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________________ जयन्तीप्रकरण 4+4+4+ पुषाण / जीवो कल्लापाई मेहकमारो व पावेइ // 1027 // सुपात्रदा॥अभयदाणे मेहकुमारकहाणयं सम्मत्तं॥ | नोपरि |श्रेष्ठिवीर. नाणाईणमुवग्गहकरणं जं तं सुपचदाणं तु / सम्वोवाहिविसुद्धं दायचं सिवसुहत्थीहिं // 1 // रूपगुणेण मयणो सोह- मद्रकथानग्गेण च होइ जलसयणो / बुद्धीए देवगुरू वंछियदाणेण कप्पतरू // 2 // स्यणायरंमि पचहणमंगे फलउपलंममुहलंमो। के पधिनी खेडनगरहोइ अकम्हा विम्हयकारी विजाहराणंदो // 3 // अवि गामदेसनयरंतरेसु दीवंतरेसु एमागी। कलाणं चिय पावह सुपसदाणाणुभावेणं // 4 // जह वीरभद्दनामा सिद्विसुओ सोममुत्तिकंतिल्लो / उजोइयभुवणयलो ईसरसिरिसेहरो जाओ // 5 // 4 वर्णनम् / + // 70 // तहाहि + होइ सुमणोऽभिरामो तामामासवजयंमिविया लोया। अजडाद + अस्थि इह भरहवासे नयरं नामेण पउमिणीखेडं / निश्चं ममरीओ इव लच्छीओ मत्थ खेलति // 6 // अरुणकरपल्लविल्लो जम्मि असोओ जणो महामोगो / होइ सुमणोऽभिरामो तरुणीचरणप्पहारेण // 7 // कलकंठकलावो नाणारामाण सरसपमाण / दक्खिणसयागइरई जत्थ वसंतंमि लोयंमि // 8 // महुमासवजयंमिवि गुरूवएसेण जत्थ लोमि / चित्तंमि पवटुंता हवंति वञ्छासुया सहला // 9 // जत्थ दुहा सुहसीलाऽभिहा सुपन्भेण भूसिया लोया। अजडादयावि | सदया अगयावि सयावि सिरिबईणो // 10 // भुवणेऽन्महियनिहीण रक्खत्थं पुन्नरासिसंकासो। सेसस्स व आयारो सुहासिओ जत्थ पायारो // 11 // अरिकरिकुंमवियारणसवज्जियकिसिमुत्तियफलोहा / पइदिसमुक्तिलच्छी मंगलसत्थियसिरी | P // 7 // +++
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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