Book Title: Jinkrupachandrasurishwar Charitram
Author(s): Jaysagarsuri
Publisher: Jaysagarsuri
View full book text
________________
Shri Mahavir Jan Aradhana Kendra
246456
www.kobatirth.org.
2
( तामरसवृत्तम् ) -- प्रणत-नृपाल - शिरोमणि-दीप्रः, प्रथितसुवाचक आप्तयशस्कः । समभवदस्य गुरोरिह शिष्यः, सुमतिविशालगणी प्रभविष्णुः ॥ १५२ ॥ ( उपजातिः ) - समुद्रसोमः समभूदमुष्यो- -- पाध्याय उद्यत्सुयशोगरीयान् । गणी जगत्यामुदित-प्रताप, शिष्यो यशस्यः प्रभया पतङ्गः ।। १५३ ।। श्रीयुक्ति युक्ताऽमृतनामधेयो, ह्यन्तेसदस्याऽभवदेष जिष्णुः । सद्वाचकोऽशेष - कषाय-मुक्तो, गणी प्रविद्वाञ्जित - वादिवृन्दः ॥ १५४ ॥ ( शार्दूलविक्रीडितम् ) -- कालैकाङ्कनिशांकर-प्रमितिके वर्षेऽजनिष्टाऽसुकः, तर्काऽग्नि-ग्रह - भूमिते च जगृहे दीक्षां परामार्हतीम् । नेत्राऽऽङ्क-महीमिते च धवले पक्षे सहस्ये शुभे, पक्षान्ते सुतिथौ समस्त-सुजनाऽऽरब्धे सुचारूत्सवे ॥ १५५ ॥ श्रीमच्छ्रीगुरुवर्यकस्य जिनयुक्चारित्रसूरेः करात् प्रापत्सूरिपदं कुशाग्रधिषणः श्रीमान् प्रविद्वान्महान् । सैष श्री जिनकीर्तिसूरिरपरः श्रीमजिनाऽऽदिः कृपाचन्द्रः सागर आविभाति सकले भूमण्डले सद्गुरुः ॥ १५६ ॥ श्रीमन्मोहमयीपुरे जिनयुतचारित्रसूरीश्वरस्तुभ्यं सद्गुणसद्मने सुविदुषामग्र्याय मेधाविने । प्रादात्सूरिपदं प्रसन्नहृदयश्चाऽऽचार्यतामध्य सौ, गच्छेऽस्मिन् सकले त्वमेव गुरुतां धत्सेऽधुना सर्वथा ।। १५७ || ( उपजातिः ) - गच्छे प्रभावी पुरुषो यतस्त्वं ज्यायानपि त्वं बहुविद्ययाऽऽन्यः । गीतार्थ - कत्वादपि तस्य पट्ट-मलङ्करिष्णुर्भविता त्वमेव ॥ १५८॥ वालोत्तरायां पुरि नेत्र-नाग- नवेन्दु-वर्षे सह शिष्यवर्गैः । प्रावृद चतुर्मासमिह न्यवात्सीः, नॄन् पाययन् धर्म्यकथामृतानि ॥ १५९ ॥ ( आर्या ) - तत्र हि भावहर्षीय शाखोपाध्याय - श्रीमदनाsssयः । निज- गुरुफर्तेन्द्रसूरि-स्थाने त्वामेव सम्मेने ॥ १६० ॥ श्रीजिनफतेन्द्रसूरेः, पट्टाऽऽलङ्कारि-जिनलब्धिसूरिः । तावकीन - करकमलैः, क्रियोद्धृतिमचीकरद्यत्नात् ।। १६१ ॥ ( उपजातिः ) - जाते त्वदीये अमुके विनेये, मुमुक्षुवर्ये गुणवद्
For Private And Personal Use Only
Acharya Shri Kallassagarsuri Gyanmandir

Page Navigation
1 ... 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 143 144