Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 16
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir गाहा-७० ॥७०॥ ॥७१॥ १७२॥ १९७३॥ ७४|| 11७५ ७६॥ ॥७७३ ॥७८॥ (७०) वालेहि निष्फन्नं यालयमोण्णोष्ट्रियादिगं होति वक्केहि तुनिष्फन्नं वागज सणवक्कमादीगं चम्मंचम्मपडीए पट्टो उण होतिमोमुणेयव्यो पालत्योग्गहपट्टा तिरीउपट्टोय एमादी पम्हज हंसगढमादि अहवा कप्पासियं मुणेयव्वं कोसेअपमादी जं किमियंत पच्चति छुमति वंसकरिल्लो कंपिवि देसंमि तरुणते घडए वह तो पूरयतीतं घडयं चिप्पिए तमि संकोहेऊण कणयं तेहिं तप्हा उकिज्जए सुतं तेण व्यंजंवत्यं भण्णति तं धातुतं नाम दुगसंजोगादीहिं एएसिं चेव वालयादीणं तमीसयंति मण्णतिजह ऊभक्खोम्हियादीयं वत्तव्व चसद्देणं भेयपभेदा उजेत्तिया तेसिं सुद्धेहेतेहिं तू उवसंपत्रोह सचरिती । अहवा पंचविहातो उयसंपयहोतिमा समासेणं सय सहदरखे खेत्ते मग्गे विनए य बोद्धव्वा । अहवा तिविहुवसंपय नाणे तहसणे चरितेय चरितं च कतिविहं तू पंचविहं तं इमं होति सामइयं छेदुषवादणं च परिहारसुद्धियंचेव तत्तीय सुहमरागंअहखायं चेय योद्धव्यं अहवा वयसमितादी सराग तह वीतरागमहवावि खाइगखओवसमितं उपसमियं वा मवेतिविहं भेदा उचसदेणं होति इमे नाणदंसणाणंतु खाइय खओक्समियं दुविहं नाणं मुनेयवं खइयं केवलनाणं खओवसमियाई सेसनाणाई खइयं खओवसमियं उयप्तमियंदसणं तिविहं कस्सेतंचारित्तं नियंठ तहसंजयाण ते कतिहा पंच नियंठापंचेव संजया होतिमे कमसो पुलए बउस कुसीले होति नियंठे तहा सिणाए य एएस एककेक्को पंचविहो होति बोद्धब्बो नाणपुलाए तहदसणे य चारित लिंग अहसुहुमे एसो पंचविहो खलु पुलयनियंठो मुणेयब्वो आभोगमणाभोगे तह संवुडऽसंवुडे अहासुहुमे एसो पंचविहो तू बउसणियंठो मुणेयव्वो (८७) दुविहो होति कुसीलो पडिसेवणया तहा कसाए य एक्केको पंचविहो परूवणा तेसिमा होति ॥७९॥ 11८० ॥८॥ ॥८२॥ ॥८३॥ ॥८४|| १८५॥ ॥८६॥ ॥८७॥ For Private And Personal Use Only

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