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सोमसेनमहारकादिराचेत
चैत्यालयप्रवेशमंत्र। ॐ ही अहं निःसही निःसही रत्नत्रयपुरस्सराय विद्यामण्डलनिवेशनाय समयाय निःसही जिनालयं --प्रविशमि स्वाहा ।
जिनालय प्रवेशः।इसे पढ़कर जिनालयमें प्रवेश करे ।
गंधोदकसेंचनमंत्र। ॐ ही पविलं गन्धोदकं शिरसि परिषचयामि स्वाहा । गन्धोदकपरिषेचनम् । इस मंत्रको पढ़कर शिरपर गन्धोदक छिड़के। ..
. नमस्कारविधि। उर्ध्वाधो वस्त्रयुक्तः सन् स भूमौ श्रीजिनाधिपम् ।
नमेत्साष्टांगविधिना पञ्चांगविधिनाऽथवा ॥ ६२ ॥ धोती-दुपट्टेसे युक्त वह श्रावक, जमीनपर, श्री जिनदेवको साष्टांग अथवा पंचांग नमस्कार करे ॥ ६२॥
पश्वर्द्धशय्यया यद्वा प्रणामः क्रियते बुधैः ।
भक्त्या युक्त्या स्थलं दृष्ट्वा यथावकाशकं भवेत् ॥ ६३ ॥ अथवा पश्वर्ध शय्यासे, भक्तिपूर्वक योग्य रीतिसे वह बुद्धिमान जिनदेवको प्रणाम करे । सो जैसा अवकाश हो वैसा स्थान देखकर नमस्कार करे ॥६३९.
अष्टांग नमस्कार। हस्तौ पादौ शिरश्चोरः कपोलयुगलं तथा ।
अष्टांगानि नमस्कारे प्रोक्तानि श्रीजिनागमे ॥ ६४ ॥ दोनों हाथ, दोनों पैर, शिर, छाती, और दोनों कपोल ये आठ अंग नमस्कार करनेमें, जिनागममें कहे गये है। अर्थात् इन आठ अंगोंसे नमस्कार करे । भावार्थ-इन आठ अंगोंको जमीनपर टेक कर नमस्कार करनेको साष्टांग नमस्कार करते हैं ॥ ६४॥ . .