SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 27
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ बयन्तीप्रकरणवृतिः / I // 14 // इय नरवरेण भणिओ ओ चंडस्स कोवचंडालं / छिविऊणं स सबंग सिग्धं दूरं अवतो // 161 // द्यवयणेण तत्तो यह अपशकुनेकसिणदिविहिं धूमकरलीहिं / लद्धिन्धणसरिसो पजलिओ चंडपजोओ // 162 // दुबयणवारिधारानिवायविद्दवियधवलगुणप- Psपि चतुर्दक्खो। सजलजलओ व स निवो संजाओ कलुसपरिणामो // 163 // चउरो कसायतरुणो हिययस्थलयंमि तस्स तो रूढा / ईसाका- शराजसहिरेल्लीए वल्लीए वलइया तेवि // 164 // वगृह अट्टज्झाणं रोद्दज्झाणं च ताण फलसरिसं। नरयदुहदाणदच्छं अहदारुणकडुयपरिणाम है। तिचण्ड॥१६५॥ किंबहुणा?। मित्तबुहेहिवि विहियं उजोय जो न पेच्छइ सयं च / रागंधो दोसंधो स निवो नामेण पजोओ // 166 // प्रद्योतस्य पलयंमि मुक्कमेरो सलिलोप्पीलेहिं पूरए भुवणं / जलही जह तह तत्तो चउरंगदलेहिं चंडनिवो // 167 // हक्कारई य चउदस || युद्धमहाबला मउडबद्धरायाणो / जेणऽजवि भमियच्वं चउदसरजमि लोयंमि // 168 // तो पत्थाणे आसामुहाई अंधारियाई प्रस्थानम् / दट्टण / देव ! न सहला दीसइ आसा मंतीहिं सो भणिओ // 169 // अन्नं च देव ! अम्हं सुन्ने तत्तमि वट्टए अहुणा / सुरोदउत्ति कजं सुन्न चिय हंसचारेण / / 170 / / संमुहपवणपणोल्लियरयपडलेहिपि पिसुणियं देव / / न हु एत्थ कजसिद्धी कलुसीकयवयणनयणेहिं // 171 / / सउणावि देव ! दिवा( चा) सरेण चिट्ठागईहिं ठाणेण / साहति साहसेणवि न कजसिद्धिं मणागपि // 172 // एसावि सिवा सामिय जेट्ठा सउणाण दाहिणा तुम्ह / वाम चिय परिजंपइ महल्लमाहप्पहाणिकरी // 173 // इय जुत्तिउत्तिमंडलसंगयगुरुमंतिमंतवयणेहिं / न पउत्तेहिं नियत्तइ निवस्स कामगहो कहवि // 174 // तो चलिओ चंडनिवो पयंडभुयदंडदंडसयसोहो। उप्पन्नमहामोहो उत्तमपियनीइविच्छोहो // 175 // तत्तो कोसंबीए उक्का निवडंति तडयडरवेण / जा नजति बुहेहिं कयंतकोवानलजाला // 176 // गयणमि अनन्माओ विज्जुलया चंचलाओ दीसति / // 14 // RAGARH
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy