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________________ // 71 // *% A जस्स // 12 // नयनंदणवणकंचणगिरिंदविच्छिन्नमेहलाबंधो / बन्धवकुमुयाणन्दो नरचंदो जत्थ नरनाहो // 13 // अहत श्रीधरनामअनया कयाई सुरदुंदुहिनायपूरियदियंतो / तम्मि पुरे उजाणे चउबिहदेवेहिं थुवंतो // 14 // भवियणकमलदिणिन्दो पणय- जिनेश्वरे सुरिन्दो फुरन्तगुणविन्दो। अरनामा जिणचंदो समोसढो तिहुयणाणन्दो // 15 // ततो सबड्डीए भत्तिमरुम्मिन्नबहलरोमञ्चो। समवसृते तित्थयरवंदणत्थं वच्चइ राया सपुरलोओ // 16 // पंचविहाभिगमेणं विहिणा तिपयाहिणी करेऊणं / जिणनाहं वंदित्ता श्रेष्ठिसागरनिवो निसीयइ जहट्ठाणे // 17 // धम्म कहइ जिणिदो सदेवमणुयासुराइपरिसाए / तो अमियसारणीए सुमहुरंगंभीर- दत्तस्य वाणीए // 18 // अक्गच्छइ मणमोहो भवाण सम्मदंसणं होइ / अगोवंगुच्छाहो तो जायइ चरणपरिणामो // 19 // पृच्छा / इदुफलसिद्धिसूयगपुलयंकुरपडलबहलियसरीरो / सिट्ठी सागरदत्तो कयंजली विनवइ तत्तो // 20 // केवलनाणदिवायर उज्जोइयसयलतिहुयणाभोय! / आसावरोहपसरं मह तिमिरसंसय हरसु / / 21 / / सत्तण्डं पुत्ताणं उवरिं अम्हाण अइसइन्हाण ( अतिसतृष्णानां ) / एगा पहु संभूया पुत्ती पियदंसणा नाम // 22 // पालिजंती कमसो बवंती सोमकंतिमुत्तीए / गिण्डई कलाकलावं सियपक्खे चंदलेह व // 23 // जीए लावनामयमरेण नयणंजलीहिं पीएण / मणुयाणं तक्खणं चिय अणिमिसनयणतणं होई // 24 // तारुणं घणरुवं सच्चं चिय जीए जेण पडिहणिओ। रुवमरट्ट. घरट्टो जं कामपरिणीए // 25 // तिणिसलया विणएणं अमियमया महुरसच्चवाणीए / सीलगुणसल्लईवणकरिणीकरणिं समुबह // 26 // सिक्खंती कम्मकलं सेवंती वीयरायपयकमलं / घरदेवय / सुहया सा अच्छइ गउरवग्धविया // 27 // एममि दिणे सदि चेडीचशेण वेईयहराओ / घरमिन्ती वणिएण दिट्ठा सा वीरबहेण / / 28 // परि- Vi72 // सॐॐCO 4 %A5-5
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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