Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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१४
पंजडप्पो - (८८)
11८८॥
11८९॥
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॥९
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॥१२॥
॥१३॥
॥९४||
॥९५||
(46) नाणपडिसेवणाए दंसण चरणेय लिंग अहसुहुने
पडिसेवणाकसीलो पंचविहो एस नायब्बो नाण कसायकुसीले देसण चरणे यलिंग अहसुहुमो एस कसायकुसीलो पंचविहो तू मुणेयव्यो पढमगसमयनियंठे अपढम चरिमे व तह अचरिमेय
तत्तो य अहासुहसे पंचमए होति नायव्ये (९१) पंचविहे सिणाएतू अच्छची तह असबले अकमंसे
संसुद्धनाणदंसणधरे य होती चउत्येतु (९२) अरहा जिने य केवलि अपरिस्सायी य होति पंचमए
एते पंच विकप्पा सिणायस्स तु होति नायव्वा पंचविह संजतावी सामाइय छेउवट्ट परिहारे सुहमेय आहखाएएककेक्के ते पुणो दुविहा इत्तरिए आवकही सामाइयसंजए भवे दुविहो दुविहे य छेउवट्टो सऽतियारे निरतियारे य परिहारविसुद्धीए निविप्रमाणे तहेवनिचिट्टे दुविहे य सुहमरागे संकिस्संते विसुझंते ल अहखाओविय दुविहोय छेउबट्टो त्यो चेव केवलीचेव
एसो तु संजतो खलु पंचविहो होति नायव्योल (१७) सामाइयमि उकए चाउजामं अनुत्तरंधम्म
तिविहेण फासयंतो सामाइयसंजतोस खलु छेतूण तुपरियागं पोराणं तो ठवेति अप्पाणं धम्मम्मि पंचजामे छेओवट्ठाणो स खलु परिहरति जो विसुद्धं पंचवामं अनुत्तरं धम्म
तिविहेण फासयंतो परिहारियसंजतो स खलु (१००) लोभमणुंवेदितोजो खलु उवसापओ व खवओवा
सो सुहमसंपराओ अहखाया ऊणओ किंचि (१०१) उवसंते खीणम्मि व जो खलु कम्पप्मि मोहणिजम्मि
छउमत्थो व जिनो वा अहखाओ संजतो स खलु (१०२) एतेसि समोतारो दुविहो सट्टाण तह परद्वाणे
वोच्छामि आनुपुब्बि जोजत्य समोयरति तेसि (१०३) जहणुवसंपञ्जणता सव्वेसिं चेव पुछिपव्वा उ
याकरण जहाकमसो तैसि इणमो उवोच्छामि (१०४) पुलगो तु पुलागतं जहमाणो जहइ सो पुलागतं
उवसंपन्जे असंजम अहवावि कसायसीलं तु। (१०५) बउसो उ बउस्सतं जहती पडिसेवणं कसायं वा
संजमऽसंजम अस्संजमंच पडिवाती सो तु
॥९॥
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(९८)
॥९८॥
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॥१०२॥
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