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________________ बपन्ती प्रकरणइतिः / स्वशीलरक्षणाथमहमित्रेण गृहीता दीक्षा। // 210 // अबला अलीयकुडीओ दुरन्तभवरंगनच्चणनडीओ। चवलत्तमकडीओ सुसाणमज्झट्ठियघडीओ // 38 // तं किंपि कामिणीओ कुणन्ति किल साहसं जओ लोए / ससुरासुरेवि गरूओ जायइ चित्ते चमुक्कारो // 39 // सवाणवि वंसाणं पमया | अविवेयसंगमरूइओ। वंसकुडिगिसहिओ गुविलादुग्गिज्झमझाओ॥४०॥ कढिणतणेण करिवरदंतसरिच्छाई जजरिजन्ति / पुरिसाण तरूणिओ ससिकरधवलकडक्खेहिं हिययाई // 41 // तम्हा तिच्चिय धन्ना रमणीरागेण लद्धपसरेण / कहमवि नहु रंजिजइ संखसमाणो मणो जाण // 42 // सुहलच्चिय जियलोए चिंतामणिकामघेणुकप्पदुम्मा। एकंचिय अइदुल्लहं सीलं ससिसंखदलधवलं // 43 / / एसावि भाउजाया पन्नवणिज्जा न होइ निलजा / जं कामग्गहो दुट्ठो दुनिग्गहो मन्ततन्ताण // // 44 // तो सीलरयणरक्खासुलद्धलक्खेण दक्खपुरिसेण / छलिऊण गहो एसो ठाणडिओ चेव धरियन्वो // 45 // इच्चाइ विवेएणं सुहाणुभावेण तस्स लीलाए / विसयविसविसममुच्छा अवगच्छइ सबहा तत्तो // 46 // अवलम्बियदिढसचो तयभिमुहं भणइ सो अरिहमित्तो। किजन्तु ताव भद्दे ? बन्धवपरलोयकिच्चाई // 47 // परिपाडीए कजं तुहिच्छियं कुच्छियति पच्छन्न / धम्मो च्चिय कीरन्तो पयडो सोहं समुबहइ // 48 // ता होसु थिरा सुन्दरि ? मन्दरचूल व लोयमज्झत्था / असरिसकल्लाणमई समुन्नई लहसि जेण तुमं // 49 // संभासिऊण एवं रयणीए सीलरक्खणुज्जुत्तो / अह तुरियमरिहभित्तो एसो देसन्तरं पत्तो // 50 // एगमि तत्थ नयरे उजाणे महुवाणिसवणेण / अक्खित्तो जा गच्छइ ता पेच्छ। पुनभावेण // 51 // सिरिधम्मघोसमरिं तेएणं दिणमणि व दिप्पन्तं / दिन्तं निहयतमोहं पडिबोहं भबियकमलाण // 52 / / निन्ततमभमरनियरूच्छलन्तझंकारमहुरसदेण / विन्नतो तेण गुरू पबुद्धमणपंकएण तओ / / 53 // सुपभायमज भयवं ! जं ओ चेव धरियो / FACRACCASE यंति पच्छन्नं / हामतो। किअन्तु ताव महसममुच्छा अवगच्छइ सबा
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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