाणि वि अलिणो लीयंति कमलाई // 577 / / सो एवमुवालंभ दाउं मब्रुवस्सउग्गारं / उवसंतो जं कहिए दुक्खे जीवो सुही होइ // 578 / / देवो सिवोवि चिंतइ असत्थोऽयं अनायपरमत्थो / सगसगइ जंव तं वा जडाणुबंधाणुभावेण // 579 / / किंतु करइ महपूयं पुजो लोएवि माइणो जेण / ता 1 आन्तरं / 2 अशानः। मिल्लब्राह्मणो, तत्र भिल्लोपरि शिवस्य प्रसन्नता दृष्ट्वा ब्राह्मणस्य खेदः। P // 40 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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