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________________ // 13 // चण्डप्रद्योतप्रेषित रूवं // 145 // अदसणेवि रत्तो मिगावईए निवोत्ति संझावि / दूरे विगए सरे रत्ता किल पाडिसिद्धिए // 146 // खणदिनहरूवो राओ जह मज्झ सबरामाणं / रायाण पडिबोहइ संझा किर सउणसद्देहि // 147 // सपरघरदारमग्गामग्गविवेओ जहा न राएंण / कीरइ मएवि एवं इय पुरियं अंधयारेण // 148 // विहडंति चक्कवाया जह तह रायस्स सुहअभिपाया। मउलंति तहा कमला बुद्धिओ जह निवे अमला // 149 // जह मह तह न कलंको विसुज्झए जलहिमजणेणावि / कहिलं व इमं रनो अह सहसा उग्गओ चंदो // 150 // सद्धिं कुमुयवणेहिं वियंभए नरवइस्स रणरणओ। तेसिं तस्स य बहुलो | उच्छलिओ नहपरागोवि / 151 // सह रायनिव्वुईए खीणा रयणी कमेण अह चंदो। निवतावदायिकरभरहित्थो इव अस्थमणुपत्तो / / 152 / / नक्खत्तेसु चरंतो पुणो पुणो वित्तखंडणुज्जुत्तो। दोसायरोवि संतो कहमेसो चंडपजोओ ? // 153 // अवणिंतो नीलपडं तमपडलं करसहस्सपसरेण / इय चिन्तिऊण रोसारुणोब उइओ जयचक्खू // 154 // कोसंबीनयरीए पजोओ पट्ठवेइ तो यं / दुवयणं कलुसं तं तमं व रायं सयाणीयं // 155 // चंडस्स तओ दूओ सद्धिं अजसेण तत्थ संपत्तो / पिच्छइ य सयाणीयं पडिहारपवेसिओ रायं // 156 / / तेणवि भणियं सुमरइ मज्झ पहू तुज्झ सकलत्तण / तो नियमहिलं पेससु सिवदेवीदंसणनिमित्तं // 157 // रत्ना भणियं मज्झवि तुह सामी वसइ माणसे किं न ? / जइ इच्छइ नियमगिर्णि दहूँ ता एउ सिवदेवी / / 158 // दूओ जंपइ इति भयणि दटुं न लञ्जए देवी / कप्पलया इव लजह तुमए पुण कडुयरुखेण // 159 // दूओत्ति तुममवज्झो वज्झो पुण सामिओवि सिहाणं / अहवा खारसमुद्दे खारोच्चिय होउ उग्गारो // 160 // 1 स्पर्द्धया / शर्वरामानम् 3 चंद्रेण / 4 निःश्वासो / 5 लज्जितः / 6 राहुवत् शतानिकेन तिरस्कृत्य निष्काशनं कृतम् / / // 13 //
SR No.600402
Book TitleJayanti Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMalayprabhsuri, Vijayakumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1950
Total Pages338
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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