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________________ G श्री बयन्ती प्रकरणइतिः / प्रथमजिनस्य जन्ममहोत्सवः। // 142 // BECACA SAXA4% कच्छीए धारिओ देवि ! // 86 // इन्चाइ निवेइऊणं, सक्को जिणजणणिसंथवं काउं / संतोसमुव्वहन्तो, जहाभयं पडिगओ झत्ति // 87 // अह बढइ सो मयवं साणन्दसुरिन्दकयसुहाहारो। तो कसिणअट्ठमीए मासे चित्तंमि सुहलग्गे // 8 // उच्चद्वाणद्विएK, गहेसु सुहेण पसवेइ। मरूदेवा तिहुअण ( जणसुहं ) पढमतित्थयरं // 89 // जाए तिहुअणनाहे पदमजिणिन्दम्मि सयलतियलोके / उज्जोओ संजाओ नेरइयाणपि सुहकारी // 90 // निवत्तियंमि सयले दिसाकुमारीहि सडकम्मम्मि / सिहासणंमि चलिए, सक्कोवि पउंजए अवहिं // 91 // पेच्छइ जम्बुद्दीवे, भरहे परमं जिणेसरं जायं / हरिसभरनिम्भरंगो भणिउं सकत्थयं विहिणा // 92 // सबड्डीए सको, पालइनामेण तो विमाणेण / मरुदेवाए अम्भासे आगकलर रिसपडिहत्थो // 93 // भणइ य देवाणुप्पिये! जिणजणणि! तए न भाइयवति / तुह सुयजिणिंदजम्मणमह. सवत्थं सुरिन्दोऽहं // 94 // इत्थागओ नमो तुह तइलोकपईवदाईए निच्चं / इचाइ तं थुणेऊणं, सको ओसोयणिं देह // 95 // जिणपडिबिम्ब दुविउं पंचवियप्पं करेवि अप्पाणं / करसम्पुडट्ठवियजिणो इन्दो पविचमरछत्तधरो // 96 // सुरकोडीपरियरिओ समेरूसिहरंमि पंडगवर्णमि / पंडुसिलासिंहासणमासीणो निच्चलो हाइ // 97 // चलियासणा सुरिन्दा चउसदी ईति सरसमिद्धीए / अच्चुयसुराहिनाहो पढम मजणमहं कुणइ // 98 // तत्तो कमेण सवे सुराहिवा जम्ममजणोच्छाहा / काऊण सपरिवारा सिग्धं सट्ठाणमल्लीणा // 99 // सक्कोवि पाणिसम्पुडगहियजिणो एइ सुरसमृहेण / मरूदेवाए सिग्धं देवीए सनिहाणमि // १०॥ठबइ जिणं सिजाए पडिरूवबिसञ्जणेण तो दिवं / खोमं कुंडलजुयलं मणिमयलम्बसगं कुणइ // 1 // नन्दिसरंमि अंजणगिरिसिद्धाययणअरिहपडिमाणं / सक्को सुरगणसहिओ कुणइ य अढाहियामहिमं // 2 // अह
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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