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________________ % जयन्ती प्रकरणइतिः / जलं // 254 // // 73 / / दारनिरोहे मोहे सम्बाहो होइ जीवलोगम्मि / उप्पाउत्ति नरिन्दो पहाणलोएहि परियरिओ // 74 // धूवकडुच्छुय- नगरीद्वारोहत्थो अल्लपडो गयणमण्डलाभिमुहो / कुसुमंजलिबलिक्खेवं काऊणं भणइ विणएणं // 75 / / जो इत्थ कोइ देवो कुविओ द्घाटनाय केणावि कारणेणऽम्ह / सो काऊण पसायं अम्हाणं खमउ पणयाण // 76 // एवं नरिन्दमणिए गयणे वाया समुच्छलइ इत्थ / | सुभद्राकरनरवर ! महासईए करंमि जइ चालिणी उदयं // 77 // धारइ तेणऽभिसेए सीलवईए कयंमि दाराई / चिक्कारकारयाई लीलाए स्थचालन्यां उग्घडिस्सन्ति / / 78 / / पइगेहं नयरीए सइपरिक्खं करेइ तो लोओ। नहु कावि तत्थ रमणी धरइ जलं चालणीखितं / / 79 / / हल्लोहलो पयगृह तो गहकल्लोलसायरो लोए / मुहचन्दचन्दिमाए कजलकलुसत्तमुवणिन्तो // 8 // वित्तन्तेणं तेणं सूरस्स स्थितम् / निवस्स दुद्दिणेणेव / छाइजन्ति खणेणं तेयपयावा पसरिएणं / / 81 // एत्थन्तरे सुमद्दा दिणमणिमुत्ति व कंतिरूइरंगी। वियसियमुहारविन्दा महुरझूणीममरतरूणि व // 82 // सासूहुत्तं जम्पइ सम्पइ काऊण जणणि ! सुपसायं / मंपि परिक्खसु चालणिसंडियसलिलेण करकमले // 83 // तीए झडत्ति वुत्तं मुणिमुहसंकन्तघुसिणतिलएण / सुपरिक्खयाऽसि भद्दे ! फालेण व दिनतेएण / / 84 // तो तीए मुहरायं निम्मायं ललियधीरसंलावं / सोऊण बुद्धदासो चिन्तइ सम्म सई एसा / 85 / / भणियं च जीवलोए निस्संका धीरवयणविन्नासा। सच्चरियच्चिय जीवा पावा सव्वत्थ संकिल्ला / / 86 / / एवं भाविय तत्तो नियजणणि भणइ सोऽवि निस्संक। माइ परिक्खा किजउ अत्तवहूए य किमजुत्तं ? // 87 // जइ कहवि दिवजोगा धारिस्सइ माइ! चालणीसलिलं / तेणं पक्खालिस्सइ कलंकपंक समग्गंपि // 88 // अहवा अन्नाहि समा माइ!* इमा हवउ नयरिरमणीहिं / ता सबहा परिक्खह सुपसना होउ मझुवरि // 89 // सयणजणेणवि भणिया तीए सासू सम- 6 / 254 / /
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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