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________________ A जयन्तीप्रकरणवृतिः / पण पावसुद्धी होइ धुवा इensय तेसि विनति मणिपुण भत्तिपरेसं नरिन्दा // 218 // सया निव्वुई होह // 73 / / तत्तो एस नरिन्द्रो बहुहा परिचिन्तिऊण परमत्थं / पट्ठवइ खामणत्थं पहाणपुरिसे मुणिस्सन्ते है वन्दनार्थ॥ 74 // तेवि गया तत्थ मुणिं धुणंति महुराहिं वग्गुवग्गूहिं / गुणरयणाणं रोहणखमाहरो होसि तं चेव // 75 // अनेण मागतस्य किं ? सहिजइ लोहग्वत्थाण टंकपडिघाओ। लोयाणं तह दिजइ सग्गुणरयणाणि किं दाणं? // 76 // पुवभवदुक्कडाणं राज्ञस्तखमावणत्थं मुणिन्द किं राया। पणयजणवच्छलाणं तुम्हाणं अंतिए एउ? // 77 / / तुम्हारिसाण मुणिवर ! जंगमतित्थाण है दुपदेशेन संगमवसेण / लोयाण पावसुद्धी होइ धुवा इट्ठफलसिद्धी // 78 // तो दिजउ आएसो करूणारसखीरसायरमुणिन्द / / सम्यक्त्वसुपसायसुहाधवलियदिट्ठीहि इह निवागमणे // 79 // इय तेसिं विनत्तिं मुणिऊणं मुणिवरेण महुराए। वाणीए प्राप्तिः। संल अमियरसेणेव संसित्तं // 8 // तवसंजमवणदावो कोवोपायो मुणीण हेयो। किं पुण भत्तिपरेसुं नरिन्दमाइसु कायो ? // 81 // दोसोवरमे चित्तं राया अम्हारिसम्मि तवतवणे / जे रुहरमणीयत्तं धरेह तारयसिरिदिन्तो / // 82 // तवतवणतावियाण लोयाणं देइ निव्वुई राया। उदयारम्भाउ चिय दिट्ठो वियरह महाणन्दं // 83 // रायावि जइ सयं चिय जणे वियासेइ साहुकमलाई / तो हवइ महच्छरियं सवासामोयसंपत्ती / / 84 // इय नाउं सपसायं अकसायं मुणिवरं महाराओ / अन्तेउरपरियरिओ एइ महानन्दभरभरिओ // 85 // आरामे मुणिदंसणसुहाभिसेएण चहलपुलियंगो। तिपयाहिणीं करेउं वन्दइ परमाए भत्तीए // 86 // थुणइ य भयवं ! भवभयहरण तुमं जयसि सुद्धतवचरण / करणतुरंगदमणे अस्संदमसमसिरिनिवास! / / 87 // खमसु तुम मुणिपुंगव ! नन्दभवे मोहमोहियमणेण / जं ताविओ मए तं लोहपिसायछलत्तण // 88 // लोहमयस्सवि पहु तुह तेएणं कुजोणिमूसासु / तवचरणरसावेसा जाया कल्लाण- P // 218 ॐOTOS AAAA%
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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