Book Title: Kasaypahudam Part 12
Author(s): Gundharacharya, Fulchandra Jain Shastri, Kailashchandra Shastri
Publisher: Bharatvarshiya Digambar Jain Sangh
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जयधवलासहिदे कसायपाहुडे
[ उवजोगो ७
९८१. केत्तिममेत्तो विसेसो ? तप्पा ओग्गासंखेजरूवमेत्तो । किं कारणं १ असंखेजासु परिवाडी कोह- माणागरिसाणमवद्विदसरूवेण गदासु तदो सई माणा गरिसेहिंतो कोहाग रिसाणमदिरेयभावो होदि ति समणंतरमेव परूवियत्तादो । तदो माणागरसाणमसंखे० भागमेत्तो एत्थ विसेसो त्ति घेत्तव्वं ३३ ।
* मायागरिसा विसेसाहिया ।
८२. केत्तियमेत्तो विसेसो ? कोहागरिसाणमसंखे ० भागमेत्तो ३५ । * लोभागरिसा विसेसाहिया ।
९ ८३. केत्तियमेत्तेण ? मायाग रिसाणमसंखे ० भागमेत्तेण ४४ ।
एवं गाहाच्छस्स अत्थे विहासिय समत्ते पढमगाहा समत्ता भवदि ।
४२
$ ८१. शंका – विशेषका प्रमाण कितना है ?
समाधान-तत्प्रायोग्य असंख्यातवें भागमात्र हैं, क्योंकि क्रोध और मानकषायके परिवर्तनवारोंकी अवस्थितरूपसे असंख्यात परिपाटियोंके जानेपर तदन्तर मानके परिवर्तनवारोंसे क्रोधके परिवर्तनवारोंकी एक वार अधिकता होती है यह भले प्रकार पहले ही कथन कर आये हैं । इसलिए मानकषायके परिवर्तनवारोंका असंख्यातवां भाग यहाँ पर विशेष ग्रहण करना चाहिए ३३ |
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विशेषार्थ – अंक संदृष्टिमें विशेषका प्रमाण १ अंक स्वीकार करने पर क्रोध कषायके कुल परिवर्तनवार ३३ हुए, क्योंकि पूर्व में मानकषायके परिवर्तनवारोंकी संख्या ३२ दे आये हैं ।
* उनसे मायाकषायके परिवतनवार विशेष अधिक हैं ।
$ ८२. शंका - विशेषका प्रमाण कितना है ?
समाधान — क्रोधकषाय के परिवर्तनवारोंका असंख्यातवां भाग विशेषका प्रमाण है ३५ । विशेषार्थ — पूर्व में अंकसंदृष्टिकी अपेक्षा क्रोधकषायके परिवर्तनवार ३३ बतला आये
हैं । उनका अंख्यातवाँ भाग २ अंक प्रमाण स्वीकार कर लेनेपर मायाकषाय के परिवर्तनवारोंकी कुल संख्या ३५ प्राप्त होती है ।
* उनसे लोभकषायके परिवर्तनवार विशेष अधिक हैं ।
$ ८३. शंका - कितने मात्र से अधिक हैं ?
समाधान
- मायाकषाय के परिवर्तनवारोंके असंख्यातवें भागमात्रसे अधिक हैं ४४ । विशेषार्थ — पूर्व में अंकसंदृष्टिमें मायाकषायके परिवर्तनवार ३५ बतला आये हैं । उनका असंख्यातवां भाग ९ अंक प्रमाण स्वीकार करनेपर लोभकषायके कुल परिवर्तनवारोंकी संख्या ४४ प्राप्त होती है ।
इस प्रकार प्रथम गाथाके उत्तरार्धका व्याख्यान समाप्त होने पर प्रथम गाथाका व्याख्यान समाप्त हुआ ।