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________________ // 167 / / मुणी महप्पा पसन्नचन्दो पलंबभुयदंडो / रायपहसविहदेसे धम्मज्झाणे थिरो होइ / / 23 / / अह अत्थाणनिविद्रो सेणियराया सुमुखनिउत्तपुरिसेहिं / बद्धाविओ जिणागमकल्लाणेणं पहिडेहिं // 24 // तो तेसिं पारिओसियदाणं दाऊण आसणं मोत्तुं / | दूतेन तस्य सत्तदुपए चलिउं तत्थ ढिओ वन्दइ जिणिन्दं // 25 // सिंहासणे डिओ पुण महसवं कारवेइ नयरम्मि / कारागारविसुद्धिं | व्रतस्वीकाचेयपूयाइयं राया // 26 // सविड्डीए नायरलोएणं वीरवन्दणमणेण / आगन्तवं घोसणमेवं कारइ पडहपुत्वं // 27 // न्हाओ रप्रशंसाकयवलिकम्मो सिंगारियहत्थिरायसेयणगे | आरूढो सियच्छत्तो ढलन्तसियचामराडोवो // 28 // चउरंगबलसमग्गो कृता। बन्दिजणुग्घुट्ठमंगलगुणोहो। सुररायसरिससोहो जिणिन्दवंदणकउम्माहो // 29 // सेणीओ महानरिन्दो नयरा नीहरइ रायगेहाओ / सुमुहो दुमुहो य दुयं तप्पुरओ जंति दो पुरिसा // 30 / / सुमुहो पसन्नचन्दं मुणिन्दमवलोइऊण साणन्दो। वियसियकुवलयसच्छहनयणो वयणं इमं भणइ // 31 / / धन्नो एस मुणिन्दो जेण महामोहगयमयन्देण / अणुरत्ता रायसिरी पडग्गतिणं व परिचत्ता // 32 // भन्नइ लोए लच्छी एसा किल होइ वारूणीभइणी / तीए उवभुत्ताए न जस्स मुच्छा महच्छरियं // 33 // पुरिसोत्तमस्स देसणमेयस्स सुदंसणं हवइ जेण / मूलं छिज्जइ सहसा पावारीण समत्थाणं // 34 // तेच्चिय सूरा ते पयडपोरिसा ते वहन्ति वीररसं। जे अंतरंगरिउवग्गनिग्गहे विक्कमोक्करिसा // 35 // अहिमाणमत्तमवमनिऊण संसारकारणं रजं / धन्ना हु मोक्खमग्गे लग्गा कम्मट्ठनिट्ठवणे // 36 // एएण महामुणिणा हरिणा मयजूहनिग्गहपरेण / खेचमि विणयसालिणि सुकयकणाणं कया रक्खा // 37 // सुमुहो पसन्नचंदा उल्लसिओ सो समुद्दमुत्तिधरो / दुमुहो विप्पियमावो चक्को इव विरससद्दालो // 38 // तथाहि-सुमुह तए एस मुणी अमुणियतत्तेण संत्थुओ कीस / अणहुन्त
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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