Book Title: Agam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapti Sutra Part 05 Sthanakvasi
Author(s): Ghasilal Maharaj
Publisher: A B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
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प्रमेयचन्द्रिका टीका श.६ उ.८ सू२. आयुर्वन्धस्वरूपनिरूपणम् ११९ जातिनामनिधत्ताः अपि, यावत्-अनुभागनामनिधत्ता अपि, दण्डको यावत् वैमानिकानाम्, जीवाः खलु भदन्त ! किं जातिनामनिधत्तायुष्काः, यावत्अनुभागनामनिधत्तायुष्काः ? गौतम ! जातिनामनिधत्तायुष्का अपि, यावत्अनुभागनामनिधत्तायुष्का:-अपि, दण्डको यावत्-वैमानिकानाम् ! एवम् एते द्वादश दण्डकाः भणितव्याः,॥१२॥जीवाः खलु भदन्त ! कि जातिनामनिधत्ताः? जातिनाम निधत्तायुष्काः २, जीवः खलु भदन्त ! किं जातिनाम नियुक्ताः ३, जातिनामनियुक्तायुष्काः ४ जातिगोत्रनिधत्ताः ५, जातिगोत्र निधत्तायुष्काः ६, जातिगोत्रनियुक्ताः ७, जातिगोत्रनियुक्तायुष्काः ८, जाति (गोयमा) हे गौतम ! (जाइनामनिहत्ता वि जाव अणुभागनिहत्तावि) जीव जातिनाम निधत्तरूप भी हैं यावत् अनुभागनिधत्तरूप भी हैं। (दंडओ जाव वेमाणियाण) इसी प्रकारसे यावत् वैमानिकोंतक दण्डक जानना चाहिये। (जीवाणं भंते ! कि जाइनामनिहत्ताउया जाव अणुभागनामनिहत्ताउया) हे भदन्त ! जीव क्या जातिनामनिधत्तायुष्क हैं यावत् अनुभागनिधत्तायुष्क हैं ? (गोयमा) है गौतम ! (जाइनामनिहत्ताउया वि जाव अणुभागनामनिहत्ताउया वि) जीवजातिनामनिधतायुष्क भी हैं, यावत् अनुभागनामनिधत्तायुष्क भी हैं। (दंडओ जाव वेमाणियाणं) यह दण्डक यावत् वैमानिकों तक कहना चाहिये। (एवं एए दुवालसदंडगा भाणियव्वा) ये बारह दण्डक इस प्रकारसे कहना चाहिये (जीवा णं भंते ! किं जाइनामनिहत्ता१, जाइनाम निउत्ताउया २, जीवाणं भंते किं जाइनाम निहत्ता ३, जाइनाम निहत्ताउया ४, जाइगोयनिहत्ता५, जाइगोयनिहत्ताउया६, जाइगोयनिउत्ता७, जाइगोयनिउत्ताउया८, जाइणामगोयनिहत्ता९, जाइणामगोयअनुभागनाम निवत्त३५ ५५ छ. (दंडओ जाव वेमाणियाणं) मा प्रभारी माना सुधाना ६४४ सभावा. (जीवा णं भंते ! जाइनामनिहत्ताउया जाव अणुभागनामनिहत्ताउया ?) महन्त! ७ शु तिनाम निधत्तायुष्४ छ? यावत भनुमान- नियत्तायु४ छ ? (गोयमा !) गोतम ! (जाइनाम निहताउया वि जाव अणुभागनाम निहत्ताउया वि) । तिनाम निधत्तायुष्४ ५ डाय छ, यावत मनुभागनाम निधत्तायु०४ ५४ डाय? (दंडओ जाव वेमाणियाणं) વૈમાનિકે પર્યન્તના દંડકને અનુલક્ષીને આ આલાપક કહેવા જોઈએ. (जीवाणं भंते ! किं जाइनाम निहत्ता १, जाइनाम निहत्ताउया २, जीवाणं भंते ! कि जाइनाम निहत्ता ३, जाइनाम निउत्ताउया ४, जाइगोय निहत्ता ५, जाइ गोय निउत्ताउया ६, जाइगोयनिउत्ता ७, जाइगोयनिउत्ताउया ८, जाइणाम
શ્રી ભગવતી સૂત્ર : ૫