________________ // 133 // +4+4+4+k कायोत्सर्गतपसि चन्द्रावतं| सकनृपोदाहरणम्। CHASEC95-35-4544 विणएणं पावएणं जडत्तनिबिडोवि मयणपिंडो व / झत्ति विलिजइ माणगंट्ठीए सो तवो तेण // 1.1 // ॥कुलपुत्रिकाऽऽख्यानकं समाप्तम् / / अनियाणेणं वेयावच्चेणं चंदणंगरागेण / धन्नाण पावगंधो संबंधं चयइ दूरेण // 1 // अन्नं च // पडिभग्गस्स मयस्स व नासह चरणं सुयं अगुणणाए / नहु वेयावच्चकयं सुहोदयं नासए कम्मं // 2 // पंचसयमुर्णिदाणं सुविसुद्धाहारदाणओ जाओ। वेयावच्चसुहेणं बाहुसाहू भरहनाहो // 3 // अइविमलसंवरेण पावं तावं खविन्ति मुणिवसहा / सज्झायनिजरेणं अहोनिसं वित्थरंतेण // 4 // तमपसरो अवणिजइ साहुतवस्सीण धम्मसुक्केहिं / झाणेण अणवरयं चंदायच्चोवमाणेहिं // 5 // तवतवणेण दुवालसतणुणा तेयस्सिणा फुरंतेण / चोज (चिय) जोइल्लासो होइ न दोसाण अवयासो // 6 // वासीचंदणकप्पो काउस्सग्गेण संडिओ साहू / मेरु व निप्पकंपो छिप्पइ नरएण न हु चुजं // 7 // काउसग्गतवेणं धना गिहिणोवि निच्चलक्खेण / धम्मज्झाणरहेणं अनलेणवि जंति सुरलोयं // 8 // काउस्सग्गेण तवेणं अगणियसुकुमारदेहदुहमारो। अक्खित्तसग्गलच्छी जह चंडवडिंसओ राया // 9 // तथाहि // अस्थि इह जंबुद्दीवे साकेयनामं पुरवरं भरहे / पसरंतसुपवेहिं जं पावइ सग्गसोहग्गं // 10 // तत्थासि उग्गतेओ राया चंडवडिंसओ सच्चं / सोहग्गनिही निच्चं गोरी कित्ती पिया जस्स // 11 // जिणसासणम्मि नंदणवणम्मि सुमणोवियाससामोओ। निचवियारसारो जो सहलं कुणइ अप्पाणं // 12 // विलसइ सम्मदंसणमणिदीवप्पहयमोहतिमिरोहे / मणभवणे जस्स | सयावि वेयलच्छी जहिच्छाए // 13 // सबदिसिमंडलेसुं जस्साणादाणमित्तमाहप्पा / पहवंति कहवि लोए न रुदखुदाइणो | +++ +4+ / 133 //