Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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(३०४) दूसेति सेसए वा सो दुह आसित्तो तह य तूसित्तो सादच्चो आसित्तो अणवञ्चो होति ऊसित्तो (३०५) उवद्याओविय दुविहो वेदे य तहेव होति उपकरणे वेदोवघायपंडो इणमो तहियं मुणेयत्वो (३०६) पुव्विं दुचिण्णाणं कम्पाणं असुहफलविवागाणं उदया हम्पति वेदो जीवाणं पावकम्माणं (३०७) जह हेमकुमारो तू इंदमहे बालियानिमित्तेणं
मुच्छिय गिद्धो अतिसेवणेण वेदोवघात मतो ॥ ३३ (३०८) एयस्स विभास इमा जह एगो रायपुत्त वण्णेणं तवियवरहेमसरिसो तो से नामं कतं हेमो (३०९) सो अन्नदा कदाई इंदमहे इंदठाणपत्ताओ नगरस्स बालियाओ पुप्फादीहत्य दवणं ( ३१०) पुच्छति सेवगपुरिसे कि एया आगता उ इहइंति ते बिंती सोहग्गं मग्गंतेता वरत्थीओ
(३११) तो बेई एयासि इंदेण वरो हु दिण्ण अहमेव धेत्तूणं ता तेणं छूढा अंतेउरे सव्या
(३१२) तो नागरगा रण्णो उवद्विता मोयवेह एताउ तो बेति मज्झ पुत्तो किं जामाता न रुच्चे मे ( ३१३) तो तासु अतिपसत्तस्स तस्स निग्गलियसव्वबीयस्स वेदोवधाती जातो सागारीयं न उद्वेति
( ३१४ ) तो ताहिं रूसियाहिं सो अद्दागेहिं घातितो ताहे वेदोवघातपंडो एसोऽभिहितो समासेण (३१५) उवहत उवगरणमी सेखातर भूणियानिमित्तेणं तो कविलगस्स वेदो ततिओ जातो दुरहियासो ( ३१६) उवहयउवगरणम्मी एवं होजा नपुंसवेदो उ दोसा स वेदुदिणं धारेतुं न चयइ नायमिणं (३१७ ) जह पढमपाउसम्मी गोणी धातो तु हरियगतणस्स अनुमति कोविंदावणं दुब्मिगंधीयं
( ३१८) एवं तु केइ पुरिसा भोत्तूर्ण भोयणं पतिविसिद्धं ताव न भवति तुट्टा जाव न पडिसेविओ वेदो ( ३१९ ) लक्खणदूसियउयधायपंडगं तिविहमेव जो दिक्खे पच्छित्त तिसुवि मूलं दोसा तहियं इमे होति
(१२० ) तरुणादीहिं सह गओ चरितसंदिणी करे विकहा इत्यिकहाउ कहित्ता तासि अवण्णं पगासेइ (३२१) समलं आविलगंधिं खेदो य न ताणि आसए होति सागारियं निरिक्खइ मलित्तु इत्येहिं जिग्घइ य
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पंचकण (३०४)
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