________________ // 47 // अभयदाने मेघकुमारकथानकम् / 4% लोयाणं / अवि सुयभासियसवणे उक्करिसो होइ हिययम्मि // 670 // इय तस्स भावणाए दिणयरकरनियरतिवभावाए / निद्वरतरंपि कम्मं तुहिणं व विलिजए निविडं // 671 // तत्तो दुवालसंगं गंगं अवगाहिऊण बहुभंगं / चउरंगेण बलेणं सुबुद्धिनावं समारूढो // 672 // निजिणिउं परलोयं मुणिराओ पालए खमाभारं / सुयदाणेणं एसो पसिद्धिपयविं परं पत्तो // 673 // तो देयं सुयदाणं नाउं कप्पदुमं व बहुफलयं / संसारजलहितरणे सत्तं जं जाणवत्तं व / / 674 / / // ज्ञानदाने असगडपियाकहाणयं // छज्जीवनिकायाणं तिविहं तिविहेण रक्खणं विहिणा। जमिह कुणंति मुणिंदा तमभयदाणं भणन्ति विऊ // 675 / / दुहभरभरियावि जीया जम्हा ईहंति जीवियं सत्वे / तं जाणामो तेसिं न वल्लहं जीविया अन्नं / / 676 // मरणभयकंतमणो महानरिंदोवि जेण रजंपि / जीवियहेउं जच्छइ इट्ठयरं तेण तं चेव // 677 // ज चेव गाहगाणं इ8 तं चेव होइ दायत्वं / बुद्धिमया परा लोए सुहमक्खयमीहमाणाणं / / 678 // किं च-दीहाउओ सुरुवी निरोगी होइ अभयदाणेण / जम्मन्तरेवि जीवो सयलजणसलाहणिजो य // 679 // दाणाणमभयदाणं निम्मलचूडामणि व सवेसि / जं तेण विणा ऊसरबीयाणि व ताणि अहलाणि / / 680 // तिरियावि दिति गुरुयत्तणेण करुणाए जे अभयदाणं / ते मेहकुमारो इव लहंति कल्लाणरिंछोलिं // 681 // वेयड्वगिरिसमीवे पुत्वभवे आसि सो किर गइंदो। विहरंतो सच्छंदो वर्णमि करिणीसयाणंदो // 682 // अह गिम्हदावपरितावभीयचित्तो जवेण धावतो। सो अन्नया कयाई कदमिलं सरवरं पत्तो // 683 // तम्मि जलपाणन्हाणावगाहतन्हालुओ समाइनो। अवरेण तरुणकरिणा अरिणा चिक्कणकले निहओ // 684 // विंझगिरिपायमूले गंगाकूले AE %A मच्छंदो वर्णमि का६८३ // तम्मि जल गंगाकूले R // 47 // // 4