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________________ बयन्तीप्रकरणपतिः / A समवसृतभगवतः पार्श्वे प्रसमचन्द्र रानो दीक्षा। // 166 // // 6 // कोवलन्तो जीवो अन्तमुहुत्तेण सत्तमधराए / जोग्गं अजइ कम्म पसनचन्दो जह मुणिन्दो // 7 // तथाहि-पोयणपुरे पुरन्दरपुररिद्धिए रम्मे सुपरविन्देहिं / राया पसन्नचन्दो आसि पुरा कुवलयाणन्दो // 8 // पसरन्तआवयाण निरोहदच्छा सुहावहगहीरा / सत्ताहियपुरिसोत्तमसंगयसंपत्तसुंदेरा // 9 // सव्वासापरिपूरणसुचिन्नबहुसंखसुथिरमजाया / रजंमि तस्स सचिवा दयालया जं समुद्दा ते // 10 // चिन्तिजन्ते रजे तेहिं लच्छी हवेइ सा तस्स / ससुरासुरेवि लोए जीए जाओ चमकारो // 11 // एवमखंडियमाणो चंडपयावो दिणिन्दतेयस्सी / विन्दु व रायलच्छि माणइ सोहग्गसंभारो / / 12 / / अह तत्थ एइ मयवं तइलोकदिवायरो महावीरो। उजाणे समोसरणे पसन्नचन्दो निवो नाउं // 13 // कारावियनयरच्छणो मोयावियगुत्तिबद्धदुहियजणो / गच्छइ सबिड्डीए वन्दइ परमाए भत्तीए // 14 // आइयनइ धम्मकह मिहिरमहं मोहतिमिरसंहरणे / पडिबुद्धहिययकमलो पावइ चारित्तवरलच्छि // 15 // थेरम्भासनिवासी सज्झायज्झाणलीणमणपसरो / सच्चं पसन्नचंदो रायरिसी होइ दियराओ // 16 // सत्थत्थकलाकुसलो समिईपहे नियमोहमहिनाहो / सवसीकयखमाए मुणिराओ विहरइ पसन्नो // 17 // जस्साणा धारिजइ सिरसा विसएसु | तिहयणे सयले / रायरिसिणा अणेणं विजिओ एसो महाराओ // 18 // दोसावसारणेणं पसन्नचंदेण पुन्नवित्तेण / तबतवणेण विचित्तं किजइ कोसियमहाणन्दो // 19 // धम्मज्झाणसणाहो अंगीकयनिविडसीलसन्नाहो / निजिणियकोहजोहो मुक्कविरोहो इमो साहू // 20 // विहरइ जिणेण सद्धिं गामागरनगरमंडियं वसुहं / पत्तो कमेण तत्तो रायगिहे मगहादेसमि 2 // 21 / / भयवं वीरजिणिन्दो समोसढो देवदाणवाणन्दो / वइभारगिरूजाणे गुणसिलए नन्दणसिरीए / / 22 // सोवि य NCHAR
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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