Book Title: Agam 05 Ang 05 Bhagvati Vyakhya Prajnapati Sutra Part 04 Stahanakvasi
Author(s): Madhukarmuni
Publisher: Agam Prakashan Samiti
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[व्याख्याप्रज्ञप्तिसूत्र ___ गोयमा ! सव्वत्थोवा अणंतपएसिया खंधा दव्वट्ठयाए, परमाणुपोग्गला दव्वट्ठयाए अणंतगुणा, संखेजपएसिया खंधा दव्वट्ठयाए संखेजगुणा, असंखेजपएसिया खंधा दव्वट्ठयाए असंखेजगुणा। पएसट्ठयाए-सव्वत्थोवा अणंतपएसिया खंधा पएसट्टयाए, परमाणुपोग्गला अपसट्टयाए अणंतगुणा, संखेजपएसिया खंधा पएसट्ठयाए संखेजगुणा, असंखेजपएसिया खंधा पएसट्ठयाए असंखेजगुणा। दव्वट्ठपएसट्ठाए सव्वत्थोवा अणंतपएसिया खंधा दव्वट्ठयाए, ते चेव पएसट्ठयाए अणंतगुणा, परमाणुपोग्गला दव्वट्ठअपएसट्ठयाए अणंतगुणा, संखेजपएसिया खंधा दव्वट्ठयाए संखेजगुणा, ते चेव पएसट्ठयाए संखेजगुणा, असंखेजपएसिया खंधा दव्वट्ठयाए असंखेजगुणा, ते चेव पएसट्टयाए असंखेजगुणा।
। [११८ प्र.] भगवन् ! परमाणु-पुद्गल, संख्यात-प्रदेशी, असंख्यात-प्रदेशी और अनन्त-प्रदेशी स्कन्धों में द्रव्यार्थरूप से, प्रदेशार्थरूप से तथा द्रव्यार्थ-प्रदेशार्थरूप से कौन-से पुद्गल-स्कन्ध किन पुद्गल-स्कन्धों से यावत् विशेषाधिक हैं।
[११८ उ.] गौतम ! द्रव्यार्थ रूप से सबसे अल्प अनन्तप्रदेशी स्कन्ध हैं, उनसे द्रव्यार्थ से परमाणुपुद्गल अनन्तगुणे हैं। उनसे असंख्यातप्रदेशी स्कन्ध संख्यातगुणे हैं, उनसे द्रव्यार्थरूप से असंख्यातप्रदेशी स्कन्ध असंख्यातगुणे हैं, प्रदेशार्थरूप से सबसे थोड़े अनन्तप्रदेशी स्कन्ध हैं। उनसे अप्रदेशार्थरूप से परमाणुपुद्गल अनन्तगुणे हैं। उनसे संख्यातप्रदेशी स्कन्ध प्रदेशार्थरूप से संख्यातगुणे हैं। उनसे असंख्यातप्रदेशीस्कन्ध प्रदेशार्थरूप से असंख्यात-गुणे हैं । द्रव्यार्थ-प्रदेशार्थरूप से—सबसे अल्प अनन्तप्रदेशी स्कन्ध द्रव्यार्थ से हैं । इनसे अनन्तप्रदेशी स्कन्ध प्रदेशार्थ से अनन्तगुण हैं। उनसे परमाणुपुद्गल द्रव्यार्थ-अप्रदेशार्थरूप से अनन्तगुण हैं । उनसे संख्यातप्रदेशी स्कन्ध द्रव्यार्थ से संख्यातगुण हैं। उनसे संख्यातप्रदेशी स्कन्ध प्रदेशार्थरूंप से संख्यातगुणे हैं। उनसे असंख्यातप्रदेशी स्कन्ध द्रव्यार्थ से असंख्यातगुणे है। उनसे असंख्यातप्रदेशी स्कन्ध प्रदेशार्थ से असंख्यातगुणे हैं।
विवेचन–परमाणु की अप्रदेशार्थता का आशय-प्रदेशार्थ के प्रकरण में परमाणु के लिए जो 'अप्रदेशार्थता' कही है, उसका आशय यह है कि परमाणु के प्रदेश नहीं होते। इसलिए अप्रदेशार्थरूप से परमाणु को अनन्तगुण कहा है। द्रव्य की विवक्षा में परमाणु द्रव्य है और प्रदेश की विवक्षा में उसके प्रदेश नहीं होने से अप्रदेश है। इस प्रकार परमाणु की द्रव्यार्थ-अप्रदेशार्थता कही है। एक-संख्येय-असंख्येय-प्रदेशी पुद्गलों की अवगाहना एवं स्थिति को लेकर अल्पबहुत्व
चर्चा
११९. एएसि णं भंते ! एगपएसोगाढाणं संखेजपएसोगाढाणं असंखेजपएसोगाढाण य पोग्गलाणं दव्वट्ठयाए पउसट्ठयाए दव्वट्ठपएसट्टयाए कयरे कयरेहितो जाव विसेसाहिया वा ?
गोयमा ! सव्वत्थोवा एगपएसोगाढा पोग्गला दव्वट्ठयाए, संखेजपएसोगाढा पोग्गला दव्वट्ठयाए संखेजगुणा, असंखेजपएसोगाढा पोग्गला दबट्ठयाए असंखेजगुणा। पएसट्ठयाए-सव्वत्थोवा
१. भगवती. अ. वृत्ति. पत्र ८८०