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________________ वायुद्धप भरतस्य पराजयः। चिः / // 178 // परमत्थपसाहणेण जं सहलं / जं विउसाणं उचियं तमुत्तमं उत्तमा विन्ति // 78 // बाहुबलिणावि वुत्तं वायाजुद्धं जाम अविरुद्धं / अम्हंपि मयं बन्धव ! किजउ गिवाणवाणीए / / 79 / / ततश्च–जं पक्खंमि पसिद्धभावसुहगंज वा सपक्खे धुवं, जं सम्बन्धपरं निवित्तिपरं जं वा विपक्खासया। अक्खोई परहेउहेइनिवहे खित्ते विचित्तेवि ज, वायाजुद्धखणे दुवेवि सुहडा ते लिन्ति तं साहणं // 8 // जीवाणं कोडिसमारोहे धम्मो मए परिग्गहिओ / परलोयसाहणपरो जं एसो सरलयासहिओ // 81 // सकयवयणेण एवं भरहनरिन्देण पक्खगहणमि / पुच्छइ बाहुवि तहा धम्मो जइ पहरणसरूवो // 82 // जीवाण तेण पाओ कोडिसमारोहणं कहं तम्मि ? / कुगईए सो हेऊ परलोयपसाहणो कहण्णु ? // 83 // तमि य सम्म चिंतह जुजइ नय सरलयावि भावेण / तो एस धम्मपक्खो उत्तमपुरिसाण नहु जुत्तो // 84 // अह जिणधम्मो गहिओ सोवि य जइ केसवस्स सम्बन्धो / निच्चिय तत्थवि दोसा रागद्दोसा जओ हुन्ति // 85 // सुगयपणीओ अहवा जिणधम्मो तुम्ह संगओ इत्थ / मिच्छादसणसल्ले तत्थवि सुगई कहं होइ ? // 86 // अह अरिहंतजिणेहिं कहिओ धम्मो तए परिग्गहिओ / सो अम्ह सम्मउ च्चिय निरत्ययं साहणं तुम्ह // 87 // इच्चाइवयणविन्नासपाससुनिजन्तिया भरहवाणी / सउणीव जयसमक्खं नोल्लासइ पक्खमेगपि // 88 // बाहू पंडियचक्की भरहो रयणेहिं चक्कवद्विति / जाओ जए पवाओ गुणवणभञ्जणमहावाओ // 89 // परमियमहरवाणं न तकगिद्धीवि रायहंसाणं / बाहुबलं चिय बाहो! परिक्खियवं हवइ अम्ह / / 90 // एवंपि भरहमणिए बाहुबली भणइ रणरसुच्छाहो / भुयनामणमित्तेणं जमुत्तमं बाहजुद्धंपि Pu // 91 // तो मह एयं नामय वाम सरलीकयं भुयादण्डं / तुह बाहुलयं बंधव ! तयणु अई नामइस्सामि // 92 // 1 178 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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