Book Title: Kasaypahudam Part 12
Author(s): Gundharacharya, Fulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
Publisher: Bharatvarshiya Digambar Jain Sangh
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पृ. सं.
६
सामा
६५
( ४६ ) .
पृ. सं. कषायोदयस्थानोंका अल्पबहुत्व
६२ पांचवीं गाथाका विस्तृत विवेचन ८५-९१ उक्त दोनों वर्गणाओं के साथ तीन अनुयोग उक्त गाथाके सूचनासूत्र होनका निर्देश द्वारोंके अनुगमको सूचना
६३ उस द्वारा आठ अनुयोगद्वारोंकी सूचनाका कालापयोग वर्गणाको अपेक्षा प्ररूपणानुगम ६३ निर्देश प्रमाणानुगम
६३ आठ अनुयोगद्वारों के नामोंकी गाथाके पदोंके अल्पबहुत्वानुगमके दो भेदोंका निर्देशपूर्वक
द्वारा सूचनाका निर्देश खुलासा
६३ कषायोंमें उपयुक्त हुए जीवोंका आठ अनुयोग भावोपयोगवर्गणाओंकी अपेक्षा प्ररूपणानुगम
द्वारोंके अलबम्बन द्वारा १३ मार्गणाओंप्रमाणानुगम
में अनुसन्धान करनेको सूचना व खुलासा ८८ दोनों प्रकारका अल्पबहुत्व
प्रकृतमें महादण्डक करनेकी सूचना चौथी गाथाका विस्तृत विवेचन ६५-८४
छठी गाथाका विस्तृत वि० ९१-१०८ इस गाथाके व्याख्यानमें दो प्रकारके उप
जो-जो जीव जिस कषायमें उपयुक्त है वे देशोंके पाये जानेका निर्देश
पहले क्या उसी कषायमें उपयुक्त थे अप्रवाहमान उपदेशके अनुसार कषाय और
इस पृच्छाके अनुसार विचार अनुभाग एक ही हैं इसका खुलासा
वर्तमानमें मानमें उपयुक्त हए जीवोंके मानकौन गति एक कालपें एक, दो, तीन या
की अपेक्षा अतीत कालके तीन भेद चार कषायोंमें उपयुक्त होती है इन __करके विचार पृच्छाओंके अनुसार विचार
उन्हींके क्रोधकी अपेक्षा अतीत कालके तीन नरक गतिमें उक्त पृच्छाके अनुसार विचार ६९ भेद करके विचार . नरकगतिके समानदेवगतिमें जाननेकी सूचना
उन्हींके माया व लोभकी अपेक्षा अतीत काल प्रवाहमान उपदेशके अनुसार उक्त गाथाका
के तीन भेद करके विचार विचार
वर्तमानमें मानोपयुक्त जीवोंका उक्त काल प्रवाह्यमान उपदेशका स्वरूप प्रकृतमें आर्यमंक्षका उपदेश अप्रवाह्यमान
बारह प्रकार है इसकी सूचना और नागहस्तिका उपदेश प्रवाहमान
वर्तमानमें क्रोधमें उपयुक्त हए जीवोंका उक्त इसका निर्देश
काल ग्यारह प्रकारका होता है इसका कषाय और अनुभागमें भेदका निर्देश
खुलासा तदनुसार कालशब्दके अर्थको सूचना
वर्तमानमें मायामें उपयुक्त हुए जीवोंका उक्त अतः एक कालका अर्थ एक कषायोपयोगाद्धा
काल दस प्रकारका होता है इसका
खुलासा . स्थान है यह सूचना
वर्तमानमें लोभमें उपयुक्त हए जीवोंका उक्त इसके अनुसार पृच्छाओंका निर्देश
७३
काल नौ प्रकारका होता है इसका एक-एक कषायोदय स्थानमें प्रसोंका प्रमाण निर्देश
खुलासा एक-एक कषायोपयोगाद्धास्थानमें त्रसोंके
उक्त सब कालोंके योगकी सूचना प्रमाणका निर्देश
प्रकृतमें १२ स्वस्थान पद और उनकी अपेक्षा उक्त कथनके उपसंहारका निर्देश
अल्बबहुत्वका निर्देश
१०० उक्त कथनके बाद नौ पदों द्वारा स्वस्थान
आगे ४२ पद अल्पबहत्वकी सूचना अल्पबहुत्वका निर्देश
७६ सातवीं गाथाका विस्तृत वि. १०८-१४८ छत्तीस पदों द्वारा परस्थान अल्प बहुत्वका उक्त गाथाके अनुसार दो अर्थों को सूचना १०८ निर्देश ८२ प्रथम अर्थको प्ररूपणा
१०९
७१