Book Title: Agam 38B Panchkappabhasa Chheysutt 05B
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
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पंचवप्पो - (१०२१)
॥१०२१॥
|१०२२॥
॥१०२३॥
॥१०२४॥
॥१०२५॥
॥१०२६॥
॥१०२७॥
॥१०२८॥
॥१०२९||
(१०२१) दूरेण कुतित्यीए वझेंती एसणं च पत्रवए
कुलडाइत्वीचरियाइयाय वजंति धरणट्ठा (१०२२) वजेज अगायतणा नाणादीणं चजत्य उयघातो
एवं जहसंभवं तं करेज जयणं निवसमाणो (७०२३) एसो तुखेतकपो उस्सग्गववायसंजुतो भणितो
एतो उकालकप बोच्छामिजहक्कमेणंतु (१०२४) मासं पोसवणा वुद्धावास परियायकप्पो य
उस्सग पडिक्कमणे कितिकम्मे देव पडिलेहा (१०२५) सज्झायझाणभिक्खे मत्तावेयारेतहेव सज्झाए
निक्खमणे य पवेसे एसा खलु कालकप्पविही (१०२५) पुव्वंतुमासकप्पो परूवितो सोनिसीहणामम्मि
नवरिंतु इहारुवणा वणिजति मासे अतिरेगे (१०२०) मासातीतं वसतो वसहीए तीऍ चेवमासलहुं
तह भिक्खायरियाए वीपारे तह बियारे य (१०२८) परिसाडी संघारे सव्येसेतेसु होति मासलहुं
दत्तारिय उवघाता संयारे अपरिसाडिम्मि (१०२९) पंचते मासिया खलु चाउम्मासंघ मिलिय सव्येते
नव मास मासऽतीए उडुबद्धे संवसंतस्स (१०३०) हुमा तु वासऽतीते वसहीते सेस होति तेचेव
भिक्खायरियादीसुं जे भणिता मासऽतीतम्मि (१०३१) आरोवणा उ एसा कालदुवे वण्णिता अर्णिताणं
एत्तो पञोसवणासामायारिं पयक्खामि (१०३२) पजहेत्तु यासजोगं बहिया अच्छति वासुदिक्खंता
जे अंतरातुगिण्हे तं सव्वं तेसि खेतीणं । (१०३३) अह पुण वच्चंताणं वासाजोग्गं तु अंतरा वासं
आरद्धडहरगामे न पहुप्रति एगयसही य (१०३४) अण्णोण्णसुट्टिताणं बहवो सागारियन तीरंति
परिहरितु ताहे वज्जे गुरुसागरियं नवरि एक्कं (१०३५) अवसेस समायारी पजोसवणाए वण्णिय निसीहे
सभेव निरबसेसा इमम्मिदारम्मि नायव्या (१०३५) युड्ढस्स तुजो वासोयड्ढी व गतो तुकारणेणं तु
एसो तुवुड्दवासो तस्स तु कालो इमो होति (१०३७) अंतोमुत्त कालं जहण्णमुक्कोस पुवकोडीतु
मोतुं मिहिपरियागंजंजस्स व आउगं तित्ये (१०३८) मरणे अंतमुहत्तो देसूणा पुवकोडि कह होना
जो तरुणो प्रिय समणो असमत्यो विहरितुंजातो
॥१०३०॥
॥१०३१॥
।।१०३२॥
॥१०३३॥
॥१०३४॥
॥१०३५॥
||१०३६॥
॥१०३७॥
||१०३८॥
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