________________ // 111 // अभयाऽऽदिष्टपण्डितया प्रपञ्चेनानीतः सुदर्शनः। DESCAESAR+5 AUSTROKA5% स्सग्गं करेइ सो धीरो। जइ परमाणेयवो तहडिओ नन्नहा पुत्ति ! // 140 // साहु उवाओ एसो जइयत्वं जणणि ! ता है तए एत्थ / इय देवीए भणिए उत्तरमोमिति सा देइ // 141 // कइवयदिणाण अन्ते ताण मणोरहसएहिं सिग्छपि / किं चुजं ? जं कोमुइमहसवो तत्थ सम्पत्तो // 142 // आरक्खियपुरिसेहिं रायाएसेण पडयोसेण / जाणावियं पुरीए उज्जाणीए जणो एउ // 143 // चउमासए पमाए सविसेसं धम्ममग्गकजाई। कायवाइं रायाएसो य अलंघणीओति // 144 // इय चिंतिऊण सुइरं महग्धकोसल्लिएण रायाणं / विनवइ विणयकुसलो सुदंसणो धम्मकम्मरुई // 145 // देव ! चउमासपव्वे कर्ज देवच्चणाइ कायवं / तुम्हाणुनाए मह तो रन्ना अणुमओ संतो॥१४६ // सेट्ठी पभायसमए जिणिदविवाण ण्हाणपूयाओ। सबडीए चेइयपरिवाडीए पयट्टेइ / / 147 // तत्तो सुदंसणो निसि एगागी गहियपोसहो सेट्ठी। काउसग्गेण हिओ चंपाए चच्चरे कम्हि // 148 // अभयं देवि ततो धाईवि य भणइ नायवुत्ता / मन्ने तुह संकप्पो कप्पदुमो फुल्लिओ फलिओ // 149 / / उजाणीए अभया तओ य वंचणपहम्मि मइकुसला / सिरकमलं मे बाहइ न गया उत्तरमिमं काउं // 150 // जाणष्ठियं लिप्पमयं मुत्ति कामस्स पढमरयणीए / अंतेउरम्मि तत्तो पंडियधाई पवेसेइ // 151 // पइसारंती क्खलिया पडिहारेहिं किमेयंति। पुच्छिजंती पंडियधाई कूडिक्कगिरिधरिणी // 152 / / अन्जुजाणं अभया न गया जं सरिरकारणं तेण / अंतेउरे करिस्सइ पूयं कामाइदेवाणं // 153 // सिरिकामदेवपडिमा पइसारिजह तओ इमा ताव / अन्नेसिपि सुराणं आणिजस्संति मुत्तिओ // 154 // उग्धाडिऊण दंसइ मुत्तिं मयरद्धयस्स सा तेसिं / निस्संकेहि तेहिं एसा जाहि त्ति या भणिया // 155 // इय उत्तरेण धाई तेसिं मोहत्थमवरसुरमुत्ती। पइसारइ सा धुत्ती निहुयं व दोतिनिवाराओ // 156 // तो उत्तरीयपिहियं SUGARCAMERASAARC5%