SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 255
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ + भी + जयन्तीप्रकरण वृतिः / // 242 // CAR HUSROC परलोओ सिज्झए निचं // 48 // पंचसु भवेसु नरवर ! तुज्झवि पयडाइं ताई दुक्खाई। जिणधम्मो चिय तेसिं तएवि किजउ भोगलोलु निसेहत्थं // 49 // सुरलोएवि महायस ! बहुविहईसाविसायमाईहिं / अणुविद्धं चिय सोक्खं दुस्सहं चवणे तहा दुक्खं पतयाऽन्ते // 50 // तम्हा अणन्तमबाबाई सोक्खं सिमि जं निच्चं / तस्स पसाहणसजं संजमरज महाराय ! // 51 // जं संजमरजेणं नरकगतिइहंपि पाविन्ति मुणिवरा सोक्खं / रागद्दोसवसट्टो कत्तो ? तं चक्कवडीवि // 52 // सच्चं चिय जइ नेहो अम्हुवरि राय तुह मणे ते प्राप्तिः। अस्थि / ता गिण्ह महसमीवे संजमरज समग्गंपि // 53 // एवं खु दिजमाणं गिन्हिजन्तं समग्गमवि होइ / दुन्हंपि जेण जिप्पड रिउवग्गो अन्तरंगोवि // 54 // जिणिएण तेण केवललच्छीए संगयाण सिद्धिए / अयरामरनयरीए अणन्तकालं हवइ रजं // 55 // इइ भणिए मुणिवइणा चक्की संलवइ बंमदत्तोवि / सुकरहिं उवणीयं चएमि रजं कहं एवं? // 56 // कह होइ सो सयनो ? महल्लपुन्नोदएण संपत्तं / जो चयइ चक्की रजं संदिद्धे सिद्धिसुहलाहे // 57 // पवजावि मुणीसर सदुक्करा जेण तत्थ सवत्थ / अप्पडिबद्धविहारो कीरह उज्जुत्तचित्तेहिं // 58 // भरहखिचमि इमा खमा मए साहिया सुहेणेव / कोहाइरिउजएणं दुसाहणा सा निययखित्ते // 59 // तीए असाहियाए संजमरजंमि च द्वविजन्ते / कोहाईहिं रिऊहिं बन्धव का सुखसम्पत्ती ? // 60 // चउसडिसहसरमणीभोगसुहं नवनिहाणसंजोए / अन्भग्गमाणपसरं चएमि कह ? बन्धव इयागि ! // 61 // एवं च चकिवयणं सुच्चा मुणिपुंगवोवि चिन्तेइ / एयस्स भोगगिद्धी सपक्खवाया भवमसाणे // 62 // कह सो सिवपुरमग्गे द्वाविजइ ? पुबजम्मसन्नासे / इत्थीरयणनियाणा जो हारइ अप्पणो चरणं // 63 / / जिणवयणसिद्धमन्तप्पओगसज्झो न एस अम्हाणं / मोगरइसप्पिणीए जं नजद कालदट्ठो व // 64 // इच्चाई चिन्तिऊणं भणियं मुणिणा नरिन्द पुत्वभवे / // 242 // RSONASRAVACANC%CE%
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy