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________________ SAGAR जयन्ती दानादिविषया भगवद्देशना। कृतिः / उग्गसमीरंदोलिरकुसग्गजलबिंदुचंचलं जीयं / एए य कामभोगा रोदा जह फणिफणाभोगा / / 535 / / उद्दामकामकामिणिकडक्खलोला इमाउ रिद्धीओ। गयथेमं पुण पेमं संजोगा तह य सवियोगा // 536 // अकयतवचरणाणं जीवाणं तिरियनारयगईसु / कम्मेहि दुचिन्नेहि होइ चिरं दारुणविवागो।। 537 // अविय-संजोगविओयानलविसायजालावलीहिं पजलिए। विच्छिन्ने भवरने को उसकन्नो "धेई कुणइ / / 538 // सइ सिवपुरम्मि द्वाणे अवियलहेउम्मि तस्स जिणधम्मे / अत्तहिएसीण अओ जुत्तो जत्तो तहिं काउं // 539 // सो दाणसीलतवभावणाहिं सुद्धाहिं इह भवे धम्मो / सिवपासायारोहणसोवाणचउक्करम्माहिं // 540 // दाणं पुण तिविहाणं नाणं जीवाण देयममयं च / अन्नाइ य जमुवग्गहकर विवेगेण दायत्वं / / 541 // विनायबंधमोक्खो प्रोक्खो वि य मोक्खकंखिरो होइ / तो इत्थ नाणदाणं निवाणं कुणइ जीवाणं / / 542 / / नाणेण विइन्ने] जीवो जाणित्तु पुन्नपावाई। तकारणेसु सम्म कुणइ पवित्तिं निवित्तिं वा / / 543 // पुन्नोवजणसजो जीवो | पावेइ नरसुरसुहाई। पावनियत्तो मुच्चइ नारयतिरियत्तदुक्खेहिं // 544 // लहइ य जिणधम्मरओ विरओ पावाओ सुक्कझाणेणं / सासयसोक्खं मोक्खं सत्तो नाणप्पभावेणं // 545 // परलोए इहलोए जीवो सोक्खाई जेण नाणेणं / पावेइ तेण पढमं वनिज्जइ नाणदाणमिमं // 546 // नाणं जेण विइन दिणयरकरनियरसमसमुजोयं / तेण विहन्न सिरिहरवियसियसमैत्तसयवत्तं // 547 / / भणियं च-सोगइमग्गपईवं नाणं दितस्स होज किमदेयं / जहतं पुलिन्दएणं दिनं सिवगस्स नियंगच्छि // 548 // गयणग्गलग्गसिहरो घणकाणणच्छन्नमेहलाबंधो / सिरिचरणनेउरारवसोयरनिज्झरणझंकारो // 549 / / वणराइकुसुमपरि१ त्रिविधानं / 2 मूोऽपि / 3 सम्यक्त्व / 4 निजनेत्रं / CROSAROSANSAANES
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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