________________ // 27 // ततो // 368 // अवरे भद्दगमावा भवंति परभज्जवजणुज्जुत्ता / उवलद्धबोहिबीया उवरोवरि भाविकल्लाणा // 369 // एत्थंतरम्मि देवी मिगाबई पणमिऊण भत्तिए / संसारभउविग्गा संविग्गा विनवइ वीरं / / 370 // भयवं ! भवजलहिगया जीवा लण तम्ह पयपोयं / निच्चं चारितधरा पारं पाविति सिद्धिपुरं / / 371 // तो हं तुम्ह समीवे पडिवजिस्सामि सामि ! पलं जा पच्छामि जिणेसर ! चंडपजोयनरनाहं // 372 // ता भयवयावि भणियं अहासुह किंतु मा तुमं काही / पडिबंध सामग्गी जमेरिसी दाल्लहा भद्दे ! // 373 // तत्तो गच्छइ एसा चंडपञ्जोयरायपासंमि / तस्सुच्छंगे अप्पइ उदयणकुमरं नियं पुत्वं // 374 // सीलं रक्खंतीए पडिवन्नवयणओसरन्तीए / तो विनविओ तीए पओओ विणयवित्तीए // 375 // पडिबजे पत्वजं तम्टेहिं विसजिया अहं अज / विमुहा भवसोक्खाणं दुहावहाणं अणिचाणं / / 376 // किं वारेउं सको ? सकाइसमक्खमेस लजाए। तमकामोवि विसजइ तओ निवो चंडपजोओ॥ 377 // अंगारवईपमुहा तन्मजाओवि तीए सह अद्व / गिण्हंति तओ दिक्ख संवेगरसेण संभिन्ना // 378 / / अजा मिगावई सा चंदणबालाए सीसिणी तत्तो / विनयगुणरयणरोहणधरणिकरणिं समबहा // 379 // विसयग्गामपरंमुहमईवि विहरेइ विसयीमेसु / सज्झायसुहानिब्भरपसमियनिस्सेससंतावा // 380 // निप्पडिकम्मावि दिदं पडिक्कम्मुवओगकरणतल्लिच्छा। अंगोवंगवियारं पइक्खणं कुणइ अवियारं / / 381 // अट्ठमयट्ठाणपत्वयचरणवजासणीखमाधरणी। कोहदवानलसमिणीजलधाराधोरणी समणी // 382 // सिवपासायारोहणनिस्सेणी जीए विमलगुणसेणी / सा दमवणेम्मि एणी समुद्दगासुरनईवेणी // 383 // उत्तमकुलप्पसुया वरगुरुपायारविंदसलीणा / चारित्तधम्म 1 प्रतिपन्नवचनापसरन्त्या / 2 देशमामेषु / 3 विचारं / 4 अविकारं / 5 दम एवं वनं तस्मिन् / मृगावत्या दीक्षाभिलाषः पूर्णीकृतस्तस्याः स्वरूपं च / COPENSION // 27 //